"कार्यालयी हिंदी/टिप्पण लेखन ( Noting)" के अवतरणों में अंतर

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७) '''शैली''':- टिप्पण लेखन में शैली की अपनी स्वतन्त्र सत्ता और महत्ता होती है। वैसे, प्रत्येक व्यक्ति की लेखन की अपनी एक विशिष्ट शैली होती है किन्तु इसके बावजूद, शैली के बारे कुछ सामान्य एवं सर्वमान्य बातों की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। एक बात विशेष ध्यान में रखी जानी चाहिए कि हिन्दी लेखन की शैली अंग्रेजी लेखन शैली से भिन्न होती है। अत: अंग्रेजी में सोचकर हिन्दी में अनुवाद के रूप में टिप्पण नहीं लिखा जाना चाहिए। जैसे-- Necessary action may kindly be taken at the earliest-- इसे हिन्दी में लिखते समय "कृपया तुरन्त आवश्यक कार्रवाई करें।" लिखा जाना चाहिए।
 
===संदर्भ===
 
१. प्रयोजनमूलक हिन्दी: सिध्दान्त और प्रयोग--- दंगल झाल्टे। पृष्ठ-- १६२-१६५

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