राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क

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वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क स्टिचिंग सर्विसेज

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) सीमाओं से रहित ज्ञान आधारित समाज बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। पांच फरवरी को एनकेएन की वेबसाइट और लोगो जारी होते ही एनकेएन के द्वार पूरे समुदाय के लिए खुल गए। इससे ज्ञान आधारित समुदाय और समस्त मानवजाति को अभूतपूर्व लाभ होगा। इस ज्ञान नेटवर्क का उद्देश्य आवश्यक शोध सुविधाओं वाले गुणवत्तापूर्ण संस्थान बनाना तथा उच्च प्रशिक्षणप्राप्त पेशेवरों का समूह तैयार करना है, जो देश की कोशिश का महत्वपूर्ण अंग है। एनकेएन अत्याधुनिक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क है। यह भारत की सूचना अवसंचना के विकास को सुगम बनाएगा, अनुसंधान में तेजी लाएगा और अगली पीढ़ी के एप्लीकेशंस और सेवाएं तैयार करेगा। एनकेएन की परिकल्पना उच्च उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण सेवा, सुरक्षा और विश्वसनीयता उपलब्ध कराने के लिए की गई है।

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) योजना का लक्ष्य सशक्त और सुदृढ़ आंतरिक भारतीय नेटवर्क स्थापित करना है, जो सुरक्षित और विश्वसनीय कनेक्टीविटी में सक्षम होगा। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी देखभाल, कृषि और शासन से सम्बद्ध सभी हितधारकों को समान मंच पर लाएगा।

एनकेएन का विज़न और उत्साह के साथ इस्तेमाल करते हुए सभी ऊर्जावान संस्थान सूचना और ज्ञान तक पहुंच बनाने के लिए स्थान और समय की सीमाओं को पार करने में सक्षम होंगे और अपने तथा समाज के लिए इससे जुड़े लाभ हासिल कर सकेंगे। एनकेएन की स्थापना 1500 से ज्यादा संस्थानों से सम्पर्क के साथ देश में ज्ञान की क्रांति लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एनकेएन का मकसद हाई बैंडविड्थ /लो बैटरी नेटवर्क के साथ देश के समस्त ज्ञान और शोध संस्थानों को जोड़ना है।

वैश्विक स्तर पर प्रमुख शोध एवं नवरचना, बहुविषयी और सहयोगपूर्ण परिप्रेक्ष्य का रुख कर रहे हैं और उनके लिए महत्वपूर्ण संचार एवं संगणना क्षमता की जरूरत पड़ती है। भारत में, एनकेएन का लक्ष्य इस प्रकार के परिप्रेक्ष्य में बदलाव के लिए अपनी मल्टी-गीगाबाइट क्षमता के साथ देशभर के सभी विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं, स्वास्थ्य की देखभाल और कृषि से सम्बद्ध संस्थानों को आपस में जोड़ना है। परमाणु, अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान क्षेत्रों की प्रमुख मिशन आधारित एजेंसियां भी एनकेएन का अंग हैं। सूचना और जानकारी का प्रवाह संभव बनाते हुए, नेटवर्क पहुंच (एक्सेस) के महत्वपूर्ण मसले का हल करता है और शोध से सम्बद्ध देश के प्रयासों को समृद्ध करने के लिए सहयोग का नया परिप्रेक्ष्य तैयार करता है। नेटवर्क की परिकल्पना सकारात्मक रुख पर आधारित है जिसमें भविष्य की जरूरतों तथा ऐसी नई संभावानाओं को ध्यान में रखा गया है जो इस अवसंरचना में इस्तेमाल और समाविष्ट लाभ के आधार पर पनप सकती हैं। इससे ज्ञान की क्रांति आएगी, जो समाज में परिवर्तन का वाहक और समावेशी विकास को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगी।

पृष्ठभूमि[सम्पादन]

एनकेएन की स्थापना की योजना पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग (एनकेसी) में विशेषज्ञों, संभावित यूजर्स, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थानों सहित मुख्य हितधारकों के साथ सहयोगपूर्ण अनुबंध के बाद, विचार-विमर्श किया गया और फिर उसे अंतिम रूप दिया गया। इस विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप एक ऐसा नेटवर्क तैयार करने के उत्कृष्ट दृष्टिकोण पर सर्वसम्मति बन सकी, जो सभी क्षेत्रों के लिए एकीकृत आधार बन सके।

भारत सरकार ने एनकेएन की स्थापना के लिए भारत सरकार के पीएसए की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) का गठन किया। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र का चयन एनकेएन की अनुपालन एजेंसी के रूप में किया गया। एनकेएन का विज़न एचएलसी द्वारा गठित प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति (टीएसी) द्वारा बनाई गई कार्य योजना में परिलक्षित हुआ।

कैबिनेट ने 5990 करोड़ रुपये की लागत वाले एनकेएन को मार्च 2010 में मंजूरी दी। एनकेएन का शुरूआती चरण राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किए जाने का संकेत है।

मुख्य बिंदु[सम्पादन]

एनकेएन की संरचना की परिकल्पना विश्वसनीयता, उपलब्धता और मापनीयता के लिए की गई है। इस नेटवर्क में अल्ट्रा-हाई स्पीड कोर है जो मल्टीपल 2.5/10जी से शुरू होता है और 40/100 गीगाबाइट प्रति सेकेंड (जीबीपीएस) तक जाता है। इस कोर के साथ डिस्ट्रीब्यूशन लेयर है, जो सभी जिलों को समुचित गति से कवर करती है।

दूसरे छोर पर भागीदार संस्थान एनकेएन की बदौलत बिना किसी रुकावट के एनकेएन के साथ गीगाबाइट स्पीड से जुड़ सकेगा। एनकेएन, ज्ञान आधारित समाज विकसित करने के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना हो सकता है। एनकेएन एक महत्वपूर्ण कदम है जो देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को महत्वपूर्ण एवं उभरते क्षेत्रों में मानव विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने में सक्षम बनाएगा -

  • हाई-स्पीड बैकबोन कनेक्टीविटी की स्थापना करना, जो ज्ञान और सूचना के आदान-प्रदान में सक्षम बनाए।
  • सहयोगपूर्ण अनुसंधान, विकास और नवरचना संभव बनाना।
  • अभियांत्रिकी, विज्ञान, चिकित्सा आदि जैसे विशिष्‍ट क्षेत्रों में उच्च दूरस्थ शिक्षा में सहयोग करना।
  • ई-गवर्नेंस के लिए अल्ट्रा हाई स्पीड बैकबोन सुगम बनाना।
  • अनुसंधान, शिक्षा, स्वास्थ्य, वाणिज्य एवं प्रशासन के क्षेत्र में विभिन्न वर्गीय नेटवर्क्स का एकीकरण सम्भव बनाना।

कनेक्टीविटी[सम्पादन]

नेटवर्क के बैकबोन की शुरुआत 2.5 जीबीपीएस से है और भारत भर में 7 सुपरकोर स्थानों (पूरी तरह परस्पर संबद्ध) के बीच उत्तरोत्तर बढ़ते हुए 10 जीबीपीएस कनेक्टीविटी पर है। यह नेटवर्क आगे विविध 2.5/10 जीबीपीएस के साथ 26 मुख्य स्थानों पर आंशिक तौर पर पास्परिक संबद्ध कनेक्टीविटी के साथ सुपरकोर स्थानों पर फैला है। डिस्ट्रीब्यूशन लेयर पूरे देश को 2.5/10 जीबीपीएस की स्पीड के विविध लिंक्स का इस्तेमाल करते हुए नेटवर्क के मुख्य हिस्से से जोड़ती है। उपभोक्ताओं को 1 जीबीपीएस की स्पीड से कनेक्ट किया जा रहा है।

नेटवर्क की संरचना और प्रशासन की संरचना यूजर्स को डिस्ट्रीब्यूशन लेयर के साथ कनेक्ट होने के भी विकल्प देती है। एनकेएन विशेष महत्व वाले समूहों के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क्स (वीपीएन) की रचना भी संभव बनाता है। एनकेएन वैश्विक सहयोगपूर्ण अनुसंधान के लिए अपने यूजर्स को अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टीविटी उपलब्ध कराता है। वर्तमान में एनकेएन ट्रांस यूरेशिया इंफार्मेशन नेटवर्क (टीईआईएन 3)के साथ जुड़ा हुआ है। ग्लोबल रिंग नेटवर्क फॉर एडवांस एप्लीकेशंस डेवलपमेंट (जीएलओआरआईएडी) के साथ भी इसी तरह की कनेक्टीविटी बनाने की योजना है।

उपयोग[सम्पादन]

देशव्यापी वर्चुअल क्लासरूम[सम्पादन]

एनकेएन प्रभावशाली दूरस्थ शिक्षा प्रदान करने का एक ऐसा मंच है जहां शिक्षक और छात्र कंप्यूटर के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। भारत जैसे देश में यह खासतौर पर महत्वपूर्ण है जहां भौगोलिक, बुनियादी ढांचे की कमी आदि जैसे कारणों की वजह से शिक्षा तक पहुंच सीमित है। यह नेटवर्क विभिन्न संस्थानों के बीच सूचना मसलन कक्षाओं के व्याख्यानों, प्रस्तुतियों और हैंडआउट्स के आदान-प्रदान में सक्षम बनाता है।

सहयोगपूर्ण अनुसंधान[सम्पादन]

एनकेएन जीएलओआरआईएडी, टीईआईएन3, जीएआरयूडीए, सीईआरएन जैसी विभिन्न इकाइयों के अनुसंधानकर्ताओं के बीच सहयोग संभव बनाता है। एनकेएन वैज्ञानिक डाटाबेस के आदान-प्रदान और उच्च अनुसंधान सुविधाओं तक एक्सेस भी संभव बनाता है।

वर्चुअल लाइब्रेरी[सम्पादन]

वर्चुअल लाइब्रेरी में विभिन्न संस्थानों में पत्रिकाओं, पुस्तकों और शोध पत्रों के आदान-प्रदान होता है। एनकेएन के लिए यह स्वाभाविक एप्लीकेशन है।

संगणना संसाधनों का आदान-प्रदान[सम्पादन]

राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक उत्पादकता और विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में आगे बढ़ने के लिए तेज गति से संगणना महत्वपूर्ण हैं। नेटवर्क बड़ी तादाद में संस्थानों को मौसम की निगरानी, भूकम्प अभियांत्रिकी और कंप्यूटर के इस्तेमाल वाले अन्य अहम क्षेत्रों को उच्च अनुसंधान के लिए सक्षम बनाता है।

ग्रिड कंप्यूटिंग[सम्पादन]

एनकेएन में हाई बैंडविड्थ को लो लेटेंसी के साथ संचालित करने और ग्रिड कंप्यूटिंग के आवरण का प्रावधान करने की क्षमता होती है। जलवायु परिवर्तन/धरती का बढ़ता तापमान, लार्ज हैड्रॉन कोलिडर (एलएचसी) और आईटीईआर जैसी विज्ञान परियोजनाएं कुछ ग्रिड आधारित एप्लीकेशंस हैं। एनकेएन ऐसी बहुत से नवीन एप्लीकेशंस को समझने का मंच हो सकता है। गरूड ग्रिड ने एनकेएन में जाकर अपनी क्षमता और स्थिरता बढ़ाई है।

नेटवर्क टेक्नॉलोजी टेस्ट बेड[सम्पादन]

एनकेएन सेवाओं को उत्पादन नेटवर्क को उपलब्ध कराने से पहले उनके परीक्षण और वैधता के लिए टेस्ट बैड (परीक्षण मंच) मुहैया कराता है। एनकेएन नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के परीक्षण, विक्रेता अंतरसक्रियता (सूचनाओं के आदान-प्रदान और इस्तेमाल करने की क्षमता) आदि भी उपलब्ध कराता है।

ई-गवर्नेंस[सम्पादन]

एनकेएन ई-गवर्नेंस अधोसंरचना जैसे सरकारी डाटा केंद्रों और नेटवर्क्स के लिए सुपर हाईवे की तरह काम करता है। एनकेएन ई-गवर्नेंस एप्लीकेशंस के लिए जरूरी बड़ी मात्रा में डाटा ट्रांसफर करने की सुविधा भी देता है।

एनकेएन सेवाएं[सम्पादन]

जेनरिक सेवाएं: इंटरनेट, इंट्रानेट, नेटवर्क मैनेजमेंट व्यूज, ई-मेल, मैसेजिंग गेटवेज़, कैचिंग गेजवेज़, डोमेन नेम सिस्टम, वेब होस्टिंग, वॉयस ओवर आईपी, मल्टी प्वाइंट कंट्रोल यूनिट (एमसीयू) सर्विसेज, वीडियो पोर्टल्स, एसएमएस गेटवे, को-लोकेशन सर्विसेज, वीडियो स्ट्रीमिंग आदि।

सामुदायिक सेवाएं: शोयर्ड स्टोरेज, ई-मेल लिस्ट सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन (एलआईएसटीएसईआरवी), ऑथेंटीकेशन सर्विस, ईवीओ, सेशन इंनिशिएशन प्रॉटोकॉल (एसआईपी), कोलेब्रेशन सर्विस, कंटेंट डिलिवरी सर्विस, ईयू-भारत ग्रिड के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, ग्लोबल रिंग नेटवर्क फॉर एडवांस एप्लीकेशंस डेवलपमेंट (जीएलओआरआईएडी) आदि।