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सदस्य:Writer shaitan Singh

विकिपुस्तक से

गुर्जर समाज की गोत्र कोली दायमा इस वंश का प्राचीन इतिहास गुजरात क्षेत्र से राजस्थान भीनमाल हिंडोली तक इस राजवंश ने राज किया है। कोली गोत्र की कुलदेवी मां रोहड़ा देवी हैं जिनका वर्तमान में मन्दिर हिंडोली, पिंसागन अजमेर के पास गांव पगारा में व गांव रोहड़ा में भी मन्दिर बना हुआ है इस वंश से सतिया देवलिया देवल नसीराबाद लेरा गांव में मोजुद हैं इस कुल में महाराज कर्ण का जन्म हुआ था चालुक्य राजवंश अथवा सोलंकी वंश से ही है कोली दायमा धामा कुराच बोकन कटारिया गोत्र इस तरह अलग अलग गोत्र में प्रचलित हुआ