विषय चर्चा:समाज

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मानव एवं मानवता के विषय मानव स्वभाव के संदर्भ में[सम्पादन]

मानव सभ्यता और मानवता के विषय में प्रत्येक समाज साथियों के अलग-अलग विचार हैं कई समाजों में अलग अलग समाज पाए जाते हैं लेकिन मानवता मानव स्वभाव पर निर्भर करती है आधुनिक युग में मानवता जैसी विषय वस्तु अपना अस्तित्व खो चुकी है हमने अनेक प्रयोग किए हैं जिसमें कई समाजों में हमने देखा है कि मानव मानव के प्रति मानवता का दृष्टिकोण नहीं रखता उसमें छल कपट एवं देश की भावना आ जाती है और यह कानून व्यवस्था मानव को मानव से मानवता से दूर कर रहा है दुर्घटना जैसे समय में भी मानव मानव की सेवा करने से अपने आपको बताता है कि कहीं कानून के लफड़े में ना पड़ जाए यह एक विचारणीय प्रश्न है कि एक व्यक्ति जख्मी हालत में तड़प रहा है और वही से हजारों की संख्या में लोग गुजरते हैं लेकिन मदद के लिए कोई नहीं जाता ऐसी मानव सभ्यता का विकास हो रहा है यह आदिम समाज से भी बदतर समाज की ओर मानव बढ़ रहा है आज का मानव व्यर्थ के सुख शांति पाने की खोज में लूट के व्यवसाय में लगा हुआ है अखिलेश मानव (वार्ता) १४:४५, ९ दिसम्बर २०१७ (UTC)