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सदस्य:Mr.pawan

विकिपुस्तक से

पवन मल्ल : के बारे में

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मैं अपने बारे में ज्यादा तो नहीं जानता हु लेकिन इतना जरूर जानता हु की मुझे अपने आप पर काफी नाज हैं जिसे आजकल शायद लोग घमंड की संज्ञा देते हैं पर मैं ऐसा नहीं मानता हु. मुझे नाज हैं अपने आप पर की मैंने जो चाहा मैंने वो ही किया चाहे बेशक मैं उस कार्य में असफल भी हुआ हु लेकिन जो भी किया मुझे उसपर नाज हैं की मैंने शान से किया. और अपनी असफलताओ से काफी कुछ सीखा और जाना अपने आप को......

पवन मल्ल

पवन मल्ल : सोच

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एक बहुत ही छोटे से शहर गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाला एक साधारण सा नौजवान युवक हु जो की मेरी जन्मभूमि हैं लेकिन होश मैंने दिल्ली जैसे महानगर में ही संभाला हैं. मेरी शिक्षा मेरा भरण पोषण दिल्ली में ही हुआ हैं पर ना जाने क्यों मेरा मन हमेशा से ही अपने छोटे से गाँव में ही कहीं गुम सा रहता हैं. ऐसा नहीं की मेरा मन नहीं लगता हैं हैं यहाँ बल्कि मेरे सारे अच्छे दोस्त बंधू परिवार यही हैं और तो और मेरी कर्म भूमि भी यही हैं और मुझे यहाँ से काफी कुछ मिला भी हैं और काफी कुछ मैंने यहाँ गवाया भी हैं लेकिन फिर भी मेरी एक तमन्ना हैं की मैं अपना बाकी का बचा हुआ जीवन अपने गाँव में ही गुजार पाऊ क्योंकि मुझे अपनी उस माटी से प्यार हैं जिसमे असली भारतवर्ष बसता हैं पर तमन्ना और वास्तविकता में बहुत अंतर हैं वास्तविकता ये हैं की अब मेरी कर्मभूमि दिल्ली ही हैं और तमन्ना हमेशा ये ही रहेगी की काश ...........


मैं एक बार फिर से अपने माटी में जन्म लू और सिर्फ वही का बन के रहू.
ना जाने क्या सोचा हैं नियति ने लेकिन जो भी सोचा होगा वो अच्छा ही सोचा होगा.