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सदस्य:Amol52

विकिपुस्तक से
अवनी गान


जय माँ जय माँ जय माँ अवनी
शशि सुरज तारागण भावनी

सूर्य वैभव है शुभ्र किरण
चन्द्र शीत है छाया रमण

उत्तर-दक्षिण द्रुव है मेंख
उदय-अस्त मध्य रवि है रेख

सप्त समुद्र हिमगिर शुभ गंग
नैसर्गिक झील खाड़ी बंग

सर्वत्र है नदियों के जाल
यत्र-तत्र है सुगिर के टाल

जय माँ जय माँ जय माँ अवनी
शशि सुरज तारागण भावनी

कालबध्द सह ऋतु परिवर्तन
भौतिकीय मौसम आवर्तन

जगह-जगह जल वायु के माप
तदनुसार भूतल के स्वताप

प्राकृत पशु-पक्षी-जीव अंश
जलचर कीट मानवीय वंश

तू है सर्व ब्रम्हाण्ड सहयोग
जीवारत है प्राकृत संयोग

जय माँ जय माँ जय माँ अवनी
शशि सुरज तारागण भावनी

जीवन कवच परत है छाता
मंडल रश्मि छनन है आता

गुरुत्वाकर्षण है भू-मंडल
स्पर्धा है जीवरत मंडल

वायु-दाव-ताप का है सुखेल
जल-थल का है अपना वर मेल

प्राकृत सन्देश है बादल
समुद्र उद्देश है सरित जल

जय माँ जय माँ जय माँ अवनी
शशि सुरज तारागण भावनी


©2012 राखेस तारण