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अकबर और बीरबल की कहानियाँ

विकिपुस्तक से

1.आम का पेड़ और बीरबल की चतुराई : अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी

एक आम का पेड़ जो की दो घर के बीचों बीच था , वह दोनों घर के व्यक्ति आपस में अक्सर ही छोटी – छोटी बातों पे लड़ते रहते थे,

एक व्यक्ति का नाम कैलाश था तो दूसरे व्यक्ति का नाम केशव , कुछ समय बाद उस पेड़ पे आम आने लगे, केशव जा कर पेड़ के आम खाने लगा तो कैलाश ने कहा यह मेरा आम का पेड़ तुम्हारा नहीं , केशव : यह मेरा आम का पेड़ है, और दोनों अपनी ही राग पे झगड़ने लगे इस बार यह झगड़े आपस में इतने बढ़ गए की यह समस्या दरबार में जा पहुंची ,

जब शहंशाह अकबर ने यह आम के पेड़ की समस्या सुनी तो वह खुद चौंक गए की आम का पेड़ किसका है कैसे पता लगाया जाए, आम का पेड़ दोनों व्यक्तियों के घर के बीचों बीच था ,

अब शहंशाह अकबर बीरबल से मुखातिब हुए : बीरबल अब आप ही पता लगाए कि यह आम का पेड़ किसका है ?

बीरबल : जी जहांपनाह , आप दोनों व्यक्ति अभी अपने – अपने घर जाए मुझे कुछ समय दे सोचने के लिए आम का पेड़ किसका है !

अब शाम के समय ,

बीरबल ने अपने रघु काका जो उनके यहां काम करते थे , उन्हें कहा कि आप दोनों व्यक्तियों के घर जाए , और दोनों को सूचना दे की चोर आम चुरा रहा है ,

और यह सूचना के बाद दोनों व्यक्तियों की प्रतिक्रिया क्या है वह मुझे बताए ,

अब अगले दिन सुबह ,

बीरबल : हम अभी तक यह तय नहीं कर पाए है कि वह आम का पेड़ किसका है , हम एक काम कर सकते है उस आम के पेड़ को काट देंगे और लकड़ियों को बराबर हिस्सों में दोनों व्यक्तियों के बांट देंगे ,

कैलाश : आपने एकदम सही कहा , बीरबल जी , कैलाश ( मन ही मन ) : यह तो अच्छा है कुछ पैसे को इंतजाम हो जाएगा !

केशव : बीरबल जी , कृपा आप ऐसा मत करे , में वह पेड़ कैलाश को देने के लिए तैयार हूं मगर उस आम के पेड़ को मत कटवाए उस आम के पेड़ के साथ अपना बचपन बिताया है , वह मेरा बचपन का साथी है ,

बीरबल : एकदम सही केशव वह आम का पेड़ तुम्हारा ही है ,

कैलाश : मगर यह बात तो में भी बोल सकता हु जहांपनाह ! तो इससे क्या यह आम का पेड़ मेरा नहीं है ,

शहंशाह अकबर : बीरबल यह बात उचित है यह बात तो कोई भी बोल सकता है ,

बीरबल : जी जहांपनाह मगर मालिक केशव ही है , क्योंकि मेने कल शाम एक सूचना दी थी दोनों व्यक्तियों को , की चोर आम के पेड़ से आम चुरा रहा है , कैलाश ने कुछ भी नहीं किया , मगर केशव ने उस चोर को जा कर भगाया !

और किसी भी चीज़ की हम तभी रक्षा करते है जब वह चीज़ हमारी होती है, जो कि केशव ने करी , ना की कैलाश ने ,

कैलाश : मुझे माफ कर दे जहांपनाह ! वह आम का पेड़ केशव का ही है ,

कैलाश तुम्हे झूठ बोलने और केशव के साथ बेवजह झगड़ने के लिए इनाम के तोड़ पे कुछ पैसे केशव को देने होंगे !

शहंशाह अकबर : शानदार बीरबल , हमे तुम से यहीं उम्मीद थी , तुम्हारा कोई जवाब नहीं बीरबल!

2. बैल का दूध – Akbar Birbal Stories for Kids

कुछ दिनों के लिए बीरबल पड़ोसी राज्य में कुछ कार्य के लिए जाते है , उसके अगले दिन से ही सभी दरबारी शहंशाह अकबर के कान भरने लगते है , जहांपनाह , बीरबल ऐसा है वैसा है , और ऐसे ही एक दरबारी कह देते है जहांपनाह क्यों ना बीरबल को परखा जाएं,

शहंशाह अकबर : कैसे ? दरबारी : क्यों ना बीरबल को बैल का दूध लाने को कहा जाए ! शहंशाह अकबर : बैल का दूध ! शहंशाह अकबर ( मन ही मन सोचते है ) : ठीक है , बीरबल तक यह संदेश भेजा जाए , अब शाम के समय ,

जब बीरबल शाम को पड़ोसी राज्य से लौट ते है तो एक सिपाही उन्हें शहंशाह अकबर का संदेश देते है ,

बीरबल : बैल का दूध ! और थोड़ी देर बाद सिपाही को कहते है ठीक आप अभी जाए !

बीरबल ने अपनी पुत्री को बुलाया और कुछ बातें करने लगे !

अब आधी रात के समय ,

शहंशाह अकबर गहरी नींद में सो रहे थे , तभी अचानक कुछ आवाजें आती है , *** यह आवाज पत्थर पे कुछ रगड़ने की थी , शहंशाह अकबर तुरंत सिपाहियों को कहा देखो कौन है वहां और हमारे पास लाओ उसे !

जब सिपाही जाते है तो देखते है कुएं के पास एक लड़की अपने कपड़ों को पत्थर पे पीट के धो रही थी सिपाहियों ने उसे आवाज दी मगर वह बहुत मगन थी अपने काम में ,

सिपाही उसे पकड़ कर शहंशाह अकबर के पास ले गए , शहंशाह अकबर लड़की को देख : तुम तो बीरबल की पुत्री हो ?

लड़की : जी !

शहंशाह अकबर : क्या तुम्हे पूरे दिन कपड़े धोने का समय नहीं मिला जो आधी रात को धो रही हो ! लड़की : जहांपनाह ! मेरी माता मायके गई है , और मेरे पिता ने आधी रात को शिशु को जन्म दिया है इसी कारणवश मुझे यह गंदे कपड़े धोने आधी रात को आना पड़ा !

शहंशाह अकबर के साथ- साथ सिपाही भी सोच में पड़ गए ! शहंशाह अकबर ( धीरे – धीरे बोलते है ) : तुम्हारे पिता ने शिशु को जन्म दिया है ! क्या है यह ? आख़िर कोई पुरुष कैसे किसी शिशु को जन्म दे सकता है ,

लड़की : जहांपनाह ! आज के समय में कुछ भी मुमकिन नहीं है ,सुना है बैल का दूध भी मिलने लगा है !

शहंशाह अकबर : थोड़ा सोचते है और हंसने लगते है , वोह बीरबल ! तुम्हारा कोई जवाब नहीं , और अगली सुबह यह किस्सा सभी दरबारियों को बताते है ! यह कहानी यहां समाप्त होती है ,धन्यवाद !

बैल का दूध का अर्थ : “बैल का दूध ” एक व्यावहारिक रूप से असंभव या मज़ाकिया वाक्यांश है,कहानी में इसे एक कठिन चुनौती की तरह इस्तेमाल क्या गया है !

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