कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति के कवि/हरिव्यासदेव की रचनाएँ

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श्री हरिव्यासदेव की संस्कृत में चार रचनाएँ उपलब्ध हैं:

  1. सिद्धान्त रत्नांजलि ~ दशश्लोकी की बृहत टीका
  2. प्रेम भक्ति विवर्धिनी ~ निम्बार्क अष्टोत्तर शत नाम की टीका
  3. तत्वार्थ पंचक
  4. पंच संस्कार निरूपण

किन्तु ब्रजभाषा में हरिव्यासदेव जी की केवल एक रचना महावाणी उपलब्ध होती है।