दसम ग्रन्थ/शसत्र नाम माला
| ਸ਼ਸਤ੍ਰ ਨਾਮ ਮਾਲਾ ॥
शसत्र नाम माला ॥ ੴ वाहिगुरू जी की फतहि ॥ स्री भगउती जी सहाइ ॥
ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਸਸਤ੍ਰ ਨਾਮ ਮਾਲਾ ਪੁਰਾਣ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥ अथ स्री ससत्र नाम माला पुराण लिख्यते ॥ पातिसाही १० ॥ दोहरा ॥ सांग सरोही सैफ असि; तीर तुपक तरवारि ॥ सत्रांतकि कवचांति कर; करीऐ रछ हमारि ॥१॥ असि क्रिपान धाराधरी; सैफ सूल जमदाढ ॥ कवचांतकि सत्रांत कर; तेग तीर धरबाढ ॥२॥ असि क्रिपान खंडो खड़ग; तुपक तबर अरु तीर ॥ सैफ सरोही सैहथी; यहै हमारै पीर ॥३॥ तीर तुही सैथी तुही; तुही तबर तरवारि ॥ नाम तिहारो जो जपै; भए सिंधु भव पार ॥४॥ काल तुही काली तुही; तुही तेग अरु तीर ॥ तुही निसानी जीत की; आजु तुही जगबीर ॥५॥ तुही सूल सैथी तबर; तू निखंग अरु बान ॥ तुही कटारी सेल सभ; तुम ही करद क्रिपान ॥६॥ ससत्र असत्र तुम ही सिपर; तुम ही कवच निखंग ॥ कवचांतकि तुम ही बने; तुम ब्यापक सरबंग ॥७॥ स्री तुही सभ कारन तुही; तू बिद्या को सार ॥ तुम सभ को उपराजही; तुम ही लेहु उबार ॥८॥ तुम ही दिन, रजनी तुही; तुम ही जीअन उपाइ ॥ कउतक हेरन के नमित; तिन मौ बाद बढाइ ॥९॥ असि क्रिपान खंडो खड़ग; सैफ तेग तरवारि ॥ रछ करो हमरी सदा; कवचांतकि करवारि ॥१०॥ तुही कटारी दाड़ जम; तू बिछूओ अरु बान ॥ तो पति पद जे लीजीऐ; रछ दास मुहि जानु ॥११॥ बांक बज्र बिछूओ तुही; तुही तबर तरवारि ॥ तुही कटारी सैहथी; करीऐ रछ हमारि ॥१२॥ तुमी गुरज तुम ही गदा; तुम ही तीर तुफंग ॥ दास जानि मोरी सदा; रछ करो सरबंग ॥१३॥ छुरी कलम रिपु करद भनि; खंजर बुगदा नाइ ॥ अरध रिजक सभ जगत को! मुहि तुम लेहु बचाइ ॥१४॥ प्रिथम उपावहु जगत तुम; तुम ही पंथ बनाइ ॥ आप तुही झगरा करो; तुम ही करो सहाइ ॥१५॥ |
| मछ कछ बाराह तुम; तुम बावन अवतार ॥
नारसिंघ बऊधा तुही; तुही जगत को सार ॥१६॥ तुही राम स्री क्रिसन तुम; तुही बिसनु को रूप ॥ तुही प्रजा सभ जगत की; तुही आप ही भूप ॥१७॥ तुही बिप्र छत्री तुही; तुही रंक अरु राउ ॥ साम दाम अरु डंड तूं; तुम ही भेद उपाउ ॥१८॥ सीस तुही काया तुही; तै प्रानी के प्रान ॥ तै बिद्या जुग बकत्र हुइ; करे बेद बख्यान ॥१९॥ बिसिख बान धनुखाग्र भन; सर कैबर जिह नाम ॥ तीर खतंग ततारचो; सदा करो मम काम ॥२०॥ तूणीरालै सत्र अरि; म्रिग अंतक ससिबान ॥ तुम बैरण प्रथमै हनो; बहुरो बजै क्रिपान ॥२१॥ तुम पाटस पासी परस; परम सिधि की खान ॥ ते जग के राजा भए; दीअ तव जिह बरदान ॥२२॥ सीस सत्रु अरि अरियारि असि; खंडो खड़ग क्रिपान ॥ सत्रु सुरेसर तुम कीयो; भगत आपुनो जानि ॥२३॥ जमधर जमदाड़ा जबर; जोधांतक जिह नाइ ॥ लूट कूट लीजत तिनै; जे बिनु बांधे जाइ ॥२४॥ बांक बज्र बिछुओ बिसिख; बिरह बान सभ रूप ॥ जिन को तुम किरपा करी; भए जगत के भूप ॥२५॥ ससत्रेसर समरांत करि; सिपरारि समसेर ॥ मुकत जाल जम के भए; जिनै गह्यो इक बेर ॥२६॥ सैफ सरोही सत्रु अरि; सारंगारि जिह नाम ॥ सदा हमारे चिति बसो; सदा करो मम काम ॥२७॥ इति स्री नाम माला पुराणे स्री भगउती उसतति प्रिथम धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१॥
ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਚਕ੍ਰ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री चक्र के नाम ॥ दोहरा ॥ कवच सबद प्रिथमै कहो; अंत सबद अरि देहु ॥ सभ ही नाम क्रिपान के; जान चतुर जीअ लेहु ॥२८॥ सत्रु सबद प्रिथमै कहो; अंत दुसट पद भाखु ॥ सभै नाम जगंनाथ को; सदा ह्रिदै मो राखु ॥२९॥ प्रिथी सबद प्रिथमै भनो; पालक बहरि उचार ॥ सकल नामु स्रिसटेस के; सदा ह्रिदै मो धार ॥३०॥ सिसटि नाम पहले कहो; बहुरि उचारो नाथ ॥ सकल नामु मम ईस के; सदा बसो जीअ साथ ॥३१॥ |
| सिंघ सबद भाखो प्रथम; बाहन बहुरि उचारि ॥
सभै नाम जग मात के; लीजहु सुकबि! सुधारि ॥३२॥ रिपु खंडन मंडन जगत; खल खंडन जग माहि ॥ ता के नाम उचारीऐ; जिहे सुनि दुख टरि जाहि ॥३३॥ सभ ससत्रन के नाम कहि; प्रिथम अंत पति भाखु ॥ सभ ही नाम क्रिपान के; जाण ह्रिदै महि राखु ॥३४॥ खत्रियांकै खेलक खड़ग; खग खंडो खत्रिआरि ॥ खेलांतक खलकेमरी; असि के नाम बिचार ॥३५॥ भूतांतकि स्री भगवती; भवहा नाम बखान ॥ सिरी भवानी भै हरन; सभ को करौ कल्यान ॥३६॥ अड़िल ॥ भूत सबद कौ भाखि; बहुरि अरि भाखीऐ ॥ सभ असि जू के नाम; जान जीअ राखीऐ ॥ नाम म्रिगन सभ कहि; धनुसर उचारीऐ ॥ हो सभ खंडे के नाम; सति जीअ धारीऐ ॥३७॥ दोहरा ॥ प्रिथम नाम जम को उचरि; बहुरो रदन उचारि ॥ सकल नाम जमदाड़ के; लीजहु सुकबि सुधारि ॥३८॥ उदर सबद प्रिथमै कहो; पुनि अरि सबद उचार ॥ नाम सभै जमदाड़ के; लीजहु सुकबि बिचार ॥३९॥ म्रिग ग्रीवा सिर अरि उचरि; पुनि असि सबद उचार ॥ सभै नाम स्री खड़ग के; लीजो ह्रिदै बिचारि ॥४०॥ करी करांतक कसट रिपु; कालायुध करवारि ॥ कराचोल क्रिपान के; लीजहु नाम सुधार ॥४१॥ हसति करी कर प्रिथम कहि; पुनि अरि सबद सुनाइ ॥ ससत्र राज के नाम सब; मोरी करहु सहाइ ॥४२॥ सिरी सरोही सेरसम; जा सम अउर न कोइ ॥ तेग जापु तुमहूं जपो; भलो तुहारो होइ ॥४३॥ खग म्रिग जछ भुजंग गन; ए पद प्रिथम उचारि ॥ फुनि अरि सबद उचारीऐ; जान तिसै तरवारि ॥४४॥ हलबि जुनबी मगरबी; मिसरी ऊना नाम ॥ सैफ सरोही ससत्रपति; जित्यो रूम अरु साम ॥४५॥ कती यामानी हिंदवी; सभ ससत्र के नाथ ॥ लए भगउती निकस है; आप कलंकी हाथि ॥४६॥ प्रिथम सकति पद उचरि कै; पुनि कहु सकति बिसेख ॥ नाम सैहथी के सकल; निकसत जाहि अनेक ॥४७॥ प्रिथम सुभट पद उचरि कै; बहुरि सबद अरि देहु ॥ नाम सैहथी के सभै; समझि चतुर चित लेहु ॥४८॥ |
| प्रिथम भाख संनाह पदु; पुनि रिपु सबद उचारि ॥
नाम सैहथी के सकल; चतुर चित! निज धारि ॥४९॥ उचरि कु्मभ प्रिथमै सबद; पुनि अरि सबद कहो ॥ नाम सैहथी के सभै; चित महि चतुर लहो ॥५०॥ तनु त्रान पद प्रिथम कहि; पुनि अरि सबद बखान ॥ नाम सैहथी के सभै; रुचिर चतुर चित जान ॥५१॥ यसटीसर को प्रिथम कहि; पुनि बच कहु अरधंग ॥ नाम सैहथी के सभै; उचरत जाहु निसंग ॥५२॥ सांग समर कर सैहथी; ससत्र ससन कु्मभेस ॥ सबल सु भटहा हाथ लै; जीते समर सुरेस ॥५३॥ छत्रधर म्रिगहा बिजै करि; भटहा जा को नाम ॥ सकल सिध दात्री सभन; अमित सिध को धाम ॥५४॥ लछमन अउर घटोतकच; ए पद प्रिथम उचारि ॥ पुनि अरि भाखो सकति के; निकसहि नाम अपार ॥५५॥ गड़ीआ भसुडी भैरवी; भाला नेजा भाखु ॥ बरछी सैथी सकति सभ; जान ह्रिदै मै राखु ॥५६॥ बिसनु नाम प्रिथमै उचरि; पुनि पद ससत्र उचारि ॥ नाम सुदरसन के सभै; निकसत जाहि अपार ॥५७॥ मुर पद प्रिथम उचारि कै; मरदन बहुरि कहो ॥ नाम सुदरसन चक्र के; चित मै चतुर लहो ॥५८॥ मधु को नाम उचारि कै; हा पद बहुरि उचारि ॥ नाम सुदरसन चक्र के; लीजै सुकबि सुधारि ॥५९॥ नरकासुर प्रिथमै उचरि; पुनि रिपु सबद बखान ॥ नाम सुदरसन चक्र को; चतुर चित मै जान ॥६०॥ दैत बकत्र को नाम कहि; सूदन बहुरि उचार ॥ नाम सुदरसन चक्र को; जान चित निरधार ॥६१॥ प्रिथम चंदेरी नाथ को; लीजै नाम बनाइ ॥ पुनि रिपु सबद उचारीऐ; चक्र नाम हुइ जाइ ॥६२॥ नरकासुर को नाम कहि; मरदन बहुरि उचार ॥ नाम सुदरसन चक्र को; लीजहु सुकबि! सु धार ॥६३॥ किसन बिसन कहि जिसनु अनुज; आयुध बहुरि उचार ॥ नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलहि अपार ॥६४॥ बज्र अनुज प्रिथमै उचर; फिरि पद ससत्र बखान ॥ नाम सुदरसन चक्र के; चतुर! चित मै जान ॥६५॥ प्रिथम बिरह पद उचरि कै; पुनि कहु ससत्र बिसेख ॥ नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै असेख ॥६६॥ |
| प्रिथमै वहै उचारीऐ; रिध सिध को धाम ॥
पुनि पद ससत्र बखानीऐ; जानु चक्र के नाम ॥६७॥ गिरधर प्रिथम उचारि पद; आयुध बहुरि उचारि ॥ नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै अपार ॥६८॥ काली नथीआ प्रिथम कहि; ससत्र सबद कहु अंति ॥ नाम सुदरसन चक्र के; निकसत जाहि अनंत ॥६९॥ कंस केसिहा प्रथम कहि; फिरि कहि ससत्र बिचारि ॥ नाम सुदरसन चक्र के; लीजहु सुकबि सु धार ॥७०॥ बकी बकासुर सबद कहि; फुनि बच सत्रु उचार ॥ नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै अपार ॥७१॥ अघ नासन अघहा उचरि; पुनि बच ससत्र बखान ॥ नाम सुदरसन चक्र के; सभै चतुर चिति जान ॥७२॥ स्री उपेंद्र के नाम कहि; फुनि पद ससत्र बखान ॥ नाम सुदरसन चक्र के; सबै समझ सुर गिआन ॥७३॥ कबियो बाच दोहरा ॥ सबै सुभट अउ सभ सुकबि! यौ समझो मन माहि ॥ बिसनु चक्र के नाम मै; भेद कउनहूं नाहि ॥७४॥ इति स्री नाम माला पुराणे चक्र नाम दुतीय धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥२॥
ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਬਾਣ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री बाण के नाम ॥ दोहरा ॥ बिसिख बाण सर धनुज भन; कवचांतक के नाम ॥ सदा हमारी जै करो; सकल करो मम काम ॥७५॥ धनुख सबद प्रिथमै उचरि; अग्रज बहुरि उचार ॥ नाम सिलीमुख के सभै; लीजहु चतुर सुधार ॥७६॥ पनच सबद प्रिथमै उचरि; अग्रज बहुरि उचार ॥ नाम सिलीमुख के सभै; निकसत चलै अपार ॥७७॥ नाम उचारि निखंग के; बासी बहुरि बखान ॥ नाम सिलीमुख के सभै; लीजहु ह्रिदै पछान ॥७८॥ सभ म्रिगयन के नाम कहि; हा पद बहुरि उचार ॥ नाम सभै स्री बान के; जाणु ह्रिदै निरधार ॥७९॥ सकल कवच के नाम कहि; भेदक बहुरि बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; निकसत चलै प्रमान ॥८०॥ नाम चरम के प्रिथम कहि; छेदक बहुरि बखान ॥ नाम सबै ही बान के; चतुर चित मै जानु ॥८१॥ |
| सुभट नाम उचारि कै; हा पद बहुरि सुनाइ ॥
नाम सिलीमुख के सबै; लीजहु चतुर बनाइ ॥८२॥ सभ पछन के नाम कहि; पर पद बहुरि बखान ॥ नाम सिलीमुख के सबै; चित मै चतुरि पछान ॥८३॥ पंछी परी सपंख धर; पछि अंतक पुनि भाखु ॥ नाम सिलीमुख के सभै; जान ह्रिदै मै राखु ॥८४॥ सभ अकास के नाम कहि; चर पद बहुरि बखान ॥ नाम सिलीमुख के सभै; लीजै चतुर पछान ॥८५॥ खं अकास नभि गगन कहि; चर पद बहुरि उचारु ॥ नाम सकल स्री बान के; लीजहु चतुर! सु धार ॥८६॥ असमान सिपिहर सु दिव; गरदूं बहुरि बखानु ॥ पुनि चर सबद बखानीऐ; नाम बान के जान ॥८७॥ प्रिथम नाम कहि चंद्र के; धर पद बहुरो देहु ॥ पुनि चर सबद उचारीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥८८॥ गो मरीच किरनं छटा; धर, धर कहि मन माहि ॥ चर पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान हुइ जाहि ॥८९॥ रजनीसर दिनहा उचरि; धर धर पद कहि अंति ॥ नाम सकल स्री बान के; निकरत जाहि अनंत ॥९०॥ रात्रि निसा दिन घातनी; चर धर सबद बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; करीअहु चतुर! बखिआन ॥९१॥ ससि उपराजनि रवि हरनि; चर को लै कै नाम ॥ धर कहि, नाम ए बान के; जपो आठहूं जाम ॥९२॥ रैन अंधपति महा निसि; निसि ईसर निसि राज ॥ चंद्र बान चंद्रहि धर्यो; चित्रन के बध काज ॥९३॥ सभ किरनन के नाम कहि; धर पद बहुरि उचार ॥ पुनि धर कहु सभ बान के; जानु नाम निरधार ॥९४॥ सभ समुंदर के नाम लै; अंति सबद सुत देहु ॥ पुनि धर सबद उचारीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९५॥ जलपति जलालै नदी पति; कहि सुत पद को देहु ॥ पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९६॥ नीरालै सरताधिपति कहि; सुत पद को देहु ॥ पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९७॥ सभै झखन के नाम लै; बिरीआ कहि ले एक ॥ सुत धर कहु सभ नाम सर; निकसत जाहि अनेक ॥९८॥ सभ जल जीवनि नाम लै; आस्रै बहुरि बखान ॥ सुत धर बहुरि बखानीऐ; नाम बान सभ जान ॥९९॥ |
| धरी नगन के नाम कहि; धर सुत पुनि पद देहु ॥
पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१००॥ बासव कहि अरि उचरीऐ; धर सुत धर पुनि भाखु ॥ नाम सकल स्री बान के; जान जीअ मै राखु ॥१०१॥ पुहप धनुख के नाम कहि; आयुध बहुरि उचार ॥ नाम सकल स्री बान के; निकसत चलै अपार ॥१०२॥ सकल मीन के नाम कहि; केतुवायुध कहि अंत ॥ नाम सकल स्री बान के; निकसत जाहि अनंत ॥१०३॥ पुहप आदि कहि धनुख कहि; धर आयुधहि बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; निकसत जात अप्रमान ॥१०४॥ आदि भ्रमर कहि पनच कहि; धर धर सबद बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; जानहु गुनन निधान ॥१०५॥ सभ भलकन के नाम कहि; आदि अंति धर देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; चीन चतुर! चित लेहु ॥१०६॥ सोरठा ॥ जिह धर प्रिथम बखान; तिह सुत बहुरि बखानीऐ ॥ सर के नाम अपार; चतुर! चित मै जानीऐ ॥१०७॥ दोहरा ॥ बिस के नाम उचरि कै; बिख पद बहुरि बखान ॥ नाम सकल ही बाण के; लीजो चतुर पछान ॥१०८॥ बा पद प्रिथम बखानि कै; पुनि नकार पद देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; जान चतुर! चिति लेहु ॥१०९॥ कानी नाम बखानि कै; धर पद बहुरि बखान ॥ हिरदै समझो चतुर! तुम; सकल नाम ए बान ॥११०॥ फोक सबद प्रिथमै उचरि; धर पद बहुरौ देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; चतुर! ह्रिदै लखि लेहु ॥१११॥ पसुपति प्रथम बखानि कै; अस्र सबद पुनि देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; चिति चतुर! लखि लेहु ॥११२॥ सहस नाम सिव के उचरि; अस्र सबद पुनि देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; चतुर! चीन चिति लेहु ॥११३॥ प्रिथम करन के नाम कहि; पुनि अरि सबद बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; लीजो! चतुर पछान ॥११४॥ भानजांत करनांत करि; ऐसी भांति बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; चतुर! लीजीअह जान ॥११५॥ सभ अरजुन के नाम कहि; आयुध सबद बखान ॥ नाम सकल स्री बान के; लीजहु चतुर! पछान ॥११६॥ |
| जिसन धनंजै क्रिसन भनि; स्वेतवाह लै नाइ ॥
आयुध बहुरि बखानीअहु; सबै बान हुइ जाइ ॥११७॥ अरजुन पारथ केसगुड़; साची सबय बखान ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान के जान ॥११८॥ बिजै कपीधुज जैद्रथरि; सूरज जारि फुनि भाखु ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान लखि राखु ॥११९॥ तिमररि बल ब्रत निसच हा; कहि सुत बहुरि उचार ॥ आयुध उचरि स्री बान के; निकसहि नाम अपार ॥१२०॥ सहस्र बिसन के नाम लै; अनुज सबद कौ देहु ॥ तनुज उचरि पुनि ससत्र कहि; नामु बानु लखि लेहु ॥१२१॥ नरकि निवारन अघ हरन; क्रिपा सिंध कौ भाखु ॥ अनुज तनुज कहि ससत्र कहु; नाम बान लखि राखु ॥१२२॥ बिघन हरन बिआधनि दरन; प्रिथमय सबद बखान ॥ अनुज तनुज कहि ससत्र कहु; नाम बान जीअ जान ॥१२३॥ मकर केतु कहि मकर धुज; पुनि आयुध पदु देहु ॥ सभै नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥१२४॥ पुहप धनुख अलि पनच के; प्रिथमै नाम बखान ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; जानु नाम सभ बान ॥१२५॥ स्मबरारि त्रिपुरारि अरि; प्रिथमै सबद बखान ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान के मान ॥१२६॥ स्री सारंगग्रा बीरहा; बलहा बान बखान ॥ बिसिख बिसी बासी धरन; बान नाम जीअ जान ॥१२७॥ बिख के प्रिथमे नाम कहि; धर पद बहुरौ देहु ॥ नाम सकल स्री बान के; चतुर! चिति लखि लेहु ॥१२८॥ सकल सिंधु के नाम लै; तनै सबद कौ देहु ॥ धर पद बहुर बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१२९॥ उदधि सिंधु सरितेस जा; कहि धर बहुरि बखान ॥ बंसीधर के नाम सभ; लीजहु चतुर पछान ॥१३०॥ बध नासनी बीरहा; बिख बिसखाग्रज बखान ॥ धर पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान के मान ॥१३१॥ सभ मनुखन के नाम कहि; हा पद बहुरो देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; चतुर चिति लखि लेहु ॥१३२॥ कालकूट कहि कसटकरि; सिवकंठी अहि उचारि ॥ धर पद बहुरि बखानीऐ; जानु बान निरधार ॥१३३॥ सिव के नाम उचारि कै; कंठी पद पुनि देहु ॥ पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१३४॥ बिआधि बिखी मुखि प्रिथम कहि; धर पद बहुरि बखान ॥ नाम सभै ए बान के; लीजो चतुर पछान ॥१३५॥ खपरा नालिक धनुख सुत; लै सु कमानज नाउ ॥ सकर कान नरांच भनि; धर सभ सर के गांउ ॥१३६॥ बारिद जिउ बरसत रहै; जसु अंकुर जिह होइ ॥ बारिद सो बारिद नही; ताहि बतावहु कोइ ॥१३७॥ बिखधर बिसी बिसोककर; बारणारि जिह नाम ॥ नाम सबै स्री बान के; लीने होवहि काम ॥१३८॥ |
| अरि बेधन छेदन लह्यो; बेदन कर जिह नाउ ॥
रछ करन अपनान की; परो दुसट के गाउ ॥१३९॥ जदुपतारि बिसनाधिप अरि; क्रिसनांतक जिह नाम ॥ सदा हमारी जै करो; सकल करो मम काम ॥१४०॥ हलधर सबद बखानि कै; अनुज उचरि अरि भाखु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीनि चतुर! चित राखु ॥१४१॥ रउहणाय मुसली हली; रेवतीस बलराम ॥ अनुज उचरि पुनि अरि उचरि; जानु बान के नाम ॥१४२॥ तालकेतु लागलि उचरि; क्रिसनाग्रज पद देहु ॥ अनुज उचरि अरि उचरीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१४३॥ नीलांबर रुकमिआंत कर; पऊराणिक अरि भाखु ॥ अनुज उचरि अरि उचरीऐ; नाम बान लखि राखु ॥१४४॥ सभ अरजुन के नाम लै; सूत सबद पुनि देहु ॥ पुनि अरि सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१४५॥ प्रिथम पवन के नाम लै; सुत पद बहुरि बखान ॥ अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान पहिचानु ॥१४६॥ मारुत पवन घनांतकर; कहि सुत सबद उचारि ॥ अनुज उचरि सूतरि उचरि; सर के नाम बिचारु ॥१४७॥ सरब बिआपक सरबदा; सल्यजन सु बखान ॥ तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान के जान ॥१४८॥ प्रिथम बार के नाम लै; पुनि अरि सबद बखान ॥ तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१४९॥ प्रिथम अगनि के नाम लै; अंति सबद अरि देहु ॥ तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५०॥ प्रिथम अगनि के नाम लै; अंति सबदि अरि भाखु ॥ तनुज अनुज कहि अरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५१॥ प्रिथम अगनि के नाम लै; अरि अरि पद पुनि देहु ॥ तनुज अनुज कहि अरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५२॥ पावकारि अगनांत कर; कहि अरि सबद बखान ॥ अरि कहि अनुज तनुज उचरि; सूतरि, बान पछान ॥१५३॥ हिम बारि बकहा गदी; भीम सबद पुनि देहु ॥ तनुज अनुज सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५४॥ दुरजोधन के नाम लै; अंतु सबद अरि देहु ॥ अनुज उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५५॥ |
| अंध सुतन के नाम लै; अंति सबद अरि भाखु ॥
अनुज उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५६॥ दुसासन दुरमुख द्रुजै; कहि अरि सबद बखान ॥ अनुजा उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१५७॥ दसला करभिख आदि कहि; अंति सबद अरि भाखु ॥ अनुज तनुज सत्रु उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५८॥ प्रिथम भीखम के नाम लै; अंति सबद अरि देहु ॥ सुत आदि अंतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५९॥ तटति जानवी अग्रजा; प्रिथमै सबद बखान ॥ तनुज सत्रु सुतअरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६०॥ गंगा गिरिजा प्रिथम कहि; पुत्र सबद पुनि देहु ॥ सत्रु उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१६१॥ नाकाले सरितेसरी; प्रिथमै सबद उचारि ॥ सुतअरि कहि सूतरि उचरि; सभ सर नाम उचारि ॥१६२॥ भीखम सांतनु सुत उचरि; पुनि अरि सबद बखान ॥ सूत उचरि अंत अरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६३॥ गांगेय नदीअज उचरि; सरितज सत्रु बखान ॥ सूत उचरि अंत अरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६४॥ तालकेतु सवितास भनि; आदि अंत अरि देहु ॥ सूत उचरि रिपु पुनि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१६५॥ प्रिथम द्रोण कहि सिख्य कहि; सूतरि बहुरि बखान ॥ नाम बान के सकल ही; लीजो चतुर! पछान ॥१६६॥ भारद्वाज द्रोणज पिता; उचरि सिख्य पद देहु ॥ सूतरि बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१६७॥ सोरठा ॥ प्रिथम जुधिसटर भाखि; बंधु सबद पुनि भाखयै ॥ जान ह्रिदै मै राखु; सकल नाम ए बान के ॥१६८॥ दोहरा ॥ दुउभया पंचालि पति; कहि पुनि भ्रात उचारि ॥ सुत अरि कहि सभ बान के; लीजो नाम सु धारि ॥१६९॥ धरमराज धरमज उचरि; बंधु सबद पुनि देहु ॥ सूतरि बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१७०॥ कालज धरमज सलरिपु; कहि पद बंधु बखान ॥ सूतरि बहुरि बखानीयै; सभ सर नाम पछान ॥१७१॥ बईवसत पद प्रिथम कहि; पुनि सुत सबद बखानि ॥ बंधु उचरि सूतरि उचरि; सभ सर नाम पछान ॥१७२॥ |
| प्रिथम सूरज के नाम लै; बहुरि पुत्र पद भाखि ॥
अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१७३॥ कालिंद्री को प्रिथम कहि; पुनि पद अनुज बखान ॥ तनुज उचरि अनुज अग्र कहि; सर के नाम पछान ॥१७४॥ जमुना कालिंद्री अनुज; कहि सुत बहुरि बखान ॥ अनुज उचरि, सूतरि उचरि; सर के नाम पछान ॥१७५॥ पंडु पुत्र कुर राज भनि; बहुरि अनुज पदु देहु ॥ सुत उचारि अंति अरि उचरि; नाम बान लख लेहु ॥१७६॥ जऊधिसटर भीमाग्र भनि; अरजुनाग्र पुनि भाखु ॥ सुत आदि अंति अरि उचरि; नाम बानु लखि राखु ॥१७७॥ नुकल बंधु सहिदेव अनुज; कहि पद बंधु उचारि ॥ सुत आदि अंत अरि उचरि; सर के नाम बिचार ॥१७८॥ जागसेनि को प्रिथम कहि; पति पद बहुरि उचारि ॥ अनुज आदि सूतांत करि; सभ सरु नाम अपार ॥१७९॥ प्रिथम द्रोपदी द्रुपदजा; उचरि सु पति पद देहु ॥ अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१८०॥ ध्रिसटु द्रुमनुजा प्रिथम कहि; पुनि पति सबद बखान ॥ अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान के जान ॥१८१॥ द्रुपत द्रोण रिपु प्रिथम कहि; जा कहि पति पुनि भाखि ॥ अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१८२॥ प्रिथम नाम लै द्रुपत को; जामाता पुनि भाखि ॥ अनुज उचर सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१८३॥ प्रिथम द्रोण को नाम लै; अरि पद बहुरि उचारि ॥ भगनी कहि पति भ्रात कहि; सूतरि बान बिचार ॥१८४॥ असुर राज सुतांत करि; बिसिख बारहा बान ॥ तूनीरप दुसटांत करि; नाम तीर के जान ॥१८५॥ माद्री सबद प्रिथमे कहो; सुत पद बहुरि बखान ॥ अग्र अनुज सूतरि उचरि; सर के नाम पछान ॥१८६॥ सुग्रीव को प्रिथम कहि; अरि पद बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर पछान ॥१८७॥ दस ग्रीव दस कंठ भनि; अरि पद बहुरि उचार ॥ सकल नाम एह बान के; लीजहु चतुर सुधार ॥१८८॥ प्रिथम जटायु बखान कै; अरि पद बहुरि बखान ॥ रिपु पद बहुरि उचारीयै; सर के नाम पछान ॥१८९॥ |
| रावन रसासुर प्रिथम भनि; अंति सबद अरि देहु ॥
सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥१९०॥ प्रिथम मेघ के नाम लै; अंत सबद धुनि देहो ॥ पिता उचरि अरि सबद कहु; नाम बान लखि लेहु ॥१९१॥ मेघनाद भन जलदधुनि; पुनि घननिसन उचारि ॥ पित कहि अरि कहि बाण के; लीजहु नाम सु धार ॥१९२॥ अ्मबुद धुनि भनि नाद घन; पुनि पित सबद उचारि ॥ अरि पदि बहुरि बखानीयै; सर के नाम विचार ॥१९३॥ धाराधर पद प्रिथम कहि; धुनि पद बहुरि बखानि ॥ पित कहि अरि सबदो उचरि; नाम बान के जान ॥१९४॥ प्रिथम सबद के नाम लै; परध्वनि पुनि पद देहु ॥ धुनि उचारि अरि उचरीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१९५॥ जलद सबद प्रिथमै उचरि; नाद सबद पुनि देहु ॥ पिता उचरि अरि उचरीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१९६॥ प्रिथम नीर के नाम लै; धर धुनि बहुरि बखान ॥ तात आदि अंत अरि उचरि; नाम बान के जान ॥१९७॥ धारा प्रिथम उचारि कै; धर पद बहुरो देह ॥ पित कहि अरि पद उचरौ; नाम बान लखि लेहु ॥१९८॥ नीर बारि जल धर उचरि; धुनि पद बहुरि बखानि ॥ तात उचरि अरि उचरीयै; नाम बान पहिचान ॥१९९॥ पानी प्रिथम उचारि कै; धर पद बहुरि बखान ॥ धुनि पित अरि कहि बान के; लीजहु नाम पछान ॥२००॥ घन सुत प्रिथम बखानि कै; धर धुनि बहुरि बखान ॥ तात उचरि अरि उचरीयै; सर के नाम पछान ॥२०१॥ आबद धुनि कहि पित उचरि; अरि ते गुनन निधान ॥ सकल नाम ए बान के; लीजहु ह्रिदै पछान ॥२०२॥ धार बारि कहि उचरि कै; धर धुनि बहुरि बखान ॥ तात उचरि अरि उचरीयै; नाम बान के जान ॥२०३॥ नीरद प्रिथम उचार के; धुनि पद बहुरि बखान ॥ पित कहि अरि कहि बान के; लीजहु नाम पछान ॥२०४॥ घनज सबद को उचरि कै; धुनि पद बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; लीजो चतुर! पछान ॥२०५॥ मतस सबद प्रिथमै उचरि; अछ सबद पुनि देहु ॥ अरि पद बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥२०६॥ |
| प्रिथम मीन को नाम लै; चखु रिपु बहुरि बखान ॥
सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर! पछान ॥२०७॥ मकर सबद प्रिथमै उचरि; चखु रिपु बहुर बखान ॥ सबै नाम स्री बान के; लीजो चतुर! पछान ॥२०८॥ झख पद प्रिथम बखानि कै; चखु रिपु बहुरि बखान ॥ सभे नाम स्री बान के; लीजै चतुर! पछान ॥२०९॥ सफरी नेत्र बखानि कै; अरि पद बहुरि उचार ॥ सकल नाम स्री बान के; लीजो सु कवि! सु धार ॥२१०॥ मछरी चछु बखानि कै; अरि पद बहुर उचार ॥ नाम सकल स्री बान के; लीजो चतुर सुधार ॥२११॥ जलचर प्रिथम बखानि कै; चखु पद बहुरि बखान ॥ अरि कहि सभ ही बान के; लीजो नाम पछान ॥२१२॥ बकत्रागज पद उचरि कै; मीन सबद अरि देहु ॥ नाम सिलीमुख के सभै; चीन चतुर चिति लेहु ॥२१३॥ प्रिथम नाम लै मीन के; केतु सबद पुनि देहु ॥ चखु कहि अरि कहि बान के; नाम चीन चिति लेहु ॥२१४॥ स्मबरारि पद प्रिथम कहि; चखु धुज पद पुनि देहु ॥ अरि कहि सभ ही बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२१५॥ प्रिथम पिनाकी पद उचरि; अरि धुज नेत्र उचारि ॥ अरि कहि सभ ही बान के; लीजहु नाम सु धार ॥२१६॥ महारुद्र अरिधुज उचरि; पुनि पद नेत्र बखान ॥ अरि कहि सभ स्री बान के; नाम ह्रिदै पहिचान ॥२१७॥ त्रिपुरांतक अरि केतु कहि; चखु अरि बहुरि उचार ॥ नाम सकल ए बान के; लीजहु सुकबि सु धार ॥२१८॥ कारतकेअ पितु प्रिथम कहि; अरि धुज नेत्र बखानि ॥ अरि पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान पहिचान ॥२१९॥ बिरल बैरि करि बारहा; बहुलांतक बलवान ॥ बरणांतक बलहा बिसिख; बीर पतन बर बान ॥२२०॥ प्रिथम सललि कौ नाम लै; धर अरि बहुरि बखानि ॥ केतु चछु अरि उचरीयै; नाम बान के जान ॥२२१॥ कारतकेअ पद प्रिथम कहि; पितु अरि केतु उचारि ॥ चखु अरि कहि सभ बान के; लीजहु नाम सु धार ॥२२२॥ प्रिथम पिनाकी पानि कहि; रिपु धुज चखु अरि देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२२३॥ |
| पसु पति सुरिधर अरि उचरि; धुज चखु सत्रु बखान ॥
सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२२४॥ पारबतीस अरि केतु चखु; कहि रिपु पुनि पद देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२२५॥ ससत्र सांग सामुहि चलत; सत्रु मान को खाप ॥ सकल स्रिसट जीती तिसै; जपीअतु ता को जापु ॥२२६॥ सकल स्मभु के नाम लै; अरि धुज नेत्र बखानि ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलत अप्रमान ॥२२७॥ प्रिथम नाम लै सत्रु को; अरदन बहुरि उचार ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अपार ॥२२८॥ सकल म्रिग सबद आदि कहि; अरदन पद कहि अंति ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अनंत ॥२२९॥ कु्मभकरन पद आदि कहि; अरदन बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२३०॥ रिपु समुद्र पित प्रिथम कहि; कान अरि भाखो अंति ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलहि अनंत ॥२३१॥ प्रिथम नाम दसग्रीव के; लै बंधु अरि पद देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२३२॥ खोल खड़ग खत्रिअंत करि; कै हरि पदु कहु अंति ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अनंत ॥२३३॥ कवच क्रिपान कटारीअहि; भाखि अंति अरि भाखु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चित महि राखु ॥२३४॥ प्रिथम ससत्र सभ उचरि कै; अंति सबद अरि देहु ॥ सरब नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२३५॥ सूल सैहथी सत्रु हा; सिप्रादर कहि अंति ॥ सकल नाम स्री बान के; निकसत चलहि अनंत ॥२३६॥ समर संदेसो सत्रुहा; सत्रांतक जिह नाम ॥ सभै बरन रछा करन; संतन के सुख धाम ॥२३७॥ बर पद प्रिथम बखानि कै; अरि पद बहुरि बखान ॥ नाम सत्रुहा के सभै; चतुर चित महि जान ॥२३८॥ दखण आदि उचारि कै; सखण अंति उचार ॥ दखण कौ भखण दीओ; सर सौ राम कुमार ॥२३९॥ रिसरा प्रिथम बखानि कै; मंडरि बहुरि बखान ॥ रिसरा को बिसिरा कीयो; स्री रघुपति के बान ॥२४०॥ बली ईस दस सीस के; जाहि कहावत बंधु ॥ एक बान रघुनाथ के; कीयो कबंध कबंध ॥२४१॥ प्रिथम भाखि सुग्रीव पद; बंधुरि बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; जानीअहु बुधि निधान! ॥२४२॥ |
| अंगद पितु कहि प्रिथम पद; अंत सबद अरि देहु ॥
सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर! चिति लेहु ॥२४३॥ हनूमान के नाम लै; ईस अनुज अरि भाखु ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चित महि राखु ॥२४४॥ ससत्र सबद प्रिथमै उचरि; अंति सबद अरि देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; जान अनेकनि लेहु ॥२४५॥ असत्र सबद प्रिथमै उचरि; अंति अरि सबद बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर पछान ॥२४६॥ प्रिथम चरम के नाम लै; सभ अरि पद कहि अंत ॥ सकल नाम सत्रांत के; निकसत चलहि बिअंत ॥२४७॥ तनु त्रान के नाम सभ; उचरि अंति अरि देहु ॥ सकल नाम स्री बान के; ता सिउ कीजै नेहु ॥२४८॥ सकल धनुख के नाम कहि; अरदन बहुरि उचार ॥ सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर निरधार ॥२४९॥ प्रिथम नाम लै पनच के; अंतक बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; करीअहु चतुर बखिआन ॥२५०॥ सर पद प्रिथम बखानि कै; अरि पद बहुर बखान ॥ सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२५१॥ म्रिग पद प्रिथम बखानि कै; हा पद बहुरि बखान ॥ म्रिगहा पद यह होत है; लीजहु चतुर पछान ॥२५२॥ इति स्री नाम माला पुराणे स्री बान नाम त्रितीय धिआइ समापतम सतु सुभम सुत ॥३॥
ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਪਾਸਿ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री पासि के नाम ॥ दोहरा ॥ बीर ग्रसितही ग्रीव धर; बरुणायुध कहि अंत ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२५३॥ ग्रीव ग्रसितनि भव धरा; जलध राज हथीआर ॥ परौ दुसट के कंठ मै; मोकहु लेहु उबार ॥२५४॥ प्रिथम नदन के नाम लै; एस एस पद भाखि ॥ ससत्र उचरि सभ पासि के; नाम चीनि चिति राखु ॥२५५॥ गंगा एस बखानि कै; ईस ससत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२५६॥ जटज जानवी क्रितहा; गंगा ईस बखानु ॥ आयुध अंति बखानीऐ; नाम पासि के जान ॥२५७॥ सकल अघन के नाम लै; हा आयुध सु बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जान ॥२५८॥ किलबिख पाप बखानि कै; रिपु पति ससत्र बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२५९॥ अधरम पाप बखानि कै; नासनीस असत्र भाखि ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति राखि ॥२६०॥ |
| सकल जटनि को नाम लै; जा पति असत्र बखानि ॥
अमित नाम स्री पास के; चतुर चित महि जानु ॥२६१॥ तउसारा सत्रु बखानि कै; भेदक ग्रंथ बखान ॥ ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६२॥ गिरि पद प्रिथम बखानि कै; नासनि नाथ बखानि ॥ ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६३॥ फोकी नोकी पखधर; पत्री परी बखान ॥ पछी पछि अंतक कहो; सकल पासि के नाम ॥२६४॥ कसट सबद प्रिथमै उचरि; अघन सबद कहु अंति ॥ पति ससत्र भाखहु पासि के; निकसहि नाम अनंत ॥२६५॥ पब्या प्रिथम बखानि कै; भेदन ईस बखान ॥ ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६६॥ जलनाइक बारसत्रु भनि ससत्र सबद पुनि देहु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२६७॥ सभ गंगा के नाम लै; पति कहि ससत्र बखान ॥ सभै नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२६८॥ जमुना प्रिथम बखानि कै; एस असत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥२६९॥ कालिंद्री पद प्रिथम भनि; इंद्र सबद कहि अंति ॥ असत्र बहुरि कहु पासि के; निकसहि नाम अनंत ॥२७०॥ कालिनुजा पद प्रिथमह कहि; इसरासत्र पुनि भाखु ॥ सकल नाम स्री पास के; चीनि चतुर चिति राखु ॥२७१॥ क्रिसन बलभा प्रिथम कहि; इसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥२७२॥ सूरज पुत्रि को प्रिथम कहि; पति कहि ससत्र बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; लीजीअहु चतुर पछान ॥२७३॥ भानु आतजमा आदि कहि; अंत आयुध पद देहु ॥ सकल नाम ए पासि के; चीन चतुर चित लेहु ॥२७४॥ सूर आतजमा आदि कहि; अंति ससत्र पद दीन ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चित परबीन ॥२७५॥ काल पिता प्रथमै उचरि; अंति तनुज पदि देहु ॥ पति कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥२७६॥ दिवकर तनुजा प्रिथम कहि; पति कहि ससत्र बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२७७॥ |
| पासि ग्रीवहा कंठ रिपु; बरुणायुध जिह नाम ॥
परो दुसट के कंठ मै; करो हमारो काम ॥२७८॥ आदि कंठ के नाम लै; ग्राहक पद कहि अंति ॥ बरुणायुध के नाम सभु; निकसत चलत बिअंत ॥२७९॥ नारि कंठ गर ग्रीव भनि; ग्रहिता बहुरि बखान ॥ सकल नाम ए पासि के; निकसत चलत अप्रमान ॥२८०॥ जमुना प्रिथम बखानि कै; एसरायुधहिं बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर सुजान ॥२८१॥ का बरणादि बखानि कै; मंद बहुर पद देहु ॥ होत है नाम कमंद के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२८२॥ किसन आदि पद उचरि कै; बलभांति पद देहु ॥ पति असत्रांति उचारीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥२८३॥ बीर ग्रसतनी सुभटहा; कालायुध जिह नाम ॥ परो दुसट के कंठ मै; करो हमारो काम ॥२८४॥ काल अकाल कराल भनि; आयुध बहुरि बखानु ॥ सकल नाम ए पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२८५॥ आदि उचरीऐ सूरज पद; पूत उचरीऐ अंति ॥ ससत्र भाखीऐ पासि के; निकसहि नाम बिअंत ॥२८६॥ सकल सूरज के नाम लै; सुत पद असत्र बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८७॥ भानु दिवाकर दिनध भनि; सुत कहि असत्र बखानु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८८॥ दिनमणि दिवकरि रैणहा; सुत कहि असत्र बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८९॥ दिन को नाम बखानि कै; मणि पद बहुरि बखान ॥ सुत कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२९०॥ दिवकरि दिनपति निसरि भनि; दिन नाइक पुनि भाखु ॥ सुत कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि लखि राखु ॥२९१॥ सकल सूरज के नाम लै; सुत कहि असत्र बखानु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९२॥ जम पद प्रिथम बखानि कै; ससत्र सबद पुनि देहु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२९३॥ बईवसतु पद आदि कहि; आयुध अंति बखानु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९४॥ काल सबद को आदि कहि; असत्र सबद कहि अंत ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२९५॥ |
| पितर राज पद प्रिथम कहि; असत्र सबद पुनि देहु ॥
सकल नाम स्री पासि के; चतुर चीन चिति लेहु ॥२९६॥ दंडी प्रिथम बखानि कै; असत्र सबद कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर बिअंत ॥२९७॥ जमुना भ्रात बखान कै; आयुध बहुरि बखानु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९८॥ सभ जमुना के नाम लै; भ्रात असत्र पुनि देहु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चिति लखि लेहु ॥२९९॥ पितर सबद प्रिथमै उचरि; एसर बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३००॥ सभ पितरन के नाम लै; नाइक बहुरि बखान ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०१॥ सकल जगत के नाम लै; घाइक असत्र बखानु ॥ सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०२॥ रिपु खंडनि दल दाहनी; सत्रु तापनी सोइ ॥ सकल पासि के नाम सभ; जा ते बच्यो न कोइ ॥३०३॥ रिपु पद प्रिथम बखानि कै; ग्रसितनि बहुरि बखानु ॥ सकल नाम जम पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०४॥ खल पद आदि उचारि कै; खंडनि अंति बखान ॥ सकल नाम जम पासि के; चीनीअहु चतुर सुजान ॥३०५॥ दल दाहनि रिपु ग्रसितनी; सत्रु तापनी सोइ ॥ काल पासि के नाम सभ; जा ते रहित न कोइ ॥३०६॥ जा पद प्रिथम उचारि कै; मी पद अंति बखानु ॥ जामी पद ए होत है; नाम पासि के जानु ॥३०७॥ दिसा बारुणी प्रिथम कहि; एसरासत्र कहि अंति ॥ नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३०८॥ पछम आदि बखानि कै; एसर पुनि पद देहु ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३०९॥ प्रिथम ठगन के नाम लै; आयुध बहुरि बखान ॥ सकल नाम ए पासि के; चतुर चित पहिचान ॥३१०॥ बाटि आदि पद उचरि कै; हा पद असत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥३११॥ मग पद आदि बखानि कै; छिद पद अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजो चतुर पछान ॥३१२॥ मारग आदि बखानि कै; मार बखानहु अंति ॥ नाम पासि को होत है; निकसत चलै बिअंत ॥३१३॥ |
| पंथ आदि पद उचरि कै; करखण पुनि पद देहु ॥
आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३१४॥ बाट आदि सबद उचारि कै; हा असत्रांति बखान ॥ नाम पासि को होत है; चीनीअहु गुनन निधान ॥३१५॥ राह आदि पद उचरीऐ; रिपु कहि असत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३१६॥ प्रिथमै धन सबदो उचरि; हरता आयुध दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥३१७॥ माल आदि सबदोचरि कै; काल जाल कहि अंति ॥ सकल नाम इह पासि के; चीनीअहु प्रग्यावंत ॥३१८॥ माया हरन उचारि कै; आयुध बहुरि बखान ॥ सकल नाम ए पासि के; चतुर चित महि जान ॥३१९॥ मगहा पथहा पैंडहा; धनहा द्रिबहा सोइ ॥ जा को डारत सो सनो; पथक न उबर्यो कोइ ॥३२०॥ बिखीआ आदि बखानि कै; आयुध अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजीअहु चतुर सु धार ॥३२१॥ बिख सबदादि उचारि कै; दाइक असत्र बखान ॥ नाम पास के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३२२॥ चंद्रभगा के नाम लै; पति कहि असत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीनीअहु प्रग्यावान ॥३२३॥ सतुद्रव नाथ बखान कै; पुनि कहि असत्र बिसेख ॥ सकल नाम ए पासि के; निकसत चलतु असेख ॥३२४॥ सतलुज सबदादि बखानि कै; एसरासत्र कहि अंति ॥ नाम सकल है पास के; चीन लेहु बुधिवंत! ॥३२५॥ प्रिथम बिपासा नाम लै; एसरासत्र पुनि भाखु ॥ नाम सकल स्री पासि के; चीन चित मै राखु ॥३२६॥ रावी सावी आदि कहि; आयुध एस बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु प्रग्यावान ॥३२७॥ सावी ईस्रावी सभिन; आयुध बहुरि उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥३२८॥ जल सिंधु एस बखानि कै; आयुध अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! चित महि जान ॥३२९॥ बिहथि आदि सबदोचरि कै; एसरासत्र कहु अंति ॥ सकल नाम ए पासि के; चीन लेहु मतिवंत ॥३३०॥ सिंधु आदि सबद उचरि कै; आयुध अंति बखान ॥ नाम पासि के होत सभ; चीनहु प्रग्यावान ॥३३१॥ नील आदि सबदुचरि कै; एसर असत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु सुर गिआन ॥३३२॥ असित बारि सबदादि कहि; पति असत्रांति बखान ॥ नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥३३३॥ |
| किसना आदि उचारि कै; आयुध एस बखान ॥
नाम पास के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥३३४॥ सबद आदि कहि भीमरा; एसरासत्र कहि अंत ॥ नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवंत ॥३३५॥ तपती आदि उचारि कै; आयुध एस बखान ॥ नाम पास के होत है; सु जनि! सति करि जान ॥३३६॥ बारि राज समुंदेस भनि; सरित सरिध पति भाखु ॥ आयुध पुनि कहि पास के; चीन नाम चिति राखु ॥३३७॥ बरुण बीरहा आदि कहि; आयुध पुनि पद देहु ॥ नाम पास के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥३३८॥ नदी राज सरितीस भनि; समुंदराट पुनि भाखु ॥ आयुध अंति बखानीऐ; नाम पासि लखि राखु ॥३३९॥ ब्रहम पुत्र पद आदि कहि; एसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पासि के सकल ही; चीन लेहु मतिवंत ॥३४०॥ ब्रहमा आदि बखानि कै; अंति पुत्र पद देहु ॥ आयुध एस बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३४१॥ ब्रहमा आदि उचारि कै; सुत पद बहुरि बखान ॥ एसरासत्र पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४२॥ जगत पिता पद प्रिथम कहि; सुत पद अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीनीअहु प्रगिआवान! ॥३४३॥ घघर आदि उचारि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पास के होत है; चीनीअहु प्रगिआवंत! ॥३४४॥ आदि सुरसती उचरि कै; एसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पास के सकल ही; चीन लेहु मतिवंत! ॥३४५॥ आमू आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३४६॥ समुंद गामनी जे नदी; तिन के नाम बखानि ॥ ईसरासत्र पुनि उचारीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४७॥ सकल काल के नाम लै; आयुध बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥३४८॥ दुघध सबद प्रिथमै उचरि; निधि कहि ईस बखान ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४९॥ पानिधि प्रिथम बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम सकल स्री पासि के; चीनत चलै अनंत ॥३५०॥ स्रोनज आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखान ॥ आयुध भाखो पासि को; निकसत नाम प्रमान ॥३५१॥ |
| छितजज आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥
सकल नाम स्री पासि के; चीनहु प्रग्यावंत ॥३५२॥ इसत्रिन आदि बखानि कै; रज पद अंति उचारि ॥ ईसरासत्र कहि पासि के; लीजीऐ नाम सु धार ॥३५३॥ नारिज आदि उचारि कै; ईसरासत्र पद देहु ॥ नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर! चिति लेहु ॥३५४॥ चंचलान के नाम लै; जा कहि निधहि बखानि ॥ ईसरासत्र पुनि उचरीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५५॥ आदि नाम नारीन के; लै, जा अंति बखान ॥ निधि कहि ईसरासत्र कहि; नाम पासि पहिचान ॥३५६॥ बनिता आदि बखानि कै; जा कहि निधहि बखानि ॥ ईसरासत्र पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५७॥ इसत्रिज आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥ ईसरासत्र कहि फासि के; जानीअहु नाम सुजान ॥३५८॥ बनिता आदि बखानि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५९॥ अंजनान के नाम लै; जा कहि निधहि उचारि ॥ ईसरासत्र कहि पासि के; लीजहु नाम सु धार ॥३६०॥ बाला आदि बखानि कै; निधि कहि ईस बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३६१॥ अंजनीन के नाम लै; जा कहि निधहि बखानि ॥ ईसरासत्र पुनि उचरीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६२॥ अबला आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६३॥ नरजा आदि उचारि कै; जा निधि ईस बखान ॥ आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६४॥ नरी आसुरी किंन्रनी; सुरी भाखि, जा भाखि ॥ निधिपति असत्र कहि पासि के; नाम चीनि चिति राखि ॥३६५॥ फनिजा आदि उचारि कै; जा कहि निधहि बखान ॥ ईसरासत्र कहि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान ॥३६६॥ अबला बाला मानजा; त्रिय जा निधहि बखान ॥ ईसरासत्र कहि पास के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३६७॥ समुद गामनी जे नदी; तिन के नाम बखान ॥ ईस एस कहि असत्र कहि; नाम पासि पहिचान ॥३६८॥ पै पद प्रिथम बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३६९॥ |
| प्रिथमै भाखि तड़ाग पद; ईसरासत्र पुनि भाखु ॥
नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥३७०॥ प्रिथम सरोवर सबद कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीन लेहु मतिवंत! ॥३७१॥ जलधर आदि बखानि कै; ईसरासत्र पद भाखु ॥ नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥३७२॥ मघजा आदि उचारि कै; धर पद बहुरि बखानि ॥ ईसरासत्र कहि पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३७३॥ आदि बारि धर उचरि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवंत ॥३७४॥ घनज धरन पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; चीन लेहु मतिवंत ॥३७५॥ मघजा धर पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवंत! ॥३७६॥ अ्मबुदजा धर आदि कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतवंत ॥३७७॥ अ्मबुदजा धर प्रिथम कहि; ईसरासत्र पद दीन ॥ नाम पास के होत है; लीजीअहु जान प्रबीन ॥३७८॥ बारिद आदि उचारि कै; जा निधि ईस बखान ॥ असत्र उचरि, सभ पासि के; लीजीअहु नाम पछान ॥३७९॥ प्रिथम उचरि पद नीर धर; ईसरासत्र कहि अंत ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३८०॥ रिद पद आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३८१॥ हर धर आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३८२॥ जलज त्राणि सबदोचरि कै; ईसरासत्र कहि दीन ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु चीन प्रबीन ॥३८३॥ हरध्रद जलध्रद बारिध्रद; निधि पति असत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥३८४॥ नीरधि आदि उचारि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३८५॥ अ्मबुदजा धर निधि उचरि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम पासि के सकल ही; चीनहु चतुर! बिअंत ॥३८६॥ धाराधरज उचारि कै; निधि पति एस बखानि ॥ ससत्र उचरि, सभ पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३८७॥ |
| धाराधर ध्रद ईस कहि; असत्र बहुरि पद दीन ॥
नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३८८॥ पै पद प्रिथम उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥ असत्र उचरि करि पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३८९॥ सकल दुघद के नाम लै; निधि कहि ईस बखान ॥ असत्र उचरि करि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३९०॥ नाम सु बीरन के सभै; मुख ते प्रिथम उचारि ॥ ग्रसितनि कहि सभ पासि के; लीजहु नाम सु धारि ॥३९१॥ सकल बारि के नाम लै; निधि पति ईस बखानि ॥ असत्र उचरि करि पासि के; लीजहु नाम सुजान! ॥३९२॥ सकल नाम लै धूरि के; धर निधि ईस बखानि ॥ असत्र उचरि करि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३९३॥ बारिद अरि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंत ॥ निधि कहि नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर! अनंत ॥३९४॥ त्रात्रांतक पद प्रिथम कहि; निधि एसासत्र बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥३९५॥ झखी त्राणि पद प्रिथमै कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥ नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३९६॥ मतस त्राणि प्रिथमै उचरि; ईसरासत्र कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३९७॥ मैन केतु कहि त्राणि कहि; ईसरासत्र कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३९८॥ सकल नाम लै नीर के; जा कहि त्राणि बखान ॥ ईसरासत्र कहि पासि के; चीनहु नाम अप्रमान ॥३९९॥ बारिज त्राणि बखानि कै; ईसरासत्र कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४००॥ जलज त्राणि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र पुनि भाखु ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! चीन चित राखु ॥४०१॥ नीरज त्राणि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥ सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥४०२॥ कमल त्राणि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०३॥ रिपु पद प्रिथम उचारि कै; अंतक बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान! ॥४०४॥ |
| सत्रु आदि सबदु उचरि कै; अंतक पुनि पद देहु ॥
नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥४०५॥ आदि खल सबद उचरि कै; अंत्यांतक कै दीन ॥ नाम पास के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०६॥ दुसट आदि सबद उचरि कै; अंत्यांतक कहि भाखु ॥ नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर चिति राखु ॥४०७॥ तन रिपु प्रिथम बखानि कै; अंत्यांतक कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०८॥ असु अरि आदि बखानि कै; अंत्यांतक कहु भाखु ॥ नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥४०९॥ दलहा प्रिथम बखानि कै; अंत्यांतक कौ देहु ॥ नाम पासि के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥४१०॥ प्रितनांतक पद प्रिथम कहि; अंत्यांतक कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४११॥ धुजनी अरि पद प्रिथम कहि; अंत्यांतकहि उचारि ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधारि ॥४१२॥ आदि बाहनी सबद कहि; रिपु अरि सबद बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४१३॥ बाहनि आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४१४॥ सैना आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखानि ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥४१५॥ हयनी आदि बखानि कै; अंत्यंतक कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४१६॥ गैनी आदि बखानि कै; अंत्यंतक अरि देहु ॥ नाम पासि के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥४१७॥ पतिनी आदि बखानि कै; अरि पद बहुरि उचारि ॥ नाम पासि के होत है; जान लेहु निरधार ॥४१८॥ रथनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारु ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४१९॥ न्रिपणी आदि बखानि कै; रिपु खिप बहुर उचारि ॥ नाम पासि के होत है; लीजअहु सुकबि सुधार ॥४२०॥ भटनी आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुर बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु प्रग्यावान ॥४२१॥ आदि बीरणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४२२॥ सत्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥ नाम पासि के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥४२३॥ जुधनि आदि बखानि कै; पुनि रिपु अरि कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४२४॥ |
| रिपुणी आदि उचारि कै; रिपु खिप अंति बखान ॥
नाम पासि के होत है; चतुर चित पहिचान ॥४२५॥ अरिणी आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४२६॥ राजनि आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४२७॥ आदि ईसरणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४२८॥ भूपणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४२९॥ न्रिपजन एस्रणि आदि कहु; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४३०॥ राजनि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४३१॥ एसनि आदि बखानि कै; अंतक बहुरि उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४३२॥ प्रिथम नरेसणि सबद कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४३३॥ आदि रावनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४३४॥ राइनि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम पासि के होत है; समझहु सुघर सुजान! ॥४३५॥ ईसरणि आदि बखानि कै; रिपु अरि उचरहु अंति ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अनंत! ॥४३६॥ धुजनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४३७॥ दैतनि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु सुकबि! सु धार ॥४३८॥ रदनी आदि बखानि कै; रिपु अरि उचरहु अंति ॥ नाम पासि कै होत है; चीनहु चतुर! बिअंत ॥४३९॥ प्रिथम पद उचरि बारणी; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४४०॥ द्विपनि प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि कै ए सभै; निकसत चलत हजार ॥४४१॥ दुरदनी प्रिथम बखानि कै; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥ नाम पासि के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥४४२॥ |
| सावजनी पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥
नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४४३॥ मातंगनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि पद कहि अंति ॥ नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अनंत ॥४४४॥ प्रिथम तुरंगनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चतुर! लेहु पहिचान ॥४४५॥ हसतनि आदि उचारि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४४६॥ प्रिथम उचरि पद दंतनी; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥४४७॥ दुरदनि आदि उचारि कै; मरदनि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४४८॥ पदमनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥४४९॥ ब्याला आदि बखानीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम पासि के होत है; सुकबि लीजीअहु चीन ॥४५०॥ आदि सबद कहि कुंजरी; अंत रिपंतक दीन ॥ नाम पासि के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४५१॥ इ्मभी आदि सबद उचरीऐ; रिपु अरि कौ पुनि दीन ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४५२॥ प्रिथम कु्मभनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान ॥४५३॥ करनी प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान ॥४५४॥ प्रिथम सिंधुरी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के सकल ही; निकसत चलत अपार ॥४५५॥ आदि अनकपी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४५६॥ प्रिथम नागनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४५७॥ हरिनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; समझ लेहु बुधिवान! ॥४५८॥ मातंगनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४५९॥ आदि उचरि पद बाजिनी; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम पासि के होत है; सुघर सति करि मान ॥४६०॥ इति स्री नाम माला पुराण स्री पासि नाम चतुरथमो धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥४॥ |
| ਅਥ ਤੁਪਕ ਕੇ ਨਾਮ ॥
अथ तुपक के नाम ॥ दोहरा ॥ बाहिनि आदि उचारीऐ; रिपु पद अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६१॥ सिंधवनी पद प्रिथम कहि; रिपणी अंत उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६२॥ तुरंगनि प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६३॥ हयनी आदि उचारि कै; हा अरि पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४६४॥ अरबनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥४६५॥ किंकाणी प्रथमोचरि कै; रिपु पद अंत उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥४६६॥ असुनी आदि उचारीऐ; अंति सबद अरि दीन ॥ सत्रु तुपक के नाम है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४६७॥ सुआसनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर लीजीअहु चीन ॥४६८॥ आधिनि आदि उचारि कै; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४६९॥ प्रभुणी आदि उचारि कै; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४७०॥ आदि भूपणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धारि ॥४७१॥ आदि ईसणी सबद कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४७२॥ आदि संउडणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥४७३॥ प्रथम सत्रुणी उचरीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर बिचार ॥४७४॥ सकल छत्र के नाम लै; नी कहि रिपुहि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४७५॥ प्रथम छत्रनी सबद उचरि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४७६॥ आतपत्रणी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधारि ॥४७७॥ आदि पताकनि सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४७८॥ |
| छितपताढि प्रिथमोचरि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥४७९॥ रउदनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥४८०॥ ससत्रनि आदि बखानि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४८१॥ सबद सिंधुरणि उचरि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४८२॥ आदि सुभटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४८३॥ रथिनी आदि उचारि कै; मथनी मथन बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४८४॥ सबद स्यंदनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥४८५॥ आदि सकटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; समझ लेहु मतिवान! ॥४८६॥ प्रथम सत्रुणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४८७॥ आदि दुसटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥४८८॥ असु कवचनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥४८९॥ प्रथम बरमणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥४९०॥ तनुत्राणनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४९१॥ प्रथम चरमणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४९२॥ प्रथम सिपरणी सबद कहि; रिपु अरि उचरहु अंति ॥ नाम तुपक जू के सकल; निकसत चलत अनंत ॥४९३॥ सबद सलणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४९४॥ प्रथमै चक्रणि सबदि कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४९५॥ आदि खड़गनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४९६॥ |
| असिनी आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४९७॥ निसत्रिसनी उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; निकसत चलत प्रमान ॥४९८॥ खगनी आदि बखानि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४९९॥ ससत्र एस्रणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५००॥ ससत्र राजनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५०१॥ ससत्र राटनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! प्रमान ॥५०२॥ आदि सैफनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५०३॥ आदि तेगनी सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५०४॥ आदि क्रिपाननि सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक होत है; लीजहु चतुर प्रमान ॥५०५॥ समसेरणी उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर! चित महि जान ॥५०६॥ आदि खंडनी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५०७॥ खलखंडन पद आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५०८॥ कवचांतकनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५०९॥ धाराधरनी आदि कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१०॥ कवच तापनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥५११॥ तनु त्राणि अरि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥५१२॥ कवच घातनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! प्रमान ॥५१३॥ दुसट दाहनी आदि कहि; रिपु अरि सबद बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५१४॥ दुरजन दरनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; जानु चतुर! निरधार ॥५१५॥ |
| दुरजन दबकनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१६॥ दुसट चरबनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५१७॥ बीर बरजनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१८॥ बार बरजनी आदि कहि; रिपुणी अंत बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५१९॥ बिसिख बरखनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥५२०॥ बान दाइनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५२१॥ बिसिख ब्रिसटनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सुधारि ॥५२२॥ पनज प्रहारनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२३॥ धनुनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२४॥ प्रथम धनुखनी सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥५२५॥ कोअंडनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५२६॥ बाणाग्रजनी आदि कहि; रिपु अरि पद कौ देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चित लेहु ॥५२७॥ बाण प्रहरणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥५२८॥ आदि उचरि पद बाणनी; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२९॥ बिसिख परननी आदि कहि; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! प्रमान ॥५३०॥ बिसिखनि आदि बखानि कै; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥५३१॥ सुभट घाइनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! सु धार ॥५३२॥ सत्रु संघरणी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५३३॥ |
| पनज प्रहरणी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५३४॥ कोअंडज दाइनि उचरि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५३५॥ आदि निखंगनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! पछान ॥५३६॥ प्रथम पत्रणी पद उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५३७॥ प्रथम पछणी सबद कहि; रिपु अरि पद कौ देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५३८॥ प्रथम पत्रणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजीअहु सुघर! पछान ॥५३९॥ परिणी आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! प्रमान ॥५४०॥ पंखणि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४१॥ पत्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४२॥ नभचरि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥५४३॥ रथनी आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४४॥ सकटनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि पद के दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५४५॥ रथणी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४६॥ आदि सबद कहि स्यंदनी; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४७॥ पटनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंत उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४८॥ आदि बसत्रणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥५४९॥ बियूहनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५५०॥ बज्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥५५१॥ |
| बलणी आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५५२॥ दलणी आदि उचारि कै; मलणी पद पुनि देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥५५३॥ बादित्रणी बखानि कै; अंति सबद अरि देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥५५४॥ आदि नादनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! अपार ॥५५५॥ दुंदभि धरनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५५६॥ दुंदभनी पद प्रथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५५७॥ नाद नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५५८॥ दुंदभि धुननी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; समझहु सुघर! अपार ॥५५९॥ आदि भेरणी सबद कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥५६०॥ दुंदभि घोखन आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधार ॥५६१॥ नादानिसनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; करीअहु चतुर! प्रमान ॥५६२॥ आनिकनी पद आदि कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५६३॥ प्रथम ढालनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ बिचार ॥५६४॥ ढढनी आदि उचारि कै; रिपु पद बहुरो देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५६५॥ संखनिसनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५६६॥ संख सबदनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर सु धार ॥५६७॥ संख नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५६८॥ सिंघ नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५६९॥ |
| पल भछि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥
नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥५७०॥ बिआघ्र नादनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५७१॥ हरि जछनि नादनि उचरि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५७२॥ पुंडरीक नादनि उचरि कै; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥५७३॥ हर नादनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर बिचार ॥५७४॥ पंचाननि घोखनि उचरि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥५७५॥ सेर सबदनी आदि कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥५७६॥ म्रिगअरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि बहुर बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु प्रगिआवान ॥५७७॥ पसुपतारि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५७८॥ म्रिगपति नादनि आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु प्रगिआवान ॥५७९॥ पसु एस्रण नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर सु धार ॥५८०॥ गजरि नादिनी आदि कहि; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर लीजीअहु जान ॥५८१॥ सऊडियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५८२॥ दंतियरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५८३॥ अनकपियरि नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५८४॥ सिंधुरारि ध्वननी उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति बिचार ॥५८५॥ मातंगरि नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघरि स्मभारि ॥५८६॥ |
| साविजारि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति सु भाखु ॥
नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥५८७॥ गजनियारि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥५८८॥ नागरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; उचरत चलो सुजान ॥५८९॥ हसतियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति लेहु ॥५९०॥ हरिनिअरि आदि उचारि कै; रिपु पद बहुरो देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥५९१॥ करनियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५९२॥ बरियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥५९३॥ दंतीयरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद को देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५९४॥ द्विपि रिपु ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि स्मभार ॥५९५॥ पदमियरि आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५९६॥ बलियरि आदि बखानि कै; रिपु पद पुनि कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५९७॥ इ्मभिअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुमति! लीजीअहु बीन ॥५९८॥ कु्मभियरि नादनि आदि कहि; रिपु खिप पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५९९॥ कुंजरियरि आदि उचारि कै; रिपु पुनि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति स्मभार ॥६००॥ पत्रियरि अरि ध्वननी उचरि; रिपु पुनि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६०१॥ तरुरिपु अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! निधान ॥६०२॥ सऊडियांतक ध्वननि उचरि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥६०३॥ |
| हयनिअरि आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥६०४॥ हयनिअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥६०५॥ हयनियांतक ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥६०६॥ असुअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥६०७॥ तुरयारि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सु धार ॥६०८॥ तुरंगरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पुनि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६०९॥ घोरांतकनी आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सु धार ॥६१०॥ बाजांतकनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधार ॥६११॥ बाहनांतकी आदि कहि; पुनि रिपु नादनि भाखु ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! चित राखु ॥६१२॥ सरजज अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥६१३॥ बाज अरि ध्वननी आदि कहि; अंत्यांतक पद दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६१४॥ सिंधुररि प्रथम उचारि कै; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६१५॥ बाहनि नादिन आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धारि ॥६१६॥ तुरंगरि आदि बखानि कै; ध्वननी बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥६१७॥ अरबयरि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सवारि ॥६१८॥ तुरंगरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६१९॥ किंकन अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥६२०॥ घुरअरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सु धार ॥६२१॥ |
| म्रिग अरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धारि ॥६२२॥ सिंगी अरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६२३॥ म्रिगी अरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सवारि ॥६२४॥ त्रिण अरि नादनि उचरि कै; रिपु पद बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥६२५॥ भूचरि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६२६॥ सुभट आदि सबद उचरि कै; अंति सत्रु पद दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु चीन ॥६२७॥ आदि सत्रु सबद उचरि कै; अंत्यांतक पद भाखु ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥६२८॥ सत्रु आदि सबद उचरीऐ; सूलनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६२९॥ आदि जुधनी भाखीऐ; अंतकनी पद भाखु ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥६३०॥ बरम आदि सबद उचरि कै; बेधनि अंति उचार ॥ बरम बेधनी तुपक को; लीजहु नाम सु धार ॥६३१॥ चरम आदि पद भाखि कै; घाइनि पद कै दीन ॥ चरम घाइनी तुपक के; नाम लीजीअहु चीन ॥६३२॥ द्रुजन आदि सबद उचरि कै; भछनी अंति उचार ॥ द्रुजन भछनी तुपक को; लीजहु नाम सु धार ॥६३३॥ खल पद आदि बखानि कै; हा पद पुनि कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥६३४॥ दुसटन आदि उचारि कै; रिपुणी अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लेहु प्रबीन पछान ॥६३५॥ रिपुणी आदि उचारि कै; खिपणी बहुरि बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सयान ॥६३६॥ नाल सैफनी तुपक भनि; जबरजंग हथ नाल ॥ सुतर नाल घुड़ नाल भनि; चूरणि पुनि पर जुआल ॥६३७॥ जुआल आदि सबदुचरि कै; धरणी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सु धार ॥६३८॥ अनलु आदि सबदुचरि कै; छोडणि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥६३९॥ |
| जुआला बमनी आदि कहि; मन मै सुघर बिचार ॥
नाम तुपक के होत है; जानि चतुर निरधार ॥६४०॥ घन पद आदि बखानि कै; ध्वननी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥६४१॥ घन पद आदि उचारि कै; नादनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४२॥ बारिद आदि बखानि कै; सबदनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४३॥ मेघन ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥६४४॥ मेघन सबदनी बकत्र ते; प्रथमै सबद उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६४५॥ गोला आदि उचारि कै; आलय अंत उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४६॥ गोला आदि उचारि कै; धरनी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६४७॥ गोला आदि उचारि कै; असत्रणि पुनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥६४८॥ गोलालयणी आदि कहि; मुख ते सबद उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६४९॥ गोला आदि उचारि कै; आलयणी पुनि भाखु ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! चिति राखु ॥६५०॥ गोला आदि बखानि कै; सदननि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥६५१॥ गोला पद प्रथमै उचरि कै; केतनि पद कहु अंति ॥ नाम सकल स्री तुपक के; निकसत चलत अनंत ॥६५२॥ गोला आदि उचारि कै; केतनि पद कै दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६५३॥ गोला आदि उचारि कै; सदनी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६५४॥ गोला आदि उचारीऐ; धामिन अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमत सवार ॥६५५॥ गोला आदि उचारि कै; नईवासन कहि अंति ॥ नाम तुपक के होत है; निकसत चलत बिअंत ॥६५६॥ गोला आदि उचारि कै; लिआली अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६५७॥ गोला आदि उचारि कै; मुकतनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के कहि कबो! लीजहु सकल बीचार ॥६५८॥ |
| गोला आदि उचारि कै; दाती अंति उचार ॥
नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! निरधार ॥६५९॥ गोला आदि उचारि कै; तजनी पुनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६६०॥ जुआला आदि उचारि कै; छडनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६६१॥ जुआला सकतनी बकत्र ते; प्रथमै करो बखिआन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर पछान ॥६६२॥ जुआला तजणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥६६३॥ जुआला छाडणि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धार ॥६६४॥ जुआला दाइनि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६६५॥ जुआला बकत्रणि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥६६६॥ जुआला आदि उचारि कै; प्रगटाइनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥६६७॥ जुआला आदि उचारि कै; धरणी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६६८॥ दुरजन आदि उचारि कै; दाहनि पुनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चित लेहु ॥६६९॥ द्रुजन आदि सबद उचरि कै; दररनि अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७०॥ गोली धरणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७१॥ दुसट आदि सबद उचारि कै; दाहनि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धार ॥६७२॥ चौपई ॥ कासट प्रिसठणी आदि उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥ भूमिज प्रिसठनि पुनि पद दीजै ॥ नाम चीन तुपक को लीजै ॥६७३॥ कासठि प्रिसठणी आदि उचार ॥ नाम तुपक के सकल बिचार ॥ द्रुमज बासनी पुनि पद दीजै ॥ चीन नाम नाली को लीजै ॥६७४॥ दोहरा ॥ कासठि प्रिसठणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुजन! सवार ॥६७५॥ जलज प्रिसठणी प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७६॥ |
| बारज प्रिसठण आदि ही; मुख ते करो उचार ॥
नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥६७७॥ नीरजालयणि बकत्र ते; प्रिथमै करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६७८॥ अ्मबुज प्रिसठणी प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६७९॥ घनजज प्रिसठण प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥६८०॥ जल तर आदि उचारि कै; प्रिसठणि धर पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६८१॥ बार आदि सबद उचरि कै; तर प्रिसठण पुनि भाखु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति राखु ॥६८२॥ नीर आदि सबद उचरि कै; तर पद प्रिसठण देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६८३॥ हरज प्रिसठणी आदि ही; मुख ते करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६८४॥ चौपई ॥ बारिज प्रिसठणी आदि उचार ॥ नाम नालि के सकल बिचार ॥ भूरह प्रिसठणि पुनि पद दीजै ॥ नाम जान तुपक को लीजै ॥६८५॥ भूमि सबद को आदि उचारो ॥ रुह प्रिसठणि तुम बहुरि सवारो ॥ नाम तुपक के सभ ही होही ॥ जो कोऊ चतुर चीन कर जोही ॥६८६॥ तरु रुह प्रिसठनि आदि उचरीअहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचरीअहु ॥ कासठ कुंदनी आदि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥६८७॥ भूमि सबद कहु आदि उचारहु ॥ रुह सु सबद को बहुर बिचारहु ॥ नाम तुपक जू के सभ मानहु ॥ या मै कछू भेद नही जानहु ॥६८८॥ प्रिथी सबद को प्रिथमै दीजै ॥ रुह पद बहुरि उचारन कीजै ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥६८९॥ बिरछ सबद को आदि उचारो ॥ प्रिसठनि पद कहि जीअ बिचारो ॥ नाम तुपक के होहि अपारा ॥ या मै कछु न भेद निहारा ॥६९०॥ द्रुमज सबद को आदि उचारो ॥ प्रिसठनि पद कहि हीए बिचारो ॥ सभ ही नाम तुपक के होवै ॥ जउ कोऊ चतुर चित मै जोवै ॥६९१॥ तरु पद मुख ते आदि उचारो ॥ प्रिसठनि पद कौ बहुरि बिचारो ॥ नाम तुपक के सब जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥६९२॥ |
| रुख सबद को आदि उचारो ॥
प्रिसठनि पद कहि बहुरि बिचारो ॥ सभ ही नाम तुपक के होई ॥ या मै कहूं भेद नही कोई ॥६९३॥ उतभुज पद को आदि उचारो ॥ प्रिसठनि पद कहि हीए बिचारो ॥ सभ ही नाम तुपक के जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥६९४॥ तरु सुत सबद को आदि उचारो ॥ बहुरि प्रिसठणी सबद बिचारो ॥ सभ ही नाम तुपक के जानो ॥ या मै कछू भेद न पछानो ॥६९५॥ पत्री पद को आदि बखानो ॥ प्रिसठणि सबद सु बहुरि प्रमानो ॥ सभ ही नाम तुपक के जानहु ॥ या मै कछू भेद नही मानहु ॥६९६॥ अड़िल ॥ धराधार पद प्रथम; उचारन कीजीऐ ॥ प्रिसठणि पद को बहुरि; ठउर तह दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जी जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैक नही मानीऐ ॥६९७॥ दोहरा ॥ धराराज प्रथमै उचरि; पुनि प्रिसठनि पद देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६९८॥ धरा आदि सबद उचरि कै; नाइक अंत उचार ॥ प्रिसठ भाखि बंदूक के; लीजहु नाम सु धार ॥६९९॥ चौपई ॥ धरा सबद को आदि बखानहु ॥ नाइक सबद तहा फुनि ठानहु ॥ प्रिसठनि पद को बहुरि उचरीऐ ॥ नाम तुपक कै सभै बिचरीऐ ॥७००॥ धरनी पद प्रथमै लिखि डारो ॥ राव सबद तिह अंति उचारो ॥ प्रिसठनि बहुरि सबद को दीजै ॥ नाम पछान तुपक को लीजै ॥७०१॥ धरनीपति पद आदि उचारो ॥ प्रिसठनि सबदहि बहुरि सवारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७०२॥ धराराट पद आदि उचारो ॥ प्रिसठनि पद को बहुरि सु धारो ॥ नाम तुपक जानो मन माही ॥ या मै भेद नैक हूं नाही ॥७०३॥ धराराज पुनि आदि उचरीऐ ॥ ताहि प्रिसठणी बहुरि सु धरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के होवहि ॥ जा के सभ गुनिजन गुन जोवहि ॥७०४॥ धरा सबद को आदि उचारो ॥ प्रिसठनि सबद सु अंति सु धारो ॥ सकल नाम तुपक के जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७०५॥ धरा सबद को आदि भनीजै ॥ इंद्र सबद ता पाछे दीजै ॥ प्रिसठनि पद को बहुरि उचारो ॥ सकल तुपक के नाम बीचारो ॥७०६॥ |
| धरा सबद को आदि उचरीऐ ॥
पालक सबद सु अंति बिचरीऐ ॥ प्रिसठनि पद को बहुरि बखानो ॥ सभ ही नाम तुपक के जानो ॥७०७॥ तरुज सबद को आदि बखानो ॥ नाथ सबद तिह अंति प्रमानो ॥ प्रिसठनि सबद सु बहुरि भनीजै ॥ नाम जान तुपक को लीजै ॥७०८॥ द्रुमज सबद को आदि सु दीजै ॥ नाइक पद को बहुरि भनीजै ॥ प्रिसठनि सबद सु अंति बखानहु ॥ सभ ही नाम तुपक के मानहु ॥७०९॥ फल पद आदि उचारन कीजै ॥ ता पाछे नाइक पद दीजै ॥ पुनि प्रिसठनि तुम सबद उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७१०॥ तरुज सबद को आदि उचरीऐ ॥ राज सबद को बहुरि सु धरीऐ ॥ ता पाछे प्रिसठनि पद दीजै ॥ नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥७११॥ धरनीजा पद आदि भनिजै ॥ राट सबद ता पाछे दिजै ॥ प्रिसठनि पद को अंति बखानो ॥ नाम तुपक सभ भेद न मानो ॥७१२॥ ब्रिछज सबद को आदि भनीजै ॥ ता पाछै राजा पद दीजै ॥ प्रिसठनि सबद सु अंति उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७१३॥ तरु रुह अनुज आदि पद दीजै ॥ नाइक पद को बहुरि भनीजै ॥ प्रिसठनि सबद अंत को दीने ॥ नाम तुपक के होहिं नवीने ॥७१४॥ दोहरा ॥ तरु रुह प्रिसठनि प्रथम ही; मुख ते करौ उचार ॥ नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥७१५॥ सुकबि! बकत्र ते कुंदणी; प्रथमै करो उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥७१६॥ अड़िल ॥ कासट कुंदनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ नाम तुपक के चीन; चतुर चित लीजीऐ ॥ ब्रिछज बासनी सबद; बकत्र ते भाखीऐ ॥ हो नाम तुपक के जानि; ह्रिदै मै राखीऐ ॥७१७॥ धरएस रजा सबद; सु अंति बखानीऐ ॥ ता पाछे कुंदनी; बहुरि पद ठानीऐ ॥ सुकबि सभै चित माझ; सु साच बिचारीयो ॥ हो नाम तुपक के सकल; निसंक उचारीयो ॥७१८॥ तरुज बासनी आदि; सु सबद बखानीऐ ॥ नाम तुपक के सकल; सुकबि मन मानीऐ ॥ या मै संक न कछू; ह्रिदै मै कीजीऐ ॥ हो जहा जहा इह नाम; चहो तह दीजीऐ ॥७१९॥ चौपई ॥ भूमि सबद को आदि उचारो ॥ जा पद तिह पाछे दै डारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७२०॥ |
| प्रिथी सबद को आदि उचारो ॥
ता पाछे जा पद दै डारो ॥ नाम तुफंग जान जीय लीजै ॥ चहीऐ जहा, तही पद दीजै ॥७२१॥ बसुधा सबद सु आदि बखानहु ॥ ता पाछे, जा पद कहु ठानहु ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७२२॥ प्रथम बसुंध्रा सबद उचरीऐ ॥ ता पाछे, जा पद दै डरीऐ ॥ नाम तुपक के सभि जीअ लहीऐ ॥ चहीऐ जहा, तही पद कहीऐ ॥७२३॥ तरनी पद को आदि बखानो ॥ ता पाछे जा पद को ठानो ॥ नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥ चहीऐ जहा तही पद कहीऐ ॥७२४॥ छंद ॥ बलीस आदि बखान ॥ बासनी पुनि पद ठान ॥ नामै तुपक सभ होइ ॥ नही भेद या महि कोइ ॥७२५॥ चौपई ॥ सिंघ सबद को आदि बखान ॥ ता पाछे अरि सबद सु ठान ॥ नाम तुपक के सकल पछानहु ॥ या मै कछू भेद नही मानहु ॥७२६॥ पुंडरीक पद आदि उचारो ॥ ता पाछे, अरि पद दै डारो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥ या मै कछू भेद नही कीजै ॥७२७॥ आदि सबद हर जछ उचारो ॥ ता पाछे, अरि पद दै डारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ लहीयो ॥ चहीऐ नाम जहा, तह कहीयो ॥७२८॥ छंद ॥ म्रिगराज आदि उचार ॥ अरि सबद बहुरि सु धार ॥ तऊफंग नाम पछान ॥ नही भेद या महि मान ॥७२९॥ चौपई ॥ आदि सबद म्रिगराज उचारो ॥ ता पाछे रिपु पद दै डारो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥ या मै कछू भेद नही जानो ॥७३०॥ पसु पतेस पद प्रथम भनिजै ॥ ता पाछै अरि पद को दिजै ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७३१॥ दोहरा ॥ सकल पसुन के नाम लै; सत्रु सबद कहि अंति ॥ सभ ही नाम तुफंग के; निकसत चलत अनंत ॥७३२॥ म्रिग पद आदि बखानि कै; पति पद बहुरि उचार ॥ अरि कहि नाम तुफंग के; लीजै सुकबि सु धार ॥७३३॥ छंद ॥ म्रिग सबद आदि बखान ॥ पाछै सु पति पद ठान ॥ रिपु सबद बहुरि उचार ॥ सभ नाम तुपक बिचार ॥७३४॥ सिंगी प्रिथम पद भाखु ॥ अरि सबद कहि लखि राखु ॥ अरि सबद बहुरि बखान ॥ सभ नाम तुपक पछान ॥७३५॥ छंद वडा ॥ पति सबद आदि उचारि कै; म्रिग सबद बहुरि बखानीऐ ॥ अरि सबद बहुरि उचार कै; नाम तुपक पहिचानीऐ ॥ नही भेद या मै नैकु है; सभ सुकबि मानहु चित मै ॥ जह जानीऐ, तह दीजीऐ; पद अउर छंद कबित मै ॥७३६॥ |
| चौपई ॥
हरण सबद को आदि भणिजै ॥ ता पाछे पति पद को दिजै ॥ ता पाछे अरि सबद उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७३७॥ सिंगी आदि उचारन कीजै ॥ ता पाछे पति पद कहु दीजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥७३८॥ क्रिसनाजिन पद आदि उचारो ॥ ता पाछे पति पद दै डारो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥ या मै भेद न कोऊ जानो ॥७३९॥ दोहरा ॥ नैनोतम पद बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥ पति अरि कहि कर तुपक के; लीजो नाम सु धार ॥७४०॥ चौपई ॥ स्वेतास्वेत तनि आदि उचारो ॥ ता पाछे पति सबद सवारो ॥ रिपु पद बहुरि उचारन कीजै ॥ नाम तुपक को सभ लखि लीजै ॥७४१॥ अड़िल ॥ म्रिगी सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ ता पाछे नाइक; सु सबद कहु दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहि नाम; तुपक के जानीऐ ॥ हो जउन ठउर पद रुचै; सु तही बखानीऐ ॥७४२॥ सेत असित अजिना के; आदि उचारीऐ ॥ ता पाछे पति सबद; सु बहुरि सुधारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सु हीय मै जानीऐ ॥७४३॥ उदर सेत चरमादि; उचारन कीजीऐ ॥ ता के पाछे बहुरि; नाथ पद दीजीऐ ॥ ता के पाछे रिपु पद; बहुरि उचारीऐ ॥ हो नाम तुपक के सभ ही; चतुर बिचारीऐ ॥७४४॥ चौपई ॥ किसन पिसठ चरमादि उचारो ॥ ता पाछे नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥७४५॥ चारु नेत्र सबदादि उचारो ॥ ता पाछे पति सबद बिचारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरो दीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७४६॥ नैनोतम पद आदि उचारो ॥ नाइक पद पाछे दे डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥७४७॥ द्रिगी सबद को आदि बखानो ॥ ता पाछे, नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरो दीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७४८॥ |
| चखी सबद को आदि उचारो ॥
ता पाछे, पति पद दे डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥७४९॥ म्रिगी अधिप को आदि उचारो ॥ ता पाछे, पति पद दे डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७५०॥ म्रिगीराट सबदादि भनिजै ॥ ता पाछे, पति पद कहु दिजै ॥ सत्रु सबद को अंति उचारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥७५१॥ म्रिगी इंद्र सबदादि बखानो ॥ ता पाछे, नाइक पद ठानो ॥ ता पाछे, रिपु सबद भनीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७५२॥ म्रिगी एसर को आदि उचरीऐ ॥ ता पाछे, पति पद दे डरीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति बखानो ॥ नाम तुफंग सकल पहिचानो ॥७५३॥ अड़िल ॥ म्रिगीराज को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ ता के पाछे नाइक; पद कहि दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीयो ॥ हो नाम तुपक कै सकल; चतुर पहिचानीयो ॥७५४॥ म्रिगिज सबद को; मुख ते आदि बखानीऐ ॥ ता के पाछे नाइक; पद को ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो नाम तुपक के सभ ही; चतुर बिचारीऐ ॥७५५॥ मुख ते प्रथम म्रिगी; सु सबद को भाखीऐ ॥ ता के पाछे नाइक; पद को राखीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो नाम तुपक के सकल; चतुर चिति धारीऐ ॥७५६॥ चौपई ॥ म्रिगी अनुज को आदि उचारो ॥ ता पाछे, नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को, बहुरि प्रमानहु ॥ नाम तुफंग सकल जीअ जानहु ॥७५७॥ म्रिगी अनुज को, आदि उचारो ॥ ता पाछै, नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद, बहुरो सु बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥७५८॥ म्रिगी अनुज सबदादि उचारो ॥ नाइक पद, पाछै दे डारो ॥ सत्रु सबद को, बहुर बखानो ॥ नाम तुफंग सभै जीअ जानो ॥७५९॥ म्रिगी रवण सबदादि भणिजै ॥ ता पाछे, नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को, बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७६०॥ म्रिगजाइक पद आदि बखानै ॥ ता पाछे, नाइक पद ठानै ॥ सत्रु सबद को, बहुरि भणिजै ॥ नाम बंदूक, जान जीअ लिजै ॥७६१॥ |
| दोहरा ॥
आदि म्रिगीजा उचरि कै; पति रिपु अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥७६२॥ त्रिणचर आदि उचार कै; पति अरि बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥७६३॥ अड़िल ॥ त्रिणचर पद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ नाथ सबद को; ता कै पाछै दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ सकल तुपक के नामु; सु चतुर पछानीऐ ॥७६४॥ त्रिणभख पद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ नाइक पद को; ता के पाछे दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन! बिचारीऐ ॥७६५॥ चौपई ॥ त्रिणहा पद को आदि बखानो ॥ ता पाछै नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७६६॥ अड़िल ॥ त्रिणहात्री को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ ता के पाछे; नाथ सबद को दीजीऐ ॥ ता के पाछे; सत्रु सबद को ठानीऐ ॥ हो सकल तुपक को नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥७६७॥ त्रिण भछी को; आदि बखानन कीजीऐ ॥ नाइक पद को; ता के पाछे दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; कहीओ बहुरि सुधारि कै ॥ हो नाम तुपक के लीजहु; सकल बिचार कै ॥७६८॥ त्रिणहा रिपु को; आदि बखानन कीजीऐ ॥ नाथ सबद को; ता के पाछै दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो नाम तुपक के सकल; चतुर पहिचानीऐ ॥७६९॥ दोहरा ॥ त्रिणरिपु आदि उचारि कै; पति रिपु अंति उचार ॥ सभ ही नाम तुफंग के; लीजहु सुघर! सुधार ॥७७०॥ चौपई ॥ त्रिणरिपु आदि उचारन कीजै ॥ ता पाछे नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७७१॥ भूजांतक सबदादि उचारो ॥ नाइक ता पाछे पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७७२॥ प्रिथीज अरि सबदादि उचारो ॥ ता पाछे नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७७३॥ अड़िल ॥ भू सुत रिपु सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥ ता के पाछे बहुरि; नाथ पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७७४॥ |
| चौपई ॥
उरविज सबद सु आदि उचारो ॥ रिपु नाइक पाछे पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग, चीन चिति लिजै ॥७७५॥ बैसुंधरजा सत्रु उचारो ॥ नइक सबद अंति दे डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ नाम बंदूक, चित मै धरीऐ ॥७७६॥ पूरनि आदि उचारन कीजै ॥ जा रिपु पद को पाछै दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥७७७॥ द्वीपनि आदि सबद को दिजै ॥ जा पाछे, चर सबद भनिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल सवारो ॥७७८॥ सिसटनि पद को आदि उचारो ॥ जा कहि चर पाछे दे डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चित लिजै ॥७७९॥ धरनि सबद को आदि उचारो ॥ जा चर पद पाछे तिहि डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७८०॥ धरा सबद को आदि बखानो ॥ जा चर पद पाछे तिह ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुफंग सकल चिति धारो ॥७८१॥ दोहरा ॥ भूमिज आदि उचारि कै; चर पद बहुरि उचारि ॥ रिपु कहि नाम तुफंग के; लीजहु सुकबि! सु धार ॥७८२॥ चौपई ॥ द्रुमनी आदि उचारन कीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७८३॥ ब्रिछनिज आदि उचारन कीजै ॥ चरनाइक पाछे पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७८४॥ धरएसरणी आदि बखानो ॥ ता पाछे जा चर पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७८५॥ धराराटनी आदि उचारो ॥ जा नाइक चर सबद बिचारो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥ या मै कछू भेद नही मानो ॥७८६॥ अड़िल ॥ बारिधनी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर नाइक सबद; अंति तिह दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥७८७॥ सामुद्रनि सबदादि; उचारो जानि कै ॥ जा चर पद ता के; पुनि पाछे ठानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७८८॥ |
| नीररासि को आदि; उचारन कीजीऐ ॥
जा चर नाइक सबद; अंति तिह दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता को अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; साच पहिचानीऐ ॥७८९॥ चौपई ॥ नीरालयनी आदि उचारो ॥ जा चर नाइक बहुरि बिचारो ॥ ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७९०॥ अड़िल ॥ नीरधनी सबदादि; उचारो जानि कै ॥ जा चर नाइक पद को; पाछे ठानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७९१॥ दोहरा ॥ बारालयणी आदि कहि; जा चर पति पद देहु ॥ सत्रु सबद पुनि भाखीऐ; नाम तुपक लखि लेहु ॥७९२॥ अड़िल ॥ जल रासननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर नाइक पद; तिह पाछे दीजीऐ ॥ सत्रु पद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुकबि बिचारीऐ ॥७९३॥ चौपई ॥ कंनिधनी सबदादि भणिजे ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजे ॥ सत्रु सबद को अंति उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७९४॥ अ्मबुजनी सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७९५॥ जलनी आदि बखानन कीजै ॥ जा चर पति पाछै पद दीजै ॥ सत्रु सबद को अंति बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥७९६॥ पानिनि आदि उचारन कीजै ॥ जा चर पति सबदांति भणीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७९७॥ अ्मबुजनी सबदादि भणिजै ॥ जा चर पति सबदांति कहिजै ॥ सत्रु सबद बहुरो तुम ठानो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७९८॥ दोहरा ॥ बारिनि आदि उचारि कै; जा चर धर पद देहु ॥ सत्रु उचारु तुफंग के; नाम चतुर लखि लेहु ॥७९९॥ अड़िल ॥ बारिजनी सबदादि; उचारो जानि कै ॥ जा चर पति पद को; तिह पाछे ठानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारि कै ॥ हो सकल तुपक के नाम; सु लेहु बिचारि कै ॥८००॥ जलनिधनी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८०१॥ |
| चौपई ॥
मेघजनी सबदादि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥८०२॥ अ्मबुदनी सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥८०३॥ हरिनी आदि उचारन कीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥८०४॥ बारिदनी सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥ नाम तुपक सभ हीए बिचारहु ॥८०५॥ नदिनी आदि उचारन कीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥८०६॥ अड़िल ॥ नयनी सबद सु मुख ते; आदि उचारीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता कै अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥८०७॥ सरतनि सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पाछे ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८०८॥ नादिनि मुख ते सबद; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक को नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥८०९॥ जलनी मुख ते आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पाछे दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८१०॥ आदि तरंगनि सबद; उचारो जानि कै ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो ठानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८११॥ आदि करारनि सबद; उचारो बकत्र ते ॥ जा चर कहि नाइक पद; उचरो चित ते ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बखानीऐ ॥८१२॥ फेनननी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८१३॥ |
| ब्रिछ कंदनिनि आदि; बखानो जानि कै ॥
जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥८१४॥ दोहरा ॥ जल रस सननी आदि कहि; जा चर पति कहि अंति ॥ सत्रु सबद कहि तुपक के; निकसहि नाम अनंत ॥८१५॥ क्रितअरिनी पद आदि कहि; जा चर नाथ उचारि ॥ सत्रु उचरि करि तुपक के; लीजो नाम सु धार ॥८१६॥ चौपई ॥ क्रार कंदनीनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८१७॥ क्रार आरिनी आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥८१८॥ कलुनासननि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥ नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥८१९॥ अड़िल ॥ गंगनि पद को प्रथम; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८२०॥ चौपई ॥ जनुवनि पद को आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८२१॥ अड़िल ॥ भागीरथनी पद को; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरो ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८२२॥ चौपई ॥ जटनिनि पद को आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल प्रमानो ॥८२३॥ नदी राटनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणीजै ॥ नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥८२४॥ |
| भीखम जननिनि आदि बखानो ॥
जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥ या मै कछू भेद नही कहीऐ ॥८२५॥ नदी ईस्रनिनि आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥८२६॥ नदी राजनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद बहुरो मुखि भाखु ॥ नाम तुफंग चीनि चिति राखु ॥८२७॥ नदि नाइकनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद बहुरो तिह दीजै ॥ नाम तुफंग चीनि चिति लीजै ॥८२८॥ सरितेस्रनिनि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥८२९॥ सरिता बरनिनि आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥८३०॥ सरितेद्रनिनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि पति पद दे डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥८३१॥ दोहरा ॥ सरिता न्रिपनिनि बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥ जा चर पति कहि सत्रु कहि; नाम तुपक जीअ धार ॥८३२॥ अड़िल ॥ आदि तरंगनि राजनि; सबद उचारीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८३३॥ नदी न्रिपनिनी मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८३४॥ चौपई ॥ आदि जमुननी सबद उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चित लिजै ॥८३५॥ कालिंद्रनिनी आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८३६॥ किसन बलभिनि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानीऐ ॥८३७॥ |
| बसुदेवज बलभननि भाखो ॥
जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥ या मै भेद एक नही मानो ॥८३८॥ अड़िल ॥ सकल नाम बसुदेव के; आदि उचारीऐ ॥ जा बलभनी ता पाछे; पद डारीऐ ॥ जा चर कहि रिपु सबद; बहुरि तिह भाखीऐ ॥ हो चीनि तुपक के नाम; चतुर चिति राखीऐ ॥८३९॥ चौपई ॥ सिआम बलभा आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पदु ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८४०॥ मुसलीधर बलभा बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणीजै ॥ जान नाम तुपक को लीजै ॥८४१॥ बापुरधर बलभा प्रमानो ॥ जा चर कहि पति सबदहि ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ सब जीअ नाम तुपक के धरीऐ ॥८४२॥ बंसीधर धरनिनि पद दिजै ॥ जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक पहिचानो ॥८४३॥ बिसुइस बलभादि पद दीजै ॥ जा चर कहि पति सबद भणीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८४४॥ बिसुइसेस्रणी आदि भणिजै ॥ जा चर कहि पति पद पुनि दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८४५॥ जदु नाइक नाइका बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥८४६॥ अड़िल ॥ दुआरावतीस बलभा; आदि उचारीऐ ॥ जा चर नाइक पद को; पुनि दै डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८४७॥ जादो राइ बलभा; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर लखि लीजीऐ ॥८४८॥ दुआरकेंद्र बलभिनि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पाछे दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८४९॥ |
| दुआरकेस बलभनि सु; आदि बखानीऐ ॥
जा चर कहि नाइक पद; बहुर प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८५०॥ चौपई ॥ दुआरके अनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के धरीऐ ॥८५१॥ जदुनाथननी आदि भनीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८५२॥ दुआरवती सरनिन पद भाखु ॥ जा चर कहि नाइक पद राखु ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८५३॥ अड़िल ॥ दुआरवती नाइकनिनि; आदि उचारीऐ ॥ जा चर कहि कै पुन; नाइक पद डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८५४॥ चौपई ॥ दुआरका धननि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणीजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥८५५॥ दुआरकेंद्रनिनि आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि पति सबद सु धरीऐ ॥ सत्रु सबद के अंति बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के मानो ॥८५६॥ दुआरावतेस्रनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद सु ठानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के धरीऐ ॥८५७॥ जद्वेसनि आदि उचारन कीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक पहिचानो ॥८५८॥ दुआरावती नाइकनिनि भाखहु ॥ जा चर कहि पति पद कहु राखहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८५९॥ जगतेसरनिनि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८६०॥ अड़िल ॥ अनिक दुंदभजा; बलभनि आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८६१॥ |
| हली भ्रातनिनि आदि; बखाननि कीजीऐ ॥
जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८६२॥ चौपई ॥ बलि आनुजनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८६३॥ बलि भईअननी आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद को बहुरो कहीयो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीयो ॥८६४॥ रउहणेअ भ्रातननि भाखु ॥ जा चर कहि नाइक पद राखु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लहि लिजै ॥८६५॥ बलभद्र भ्रातनिनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८६६॥ अड़िल ॥ प्रल्मबघनु अनुजननी; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८६७॥ कामपाल अनुजनिनी; आदि भनीजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सु मंत्र बिचारीऐ ॥८६८॥ हल आयुध अनुजनिनी; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ अरि पद ता के अंति; सुकबि! कहि दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥८६९॥ रिवति रवन अनुजनिनी; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति सु दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥८७०॥ चौपई ॥ राम अनुजनिनी आदि उचारो ॥ जा चर कहि पति पद दै डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक पद जानो ॥८७१॥ बलदेव अनुजनी आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥८७२॥ अड़िल ॥ प्रल्मबारि अनुजनिनी; आदि उचारीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥८७३॥ |
| त्रिणावरत अरिननि; सबदादि बखानीऐ ॥
जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८७४॥ केसियांतकनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८७५॥ बकीआंतकनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८७६॥ पतिनागनिनि आदि; उचारो जानि कै ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानि कै ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८७७॥ सकटासुर हननिन; सबदादि भणीजीऐ ॥ जा चर कहि पाछे; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुगिआन पछानीऐ ॥८७८॥ चौपई ॥ मुरअरिनिनि सबदादि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८७९॥ नरकांतकनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहिजै ॥८८०॥ आदि नरकहानिनि पद भाखो ॥ जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८८१॥ सत्रु घाइननि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक पहिचानहु ॥८८२॥ अड़िल ॥ मुर मरदनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि के पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥८८३॥ चौपई ॥ मधुसूदननिनि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद को बहुर बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८८४॥ |
| अड़िल ॥
मधु दुंदननी मुख ते; आदि भणिजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; सबदेंद्र कहिजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८८५॥ मधु नासननी मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि के पुनि; सबदेसुर प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८८६॥ कालजमुन अरिननि; सबदादि बखानीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८८७॥ नरक अरिननि मुख ते; आदि भणिजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दिजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥८८८॥ कंसकेस करखनणी; आदि बखानही ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानही ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८८९॥ बासुदिवेसननिनी; आदि भणिजीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दिजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९०॥ अनक दुंदभेसनिनि; आदि उचारीऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र पछानीऐ ॥८९१॥ रस नर कसनिनि आदि; सबद को भाखऐ ॥ जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद राखीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८९२॥ नाराइननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै; राज सबद पुनि दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९३॥ बारालयननि मुखि ते; आदि भणिजीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; बहुरि पद दिजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९४॥ नीरालयनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि पति सबद; बहुरि तिह दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८९५॥ |
| नार केतनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥
जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८९६॥ जल बासननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै; नाथ सबद पुनि दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८९७॥ चौपई ॥ जल केतननी आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कह बहुरि भणिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥८९८॥ अड़िल ॥ जल बासननी आदि; बखानन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै; नाथ सबद पुनि दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८९९॥ चौपई ॥ जल धामननी आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९००॥ जलग्रिहननी आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९०१॥ जल बासननी आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥ सत्रु सबद कहु अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के मानहु ॥९०२॥ जल संकेतनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९०३॥ बार धामनी आदि भणिजै ॥ जा चर कहि सबदेस कहिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९०४॥ बार ग्रिहननी आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९०५॥ अड़िल ॥ मेघ जनिनि सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि करि नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥९०६॥ चौपई ॥ सारसुती सबदादि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९०७॥ |
| गंग भेटनी आदि उचारो ॥
जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल कहिजै ॥९०८॥ अरुणि बारनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९०९॥ अरुण बारिनी आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥ सकल तुपक के नाम बिचारो ॥९१०॥ अड़िल ॥ अरुण अ्मबुनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥९११॥ चौपई ॥ अरुण तरंगनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९१२॥ आरकता जलनिनि पद भाखो ॥ जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९१३॥ अरुण अ्मबुनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥९१४॥ अरुण पानिनी आदि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥९१५॥ अरुण जलनिनी आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लखि लिजै ॥९१६॥ अरुण नीरनिनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९१७॥ सतद्रवनिनी प्रिथम प्रकासो ॥ जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ अरि पद ता के अंति उचरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९१८॥ सत प्रवाहनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥९१९॥ सहस नारनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद के बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९२०॥ |
| अड़िल ॥
सत द्रवननिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद कहु दीजीऐ ॥ रिपु पद को ता के; पुनि अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥९२१॥ चौपई ॥ सत प्रवाहनिनि प्रथम बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९२२॥ सता गामिनी प्रथम भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९२३॥ सत तरंगननि आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ अंति सबद ता के अरि कहीऐ ॥ नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥९२४॥ भूमि सबद को आदि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बीचारहु ॥९२५॥ आदि बिआसनिनी पद भाखो ॥ जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९२६॥ बिअहननी सबदादि भणिजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥ सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९२७॥ पास सकतिननि आदि उचरीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥ रिपु पद ता के अंति भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९२८॥ पास नासनिनि आदि बखनीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद ठनीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९२९॥ बरुणाइध नासननि बखानहु ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९३०॥ जलिसन आयुध नाम कहीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९३१॥ अड़िल ॥ सकल पासि लै नाम; नासनिनि भाखीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; बहुरि पद राखीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥९३२॥ राविननी सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद पुनि दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबीर पछानीऐ ॥९३३॥ |
| चौपई ॥
राविनीनि सबदादि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद कहिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९३४॥ चंद्र भगनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९३५॥ ससि भगनिनि सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९३६॥ चंद्रनुजनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद सु ठानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरो धरीऐ ॥ नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥९३७॥ अड़िल ॥ ससि अनुजनिनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥९३८॥ चौपई ॥ मयंक अनुजनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ अरि पद अंति तवन के दिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९३९॥ अड़िल ॥ मयंक सहोदरनिनि; सबदादि बखानीऐ ॥ जा चर कहि करि नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति भणीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥९४०॥ चौपई ॥ अज अनुजननिनि आदि कहिजै ॥ जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥ सत्रु सबद कहु अंति उचारहु ॥ सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९४१॥ निसिस अनुजननिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबदि प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९४२॥ निसि इसरननिनि आदि कहिजै ॥ जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९४३॥ रैनाधिपनी आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लखि लिजै ॥९४४॥ |
| रैन राटनिनि आदि उचरीऐ ॥
जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥९४५॥ रैनराजनी आदि कहिजै ॥ जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥ ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥ नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥९४६॥ निस नाइकनिनि आदि उचरीऐ ॥ सून उचरि चर पति पद डरीऐ ॥ अरि पद ता के अंति बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९४७॥ निसिइसनी सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥ सुकबि तुपक के नाम बिचारहु ॥९४८॥ निसि पतिनिनि सबदादि उचरीऐ ॥ सुत चर अरि अंतहि पद धरीऐ ॥ सत्रु सबद कहु अंति बखानहु ॥ सुकबि तुपक के नाम पछानहु ॥९४९॥ निस धनिनी सबदादि कहिजै ॥ जा चर कहि अरि पदहि भणिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥९५०॥ रैन नाइकनि आदि सु कहीऐ ॥ जा चर कहि पति पद दै रहीऐ ॥ ता के अंति सत्रु पद भाखहु ॥ नाम तुपक के सभ लखि राखहु ॥९५१॥ निस चरनिनि प्रथमै पद भाखहु ॥ सुत चर कहि नाइक पुनि राखहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९५२॥ आदि निसाचरिननि कहु भाखो ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९५३॥ रैन रमनि सबदादि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद कहिजै ॥ सत्रु सबद को अंति बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९५४॥ रैन राजनिनि प्रथम उचारो ॥ सुत चर कहि पति पदहि सवारो ॥ ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥ नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥९५५॥ निसारवनिनि आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद ता पाछे कहीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥९५६॥ दिन अरि रवनिनि आदि उचारो ॥ सुत चर कहि पति सबद बिचारो ॥ ता के अंति सत्रु पद भाखो ॥ नाम तुपक जू के लखि राखो ॥९५७॥ |
| हरिज अरि रवनिनि आदि बखानो ॥
सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ ता के अंति सत्रु पद कहो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहो ॥९५८॥ तिम्रियरि सो रवननि पद कहीऐ ॥ सुत चर कहि नाइक पद गहीऐ ॥ सत्रु सबद तिह अंति कहिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९५९॥ हरिजरि रवनिनि आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचरीऐ ॥ नाम तुपक के सुकबि बिचरीऐ ॥९६०॥ रविजरि रवनिनि आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद कहु बहुरो भाखहु ॥ सभ स्री नाम तुपक लखि राखहु ॥९६१॥ भानुज अरि कहि रवनि भनीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९६२॥ सूरजरि रवनि आदि पद कहीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद गहीऐ ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥९६३॥ भानुजारि रवनिनि पद भाखो ॥ सुत चर कहि पति पद पुनि राखो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ नाम तुपक के सकल प्रमानहु ॥९६४॥ अड़िल ॥ दिनधुज अरि रवनिनि को; आदि उचारीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद दे डारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥९६५॥ दिनराजि अरि रवनिनी; सु आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि कै नाथ; सबद पुनि ठानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुध बिचारीऐ ॥९६६॥ चौपई ॥ दिनिस अरि रवनिनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद कहु पुनि कहि लीजै ॥ नाम तुपक के सकल पतीजै ॥९६७॥ तम अरि जरि रवनिनि पद भाखो ॥ जा चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद तिह अंति भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९६८॥ चंद्र जोननी आदि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९६९॥ ससि उपसखिनी आदि बखानहु ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥९७०॥ |
| निस इस भगनी आदि बखानहु ॥
जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९७१॥ ससि भगनी सबदादि बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९७२॥ निसिस भगा सबदादि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद कहिजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९७३॥ रैन राट कहि भगा बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद को अंति भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९७४॥ अड़िल ॥ रैन रावनि कहि भगा; सबद बखानीऐ ॥ जा चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति भनीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चहो तह दीजीऐ ॥९७५॥ रैन राज कहि भगा; बखानन कीजीऐ ॥ जा चर कहि करि नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि मन धारीऐ ॥९७६॥ चौपई ॥ रैन राव कहि भगा बखानो ॥ जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद तिह अंति भणिजै ॥ नाम तुपक जह चहो कहिजै ॥९७७॥ दिन अरि कहि भग सबद बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद तिह अंति सु कहीऐ ॥ नाम तुपक उचरहु जह चहीऐ ॥९७८॥ तमचर कहि भग सबद बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९७९॥ रैण रावि कहि भगणि कहीजै ॥ जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥ सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९८०॥ जउन करण कहि भगणि बखानो ॥ जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥९८१॥ किरण धरण कहि भगणि कहीजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ नाम तुपक के सभ अनुमानहु ॥९८२॥ मयंक सबद कहि भगणि भणिजै ॥ सतु चर कहि पद नाथ धरिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥ नाम तुपक के सकल सु धरीऐ ॥९८३॥ |
| म्रिग बाहनि कहि भगणि बखानो ॥
सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥ सभ स्री नाम तुपक चिति धारहु ॥९८४॥ हिरण राट कहि भगणि उचारहु ॥ सुत चर कहि नाइक पद डारहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥९८५॥ स्रिंग बाहणी भगा भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९८६॥ म्रिग पतिणी कहि भगणि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९८७॥ प्रजापति कहि भगणि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९८८॥ छंद ॥ म्रिग नाथ भगणणि भाखु ॥ रिपु नाथ चर पति राखु ॥ रिपु सबद बहुरि बखान ॥ सभ नाम तुपक प्रमान ॥९८९॥ चौपई ॥ नदी राट सुत भगणि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक अनुमानहु ॥९९०॥ सामुंद्रज कहि भगणि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचारो ॥ नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥९९१॥ नदी राट सुत भगणि उचारो ॥ जा चर कहि पति पद दे डारो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥९९२॥ समुद्रज भगणिनि आदि भणिजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९३॥ म्रिगजा भगणिनि आदि उचारो ॥ जा चर कहि पति पद दे डारो ॥ रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥९९४॥ नदिसज भगणि आदि पद दीजै ॥ जा चर कहि पति सबद धरीजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९५॥ नदि नाइक कहि भगणिनि भाखो ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक को जानो ॥९९६॥ |
| सरितिस भगणिनि आदि भणिजै ॥
सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९७॥ सरित इंद्र भगणनी भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक पहिचानहु ॥९९८॥ अड़िल ॥ निससिणि कहि भगणिनि पद; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति भनीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लखि लीजीऐ ॥९९९॥ तम हर भगणिनि मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ जा चर कहि के पति पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०००॥ तम हर भगणिनि आदि; बखानन कीजीऐ ॥ सुत चर कहि कै पति पद; अंति भणीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति सुबुधि कहु ॥ हो सकल तुपक के नाम; अनेक प्रबीन लहु ॥१००१॥ तम अरि भगणाणनि पद; प्रिथम कहीजीऐ ॥ सुत चर कहि पति सबद; अंति तिहु दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥१००२॥ चौपई ॥ तिमररि भगणणि आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥ सकल तुक के नाम पछानो ॥१००३॥ तिमर नास करि भगणनि भाखो ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥१००४॥ तिमर रदन भगणनी बखानो ॥ सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणीजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१००५॥ तिमर उचरि हा भगण बखानहु ॥ सुत चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ सत्रु सबद तिह अंति भणीजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१००६॥ तिमर निकंदनि आदि उचरीऐ ॥ भगणिनि सुत चर पुनि पति धरीऐ ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥१००७॥ तिमरमंद भगणिनी भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥१००८॥ |
| तिमरयांत कहि भगणिनि भाखो ॥
सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ नाम तुपक के सकल प्रमानहु ॥१००९॥ अड़िल ॥ तिमर नास करि भगणिनि; आदि बखानीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥ रिपु पद को ता के पुनि; अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०१०॥ उडगराज कहि भगणिनि; आदि बखानीऐ ॥ सुत चर कहि के नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥१०११॥ चौपई ॥ उडगिस कहि भगणिनी भणिजै ॥ सुत चर कहि नाइक पद दिजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानहु ॥ नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥१०१२॥ उडग नाथ कहि भगणि उचारो ॥ सुत चर कहि पति पद कहु डारो ॥ रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक जीअ जानहु ॥१०१३॥ उडग न्रिपति कहि भगणिनी भणीजै ॥ सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०१४॥ उडग न्रिपति कहि भगणि भणीजै ॥ सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥१०१५॥ अड़िल ॥ उडगएस भगणिनि; सबदादि बखानीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ धारीऐ ॥१०१६॥ उडपति भगणिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥१०१७॥ चौपई ॥ उडग भूपणी भूपि बखानो ॥ सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०१८॥ तारापति कहि भगणिनि भाखो ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥ सभ स्री नाम तुपक जीअ धारहु ॥१०१९॥ तारेसर कहि भगणि उचारो ॥ सुत चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०२०॥ |
| तारालयइस भगणि बखानो ॥
सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥ ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥१०२१॥ अड़िल ॥ तारा ग्रिहणिस भगणी; आदि बखानीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंतहि दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि! लहि लीजीऐ ॥१०२२॥ उडग निकेतिस भगनी; आदि भणीजीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; बहुरि पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०२३॥ उडग नाथ भगणिनी; प्रिथम पद भाखीऐ ॥ सुतु चर कहि करि नाथ; बहुरि पद राखीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पहिचानीऐ ॥१०२४॥ उडगएसर भगणिनि; सबदादि उचारीऐ ॥ सुत चर कहि करि नाथ; सबद दै डारीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति भणीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥१०२५॥ उडग एसर भगणिनि सबदादि भणीजीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद को दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ धारीऐ ॥१०२६॥ चौपई ॥ उडगास्रै भगणिनी बखानो ॥ सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक जीअ धरीऐ ॥१०२७॥ रिखिज भगणिनी आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०२८॥ मुनिज भगणिनी आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥ नाम तुपक के ह्रिदै बिचारहु ॥१०२९॥ ब्रिति उतमज भगणिनी भाखो ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥ सत्रु सबद तिह अंति सु कहीऐ ॥ सकल तुपक के नामन लहीऐ ॥१०३०॥ तपिस उचरि भगणिनी भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०३१॥ कसिप सुत कहि भगणिनि भाखीऐ ॥ सुत चर कहि नाइक पद राखीऐ ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥ नाम तुपक के सभ जीअ धरीऐ ॥१०३२॥ |
| जवन करण भगणिनी बखानहु ॥
सुत चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥ ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१०३३॥ क्रिसनिनि आदि बखानन कीजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥ रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥ नाम तुपक के सभ अनुमानहु ॥१०३४॥ सिआम मूरतिनिनि आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक अनुमानहु ॥१०३५॥ प्रथम तपतिनी सबद उचरीऐ ॥ सुत चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥ सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०३६॥ सूरज पुत्रिका आदि भणिजै ॥ सुत चर कहि नाइक पद दिजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥ सभ स्री नाम तुपक जीअ धारहु ॥१०३७॥ सूरज आतमजा आदि भणीजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥ सत्रु सबद तिह अंति उचारो ॥ नाम तुपक के सकल बिचारो ॥१०३८॥ आदि माननी सबद उचारो ॥ सुत चर कहि पति पद दे डारो ॥ अरि पद ता के अंति उचरीऐ ॥ नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥१०३९॥ अभिमानिनी पदादि भणिजै ॥ सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के मानहु ॥१०४०॥ प्रथम समयणी सबद उचारो ॥ सुत चर कहि नाइक पद डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि कहिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०४१॥ गरबिणि आदि उचारन कीजै ॥ सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥ अरि पद ता के अंति उचारहु ॥ नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥१०४२॥ अड़िल ॥ द्रपनिनि मुख ते सबद; सु आदि उचारीऐ ॥ सुत चर कहि कर नाथ; सबद दे डारीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पहिचानीऐ ॥१०४३॥ |
| चौपई ॥
अहंकारनी आदि उचारो ॥ सुत चर कहि पति पद कहु डारो ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०४४॥ पीअणीणि आदि उचारण कीजै ॥ सुत चर कहि पति सबद भणीजै ॥ रिपु पद ता के अंति बखाणहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जाणहु ॥१०४५॥ दोहरा ॥ धिखणी आदि बखान कै; रिपु पद अंति उचार ॥ सभ स्री नाम तुफंग के; लीजहु सुकबि सु धार ॥१०४६॥ मेधणि आदि उचारि कै; रिपु पद कहीऐ अंति ॥ सभ स्री नाम तुफंग के; निकसत चलै अनंत ॥१०४७॥ सेमुखिनी सबदादि कहि; अरि पद अंति बखान ॥ सकल तुपक के नाम ए; लहि लीजो बुधिवान ॥१०४८॥ आदि मनीखनि सबद कहि; रिपु पद बहुरि उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥१०४९॥ बुधनी आदि बखान कै; अंति सबद अरि देहु ॥ नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥१०५०॥ चौपई ॥ भानी आदि बखानन कीजै ॥ रिपु पद ता के अंति भणीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ या मै भेद कछू नहि मानहु ॥१०५१॥ दोहरा ॥ आदि आभानी सबद कहि; रिपु पद अंति बखान ॥ नाम सकल स्री तुपक के; लीजहु सुकबि पछान ॥१०५२॥ अड़िल ॥ आदि सोभनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥१०५३॥ प्रभा धरनि मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति प्रमानीऐ ॥ ता ते उतर तुपक को; नाम भनीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; जान नही लीजीऐ ॥१०५४॥ सुखमनि पद को मुख ते; आदि उचारीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंतहि डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०५५॥ चौपई ॥ धीमनि पद को आदि बखानहु ॥ ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥ सरब तुपक के नाम लहीजै ॥ या मै भेद नैकु नही कीजै ॥१०५६॥ आदि क्रांतनी सबद उचारो ॥ ता के अंति सत्रु पद डारो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ या के बिखै भेद नही मानहु ॥१०५७॥ |
| छबिनी आदि उचारन कीजै ॥
रिपु पद अंति तवन के दीजै ॥ नाम तुपक के सकल पछानहु ॥ या के बिखै भेद नही मानहु ॥१०५८॥ प्रिथम बाजनी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ चित मै रुचै तिसी ठां कहीऐ ॥१०५९॥ अड़िल ॥ आदि बाहनी सबद; बखानन कीजीऐ ॥ ता के पाछे सत्रु; सबद कहु दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो चहीऐ जवनै ठवर; सु तहा बखानीऐ ॥१०६०॥ आदि तुरंगनी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥ अरि पद ता के अंति; सु बहुरि प्रमानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०६१॥ हयनी सबदहि मुख ते; आदि उचारीऐ ॥ ता के अंति अंतकरि; पद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर! जीअ जानीयो ॥ हो दीयो जहा तुम चहो; सु तही बखानीयो ॥१०६२॥ चौपई ॥ सैंधवनी सबदादि उचारो ॥ अरि पद अंति तवन के डारो ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ या मै भेद नैकु नही मानहु ॥१०६३॥ आदि अरबिनी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ या मै भेद नैकु नही जानहु ॥१०६४॥ आदि तुरंगनी सबद बखानहु ॥ अरि पद ता के अंत प्रमानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के लईऐ ॥ जह चित रुचै तही ते कहीऐ ॥१०६५॥ आदि घोरनी सबद भनीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सभै तुपक के नाम बिचारो ॥ जह चाहो तिन तही उचारो ॥१०६६॥ आदि हसतिनी सबद उचारो ॥ रिपु पद अंति तवन के डारो ॥ सभै तुपक के नाम लहिजै ॥ जह चाहो ते तही भणिजै ॥१०६७॥ अड़िल ॥ आदि दंतिनी सबद उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबदु को अंति तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम सुबुधि पछानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद नैकु नही मानीऐ ॥१०६८॥ चौपई ॥ आदि दुरदनी सबद बखानहु ॥ ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥ या के बिखै भेद नही किजै ॥१०६९॥ |
| द्विपनी आदि उचारन कीजै ॥
अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ जह चाहो तह ही ते कहीऐ ॥१०७०॥ आदि पदमिनी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ नाम तुपक के सकल लहीजै ॥ या मै भेद न कछहू कीजै ॥१०७१॥ अड़िल ॥ प्रिथम बारणी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुकबि! लहि लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०७२॥ चौपई ॥ आदि बिआलणी सबद बखानहो ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ या मै भेद नैकु नही मानहो ॥१०७३॥ इ्मभणी आदि उचारन कीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के होवे ॥ जा को सकल सुकबि कुल जोवै ॥१०७४॥ प्रथम कु्मभणी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के जानहु ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ नितप्रति मुख ते पाठ करीजै ॥१०७५॥ अड़िल ॥ कुंजरणी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ अरि पद ता के अंत; बहुर कहि दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥१०७६॥ करिनी सबदि सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥ हो दीयो चहो जिह ठवर; तहा ही दीजीऐ ॥१०७७॥ मद्य धरननी मुख ते; आदि भनीजीऐ ॥ हंता ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर चित मै लहो ॥ हो कह्यो चहो इन जहा; तहा इन कौ कहो ॥१०७८॥ सिंधुरनी मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुकबि जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैक नही मानीऐ ॥१०७९॥ अनकपनी पद मुख ते; प्रिथम भणीजीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो दयो चहो जिह ठवरै; तही प्रमानीऐ ॥१०८०॥ प्रिथम नागनी मुख ते; सबद उचारीऐ ॥ सत्रु सबद कहु अंति; तवन के डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०८१॥ |
| हरिनी सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥
सत्रु सबद को; ता के अंति प्रमानीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के; चतुर पछानीअउ ॥ हो जवनै ठवर सु चहीऐ; तही बखानीअउ ॥१०८२॥ गजनी सबद बकत्र ते; आदि भनीजीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥ चतुर तुपक के नाम; सकल लहि लीजीऐ ॥ हो जिह चाहो तिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥१०८३॥ चौपई ॥ सावजनी सबदादि बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ जिह ठां चहो तही ते कहीऐ ॥१०८४॥ मातंगनी पदादि भणिजै ॥ अरि पद अंति तवन के दिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के होवै ॥ जा को सकल सुकबि मिल जोवै ॥१०८५॥ आदि गइंदनि सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ जवनै ठवर रुचै तह कहीऐ ॥१०८६॥ द्रुम अरि आदि उचारन कीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥ या मै भेद न कछु जीअ जानो ॥१०८७॥ ब्रिछांतकणी आदि उचारो ॥ अरि पद अंति तवन के डारो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ दयो चहे जह ठां तह कहीऐ ॥१०८८॥ फलधर अरिणी आदि कहीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥ जहा चहो तिह ठवर बखानो ॥१०८९॥ फलदाइक अरिणी अहि उचरीऐ ॥ अरि पद अंति तवन के डरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥ या मै भेद न रंचक मानो ॥१०९०॥ अड़िल ॥ धराधरन अरिणी; सबदादि बखानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो जवन ठवर तिन चहो; तही ते दीजीऐ ॥१०९१॥ चौपई ॥ धूरिराट अरिणी पद भाखो ॥ ता के अंति सत्रु पद राखो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥ जह चाहो तिह ठवर प्रमानो ॥१०९२॥ फलध सबद को आदि उचारहु ॥ अरि पद अंति तवन के डारहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ जह चाहो तिह ठवर बखानहु ॥१०९३॥ |
| फलि सबद को आदि भणिजै ॥
अरि पद कहि रिपु पद पुनि दिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ चहीऐ जहा, तही ते कहीऐ ॥१०९४॥ तरु अरिणी सबदादि बखानो ॥ अरि पद अंति तवन के ठानो ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद नैकु नही मानहु ॥१०९५॥ धरिस अरिणी सबदादि भणिजै ॥ अरि पद अंति तवन के दिजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या के बिखै भेद नही जानो ॥१०९६॥ बिरछरिणी सबदादि भणीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥ जिह चाहो, तिह ठवर सु कहीऐ ॥१०९७॥ रदनी आदि उचारन कीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥ जिह चाहो, तिह ठवर सु भनीजै ॥१०९८॥ रदनछंदनी अरिणी भाखो ॥ अरि पद अंति तवन के राखो ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद नैकु नही जानो ॥१०९९॥ अड़िल ॥ नाम सकल दंतन के; आदि बखानीऐ ॥ अरिणी अरि पद अंति; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो दीयो चहो जिह ठवर; तहा ही दीजीऐ ॥११००॥ चौपई ॥ न्रिपणी आदि बखानन कीजै ॥ अरि पद अंति तवन के दीजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद कछू नही जानो ॥११०१॥ आदि भूपनी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥ जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११०२॥ अड़िल ॥ प्रिथम सुआमनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११०३॥ आदि अधिपनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११०४॥ धरद्रिड़नी मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जी लीजीऐ ॥ हो सुघर! चहो जिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥११०५॥ |
| आदि अधिपनी सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥
सत्रु सबद को अंति; तवन के राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही प्रमानीऐ ॥११०६॥ पतिणी आदि बखान; सत्रुणी भाखीऐ ॥ होत तुपक के नाम; ह्रिदै मै राखीऐ ॥ इन के भीतर भेद; न नैकु पछानीऐ ॥ हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही प्रमानीऐ ॥११०७॥ चौपई ॥ भूपतिणी सबदादि बखानो ॥ अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ जवनै ठवर रुचै, तह कहीऐ ॥११०८॥ आदि भूपणी सबद बखानहु ॥ अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥ जिह ठां रुचै, सु तही प्रमानो ॥११०९॥ अड़िल ॥ बधकरणी मुख ते; सबदादि उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो जवन ठवर रुचि होइ; तही ते दीजीऐ ॥१११०॥ किंकरणी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; पछान प्रबीन चिति ॥ हो जिह चाहो इह नाम; देहु भीतर कबित ॥११११॥ चौपई ॥ अनुचरनी सबदादि उचरीऐ ॥ अरि पद अंति तवन के डरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ उचरो तहा ठवर जिह चहीऐ ॥१११२॥ अड़िल ॥ आदि अनुगनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ हननी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो जह जह सबद चहीजै; तह तह दीजीऐ ॥१११३॥ किंकरणी मुख ते; सबदादि उचारीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर जीअ जानि लै ॥ हो जवन ठवर मो चहो; तही ए सबद दै ॥१११४॥ दोहरा ॥ प्रतना आदि उचारि कै; अरि पद अंति उचार ॥ सभ स्री नाम तुफंग के; लीजै सुकबि! सु धार ॥१११५॥ धुजनी आदि बखानि कै; अरि पद भाखो अंति ॥ सभ स्री नाम तुफंग के; निकसत चलै अनंत ॥१११६॥ आदि बाहनी सबद कहि; अंत सत्रु पद दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजो समझ प्रबीन ॥१११७॥ |
| कामि आदि सबदोचरि कै; अरि पद अंति सु देहु ॥
नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥१११८॥ कामि आदि सबदोचरि कै; अरि पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥१११९॥ आदि बिरूथनि सबद कहि; अति सत्रु पद दीन ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥११२०॥ सैना आदि बखानि कै; अरि पद अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥११२१॥ धनुनी आदि बखानि कै; अरिणी अंति बखान ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥११२२॥ अड़िल ॥ आदि धनुखनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; न नैकु प्रमानीऐ ॥११२३॥ कोवंडनी सबद को; आदि उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक को नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो जहा सबद ए चहो; तही ते दीजीऐ ॥११२४॥ चौपई ॥ इखुआसनी पदादि भनीजै ॥ अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥ सकल तुपक के नाम लहिजहि ॥ जह चाहो तिह ठवर भणिजहि ॥११२५॥ कारमुकनी सबदादि उचरीऐ ॥ अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ जह चाहो तिह ठवर बखानो ॥११२६॥ रिपु संतापनि आदि बखानो ॥ अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ या मै भेद नैकु नही कीजै ॥११२७॥ रिपु खंडणनी आदि भणिजै ॥ अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ जह तह मिलि सुघरुच! बखानो ॥११२८॥ दुसट दाहनी आदि भनीजै ॥ अरिणी सबद अंति तिह दीजै ॥ नाम तुपक के तुम लखि पावहु ॥ जह चाहो तिह ठवर बतावहु ॥११२९॥ रिपु घाइनी पदादि बखानो ॥ अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥ नाम तुपक के सकल लहीजै ॥ जउन ठवर चहीऐ तह दीजै ॥११३०॥ अड़िल ॥ आदि चापणी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो जहा चाहीऐ सबद; सु तह तह दीजीऐ ॥११३१॥ |
| प्रतंचनी सबद को; आदि बखानीऐ ॥
अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कहो निसंक सभ ठउर; न गनती कीजीऐ ॥११३२॥ रूआमल छंद ॥ सत्रु भंजणि आदि बखान ॥ रिपु सबदु बहुरि प्रमान ॥ सभ नाम तुपक पछान ॥ नहि भेद या महि जान ॥११३३॥ चौपई ॥ हरि सकतणि पद आणि भणिजै ॥ अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥ नाम तुपक के सकल लहीजै ॥ जही ठवर चहीऐ तह दीजै ॥११३४॥ अड़िल ॥ बिसिख बरसणी आदि उचारण कीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंति सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥ हो काबि कबित के भीतर; सदा प्रमानीऐ ॥११३५॥ चौपई ॥ बान बरखणी आदि उचरीऐ ॥ अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११३६॥ अड़िल ॥ आदि बाननी सबदहि; अभूलि बखानीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ नाम तुपक के सकल; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो जह चाहो तह सबद; तही ते दीजीऐ ॥११३७॥ चौपई ॥ आदि पनचनी सबद बखानो ॥ मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ रुचि जै जही तही ते कहीऐ ॥११३८॥ कोवंडजनी आदि उचरीऐ ॥ मथनी अंति सबद तिह धरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ जहा रुचै, ते तही बखानहु ॥११३९॥ इखुआसजनी आदि भणीजै ॥ मथणी अंति सबद तिह दीजै ॥ सकल तुपक के नाम लहिजै ॥ जवन ठवर चहीऐ तह दिजै ॥११४०॥ अड़िल ॥ कारमुकजनी पद को प्रिथम उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम सुघर लहि लीजीऐ ॥ हो कबित काबि मै चहो तहा ते दीजीऐ ॥११४१॥ रिपु तापणी सबदहि आदि उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति सु पद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम सुबुधि पछानीऐ ॥ हो जहा चहो तह देहु; न संका मानीऐ ॥११४२॥ आदि चापणी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुबुधि लहि लीजीऐ ॥ हो जह चाहो तिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥११४३॥ |
| पनच धरननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥
मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११४४॥ चौपई ॥ आदि सुह्रिदणी सबद बखानो ॥ मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ जिह ठां रुचै, तही ते कहीऐ ॥११४५॥ अड़िल ॥ बलभणी सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; न नैकु प्रमानीऐ ॥११४६॥ चौपई ॥ साखाइनणी आदि उचरीऐ ॥ अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥ जिह चहीऐ, तिह ठवर भणिजै ॥११४७॥ प्रीतमणी पद आदि बखानीऐ ॥ मथणी अंति तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै नैकु न मिथिआ जानो ॥११४८॥ अड़िल ॥ आदि सुजननी सबद; उचारन कीजीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ जानीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; तनक नही मानीऐ ॥११४९॥ प्रिथम सुहिरदिनी मुख ते; सबद उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; बहुरि पद डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर चित माझ लहु ॥ हो कबित काबि मै रुचै; तही ते नाम कहु ॥११५०॥ चौपई ॥ मानुखनी सबदादि भणीजै ॥ अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ चहो जहा सभ ठवर बखानहु ॥११५१॥ आदि मरतणी सबद बखानो ॥ अंतक सबद अंति तिह ठानो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥ जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११५२॥ आदि मानुखनी सबद बखानो ॥ ता के मथणी अंति सु ठानो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥ जिह चाहो, तिह ठवर भणिजै ॥११५३॥ मानिखयनी पदादि भणीजै ॥ अंति सबद मथणी तिह दीजै ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥ रुचै जहा, तिह ठवर भणिजै ॥११५४॥ नरणी आदि उचारण कीजै ॥ अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥ या मै भेद, न नैकु प्रमानहु ॥११५५॥ |
| मानवनी सबदादि भणिजै ॥
ता के अंति, सत्रु पद दिजै ॥ नाम तुपक के सकल लहीजै ॥ सभा मधि, बिनु संक कहीजै ॥११५६॥ अड़िल ॥ प्रिथीराटनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो इन के कहत न संका; मन मै कीजीऐ ॥११५७॥ चौपई ॥ छितणीसणी पदादि भणिजै ॥ अरिणी पद को बहुरि कहिजै ॥ नाम तुपक के सकल बखानहु ॥ सकल सभा मै प्रगट प्रमानहु ॥११५८॥ छत्रिसणी सबदादि भणिजै ॥ अंति सबद मथणी तिह दिजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ या मै भेद नैकु नही जानहु ॥११५९॥ छमि इसणी सबदादि उचारो ॥ मथणी सबद अंति तिह डारो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥ सदा सुनत बुधिजनन भणीजै ॥११६०॥ रूआमल छंद ॥ धरतीसणि आदि बखान ॥ अरि सबद अंति प्रमान ॥ सभ चीन नाम तुफंग ॥ सभ ठवर भनहु निसंग ॥११६१॥ अड़िल ॥ धवल धरिसणी पद को; प्रिथम उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ अमित तुपक के नाम; चतुर! लहि लीजीऐ ॥ हो सकल बुधिजन सुनत; उचारन कीजीऐ ॥११६२॥ चौपई ॥ ब्रिखभ धरिसणी आदि बखानो ॥ अरि पद अंति तवन के ठानो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥ सकल सभा ते सुणत भणिजै ॥११६३॥ धावलेसणी आदि बखानो ॥ मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानीऐ ॥ सकल बुधिजन सुनत बखानीऐ ॥११६४॥ अड़िल ॥ आदि धवलइसणी; सबदादि बखानीऐ ॥ ता के अरिणी अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥ हो गुनीजनन की सभा; उचारन कीजीऐ ॥११६५॥ प्रिथम ब्रिखभणीइसणी; सबद उचारीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चीन लै चतुर! चित ॥ हो काबि कथा मै दीजै; अउ भीतर कबित ॥११६६॥ गाविसइसणी सबदहि; आदि उचारीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीअहि ॥ हो कबित काबि के बीच; निडर हुइ दीजीअहि ॥११६७॥ |
| भुविसणी पद प्रिथम; उचारन कीजीऐ ॥
मथणी ता के अंति; सबद कहु दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥ हो जवन ठवर मै चहीऐ; तह ते दीजीऐ ॥११६८॥ चौपई ॥ उरविसणी सबदादि भणिजै ॥ मथणी अंति सबद तिह दिजै ॥ सकल तुपक के नाम लहिजहि ॥ सरब ठवर, बिनु संक भणिजहि ॥११६९॥ जगतीसणी पदादि बखानो ॥ अंति सबद मथणी तिह ठानो ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ या मै भेद रती न प्रमानहु ॥११७०॥ बसुमतेसणी आदि उचरीऐ ॥ अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजहि ॥ सभन सुनत बिनु संक भणिजहि ॥११७१॥ अड़िल ॥ बसुधेसणी सबद को; आदि उचारीऐ ॥ ता के मथणी अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर चित चीन लै ॥ हो जवन ठवर मै चहो; तही ते सबद दै ॥११७२॥ बैसुंधुराएसनी; आदि बखानीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ नाम तुपक के जान; चतुर जीअ लीजीअहि ॥ हो जवन ठवर मो चहो; तही ते दीजीअहि ॥११७३॥ बसुमतेसणी प्रिथम; सबद को भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; बहुरि पद राखीऐ ॥ नाम तुपक के चतुर; सकल जीअ जानीऐ ॥ हो जहा जहा चहीऐ; पद तही बखानीऐ ॥११७४॥ चौपई ॥ सामुंद्रणी एसणी कहीऐ ॥ अरिणी अंति सबद कहु गहीऐ ॥ नाम तुपक के लेहु सुजन जन ॥ अपने अपने बीच सकल मनि ॥११७५॥ सामुंद्रणीएसणी भाखो ॥ अरिणी सबद अंति तिह राखो ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥ सकल सुकबि जन! सुनत भणिजै ॥११७६॥ अचलाइसणी आदि भणिजै ॥ मथणी सबद अंति तिह दिजै ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ जवन ठवर चहीऐ, तह दीजै ॥११७७॥ विपलीसिणी पदादि उचारो ॥ अरिणी सबद अंति तिह धारो ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद न रंचक जानो ॥११७८॥ अड़िल ॥ आदि सागरा सबद; बखानन कीजीऐ ॥ एस दररनी अंति; तवन को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीअहि ॥ हो कबित काबि के बीच; चहो तह दीजीअहि ॥११७९॥ |
| महाअरणवी सबदहि; आदि उचारीऐ ॥
पति मरदननीह अंति; सबद कहु डारीऐ ॥ नाम तुपक के सकल; जान जीय राखअहि ॥ हो सकल सुजन जन सुनत; निडर हुइ भाखीअहि ॥११८०॥ चौपई ॥ आदि सिंधुणी सबद भणीजै ॥ पति अरदनी पदांत कहीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहो ॥ सकल सुजन जन सुनते कहो ॥११८१॥ नीरालयनी आदि उचरो ॥ नाइक अरिणी पुनि पद धरो ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद रतीकु न जानो ॥११८२॥ आदि जलालयणी पद दिजै ॥ पति अरिणी पद बहुरि भणिजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ सकल सुजन जन सुनत बखानहु ॥११८३॥ बारिधणी सबदादि उचरीऐ ॥ पति अरि अंति सबद को धरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम कहीजै ॥ सकल गुनिजनन! सुनत भनीजै ॥११८४॥ धराएसणी आदि सबद कहि ॥ मथणी अंति तवन के पद गहि ॥ सकल तुपक के नाम लहिजै ॥ संक छोरि बिन संक भणिजै ॥११८५॥ लोरभरेसणी आदि उचरीऐ ॥ अंति सबद मथणी कहु धरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम पछानहु ॥ संक छोरि, बिनु संक बखानहु ॥११८६॥ गोरा आदि उचारन कीजै ॥ एस अंतकणी अंति भणीजै ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥ जहा रुचै, तिह ठवर प्रमानो ॥११८७॥ अवनेसणी पदादि कहीजै ॥ मथणी सबद अंति तिह दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ भै निवारि, निरभै हुइ कहीऐ ॥११८८॥ दिगजनी सबदादि भणिजै ॥ एसारदनी अंति कहिजै ॥ सकल सु नाम तुपक के चीनहु ॥ जह चाहो, तह कहो प्रीबनहु! ॥११८९॥ |
| कु्मभिनेसनी आदि उचरीऐ ॥
अरिणी अंति सबद कहु धरीऐ ॥ सभै तुपक के नाम पछानो ॥ या महि झूठ नैक नही जानो ॥११९०॥ महिएसणी पदादि भणिजै ॥ अरिणी सबद अंति महि दिजै ॥ सकल तुपक के नाम कहीजै ॥ जह ही चहो, तही लै दीजै ॥११९१॥ मेदणेसणी आदि उचरीऐ ॥ घारी अंति सबद कहु धरीऐ ॥ नाम सु जान तुपक के सभ ही ॥ चाहो जहा, उचरहु तब ही ॥११९२॥ अड़िल ॥ बसुंधरेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ सबद दाहनी अंति; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥ हो प्रगट सभा के माझ; उचारन कीजीअहि ॥११९३॥ चौपई ॥ सुंधरेसणी आदि उचरीऐ ॥ मथणी अंति सबद को धरीऐ ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ अधिक गुनिजनन सुनत भनीजै ॥११९४॥ नराधिपणी आदि भणिजै ॥ मथणी पद को अंति धरिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ प्रगट सुकबि जन! सुनते कहीऐ ॥११९५॥ अड़िल ॥ मानुखेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ अतकनी सबदादि; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥ हो संका तिआग उचरीऐ; संक न मानीऐ ॥११९६॥ देसएसणी पद को; प्रिथम बखानीऐ ॥ अंति अरदनी सबद; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥ हो कबितु काबि के बीच; उचारन कीजीऐ ॥११९७॥ जनपदेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ अंति यंतकनी सबद; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीअहि ॥ हो चहीअहि ठवर जहा; सु तहा ते दीजीअहि ॥११९८॥ मानवेद्रणी पद को; प्रिथम बखानीऐ ॥ अंत यंतकनी पद को; बहुरि प्रमानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान तिह चित महि ॥ हो भूत भविख भवान; इसी कर मित महि ॥११९९॥ लोकएंद्रणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ ता के हरणी अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥ हो रैन दिवस सभ मुख ते; भाख्यो कीजीअहि ॥१२००॥ |
| चौपई ॥
लोकराजनी आदि भणिजै ॥ अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ सासत्र सिम्रितन मांझ कहीजै ॥१२०१॥ देसेसनी रवणनी भाखो ॥ अंति अंतकनी सबदहि राखो ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ सुकबि जनन के सुनत भनीजै ॥१२०२॥ थिरा भाखि इसणी पुनि भाखो ॥ अंति अंतकनी पद कहु राखो ॥ सकल तुपक के नाम लहिजै ॥ सासत्र सिम्रितन माझ भणिजै ॥१२०३॥ अड़िल ॥ प्रिथम कासपी इसणी; सबद बखानीऐ ॥ अंत यंतकनी सबद; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥ हो संका तिआगि निसंक; उचारन कीजीऐ ॥१२०४॥ आदि नाम नागन के; प्रिथम बखानीऐ ॥ पितणी इसणी अंति; तवन के ठानीऐ ॥ बहुरि घातनी सबद; तवन के दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥१२०५॥ सरप तातणी इसणी; आदि उचारीऐ ॥ ता के मथणी अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥ हो सभ कबितन के बिखै; निडरु हुइ दीजीऐ ॥१२०६॥ इंदएंद्रणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥ हो कबित काबि के माझ; निडर हुइ दीजीअहि ॥१२०७॥ चौपई ॥ देवदेवणी आदि उचरीऐ ॥ एसरांतकन पुनि पद धरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ संक तिआग, निरसंक हुइ कहीऐ ॥१२०८॥ अड़िल ॥ सक्रतात अरिणी; सबदादि बखानीऐ ॥ मथणी ताके अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; हीये पहिचानीऐ ॥ हो कथा बारता भीतर; निडर बखानीऐ ॥१२०९॥ सतक्रितेसणी इसणी; आदि उचारीऐ ॥ ता के अरिणी अंति; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥ हो सकल गुनिजनन! सुनत; उचारन कीजीऐ ॥१२१०॥ चौपई ॥ सचीपतिसणी इसणी भाखो ॥ मथणी सबद अंत को राखो ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ देस देस करि प्रगट भनीजै ॥१२११॥ |
| अड़िल ॥
सकंद्रन तातणी; एसणी भाखीऐ ॥ मथणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥ नाम तुपक के चित मै; चतर पछानीऐ ॥ हो बिना कपट तिन लखो; न कपट प्रमानीऐ ॥१२१२॥ कऊसकेसणी इसणी; प्रिथम बखानि कै ॥ मथणी ता के अंत; सबद को ठानि कै ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर! पहिचानीऐ ॥ हो कहे हमारे बचन; सति करि मानीऐ ॥१२१३॥ चौपई ॥ बासवेसणी आदि भणिजै ॥ अंति सबद अरिणी तिह दिजै ॥ नाम तुपक के सभ जीय जानो ॥ संक तिआग निरसंक बखानो ॥१२१४॥ अड़िल ॥ बरहा इसणी अरिणी आदि बखानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम सु चित मै जानीऐ ॥ संक तिआगि निरसंक; उचारन कीजीऐ ॥ हो सति सु बचन हमारे; माने लीजीऐ ॥१२१५॥ दोहरा ॥ मघवेसरणी इसरणी; प्रिथमै पदहि उचार ॥ नाम तुपक के होत हैं; लीजै सुकबि सु धार ॥१२१६॥ मातलेसणी एसणी; मथणी अंति उचार ॥ नाम तुपक के होत है; लीजहि सुकबि! सु धार ॥१२१७॥ चौपई ॥ जिसनएसणी आदि भणिजै ॥ इसणी मथणी अंति कहिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ दीजै तवन ठवर जह चहीऐ ॥१२१८॥ अड़िल ॥ प्रिथम पुरंदर इसणी; सबद बखानीऐ ॥ इसणी मथणी पद को; बहुरि प्रमानीऐ ॥ नाम तुपक के सकल; जान जीय लीजीअहि ॥ हो संक तिआग निरसंक; उचारन कीजीअहि ॥१२१९॥ बज्रधरिसणी अरिणी; आदि उचारीऐ ॥ नाम तुपक के चित मै; चतुर बिचारीऐ ॥ संक तयाग निरसंक हुइ; सबद बखानीऐ ॥ हो किसी सुकबि की कान; न मन मै आनीऐ ॥१२२०॥ तुराखाड़ पितणी; इसणी पद भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; हीयै पहिचानीअहि ॥ हो चतुर सभा के बीच; निसंक बखानीअहि ॥१२२१॥ इंद्रेणी इंद्राणी; आदि बखानि कै ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को ठानि कै ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥ हो कबित काबि के बीच; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२२२॥ |
| उचस्रिवाइस एस; एसणी भाखीऐ ॥
इसणी कहि कै; अरिणी पद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; अमित जीअ जानीऐ ॥ हो संक तिआग निरसंक हुइ; सदा बखानीऐ ॥१२२३॥ हयणी इसणी इसणी; इसणी भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो निडर सभा के माझ; उचारन कीजीऐ ॥१२२४॥ गाजराज राजननी; प्रभणी भाखीऐ ॥ मथणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; न नैकु हूं कीजीऐ ॥१२२५॥ अस्व एसणी इसणी; इसणि उचारीऐ ॥ ता के मथणी अंत; सबद को डारीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो संक तिआगि निरसंक; उचार्यो कीजीऐ ॥१२२६॥ बाहराज राजनणी; राजनि भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; हीये पहिचानीऐ ॥ हो कबित काबि के भीतर; प्रगट बखानीऐ ॥१२२७॥ तुरंग एसणी इसणी; प्रभणी प्रिथम कहि ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के बहुरि गहि ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो सकल गुनिजनन! सुनत; निसंक भणीजीऐ ॥१२२८॥ चौपई ॥ आइस पति पितणी पद कहीऐ ॥ इसणी अरिणी सबदहि लहीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के जनीऐ ॥ कबित काबि के भीतर भनीऐ ॥१२२९॥ अड़िल ॥ बाज राज के सभ ही; नाम बखानि कै ॥ प्रभणी पितणी इसणी; बहुरि पद ठानि कै ॥ अरिणी भाखि तुपक के; नाम पछानीऐ ॥ हो जवन सबद मै चहीऐ; तही बखानीऐ ॥१२३०॥ हसती एस प्रभ पितणी; ग्रभणी भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ नाम तुपक के सकल; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो जवन कवित मै चहो; सु पद तह दीजीऐ ॥१२३१॥ दंति राट प्रभ पित; सुतणी पद भाखि कै ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को राखि कै ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥ हो चहीऐ दीजीऐ जहा; न ब्रिथा बखानीऐ ॥१२३२॥ |
| दुरद राट राटिसणी; इसणी भाखीऐ ॥
अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कबित काबि के भीतर; उचर्यो कीजीऐ ॥१२३३॥ द्विपि इस इसणी मथणी; आदि भणीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; हिरदे महि जानीऐ ॥ हो चहो सबद तुम जहा; निडर तह ठानीऐ ॥१२३४॥ पदमी इस इसराटिन; आदि बखानीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीअहि ॥ हो कबित काबि माझ; निसंक बखानीअहि ॥१२३५॥ बारणेंद्र एंद्रणी; इंद्रणी आदि कहि ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को बहुर गहि ॥ सकल तुपक के नाम; सति कर जानीऐ ॥ हो संका त्यागि उचार; न संका मानीऐ ॥१२३६॥ ब्यालह पति पतणी पद; प्रिथम कहीजीऐ ॥ अरदन ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥ अमित तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीअहु ॥ हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही बखानीअहु ॥१२३७॥ इ्मभसेसणी इसणी; इसणी भाखीऐ ॥ हंत्री ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कबित काबि के माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२३८॥ कु्मभीएस इस इसणी; आदि बखानीऐ ॥ इसणी अरिणी अंत; तवन के ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जान कर ॥ हो जो पूछै दीजीअहु तिह; तुरत बताइ कर ॥१२३९॥ कुंजरेस इस पितणी; प्रभणी भाखीऐ ॥ हंत्री ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कबित काबि के बीच; निसंक भणीजीऐ ॥१२४०॥ करीएंद्र इंद्रणी; इंद्रणी भाखीऐ ॥ पतिणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; लेहु पछानि कै ॥ हो कबित काबि के बीच; दीजीअहु जानि कै ॥१२४१॥ तरु अरि प्रभु प्रभु प्रभणी; आदि बखानीऐ ॥ अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो जह जह चहीऐ सबद; तही ते दीजीऐ ॥१२४२॥ सउडिसइस इस इसणी; आदि बखानि कै ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को ठानि कै ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१२४३॥ |
| सिंधुरेस इस पित कहि; प्रभणी भाखीऐ ॥
अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कबित दोहरन माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२४४॥ अनकपेंद्र इंद्रणी; इंद्रणी भाखीऐ ॥ इसणी अरिणी अंति; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो सुकबि! सभा के बीच; उचारन कीजीऐ ॥१२४५॥ नागिनाहि नाहि इसणि; एसणी भाखीऐ ॥ मथणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥ हो पुसतक पोथनि माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२४६॥ हरिपति पति पति पतिणी; आदि भणीजीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥ हो कबित काबि के माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२४७॥ चौपई ॥ गजपति न्रिपणी न्रिपणि भणिजै ॥ न्रिपणी अरिणी पुनि पद दिजै ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ दोहा माझ चउपई कहीऐ ॥१२४८॥ अड़िल ॥ सावज न्रिप न्रिप न्रिपति; न्रिपणनी भाखीऐ ॥ अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥ अमित तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो कबित काबि के माझ; उचार्यो कीजीऐ ॥१२४९॥ चौपई ॥ आदि सबद मातंग भणीजै ॥ चार बार न्रिप पद को दीजै ॥ अरिणी ता के अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१२५०॥ आदि गयंदन सबद उचरीऐ ॥ चार बार न्रिप सबदहि धरीऐ ॥ अरिणी सबद बहुरि तिह दिजै ॥ नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१२५१॥ बाज सबद को प्रिथम भणीजै ॥ चार बार न्रिप सबद धरीजै ॥ सकल तुपक के नाम पछानो ॥ या मै भेद रतीकु न जानो ॥१२५२॥ बाह सबद को आदि उचरीऐ ॥ चार बार न्रिप सबदहि धरीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥ चहीऐ जिह ठां, तिह ठां कहीऐ ॥१२५३॥ तुरंग सबद को आदि उचारो ॥ चार बार न्रिप पद कहु डारो ॥ सकल तुपक के नाम लहीजै ॥ रुचै जहा, तिह ठवर भणीजै ॥१२५४॥ है पद मुख ते आदि बखानो ॥ चार बार न्रिप सबदहि ठानो ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥ कबित काबि के माझ भणिजै ॥१२५५॥ |
| थरी सबद को आदि भणिजै ॥
चार बार न्रिप सबद कहिजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानो ॥ नाम तुपक के सकल पछानो ॥१२५६॥ देव सबद कहु आदि बखानहु ॥ न्रिप पद तीन बार पुनि ठानहु ॥ सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥१२५७॥ अमर सबद कहु आदि उचारहु ॥ न्रिप पद तीन बार पुनि डारहु ॥ अरि कहि नाम तुपक के लीजै ॥ कबित काबि के भीतर दीजै ॥१२५८॥ न्रिजर सबद को आदि उचरीऐ ॥ न्रिप पद तीन बार पुनि धरीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के जानहु ॥ संक छाडि निरसंक बखानहु ॥१२५९॥ बिबुध सबद को आदि भणीजै ॥ तीन बार न्रिप सबद धरीजै ॥ रिपु कहि नाम तुपक के लहीअहि ॥ संका तिआगि सभा मै कहीअहि ॥१२६०॥ सुर पद आदि सबद को धारीऐ ॥ तीन बार न्रिप पद कहु डारीऐ ॥ अरि पद ता के अंति बखानो ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥१२६१॥ सुमन सबद को आदि बखानहु ॥ तीन बार नाइक पद ठानहु ॥ अरि पद ता के अंति भणिजै ॥ नाम तुपक के सकल लहिजै ॥१२६२॥ आदि सबद त्रिदिवेस बखानो ॥ तीन बार न्रिप पदहि प्रमानो ॥ अरि पद ता के अंति भनीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥१२६३॥ ब्रिंदारक सबदादि उचारहु ॥ तीन बार नाइक पद डारहु ॥ अरि पद अंति तवन के दीजो ॥ नाम तुपक के सभ लहि लीजो ॥१२६४॥ गति बिवान सबदादि बखाणहु ॥ तीन बार पति पदिहि प्रमाणहु ॥ अरि पद अंति तवन के कहीऐ ॥ सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥१२६५॥ अड़िल ॥ अम्रितेस सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥ तीन बार पति सबद; तवन के दीजीऐ ॥ सत्रु सबद पुनि ता के; अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥१२६६॥ मधु पद मुख ते प्रिथमै; नीके भाखीऐ ॥ तीन बार पति सबद; तवन के राखीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥ हो जह जह चहीऐ सबद; निसंक बखानीऐ ॥१२६७॥ |
| सुधा सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥
न्रिप पद ता के अंति; बार त्रै दीजीऐ ॥ रिपु पद भाखि तुफंग नाम; जीअ जानीऐ ॥ हो सुकबि! चउपई माझ निसंक बखानीऐ ॥१२६८॥ सबद पयूख सु मुख ते; प्रिथम उचारीऐ ॥ तीन बार न्रिप सबद अंति तिह डारीऐ ॥ रिपु पद भाखि तुपक; नाम लहीजीऐ ॥ हो सुकबि! दोहरा माहि निडर हुइ दीजीऐ ॥१२६९॥ असुदा सबद सु मुख ते; आदि उचारि कै ॥ तीन बार न्रिप सबद; तवन के डारि कै ॥ रिपु कहि नाम तुपक के; चतुर बिचारीऐ ॥ हो छंद सोरठा माहि; निसंक उचारीऐ ॥१२७०॥ प्रिथम प्राणदा पद को; सुकबि! बखानीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदै पछानीऐ ॥ हो सुधनि सवैया भीतर; निडर बखानीऐ ॥१२७१॥ जीवदत पद प्रिथम; उचारन कीजीऐ ॥ चार बार न्रिप सबदहि; अंति भणीजीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदे पछान लै ॥ हो कही हमारी आज; ह्रिदे पहिचान लै ॥१२७२॥ चौपई ॥ बपुदा पद को प्रिथम उचारहु ॥ चार बार नाइक पद डारहु ॥ सत्रु सबद के बहुरि भणिजै ॥ नाम तुपक सभ लहि लिजै ॥१२७३॥ बहुरि देहदा सबद बखानो ॥ चार बार पति सबद प्रमानो ॥ अरि कहि नाम तुपक के लहीऐ ॥ झूला छंद बीचि हसि कहीऐ ॥१२७४॥ प्राणदत पद प्रिथम भणीजै ॥ चार बार न्रिप सबद धरीजै ॥ अरि पद ता के अंति बखानहु ॥ सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१२७५॥ अड़िल ॥ जरा सबद कहु मुख सो; आदि बखानीऐ ॥ रिपु कहि न्रिप पद बार चार; फुन ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानि कै ॥ हो सकल तुपक के नाम; लीजीऐ जानि कै ॥१२७६॥ प्रिथम ब्रिधता सबद; उचारन कीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति भनीजीऐ ॥ बहुरि सत्रु पद तिह; उपरंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चित जानीऐ ॥१२७७॥ चौपई ॥ जरा सबद कहु आदि उचरीऐ ॥ हरि पद अंति तवन के धरीऐ ॥ अरि पद मुख ते बहुरि बखानै ॥ नाम तुपक के होइ प्रमानै ॥१२७८॥ |
| अड़िल ॥
आलस सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; सु हरि कहि ठानीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो छंद पाधड़ी माझ; निडर होइ दीजीऐ ॥१२७९॥ तरुन दंत पद मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ अरि कहि न्रिप पद बार चार; पुनि ठानीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदै बखानीअहि ॥ हो छंद रुआला बिखै; निडर हुइ ठानीअहि ॥१२८०॥ जोबनांत अंतक पद; प्रिथम उचारीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन पर डारीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥ हो छंद चउपई माहि; निसंक बखानीऐ ॥१२८१॥ तरुन दंत अरि सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥ चतुर बारि न्रिप सबद; तवन के राखीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥ हो सुधनि दोहरा माहि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२८२॥ जोबनारि अरि पद को; आदि बखानीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; तवन के भाखीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति राखीऐ ॥१२८३॥ चतुरथ अवसथा अरि पद; आदि बखानीऐ ॥ चतुर बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥ सत्रु सबद को अंति; सु बहुरि बखानि कै ॥ हो सकल तुपक के नाम; लीजीऐ जानि कै ॥१२८४॥ जमपासी के नामन; आदि उचारीऐ ॥ हरि कहि न्रिप पद बार; चार फुनि डारीऐ ॥ सुकबि! तुपक के नाम; भाख अरि लीजीऐ ॥ हो सुधनि सवैया माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२८५॥ अरबलारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ चार बार पति सबद; तवन के दीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीअहि ॥ हो छंद कुंडरीआ माहि; संक तजि दीजीअहि ॥१२८६॥ आरजारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ चार बार न्रिप पद को; बहुरि भणीजीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥ हो छंद झूलना माहि; निसंक बखानीऐ ॥१२८७॥ देहबासी अरि हरि पद; आदि भनीजीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; सु बहुरि कहीजीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर बिचारीऐ ॥ हो छंद अड़िल के माहि; निडर कहि डारीऐ ॥१२८८॥ |
| बपुबासी अरि अरि; सबदादि बखानीऐ ॥
चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥ हो छंद चंचरीआ माहि; निसंक प्रमानीऐ ॥१२८९॥ तनबासी अर हरि को; आदि बखानि कै ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानि नै ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥ हो करहु उचारन तहा जहा; जीअ जानीऐ ॥१२९०॥ असुर सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥ पित कहि न्रिप पद; अंति तवन के दीजीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के चतुर पछानीऐ ॥ हो निडर बखानो तहा; जहा जीअ जानीऐ ॥१२९१॥ राछसारि पद मुख ते; आदि बखानीअहु ॥ चार बार पति सबद; तवन के ठानीअहु ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चित मै जान लै ॥ हो जो पूछै तुहि आइ; निसंक बताइ दै ॥१२९२॥ दानवारि पद मुख ते; सुघरि प्रिथम उचरि ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन के अंति धरु ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछान लै ॥ हो सुकबि सभा के माझ; निडर हुइ राख दै ॥१२९३॥ अमरारदन अरि आदि; सुकबि! उचारि कै ॥ तीन बार न्रिप सबद; अंति तिह डारि कै ॥ अरि कहि नाम तुपक के; सकल सुधार लै ॥ हो पड़्यो चहत, तिह नर को; तुरत सिखाइ लै ॥१२९४॥ सक्र सबद कहु आदि; उचारन कीजीऐ ॥ अरि अरि कहि पति चार बार; पद दीजीऐ ॥ सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥१२९५॥ |
| सत क्रित अरि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥
चार बार न्रिप सबद तवन के दीजीऐ ॥ सत्रु सबद को; ता के अंति बखानि कै ॥ हो सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जानि कै ॥१२९६॥ सचीपतिरि अरि आदि; सबद कहु भाखीऐ ॥ चार बार न्रिप सबद; तवन के राखीऐ ॥ अरि कहि नाम तुपक के; चतुर! पछानीऐ ॥ हो छंद झूलना माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२९७॥ सक्ररदन अरि रिपु पद; आदि बखानि कै ॥ तीन बार न्रिप पद कहु; बहुरि प्रमानि कै ॥ सत्रु सबद कहि नाम; तुपक के जानीऐ ॥ हो झूला छंदन माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२९८॥ आदि सबद पुरहूतरि; उचारन कीजीऐ ॥ अरि कहि पितणीस अरि पद; बहुरि भणीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥ हो सुघर सोरठा माझि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२९९॥ बासवारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥ पितणी इसणी अरिणी; अंति भणीजीऐ ॥ सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥ हो छंद दोहरा माहि; निसंक बखानीऐ ॥१३००॥ आदि ब्रितहा अरि अरि; पदहि प्रमानि कै ॥ तीन बार इस सबद; तवन के ठानि कै ॥ रिपु पुनि ठान; तुपक के नाम पछान लै ॥ हो पड़ियो चाहत जो नर; तिह भेद बताइ दै ॥१३०१॥ मघवांतक अरि आदि; सबद को भाखीऐ ॥ तीन बार न्रिप पदहि; तवन के राखीऐ ॥ रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर लहीजीऐ ॥ हो कथा कीरतन माझि; निसंक भणीजीऐ ॥१३०२॥ मातलेस्र अरि सबदहि; आदि बखानि कै ॥ तीन बार न्रिप सबद; तवन के ठानि कै ॥ सत्रु सबद फुनि; ता के अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमत स्मभारीऐ ॥१३०३॥ जिसनांतक अंतक; सबदादि उचारीऐ ॥ तीन बार पद राज; तवन के डारीऐ ॥ अरि पुनि तवनै अंति; सबद के दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥१३०४॥ पुरंद्रारि अरि आदि; सबद कहु भाखि कै ॥ तीन बार न्रिप पदहि; अंति तिह राखि कै ॥ बहुरि सत्रु पद अंति तवन के दीजीऐ ॥ हो सुघर तुपक के नाम; सदा लखि लीजीऐ ॥१३०५॥ |
| चौपई ॥
बज्रधररि अरि पद आदि बखानहु ॥ तीन बार ईसर पद ठानहु ॥ अरि पुनि अंति बहुरि तिह दीजै ॥ सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥१३०६॥ अड़िल ॥ तुराखाड़ अरि अरि पद; आदि उचारीऐ ॥ तीन बार न्रिप पदहि; अंति तहि धारीऐ ॥ सत्रु बहुरि पुनि अंति; तवन के ठानि कै ॥ हो सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जानि कै ॥१३०७॥ रिपु पाकरि रिपु सबद; अंति तिह भाखीऐ ॥ नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥ रिपु पुनि ता के अंति; सुघर कहि दीजीऐ ॥ हो नाम तुपक बहु चीन; उचारियो कीजीऐ ॥१३०८॥ इंद्रांतक अरि आदि; सबद को भाखीऐ ॥ नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥ सत्रु बहुरि पुनि ता के; अंति धरीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; जान मन लीजीऐ ॥१३०९॥ देव सबद को मुख ते; आदि बखानीऐ ॥ अरदन कहि अरदन पद; अंति प्रमानीऐ ॥ तीन बार पति सबद; तवन के भाखीऐ ॥ हो अरि कहि नाम तुपक के; मन लहि राखीऐ ॥१३१०॥ अमरा अरदन सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥ नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥ रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर पछानीऐ ॥ हो भेदाभेद; कबित के माहि बखानीऐ ॥१३११॥ निरजरारि अरदन पद; प्रिथम उचारि कै ॥ तीन बार न्रिप सबद; तवन के डारि कै ॥ अरि कहि नाम तुपक के; सुघर लहीजीऐ ॥ हो अड़िल छंद के माहि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१३१२॥ बिबुधांतक अंतक सबदादि; उचार कर ॥ तीन बार न्रिप सबद; तवन के डार कर ॥ रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर बिचारीऐ ॥ हो छंद रुआला माझ; निसंक उचारीऐ ॥१३१३॥ सुपरबाण पर अरि पद; प्रिथम भणीजीऐ ॥ तीन बार पति सबद; तवन पर दीजीऐ ॥ अरि पद भाख तुपक के; नाम पछानीअहु ॥ हो छंद चंचरीआ माझ; निडर हुऐ ठानीअहु ॥१३१४॥ प्रिथम सबद त्रिदवेस; उचारन कीजीऐ ॥ अरि अरि कहि न्रिप पद; त्रै वार भणीजीऐ ॥ सत्रु सबद ता के पुनि; अंति उचारीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१३१५॥ |
| ब्रिंदारक अरि अरि; सबदादि उचारजै ॥
तीन बार पति सबद; तवन के डारजै ॥ सत्रु सबद ता के; पुनि अंति भनीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमति लहि लीजीऐ ॥१३१६॥ सभ बिवान के नाम; भाखि गति भाखीऐ ॥ अरि अरि कहि न्रिप चार बार; पद राखीऐ ॥ बहुर सत्रु पुनि अंति; तवन के दीजीऐ ॥ हो सकल तुपक के नाम; सुमति लहि लीजीऐ ॥१३१७॥ आदि अगनि जिव पद को; सु पुनि बखानीऐ ॥ अरि अरि कहि न्रिप चार बार; पुनि ठानीऐ ॥ रिपु पद भाखि तुपक के; नाम पछानीऐ ॥ हो कबित काबि के माझि; निसंक प्रमानीऐ ॥१३१८॥ इति स्री नाम माला पुराण स्री तुपक नाम पांचवों धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥४॥ |