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दसम ग्रन्थ/जाप साहिब

विकिपुस्तक से
स्री वाहिगुरू जी की फतह ॥

ਜਾਪੁ ॥ जापु ॥

स्री मुखवाक पातिसाही १० ॥

छपै छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

चक्र चिहन अरु बरन; जाति अरु पाति नहिन जिह ॥

रूप रंग अरु रेख; भेख कोऊ कहि न सकति किह ॥

अचल मूरति अनभव प्रकास; अमितोज कहिजै ॥

कोटि इंद्र इंद्राणि; साहु साहाणि गणिजै ॥

त्रिभवण महीप, सुर, नर, असुर; नेति नेति बन त्रिण कहत ॥

त्व सरब नाम कथै कवन? करम नाम बरणत सुमति ॥१॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

नमसत्वं अकाले ॥

नमसत्वं क्रिपाले ॥

नमसत्वं अरूपे ॥

नमसत्वं अनूपे ॥१॥२॥

नमसतं अभेखे ॥

नमसतं अलेखे ॥

नमसतं अकाए ॥

नमसतं अजाए ॥२॥३॥

नमसतं अगंजे ॥

नमसतं अभंजे ॥

नमसतं अनामे ॥

नमसतं अठामे ॥३॥४॥

नमसतं अकरमं ॥

नमसतं अधरमं ॥

नमसतं अनामं ॥

नमसतं अधामं ॥४॥५॥

नमसतं अजीते ॥

नमसतं अभीते ॥

नमसतं अबाहे ॥

नमसतं अढाहे ॥५॥६॥

नमसतं अनीले ॥

नमसतं अनादे ॥

नमसतं अछेदे ॥

नमसतं अगाधे ॥६॥७॥

नमसतं अगंजे ॥

नमसतं अभंजे ॥

नमसतं उदारे ॥

नमसतं अपारे ॥७॥८॥

नमसतं सु एकै ॥

नमसतं अनेकै ॥

नमसतं अभूते ॥

नमसतं अजूपे ॥८॥९॥

नमसतं न्रिकरमे ॥

नमसतं न्रिभरमे ॥

नमसतं न्रिदेसे ॥

नमसतं न्रिभेसे ॥९॥१०॥

नमसतं न्रिनामे ॥

नमसतं न्रिकामे ॥

नमसतं न्रिधाते ॥

नमसतं निघाते ॥१०॥११॥

नमसतं न्रिधूते ॥

नमसतं अभूते ॥

नमसतं अलोके ॥

नमसतं असोके ॥११॥१२॥

नमसतं न्रितापे ॥

नमसतं अथापे ॥

नमसतं त्रिमाने ॥

नमसतं निधाने ॥१२॥१३॥

नमसतं अगाहे ॥

नमसतं अबाहे ॥

नमसतं त्रिबरगे ॥

नमसतं असरगे ॥१३॥१४॥

नमसतं प्रभोगे ॥

नमसतं सुजोगे ॥

नमसतं अरंगे ॥

नमसतं अभंगे ॥१४॥१५॥

नमसतं अगमे ॥

नमसतसतु रमे ॥

नमसतं जलासरे ॥

नमसतं निरासरे ॥१५॥१६॥

नमसतं अजाते ॥

नमसतं अपाते ॥

नमसतं अमजबे ॥

नमसतसतु अजबे ॥१६॥१७॥

अदेसं अदेसे ॥

नमसतं अभेसे ॥

नमसतं न्रिधामे ॥

नमसतं न्रिबामे ॥१७॥१८॥

नमो सरब काले ॥

नमो सरब दिआले ॥

नमो सरब रूपे ॥

नमो सरब भूपे ॥१८॥१९॥

नमो सरब खापे ॥

नमो सरब थापे ॥

नमो सरब काले ॥

नमो सरब पाले ॥१९॥२०॥

नमसतसतु देवै ॥

नमसतं अभेवै ॥

नमसतं अजनमे ॥

नमसतं सुबनमे ॥२०॥२१॥

नमो सरब गउने ॥

नमो सरब भउने ॥

नमो सरब रंगे ॥

नमो सरब भंगे ॥२१॥२२॥

नमो काले काले ॥

नमसतसतु दिआले ॥

नमसतं अबरने ॥

नमसतं अमरने ॥२२॥२३॥

नमसतं जरारं ॥

नमसतं क्रितारं ॥

नमो सरब धंधे ॥

नमो सत अबंधे ॥२३॥२४॥

नमसतं न्रिसाके ॥

नमसतं न्रिबाके ॥

नमसतं रहीमे ॥

नमसतं करीमे ॥२४॥२५॥

नमसतं अनंते ॥

नमसतं महंते ॥

नमसतसतु रागे ॥

नमसतं सुहागे ॥२५॥२६॥

नमो सरब सोखं ॥

नमो सरब पोखं ॥

नमो सरब करता ॥

नमो सरब हरता ॥२६॥२७॥

नमो जोग जोगे ॥

नमो भोग भोगे ॥

नमो सरब दिआले ॥

नमो सरब पाले ॥२७॥२८॥

चाचरी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

अरूप हैं ॥

अनूप हैं ॥

अजू हैं ॥

अभू हैं ॥१॥२९॥

अलेख हैं ॥

अभेख हैं ॥

अनाम हैं ॥

अकाम हैं ॥२॥३०॥

अधे हैं ॥

अभे हैं ॥

अजीत हैं ॥

अभीत हैं ॥३॥३१॥

त्रिमान हैं ॥

निधान हैं ॥

त्रिबरग हैं ॥

असरग हैं ॥४॥३२॥

अनील हैं ॥

अनादि हैं ॥

अजे हैं ॥

अजादि हैं ॥५॥३३॥

अजनम हैं ॥

अबरन हैं ॥

अभूत हैं ॥

अभरन हैं ॥६॥३४॥

अगंज हैं ॥

अभंज हैं ॥

अझूझ हैं ॥

अझंझ हैं ॥७॥३५॥

अमीक हैं ॥

रफीक हैं ॥

अधंध हैं ॥

अबंध हैं ॥८॥३६॥

न्रिबूझ हैं ॥

असूझ हैं ॥

अकाल हैं ॥

अजाल हैं ॥९॥३७॥

अलाह हैं ॥

अजाह हैं ॥

अनंत हैं ॥

महंत हैं ॥१०॥३८॥

अलीक हैं ॥

न्रिसरीक हैं ॥

न्रिल्मभ हैं ॥

अस्मभ हैं ॥११॥३९॥

अगम हैं ॥

अजम हैं ॥

अभूत हैं ॥

अछूत हैं ॥१२॥४०॥

अलोक हैं ॥

असोक हैं ॥

अकरम हैं ॥

अभरम हैं ॥१३॥४१॥

अजीत हैं ॥

अभीत हैं ॥

अबाह हैं ॥

अगाह हैं ॥१४॥४२॥

अमान हैं ॥

निधान हैं ॥

अनेक हैं ॥

फिरि एक हैं ॥१५॥४३॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

नमो सरब माने ॥

समसती निधाने ॥

नमो देव देवे ॥

अभेखी अभेवे ॥१॥४४॥

नमो काल काले ॥

नमो सरब पाले ॥

नमो सरब गउणे ॥

नमो सरब भउणे ॥२॥४५॥

अनंगी अनाथे ॥

न्रिसंगी प्रमाथे ॥

नमो भान भाने ॥

नमो मान माने ॥३॥४६॥

नमो चंद्रे चंद्रे ॥

नमो भान भाने ॥

नमो गीत गीते ॥

नमो तान ताने ॥४॥४७॥

नमो न्रित न्रितै ॥

नमो नाद नादे ॥

नमो पान पाने ॥

नमो बाद बादे ॥५॥४८॥

अनंगी अनामे ॥

समसती सरूपे ॥

प्रभंगी प्रमाथे ॥

समसती बिभूते ॥६॥४९॥

कलंकं बिना नेहकलंकी सरूपे ॥

नमो राज राजेस्वरं परम रूपे ॥७॥५०॥

नमो जोग जोगेस्वरं परम सिधे ॥

नमो राज राजेस्वरं परम ब्रिधे ॥८॥५१॥

नमो ससत्र पाणे ॥

नमो असत्र माणे ॥

नमो परम गिआता ॥

नमो लोक माता ॥९॥५२॥

अभेखी अभरमी अभोगी अभुगते ॥

नमो जोग जोगेस्वरं परम जुगते ॥१०॥५३॥

नमो नित नाराइणे क्रूर करमे ॥

नमो प्रेत अप्रेत देवे सुधरमे ॥११॥५४॥

नमो रोग हरता ॥

नोम राग रूपे ॥

नमो साह साहं ॥

नमो भूप भूपे ॥१२॥५५॥

नमो दाने दाने ॥

नमो मान माने ॥

नमो रोग रोगे ॥

नमसतं सनाने ॥१३॥५६॥

नमो मंत्र मंत्रं ॥

नमो जंत्र जंत्रं ॥

नमो इसटे इसटे ॥

नमो तंत्र तंत्रं ॥१४॥५७॥

सदा सचिदानंद सरबं प्रणासी ॥

अनूपे अरूपे समसतुल निवासी ॥१५॥५८॥

सदा सिधिदा बुधिदा ब्रिधि करता ॥

अधो उरध अरधं अघं ओघ हरता ॥१६॥५९॥

परं परम परमेस्वरं प्रोछपालं ॥

सदा सरबदा सिधि दाता दिआलं ॥१७॥६०॥

अछेदी अभेदी अनामं अकामं ॥

समसतो पराजी समसतसतु धामं ॥१८॥६१॥

तेरा जोरु ॥

चाचरी छंद ॥

जले हैं ॥

थले हैं ॥

अभीत हैं ॥

अभे हैं ॥१॥६२॥

प्रभू हैं ॥

अजू हैं ॥

अदेस हैं ॥

अभेस हैं ॥२॥६३॥

भुजंग प्रयात छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

अगाधे अबाधे ॥

अनंदी सरूपे ॥

नमो सरब माने ॥

समसती निधाने ॥१॥६४॥

नमसत्वं न्रिनाथे ॥

नमसत्वं प्रमाथे ॥

नमसत्वं अगंजे ॥

नमसत्वं अभंजे ॥२॥६५॥

नमसत्वं अकाले ॥

नमसत्वं अपाले ॥

नमो सरब देसे ॥

नमो सरब भेसे ॥३॥६६॥

नमो राज राजे ॥

नमो साज साजे ॥

नमो साह साहे ॥

नमो माह माहे ॥४॥६७॥

नमो गीत गीते ॥

नमो प्रीति प्रीते ॥

नमो रोख रोखे ॥

नमो सोख सोखे ॥५॥६८॥

नमो सरब रोगे ॥

नमो सरब भोगे ॥

नमो सरब जीतं ॥

नमो सरब भीतं ॥६॥६९॥

नमो सरब गिआनं ॥

नमो परम तानं ॥

नमो सरब मंत्रं ॥

नमो सरब जंत्रं ॥७॥७०॥

नमो सरब द्रिसं ॥

नमो सरब क्रिसं ॥

नमो सरब रंगे ॥

त्रिभंगी अनंगे ॥८॥७१॥

नमो जीव जीवं ॥

नमो बीज बीजे ॥

अखिजे अभिजे ॥

समसतं प्रसिजे ॥९॥७२॥

क्रिपालं सरूपे ॥

कुकरमं प्रणासी ॥

सदा सरबदा रिधि सिधं निवासी ॥१०॥७३॥

चरपट छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

अम्रित करमे ॥

अ्मब्रित धरमे ॥

अखिल जोगे ॥

अचल भोगे ॥१॥७४॥

अचल राजे ॥

अटल साजे ॥

अखल धरमं ॥

अलख करमं ॥२॥७५॥

सरबं दाता ॥

सरबं गिआता ॥

सरबं भाने ॥

सरबं माने ॥३॥७६॥

सरबं प्राणं ॥

सरबं त्राणं ॥

सरबं भुगता ॥

सरबं जुगता ॥४॥७७॥

सरबं देवं ॥

सरबं भेवं ॥

सरबं काले ॥

सरबं पाले ॥५॥७८॥

रूआल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

आदि रूप अनादि मूरति; अजोनि पुरख अपार ॥

सरब मान त्रिमान देव; अभेव आदि उदार ॥

सरब पालक, सरब घालक; सरब को पुनि काल ॥

जत्र तत्र बिराजही; अवधूत रूप रिसाल ॥१॥७९॥

नाम ठाम न जाति जाकर; रूप रंग न रेख ॥

आदि पुरख उदार मूरति; अजोनि आदि असेख ॥

देस अउर न भेस जाकर; रूप रेख न राग ॥

जत्र तत्र दिसा विसा; हुइ फैलिओ अनुराग ॥२॥८०॥

नाम काम बिहीन पेखत; धाम हूं नहि जाहि ॥

सरब मान सरबत्र मान; सदैव मानत ताहि ॥

एक मूरति अनेक दरसन; कीन रूप अनेक ॥

खेल खेलि अखेल खेलन; अंत को फिरि एक ॥३॥८१॥

देव भेव न जानही; जिह बेद अउर कतेब ॥

रूप रंग न जाति पाति; सु जानई किह जेब ॥

तात मात न जात जा कर; जनम मरन बिहीन ॥

चक्र बक्र फिरै चत्र चकि; मानही पुर तीन ॥४॥८२॥

लोक चउदह के बिखै; जग जापही जिह जापु ॥

आदि देव, अनादि मूरति; थापिओ सबै जिह थापु ॥

परम रूप, पुनीत मूरति; पूरन पुरखु अपार ॥

सरब बिस्व रचिओ सुय्मभव; गड़न भंजन हार ॥५॥८३॥

काल हीन, कला संजुगति; अकाल पुरख अदेस ॥

धरम धाम सु भरम रहत; अभूत अलख अभेस ॥

अंग राग न रंग जा कहि; जाति पाति न नाम ॥

गरब गंजन, दुसट भंजन; मुकत दाइक काम ॥६॥८४॥

आप रूप, अमीक, अनउसतति; एक पुरखु अवधूत ॥

गरब गंजन, सरब भंजन; आदि रूप असूत ॥

अंग हीन, अभंग, अनातम; एक पुरखु अपार ॥

सरब लाइक, सरब घाइक; सरब को प्रतिपार ॥७॥८५॥

सरब गंता, सरब हंता; सरब ते अनभेख ॥

सरब सासत्र न जानही; जिह रूप रंगु अरु रेख ॥

परम बेद पुराण जाकहि; नेति भाखत नित ॥

कोटि सिम्रिति, पुरान, सासत्र; न आवई वहु चिति ॥८॥८६॥

मधुभार छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

गुन गन उदार ॥

महिमा अपार ॥

आसन अभंग ॥

उपमा अनंग ॥१॥८७॥

अनभउ प्रकास ॥

निस दिन अनास ॥

आजानु बाहु ॥

साहानु साहु ॥२॥८८॥

राजान राज ॥

भानान भानु ॥

देवान देव ॥

उपमा महान ॥३॥८९॥

इंद्रान इंद्र ॥

बालान बाल ॥

रंकान रंक ॥

कालान काल ॥४॥९०॥

अनभूत अंग ॥

आभा अभंग ॥

गति मिति अपार ॥

गुन गन उदार ॥५॥९१॥

मुनि गन प्रनाम ॥

निरभै न्रिकाम ॥

अति दुति प्रचंड ॥

मिति गति अखंड ॥६॥९२॥

आलिस्य करम ॥

आद्रिस्य धरम ॥

सरबा भरणाढ्य ॥

अनडंड बाढ्य ॥७॥९३॥

चाचरी छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

गुबिंदे ॥

मुकंदे ॥

उदारे ॥

अपारे ॥१॥९४॥

हरीअं ॥

करीअं ॥

न्रिनामे ॥

अकामे ॥२॥९५॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

चत्र चक्र करता ॥

चत्र चक्र हरता ॥

चत्र चक्र दाने ॥

चत्र चक्र जाने ॥१॥९६॥

चत्र चक्र वरती ॥

चत्र चक्र भरती ॥

चत्र चक्र पाले ॥

चत्र चक्र काले ॥२॥९७॥

चत्र चक्र पासे ॥

चत्र चक्र वासे ॥

चत्र चक्र मान्यै ॥

चत्र चक्र दान्यै ॥३॥९८॥

चाचरी छंद ॥

न सत्रै ॥

न मित्रै ॥

न भरमं ॥

न भित्रै ॥१॥९९॥

न करमं ॥

न काए ॥

अजनमं ॥

अजाए ॥२॥१००॥

न चित्रै ॥

न मित्रै ॥

परे है ॥

पवित्रै ॥३॥१०१॥

प्रिथीसै ॥

अदीसै ॥

अद्रिसै ॥

अक्रिसै ॥४॥१०२॥

भगवती छंद ॥ त्वप्रसादि कथते ॥

कि आछिज देसै ॥

कि आभिज भेसै ॥

कि आगंज करमै ॥

कि आभंज भरमै ॥१॥१०३॥

कि आभिज लोकै ॥

कि आदित सोकै ॥

कि अवधूत बरनै ॥

कि बिभूत करनै ॥२॥१०४॥

कि राजं प्रभा हैं ॥

कि धरम धुजा हैं ॥

कि आसोक बरनै ॥

कि सरबा अभरनै ॥३॥१०५॥

कि जगतं क्रिती हैं ॥

कि छत्रं छत्री हैं ॥

कि ब्रहमं सरूपै ॥

कि अनभउ अनूपै ॥४॥१०६॥

कि आदि अदेव हैं ॥

कि आपि अभेव हैं ॥

कि चित्रं बिहीनै ॥

कि एकै अधीनै ॥५॥१०७॥

कि रोजी रजाकै ॥

रहीमै रिहाकै ॥

कि पाक बिऐब हैं ॥

कि गैबुल गैब हैं ॥६॥१०८॥

कि अफवुल गुनाह हैं ॥

कि साहान साह हैं ॥

कि कारन कुनिंद हैं ॥

कि रोजी दिहिंद हैं ॥७॥१०९॥

कि राजक रहीम हैं ॥

कि करमं करीम हैं ॥

कि सरबं कली हैं ॥

कि सरबं दली हैं ॥८॥११०॥

कि सरबत्र मानियै ॥

कि सरबत्र दानियै ॥

कि सरबत्र गउनै ॥

कि सरबत्र भउनै ॥९॥१११॥

कि सरबत्र देसै ॥

कि सरबत्र भेसै ॥

कि सरबत्र राजै ॥

कि सरबत्र साजै ॥१०॥११२॥

कि सरबत्र दीनै ॥

कि सरबत्र लीनै ॥

कि सरबत्र जाहो ॥

कि सरबत्र भाहो ॥११॥११३॥

कि सरबत्र देसै ॥

कि सरबत्र भेसै ॥

कि सरबत्र कालै ॥

कि सरबत्र पालै ॥१२॥११४॥

कि सरबत्र हंता ॥

कि सरबत्र गंता ॥

कि सरबत्र भेखी ॥

कि सरबत्र पेखी ॥१३॥११५॥

कि सरबत्र काजै ॥

कि सरबत्र राजै ॥

कि सरबत्र सोखै ॥

कि सरबत्र पोखै ॥१४॥११६॥

कि सरबत्र त्राणै ॥

कि सरबत्र प्राणै ॥

कि सरबत्र देसै ॥

कि सरबत्र भेसै ॥१५॥११७॥

कि सरबत्र मानियै ॥

सदैवं प्रधानियै ॥

कि सरबत्र जापियै ॥

कि सरबत्र थापियै ॥१६॥११८॥

कि सरबत्र भानै ॥

कि सरबत्र मानै ॥

कि सरबत्र इंद्रै ॥

कि सरबत्र चंद्रै ॥१७॥११९॥

कि सरबं कलीमै ॥

कि परमं फहीमै ॥

कि आकिल अलामै ॥

कि साहिब कलामै ॥१८॥१२०॥

कि हुसनल वजू हैं ॥

तमामुल रुजू हैं ॥

हमेसुल सलामै ॥

सलीखत मुदामै ॥१९॥१२१॥

गनीमुल सिकसतै ॥

गरीबुल परसतै ॥

बिलंदुल मकानै ॥

जमीनल जमानै ॥२०॥१२२॥

तमीजुल तमामै ॥

रुजूअल निधानै ॥

हरीफुल अजीमै ॥

रजाइक यकीनै ॥२१॥१२३॥

अनेकुल तरंग हैं ॥

अभेद हैं अभंग हैं ॥

अजीजल निवाज हैं ॥

गनीमुल खिराज हैं ॥२२॥१२४॥

निरुकत सरूप हैं ॥

त्रिमुकति बिभूति हैं ॥

प्रभुगति प्रभा हैं ॥

सुजुगति सुधा हैं ॥२३॥१२५॥

सदैवं सरूप हैं ॥

अभेदी अनूप हैं ॥

समसतोपराज हैं ॥

सदा सरब साज हैं ॥२४॥१२६॥

समसतुल सलाम हैं ॥

सदैवुल अकाम हैं ॥

न्रिबाध सरूप हैं ॥

अगाध अनूप हैं ॥२५॥१२७॥

ओअं आदि रूपे ॥

अनादि सरूपे ॥

अनंगी अनामे ॥

त्रिभंगी त्रिकामे ॥२६॥१२८॥

त्रिबरगं त्रिबाधे ॥

अगंजे अगाधे ॥

सुभं सरब भागे ॥

सु सरबानुरागे ॥२७॥१२९॥

त्रिभुगत सरूप हैं ॥

अछिज हैं अछूत हैं ॥

कि नरकं प्रणास हैं ॥

प्रिथीउल प्रवास हैं ॥२८॥१३०॥

निरुकति प्रभा हैं ॥

सदैवं सदा हैं ॥

बिभुगति सरूप हैं ॥

प्रजुगति अनूप हैं ॥२९॥१३१॥

निरुकति सदा हैं ॥

बिभुगति प्रभा हैं ॥

अनउकति सरूप हैं ॥

प्रजुगति अनूप हैं ॥३०॥१३२॥

चाचरी छंद ॥

अभंग हैं ॥

अनंग हैं ॥

अभेख हैं ॥

अलेख हैं ॥१॥१३३॥

अभरम हैं ॥

अकरम हैं ॥

अनादि हैं ॥

जुगादि हैं ॥२॥१३४॥

अजै हैं ॥

अबै हैं ॥

अभूत हैं ॥

अधूत हैं ॥३॥१३५॥

अनास हैं ॥

उदास हैं ॥

अधंध हैं ॥

अबंध हैं ॥४॥१३६॥

अभगत हैं ॥

बिरकत हैं ॥

अनास हैं ॥

प्रकास हैं ॥५॥१३७॥

निचिंत हैं ॥

सुनिंत हैं ॥

अलिख हैं ॥

अदिख हैं ॥६॥१३८॥

अलेख हैं ॥

अभेख हैं ॥

अढाह हैं ॥

अगाह हैं ॥७॥१३९॥

अस्मभ हैं ॥

अग्मभ हैं ॥

अनील हैं ॥

अनादि हैं ॥८॥१४०॥

अनित हैं ॥

सुनित हैं ॥

अजात हैं ॥

अजादि हैं ॥९॥१४१॥

चरपट छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

सरबं हंता ॥

सरबं गंता ॥

सरबं खिआता ॥

सरबं गिआता ॥१॥१४२॥

सरबं हरता ॥

सरबं करता ॥

सरबं प्राणं ॥

सरबं त्राणं ॥२॥१४३॥

सरबं करमं ॥

सरबं धरमं ॥

सरबं जुगता ॥

सरबं मुकता ॥३॥१४४॥

रसावल छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

नमो नरक नासे ॥

सदैवं प्रकासे ॥

अनंगं सरूपे ॥

अभंगं बिभूते ॥१॥१४५॥

प्रमाथं प्रमाथे ॥

सदा सरब साथे ॥

अगाध सरूपे ॥

न्रिबाध बिभूते ॥२॥१४६॥

अनंगी अनामे ॥

त्रिभंगी त्रिकामे ॥

न्रिभंगी सरूपे ॥

सरबंगी अनूपे ॥३॥१४७॥

न पोत्रै न पुत्रै ॥

न सत्रै न मित्रै ॥

न तातै न मातै ॥

न जातै न पातै ॥४॥१४८॥

न्रिसाकं सरीक हैं ॥

अमितो अमीक हैं ॥

सदैवं प्रभा हैं ॥

अजै हैं अजा हैं ॥५॥१४९॥

भगवती छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

कि जाहिर जहूर हैं ॥

कि हाजिर हजूर हैं ॥

हमेसुल सलाम हैं ॥

समसतुल कलाम हैं ॥१॥१५०॥

कि साहिब दिमाग हैं ॥

कि हुसनुल चराग हैं ॥

कि कामल करीम हैं ॥

कि राजक रहीम हैं ॥२॥१५१॥

कि रोजी दिहिंद हैं ॥

कि राजक रहिंद हैं ॥

करीमुल कमाल हैं ॥

कि हुसनुल जमाल हैं ॥३॥१५२॥

गनीमुल खिराज हैं ॥

गरीबुल निवाज हैं ॥

हरीफुल सिकंन हैं ॥

हिरासुल फिकंन हैं ॥४॥१५३॥

कलंकं प्रणास हैं ॥

समसतुल निवास हैं ॥

अगंजुल गनीम हैं ॥

रजाइक रहीम है ॥५॥१५४॥

समसतुल जुबां हैं ॥

कि साहिब किरा हैं ॥

कि नरकं प्रणास हैं ॥

बहिसतुल निवास हैं ॥६॥१५५॥

कि सरबुल गवंन हैं ॥

हमेसुल रवंन है ॥

तमामुल तमीज हैं ॥

समसतुल अजीज हैं ॥७॥१५६॥

परं परम ईस हैं ॥

समसतुल अदीस हैं ॥

अदेसुल अलेख हैं ॥

हमेसुल अभेख हैं ॥८॥१५७॥

जमीनुल जमां हैं ॥

अमीकुल इमां हैं ॥

करीमुल कमाल हैं ॥

कि जुरअत जमाल हैं ॥९॥१५८॥

कि अचलं प्रकास हैं ॥

कि अमितो सुबास हैं ॥

कि अजब सरूप हैं ॥

कि अमितो बिभूति हैं ॥१०॥१५९॥

कि अमितो पसा हैं ॥

कि आतम प्रभा हैं ॥

कि अचलं अनंग हैं ॥

कि अमितो अभंग हैं ॥११॥१६०॥

मधुभार छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

मुनि मनि प्रनाम ॥

गुनि गन मुदाम ॥

अरि बर अगंज ॥

हरि नर प्रभंज ॥१॥१६१॥

अन गन प्रनाम ॥

मुनि मनि सलाम ॥

हरि नर अखंड ॥

बर नर अमंड ॥२॥१६२॥

अनभव अनास ॥

मुनि मनि प्रकास ॥

गुनि गन प्रनाम ॥

जल थल मुदाम ॥३॥१६३॥

अनछिज अंग ॥

आसन अभंग ॥

उपमा अपार ॥

गति मिति उदार ॥४॥१६४॥

जल थल अमंड ॥

दिस विस अभंड ॥

जल थल महंत ॥

दिस विस बिअंत ॥५॥१६५॥

अनभव अनास ॥

ध्रित धर धुरास ॥

आजान बाहु ॥

एकै सदाहु ॥६॥१६६॥

ओअंकार आदि ॥

कथनी अनादि ॥

खल खंड खिआल ॥

गुर बर अकाल ॥७॥१६७॥

घरि घरि प्रनाम ॥

चित चरन नाम ॥

अनछिज गात ॥

आजिज न बात ॥८॥१६८॥

अनझंझ गात ॥

अनरंज बात ॥

अनटुट भंडार ॥

अनठट अपार ॥९॥१६९॥

आडीठ धरम ॥

अति ढीठ करम ॥

अनब्रण अनंत ॥

दाता महंत ॥१०॥१७०॥

हरिबोलमना छंद ॥ त्वप्रसादि ॥

करुणालय हैं ॥

अरि घालय हैं ॥

खल खंडन हैं ॥

महि मंडन हैं ॥१॥१७१॥

जगतेस्वर हैं ॥

परमेस्वर हैं ॥

कलि कारण हैं ॥

सरब उबारण हैं ॥२॥१७२॥

ध्रित के धरण हैं ॥

जग के करण हैं ॥

मन मानिय हैं ॥

जग जानिय हैं ॥३॥१७३॥

सरबं भर हैं ॥

सरबं कर हैं ॥

सरब पासिय हैं ॥

सरब नासिय हैं ॥४॥१७४॥

करुणाकर हैं ॥

बिस्व्मभर हैं ॥

सरबेस्वर हैं ॥

जगतेस्वर हैं ॥५॥१७५॥

ब्रहमंडस हैं ॥

खल खंडस हैं ॥

पर ते पर हैं ॥

करुणाकर हैं ॥६॥१७६॥

अजपा जप हैं ॥

अथपा थप हैं ॥

अक्रिताक्रित हैं ॥

अम्रिता म्रित हैं ॥७॥१७७॥

अम्रिता म्रित हैं ॥

करुणा क्रित हैं ॥

अक्रिता क्रित हैं ॥

धरणी ध्रित हैं ॥८॥१७८॥

अमितेस्वर हैं ॥

परमेस्वर हैं ॥

अक्रिता क्रित हैं ॥

अम्रिता म्रित हैं ॥९॥१७९॥

अजबा क्रित हैं ॥

अम्रिता म्रित हैं ॥

नर नाइक हैं ॥

खल घाइक हैं ॥१०॥१८०॥

बिस्व्मभर हैं ॥

करुणालय हैं ॥

न्रिप नाइक हैं ॥

सरब पाइक हैं ॥११॥१८१॥

भव भंजन हैं ॥

अरि गंजन हैं ॥

रिपु तापन हैं ॥

जपु जापन हैं ॥१२॥१८२॥

अकलंक्रित हैं ॥

सरबा क्रित हैं ॥

करता कर हैं ॥

हरता हरि हैं ॥१३॥१८३॥

परमातम हैं ॥

सरबातम हैं ॥

आतम बस हैं ॥

जस के जस हैं ॥१४॥१८४॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

नमो सूरज सूरजे, नमो चंद्र चंद्रे ॥

नमो राज राजे, नमो इंद्र इंद्रे ॥

नमो अंधकारे, नमो तेज तेजे ॥

नमो ब्रिंद ब्रिंदे, नमो बीज बीजे ॥१॥१८५॥

नमो राजसं, तामसं, सांति रूपे ॥

नमो परम ततं, अततं सरूपे ॥

नमो जोग जोगे, नमो गिआन गिआने ॥

नमो मंत्र मंत्रे, नमो धिआन धिआने ॥२॥१८६॥

नमो जुध जुधे, नमो गिआने गिआने ॥

नमो भोज भोजे, नमो पान पाने ॥

नमो कलह करता, नमो सांति रूपे ॥

नमो इंद्र इंद्रे, अनादं बिभूते ॥३॥१८७॥

कलंकार रूपे, अलंकार अलंके ॥

नमो आस आसे, नमो बाक बंके ॥

अभंगी सरूपे, अनंगी अनामे ॥

त्रिभंगी त्रिकाले, अनंगी अकामे ॥४॥१८८॥

एक अछरी छंद ॥

अजै ॥

अलै ॥

अभै ॥

अबै ॥१॥१८९॥

अभू ॥

अजू ॥

अनास ॥

अकास ॥२॥१९०॥

अगंज ॥

अभंज ॥

अलख ॥

अभख ॥३॥१९१॥

अकाल ॥

दिआल ॥

अलेख ॥

अभेख ॥४॥१९२॥

अनाम ॥

अकाम ॥

अगाह ॥

अढाह ॥५॥१९३॥

अनाथे ॥

प्रमाथे ॥

अजोनी ॥

अमोनी ॥६॥१९४॥

न रागे ॥

न रंगे ॥

न रूपे ॥

न रेखे ॥७॥१९५॥

अकरमं ॥

अभरमं ॥

अगंजे ॥

अलेखे ॥८॥१९६॥

भुजंग प्रयात छंद ॥

नमसतुल प्रनामे, समसतुल प्रणासे ॥

अगंजुल अनामे, समसतुल निवासे ॥

निरकामं बिभूते, समसतुल सरूपे ॥

कुकरमं प्रणासी, सुधरमं बिभूते ॥१॥१९७॥

सदा सचिदानंद, सत्रं प्रणासी ॥

करीमुल कुनिंदा, समसतुल निवासी ॥

अजाइब बिभूते, गजाइब गनीमे ॥

हरीअं करीअं, करीमलु रहीमे ॥२॥१९८॥

चत्र चक्र वरती, चत्र चक्र भुगते ॥

सुय्मभव सुभं, सरबदा सरब जुगते ॥

दुकालं प्रणासी, दिआलं सरूपे ॥

सदा अंग संगे, अभंगं बिभूते ॥३॥१९९॥