कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति के कवि/श्रीभट्ट का जीवन परिचय

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श्रीभट्ट की निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रमुख कवियों में गणना की जाती है। माधुर्य के सच्चे उपासक श्रीभट्ट केशव कश्मीरी के शिष्य थे। श्रीभट्ट जी का जन्म संवत विवादास्पद है। भट्ट जी ने अपने ग्रन्थ "युगल शतक " का रचना काल निम्न दोहे में दिया है:

नयन वाम पुनि राम शशि गनो अंक गति वाम।
युगल शतक पूरन भयो संवत अति अभिराम।।

युगल शतक के संपादक श्रीब्रजबल्लभ शरण तथा निम्बार्क माधुरी के लेखक ब्रह्मचारी बिहारी शरण के अनुसार युगल शतक की प्राचीन प्रतियों में यही पाठ मिलता है। इसके अनुसार युगल शतक का रचना काल विक्रमी संवत 1352 स्थिर होता है। किन्तु काशी नागरी प्रचारिणी सभा के पास युगल शतक की जो प्रति है उसमें राम के स्थान पर राग पाठ है।इस पाठ भेद के अनुसार युगल शतक का रचना काल वि ० सं ० 1652 निश्चित होता है। प्रायः सभी साहित्यिक विद्वानों ~~ श्री वियोगी हरि (ब्रजमाधुरी सार :पृष्ठ 10 8 ) ,आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (हिन्दी साहित्य का इतिहास :पृष्ठ 188 ) ,आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (हिन्दी साहित्य :पृष्ठ 201 ) आदि ने पिछले पाठ को ही स्वीकार किया है। अतः इन विद्वानों के आधार पर श्री भट्ट जी का जन्म वि ० सं ० 1595 तथा कविता काल वि ० सं ० 16 52 स्वीकार किया जा सकता है।