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सदस्य वार्ता:Writer shaitan Singh

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गुर्जर समाज की मावता अमावता गोत्र का इतिहास

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प्राचीन गुर्जर इतिहास मावता गोत्र के गुर्जरों द्वारा बसाया गया सुमेल यहां मावता गुर्जरों का राज रहा है अभी भी वर्तमान में भगवान श्री देवनारायण जी का प्राचीन मंदिर बना हुआ है सुमेल फोर्ट के पिछे पहाड़ पर बना हुआ है देवनारायण जी का चबूतरा यहां मावता गुर्जरों को इनके वंश की कुलदेवी ने श्राप दिया था कि जो भी मावता सुमेल से सुर्य उदय की और जाएगा उसकी बैल परिवार बढ़ेगा और जो सुमेल से सुर्य अस्त होने की और जाएगा उसका परिवार में बैल परिवार घटेगा आज भी सुमेल में मावता गुर्जर अन्न जल ग्रहण नहीं करते हैं और नहीं सुमेल में निवास करते हैं गुर्जरों ने अपनी जगह जागीरी मेड़तिया राठौड़ राजपूतों को देकर सुमेल से बाहर चले गए आज वर्तमान में मेड़तिया राठौड़ राजपूतों का सुमेल फोर्ट में निवास है सुमेल में राव जैता जी कुंपा जी व कहीं महापुरुषों की छतरियां बनीं हुई है यहां शेरशाह सूरी को युद्ध में पराजित किया था राव जैता कुंपा जी ने इनका बलिदान दिवस 5 जनवरी को मनाया जाता है यहां सुमेल में चारभुजा नाथ जी मन्दिर प्राचीन बावड़ियां प्राचीन वृक्ष प्राचीन मंदिर बनें हुए हैं यहां सभी जाति धर्म के लोगों द्वारा सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज का मेला भव्य भरा जाता है पास ही में ग्राम छछियारो का बाडिया के जंगलों में एक प्राचीन तिरलोकी माता का स्थान भी है तिरलोकी माता के भक्त रावत राजपूत, गुर्जर समाज के छछियार व कोली गुर्जरों की देवी मां के रूप में जानी जाती हैं ग्राम पंचायत सुमेल वर्तमान जिला ब्यावर राजस्थान में है 2401:4900:7D7D:F7E2:9EB1:CE73:BFE2:94EB १७:२३, १६ अप्रैल २०२५ (UTC)उत्तर दें

कोली गोत्र के गुर्जरों का इतिहास

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कोली गुर्जरों का इतिहास गौरवशाली रहा है इस वंश की कुलदेवी मां रोहड़ा माता है जिनके वर्तमान में मन्दिर हिंडोली पगारा अजमेर के पास,व गांव रोहड़ा में मन्दिर बना हुआ है प्राचीन मंदिर हिंडोली में है इस वंश के कुलदेवता झुंझार सतिया के देवल देवलिया नसीराबाद के गांव लेरा में बने हुए हैं। वर्तमान में कोली गुर्जरो‌ के गांव राजस्थान मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश दिल्ली सभी प्रदेशों में बसे हुए हैं इन्हें कहीं दायमा कहते हैं कहीं धामा भी लेकिन मुख्य प्राचीन गोत्र कोली कहते हैं 2401:4900:7D7D:F7E2:9EB1:CE73:BFE2:94EB १७:३७, १६ अप्रैल २०२५ (UTC)उत्तर दें