ईसाई आतंकवाद

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ईसाई आतंकवाद या मसीही आतंकवाद या यीशु आतंकवाद के नाम से प्रसिद्ध आतंकवाद विशाल आकार में सारे विश्व में एक महामारी और अत्यंत खतरनाक बीमारी के रूप में फैल रहा है। लेकिन कोई भी समाचार माध्यम इसके बारे में कुछ लिख नहीं पाती है। भारत के नागालैंड में भी इसका आतंक बहुत अधिक फैला हुआ है। लेकिन मुश्किल से कुछ समाचार पत्र और चैनल ही इसके बारे में दिखाते हैं। इसका कारण ये हैं कि भारत के कई समाचार चैनल दूसरे देशों के हैं। इसमें से ज्यादातर पश्चिमी देशों के हैं। जो हमेशा इस्लाम और हिन्दू धर्म को ही आतंक से जोड़ने का प्रयास करते रहते हैं।

यह मुख्य रूप से हत्या, लूटपाट, धर्मांतरण, बलात्कार आदि कार्य करते हैं। हथियारों आदि उपलब्ध कराने में और रखने में कई सारे चर्च भी उनका साथ देते हैं। कई स्रोतों से यह भी पता चला है कि ब्रिटेन आदि स्थानों में स्थित चर्च से इन्हें दिशानिर्देशन मिलता रहता है।

अफ्रीका में[सम्पादन]

अफ्रीका में यह आतंकी संगठन मुख्य रूप से मुस्लिमों को अपना शिकार बनाते हैं। इन्होंने मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लगभग सभी मस्जिदों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। इसमें प्रमुख रूप से एंटी-बलाका नामक ईसाई आतंकी संगठन है। जिसके कारण हजारों मुस्लिमों को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

मई 2014 में यह बताया गया है कि बंगुइ में मुस्लिम आबादी 138,000 से घट कर सिर्फ 900 हो गई।

भारत में[सम्पादन]

भारत में यह कई वर्षों से अपने आतंक को बढ़ा रहे हैं। नागालैंड में यह आसानी से हथियार और पैसे प्राप्त कर लेते हैं।

त्रिपुरा[सम्पादन]

असम[सम्पादन]

नागालैंड[सम्पादन]

भारत में सबसे अधिक ईसाई आतंकी यहीं पर हैं। जिन्हें चर्च से पर्याप्त मात्रा में हथियार और पैसा मिलता है।

अन्य राज्यों में[सम्पादन]

अन्य राज्यों में चर्च द्वारा गुप्त रूप से हिन्दू और मुस्लिम लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

संचार माध्यमों पर कब्जा[सम्पादन]

कई सारे आतंकी हमलों के बाद भी ईसाई आतंकवाद के बारे में लगभग आधे से अधिक समाचार चैनलों में कुछ दिखाया ही नहीं जाता है। इसका कारण यह कि ईसाईयों द्वारा लगभग सभी संचार माध्यमों पर कब्जा कर लेना है। कई सारे समाचार चैनल केवल ब्रिटेन और अमेरिका के ही मौजूद होते हैं। यहाँ तक कि भारत में भी कई सारे चैनल गैर-भारतीय ही हैं और उन्हें दूसरे देशों से ही नियंत्रित किया जाता है।