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दसम ग्रन्थ/शसत्र नाम माला

विकिपुस्तक से
ਸ਼ਸਤ੍ਰ ਨਾਮ ਮਾਲਾ ॥

शसत्र नाम माला ॥ ੴ वाहिगुरू जी की फतहि ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥


ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਸਸਤ੍ਰ ਨਾਮ ਮਾਲਾ ਪੁਰਾਣ ਲਿਖ੍ਯਤੇ ॥ अथ स्री ससत्र नाम माला पुराण लिख्यते ॥ पातिसाही १० ॥

दोहरा ॥

सांग सरोही सैफ असि; तीर तुपक तरवारि ॥

सत्रांतकि कवचांति कर; करीऐ रछ हमारि ॥१॥

असि क्रिपान धाराधरी; सैफ सूल जमदाढ ॥

कवचांतकि सत्रांत कर; तेग तीर धरबाढ ॥२॥

असि क्रिपान खंडो खड़ग; तुपक तबर अरु तीर ॥

सैफ सरोही सैहथी; यहै हमारै पीर ॥३॥

तीर तुही सैथी तुही; तुही तबर तरवारि ॥

नाम तिहारो जो जपै; भए सिंधु भव पार ॥४॥

काल तुही काली तुही; तुही तेग अरु तीर ॥

तुही निसानी जीत की; आजु तुही जगबीर ॥५॥

तुही सूल सैथी तबर; तू निखंग अरु बान ॥

तुही कटारी सेल सभ; तुम ही करद क्रिपान ॥६॥

ससत्र असत्र तुम ही सिपर; तुम ही कवच निखंग ॥

कवचांतकि तुम ही बने; तुम ब्यापक सरबंग ॥७॥

स्री तुही सभ कारन तुही; तू बिद्या को सार ॥

तुम सभ को उपराजही; तुम ही लेहु उबार ॥८॥

तुम ही दिन, रजनी तुही; तुम ही जीअन उपाइ ॥

कउतक हेरन के नमित; तिन मौ बाद बढाइ ॥९॥

असि क्रिपान खंडो खड़ग; सैफ तेग तरवारि ॥

रछ करो हमरी सदा; कवचांतकि करवारि ॥१०॥

तुही कटारी दाड़ जम; तू बिछूओ अरु बान ॥

तो पति पद जे लीजीऐ; रछ दास मुहि जानु ॥११॥

बांक बज्र बिछूओ तुही; तुही तबर तरवारि ॥

तुही कटारी सैहथी; करीऐ रछ हमारि ॥१२॥

तुमी गुरज तुम ही गदा; तुम ही तीर तुफंग ॥

दास जानि मोरी सदा; रछ करो सरबंग ॥१३॥

छुरी कलम रिपु करद भनि; खंजर बुगदा नाइ ॥

अरध रिजक सभ जगत को! मुहि तुम लेहु बचाइ ॥१४॥

प्रिथम उपावहु जगत तुम; तुम ही पंथ बनाइ ॥

आप तुही झगरा करो; तुम ही करो सहाइ ॥१५॥

मछ कछ बाराह तुम; तुम बावन अवतार ॥

नारसिंघ बऊधा तुही; तुही जगत को सार ॥१६॥

तुही राम स्री क्रिसन तुम; तुही बिसनु को रूप ॥

तुही प्रजा सभ जगत की; तुही आप ही भूप ॥१७॥

तुही बिप्र छत्री तुही; तुही रंक अरु राउ ॥

साम दाम अरु डंड तूं; तुम ही भेद उपाउ ॥१८॥

सीस तुही काया तुही; तै प्रानी के प्रान ॥

तै बिद्या जुग बकत्र हुइ; करे बेद बख्यान ॥१९॥

बिसिख बान धनुखाग्र भन; सर कैबर जिह नाम ॥

तीर खतंग ततारचो; सदा करो मम काम ॥२०॥

तूणीरालै सत्र अरि; म्रिग अंतक ससिबान ॥

तुम बैरण प्रथमै हनो; बहुरो बजै क्रिपान ॥२१॥

तुम पाटस पासी परस; परम सिधि की खान ॥

ते जग के राजा भए; दीअ तव जिह बरदान ॥२२॥

सीस सत्रु अरि अरियारि असि; खंडो खड़ग क्रिपान ॥

सत्रु सुरेसर तुम कीयो; भगत आपुनो जानि ॥२३॥

जमधर जमदाड़ा जबर; जोधांतक जिह नाइ ॥

लूट कूट लीजत तिनै; जे बिनु बांधे जाइ ॥२४॥

बांक बज्र बिछुओ बिसिख; बिरह बान सभ रूप ॥

जिन को तुम किरपा करी; भए जगत के भूप ॥२५॥

ससत्रेसर समरांत करि; सिपरारि समसेर ॥

मुकत जाल जम के भए; जिनै गह्यो इक बेर ॥२६॥

सैफ सरोही सत्रु अरि; सारंगारि जिह नाम ॥

सदा हमारे चिति बसो; सदा करो मम काम ॥२७॥

इति स्री नाम माला पुराणे स्री भगउती उसतति प्रिथम धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥१॥


ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਚਕ੍ਰ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री चक्र के नाम ॥ दोहरा ॥

कवच सबद प्रिथमै कहो; अंत सबद अरि देहु ॥

सभ ही नाम क्रिपान के; जान चतुर जीअ लेहु ॥२८॥

सत्रु सबद प्रिथमै कहो; अंत दुसट पद भाखु ॥

सभै नाम जगंनाथ को; सदा ह्रिदै मो राखु ॥२९॥

प्रिथी सबद प्रिथमै भनो; पालक बहरि उचार ॥

सकल नामु स्रिसटेस के; सदा ह्रिदै मो धार ॥३०॥

सिसटि नाम पहले कहो; बहुरि उचारो नाथ ॥

सकल नामु मम ईस के; सदा बसो जीअ साथ ॥३१॥

सिंघ सबद भाखो प्रथम; बाहन बहुरि उचारि ॥

सभै नाम जग मात के; लीजहु सुकबि! सुधारि ॥३२॥

रिपु खंडन मंडन जगत; खल खंडन जग माहि ॥

ता के नाम उचारीऐ; जिहे सुनि दुख टरि जाहि ॥३३॥

सभ ससत्रन के नाम कहि; प्रिथम अंत पति भाखु ॥

सभ ही नाम क्रिपान के; जाण ह्रिदै महि राखु ॥३४॥

खत्रियांकै खेलक खड़ग; खग खंडो खत्रिआरि ॥

खेलांतक खलकेमरी; असि के नाम बिचार ॥३५॥

भूतांतकि स्री भगवती; भवहा नाम बखान ॥

सिरी भवानी भै हरन; सभ को करौ कल्यान ॥३६॥

अड़िल ॥

भूत सबद कौ भाखि; बहुरि अरि भाखीऐ ॥

सभ असि जू के नाम; जान जीअ राखीऐ ॥

नाम म्रिगन सभ कहि; धनुसर उचारीऐ ॥

हो सभ खंडे के नाम; सति जीअ धारीऐ ॥३७॥

दोहरा ॥

प्रिथम नाम जम को उचरि; बहुरो रदन उचारि ॥

सकल नाम जमदाड़ के; लीजहु सुकबि सुधारि ॥३८॥

उदर सबद प्रिथमै कहो; पुनि अरि सबद उचार ॥

नाम सभै जमदाड़ के; लीजहु सुकबि बिचार ॥३९॥

म्रिग ग्रीवा सिर अरि उचरि; पुनि असि सबद उचार ॥

सभै नाम स्री खड़ग के; लीजो ह्रिदै बिचारि ॥४०॥

करी करांतक कसट रिपु; कालायुध करवारि ॥

कराचोल क्रिपान के; लीजहु नाम सुधार ॥४१॥

हसति करी कर प्रिथम कहि; पुनि अरि सबद सुनाइ ॥

ससत्र राज के नाम सब; मोरी करहु सहाइ ॥४२॥

सिरी सरोही सेरसम; जा सम अउर न कोइ ॥

तेग जापु तुमहूं जपो; भलो तुहारो होइ ॥४३॥

खग म्रिग जछ भुजंग गन; ए पद प्रिथम उचारि ॥

फुनि अरि सबद उचारीऐ; जान तिसै तरवारि ॥४४॥

हलबि जुनबी मगरबी; मिसरी ऊना नाम ॥

सैफ सरोही ससत्रपति; जित्यो रूम अरु साम ॥४५॥

कती यामानी हिंदवी; सभ ससत्र के नाथ ॥

लए भगउती निकस है; आप कलंकी हाथि ॥४६॥

प्रिथम सकति पद उचरि कै; पुनि कहु सकति बिसेख ॥

नाम सैहथी के सकल; निकसत जाहि अनेक ॥४७॥

प्रिथम सुभट पद उचरि कै; बहुरि सबद अरि देहु ॥

नाम सैहथी के सभै; समझि चतुर चित लेहु ॥४८॥

प्रिथम भाख संनाह पदु; पुनि रिपु सबद उचारि ॥

नाम सैहथी के सकल; चतुर चित! निज धारि ॥४९॥

उचरि कु्मभ प्रिथमै सबद; पुनि अरि सबद कहो ॥

नाम सैहथी के सभै; चित महि चतुर लहो ॥५०॥

तनु त्रान पद प्रिथम कहि; पुनि अरि सबद बखान ॥

नाम सैहथी के सभै; रुचिर चतुर चित जान ॥५१॥

यसटीसर को प्रिथम कहि; पुनि बच कहु अरधंग ॥

नाम सैहथी के सभै; उचरत जाहु निसंग ॥५२॥

सांग समर कर सैहथी; ससत्र ससन कु्मभेस ॥

सबल सु भटहा हाथ लै; जीते समर सुरेस ॥५३॥

छत्रधर म्रिगहा बिजै करि; भटहा जा को नाम ॥

सकल सिध दात्री सभन; अमित सिध को धाम ॥५४॥

लछमन अउर घटोतकच; ए पद प्रिथम उचारि ॥

पुनि अरि भाखो सकति के; निकसहि नाम अपार ॥५५॥

गड़ीआ भसुडी भैरवी; भाला नेजा भाखु ॥

बरछी सैथी सकति सभ; जान ह्रिदै मै राखु ॥५६॥

बिसनु नाम प्रिथमै उचरि; पुनि पद ससत्र उचारि ॥

नाम सुदरसन के सभै; निकसत जाहि अपार ॥५७॥

मुर पद प्रिथम उचारि कै; मरदन बहुरि कहो ॥

नाम सुदरसन चक्र के; चित मै चतुर लहो ॥५८॥

मधु को नाम उचारि कै; हा पद बहुरि उचारि ॥

नाम सुदरसन चक्र के; लीजै सुकबि सुधारि ॥५९॥

नरकासुर प्रिथमै उचरि; पुनि रिपु सबद बखान ॥

नाम सुदरसन चक्र को; चतुर चित मै जान ॥६०॥

दैत बकत्र को नाम कहि; सूदन बहुरि उचार ॥

नाम सुदरसन चक्र को; जान चित निरधार ॥६१॥

प्रिथम चंदेरी नाथ को; लीजै नाम बनाइ ॥

पुनि रिपु सबद उचारीऐ; चक्र नाम हुइ जाइ ॥६२॥

नरकासुर को नाम कहि; मरदन बहुरि उचार ॥

नाम सुदरसन चक्र को; लीजहु सुकबि! सु धार ॥६३॥

किसन बिसन कहि जिसनु अनुज; आयुध बहुरि उचार ॥

नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलहि अपार ॥६४॥

बज्र अनुज प्रिथमै उचर; फिरि पद ससत्र बखान ॥

नाम सुदरसन चक्र के; चतुर! चित मै जान ॥६५॥

प्रिथम बिरह पद उचरि कै; पुनि कहु ससत्र बिसेख ॥

नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै असेख ॥६६॥

प्रिथमै वहै उचारीऐ; रिध सिध को धाम ॥

पुनि पद ससत्र बखानीऐ; जानु चक्र के नाम ॥६७॥

गिरधर प्रिथम उचारि पद; आयुध बहुरि उचारि ॥

नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै अपार ॥६८॥

काली नथीआ प्रिथम कहि; ससत्र सबद कहु अंति ॥

नाम सुदरसन चक्र के; निकसत जाहि अनंत ॥६९॥

कंस केसिहा प्रथम कहि; फिरि कहि ससत्र बिचारि ॥

नाम सुदरसन चक्र के; लीजहु सुकबि सु धार ॥७०॥

बकी बकासुर सबद कहि; फुनि बच सत्रु उचार ॥

नाम सुदरसन चक्र के; निकसत चलै अपार ॥७१॥

अघ नासन अघहा उचरि; पुनि बच ससत्र बखान ॥

नाम सुदरसन चक्र के; सभै चतुर चिति जान ॥७२॥

स्री उपेंद्र के नाम कहि; फुनि पद ससत्र बखान ॥

नाम सुदरसन चक्र के; सबै समझ सुर गिआन ॥७३॥

कबियो बाच दोहरा ॥

सबै सुभट अउ सभ सुकबि! यौ समझो मन माहि ॥

बिसनु चक्र के नाम मै; भेद कउनहूं नाहि ॥७४॥

इति स्री नाम माला पुराणे चक्र नाम दुतीय धिआइ समापतम सतु सुभम सतु ॥२॥


ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਬਾਣ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री बाण के नाम ॥ दोहरा ॥

बिसिख बाण सर धनुज भन; कवचांतक के नाम ॥

सदा हमारी जै करो; सकल करो मम काम ॥७५॥

धनुख सबद प्रिथमै उचरि; अग्रज बहुरि उचार ॥

नाम सिलीमुख के सभै; लीजहु चतुर सुधार ॥७६॥

पनच सबद प्रिथमै उचरि; अग्रज बहुरि उचार ॥

नाम सिलीमुख के सभै; निकसत चलै अपार ॥७७॥

नाम उचारि निखंग के; बासी बहुरि बखान ॥

नाम सिलीमुख के सभै; लीजहु ह्रिदै पछान ॥७८॥

सभ म्रिगयन के नाम कहि; हा पद बहुरि उचार ॥

नाम सभै स्री बान के; जाणु ह्रिदै निरधार ॥७९॥

सकल कवच के नाम कहि; भेदक बहुरि बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; निकसत चलै प्रमान ॥८०॥

नाम चरम के प्रिथम कहि; छेदक बहुरि बखान ॥

नाम सबै ही बान के; चतुर चित मै जानु ॥८१॥

सुभट नाम उचारि कै; हा पद बहुरि सुनाइ ॥

नाम सिलीमुख के सबै; लीजहु चतुर बनाइ ॥८२॥

सभ पछन के नाम कहि; पर पद बहुरि बखान ॥

नाम सिलीमुख के सबै; चित मै चतुरि पछान ॥८३॥

पंछी परी सपंख धर; पछि अंतक पुनि भाखु ॥

नाम सिलीमुख के सभै; जान ह्रिदै मै राखु ॥८४॥

सभ अकास के नाम कहि; चर पद बहुरि बखान ॥

नाम सिलीमुख के सभै; लीजै चतुर पछान ॥८५॥

खं अकास नभि गगन कहि; चर पद बहुरि उचारु ॥

नाम सकल स्री बान के; लीजहु चतुर! सु धार ॥८६॥

असमान सिपिहर सु दिव; गरदूं बहुरि बखानु ॥

पुनि चर सबद बखानीऐ; नाम बान के जान ॥८७॥

प्रिथम नाम कहि चंद्र के; धर पद बहुरो देहु ॥

पुनि चर सबद उचारीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥८८॥

गो मरीच किरनं छटा; धर, धर कहि मन माहि ॥

चर पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान हुइ जाहि ॥८९॥

रजनीसर दिनहा उचरि; धर धर पद कहि अंति ॥

नाम सकल स्री बान के; निकरत जाहि अनंत ॥९०॥

रात्रि निसा दिन घातनी; चर धर सबद बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; करीअहु चतुर! बखिआन ॥९१॥

ससि उपराजनि रवि हरनि; चर को लै कै नाम ॥

धर कहि, नाम ए बान के; जपो आठहूं जाम ॥९२॥

रैन अंधपति महा निसि; निसि ईसर निसि राज ॥

चंद्र बान चंद्रहि धर्यो; चित्रन के बध काज ॥९३॥

सभ किरनन के नाम कहि; धर पद बहुरि उचार ॥

पुनि धर कहु सभ बान के; जानु नाम निरधार ॥९४॥

सभ समुंदर के नाम लै; अंति सबद सुत देहु ॥

पुनि धर सबद उचारीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९५॥

जलपति जलालै नदी पति; कहि सुत पद को देहु ॥

पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९६॥

नीरालै सरताधिपति कहि; सुत पद को देहु ॥

पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥९७॥

सभै झखन के नाम लै; बिरीआ कहि ले एक ॥

सुत धर कहु सभ नाम सर; निकसत जाहि अनेक ॥९८॥

सभ जल जीवनि नाम लै; आस्रै बहुरि बखान ॥

सुत धर बहुरि बखानीऐ; नाम बान सभ जान ॥९९॥

धरी नगन के नाम कहि; धर सुत पुनि पद देहु ॥

पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१००॥

बासव कहि अरि उचरीऐ; धर सुत धर पुनि भाखु ॥

नाम सकल स्री बान के; जान जीअ मै राखु ॥१०१॥

पुहप धनुख के नाम कहि; आयुध बहुरि उचार ॥

नाम सकल स्री बान के; निकसत चलै अपार ॥१०२॥

सकल मीन के नाम कहि; केतुवायुध कहि अंत ॥

नाम सकल स्री बान के; निकसत जाहि अनंत ॥१०३॥

पुहप आदि कहि धनुख कहि; धर आयुधहि बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; निकसत जात अप्रमान ॥१०४॥

आदि भ्रमर कहि पनच कहि; धर धर सबद बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; जानहु गुनन निधान ॥१०५॥

सभ भलकन के नाम कहि; आदि अंति धर देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; चीन चतुर! चित लेहु ॥१०६॥

सोरठा ॥

जिह धर प्रिथम बखान; तिह सुत बहुरि बखानीऐ ॥

सर के नाम अपार; चतुर! चित मै जानीऐ ॥१०७॥

दोहरा ॥

बिस के नाम उचरि कै; बिख पद बहुरि बखान ॥

नाम सकल ही बाण के; लीजो चतुर पछान ॥१०८॥

बा पद प्रिथम बखानि कै; पुनि नकार पद देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; जान चतुर! चिति लेहु ॥१०९॥

कानी नाम बखानि कै; धर पद बहुरि बखान ॥

हिरदै समझो चतुर! तुम; सकल नाम ए बान ॥११०॥

फोक सबद प्रिथमै उचरि; धर पद बहुरौ देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; चतुर! ह्रिदै लखि लेहु ॥१११॥

पसुपति प्रथम बखानि कै; अस्र सबद पुनि देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; चिति चतुर! लखि लेहु ॥११२॥

सहस नाम सिव के उचरि; अस्र सबद पुनि देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; चतुर! चीन चिति लेहु ॥११३॥

प्रिथम करन के नाम कहि; पुनि अरि सबद बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; लीजो! चतुर पछान ॥११४॥

भानजांत करनांत करि; ऐसी भांति बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; चतुर! लीजीअह जान ॥११५॥

सभ अरजुन के नाम कहि; आयुध सबद बखान ॥

नाम सकल स्री बान के; लीजहु चतुर! पछान ॥११६॥

जिसन धनंजै क्रिसन भनि; स्वेतवाह लै नाइ ॥

आयुध बहुरि बखानीअहु; सबै बान हुइ जाइ ॥११७॥

अरजुन पारथ केसगुड़; साची सबय बखान ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान के जान ॥११८॥

बिजै कपीधुज जैद्रथरि; सूरज जारि फुनि भाखु ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान लखि राखु ॥११९॥

तिमररि बल ब्रत निसच हा; कहि सुत बहुरि उचार ॥

आयुध उचरि स्री बान के; निकसहि नाम अपार ॥१२०॥

सहस्र बिसन के नाम लै; अनुज सबद कौ देहु ॥

तनुज उचरि पुनि ससत्र कहि; नामु बानु लखि लेहु ॥१२१॥

नरकि निवारन अघ हरन; क्रिपा सिंध कौ भाखु ॥

अनुज तनुज कहि ससत्र कहु; नाम बान लखि राखु ॥१२२॥

बिघन हरन बिआधनि दरन; प्रिथमय सबद बखान ॥

अनुज तनुज कहि ससत्र कहु; नाम बान जीअ जान ॥१२३॥

मकर केतु कहि मकर धुज; पुनि आयुध पदु देहु ॥

सभै नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥१२४॥

पुहप धनुख अलि पनच के; प्रिथमै नाम बखान ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; जानु नाम सभ बान ॥१२५॥

स्मबरारि त्रिपुरारि अरि; प्रिथमै सबद बखान ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम बान के मान ॥१२६॥

स्री सारंगग्रा बीरहा; बलहा बान बखान ॥

बिसिख बिसी बासी धरन; बान नाम जीअ जान ॥१२७॥

बिख के प्रिथमे नाम कहि; धर पद बहुरौ देहु ॥

नाम सकल स्री बान के; चतुर! चिति लखि लेहु ॥१२८॥

सकल सिंधु के नाम लै; तनै सबद कौ देहु ॥

धर पद बहुर बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१२९॥

उदधि सिंधु सरितेस जा; कहि धर बहुरि बखान ॥

बंसीधर के नाम सभ; लीजहु चतुर पछान ॥१३०॥

बध नासनी बीरहा; बिख बिसखाग्रज बखान ॥

धर पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान के मान ॥१३१॥

सभ मनुखन के नाम कहि; हा पद बहुरो देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चतुर चिति लखि लेहु ॥१३२॥

कालकूट कहि कसटकरि; सिवकंठी अहि उचारि ॥

धर पद बहुरि बखानीऐ; जानु बान निरधार ॥१३३॥

सिव के नाम उचारि कै; कंठी पद पुनि देहु ॥

पुनि धर सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१३४॥

बिआधि बिखी मुखि प्रिथम कहि; धर पद बहुरि बखान ॥

नाम सभै ए बान के; लीजो चतुर पछान ॥१३५॥

खपरा नालिक धनुख सुत; लै सु कमानज नाउ ॥

सकर कान नरांच भनि; धर सभ सर के गांउ ॥१३६॥

बारिद जिउ बरसत रहै; जसु अंकुर जिह होइ ॥

बारिद सो बारिद नही; ताहि बतावहु कोइ ॥१३७॥

बिखधर बिसी बिसोककर; बारणारि जिह नाम ॥

नाम सबै स्री बान के; लीने होवहि काम ॥१३८॥

अरि बेधन छेदन लह्यो; बेदन कर जिह नाउ ॥

रछ करन अपनान की; परो दुसट के गाउ ॥१३९॥

जदुपतारि बिसनाधिप अरि; क्रिसनांतक जिह नाम ॥

सदा हमारी जै करो; सकल करो मम काम ॥१४०॥

हलधर सबद बखानि कै; अनुज उचरि अरि भाखु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीनि चतुर! चित राखु ॥१४१॥

रउहणाय मुसली हली; रेवतीस बलराम ॥

अनुज उचरि पुनि अरि उचरि; जानु बान के नाम ॥१४२॥

तालकेतु लागलि उचरि; क्रिसनाग्रज पद देहु ॥

अनुज उचरि अरि उचरीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१४३॥

नीलांबर रुकमिआंत कर; पऊराणिक अरि भाखु ॥

अनुज उचरि अरि उचरीऐ; नाम बान लखि राखु ॥१४४॥

सभ अरजुन के नाम लै; सूत सबद पुनि देहु ॥

पुनि अरि सबद बखानीऐ; नाम बान लखि लेहु ॥१४५॥

प्रिथम पवन के नाम लै; सुत पद बहुरि बखान ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान पहिचानु ॥१४६॥

मारुत पवन घनांतकर; कहि सुत सबद उचारि ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; सर के नाम बिचारु ॥१४७॥

सरब बिआपक सरबदा; सल्यजन सु बखान ॥

तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान के जान ॥१४८॥

प्रिथम बार के नाम लै; पुनि अरि सबद बखान ॥

तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१४९॥

प्रिथम अगनि के नाम लै; अंति सबद अरि देहु ॥

तनुज अनुज सूतरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५०॥

प्रिथम अगनि के नाम लै; अंति सबदि अरि भाखु ॥

तनुज अनुज कहि अरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५१॥

प्रिथम अगनि के नाम लै; अरि अरि पद पुनि देहु ॥

तनुज अनुज कहि अरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५२॥

पावकारि अगनांत कर; कहि अरि सबद बखान ॥

अरि कहि अनुज तनुज उचरि; सूतरि, बान पछान ॥१५३॥

हिम बारि बकहा गदी; भीम सबद पुनि देहु ॥

तनुज अनुज सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५४॥

दुरजोधन के नाम लै; अंतु सबद अरि देहु ॥

अनुज उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५५॥

अंध सुतन के नाम लै; अंति सबद अरि भाखु ॥

अनुज उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५६॥

दुसासन दुरमुख द्रुजै; कहि अरि सबद बखान ॥

अनुजा उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१५७॥

दसला करभिख आदि कहि; अंति सबद अरि भाखु ॥

अनुज तनुज सत्रु उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१५८॥

प्रिथम भीखम के नाम लै; अंति सबद अरि देहु ॥

सुत आदि अंतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१५९॥

तटति जानवी अग्रजा; प्रिथमै सबद बखान ॥

तनुज सत्रु सुतअरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६०॥

गंगा गिरिजा प्रिथम कहि; पुत्र सबद पुनि देहु ॥

सत्रु उचरि सुतअरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१६१॥

नाकाले सरितेसरी; प्रिथमै सबद उचारि ॥

सुतअरि कहि सूतरि उचरि; सभ सर नाम उचारि ॥१६२॥

भीखम सांतनु सुत उचरि; पुनि अरि सबद बखान ॥

सूत उचरि अंत अरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६३॥

गांगेय नदीअज उचरि; सरितज सत्रु बखान ॥

सूत उचरि अंत अरि उचरि; नाम बान पहिचान ॥१६४॥

तालकेतु सवितास भनि; आदि अंत अरि देहु ॥

सूत उचरि रिपु पुनि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१६५॥

प्रिथम द्रोण कहि सिख्य कहि; सूतरि बहुरि बखान ॥

नाम बान के सकल ही; लीजो चतुर! पछान ॥१६६॥

भारद्वाज द्रोणज पिता; उचरि सिख्य पद देहु ॥

सूतरि बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१६७॥

सोरठा ॥

प्रिथम जुधिसटर भाखि; बंधु सबद पुनि भाखयै ॥

जान ह्रिदै मै राखु; सकल नाम ए बान के ॥१६८॥

दोहरा ॥

दुउभया पंचालि पति; कहि पुनि भ्रात उचारि ॥

सुत अरि कहि सभ बान के; लीजो नाम सु धारि ॥१६९॥

धरमराज धरमज उचरि; बंधु सबद पुनि देहु ॥

सूतरि बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१७०॥

कालज धरमज सलरिपु; कहि पद बंधु बखान ॥

सूतरि बहुरि बखानीयै; सभ सर नाम पछान ॥१७१॥

बईवसत पद प्रिथम कहि; पुनि सुत सबद बखानि ॥

बंधु उचरि सूतरि उचरि; सभ सर नाम पछान ॥१७२॥

प्रिथम सूरज के नाम लै; बहुरि पुत्र पद भाखि ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१७३॥

कालिंद्री को प्रिथम कहि; पुनि पद अनुज बखान ॥

तनुज उचरि अनुज अग्र कहि; सर के नाम पछान ॥१७४॥

जमुना कालिंद्री अनुज; कहि सुत बहुरि बखान ॥

अनुज उचरि, सूतरि उचरि; सर के नाम पछान ॥१७५॥

पंडु पुत्र कुर राज भनि; बहुरि अनुज पदु देहु ॥

सुत उचारि अंति अरि उचरि; नाम बान लख लेहु ॥१७६॥

जऊधिसटर भीमाग्र भनि; अरजुनाग्र पुनि भाखु ॥

सुत आदि अंति अरि उचरि; नाम बानु लखि राखु ॥१७७॥

नुकल बंधु सहिदेव अनुज; कहि पद बंधु उचारि ॥

सुत आदि अंत अरि उचरि; सर के नाम बिचार ॥१७८॥

जागसेनि को प्रिथम कहि; पति पद बहुरि उचारि ॥

अनुज आदि सूतांत करि; सभ सरु नाम अपार ॥१७९॥

प्रिथम द्रोपदी द्रुपदजा; उचरि सु पति पद देहु ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि लेहु ॥१८०॥

ध्रिसटु द्रुमनुजा प्रिथम कहि; पुनि पति सबद बखान ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान के जान ॥१८१॥

द्रुपत द्रोण रिपु प्रिथम कहि; जा कहि पति पुनि भाखि ॥

अनुज उचरि सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१८२॥

प्रिथम नाम लै द्रुपत को; जामाता पुनि भाखि ॥

अनुज उचर सूतरि उचरि; नाम बान लखि राखु ॥१८३॥

प्रिथम द्रोण को नाम लै; अरि पद बहुरि उचारि ॥

भगनी कहि पति भ्रात कहि; सूतरि बान बिचार ॥१८४॥

असुर राज सुतांत करि; बिसिख बारहा बान ॥

तूनीरप दुसटांत करि; नाम तीर के जान ॥१८५॥

माद्री सबद प्रिथमे कहो; सुत पद बहुरि बखान ॥

अग्र अनुज सूतरि उचरि; सर के नाम पछान ॥१८६॥

सुग्रीव को प्रिथम कहि; अरि पद बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर पछान ॥१८७॥

दस ग्रीव दस कंठ भनि; अरि पद बहुरि उचार ॥

सकल नाम एह बान के; लीजहु चतुर सुधार ॥१८८॥

प्रिथम जटायु बखान कै; अरि पद बहुरि बखान ॥

रिपु पद बहुरि उचारीयै; सर के नाम पछान ॥१८९॥

रावन रसासुर प्रिथम भनि; अंति सबद अरि देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥१९०॥

प्रिथम मेघ के नाम लै; अंत सबद धुनि देहो ॥

पिता उचरि अरि सबद कहु; नाम बान लखि लेहु ॥१९१॥

मेघनाद भन जलदधुनि; पुनि घननिसन उचारि ॥

पित कहि अरि कहि बाण के; लीजहु नाम सु धार ॥१९२॥

अ्मबुद धुनि भनि नाद घन; पुनि पित सबद उचारि ॥

अरि पदि बहुरि बखानीयै; सर के नाम विचार ॥१९३॥

धाराधर पद प्रिथम कहि; धुनि पद बहुरि बखानि ॥

पित कहि अरि सबदो उचरि; नाम बान के जान ॥१९४॥

प्रिथम सबद के नाम लै; परध्वनि पुनि पद देहु ॥

धुनि उचारि अरि उचरीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१९५॥

जलद सबद प्रिथमै उचरि; नाद सबद पुनि देहु ॥

पिता उचरि अरि उचरीयै; नाम बान लखि लेहु ॥१९६॥

प्रिथम नीर के नाम लै; धर धुनि बहुरि बखान ॥

तात आदि अंत अरि उचरि; नाम बान के जान ॥१९७॥

धारा प्रिथम उचारि कै; धर पद बहुरो देह ॥

पित कहि अरि पद उचरौ; नाम बान लखि लेहु ॥१९८॥

नीर बारि जल धर उचरि; धुनि पद बहुरि बखानि ॥

तात उचरि अरि उचरीयै; नाम बान पहिचान ॥१९९॥

पानी प्रिथम उचारि कै; धर पद बहुरि बखान ॥

धुनि पित अरि कहि बान के; लीजहु नाम पछान ॥२००॥

घन सुत प्रिथम बखानि कै; धर धुनि बहुरि बखान ॥

तात उचरि अरि उचरीयै; सर के नाम पछान ॥२०१॥

आबद धुनि कहि पित उचरि; अरि ते गुनन निधान ॥

सकल नाम ए बान के; लीजहु ह्रिदै पछान ॥२०२॥

धार बारि कहि उचरि कै; धर धुनि बहुरि बखान ॥

तात उचरि अरि उचरीयै; नाम बान के जान ॥२०३॥

नीरद प्रिथम उचार के; धुनि पद बहुरि बखान ॥

पित कहि अरि कहि बान के; लीजहु नाम पछान ॥२०४॥

घनज सबद को उचरि कै; धुनि पद बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; लीजो चतुर! पछान ॥२०५॥

मतस सबद प्रिथमै उचरि; अछ सबद पुनि देहु ॥

अरि पद बहुरि बखानीयै; नाम बान लखि लेहु ॥२०६॥

प्रिथम मीन को नाम लै; चखु रिपु बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर! पछान ॥२०७॥

मकर सबद प्रिथमै उचरि; चखु रिपु बहुर बखान ॥

सबै नाम स्री बान के; लीजो चतुर! पछान ॥२०८॥

झख पद प्रिथम बखानि कै; चखु रिपु बहुरि बखान ॥

सभे नाम स्री बान के; लीजै चतुर! पछान ॥२०९॥

सफरी नेत्र बखानि कै; अरि पद बहुरि उचार ॥

सकल नाम स्री बान के; लीजो सु कवि! सु धार ॥२१०॥

मछरी चछु बखानि कै; अरि पद बहुर उचार ॥

नाम सकल स्री बान के; लीजो चतुर सुधार ॥२११॥

जलचर प्रिथम बखानि कै; चखु पद बहुरि बखान ॥

अरि कहि सभ ही बान के; लीजो नाम पछान ॥२१२॥

बकत्रागज पद उचरि कै; मीन सबद अरि देहु ॥

नाम सिलीमुख के सभै; चीन चतुर चिति लेहु ॥२१३॥

प्रिथम नाम लै मीन के; केतु सबद पुनि देहु ॥

चखु कहि अरि कहि बान के; नाम चीन चिति लेहु ॥२१४॥

स्मबरारि पद प्रिथम कहि; चखु धुज पद पुनि देहु ॥

अरि कहि सभ ही बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२१५॥

प्रिथम पिनाकी पद उचरि; अरि धुज नेत्र उचारि ॥

अरि कहि सभ ही बान के; लीजहु नाम सु धार ॥२१६॥

महारुद्र अरिधुज उचरि; पुनि पद नेत्र बखान ॥

अरि कहि सभ स्री बान के; नाम ह्रिदै पहिचान ॥२१७॥

त्रिपुरांतक अरि केतु कहि; चखु अरि बहुरि उचार ॥

नाम सकल ए बान के; लीजहु सुकबि सु धार ॥२१८॥

कारतकेअ पितु प्रिथम कहि; अरि धुज नेत्र बखानि ॥

अरि पद बहुरि बखानीऐ; नाम बान पहिचान ॥२१९॥

बिरल बैरि करि बारहा; बहुलांतक बलवान ॥

बरणांतक बलहा बिसिख; बीर पतन बर बान ॥२२०॥

प्रिथम सललि कौ नाम लै; धर अरि बहुरि बखानि ॥

केतु चछु अरि उचरीयै; नाम बान के जान ॥२२१॥

कारतकेअ पद प्रिथम कहि; पितु अरि केतु उचारि ॥

चखु अरि कहि सभ बान के; लीजहु नाम सु धार ॥२२२॥

प्रिथम पिनाकी पानि कहि; रिपु धुज चखु अरि देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२२३॥

पसु पति सुरिधर अरि उचरि; धुज चखु सत्रु बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२२४॥

पारबतीस अरि केतु चखु; कहि रिपु पुनि पद देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२२५॥

ससत्र सांग सामुहि चलत; सत्रु मान को खाप ॥

सकल स्रिसट जीती तिसै; जपीअतु ता को जापु ॥२२६॥

सकल स्मभु के नाम लै; अरि धुज नेत्र बखानि ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलत अप्रमान ॥२२७॥

प्रिथम नाम लै सत्रु को; अरदन बहुरि उचार ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अपार ॥२२८॥

सकल म्रिग सबद आदि कहि; अरदन पद कहि अंति ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अनंत ॥२२९॥

कु्मभकरन पद आदि कहि; अरदन बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२३०॥

रिपु समुद्र पित प्रिथम कहि; कान अरि भाखो अंति ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलहि अनंत ॥२३१॥

प्रिथम नाम दसग्रीव के; लै बंधु अरि पद देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२३२॥

खोल खड़ग खत्रिअंत करि; कै हरि पदु कहु अंति ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलै अनंत ॥२३३॥

कवच क्रिपान कटारीअहि; भाखि अंति अरि भाखु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चित महि राखु ॥२३४॥

प्रिथम ससत्र सभ उचरि कै; अंति सबद अरि देहु ॥

सरब नाम स्री बान के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२३५॥

सूल सैहथी सत्रु हा; सिप्रादर कहि अंति ॥

सकल नाम स्री बान के; निकसत चलहि अनंत ॥२३६॥

समर संदेसो सत्रुहा; सत्रांतक जिह नाम ॥

सभै बरन रछा करन; संतन के सुख धाम ॥२३७॥

बर पद प्रिथम बखानि कै; अरि पद बहुरि बखान ॥

नाम सत्रुहा के सभै; चतुर चित महि जान ॥२३८॥

दखण आदि उचारि कै; सखण अंति उचार ॥

दखण कौ भखण दीओ; सर सौ राम कुमार ॥२३९॥

रिसरा प्रिथम बखानि कै; मंडरि बहुरि बखान ॥

रिसरा को बिसिरा कीयो; स्री रघुपति के बान ॥२४०॥

बली ईस दस सीस के; जाहि कहावत बंधु ॥

एक बान रघुनाथ के; कीयो कबंध कबंध ॥२४१॥

प्रिथम भाखि सुग्रीव पद; बंधुरि बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; जानीअहु बुधि निधान! ॥२४२॥

अंगद पितु कहि प्रिथम पद; अंत सबद अरि देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर! चिति लेहु ॥२४३॥

हनूमान के नाम लै; ईस अनुज अरि भाखु ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चित महि राखु ॥२४४॥

ससत्र सबद प्रिथमै उचरि; अंति सबद अरि देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; जान अनेकनि लेहु ॥२४५॥

असत्र सबद प्रिथमै उचरि; अंति अरि सबद बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; लीजहु चतुर पछान ॥२४६॥

प्रिथम चरम के नाम लै; सभ अरि पद कहि अंत ॥

सकल नाम सत्रांत के; निकसत चलहि बिअंत ॥२४७॥

तनु त्रान के नाम सभ; उचरि अंति अरि देहु ॥

सकल नाम स्री बान के; ता सिउ कीजै नेहु ॥२४८॥

सकल धनुख के नाम कहि; अरदन बहुरि उचार ॥

सकल नाम स्री बान के; चीन चतुर निरधार ॥२४९॥

प्रिथम नाम लै पनच के; अंतक बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; करीअहु चतुर बखिआन ॥२५०॥

सर पद प्रिथम बखानि कै; अरि पद बहुर बखान ॥

सकल नाम स्री बान के; चतुर चित मै जान ॥२५१॥

म्रिग पद प्रिथम बखानि कै; हा पद बहुरि बखान ॥

म्रिगहा पद यह होत है; लीजहु चतुर पछान ॥२५२॥

इति स्री नाम माला पुराणे स्री बान नाम त्रितीय धिआइ समापतम सतु सुभम सुत ॥३॥


ਅਥ ਸ੍ਰੀ ਪਾਸਿ ਕੇ ਨਾਮ ॥ अथ स्री पासि के नाम ॥ दोहरा ॥

बीर ग्रसितही ग्रीव धर; बरुणायुध कहि अंत ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२५३॥

ग्रीव ग्रसितनि भव धरा; जलध राज हथीआर ॥

परौ दुसट के कंठ मै; मोकहु लेहु उबार ॥२५४॥

प्रिथम नदन के नाम लै; एस एस पद भाखि ॥

ससत्र उचरि सभ पासि के; नाम चीनि चिति राखु ॥२५५॥

गंगा एस बखानि कै; ईस ससत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२५६॥

जटज जानवी क्रितहा; गंगा ईस बखानु ॥

आयुध अंति बखानीऐ; नाम पासि के जान ॥२५७॥

सकल अघन के नाम लै; हा आयुध सु बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जान ॥२५८॥

किलबिख पाप बखानि कै; रिपु पति ससत्र बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२५९॥

अधरम पाप बखानि कै; नासनीस असत्र भाखि ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति राखि ॥२६०॥

सकल जटनि को नाम लै; जा पति असत्र बखानि ॥

अमित नाम स्री पास के; चतुर चित महि जानु ॥२६१॥

तउसारा सत्रु बखानि कै; भेदक ग्रंथ बखान ॥

ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६२॥

गिरि पद प्रिथम बखानि कै; नासनि नाथ बखानि ॥

ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६३॥

फोकी नोकी पखधर; पत्री परी बखान ॥

पछी पछि अंतक कहो; सकल पासि के नाम ॥२६४॥

कसट सबद प्रिथमै उचरि; अघन सबद कहु अंति ॥

पति ससत्र भाखहु पासि के; निकसहि नाम अनंत ॥२६५॥

पब्या प्रिथम बखानि कै; भेदन ईस बखान ॥

ससत्र सबद पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२६६॥

जलनाइक बारसत्रु भनि ससत्र सबद पुनि देहु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२६७॥

सभ गंगा के नाम लै; पति कहि ससत्र बखान ॥

सभै नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२६८॥

जमुना प्रिथम बखानि कै; एस असत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥२६९॥

कालिंद्री पद प्रिथम भनि; इंद्र सबद कहि अंति ॥

असत्र बहुरि कहु पासि के; निकसहि नाम अनंत ॥२७०॥

कालिनुजा पद प्रिथमह कहि; इसरासत्र पुनि भाखु ॥

सकल नाम स्री पास के; चीनि चतुर चिति राखु ॥२७१॥

क्रिसन बलभा प्रिथम कहि; इसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥२७२॥

सूरज पुत्रि को प्रिथम कहि; पति कहि ससत्र बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; लीजीअहु चतुर पछान ॥२७३॥

भानु आतजमा आदि कहि; अंत आयुध पद देहु ॥

सकल नाम ए पासि के; चीन चतुर चित लेहु ॥२७४॥

सूर आतजमा आदि कहि; अंति ससत्र पद दीन ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चित परबीन ॥२७५॥

काल पिता प्रथमै उचरि; अंति तनुज पदि देहु ॥

पति कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥२७६॥

दिवकर तनुजा प्रिथम कहि; पति कहि ससत्र बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; लीजहु चतुर पछान ॥२७७॥

पासि ग्रीवहा कंठ रिपु; बरुणायुध जिह नाम ॥

परो दुसट के कंठ मै; करो हमारो काम ॥२७८॥

आदि कंठ के नाम लै; ग्राहक पद कहि अंति ॥

बरुणायुध के नाम सभु; निकसत चलत बिअंत ॥२७९॥

नारि कंठ गर ग्रीव भनि; ग्रहिता बहुरि बखान ॥

सकल नाम ए पासि के; निकसत चलत अप्रमान ॥२८०॥

जमुना प्रिथम बखानि कै; एसरायुधहिं बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर सुजान ॥२८१॥

का बरणादि बखानि कै; मंद बहुर पद देहु ॥

होत है नाम कमंद के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२८२॥

किसन आदि पद उचरि कै; बलभांति पद देहु ॥

पति असत्रांति उचारीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥२८३॥

बीर ग्रसतनी सुभटहा; कालायुध जिह नाम ॥

परो दुसट के कंठ मै; करो हमारो काम ॥२८४॥

काल अकाल कराल भनि; आयुध बहुरि बखानु ॥

सकल नाम ए पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२८५॥

आदि उचरीऐ सूरज पद; पूत उचरीऐ अंति ॥

ससत्र भाखीऐ पासि के; निकसहि नाम बिअंत ॥२८६॥

सकल सूरज के नाम लै; सुत पद असत्र बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८७॥

भानु दिवाकर दिनध भनि; सुत कहि असत्र बखानु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८८॥

दिनमणि दिवकरि रैणहा; सुत कहि असत्र बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित मै जानु ॥२८९॥

दिन को नाम बखानि कै; मणि पद बहुरि बखान ॥

सुत कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥२९०॥

दिवकरि दिनपति निसरि भनि; दिन नाइक पुनि भाखु ॥

सुत कहि असत्र बखानीऐ; नाम पासि लखि राखु ॥२९१॥

सकल सूरज के नाम लै; सुत कहि असत्र बखानु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९२॥

जम पद प्रिथम बखानि कै; ससत्र सबद पुनि देहु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥२९३॥

बईवसतु पद आदि कहि; आयुध अंति बखानु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९४॥

काल सबद को आदि कहि; असत्र सबद कहि अंत ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै अनंत ॥२९५॥

पितर राज पद प्रिथम कहि; असत्र सबद पुनि देहु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चीन चिति लेहु ॥२९६॥

दंडी प्रिथम बखानि कै; असत्र सबद कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर बिअंत ॥२९७॥

जमुना भ्रात बखान कै; आयुध बहुरि बखानु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥२९८॥

सभ जमुना के नाम लै; भ्रात असत्र पुनि देहु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चिति लखि लेहु ॥२९९॥

पितर सबद प्रिथमै उचरि; एसर बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३००॥

सभ पितरन के नाम लै; नाइक बहुरि बखान ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०१॥

सकल जगत के नाम लै; घाइक असत्र बखानु ॥

सकल नाम स्री पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०२॥

रिपु खंडनि दल दाहनी; सत्रु तापनी सोइ ॥

सकल पासि के नाम सभ; जा ते बच्यो न कोइ ॥३०३॥

रिपु पद प्रिथम बखानि कै; ग्रसितनि बहुरि बखानु ॥

सकल नाम जम पासि के; चतुर चित महि जानु ॥३०४॥

खल पद आदि उचारि कै; खंडनि अंति बखान ॥

सकल नाम जम पासि के; चीनीअहु चतुर सुजान ॥३०५॥

दल दाहनि रिपु ग्रसितनी; सत्रु तापनी सोइ ॥

काल पासि के नाम सभ; जा ते रहित न कोइ ॥३०६॥

जा पद प्रिथम उचारि कै; मी पद अंति बखानु ॥

जामी पद ए होत है; नाम पासि के जानु ॥३०७॥

दिसा बारुणी प्रिथम कहि; एसरासत्र कहि अंति ॥

नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३०८॥

पछम आदि बखानि कै; एसर पुनि पद देहु ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३०९॥

प्रिथम ठगन के नाम लै; आयुध बहुरि बखान ॥

सकल नाम ए पासि के; चतुर चित पहिचान ॥३१०॥

बाटि आदि पद उचरि कै; हा पद असत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥३११॥

मग पद आदि बखानि कै; छिद पद अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजो चतुर पछान ॥३१२॥

मारग आदि बखानि कै; मार बखानहु अंति ॥

नाम पासि को होत है; निकसत चलै बिअंत ॥३१३॥

पंथ आदि पद उचरि कै; करखण पुनि पद देहु ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३१४॥

बाट आदि सबद उचारि कै; हा असत्रांति बखान ॥

नाम पासि को होत है; चीनीअहु गुनन निधान ॥३१५॥

राह आदि पद उचरीऐ; रिपु कहि असत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३१६॥

प्रिथमै धन सबदो उचरि; हरता आयुध दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥३१७॥

माल आदि सबदोचरि कै; काल जाल कहि अंति ॥

सकल नाम इह पासि के; चीनीअहु प्रग्यावंत ॥३१८॥

माया हरन उचारि कै; आयुध बहुरि बखान ॥

सकल नाम ए पासि के; चतुर चित महि जान ॥३१९॥

मगहा पथहा पैंडहा; धनहा द्रिबहा सोइ ॥

जा को डारत सो सनो; पथक न उबर्यो कोइ ॥३२०॥

बिखीआ आदि बखानि कै; आयुध अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजीअहु चतुर सु धार ॥३२१॥

बिख सबदादि उचारि कै; दाइक असत्र बखान ॥

नाम पास के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३२२॥

चंद्रभगा के नाम लै; पति कहि असत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीनीअहु प्रग्यावान ॥३२३॥

सतुद्रव नाथ बखान कै; पुनि कहि असत्र बिसेख ॥

सकल नाम ए पासि के; निकसत चलतु असेख ॥३२४॥

सतलुज सबदादि बखानि कै; एसरासत्र कहि अंति ॥

नाम सकल है पास के; चीन लेहु बुधिवंत! ॥३२५॥

प्रिथम बिपासा नाम लै; एसरासत्र पुनि भाखु ॥

नाम सकल स्री पासि के; चीन चित मै राखु ॥३२६॥

रावी सावी आदि कहि; आयुध एस बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु प्रग्यावान ॥३२७॥

सावी ईस्रावी सभिन; आयुध बहुरि उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥३२८॥

जल सिंधु एस बखानि कै; आयुध अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! चित महि जान ॥३२९॥

बिहथि आदि सबदोचरि कै; एसरासत्र कहु अंति ॥

सकल नाम ए पासि के; चीन लेहु मतिवंत ॥३३०॥

सिंधु आदि सबद उचरि कै; आयुध अंति बखान ॥

नाम पासि के होत सभ; चीनहु प्रग्यावान ॥३३१॥

नील आदि सबदुचरि कै; एसर असत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु सुर गिआन ॥३३२॥

असित बारि सबदादि कहि; पति असत्रांति बखान ॥

नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥३३३॥

किसना आदि उचारि कै; आयुध एस बखान ॥

नाम पास के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥३३४॥

सबद आदि कहि भीमरा; एसरासत्र कहि अंत ॥

नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवंत ॥३३५॥

तपती आदि उचारि कै; आयुध एस बखान ॥

नाम पास के होत है; सु जनि! सति करि जान ॥३३६॥

बारि राज समुंदेस भनि; सरित सरिध पति भाखु ॥

आयुध पुनि कहि पास के; चीन नाम चिति राखु ॥३३७॥

बरुण बीरहा आदि कहि; आयुध पुनि पद देहु ॥

नाम पास के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥३३८॥

नदी राज सरितीस भनि; समुंदराट पुनि भाखु ॥

आयुध अंति बखानीऐ; नाम पासि लखि राखु ॥३३९॥

ब्रहम पुत्र पद आदि कहि; एसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पासि के सकल ही; चीन लेहु मतिवंत ॥३४०॥

ब्रहमा आदि बखानि कै; अंति पुत्र पद देहु ॥

आयुध एस बखानीऐ; नाम पासि लखि लेहु ॥३४१॥

ब्रहमा आदि उचारि कै; सुत पद बहुरि बखान ॥

एसरासत्र पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४२॥

जगत पिता पद प्रिथम कहि; सुत पद अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीनीअहु प्रगिआवान! ॥३४३॥

घघर आदि उचारि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पास के होत है; चीनीअहु प्रगिआवंत! ॥३४४॥

आदि सुरसती उचरि कै; एसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पास के सकल ही; चीन लेहु मतिवंत! ॥३४५॥

आमू आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३४६॥

समुंद गामनी जे नदी; तिन के नाम बखानि ॥

ईसरासत्र पुनि उचारीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४७॥

सकल काल के नाम लै; आयुध बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥३४८॥

दुघध सबद प्रिथमै उचरि; निधि कहि ईस बखान ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३४९॥

पानिधि प्रिथम बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम सकल स्री पासि के; चीनत चलै अनंत ॥३५०॥

स्रोनज आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखान ॥

आयुध भाखो पासि को; निकसत नाम प्रमान ॥३५१॥

छितजज आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीनहु प्रग्यावंत ॥३५२॥

इसत्रिन आदि बखानि कै; रज पद अंति उचारि ॥

ईसरासत्र कहि पासि के; लीजीऐ नाम सु धार ॥३५३॥

नारिज आदि उचारि कै; ईसरासत्र पद देहु ॥

नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर! चिति लेहु ॥३५४॥

चंचलान के नाम लै; जा कहि निधहि बखानि ॥

ईसरासत्र पुनि उचरीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५५॥

आदि नाम नारीन के; लै, जा अंति बखान ॥

निधि कहि ईसरासत्र कहि; नाम पासि पहिचान ॥३५६॥

बनिता आदि बखानि कै; जा कहि निधहि बखानि ॥

ईसरासत्र पुनि भाखीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५७॥

इसत्रिज आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥

ईसरासत्र कहि फासि के; जानीअहु नाम सुजान ॥३५८॥

बनिता आदि बखानि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३५९॥

अंजनान के नाम लै; जा कहि निधहि उचारि ॥

ईसरासत्र कहि पासि के; लीजहु नाम सु धार ॥३६०॥

बाला आदि बखानि कै; निधि कहि ईस बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु जान ॥३६१॥

अंजनीन के नाम लै; जा कहि निधहि बखानि ॥

ईसरासत्र पुनि उचरीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६२॥

अबला आदि उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६३॥

नरजा आदि उचारि कै; जा निधि ईस बखान ॥

आयुध बहुरि बखानीऐ; नाम पासि पहिचान ॥३६४॥

नरी आसुरी किंन्रनी; सुरी भाखि, जा भाखि ॥

निधिपति असत्र कहि पासि के; नाम चीनि चिति राखि ॥३६५॥

फनिजा आदि उचारि कै; जा कहि निधहि बखान ॥

ईसरासत्र कहि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान ॥३६६॥

अबला बाला मानजा; त्रिय जा निधहि बखान ॥

ईसरासत्र कहि पास के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३६७॥

समुद गामनी जे नदी; तिन के नाम बखान ॥

ईस एस कहि असत्र कहि; नाम पासि पहिचान ॥३६८॥

पै पद प्रिथम बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३६९॥

प्रिथमै भाखि तड़ाग पद; ईसरासत्र पुनि भाखु ॥

नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥३७०॥

प्रिथम सरोवर सबद कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीन लेहु मतिवंत! ॥३७१॥

जलधर आदि बखानि कै; ईसरासत्र पद भाखु ॥

नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥३७२॥

मघजा आदि उचारि कै; धर पद बहुरि बखानि ॥

ईसरासत्र कहि पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३७३॥

आदि बारि धर उचरि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवंत ॥३७४॥

घनज धरन पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; चीन लेहु मतिवंत ॥३७५॥

मघजा धर पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पास के होत है; चीन लेहु मतिवंत! ॥३७६॥

अ्मबुदजा धर आदि कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतवंत ॥३७७॥

अ्मबुदजा धर प्रिथम कहि; ईसरासत्र पद दीन ॥

नाम पास के होत है; लीजीअहु जान प्रबीन ॥३७८॥

बारिद आदि उचारि कै; जा निधि ईस बखान ॥

असत्र उचरि, सभ पासि के; लीजीअहु नाम पछान ॥३७९॥

प्रिथम उचरि पद नीर धर; ईसरासत्र कहि अंत ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३८०॥

रिद पद आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३८१॥

हर धर आदि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३८२॥

जलज त्राणि सबदोचरि कै; ईसरासत्र कहि दीन ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु चीन प्रबीन ॥३८३॥

हरध्रद जलध्रद बारिध्रद; निधि पति असत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥३८४॥

नीरधि आदि उचारि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलै बिअंत ॥३८५॥

अ्मबुदजा धर निधि उचरि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम पासि के सकल ही; चीनहु चतुर! बिअंत ॥३८६॥

धाराधरज उचारि कै; निधि पति एस बखानि ॥

ससत्र उचरि, सभ पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३८७॥

धाराधर ध्रद ईस कहि; असत्र बहुरि पद दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३८८॥

पै पद प्रिथम उचारि कै; निधि कहि ईस बखानि ॥

असत्र उचरि करि पासि के; लीजहु नाम पछान ॥३८९॥

सकल दुघद के नाम लै; निधि कहि ईस बखान ॥

असत्र उचरि करि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३९०॥

नाम सु बीरन के सभै; मुख ते प्रिथम उचारि ॥

ग्रसितनि कहि सभ पासि के; लीजहु नाम सु धारि ॥३९१॥

सकल बारि के नाम लै; निधि पति ईस बखानि ॥

असत्र उचरि करि पासि के; लीजहु नाम सुजान! ॥३९२॥

सकल नाम लै धूरि के; धर निधि ईस बखानि ॥

असत्र उचरि करि पासि के; चीनीअहु नाम सुजान! ॥३९३॥

बारिद अरि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कहि अंत ॥

निधि कहि नाम स्री पासि के; चीनहु चतुर! अनंत ॥३९४॥

त्रात्रांतक पद प्रिथम कहि; निधि एसासत्र बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥३९५॥

झखी त्राणि पद प्रिथमै कहि; ईसरासत्र कहि अंति ॥

नाम सकल स्री पासि के; निकसत चलत बिअंत ॥३९६॥

मतस त्राणि प्रिथमै उचरि; ईसरासत्र कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३९७॥

मैन केतु कहि त्राणि कहि; ईसरासत्र कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥३९८॥

सकल नाम लै नीर के; जा कहि त्राणि बखान ॥

ईसरासत्र कहि पासि के; चीनहु नाम अप्रमान ॥३९९॥

बारिज त्राणि बखानि कै; ईसरासत्र कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४००॥

जलज त्राणि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र पुनि भाखु ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! चीन चित राखु ॥४०१॥

नीरज त्राणि बखानि कै; ईसरासत्र कहि अंति ॥

सकल नाम स्री पासि के; निकसत चलत अनंत ॥४०२॥

कमल त्राणि पद प्रिथम कहि; ईसरासत्र कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०३॥

रिपु पद प्रिथम उचारि कै; अंतक बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान! ॥४०४॥

सत्रु आदि सबदु उचरि कै; अंतक पुनि पद देहु ॥

नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर चिति लेहु ॥४०५॥

आदि खल सबद उचरि कै; अंत्यांतक कै दीन ॥

नाम पास के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०६॥

दुसट आदि सबद उचरि कै; अंत्यांतक कहि भाखु ॥

नाम सकल स्री पासि के; चीन चतुर चिति राखु ॥४०७॥

तन रिपु प्रिथम बखानि कै; अंत्यांतक कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४०८॥

असु अरि आदि बखानि कै; अंत्यांतक कहु भाखु ॥

नाम पासि के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥४०९॥

दलहा प्रिथम बखानि कै; अंत्यांतक कौ देहु ॥

नाम पासि के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥४१०॥

प्रितनांतक पद प्रिथम कहि; अंत्यांतक कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४११॥

धुजनी अरि पद प्रिथम कहि; अंत्यांतकहि उचारि ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधारि ॥४१२॥

आदि बाहनी सबद कहि; रिपु अरि सबद बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४१३॥

बाहनि आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४१४॥

सैना आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखानि ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥४१५॥

हयनी आदि बखानि कै; अंत्यंतक कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४१६॥

गैनी आदि बखानि कै; अंत्यंतक अरि देहु ॥

नाम पासि के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥४१७॥

पतिनी आदि बखानि कै; अरि पद बहुरि उचारि ॥

नाम पासि के होत है; जान लेहु निरधार ॥४१८॥

रथनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारु ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४१९॥

न्रिपणी आदि बखानि कै; रिपु खिप बहुर उचारि ॥

नाम पासि के होत है; लीजअहु सुकबि सुधार ॥४२०॥

भटनी आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुर बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु प्रग्यावान ॥४२१॥

आदि बीरणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४२२॥

सत्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥

नाम पासि के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥४२३॥

जुधनि आदि बखानि कै; पुनि रिपु अरि कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४२४॥

रिपुणी आदि उचारि कै; रिपु खिप अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर चित पहिचान ॥४२५॥

अरिणी आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४२६॥

राजनि आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४२७॥

आदि ईसरणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४२८॥

भूपणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४२९॥

न्रिपजन एस्रणि आदि कहु; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४३०॥

राजनि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४३१॥

एसनि आदि बखानि कै; अंतक बहुरि उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४३२॥

प्रिथम नरेसणि सबद कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४३३॥

आदि रावनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४३४॥

राइनि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम पासि के होत है; समझहु सुघर सुजान! ॥४३५॥

ईसरणि आदि बखानि कै; रिपु अरि उचरहु अंति ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अनंत! ॥४३६॥

धुजनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥४३७॥

दैतनि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु सुकबि! सु धार ॥४३८॥

रदनी आदि बखानि कै; रिपु अरि उचरहु अंति ॥

नाम पासि कै होत है; चीनहु चतुर! बिअंत ॥४३९॥

प्रिथम पद उचरि बारणी; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४४०॥

द्विपनि प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि कै ए सभै; निकसत चलत हजार ॥४४१॥

दुरदनी प्रिथम बखानि कै; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥

नाम पासि के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥४४२॥

सावजनी पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४४३॥

मातंगनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि पद कहि अंति ॥

नाम पासि के होत है; चीनहु चतुर अनंत ॥४४४॥

प्रिथम तुरंगनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चतुर! लेहु पहिचान ॥४४५॥

हसतनि आदि उचारि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; चतुर लीजीअहु चीन ॥४४६॥

प्रिथम उचरि पद दंतनी; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥४४७॥

दुरदनि आदि उचारि कै; मरदनि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४४८॥

पदमनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥४४९॥

ब्याला आदि बखानीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम पासि के होत है; सुकबि लीजीअहु चीन ॥४५०॥

आदि सबद कहि कुंजरी; अंत रिपंतक दीन ॥

नाम पासि के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४५१॥

इ्मभी आदि सबद उचरीऐ; रिपु अरि कौ पुनि दीन ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४५२॥

प्रिथम कु्मभनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान ॥४५३॥

करनी प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजीअहु समझ सुजान ॥४५४॥

प्रिथम सिंधुरी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के सकल ही; निकसत चलत अपार ॥४५५॥

आदि अनकपी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४५६॥

प्रिथम नागनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४५७॥

हरिनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; समझ लेहु बुधिवान! ॥४५८॥

मातंगनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम पासि के होत है; लीजहु सुकबि सुधार ॥४५९॥

आदि उचरि पद बाजिनी; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम पासि के होत है; सुघर सति करि मान ॥४६०॥

इति स्री नाम माला पुराण स्री पासि नाम चतुरथमो धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥४॥

ਅਥ ਤੁਪਕ ਕੇ ਨਾਮ ॥

अथ तुपक के नाम ॥ दोहरा ॥

बाहिनि आदि उचारीऐ; रिपु पद अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६१॥

सिंधवनी पद प्रिथम कहि; रिपणी अंत उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६२॥

तुरंगनि प्रिथम उचारि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४६३॥

हयनी आदि उचारि कै; हा अरि पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥४६४॥

अरबनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥४६५॥

किंकाणी प्रथमोचरि कै; रिपु पद अंत उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥४६६॥

असुनी आदि उचारीऐ; अंति सबद अरि दीन ॥

सत्रु तुपक के नाम है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४६७॥

सुआसनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर लीजीअहु चीन ॥४६८॥

आधिनि आदि उचारि कै; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४६९॥

प्रभुणी आदि उचारि कै; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥४७०॥

आदि भूपणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धारि ॥४७१॥

आदि ईसणी सबद कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४७२॥

आदि संउडणी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥४७३॥

प्रथम सत्रुणी उचरीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर बिचार ॥४७४॥

सकल छत्र के नाम लै; नी कहि रिपुहि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४७५॥

प्रथम छत्रनी सबद उचरि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥४७६॥

आतपत्रणी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधारि ॥४७७॥

आदि पताकनि सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४७८॥

छितपताढि प्रिथमोचरि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥४७९॥

रउदनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥४८०॥

ससत्रनि आदि बखानि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४८१॥

सबद सिंधुरणि उचरि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥४८२॥

आदि सुभटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४८३॥

रथिनी आदि उचारि कै; मथनी मथन बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४८४॥

सबद स्यंदनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥४८५॥

आदि सकटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; समझ लेहु मतिवान! ॥४८६॥

प्रथम सत्रुणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४८७॥

आदि दुसटनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर पछान ॥४८८॥

असु कवचनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥४८९॥

प्रथम बरमणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥४९०॥

तनुत्राणनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४९१॥

प्रथम चरमणी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४९२॥

प्रथम सिपरणी सबद कहि; रिपु अरि उचरहु अंति ॥

नाम तुपक जू के सकल; निकसत चलत अनंत ॥४९३॥

सबद सलणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥४९४॥

प्रथमै चक्रणि सबदि कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४९५॥

आदि खड़गनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥४९६॥

असिनी आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥४९७॥

निसत्रिसनी उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; निकसत चलत प्रमान ॥४९८॥

खगनी आदि बखानि कै; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥४९९॥

ससत्र एस्रणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५००॥

ससत्र राजनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५०१॥

ससत्र राटनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! प्रमान ॥५०२॥

आदि सैफनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५०३॥

आदि तेगनी सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५०४॥

आदि क्रिपाननि सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक होत है; लीजहु चतुर प्रमान ॥५०५॥

समसेरणी उचारि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर! चित महि जान ॥५०६॥

आदि खंडनी सबद कहि; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५०७॥

खलखंडन पद आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५०८॥

कवचांतकनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५०९॥

धाराधरनी आदि कहि; रिपु अरि पद के दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१०॥

कवच तापनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥५११॥

तनु त्राणि अरि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु जान ॥५१२॥

कवच घातनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! प्रमान ॥५१३॥

दुसट दाहनी आदि कहि; रिपु अरि सबद बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५१४॥

दुरजन दरनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; जानु चतुर! निरधार ॥५१५॥

दुरजन दबकनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१६॥

दुसट चरबनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५१७॥

बीर बरजनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५१८॥

बार बरजनी आदि कहि; रिपुणी अंत बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५१९॥

बिसिख बरखनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर! लीजीअहु चीन ॥५२०॥

बान दाइनी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५२१॥

बिसिख ब्रिसटनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सुधारि ॥५२२॥

पनज प्रहारनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२३॥

धनुनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२४॥

प्रथम धनुखनी सबद कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥५२५॥

कोअंडनी आदि उचारीऐ; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५२६॥

बाणाग्रजनी आदि कहि; रिपु अरि पद कौ देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चित लेहु ॥५२७॥

बाण प्रहरणी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥५२८॥

आदि उचरि पद बाणनी; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५२९॥

बिसिख परननी आदि कहि; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! प्रमान ॥५३०॥

बिसिखनि आदि बखानि कै; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥५३१॥

सुभट घाइनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! सु धार ॥५३२॥

सत्रु संघरणी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५३३॥

पनज प्रहरणी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५३४॥

कोअंडज दाइनि उचरि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५३५॥

आदि निखंगनी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! पछान ॥५३६॥

प्रथम पत्रणी पद उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५३७॥

प्रथम पछणी सबद कहि; रिपु अरि पद कौ देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५३८॥

प्रथम पत्रणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजीअहु सुघर! पछान ॥५३९॥

परिणी आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! प्रमान ॥५४०॥

पंखणि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४१॥

पत्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४२॥

नभचरि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥५४३॥

रथनी आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४४॥

सकटनि आदि उचारीऐ; रिपु अरि पद के दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५४५॥

रथणी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४६॥

आदि सबद कहि स्यंदनी; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५४७॥

पटनी आदि बखानि कै; रिपु अरि अंत उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५४८॥

आदि बसत्रणी सबद कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥५४९॥

बियूहनि आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥५५०॥

बज्रणि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥५५१॥

बलणी आदि बखानीऐ; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५५२॥

दलणी आदि उचारि कै; मलणी पद पुनि देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥५५३॥

बादित्रणी बखानि कै; अंति सबद अरि देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥५५४॥

आदि नादनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! अपार ॥५५५॥

दुंदभि धरनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५५६॥

दुंदभनी पद प्रथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५५७॥

नाद नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५५८॥

दुंदभि धुननी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; समझहु सुघर! अपार ॥५५९॥

आदि भेरणी सबद कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान! ॥५६०॥

दुंदभि घोखन आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधार ॥५६१॥

नादानिसनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; करीअहु चतुर! प्रमान ॥५६२॥

आनिकनी पद आदि कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५६३॥

प्रथम ढालनी सबद कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ बिचार ॥५६४॥

ढढनी आदि उचारि कै; रिपु पद बहुरो देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५६५॥

संखनिसनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५६६॥

संख सबदनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर सु धार ॥५६७॥

संख नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५६८॥

सिंघ नादनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५६९॥

पल भछि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥५७०॥

बिआघ्र नादनी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५७१॥

हरि जछनि नादनि उचरि कै; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! पछान ॥५७२॥

पुंडरीक नादनि उचरि कै; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥५७३॥

हर नादनि पद प्रिथम कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर बिचार ॥५७४॥

पंचाननि घोखनि उचरि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥५७५॥

सेर सबदनी आदि कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥५७६॥

म्रिगअरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि बहुर बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु प्रगिआवान ॥५७७॥

पसुपतारि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५७८॥

म्रिगपति नादनि आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु प्रगिआवान ॥५७९॥

पसु एस्रण नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर सु धार ॥५८०॥

गजरि नादिनी आदि कहि; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर लीजीअहु जान ॥५८१॥

सऊडियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥५८२॥

दंतियरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥५८३॥

अनकपियरि नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥५८४॥

सिंधुरारि ध्वननी उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति बिचार ॥५८५॥

मातंगरि नादनि उचरि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघरि स्मभारि ॥५८६॥

साविजारि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति सु भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥५८७॥

गजनियारि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान ॥५८८॥

नागरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; उचरत चलो सुजान ॥५८९॥

हसतियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति लेहु ॥५९०॥

हरिनिअरि आदि उचारि कै; रिपु पद बहुरो देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥५९१॥

करनियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥५९२॥

बरियरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥५९३॥

दंतीयरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद को देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥५९४॥

द्विपि रिपु ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि स्मभार ॥५९५॥

पदमियरि आदि बखानि कै; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥५९६॥

बलियरि आदि बखानि कै; रिपु पद पुनि कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥५९७॥

इ्मभिअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुमति! लीजीअहु बीन ॥५९८॥

कु्मभियरि नादनि आदि कहि; रिपु खिप पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥५९९॥

कुंजरियरि आदि उचारि कै; रिपु पुनि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति स्मभार ॥६००॥

पत्रियरि अरि ध्वननी उचरि; रिपु पुनि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६०१॥

तरुरिपु अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर! निधान ॥६०२॥

सऊडियांतक ध्वननि उचरि; रिपु अरि बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥६०३॥

हयनिअरि आदि उचारि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥६०४॥

हयनिअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु बुधिवान ॥६०५॥

हयनियांतक ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥६०६॥

असुअरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; सुघर! लीजीअहु चीन ॥६०७॥

तुरयारि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंत उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सु धार ॥६०८॥

तुरंगरि ध्वननी आदि कहि; रिपु पुनि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६०९॥

घोरांतकनी आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सु धार ॥६१०॥

बाजांतकनी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! निरधार ॥६११॥

बाहनांतकी आदि कहि; पुनि रिपु नादनि भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! चित राखु ॥६१२॥

सरजज अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चीन लेहु मतिवान! ॥६१३॥

बाज अरि ध्वननी आदि कहि; अंत्यांतक पद दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६१४॥

सिंधुररि प्रथम उचारि कै; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६१५॥

बाहनि नादिन आदि कहि; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धारि ॥६१६॥

तुरंगरि आदि बखानि कै; ध्वननी बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धारि ॥६१७॥

अरबयरि आदि उचारि कै; रिपु अरि बहुरि उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सवारि ॥६१८॥

तुरंगरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि पुनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६१९॥

किंकन अरि ध्वननी उचरि; रिपु पद अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि बिचार ॥६२०॥

घुरअरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सु धार ॥६२१॥

म्रिग अरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धारि ॥६२२॥

सिंगी अरि ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६२३॥

म्रिगी अरि नादनि आदि कहि; रिपु अरि अंति उचारि ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सवारि ॥६२४॥

त्रिण अरि नादनि उचरि कै; रिपु पद बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; चतुर चित पहिचान ॥६२५॥

भूचरि आदि बखानि कै; रिपु अरि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६२६॥

सुभट आदि सबद उचरि कै; अंति सत्रु पद दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु चीन ॥६२७॥

आदि सत्रु सबद उचरि कै; अंत्यांतक पद भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥६२८॥

सत्रु आदि सबद उचरीऐ; सूलनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६२९॥

आदि जुधनी भाखीऐ; अंतकनी पद भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर चिति राखु ॥६३०॥

बरम आदि सबद उचरि कै; बेधनि अंति उचार ॥

बरम बेधनी तुपक को; लीजहु नाम सु धार ॥६३१॥

चरम आदि पद भाखि कै; घाइनि पद कै दीन ॥

चरम घाइनी तुपक के; नाम लीजीअहु चीन ॥६३२॥

द्रुजन आदि सबद उचरि कै; भछनी अंति उचार ॥

द्रुजन भछनी तुपक को; लीजहु नाम सु धार ॥६३३॥

खल पद आदि बखानि कै; हा पद पुनि कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥६३४॥

दुसटन आदि उचारि कै; रिपुणी अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लेहु प्रबीन पछान ॥६३५॥

रिपुणी आदि उचारि कै; खिपणी बहुरि बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सयान ॥६३६॥

नाल सैफनी तुपक भनि; जबरजंग हथ नाल ॥

सुतर नाल घुड़ नाल भनि; चूरणि पुनि पर जुआल ॥६३७॥

जुआल आदि सबदुचरि कै; धरणी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सु धार ॥६३८॥

अनलु आदि सबदुचरि कै; छोडणि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर निरधार ॥६३९॥

जुआला बमनी आदि कहि; मन मै सुघर बिचार ॥

नाम तुपक के होत है; जानि चतुर निरधार ॥६४०॥

घन पद आदि बखानि कै; ध्वननी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥६४१॥

घन पद आदि उचारि कै; नादनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४२॥

बारिद आदि बखानि कै; सबदनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४३॥

मेघन ध्वननी आदि कहि; रिपु अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनहु चतुर अपार ॥६४४॥

मेघन सबदनी बकत्र ते; प्रथमै सबद उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६४५॥

गोला आदि उचारि कै; आलय अंत उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६४६॥

गोला आदि उचारि कै; धरनी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६४७॥

गोला आदि उचारि कै; असत्रणि पुनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चित लेहु ॥६४८॥

गोलालयणी आदि कहि; मुख ते सबद उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६४९॥

गोला आदि उचारि कै; आलयणी पुनि भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! चिति राखु ॥६५०॥

गोला आदि बखानि कै; सदननि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! बिचार ॥६५१॥

गोला पद प्रथमै उचरि कै; केतनि पद कहु अंति ॥

नाम सकल स्री तुपक के; निकसत चलत अनंत ॥६५२॥

गोला आदि उचारि कै; केतनि पद कै दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन! ॥६५३॥

गोला आदि उचारि कै; सदनी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥६५४॥

गोला आदि उचारीऐ; धामिन अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमत सवार ॥६५५॥

गोला आदि उचारि कै; नईवासन कहि अंति ॥

नाम तुपक के होत है; निकसत चलत बिअंत ॥६५६॥

गोला आदि उचारि कै; लिआली अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६५७॥

गोला आदि उचारि कै; मुकतनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के कहि कबो! लीजहु सकल बीचार ॥६५८॥

गोला आदि उचारि कै; दाती अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर! निरधार ॥६५९॥

गोला आदि उचारि कै; तजनी पुनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६६०॥

जुआला आदि उचारि कै; छडनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६६१॥

जुआला सकतनी बकत्र ते; प्रथमै करो बखिआन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर पछान ॥६६२॥

जुआला तजणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु चतुर! बिचार ॥६६३॥

जुआला छाडणि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धार ॥६६४॥

जुआला दाइनि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६६५॥

जुआला बकत्रणि प्रथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥६६६॥

जुआला आदि उचारि कै; प्रगटाइनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥६६७॥

जुआला आदि उचारि कै; धरणी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६६८॥

दुरजन आदि उचारि कै; दाहनि पुनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चित लेहु ॥६६९॥

द्रुजन आदि सबद उचरि कै; दररनि अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७०॥

गोली धरणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७१॥

दुसट आदि सबद उचारि कै; दाहनि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सु धार ॥६७२॥

चौपई ॥

कासट प्रिसठणी आदि उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥

भूमिज प्रिसठनि पुनि पद दीजै ॥

नाम चीन तुपक को लीजै ॥६७३॥

कासठि प्रिसठणी आदि उचार ॥

नाम तुपक के सकल बिचार ॥

द्रुमज बासनी पुनि पद दीजै ॥

चीन नाम नाली को लीजै ॥६७४॥

दोहरा ॥

कासठि प्रिसठणी बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुजन! सवार ॥६७५॥

जलज प्रिसठणी प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सु धार ॥६७६॥

बारज प्रिसठण आदि ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि! सु धार ॥६७७॥

नीरजालयणि बकत्र ते; प्रिथमै करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति! सवार ॥६७८॥

अ्मबुज प्रिसठणी प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥६७९॥

घनजज प्रिसठण प्रिथम ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥६८०॥

जल तर आदि उचारि कै; प्रिसठणि धर पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६८१॥

बार आदि सबद उचरि कै; तर प्रिसठण पुनि भाखु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति राखु ॥६८२॥

नीर आदि सबद उचरि कै; तर पद प्रिसठण देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६८३॥

हरज प्रिसठणी आदि ही; मुख ते करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर! सवार ॥६८४॥

चौपई ॥

बारिज प्रिसठणी आदि उचार ॥

नाम नालि के सकल बिचार ॥

भूरह प्रिसठणि पुनि पद दीजै ॥

नाम जान तुपक को लीजै ॥६८५॥

भूमि सबद को आदि उचारो ॥

रुह प्रिसठणि तुम बहुरि सवारो ॥

नाम तुपक के सभ ही होही ॥

जो कोऊ चतुर चीन कर जोही ॥६८६॥

तरु रुह प्रिसठनि आदि उचरीअहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचरीअहु ॥

कासठ कुंदनी आदि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥६८७॥

भूमि सबद कहु आदि उचारहु ॥

रुह सु सबद को बहुर बिचारहु ॥

नाम तुपक जू के सभ मानहु ॥

या मै कछू भेद नही जानहु ॥६८८॥

प्रिथी सबद को प्रिथमै दीजै ॥

रुह पद बहुरि उचारन कीजै ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥६८९॥

बिरछ सबद को आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद कहि जीअ बिचारो ॥

नाम तुपक के होहि अपारा ॥

या मै कछु न भेद निहारा ॥६९०॥

द्रुमज सबद को आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद कहि हीए बिचारो ॥

सभ ही नाम तुपक के होवै ॥

जउ कोऊ चतुर चित मै जोवै ॥६९१॥

तरु पद मुख ते आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद कौ बहुरि बिचारो ॥

नाम तुपक के सब जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥६९२॥

रुख सबद को आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद कहि बहुरि बिचारो ॥

सभ ही नाम तुपक के होई ॥

या मै कहूं भेद नही कोई ॥६९३॥

उतभुज पद को आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद कहि हीए बिचारो ॥

सभ ही नाम तुपक के जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥६९४॥

तरु सुत सबद को आदि उचारो ॥

बहुरि प्रिसठणी सबद बिचारो ॥

सभ ही नाम तुपक के जानो ॥

या मै कछू भेद न पछानो ॥६९५॥

पत्री पद को आदि बखानो ॥

प्रिसठणि सबद सु बहुरि प्रमानो ॥

सभ ही नाम तुपक के जानहु ॥

या मै कछू भेद नही मानहु ॥६९६॥

अड़िल ॥

धराधार पद प्रथम; उचारन कीजीऐ ॥

प्रिसठणि पद को बहुरि; ठउर तह दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जी जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैक नही मानीऐ ॥६९७॥

दोहरा ॥

धराराज प्रथमै उचरि; पुनि प्रिसठनि पद देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥६९८॥

धरा आदि सबद उचरि कै; नाइक अंत उचार ॥

प्रिसठ भाखि बंदूक के; लीजहु नाम सु धार ॥६९९॥

चौपई ॥

धरा सबद को आदि बखानहु ॥

नाइक सबद तहा फुनि ठानहु ॥

प्रिसठनि पद को बहुरि उचरीऐ ॥

नाम तुपक कै सभै बिचरीऐ ॥७००॥

धरनी पद प्रथमै लिखि डारो ॥

राव सबद तिह अंति उचारो ॥

प्रिसठनि बहुरि सबद को दीजै ॥

नाम पछान तुपक को लीजै ॥७०१॥

धरनीपति पद आदि उचारो ॥

प्रिसठनि सबदहि बहुरि सवारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७०२॥

धराराट पद आदि उचारो ॥

प्रिसठनि पद को बहुरि सु धारो ॥

नाम तुपक जानो मन माही ॥

या मै भेद नैक हूं नाही ॥७०३॥

धराराज पुनि आदि उचरीऐ ॥

ताहि प्रिसठणी बहुरि सु धरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के होवहि ॥

जा के सभ गुनिजन गुन जोवहि ॥७०४॥

धरा सबद को आदि उचारो ॥

प्रिसठनि सबद सु अंति सु धारो ॥

सकल नाम तुपक के जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७०५॥

धरा सबद को आदि भनीजै ॥

इंद्र सबद ता पाछे दीजै ॥

प्रिसठनि पद को बहुरि उचारो ॥

सकल तुपक के नाम बीचारो ॥७०६॥

धरा सबद को आदि उचरीऐ ॥

पालक सबद सु अंति बिचरीऐ ॥

प्रिसठनि पद को बहुरि बखानो ॥

सभ ही नाम तुपक के जानो ॥७०७॥

तरुज सबद को आदि बखानो ॥

नाथ सबद तिह अंति प्रमानो ॥

प्रिसठनि सबद सु बहुरि भनीजै ॥

नाम जान तुपक को लीजै ॥७०८॥

द्रुमज सबद को आदि सु दीजै ॥

नाइक पद को बहुरि भनीजै ॥

प्रिसठनि सबद सु अंति बखानहु ॥

सभ ही नाम तुपक के मानहु ॥७०९॥

फल पद आदि उचारन कीजै ॥

ता पाछे नाइक पद दीजै ॥

पुनि प्रिसठनि तुम सबद उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७१०॥

तरुज सबद को आदि उचरीऐ ॥

राज सबद को बहुरि सु धरीऐ ॥

ता पाछे प्रिसठनि पद दीजै ॥

नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥७११॥

धरनीजा पद आदि भनिजै ॥

राट सबद ता पाछे दिजै ॥

प्रिसठनि पद को अंति बखानो ॥

नाम तुपक सभ भेद न मानो ॥७१२॥

ब्रिछज सबद को आदि भनीजै ॥

ता पाछै राजा पद दीजै ॥

प्रिसठनि सबद सु अंति उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७१३॥

तरु रुह अनुज आदि पद दीजै ॥

नाइक पद को बहुरि भनीजै ॥

प्रिसठनि सबद अंत को दीने ॥

नाम तुपक के होहिं नवीने ॥७१४॥

दोहरा ॥

तरु रुह प्रिसठनि प्रथम ही; मुख ते करौ उचार ॥

नाम तुपक के होत है; चीनि चतुर निरधार ॥७१५॥

सुकबि! बकत्र ते कुंदणी; प्रथमै करो उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुमति सवार ॥७१६॥

अड़िल ॥

कासट कुंदनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

नाम तुपक के चीन; चतुर चित लीजीऐ ॥

ब्रिछज बासनी सबद; बकत्र ते भाखीऐ ॥

हो नाम तुपक के जानि; ह्रिदै मै राखीऐ ॥७१७॥

धरएस रजा सबद; सु अंति बखानीऐ ॥

ता पाछे कुंदनी; बहुरि पद ठानीऐ ॥

सुकबि सभै चित माझ; सु साच बिचारीयो ॥

हो नाम तुपक के सकल; निसंक उचारीयो ॥७१८॥

तरुज बासनी आदि; सु सबद बखानीऐ ॥

नाम तुपक के सकल; सुकबि मन मानीऐ ॥

या मै संक न कछू; ह्रिदै मै कीजीऐ ॥

हो जहा जहा इह नाम; चहो तह दीजीऐ ॥७१९॥

चौपई ॥

भूमि सबद को आदि उचारो ॥

जा पद तिह पाछे दै डारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७२०॥

प्रिथी सबद को आदि उचारो ॥

ता पाछे जा पद दै डारो ॥

नाम तुफंग जान जीय लीजै ॥

चहीऐ जहा, तही पद दीजै ॥७२१॥

बसुधा सबद सु आदि बखानहु ॥

ता पाछे, जा पद कहु ठानहु ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७२२॥

प्रथम बसुंध्रा सबद उचरीऐ ॥

ता पाछे, जा पद दै डरीऐ ॥

नाम तुपक के सभि जीअ लहीऐ ॥

चहीऐ जहा, तही पद कहीऐ ॥७२३॥

तरनी पद को आदि बखानो ॥

ता पाछे जा पद को ठानो ॥

नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥

चहीऐ जहा तही पद कहीऐ ॥७२४॥

छंद ॥

बलीस आदि बखान ॥

बासनी पुनि पद ठान ॥

नामै तुपक सभ होइ ॥

नही भेद या महि कोइ ॥७२५॥

चौपई ॥

सिंघ सबद को आदि बखान ॥

ता पाछे अरि सबद सु ठान ॥

नाम तुपक के सकल पछानहु ॥

या मै कछू भेद नही मानहु ॥७२६॥

पुंडरीक पद आदि उचारो ॥

ता पाछे, अरि पद दै डारो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥

या मै कछू भेद नही कीजै ॥७२७॥

आदि सबद हर जछ उचारो ॥

ता पाछे, अरि पद दै डारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ लहीयो ॥

चहीऐ नाम जहा, तह कहीयो ॥७२८॥

छंद ॥

म्रिगराज आदि उचार ॥

अरि सबद बहुरि सु धार ॥

तऊफंग नाम पछान ॥

नही भेद या महि मान ॥७२९॥

चौपई ॥

आदि सबद म्रिगराज उचारो ॥

ता पाछे रिपु पद दै डारो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥

या मै कछू भेद नही जानो ॥७३०॥

पसु पतेस पद प्रथम भनिजै ॥

ता पाछै अरि पद को दिजै ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७३१॥

दोहरा ॥

सकल पसुन के नाम लै; सत्रु सबद कहि अंति ॥

सभ ही नाम तुफंग के; निकसत चलत अनंत ॥७३२॥

म्रिग पद आदि बखानि कै; पति पद बहुरि उचार ॥

अरि कहि नाम तुफंग के; लीजै सुकबि सु धार ॥७३३॥

छंद ॥

म्रिग सबद आदि बखान ॥

पाछै सु पति पद ठान ॥

रिपु सबद बहुरि उचार ॥

सभ नाम तुपक बिचार ॥७३४॥

सिंगी प्रिथम पद भाखु ॥

अरि सबद कहि लखि राखु ॥

अरि सबद बहुरि बखान ॥

सभ नाम तुपक पछान ॥७३५॥

छंद वडा ॥

पति सबद आदि उचारि कै; म्रिग सबद बहुरि बखानीऐ ॥

अरि सबद बहुरि उचार कै; नाम तुपक पहिचानीऐ ॥

नही भेद या मै नैकु है; सभ सुकबि मानहु चित मै ॥

जह जानीऐ, तह दीजीऐ; पद अउर छंद कबित मै ॥७३६॥

चौपई ॥

हरण सबद को आदि भणिजै ॥

ता पाछे पति पद को दिजै ॥

ता पाछे अरि सबद उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७३७॥

सिंगी आदि उचारन कीजै ॥

ता पाछे पति पद कहु दीजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥७३८॥

क्रिसनाजिन पद आदि उचारो ॥

ता पाछे पति पद दै डारो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥

या मै भेद न कोऊ जानो ॥७३९॥

दोहरा ॥

नैनोतम पद बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥

पति अरि कहि कर तुपक के; लीजो नाम सु धार ॥७४०॥

चौपई ॥

स्वेतास्वेत तनि आदि उचारो ॥

ता पाछे पति सबद सवारो ॥

रिपु पद बहुरि उचारन कीजै ॥

नाम तुपक को सभ लखि लीजै ॥७४१॥

अड़िल ॥

म्रिगी सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

ता पाछे नाइक; सु सबद कहु दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहि नाम; तुपक के जानीऐ ॥

हो जउन ठउर पद रुचै; सु तही बखानीऐ ॥७४२॥

सेत असित अजिना के; आदि उचारीऐ ॥

ता पाछे पति सबद; सु बहुरि सुधारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सु हीय मै जानीऐ ॥७४३॥

उदर सेत चरमादि; उचारन कीजीऐ ॥

ता के पाछे बहुरि; नाथ पद दीजीऐ ॥

ता के पाछे रिपु पद; बहुरि उचारीऐ ॥

हो नाम तुपक के सभ ही; चतुर बिचारीऐ ॥७४४॥

चौपई ॥

किसन पिसठ चरमादि उचारो ॥

ता पाछे नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥७४५॥

चारु नेत्र सबदादि उचारो ॥

ता पाछे पति सबद बिचारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरो दीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७४६॥

नैनोतम पद आदि उचारो ॥

नाइक पद पाछे दे डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥७४७॥

द्रिगी सबद को आदि बखानो ॥

ता पाछे, नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरो दीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७४८॥

चखी सबद को आदि उचारो ॥

ता पाछे, पति पद दे डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥७४९॥

म्रिगी अधिप को आदि उचारो ॥

ता पाछे, पति पद दे डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७५०॥

म्रिगीराट सबदादि भनिजै ॥

ता पाछे, पति पद कहु दिजै ॥

सत्रु सबद को अंति उचारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥७५१॥

म्रिगी इंद्र सबदादि बखानो ॥

ता पाछे, नाइक पद ठानो ॥

ता पाछे, रिपु सबद भनीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७५२॥

म्रिगी एसर को आदि उचरीऐ ॥

ता पाछे, पति पद दे डरीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति बखानो ॥

नाम तुफंग सकल पहिचानो ॥७५३॥

अड़िल ॥

म्रिगीराज को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

ता के पाछे नाइक; पद कहि दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीयो ॥

हो नाम तुपक कै सकल; चतुर पहिचानीयो ॥७५४॥

म्रिगिज सबद को; मुख ते आदि बखानीऐ ॥

ता के पाछे नाइक; पद को ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो नाम तुपक के सभ ही; चतुर बिचारीऐ ॥७५५॥

मुख ते प्रथम म्रिगी; सु सबद को भाखीऐ ॥

ता के पाछे नाइक; पद को राखीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो नाम तुपक के सकल; चतुर चिति धारीऐ ॥७५६॥

चौपई ॥

म्रिगी अनुज को आदि उचारो ॥

ता पाछे, नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को, बहुरि प्रमानहु ॥

नाम तुफंग सकल जीअ जानहु ॥७५७॥

म्रिगी अनुज को, आदि उचारो ॥

ता पाछै, नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद, बहुरो सु बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥७५८॥

म्रिगी अनुज सबदादि उचारो ॥

नाइक पद, पाछै दे डारो ॥

सत्रु सबद को, बहुर बखानो ॥

नाम तुफंग सभै जीअ जानो ॥७५९॥

म्रिगी रवण सबदादि भणिजै ॥

ता पाछे, नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को, बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७६०॥

म्रिगजाइक पद आदि बखानै ॥

ता पाछे, नाइक पद ठानै ॥

सत्रु सबद को, बहुरि भणिजै ॥

नाम बंदूक, जान जीअ लिजै ॥७६१॥

दोहरा ॥

आदि म्रिगीजा उचरि कै; पति रिपु अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥७६२॥

त्रिणचर आदि उचार कै; पति अरि बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुघर सवार ॥७६३॥

अड़िल ॥

त्रिणचर पद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

नाथ सबद को; ता कै पाछै दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

सकल तुपक के नामु; सु चतुर पछानीऐ ॥७६४॥

त्रिणभख पद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

नाइक पद को; ता के पाछे दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन! बिचारीऐ ॥७६५॥

चौपई ॥

त्रिणहा पद को आदि बखानो ॥

ता पाछै नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७६६॥

अड़िल ॥

त्रिणहात्री को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

ता के पाछे; नाथ सबद को दीजीऐ ॥

ता के पाछे; सत्रु सबद को ठानीऐ ॥

हो सकल तुपक को नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥७६७॥

त्रिण भछी को; आदि बखानन कीजीऐ ॥

नाइक पद को; ता के पाछे दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; कहीओ बहुरि सुधारि कै ॥

हो नाम तुपक के लीजहु; सकल बिचार कै ॥७६८॥

त्रिणहा रिपु को; आदि बखानन कीजीऐ ॥

नाथ सबद को; ता के पाछै दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो नाम तुपक के सकल; चतुर पहिचानीऐ ॥७६९॥

दोहरा ॥

त्रिणरिपु आदि उचारि कै; पति रिपु अंति उचार ॥

सभ ही नाम तुफंग के; लीजहु सुघर! सुधार ॥७७०॥

चौपई ॥

त्रिणरिपु आदि उचारन कीजै ॥

ता पाछे नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७७१॥

भूजांतक सबदादि उचारो ॥

नाइक ता पाछे पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७७२॥

प्रिथीज अरि सबदादि उचारो ॥

ता पाछे नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७७३॥

अड़िल ॥

भू सुत रिपु सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥

ता के पाछे बहुरि; नाथ पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७७४॥

चौपई ॥

उरविज सबद सु आदि उचारो ॥

रिपु नाइक पाछे पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग, चीन चिति लिजै ॥७७५॥

बैसुंधरजा सत्रु उचारो ॥

नइक सबद अंति दे डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

नाम बंदूक, चित मै धरीऐ ॥७७६॥

पूरनि आदि उचारन कीजै ॥

जा रिपु पद को पाछै दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥७७७॥

द्वीपनि आदि सबद को दिजै ॥

जा पाछे, चर सबद भनिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल सवारो ॥७७८॥

सिसटनि पद को आदि उचारो ॥

जा कहि चर पाछे दे डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चित लिजै ॥७७९॥

धरनि सबद को आदि उचारो ॥

जा चर पद पाछे तिहि डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७८०॥

धरा सबद को आदि बखानो ॥

जा चर पद पाछे तिह ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुफंग सकल चिति धारो ॥७८१॥

दोहरा ॥

भूमिज आदि उचारि कै; चर पद बहुरि उचारि ॥

रिपु कहि नाम तुफंग के; लीजहु सुकबि! सु धार ॥७८२॥

चौपई ॥

द्रुमनी आदि उचारन कीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७८३॥

ब्रिछनिज आदि उचारन कीजै ॥

चरनाइक पाछे पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७८४॥

धरएसरणी आदि बखानो ॥

ता पाछे जा चर पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥७८५॥

धराराटनी आदि उचारो ॥

जा नाइक चर सबद बिचारो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥

या मै कछू भेद नही मानो ॥७८६॥

अड़िल ॥

बारिधनी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर नाइक सबद; अंति तिह दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥७८७॥

सामुद्रनि सबदादि; उचारो जानि कै ॥

जा चर पद ता के; पुनि पाछे ठानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७८८॥

नीररासि को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर नाइक सबद; अंति तिह दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता को अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; साच पहिचानीऐ ॥७८९॥

चौपई ॥

नीरालयनी आदि उचारो ॥

जा चर नाइक बहुरि बिचारो ॥

ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥७९०॥

अड़िल ॥

नीरधनी सबदादि; उचारो जानि कै ॥

जा चर नाइक पद को; पाछे ठानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥७९१॥

दोहरा ॥

बारालयणी आदि कहि; जा चर पति पद देहु ॥

सत्रु सबद पुनि भाखीऐ; नाम तुपक लखि लेहु ॥७९२॥

अड़िल ॥

जल रासननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर नाइक पद; तिह पाछे दीजीऐ ॥

सत्रु पद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुकबि बिचारीऐ ॥७९३॥

चौपई ॥

कंनिधनी सबदादि भणिजे ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजे ॥

सत्रु सबद को अंति उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७९४॥

अ्मबुजनी सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥७९५॥

जलनी आदि बखानन कीजै ॥

जा चर पति पाछै पद दीजै ॥

सत्रु सबद को अंति बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥७९६॥

पानिनि आदि उचारन कीजै ॥

जा चर पति सबदांति भणीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥७९७॥

अ्मबुजनी सबदादि भणिजै ॥

जा चर पति सबदांति कहिजै ॥

सत्रु सबद बहुरो तुम ठानो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥७९८॥

दोहरा ॥

बारिनि आदि उचारि कै; जा चर धर पद देहु ॥

सत्रु उचारु तुफंग के; नाम चतुर लखि लेहु ॥७९९॥

अड़िल ॥

बारिजनी सबदादि; उचारो जानि कै ॥

जा चर पति पद को; तिह पाछे ठानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारि कै ॥

हो सकल तुपक के नाम; सु लेहु बिचारि कै ॥८००॥

जलनिधनी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८०१॥

चौपई ॥

मेघजनी सबदादि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥८०२॥

अ्मबुदनी सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥८०३॥

हरिनी आदि उचारन कीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥८०४॥

बारिदनी सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥

नाम तुपक सभ हीए बिचारहु ॥८०५॥

नदिनी आदि उचारन कीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥८०६॥

अड़िल ॥

नयनी सबद सु मुख ते; आदि उचारीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता कै अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥८०७॥

सरतनि सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पाछे ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८०८॥

नादिनि मुख ते सबद; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक को नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥८०९॥

जलनी मुख ते आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पाछे दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८१०॥

आदि तरंगनि सबद; उचारो जानि कै ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो ठानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८११॥

आदि करारनि सबद; उचारो बकत्र ते ॥

जा चर कहि नाइक पद; उचरो चित ते ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बखानीऐ ॥८१२॥

फेनननी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८१३॥

ब्रिछ कंदनिनि आदि; बखानो जानि कै ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥८१४॥

दोहरा ॥

जल रस सननी आदि कहि; जा चर पति कहि अंति ॥

सत्रु सबद कहि तुपक के; निकसहि नाम अनंत ॥८१५॥

क्रितअरिनी पद आदि कहि; जा चर नाथ उचारि ॥

सत्रु उचरि करि तुपक के; लीजो नाम सु धार ॥८१६॥

चौपई ॥

क्रार कंदनीनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८१७॥

क्रार आरिनी आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥८१८॥

कलुनासननि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥

नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥८१९॥

अड़िल ॥

गंगनि पद को प्रथम; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८२०॥

चौपई ॥

जनुवनि पद को आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८२१॥

अड़िल ॥

भागीरथनी पद को; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरो ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८२२॥

चौपई ॥

जटनिनि पद को आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल प्रमानो ॥८२३॥

नदी राटनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणीजै ॥

नाम तुफंग जान जीअ लीजै ॥८२४॥

भीखम जननिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥

या मै कछू भेद नही कहीऐ ॥८२५॥

नदी ईस्रनिनि आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥८२६॥

नदी राजनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद बहुरो मुखि भाखु ॥

नाम तुफंग चीनि चिति राखु ॥८२७॥

नदि नाइकनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद बहुरो तिह दीजै ॥

नाम तुफंग चीनि चिति लीजै ॥८२८॥

सरितेस्रनिनि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥८२९॥

सरिता बरनिनि आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ पहिचानो ॥८३०॥

सरितेद्रनिनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि पति पद दे डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥८३१॥

दोहरा ॥

सरिता न्रिपनिनि बकत्र ते; प्रथमै करो उचार ॥

जा चर पति कहि सत्रु कहि; नाम तुपक जीअ धार ॥८३२॥

अड़िल ॥

आदि तरंगनि राजनि; सबद उचारीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८३३॥

नदी न्रिपनिनी मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८३४॥

चौपई ॥

आदि जमुननी सबद उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चित लिजै ॥८३५॥

कालिंद्रनिनी आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद डरीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८३६॥

किसन बलभिनि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानीऐ ॥८३७॥

बसुदेवज बलभननि भाखो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥

या मै भेद एक नही मानो ॥८३८॥

अड़िल ॥

सकल नाम बसुदेव के; आदि उचारीऐ ॥

जा बलभनी ता पाछे; पद डारीऐ ॥

जा चर कहि रिपु सबद; बहुरि तिह भाखीऐ ॥

हो चीनि तुपक के नाम; चतुर चिति राखीऐ ॥८३९॥

चौपई ॥

सिआम बलभा आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पदु ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८४०॥

मुसलीधर बलभा बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणीजै ॥

जान नाम तुपक को लीजै ॥८४१॥

बापुरधर बलभा प्रमानो ॥

जा चर कहि पति सबदहि ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

सब जीअ नाम तुपक के धरीऐ ॥८४२॥

बंसीधर धरनिनि पद दिजै ॥

जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक पहिचानो ॥८४३॥

बिसुइस बलभादि पद दीजै ॥

जा चर कहि पति सबद भणीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८४४॥

बिसुइसेस्रणी आदि भणिजै ॥

जा चर कहि पति पद पुनि दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८४५॥

जदु नाइक नाइका बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥८४६॥

अड़िल ॥

दुआरावतीस बलभा; आदि उचारीऐ ॥

जा चर नाइक पद को; पुनि दै डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८४७॥

जादो राइ बलभा; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर लखि लीजीऐ ॥८४८॥

दुआरकेंद्र बलभिनि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पाछे दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८४९॥

दुआरकेस बलभनि सु; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुर प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८५०॥

चौपई ॥

दुआरके अनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के धरीऐ ॥८५१॥

जदुनाथननी आदि भनीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८५२॥

दुआरवती सरनिन पद भाखु ॥

जा चर कहि नाइक पद राखु ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८५३॥

अड़िल ॥

दुआरवती नाइकनिनि; आदि उचारीऐ ॥

जा चर कहि कै पुन; नाइक पद डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन पछानीऐ ॥८५४॥

चौपई ॥

दुआरका धननि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणीजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लीजै ॥८५५॥

दुआरकेंद्रनिनि आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि पति सबद सु धरीऐ ॥

सत्रु सबद के अंति बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के मानो ॥८५६॥

दुआरावतेस्रनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद सु ठानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के धरीऐ ॥८५७॥

जद्वेसनि आदि उचारन कीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक पहिचानो ॥८५८॥

दुआरावती नाइकनिनि भाखहु ॥

जा चर कहि पति पद कहु राखहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८५९॥

जगतेसरनिनि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८६०॥

अड़िल ॥

अनिक दुंदभजा; बलभनि आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८६१॥

हली भ्रातनिनि आदि; बखाननि कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८६२॥

चौपई ॥

बलि आनुजनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुफंग चीन चिति लिजै ॥८६३॥

बलि भईअननी आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद को बहुरो कहीयो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीयो ॥८६४॥

रउहणेअ भ्रातननि भाखु ॥

जा चर कहि नाइक पद राखु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लहि लिजै ॥८६५॥

बलभद्र भ्रातनिनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८६६॥

अड़िल ॥

प्रल्मबघनु अनुजननी; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८६७॥

कामपाल अनुजनिनी; आदि भनीजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सु मंत्र बिचारीऐ ॥८६८॥

हल आयुध अनुजनिनी; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

अरि पद ता के अंति; सुकबि! कहि दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥८६९॥

रिवति रवन अनुजनिनी; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति सु दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥८७०॥

चौपई ॥

राम अनुजनिनी आदि उचारो ॥

जा चर कहि पति पद दै डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक पद जानो ॥८७१॥

बलदेव अनुजनी आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥८७२॥

अड़िल ॥

प्रल्मबारि अनुजनिनी; आदि उचारीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; पुनि दे डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥८७३॥

त्रिणावरत अरिननि; सबदादि बखानीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८७४॥

केसियांतकनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंत उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८७५॥

बकीआंतकनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८७६॥

पतिनागनिनि आदि; उचारो जानि कै ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानि कै ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८७७॥

सकटासुर हननिन; सबदादि भणीजीऐ ॥

जा चर कहि पाछे; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुगिआन पछानीऐ ॥८७८॥

चौपई ॥

मुरअरिनिनि सबदादि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८७९॥

नरकांतकनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहिजै ॥८८०॥

आदि नरकहानिनि पद भाखो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥८८१॥

सत्रु घाइननि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक पहिचानहु ॥८८२॥

अड़िल ॥

मुर मरदनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि के पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥८८३॥

चौपई ॥

मधुसूदननिनि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद को बहुर बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥८८४॥

अड़िल ॥

मधु दुंदननी मुख ते; आदि भणिजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; सबदेंद्र कहिजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८८५॥

मधु नासननी मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि के पुनि; सबदेसुर प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८८६॥

कालजमुन अरिननि; सबदादि बखानीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८८७॥

नरक अरिननि मुख ते; आदि भणिजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दिजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥८८८॥

कंसकेस करखनणी; आदि बखानही ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद ठानही ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥८८९॥

बासुदिवेसननिनी; आदि भणिजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दिजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९०॥

अनक दुंदभेसनिनि; आदि उचारीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र पछानीऐ ॥८९१॥

रस नर कसनिनि आदि; सबद को भाखऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद राखीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति धारीऐ ॥८९२॥

नाराइननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै; राज सबद पुनि दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९३॥

बारालयननि मुखि ते; आदि भणिजीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; बहुरि पद दिजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥८९४॥

नीरालयनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि पति सबद; बहुरि तिह दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८९५॥

नार केतनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै पुनि; नाइक पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥८९६॥

जल बासननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै; नाथ सबद पुनि दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥८९७॥

चौपई ॥

जल केतननी आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कह बहुरि भणिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥८९८॥

अड़िल ॥

जल बासननी आदि; बखानन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै; नाथ सबद पुनि दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥८९९॥

चौपई ॥

जल धामननी आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९००॥

जलग्रिहननी आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९०१॥

जल बासननी आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥

सत्रु सबद कहु अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के मानहु ॥९०२॥

जल संकेतनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९०३॥

बार धामनी आदि भणिजै ॥

जा चर कहि सबदेस कहिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९०४॥

बार ग्रिहननी आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९०५॥

अड़िल ॥

मेघ जनिनि सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि करि नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन बिचारीऐ ॥९०६॥

चौपई ॥

सारसुती सबदादि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९०७॥

गंग भेटनी आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल कहिजै ॥९०८॥

अरुणि बारनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९०९॥

अरुण बारिनी आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥

सकल तुपक के नाम बिचारो ॥९१०॥

अड़िल ॥

अरुण अ्मबुनिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥९११॥

चौपई ॥

अरुण तरंगनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९१२॥

आरकता जलनिनि पद भाखो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लखि लिजै ॥९१३॥

अरुण अ्मबुनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥९१४॥

अरुण पानिनी आदि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानो ॥९१५॥

अरुण जलनिनी आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लखि लिजै ॥९१६॥

अरुण नीरनिनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९१७॥

सतद्रवनिनी प्रिथम प्रकासो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

अरि पद ता के अंति उचरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९१८॥

सत प्रवाहनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥९१९॥

सहस नारनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद के बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९२०॥

अड़िल ॥

सत द्रवननिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद कहु दीजीऐ ॥

रिपु पद को ता के; पुनि अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥९२१॥

चौपई ॥

सत प्रवाहनिनि प्रथम बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९२२॥

सता गामिनी प्रथम भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९२३॥

सत तरंगननि आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

अंति सबद ता के अरि कहीऐ ॥

नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥९२४॥

भूमि सबद को आदि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बीचारहु ॥९२५॥

आदि बिआसनिनी पद भाखो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९२६॥

बिअहननी सबदादि भणिजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥

सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९२७॥

पास सकतिननि आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥

रिपु पद ता के अंति भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९२८॥

पास नासनिनि आदि बखनीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद ठनीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९२९॥

बरुणाइध नासननि बखानहु ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९३०॥

जलिसन आयुध नाम कहीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९३१॥

अड़िल ॥

सकल पासि लै नाम; नासनिनि भाखीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; बहुरि पद राखीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥९३२॥

राविननी सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद पुनि दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबीर पछानीऐ ॥९३३॥

चौपई ॥

राविनीनि सबदादि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद कहिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९३४॥

चंद्र भगनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९३५॥

ससि भगनिनि सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९३६॥

चंद्रनुजनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद सु ठानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरो धरीऐ ॥

नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥९३७॥

अड़िल ॥

ससि अनुजनिनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥९३८॥

चौपई ॥

मयंक अनुजनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

अरि पद अंति तवन के दिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९३९॥

अड़िल ॥

मयंक सहोदरनिनि; सबदादि बखानीऐ ॥

जा चर कहि करि नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति भणीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥९४०॥

चौपई ॥

अज अनुजननिनि आदि कहिजै ॥

जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥

सत्रु सबद कहु अंति उचारहु ॥

सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९४१॥

निसिस अनुजननिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबदि प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम बिचरीऐ ॥९४२॥

निसि इसरननिनि आदि कहिजै ॥

जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९४३॥

रैनाधिपनी आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लखि लिजै ॥९४४॥

रैन राटनिनि आदि उचरीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥९४५॥

रैनराजनी आदि कहिजै ॥

जा चर कहि पति सबद भणिजै ॥

ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥

नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥९४६॥

निस नाइकनिनि आदि उचरीऐ ॥

सून उचरि चर पति पद डरीऐ ॥

अरि पद ता के अंति बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९४७॥

निसिइसनी सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥

सुकबि तुपक के नाम बिचारहु ॥९४८॥

निसि पतिनिनि सबदादि उचरीऐ ॥

सुत चर अरि अंतहि पद धरीऐ ॥

सत्रु सबद कहु अंति बखानहु ॥

सुकबि तुपक के नाम पछानहु ॥९४९॥

निस धनिनी सबदादि कहिजै ॥

जा चर कहि अरि पदहि भणिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥९५०॥

रैन नाइकनि आदि सु कहीऐ ॥

जा चर कहि पति पद दै रहीऐ ॥

ता के अंति सत्रु पद भाखहु ॥

नाम तुपक के सभ लखि राखहु ॥९५१॥

निस चरनिनि प्रथमै पद भाखहु ॥

सुत चर कहि नाइक पुनि राखहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥९५२॥

आदि निसाचरिननि कहु भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहिजै ॥९५३॥

रैन रमनि सबदादि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद कहिजै ॥

सत्रु सबद को अंति बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९५४॥

रैन राजनिनि प्रथम उचारो ॥

सुत चर कहि पति पदहि सवारो ॥

ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥

नाम तुपक के सभ ही लहीऐ ॥९५५॥

निसारवनिनि आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद ता पाछे कहीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥९५६॥

दिन अरि रवनिनि आदि उचारो ॥

सुत चर कहि पति सबद बिचारो ॥

ता के अंति सत्रु पद भाखो ॥

नाम तुपक जू के लखि राखो ॥९५७॥

हरिज अरि रवनिनि आदि बखानो ॥

सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

ता के अंति सत्रु पद कहो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहो ॥९५८॥

तिम्रियरि सो रवननि पद कहीऐ ॥

सुत चर कहि नाइक पद गहीऐ ॥

सत्रु सबद तिह अंति कहिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९५९॥

हरिजरि रवनिनि आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचरीऐ ॥

नाम तुपक के सुकबि बिचरीऐ ॥९६०॥

रविजरि रवनिनि आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद कहु बहुरो भाखहु ॥

सभ स्री नाम तुपक लखि राखहु ॥९६१॥

भानुज अरि कहि रवनि भनीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९६२॥

सूरजरि रवनि आदि पद कहीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद गहीऐ ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥९६३॥

भानुजारि रवनिनि पद भाखो ॥

सुत चर कहि पति पद पुनि राखो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

नाम तुपक के सकल प्रमानहु ॥९६४॥

अड़िल ॥

दिनधुज अरि रवनिनि को; आदि उचारीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद दे डारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥९६५॥

दिनराजि अरि रवनिनी; सु आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि कै नाथ; सबद पुनि ठानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुध बिचारीऐ ॥९६६॥

चौपई ॥

दिनिस अरि रवनिनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद कहु पुनि कहि लीजै ॥

नाम तुपक के सकल पतीजै ॥९६७॥

तम अरि जरि रवनिनि पद भाखो ॥

जा चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद तिह अंति भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९६८॥

चंद्र जोननी आदि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९६९॥

ससि उपसखिनी आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥९७०॥

निस इस भगनी आदि बखानहु ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९७१॥

ससि भगनी सबदादि बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥९७२॥

निसिस भगा सबदादि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद कहिजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९७३॥

रैन राट कहि भगा बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद को अंति भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल पतिजै ॥९७४॥

अड़िल ॥

रैन रावनि कहि भगा; सबद बखानीऐ ॥

जा चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति भनीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चहो तह दीजीऐ ॥९७५॥

रैन राज कहि भगा; बखानन कीजीऐ ॥

जा चर कहि करि नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि मन धारीऐ ॥९७६॥

चौपई ॥

रैन राव कहि भगा बखानो ॥

जा चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद तिह अंति भणिजै ॥

नाम तुपक जह चहो कहिजै ॥९७७॥

दिन अरि कहि भग सबद बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद तिह अंति सु कहीऐ ॥

नाम तुपक उचरहु जह चहीऐ ॥९७८॥

तमचर कहि भग सबद बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥९७९॥

रैण रावि कहि भगणि कहीजै ॥

जा चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचारहु ॥

सकल तुपक के नाम बिचारहु ॥९८०॥

जउन करण कहि भगणि बखानो ॥

जा चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥९८१॥

किरण धरण कहि भगणि कहीजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

नाम तुपक के सभ अनुमानहु ॥९८२॥

मयंक सबद कहि भगणि भणिजै ॥

सतु चर कहि पद नाथ धरिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि उचरीऐ ॥

नाम तुपक के सकल सु धरीऐ ॥९८३॥

म्रिग बाहनि कहि भगणि बखानो ॥

सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥

सभ स्री नाम तुपक चिति धारहु ॥९८४॥

हिरण राट कहि भगणि उचारहु ॥

सुत चर कहि नाइक पद डारहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥९८५॥

स्रिंग बाहणी भगा भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९८६॥

म्रिग पतिणी कहि भगणि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९८७॥

प्रजापति कहि भगणि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥९८८॥

छंद ॥

म्रिग नाथ भगणणि भाखु ॥

रिपु नाथ चर पति राखु ॥

रिपु सबद बहुरि बखान ॥

सभ नाम तुपक प्रमान ॥९८९॥

चौपई ॥

नदी राट सुत भगणि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक अनुमानहु ॥९९०॥

सामुंद्रज कहि भगणि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचारो ॥

नाम तुपक के सभ जीअ धारो ॥९९१॥

नदी राट सुत भगणि उचारो ॥

जा चर कहि पति पद दे डारो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥९९२॥

समुद्रज भगणिनि आदि भणिजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९३॥

म्रिगजा भगणिनि आदि उचारो ॥

जा चर कहि पति पद दे डारो ॥

रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥९९४॥

नदिसज भगणि आदि पद दीजै ॥

जा चर कहि पति सबद धरीजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९५॥

नदि नाइक कहि भगणिनि भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक को जानो ॥९९६॥

सरितिस भगणिनि आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥९९७॥

सरित इंद्र भगणनी भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक पहिचानहु ॥९९८॥

अड़िल ॥

निससिणि कहि भगणिनि पद; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि नाइक पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति भनीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लखि लीजीऐ ॥९९९॥

तम हर भगणिनि मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

जा चर कहि के पति पद; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०००॥

तम हर भगणिनि आदि; बखानन कीजीऐ ॥

सुत चर कहि कै पति पद; अंति भणीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति सुबुधि कहु ॥

हो सकल तुपक के नाम; अनेक प्रबीन लहु ॥१००१॥

तम अरि भगणाणनि पद; प्रिथम कहीजीऐ ॥

सुत चर कहि पति सबद; अंति तिहु दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि प्रमानीऐ ॥१००२॥

चौपई ॥

तिमररि भगणणि आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥

सकल तुक के नाम पछानो ॥१००३॥

तिमर नास करि भगणनि भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद को बहुरि बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥१००४॥

तिमर रदन भगणनी बखानो ॥

सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणीजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१००५॥

तिमर उचरि हा भगण बखानहु ॥

सुत चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

सत्रु सबद तिह अंति भणीजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१००६॥

तिमर निकंदनि आदि उचरीऐ ॥

भगणिनि सुत चर पुनि पति धरीऐ ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम प्रमानहु ॥१००७॥

तिमरमंद भगणिनी भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सकल तुपक के नाम अनुमानहु ॥१००८॥

तिमरयांत कहि भगणिनि भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

नाम तुपक के सकल प्रमानहु ॥१००९॥

अड़िल ॥

तिमर नास करि भगणिनि; आदि बखानीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥

रिपु पद को ता के पुनि; अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०१०॥

उडगराज कहि भगणिनि; आदि बखानीऐ ॥

सुत चर कहि के नाथ; सबद कहु ठानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमंत्र बिचारीऐ ॥१०११॥

चौपई ॥

उडगिस कहि भगणिनी भणिजै ॥

सुत चर कहि नाइक पद दिजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानहु ॥

नाम तुपक के सभ जीअ जानहु ॥१०१२॥

उडग नाथ कहि भगणि उचारो ॥

सुत चर कहि पति पद कहु डारो ॥

रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक जीअ जानहु ॥१०१३॥

उडग न्रिपति कहि भगणिनी भणीजै ॥

सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०१४॥

उडग न्रिपति कहि भगणि भणीजै ॥

सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥१०१५॥

अड़िल ॥

उडगएस भगणिनि; सबदादि बखानीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ धारीऐ ॥१०१६॥

उडपति भगणिनि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; प्रबीन प्रमानीऐ ॥१०१७॥

चौपई ॥

उडग भूपणी भूपि बखानो ॥

सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०१८॥

तारापति कहि भगणिनि भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद कहु बहुरि उचारहु ॥

सभ स्री नाम तुपक जीअ धारहु ॥१०१९॥

तारेसर कहि भगणि उचारो ॥

सुत चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०२०॥

तारालयइस भगणि बखानो ॥

सुत चर कहि पति सबद प्रमानो ॥

ता के अंति सत्रु पद कहीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥१०२१॥

अड़िल ॥

तारा ग्रिहणिस भगणी; आदि बखानीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद को ठानीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंतहि दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि! लहि लीजीऐ ॥१०२२॥

उडग निकेतिस भगनी; आदि भणीजीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; बहुरि पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१०२३॥

उडग नाथ भगणिनी; प्रिथम पद भाखीऐ ॥

सुतु चर कहि करि नाथ; बहुरि पद राखीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पहिचानीऐ ॥१०२४॥

उडगएसर भगणिनि; सबदादि उचारीऐ ॥

सुत चर कहि करि नाथ; सबद दै डारीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति भणीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥१०२५॥

उडग एसर भगणिनि सबदादि भणीजीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद को दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ धारीऐ ॥१०२६॥

चौपई ॥

उडगास्रै भगणिनी बखानो ॥

सुत चर कहि नाइक पद ठानो ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक जीअ धरीऐ ॥१०२७॥

रिखिज भगणिनी आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०२८॥

मुनिज भगणिनी आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥

नाम तुपक के ह्रिदै बिचारहु ॥१०२९॥

ब्रिति उतमज भगणिनी भाखो ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखो ॥

सत्रु सबद तिह अंति सु कहीऐ ॥

सकल तुपक के नामन लहीऐ ॥१०३०॥

तपिस उचरि भगणिनी भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०३१॥

कसिप सुत कहि भगणिनि भाखीऐ ॥

सुत चर कहि नाइक पद राखीऐ ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचरीऐ ॥

नाम तुपक के सभ जीअ धरीऐ ॥१०३२॥

जवन करण भगणिनी बखानहु ॥

सुत चर कहि पति सबद प्रमानहु ॥

ता के अंति सत्रु पद दीजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥१०३३॥

क्रिसनिनि आदि बखानन कीजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥

रिपु पद ता के अंति बखानहु ॥

नाम तुपक के सभ अनुमानहु ॥१०३४॥

सिआम मूरतिनिनि आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक अनुमानहु ॥१०३५॥

प्रथम तपतिनी सबद उचरीऐ ॥

सुत चर कहि नाइक पद धरीऐ ॥

सत्रु सबद तिह अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१०३६॥

सूरज पुत्रिका आदि भणिजै ॥

सुत चर कहि नाइक पद दिजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचारहु ॥

सभ स्री नाम तुपक जीअ धारहु ॥१०३७॥

सूरज आतमजा आदि भणीजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरीजै ॥

सत्रु सबद तिह अंति उचारो ॥

नाम तुपक के सकल बिचारो ॥१०३८॥

आदि माननी सबद उचारो ॥

सुत चर कहि पति पद दे डारो ॥

अरि पद ता के अंति उचरीऐ ॥

नाम तुपक के सकल बिचरीऐ ॥१०३९॥

अभिमानिनी पदादि भणिजै ॥

सुत चर कहि पति सबद धरिजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के मानहु ॥१०४०॥

प्रथम समयणी सबद उचारो ॥

सुत चर कहि नाइक पद डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि कहिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०४१॥

गरबिणि आदि उचारन कीजै ॥

सुत चर कहि नाइक पद दीजै ॥

अरि पद ता के अंति उचारहु ॥

नाम तुपक के सकल बिचारहु ॥१०४२॥

अड़िल ॥

द्रपनिनि मुख ते सबद; सु आदि उचारीऐ ॥

सुत चर कहि कर नाथ; सबद दे डारीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि पहिचानीऐ ॥१०४३॥

चौपई ॥

अहंकारनी आदि उचारो ॥

सुत चर कहि पति पद कहु डारो ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१०४४॥

पीअणीणि आदि उचारण कीजै ॥

सुत चर कहि पति सबद भणीजै ॥

रिपु पद ता के अंति बखाणहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जाणहु ॥१०४५॥

दोहरा ॥

धिखणी आदि बखान कै; रिपु पद अंति उचार ॥

सभ स्री नाम तुफंग के; लीजहु सुकबि सु धार ॥१०४६॥

मेधणि आदि उचारि कै; रिपु पद कहीऐ अंति ॥

सभ स्री नाम तुफंग के; निकसत चलै अनंत ॥१०४७॥

सेमुखिनी सबदादि कहि; अरि पद अंति बखान ॥

सकल तुपक के नाम ए; लहि लीजो बुधिवान ॥१०४८॥

आदि मनीखनि सबद कहि; रिपु पद बहुरि उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु सुकबि सु धार ॥१०४९॥

बुधनी आदि बखान कै; अंति सबद अरि देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर चिति लेहु ॥१०५०॥

चौपई ॥

भानी आदि बखानन कीजै ॥

रिपु पद ता के अंति भणीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

या मै भेद कछू नहि मानहु ॥१०५१॥

दोहरा ॥

आदि आभानी सबद कहि; रिपु पद अंति बखान ॥

नाम सकल स्री तुपक के; लीजहु सुकबि पछान ॥१०५२॥

अड़िल ॥

आदि सोभनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति भणीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥१०५३॥

प्रभा धरनि मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति प्रमानीऐ ॥

ता ते उतर तुपक को; नाम भनीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; जान नही लीजीऐ ॥१०५४॥

सुखमनि पद को मुख ते; आदि उचारीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंतहि डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०५५॥

चौपई ॥

धीमनि पद को आदि बखानहु ॥

ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥

सरब तुपक के नाम लहीजै ॥

या मै भेद नैकु नही कीजै ॥१०५६॥

आदि क्रांतनी सबद उचारो ॥

ता के अंति सत्रु पद डारो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

या के बिखै भेद नही मानहु ॥१०५७॥

छबिनी आदि उचारन कीजै ॥

रिपु पद अंति तवन के दीजै ॥

नाम तुपक के सकल पछानहु ॥

या के बिखै भेद नही मानहु ॥१०५८॥

प्रिथम बाजनी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

चित मै रुचै तिसी ठां कहीऐ ॥१०५९॥

अड़िल ॥

आदि बाहनी सबद; बखानन कीजीऐ ॥

ता के पाछे सत्रु; सबद कहु दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो चहीऐ जवनै ठवर; सु तहा बखानीऐ ॥१०६०॥

आदि तुरंगनी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥

अरि पद ता के अंति; सु बहुरि प्रमानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०६१॥

हयनी सबदहि मुख ते; आदि उचारीऐ ॥

ता के अंति अंतकरि; पद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर! जीअ जानीयो ॥

हो दीयो जहा तुम चहो; सु तही बखानीयो ॥१०६२॥

चौपई ॥

सैंधवनी सबदादि उचारो ॥

अरि पद अंति तवन के डारो ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

या मै भेद नैकु नही मानहु ॥१०६३॥

आदि अरबिनी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

या मै भेद नैकु नही जानहु ॥१०६४॥

आदि तुरंगनी सबद बखानहु ॥

अरि पद ता के अंत प्रमानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के लईऐ ॥

जह चित रुचै तही ते कहीऐ ॥१०६५॥

आदि घोरनी सबद भनीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सभै तुपक के नाम बिचारो ॥

जह चाहो तिन तही उचारो ॥१०६६॥

आदि हसतिनी सबद उचारो ॥

रिपु पद अंति तवन के डारो ॥

सभै तुपक के नाम लहिजै ॥

जह चाहो ते तही भणिजै ॥१०६७॥

अड़िल ॥

आदि दंतिनी सबद उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबदु को अंति तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम सुबुधि पछानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद नैकु नही मानीऐ ॥१०६८॥

चौपई ॥

आदि दुरदनी सबद बखानहु ॥

ता के अंति सत्रु पद ठानहु ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥

या के बिखै भेद नही किजै ॥१०६९॥

द्विपनी आदि उचारन कीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

जह चाहो तह ही ते कहीऐ ॥१०७०॥

आदि पदमिनी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

नाम तुपक के सकल लहीजै ॥

या मै भेद न कछहू कीजै ॥१०७१॥

अड़िल ॥

प्रिथम बारणी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुकबि! लहि लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०७२॥

चौपई ॥

आदि बिआलणी सबद बखानहो ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

या मै भेद नैकु नही मानहो ॥१०७३॥

इ्मभणी आदि उचारन कीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के होवे ॥

जा को सकल सुकबि कुल जोवै ॥१०७४॥

प्रथम कु्मभणी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के जानहु ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

नितप्रति मुख ते पाठ करीजै ॥१०७५॥

अड़िल ॥

कुंजरणी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

अरि पद ता के अंत; बहुर कहि दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥१०७६॥

करिनी सबदि सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुकबि लहि लीजीऐ ॥

हो दीयो चहो जिह ठवर; तहा ही दीजीऐ ॥१०७७॥

मद्य धरननी मुख ते; आदि भनीजीऐ ॥

हंता ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर चित मै लहो ॥

हो कह्यो चहो इन जहा; तहा इन कौ कहो ॥१०७८॥

सिंधुरनी मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुकबि जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैक नही मानीऐ ॥१०७९॥

अनकपनी पद मुख ते; प्रिथम भणीजीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो दयो चहो जिह ठवरै; तही प्रमानीऐ ॥१०८०॥

प्रिथम नागनी मुख ते; सबद उचारीऐ ॥

सत्रु सबद कहु अंति; तवन के डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१०८१॥

हरिनी सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति प्रमानीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के; चतुर पछानीअउ ॥

हो जवनै ठवर सु चहीऐ; तही बखानीअउ ॥१०८२॥

गजनी सबद बकत्र ते; आदि भनीजीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥

चतुर तुपक के नाम; सकल लहि लीजीऐ ॥

हो जिह चाहो तिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥१०८३॥

चौपई ॥

सावजनी सबदादि बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

जिह ठां चहो तही ते कहीऐ ॥१०८४॥

मातंगनी पदादि भणिजै ॥

अरि पद अंति तवन के दिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के होवै ॥

जा को सकल सुकबि मिल जोवै ॥१०८५॥

आदि गइंदनि सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

जवनै ठवर रुचै तह कहीऐ ॥१०८६॥

द्रुम अरि आदि उचारन कीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥

या मै भेद न कछु जीअ जानो ॥१०८७॥

ब्रिछांतकणी आदि उचारो ॥

अरि पद अंति तवन के डारो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

दयो चहे जह ठां तह कहीऐ ॥१०८८॥

फलधर अरिणी आदि कहीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥

जहा चहो तिह ठवर बखानो ॥१०८९॥

फलदाइक अरिणी अहि उचरीऐ ॥

अरि पद अंति तवन के डरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥

या मै भेद न रंचक मानो ॥१०९०॥

अड़िल ॥

धराधरन अरिणी; सबदादि बखानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो जवन ठवर तिन चहो; तही ते दीजीऐ ॥१०९१॥

चौपई ॥

धूरिराट अरिणी पद भाखो ॥

ता के अंति सत्रु पद राखो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥

जह चाहो तिह ठवर प्रमानो ॥१०९२॥

फलध सबद को आदि उचारहु ॥

अरि पद अंति तवन के डारहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

जह चाहो तिह ठवर बखानहु ॥१०९३॥

फलि सबद को आदि भणिजै ॥

अरि पद कहि रिपु पद पुनि दिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

चहीऐ जहा, तही ते कहीऐ ॥१०९४॥

तरु अरिणी सबदादि बखानो ॥

अरि पद अंति तवन के ठानो ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद नैकु नही मानहु ॥१०९५॥

धरिस अरिणी सबदादि भणिजै ॥

अरि पद अंति तवन के दिजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या के बिखै भेद नही जानो ॥१०९६॥

बिरछरिणी सबदादि भणीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

नाम तुपक के सभ जीअ लहीऐ ॥

जिह चाहो, तिह ठवर सु कहीऐ ॥१०९७॥

रदनी आदि उचारन कीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥

जिह चाहो, तिह ठवर सु भनीजै ॥१०९८॥

रदनछंदनी अरिणी भाखो ॥

अरि पद अंति तवन के राखो ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद नैकु नही जानो ॥१०९९॥

अड़िल ॥

नाम सकल दंतन के; आदि बखानीऐ ॥

अरिणी अरि पद अंति; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो दीयो चहो जिह ठवर; तहा ही दीजीऐ ॥११००॥

चौपई ॥

न्रिपणी आदि बखानन कीजै ॥

अरि पद अंति तवन के दीजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद कछू नही जानो ॥११०१॥

आदि भूपनी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥

जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११०२॥

अड़िल ॥

प्रिथम सुआमनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११०३॥

आदि अधिपनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११०४॥

धरद्रिड़नी मुख ते; सबदादि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जी लीजीऐ ॥

हो सुघर! चहो जिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥११०५॥

आदि अधिपनी सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही प्रमानीऐ ॥११०६॥

पतिणी आदि बखान; सत्रुणी भाखीऐ ॥

होत तुपक के नाम; ह्रिदै मै राखीऐ ॥

इन के भीतर भेद; न नैकु पछानीऐ ॥

हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही प्रमानीऐ ॥११०७॥

चौपई ॥

भूपतिणी सबदादि बखानो ॥

अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

जवनै ठवर रुचै, तह कहीऐ ॥११०८॥

आदि भूपणी सबद बखानहु ॥

अरि पद अंति तवन के ठानहु ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥

जिह ठां रुचै, सु तही प्रमानो ॥११०९॥

अड़िल ॥

बधकरणी मुख ते; सबदादि उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो जवन ठवर रुचि होइ; तही ते दीजीऐ ॥१११०॥

किंकरणी सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; पछान प्रबीन चिति ॥

हो जिह चाहो इह नाम; देहु भीतर कबित ॥११११॥

चौपई ॥

अनुचरनी सबदादि उचरीऐ ॥

अरि पद अंति तवन के डरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

उचरो तहा ठवर जिह चहीऐ ॥१११२॥

अड़िल ॥

आदि अनुगनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

हननी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो जह जह सबद चहीजै; तह तह दीजीऐ ॥१११३॥

किंकरणी मुख ते; सबदादि उचारीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर जीअ जानि लै ॥

हो जवन ठवर मो चहो; तही ए सबद दै ॥१११४॥

दोहरा ॥

प्रतना आदि उचारि कै; अरि पद अंति उचार ॥

सभ स्री नाम तुफंग के; लीजै सुकबि! सु धार ॥१११५॥

धुजनी आदि बखानि कै; अरि पद भाखो अंति ॥

सभ स्री नाम तुफंग के; निकसत चलै अनंत ॥१११६॥

आदि बाहनी सबद कहि; अंत सत्रु पद दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजो समझ प्रबीन ॥१११७॥

कामि आदि सबदोचरि कै; अरि पद अंति सु देहु ॥

नाम तुपक के होत है; चीन चतुर! चिति लेहु ॥१११८॥

कामि आदि सबदोचरि कै; अरि पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥१११९॥

आदि बिरूथनि सबद कहि; अति सत्रु पद दीन ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ प्रबीन ॥११२०॥

सैना आदि बखानि कै; अरि पद अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान ॥११२१॥

धनुनी आदि बखानि कै; अरिणी अंति बखान ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहु समझ सुजान! ॥११२२॥

अड़िल ॥

आदि धनुखनी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; न नैकु प्रमानीऐ ॥११२३॥

कोवंडनी सबद को; आदि उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक को नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो जहा सबद ए चहो; तही ते दीजीऐ ॥११२४॥

चौपई ॥

इखुआसनी पदादि भनीजै ॥

अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥

सकल तुपक के नाम लहिजहि ॥

जह चाहो तिह ठवर भणिजहि ॥११२५॥

कारमुकनी सबदादि उचरीऐ ॥

अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

जह चाहो तिह ठवर बखानो ॥११२६॥

रिपु संतापनि आदि बखानो ॥

अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

या मै भेद नैकु नही कीजै ॥११२७॥

रिपु खंडणनी आदि भणिजै ॥

अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

जह तह मिलि सुघरुच! बखानो ॥११२८॥

दुसट दाहनी आदि भनीजै ॥

अरिणी सबद अंति तिह दीजै ॥

नाम तुपक के तुम लखि पावहु ॥

जह चाहो तिह ठवर बतावहु ॥११२९॥

रिपु घाइनी पदादि बखानो ॥

अरिणी सबद अंति तिह ठानो ॥

नाम तुपक के सकल लहीजै ॥

जउन ठवर चहीऐ तह दीजै ॥११३०॥

अड़िल ॥

आदि चापणी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो जहा चाहीऐ सबद; सु तह तह दीजीऐ ॥११३१॥

प्रतंचनी सबद को; आदि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कहो निसंक सभ ठउर; न गनती कीजीऐ ॥११३२॥

रूआमल छंद ॥

सत्रु भंजणि आदि बखान ॥

रिपु सबदु बहुरि प्रमान ॥

सभ नाम तुपक पछान ॥

नहि भेद या महि जान ॥११३३॥

चौपई ॥

हरि सकतणि पद आणि भणिजै ॥

अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥

नाम तुपक के सकल लहीजै ॥

जही ठवर चहीऐ तह दीजै ॥११३४॥

अड़िल ॥

बिसिख बरसणी आदि उचारण कीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंति सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥

हो काबि कबित के भीतर; सदा प्रमानीऐ ॥११३५॥

चौपई ॥

बान बरखणी आदि उचरीऐ ॥

अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११३६॥

अड़िल ॥

आदि बाननी सबदहि; अभूलि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

नाम तुपक के सकल; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो जह चाहो तह सबद; तही ते दीजीऐ ॥११३७॥

चौपई ॥

आदि पनचनी सबद बखानो ॥

मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

रुचि जै जही तही ते कहीऐ ॥११३८॥

कोवंडजनी आदि उचरीऐ ॥

मथनी अंति सबद तिह धरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

जहा रुचै, ते तही बखानहु ॥११३९॥

इखुआसजनी आदि भणीजै ॥

मथणी अंति सबद तिह दीजै ॥

सकल तुपक के नाम लहिजै ॥

जवन ठवर चहीऐ तह दिजै ॥११४०॥

अड़िल ॥

कारमुकजनी पद को प्रिथम उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम सुघर लहि लीजीऐ ॥

हो कबित काबि मै चहो तहा ते दीजीऐ ॥११४१॥

रिपु तापणी सबदहि आदि उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति सु पद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम सुबुधि पछानीऐ ॥

हो जहा चहो तह देहु; न संका मानीऐ ॥११४२॥

आदि चापणी मुख ते; सबद बखानीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुबुधि लहि लीजीऐ ॥

हो जह चाहो तिह ठवर; उचारन कीजीऐ ॥११४३॥

पनच धरननी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुबुधि पछानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही मानीऐ ॥११४४॥

चौपई ॥

आदि सुह्रिदणी सबद बखानो ॥

मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

जिह ठां रुचै, तही ते कहीऐ ॥११४५॥

अड़िल ॥

बलभणी सबदादि; बखानन कीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर चिति जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; न नैकु प्रमानीऐ ॥११४६॥

चौपई ॥

साखाइनणी आदि उचरीऐ ॥

अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥

जिह चहीऐ, तिह ठवर भणिजै ॥११४७॥

प्रीतमणी पद आदि बखानीऐ ॥

मथणी अंति तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै नैकु न मिथिआ जानो ॥११४८॥

अड़िल ॥

आदि सुजननी सबद; उचारन कीजीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुबुधि जीअ जानीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; तनक नही मानीऐ ॥११४९॥

प्रिथम सुहिरदिनी मुख ते; सबद उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; बहुरि पद डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर चित माझ लहु ॥

हो कबित काबि मै रुचै; तही ते नाम कहु ॥११५०॥

चौपई ॥

मानुखनी सबदादि भणीजै ॥

अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

चहो जहा सभ ठवर बखानहु ॥११५१॥

आदि मरतणी सबद बखानो ॥

अंतक सबद अंति तिह ठानो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥

जिह चाहो, तिह ठवर भणीजै ॥११५२॥

आदि मानुखनी सबद बखानो ॥

ता के मथणी अंति सु ठानो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥

जिह चाहो, तिह ठवर भणिजै ॥११५३॥

मानिखयनी पदादि भणीजै ॥

अंति सबद मथणी तिह दीजै ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥

रुचै जहा, तिह ठवर भणिजै ॥११५४॥

नरणी आदि उचारण कीजै ॥

अरिणी अंति सबद तिह दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥

या मै भेद, न नैकु प्रमानहु ॥११५५॥

मानवनी सबदादि भणिजै ॥

ता के अंति, सत्रु पद दिजै ॥

नाम तुपक के सकल लहीजै ॥

सभा मधि, बिनु संक कहीजै ॥११५६॥

अड़िल ॥

प्रिथीराटनी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो इन के कहत न संका; मन मै कीजीऐ ॥११५७॥

चौपई ॥

छितणीसणी पदादि भणिजै ॥

अरिणी पद को बहुरि कहिजै ॥

नाम तुपक के सकल बखानहु ॥

सकल सभा मै प्रगट प्रमानहु ॥११५८॥

छत्रिसणी सबदादि भणिजै ॥

अंति सबद मथणी तिह दिजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

या मै भेद नैकु नही जानहु ॥११५९॥

छमि इसणी सबदादि उचारो ॥

मथणी सबद अंति तिह डारो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजै ॥

सदा सुनत बुधिजनन भणीजै ॥११६०॥

रूआमल छंद ॥

धरतीसणि आदि बखान ॥

अरि सबद अंति प्रमान ॥

सभ चीन नाम तुफंग ॥

सभ ठवर भनहु निसंग ॥११६१॥

अड़िल ॥

धवल धरिसणी पद को; प्रिथम उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

अमित तुपक के नाम; चतुर! लहि लीजीऐ ॥

हो सकल बुधिजन सुनत; उचारन कीजीऐ ॥११६२॥

चौपई ॥

ब्रिखभ धरिसणी आदि बखानो ॥

अरि पद अंति तवन के ठानो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥

सकल सभा ते सुणत भणिजै ॥११६३॥

धावलेसणी आदि बखानो ॥

मथणी सबद अंति तिह ठानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानीऐ ॥

सकल बुधिजन सुनत बखानीऐ ॥११६४॥

अड़िल ॥

आदि धवलइसणी; सबदादि बखानीऐ ॥

ता के अरिणी अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥

हो गुनीजनन की सभा; उचारन कीजीऐ ॥११६५॥

प्रिथम ब्रिखभणीइसणी; सबद उचारीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चीन लै चतुर! चित ॥

हो काबि कथा मै दीजै; अउ भीतर कबित ॥११६६॥

गाविसइसणी सबदहि; आदि उचारीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीअहि ॥

हो कबित काबि के बीच; निडर हुइ दीजीअहि ॥११६७॥

भुविसणी पद प्रिथम; उचारन कीजीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद कहु दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥

हो जवन ठवर मै चहीऐ; तह ते दीजीऐ ॥११६८॥

चौपई ॥

उरविसणी सबदादि भणिजै ॥

मथणी अंति सबद तिह दिजै ॥

सकल तुपक के नाम लहिजहि ॥

सरब ठवर, बिनु संक भणिजहि ॥११६९॥

जगतीसणी पदादि बखानो ॥

अंति सबद मथणी तिह ठानो ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

या मै भेद रती न प्रमानहु ॥११७०॥

बसुमतेसणी आदि उचरीऐ ॥

अरिणी सबद अंति तिह धरीऐ ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजहि ॥

सभन सुनत बिनु संक भणिजहि ॥११७१॥

अड़िल ॥

बसुधेसणी सबद को; आदि उचारीऐ ॥

ता के मथणी अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर चित चीन लै ॥

हो जवन ठवर मै चहो; तही ते सबद दै ॥११७२॥

बैसुंधुराएसनी; आदि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

नाम तुपक के जान; चतुर जीअ लीजीअहि ॥

हो जवन ठवर मो चहो; तही ते दीजीअहि ॥११७३॥

बसुमतेसणी प्रिथम; सबद को भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; बहुरि पद राखीऐ ॥

नाम तुपक के चतुर; सकल जीअ जानीऐ ॥

हो जहा जहा चहीऐ; पद तही बखानीऐ ॥११७४॥

चौपई ॥

सामुंद्रणी एसणी कहीऐ ॥

अरिणी अंति सबद कहु गहीऐ ॥

नाम तुपक के लेहु सुजन जन ॥

अपने अपने बीच सकल मनि ॥११७५॥

सामुंद्रणीएसणी भाखो ॥

अरिणी सबद अंति तिह राखो ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥

सकल सुकबि जन! सुनत भणिजै ॥११७६॥

अचलाइसणी आदि भणिजै ॥

मथणी सबद अंति तिह दिजै ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

जवन ठवर चहीऐ, तह दीजै ॥११७७॥

विपलीसिणी पदादि उचारो ॥

अरिणी सबद अंति तिह धारो ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद न रंचक जानो ॥११७८॥

अड़िल ॥

आदि सागरा सबद; बखानन कीजीऐ ॥

एस दररनी अंति; तवन को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीअहि ॥

हो कबित काबि के बीच; चहो तह दीजीअहि ॥११७९॥

महाअरणवी सबदहि; आदि उचारीऐ ॥

पति मरदननीह अंति; सबद कहु डारीऐ ॥

नाम तुपक के सकल; जान जीय राखअहि ॥

हो सकल सुजन जन सुनत; निडर हुइ भाखीअहि ॥११८०॥

चौपई ॥

आदि सिंधुणी सबद भणीजै ॥

पति अरदनी पदांत कहीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहो ॥

सकल सुजन जन सुनते कहो ॥११८१॥

नीरालयनी आदि उचरो ॥

नाइक अरिणी पुनि पद धरो ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद रतीकु न जानो ॥११८२॥

आदि जलालयणी पद दिजै ॥

पति अरिणी पद बहुरि भणिजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

सकल सुजन जन सुनत बखानहु ॥११८३॥

बारिधणी सबदादि उचरीऐ ॥

पति अरि अंति सबद को धरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम कहीजै ॥

सकल गुनिजनन! सुनत भनीजै ॥११८४॥

धराएसणी आदि सबद कहि ॥

मथणी अंति तवन के पद गहि ॥

सकल तुपक के नाम लहिजै ॥

संक छोरि बिन संक भणिजै ॥११८५॥

लोरभरेसणी आदि उचरीऐ ॥

अंति सबद मथणी कहु धरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम पछानहु ॥

संक छोरि, बिनु संक बखानहु ॥११८६॥

गोरा आदि उचारन कीजै ॥

एस अंतकणी अंति भणीजै ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥

जहा रुचै, तिह ठवर प्रमानो ॥११८७॥

अवनेसणी पदादि कहीजै ॥

मथणी सबद अंति तिह दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

भै निवारि, निरभै हुइ कहीऐ ॥११८८॥

दिगजनी सबदादि भणिजै ॥

एसारदनी अंति कहिजै ॥

सकल सु नाम तुपक के चीनहु ॥

जह चाहो, तह कहो प्रीबनहु! ॥११८९॥

कु्मभिनेसनी आदि उचरीऐ ॥

अरिणी अंति सबद कहु धरीऐ ॥

सभै तुपक के नाम पछानो ॥

या महि झूठ नैक नही जानो ॥११९०॥

महिएसणी पदादि भणिजै ॥

अरिणी सबद अंति महि दिजै ॥

सकल तुपक के नाम कहीजै ॥

जह ही चहो, तही लै दीजै ॥११९१॥

मेदणेसणी आदि उचरीऐ ॥

घारी अंति सबद कहु धरीऐ ॥

नाम सु जान तुपक के सभ ही ॥

चाहो जहा, उचरहु तब ही ॥११९२॥

अड़िल ॥

बसुंधरेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

सबद दाहनी अंति; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥

हो प्रगट सभा के माझ; उचारन कीजीअहि ॥११९३॥

चौपई ॥

सुंधरेसणी आदि उचरीऐ ॥

मथणी अंति सबद को धरीऐ ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

अधिक गुनिजनन सुनत भनीजै ॥११९४॥

नराधिपणी आदि भणिजै ॥

मथणी पद को अंति धरिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

प्रगट सुकबि जन! सुनते कहीऐ ॥११९५॥

अड़िल ॥

मानुखेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

अतकनी सबदादि; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीऐ ॥

हो संका तिआग उचरीऐ; संक न मानीऐ ॥११९६॥

देसएसणी पद को; प्रिथम बखानीऐ ॥

अंति अरदनी सबद; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥

हो कबितु काबि के बीच; उचारन कीजीऐ ॥११९७॥

जनपदेसणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

अंति यंतकनी सबद; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीअहि ॥

हो चहीअहि ठवर जहा; सु तहा ते दीजीअहि ॥११९८॥

मानवेद्रणी पद को; प्रिथम बखानीऐ ॥

अंत यंतकनी पद को; बहुरि प्रमानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान तिह चित महि ॥

हो भूत भविख भवान; इसी कर मित महि ॥११९९॥

लोकएंद्रणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

ता के हरणी अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥

हो रैन दिवस सभ मुख ते; भाख्यो कीजीअहि ॥१२००॥

चौपई ॥

लोकराजनी आदि भणिजै ॥

अरिणी सबद अंति तिह दिजै ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

सासत्र सिम्रितन मांझ कहीजै ॥१२०१॥

देसेसनी रवणनी भाखो ॥

अंति अंतकनी सबदहि राखो ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

सुकबि जनन के सुनत भनीजै ॥१२०२॥

थिरा भाखि इसणी पुनि भाखो ॥

अंति अंतकनी पद कहु राखो ॥

सकल तुपक के नाम लहिजै ॥

सासत्र सिम्रितन माझ भणिजै ॥१२०३॥

अड़िल ॥

प्रिथम कासपी इसणी; सबद बखानीऐ ॥

अंत यंतकनी सबद; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥

हो संका तिआगि निसंक; उचारन कीजीऐ ॥१२०४॥

आदि नाम नागन के; प्रिथम बखानीऐ ॥

पितणी इसणी अंति; तवन के ठानीऐ ॥

बहुरि घातनी सबद; तवन के दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥१२०५॥

सरप तातणी इसणी; आदि उचारीऐ ॥

ता के मथणी अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥

हो सभ कबितन के बिखै; निडरु हुइ दीजीऐ ॥१२०६॥

इंदएंद्रणी आदि; उचारन कीजीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीअहि ॥

हो कबित काबि के माझ; निडर हुइ दीजीअहि ॥१२०७॥

चौपई ॥

देवदेवणी आदि उचरीऐ ॥

एसरांतकन पुनि पद धरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

संक तिआग, निरसंक हुइ कहीऐ ॥१२०८॥

अड़िल ॥

सक्रतात अरिणी; सबदादि बखानीऐ ॥

मथणी ताके अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; हीये पहिचानीऐ ॥

हो कथा बारता भीतर; निडर बखानीऐ ॥१२०९॥

सतक्रितेसणी इसणी; आदि उचारीऐ ॥

ता के अरिणी अंति; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥

हो सकल गुनिजनन! सुनत; उचारन कीजीऐ ॥१२१०॥

चौपई ॥

सचीपतिसणी इसणी भाखो ॥

मथणी सबद अंत को राखो ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

देस देस करि प्रगट भनीजै ॥१२११॥

अड़िल ॥

सकंद्रन तातणी; एसणी भाखीऐ ॥

मथणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥

नाम तुपक के चित मै; चतर पछानीऐ ॥

हो बिना कपट तिन लखो; न कपट प्रमानीऐ ॥१२१२॥

कऊसकेसणी इसणी; प्रिथम बखानि कै ॥

मथणी ता के अंत; सबद को ठानि कै ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर! पहिचानीऐ ॥

हो कहे हमारे बचन; सति करि मानीऐ ॥१२१३॥

चौपई ॥

बासवेसणी आदि भणिजै ॥

अंति सबद अरिणी तिह दिजै ॥

नाम तुपक के सभ जीय जानो ॥

संक तिआग निरसंक बखानो ॥१२१४॥

अड़िल ॥

बरहा इसणी अरिणी आदि बखानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम सु चित मै जानीऐ ॥

संक तिआगि निरसंक; उचारन कीजीऐ ॥

हो सति सु बचन हमारे; माने लीजीऐ ॥१२१५॥

दोहरा ॥

मघवेसरणी इसरणी; प्रिथमै पदहि उचार ॥

नाम तुपक के होत हैं; लीजै सुकबि सु धार ॥१२१६॥

मातलेसणी एसणी; मथणी अंति उचार ॥

नाम तुपक के होत है; लीजहि सुकबि! सु धार ॥१२१७॥

चौपई ॥

जिसनएसणी आदि भणिजै ॥

इसणी मथणी अंति कहिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

दीजै तवन ठवर जह चहीऐ ॥१२१८॥

अड़िल ॥

प्रिथम पुरंदर इसणी; सबद बखानीऐ ॥

इसणी मथणी पद को; बहुरि प्रमानीऐ ॥

नाम तुपक के सकल; जान जीय लीजीअहि ॥

हो संक तिआग निरसंक; उचारन कीजीअहि ॥१२१९॥

बज्रधरिसणी अरिणी; आदि उचारीऐ ॥

नाम तुपक के चित मै; चतुर बिचारीऐ ॥

संक तयाग निरसंक हुइ; सबद बखानीऐ ॥

हो किसी सुकबि की कान; न मन मै आनीऐ ॥१२२०॥

तुराखाड़ पितणी; इसणी पद भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; हीयै पहिचानीअहि ॥

हो चतुर सभा के बीच; निसंक बखानीअहि ॥१२२१॥

इंद्रेणी इंद्राणी; आदि बखानि कै ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानि कै ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीय लीजीऐ ॥

हो कबित काबि के बीच; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२२२॥

उचस्रिवाइस एस; एसणी भाखीऐ ॥

इसणी कहि कै; अरिणी पद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; अमित जीअ जानीऐ ॥

हो संक तिआग निरसंक हुइ; सदा बखानीऐ ॥१२२३॥

हयणी इसणी इसणी; इसणी भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो निडर सभा के माझ; उचारन कीजीऐ ॥१२२४॥

गाजराज राजननी; प्रभणी भाखीऐ ॥

मथणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; न नैकु हूं कीजीऐ ॥१२२५॥

अस्व एसणी इसणी; इसणि उचारीऐ ॥

ता के मथणी अंत; सबद को डारीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो संक तिआगि निरसंक; उचार्यो कीजीऐ ॥१२२६॥

बाहराज राजनणी; राजनि भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; हीये पहिचानीऐ ॥

हो कबित काबि के भीतर; प्रगट बखानीऐ ॥१२२७॥

तुरंग एसणी इसणी; प्रभणी प्रिथम कहि ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के बहुरि गहि ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो सकल गुनिजनन! सुनत; निसंक भणीजीऐ ॥१२२८॥

चौपई ॥

आइस पति पितणी पद कहीऐ ॥

इसणी अरिणी सबदहि लहीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के जनीऐ ॥

कबित काबि के भीतर भनीऐ ॥१२२९॥

अड़िल ॥

बाज राज के सभ ही; नाम बखानि कै ॥

प्रभणी पितणी इसणी; बहुरि पद ठानि कै ॥

अरिणी भाखि तुपक के; नाम पछानीऐ ॥

हो जवन सबद मै चहीऐ; तही बखानीऐ ॥१२३०॥

हसती एस प्रभ पितणी; ग्रभणी भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

नाम तुपक के सकल; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो जवन कवित मै चहो; सु पद तह दीजीऐ ॥१२३१॥

दंति राट प्रभ पित; सुतणी पद भाखि कै ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखि कै ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥

हो चहीऐ दीजीऐ जहा; न ब्रिथा बखानीऐ ॥१२३२॥

दुरद राट राटिसणी; इसणी भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कबित काबि के भीतर; उचर्यो कीजीऐ ॥१२३३॥

द्विपि इस इसणी मथणी; आदि भणीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; हिरदे महि जानीऐ ॥

हो चहो सबद तुम जहा; निडर तह ठानीऐ ॥१२३४॥

पदमी इस इसराटिन; आदि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर पहिचानीअहि ॥

हो कबित काबि माझ; निसंक बखानीअहि ॥१२३५॥

बारणेंद्र एंद्रणी; इंद्रणी आदि कहि ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को बहुर गहि ॥

सकल तुपक के नाम; सति कर जानीऐ ॥

हो संका त्यागि उचार; न संका मानीऐ ॥१२३६॥

ब्यालह पति पतणी पद; प्रिथम कहीजीऐ ॥

अरदन ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥

अमित तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीअहु ॥

हो जवन ठवर मै चहीऐ; तही बखानीअहु ॥१२३७॥

इ्मभसेसणी इसणी; इसणी भाखीऐ ॥

हंत्री ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कबित काबि के माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२३८॥

कु्मभीएस इस इसणी; आदि बखानीऐ ॥

इसणी अरिणी अंत; तवन के ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जान कर ॥

हो जो पूछै दीजीअहु तिह; तुरत बताइ कर ॥१२३९॥

कुंजरेस इस पितणी; प्रभणी भाखीऐ ॥

हंत्री ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कबित काबि के बीच; निसंक भणीजीऐ ॥१२४०॥

करीएंद्र इंद्रणी; इंद्रणी भाखीऐ ॥

पतिणी ता के अंति; सबद को राखीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; लेहु पछानि कै ॥

हो कबित काबि के बीच; दीजीअहु जानि कै ॥१२४१॥

तरु अरि प्रभु प्रभु प्रभणी; आदि बखानीऐ ॥

अरिणी ता के अंति; सबद को ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो जह जह चहीऐ सबद; तही ते दीजीऐ ॥१२४२॥

सउडिसइस इस इसणी; आदि बखानि कै ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को ठानि कै ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो या के भीतर भेद; नैकु नही कीजीऐ ॥१२४३॥

सिंधुरेस इस पित कहि; प्रभणी भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कबित दोहरन माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२४४॥

अनकपेंद्र इंद्रणी; इंद्रणी भाखीऐ ॥

इसणी अरिणी अंति; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो सुकबि! सभा के बीच; उचारन कीजीऐ ॥१२४५॥

नागिनाहि नाहि इसणि; एसणी भाखीऐ ॥

मथणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥

हो पुसतक पोथनि माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२४६॥

हरिपति पति पति पतिणी; आदि भणीजीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥

हो कबित काबि के माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२४७॥

चौपई ॥

गजपति न्रिपणी न्रिपणि भणिजै ॥

न्रिपणी अरिणी पुनि पद दिजै ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

दोहा माझ चउपई कहीऐ ॥१२४८॥

अड़िल ॥

सावज न्रिप न्रिप न्रिपति; न्रिपणनी भाखीऐ ॥

अरिणी ता के अंत; सबद को राखीऐ ॥

अमित तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो कबित काबि के माझ; उचार्यो कीजीऐ ॥१२४९॥

चौपई ॥

आदि सबद मातंग भणीजै ॥

चार बार न्रिप पद को दीजै ॥

अरिणी ता के अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१२५०॥

आदि गयंदन सबद उचरीऐ ॥

चार बार न्रिप सबदहि धरीऐ ॥

अरिणी सबद बहुरि तिह दिजै ॥

नाम तुपक के सभ लहि लिजै ॥१२५१॥

बाज सबद को प्रिथम भणीजै ॥

चार बार न्रिप सबद धरीजै ॥

सकल तुपक के नाम पछानो ॥

या मै भेद रतीकु न जानो ॥१२५२॥

बाह सबद को आदि उचरीऐ ॥

चार बार न्रिप सबदहि धरीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥

चहीऐ जिह ठां, तिह ठां कहीऐ ॥१२५३॥

तुरंग सबद को आदि उचारो ॥

चार बार न्रिप पद कहु डारो ॥

सकल तुपक के नाम लहीजै ॥

रुचै जहा, तिह ठवर भणीजै ॥१२५४॥

है पद मुख ते आदि बखानो ॥

चार बार न्रिप सबदहि ठानो ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥

कबित काबि के माझ भणिजै ॥१२५५॥

थरी सबद को आदि भणिजै ॥

चार बार न्रिप सबद कहिजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानो ॥

नाम तुपक के सकल पछानो ॥१२५६॥

देव सबद कहु आदि बखानहु ॥

न्रिप पद तीन बार पुनि ठानहु ॥

सत्रु सबद को बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥१२५७॥

अमर सबद कहु आदि उचारहु ॥

न्रिप पद तीन बार पुनि डारहु ॥

अरि कहि नाम तुपक के लीजै ॥

कबित काबि के भीतर दीजै ॥१२५८॥

न्रिजर सबद को आदि उचरीऐ ॥

न्रिप पद तीन बार पुनि धरीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के जानहु ॥

संक छाडि निरसंक बखानहु ॥१२५९॥

बिबुध सबद को आदि भणीजै ॥

तीन बार न्रिप सबद धरीजै ॥

रिपु कहि नाम तुपक के लहीअहि ॥

संका तिआगि सभा मै कहीअहि ॥१२६०॥

सुर पद आदि सबद को धारीऐ ॥

तीन बार न्रिप पद कहु डारीऐ ॥

अरि पद ता के अंति बखानो ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानो ॥१२६१॥

सुमन सबद को आदि बखानहु ॥

तीन बार नाइक पद ठानहु ॥

अरि पद ता के अंति भणिजै ॥

नाम तुपक के सकल लहिजै ॥१२६२॥

आदि सबद त्रिदिवेस बखानो ॥

तीन बार न्रिप पदहि प्रमानो ॥

अरि पद ता के अंति भनीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥१२६३॥

ब्रिंदारक सबदादि उचारहु ॥

तीन बार नाइक पद डारहु ॥

अरि पद अंति तवन के दीजो ॥

नाम तुपक के सभ लहि लीजो ॥१२६४॥

गति बिवान सबदादि बखाणहु ॥

तीन बार पति पदिहि प्रमाणहु ॥

अरि पद अंति तवन के कहीऐ ॥

सभ स्री नाम तुपक के लहीऐ ॥१२६५॥

अड़िल ॥

अम्रितेस सबदादि; उचारन कीजीऐ ॥

तीन बार पति सबद; तवन के दीजीऐ ॥

सत्रु सबद पुनि ता के; अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥१२६६॥

मधु पद मुख ते प्रिथमै; नीके भाखीऐ ॥

तीन बार पति सबद; तवन के राखीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥

हो जह जह चहीऐ सबद; निसंक बखानीऐ ॥१२६७॥

सुधा सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

न्रिप पद ता के अंति; बार त्रै दीजीऐ ॥

रिपु पद भाखि तुफंग नाम; जीअ जानीऐ ॥

हो सुकबि! चउपई माझ निसंक बखानीऐ ॥१२६८॥

सबद पयूख सु मुख ते; प्रिथम उचारीऐ ॥

तीन बार न्रिप सबद अंति तिह डारीऐ ॥

रिपु पद भाखि तुपक; नाम लहीजीऐ ॥

हो सुकबि! दोहरा माहि निडर हुइ दीजीऐ ॥१२६९॥

असुदा सबद सु मुख ते; आदि उचारि कै ॥

तीन बार न्रिप सबद; तवन के डारि कै ॥

रिपु कहि नाम तुपक के; चतुर बिचारीऐ ॥

हो छंद सोरठा माहि; निसंक उचारीऐ ॥१२७०॥

प्रिथम प्राणदा पद को; सुकबि! बखानीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदै पछानीऐ ॥

हो सुधनि सवैया भीतर; निडर बखानीऐ ॥१२७१॥

जीवदत पद प्रिथम; उचारन कीजीऐ ॥

चार बार न्रिप सबदहि; अंति भणीजीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदे पछान लै ॥

हो कही हमारी आज; ह्रिदे पहिचान लै ॥१२७२॥

चौपई ॥

बपुदा पद को प्रिथम उचारहु ॥

चार बार नाइक पद डारहु ॥

सत्रु सबद के बहुरि भणिजै ॥

नाम तुपक सभ लहि लिजै ॥१२७३॥

बहुरि देहदा सबद बखानो ॥

चार बार पति सबद प्रमानो ॥

अरि कहि नाम तुपक के लहीऐ ॥

झूला छंद बीचि हसि कहीऐ ॥१२७४॥

प्राणदत पद प्रिथम भणीजै ॥

चार बार न्रिप सबद धरीजै ॥

अरि पद ता के अंति बखानहु ॥

सभ स्री नाम तुपक के जानहु ॥१२७५॥

अड़िल ॥

जरा सबद कहु मुख सो; आदि बखानीऐ ॥

रिपु कहि न्रिप पद बार चार; फुन ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानि कै ॥

हो सकल तुपक के नाम; लीजीऐ जानि कै ॥१२७६॥

प्रिथम ब्रिधता सबद; उचारन कीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति भनीजीऐ ॥

बहुरि सत्रु पद तिह; उपरंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चित जानीऐ ॥१२७७॥

चौपई ॥

जरा सबद कहु आदि उचरीऐ ॥

हरि पद अंति तवन के धरीऐ ॥

अरि पद मुख ते बहुरि बखानै ॥

नाम तुपक के होइ प्रमानै ॥१२७८॥

अड़िल ॥

आलस सबद सु मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; सु हरि कहि ठानीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो छंद पाधड़ी माझ; निडर होइ दीजीऐ ॥१२७९॥

तरुन दंत पद मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

अरि कहि न्रिप पद बार चार; पुनि ठानीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; ह्रिदै बखानीअहि ॥

हो छंद रुआला बिखै; निडर हुइ ठानीअहि ॥१२८०॥

जोबनांत अंतक पद; प्रिथम उचारीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन पर डारीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥

हो छंद चउपई माहि; निसंक बखानीऐ ॥१२८१॥

तरुन दंत अरि सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥

चतुर बारि न्रिप सबद; तवन के राखीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीऐ ॥

हो सुधनि दोहरा माहि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२८२॥

जोबनारि अरि पद को; आदि बखानीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; तवन के भाखीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर चिति राखीऐ ॥१२८३॥

चतुरथ अवसथा अरि पद; आदि बखानीऐ ॥

चतुर बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥

सत्रु सबद को अंति; सु बहुरि बखानि कै ॥

हो सकल तुपक के नाम; लीजीऐ जानि कै ॥१२८४॥

जमपासी के नामन; आदि उचारीऐ ॥

हरि कहि न्रिप पद बार; चार फुनि डारीऐ ॥

सुकबि! तुपक के नाम; भाख अरि लीजीऐ ॥

हो सुधनि सवैया माझ; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२८५॥

अरबलारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

चार बार पति सबद; तवन के दीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; जान जीअ लीजीअहि ॥

हो छंद कुंडरीआ माहि; संक तजि दीजीअहि ॥१२८६॥

आरजारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

चार बार न्रिप पद को; बहुरि भणीजीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥

हो छंद झूलना माहि; निसंक बखानीऐ ॥१२८७॥

देहबासी अरि हरि पद; आदि भनीजीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; सु बहुरि कहीजीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर बिचारीऐ ॥

हो छंद अड़िल के माहि; निडर कहि डारीऐ ॥१२८८॥

बपुबासी अरि अरि; सबदादि बखानीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥

हो छंद चंचरीआ माहि; निसंक प्रमानीऐ ॥१२८९॥

तनबासी अर हरि को; आदि बखानि कै ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के ठानि नै ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछानीऐ ॥

हो करहु उचारन तहा जहा; जीअ जानीऐ ॥१२९०॥

असुर सबद को आदि; उचारन कीजीऐ ॥

पित कहि न्रिप पद; अंति तवन के दीजीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के चतुर पछानीऐ ॥

हो निडर बखानो तहा; जहा जीअ जानीऐ ॥१२९१॥

राछसारि पद मुख ते; आदि बखानीअहु ॥

चार बार पति सबद; तवन के ठानीअहु ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चित मै जान लै ॥

हो जो पूछै तुहि आइ; निसंक बताइ दै ॥१२९२॥

दानवारि पद मुख ते; सुघरि प्रिथम उचरि ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के अंति धरु ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर पछान लै ॥

हो सुकबि सभा के माझ; निडर हुइ राख दै ॥१२९३॥

अमरारदन अरि आदि; सुकबि! उचारि कै ॥

तीन बार न्रिप सबद; अंति तिह डारि कै ॥

अरि कहि नाम तुपक के; सकल सुधार लै ॥

हो पड़्यो चहत, तिह नर को; तुरत सिखाइ लै ॥१२९४॥

सक्र सबद कहु आदि; उचारन कीजीऐ ॥

अरि अरि कहि पति चार बार; पद दीजीऐ ॥

सत्रु सबद कहु; ता के अंति बखानीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; चतुर जीअ जानीऐ ॥१२९५॥

सत क्रित अरि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद तवन के दीजीऐ ॥

सत्रु सबद को; ता के अंति बखानि कै ॥

हो सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जानि कै ॥१२९६॥

सचीपतिरि अरि आदि; सबद कहु भाखीऐ ॥

चार बार न्रिप सबद; तवन के राखीऐ ॥

अरि कहि नाम तुपक के; चतुर! पछानीऐ ॥

हो छंद झूलना माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२९७॥

सक्ररदन अरि रिपु पद; आदि बखानि कै ॥

तीन बार न्रिप पद कहु; बहुरि प्रमानि कै ॥

सत्रु सबद कहि नाम; तुपक के जानीऐ ॥

हो झूला छंदन माझ; निसंक बखानीऐ ॥१२९८॥

आदि सबद पुरहूतरि; उचारन कीजीऐ ॥

अरि कहि पितणीस अरि पद; बहुरि भणीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर लहि लीजीऐ ॥

हो सुघर सोरठा माझि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१२९९॥

बासवारि अरि आदि; उचारन कीजीऐ ॥

पितणी इसणी अरिणी; अंति भणीजीऐ ॥

सकल तुपक के नाम; चतुर! जीअ जानीऐ ॥

हो छंद दोहरा माहि; निसंक बखानीऐ ॥१३००॥

आदि ब्रितहा अरि अरि; पदहि प्रमानि कै ॥

तीन बार इस सबद; तवन के ठानि कै ॥

रिपु पुनि ठान; तुपक के नाम पछान लै ॥

हो पड़ियो चाहत जो नर; तिह भेद बताइ दै ॥१३०१॥

मघवांतक अरि आदि; सबद को भाखीऐ ॥

तीन बार न्रिप पदहि; तवन के राखीऐ ॥

रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर लहीजीऐ ॥

हो कथा कीरतन माझि; निसंक भणीजीऐ ॥१३०२॥

मातलेस्र अरि सबदहि; आदि बखानि कै ॥

तीन बार न्रिप सबद; तवन के ठानि कै ॥

सत्रु सबद फुनि; ता के अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमत स्मभारीऐ ॥१३०३॥

जिसनांतक अंतक; सबदादि उचारीऐ ॥

तीन बार पद राज; तवन के डारीऐ ॥

अरि पुनि तवनै अंति; सबद के दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुघर लहि लीजीऐ ॥१३०४॥

पुरंद्रारि अरि आदि; सबद कहु भाखि कै ॥

तीन बार न्रिप पदहि; अंति तिह राखि कै ॥

बहुरि सत्रु पद अंति तवन के दीजीऐ ॥

हो सुघर तुपक के नाम; सदा लखि लीजीऐ ॥१३०५॥

चौपई ॥

बज्रधररि अरि पद आदि बखानहु ॥

तीन बार ईसर पद ठानहु ॥

अरि पुनि अंति बहुरि तिह दीजै ॥

सभ स्री नाम तुपक लहि लीजै ॥१३०६॥

अड़िल ॥

तुराखाड़ अरि अरि पद; आदि उचारीऐ ॥

तीन बार न्रिप पदहि; अंति तहि धारीऐ ॥

सत्रु बहुरि पुनि अंति; तवन के ठानि कै ॥

हो सकल तुपक के नाम; लीजीअहु जानि कै ॥१३०७॥

रिपु पाकरि रिपु सबद; अंति तिह भाखीऐ ॥

नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥

रिपु पुनि ता के अंति; सुघर कहि दीजीऐ ॥

हो नाम तुपक बहु चीन; उचारियो कीजीऐ ॥१३०८॥

इंद्रांतक अरि आदि; सबद को भाखीऐ ॥

नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥

सत्रु बहुरि पुनि ता के; अंति धरीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; जान मन लीजीऐ ॥१३०९॥

देव सबद को मुख ते; आदि बखानीऐ ॥

अरदन कहि अरदन पद; अंति प्रमानीऐ ॥

तीन बार पति सबद; तवन के भाखीऐ ॥

हो अरि कहि नाम तुपक के; मन लहि राखीऐ ॥१३१०॥

अमरा अरदन सबद; सु मुख ते भाखीऐ ॥

नाइक पद त्रै बार; तवन के राखीऐ ॥

रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर पछानीऐ ॥

हो भेदाभेद; कबित के माहि बखानीऐ ॥१३११॥

निरजरारि अरदन पद; प्रिथम उचारि कै ॥

तीन बार न्रिप सबद; तवन के डारि कै ॥

अरि कहि नाम तुपक के; सुघर लहीजीऐ ॥

हो अड़िल छंद के माहि; निडर हुइ दीजीऐ ॥१३१२॥

बिबुधांतक अंतक सबदादि; उचार कर ॥

तीन बार न्रिप सबद; तवन के डार कर ॥

रिपु कहि नाम तुपक के; सुघर बिचारीऐ ॥

हो छंद रुआला माझ; निसंक उचारीऐ ॥१३१३॥

सुपरबाण पर अरि पद; प्रिथम भणीजीऐ ॥

तीन बार पति सबद; तवन पर दीजीऐ ॥

अरि पद भाख तुपक के; नाम पछानीअहु ॥

हो छंद चंचरीआ माझ; निडर हुऐ ठानीअहु ॥१३१४॥

प्रिथम सबद त्रिदवेस; उचारन कीजीऐ ॥

अरि अरि कहि न्रिप पद; त्रै वार भणीजीऐ ॥

सत्रु सबद ता के पुनि; अंति उचारीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुबुधि बिचारीऐ ॥१३१५॥

ब्रिंदारक अरि अरि; सबदादि उचारजै ॥

तीन बार पति सबद; तवन के डारजै ॥

सत्रु सबद ता के; पुनि अंति भनीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमति लहि लीजीऐ ॥१३१६॥

सभ बिवान के नाम; भाखि गति भाखीऐ ॥

अरि अरि कहि न्रिप चार बार; पद राखीऐ ॥

बहुर सत्रु पुनि अंति; तवन के दीजीऐ ॥

हो सकल तुपक के नाम; सुमति लहि लीजीऐ ॥१३१७॥

आदि अगनि जिव पद को; सु पुनि बखानीऐ ॥

अरि अरि कहि न्रिप चार बार; पुनि ठानीऐ ॥

रिपु पद भाखि तुपक के; नाम पछानीऐ ॥

हो कबित काबि के माझि; निसंक प्रमानीऐ ॥१३१८॥

इति स्री नाम माला पुराण स्री तुपक नाम पांचवों धिआइ समापतम सत सुभम सतु ॥४॥