सामान्य अध्ययन२०१९/अंतरराष्ट्रीय संबंध

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  • दोहरे कराधान (Double Taxation) को समाप्त करने तथा वित्तीय चोरी रोकने के लिये भारत और ब्राज़ील के बीच दोहरे कराधान अपवंचन समझौते में संशोधन को मंज़ूरी दी है। भारत और ब्राज़ील के बीच वर्तमान दोहरा कराधान अपवंचन समझौता 26 अप्रैल 1988 को हस्ताक्षरित हुआ था।

भारत में आयकर अधिनियम की धारा 90 द्विपक्षीय कर राहत से संबंधित है। इस धारा के अंतर्गत भारत सरकार दूसरे देशों की सरकारों के साथ दोहरे कराधान की समस्या से निपटने के लिये समझौते करती है। 15 अक्तूबर, 2013 को सूचना आदान-प्रदान करने के संबंध में एक प्रोटोकॉल द्वारा इस समझौते को संशोधित किया गया था।

  • ब्रिक्स देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा ब्रिक्स दूरसंवेदी आभासी उपग्रह नक्षत्र (BRICS Remote Sensing Vietual Satellite Constellation) के निर्माण पर सहयोग विकसित करने के लिये सहमति व्यक्त की गई है।

ब्रिक्स दूरसंवेदी आभासी उपग्रह समूह फोरम का पहला आयोजन वर्ष 2017 में ब्राज़ील में किया गया था। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना तथा ब्रिक्स देशों के लिये उपग्रह अवलोकन की दक्षता में सुधार करने हेतु संसाधनों को साझा करना है। इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा:

  1. आभासी उपग्रह समूह
  2. वास्तविक उपग्रह समूह

इसका उद्देश्य उपग्रह रिमोट सेंसिंग डेटा तक पहुँच प्राप्त करना है। इसका उपयोग ब्रिक्स देशों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न अनुप्रयोगों के लिये किया जा सकता है।

  • आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में जहाज़रानी मंत्रालय द्वारा पहले ‘बिम्‍सटेक बंदरगाह’ सम्मेलन (BIMSTEC Port Conclave) का उद्घाटन किया गया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य आयात-निर्यात तथा तटीय जहाज़रानी को प्रोत्‍साहित कर आर्थिक सहयोग बढ़ाने की संभावना को तलाशना है। BIMSTEC के सभी सात सदस्‍य देशों के साथ-साथ व्यापार और विभिन्न जहाज़रानी संघों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लिया। सम्‍मेलन के दौरान पाँच सत्र हुए- पहले सत्र का उद्देश्य बंदरगाहों पर आधारित ‘औद्योगिक और पर्यटन विकास’ के क्षेत्र को प्रोत्साहित करना तथा बंदरगाहों के नज़दीक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर चर्चा करना था। दूसरे सत्र का उद्देश्य- विस्तार आपूर्ति शृंखलाओं और उपलब्ध समाधानों की पृष्ठभूमि में बंदरगाहों तथा टर्मिनलों की उभरती भूमिका पर चर्चा करना था। तीसरे सत्र का उद्देश्य सुरक्षा खतरों पर चर्चा करना था तथा इस सत्र का विषय (Theme) ‘सुरक्षित और संरक्षित बंदरगाह’ थी। चौथा सत्र ‘पोर्ट्स सर्विसेज़: डिलीवरिंग वैल्यू’ (Ports Services: Delivering Value) पर आधारित था जिसका उद्देश्‍य कारोबारी सुगमता के लिये उठाये गए विभिन्‍न कदमों पर चर्चा हेतु एक मंच प्रदान करना है। अंतिम सत्र 'ग्रीन पोर्ट ऑपरेशंस' अर्थात् पर्यावरण अनुकूल बंदरगाह संचालन पर आधारित था। बिम्‍सटेक बिम्‍सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र और आसपास के सात देश (भारत, बांग्‍लादेश, म्‍याँमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान, नेपाल) शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय एकता का प्रतिनिधित्‍व करता है। बिम्सटेक का उद्देश्य क्षेत्रीय संसाधनों और भौगोलिक लाभ का उपयोग करके आम हित के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग से व्यापार में तेज़ी लाना तथा विकास को गति देना है।

वर्किंग हॉलिडे मेकर' वीज़ा कार्यक्रम Australia to extend its backpacker work visa scheme to Indians हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भारत सहित एक दर्जन से अधिक देशों में 'वर्किंग हॉलिडे मेकर' (Working Holiday Maker) वीज़ा कार्यक्रम का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इस वीज़ा का उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्षेत्रों, मुख्यतः कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की भर्ती करना है ताकि श्रमिकों की कमी की समस्या को हल किया जा सके। 'वर्किंग हॉलिडे मेकर' कार्यक्रम एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य युवा यात्रियों को अपने अवकाश के दौरान अल्पकालिक रोज़गार के माध्यम से पैसा कमाने का अवसर प्रदान करना है। इसी के साथ यह कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। इस कार्यक्रम के तहत आवेदन करने वाले युवाओं को कुछ न्यूनतम अर्हताएँ पूरी करनी होंगी: आवेदकों को अंग्रेजी का न्यूनतम ज्ञान होना चाहिये वे या तो स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त कर रहे हों या कर चुके हों

भारत और RCEP देश[सम्पादन]

  • भारत और थाईलैंड के रानोंग बंदरगाह (Ranong Port) के बीच आर्थिक सहयोग के लिये समझौते को अंतिम रूप दिया गया है।

रानोंग बंदरगाह भारत और थाईलैंड के बीच नए समुद्री मार्ग को बढ़ावा देने के लिये पोर्ट अथॉरिटी ऑफ थाईलैंड (Port Authority Of Thailand- PAT) रानोंग पोर्ट को लॉजिस्टिक गेटवे के रूप में विकसित कर रहा है। इसके साथ ही भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री यात्रा का समय 10-15 दिन से घटकर 7 दिन रह जाएगा।

वर्तमान में मालवाहक जहाज़, मलेशिया के रास्ते होते हुए कृष्णापट्टनम बंदरगाह से चोन बुरी (Chon Buri) में चबांग बंदरगाह (Chabang Port) और बैंकॉक के बैंकॉक बंदरगाह तक की यात्रा करते हैं।

इस समुद्री मार्ग के विकसित हो जाने से रानोंग बंदरगाह भारतीय वस्तुओं के लिये मुख्य प्रवेश बिंदु बनने की क्षमता रखता है। समकालीन संदर्भ में भारत की एक्ट ईस्ट ’नीति (Act East Policy) की थाईलैंड की’ लुक वेस्ट ’नीति (Look West Policy) द्वारा सराहना की जाती रही है जिससे दोनों देशों के बीच गहरा, मज़बूत और बहुमुखी रिश्ता बन गया है। थाईलैंड के पश्चिमी तट पर स्थित बंदरगाह (रानोंग बंदरगाह) और भारत के पूर्वी तट के बंदरगाहों, जैसे- चेन्नई, विशाखापत्तनम तथा कोलकाता के बीच सीधी कनेक्टिविटी से दोनों देशों के मध्य आर्थिक साझेदारी मज़बूत होगी।

  • अभ्यास TSENTR 2019 में पाकिस्तान, चीन तथा अन्य देशों की सेनाओं के साथ भारत भी हिस्सा लेगा।

इसका संचालन रूस के केंद्रीय सैन्य आयोग द्वारा किया जाएगा। मेज़बान रूस के अलावा, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, पाकिस्तान तथा उज्बेकिस्तान के सैन्य दल भी इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। रूस के ऑरेनबर्ग के डोंगुज प्रशिक्षण रेंज (Donguz Training Ranges) में 9-23 सितंबर तक यह अभ्यास किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य भाग लेने वाली सेनाओं के रणनीतिक समन्वय को विकसित करना तथा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका प्रयोग करना है। इस अभ्यास के माध्यम से मध्य एशियाई क्षेत्र में सैन्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

भारत और जापान[सम्पादन]

अहमदाबाद तथा कोबे(जापान)‘जुड़वाँ शहर’ (Sister Cities)

  • इसका उद्देश्य दोनों शहरों के बीच व्यापार,शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों में अवसरों को बढ़ावा देना है।
  • दोनों शहरों के साथ-साथ भारत-जापान के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने में भी सहयोगी होगा।
  • भारत और जापान के प्रधानमंत्री ने नवंबर 2016 में गुजरात और ह्योगो प्रान्त के बीच भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु समझौता किया था।
  • यह समझौता शिक्षाविदों, व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गुजरात और ह्योगो के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने तथा व्यापार एवं पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये ‘जुड़वाँ शहर’की अवधारणा की कल्पना की गई।
  • वर्ष 2013 में भारत ने चीन के साथ जुड़वाँ शहर समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे जो निम्नलिखित हैं- दिल्ली-बीजिंग, बेंगलुरु-चेंगदू और कोलकाता-कुनमिंग।

श्रीलंका ने भारत और जापान के साथ गहरे समुद्री क्षेत्र कंटेनर टर्मिनल विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। तीनों देश संयुक्त रूप से कोलंबो बंदरगाह पर ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का निर्माण करेंगे। श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार, कोलंबो बंदरगाह के ट्रांसशिपमेंट कारोबार (बड़े जहाज़ों से छोटे जहाज़ों में माल का परिवहन) का करीब 70 प्रतिशत भारत से संबंधित है, जबकि जापान 1980 से बंदरगाह कंटेनर टर्मिनल के निर्माण में सहयोग कर रहा है। श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण के पास ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का 100 प्रतिशत स्वामित्व है। ईस्ट कंटेनर टर्मिनल से होने वाले सभी परिचालनों का संचालन करने वाली टर्मिनल ऑपरेशंस कंपनी में श्रीलंका सरकार और अन्य की संयुक्त हिस्सेदारी है। ऐसे में हिंद महासागर के केंद्र के रूप में श्रीलंका का विकास और उसके बंदरगाहों का खुलना बहुत महत्त्व रखता है। कोलंबो बंदरगाह इस क्षेत्र का प्रमुख बंदरगाह है। यह संयुक्त परियोजना तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और बेहतर संबंधों को दर्शाती है।

भारत-न्यूजीलैंड[सम्पादन]

न्यूज़ीलैंड ने भारत के लिये कार्य-वीजा नियमों को आसान करने का आश्वासन दिया है, लेकिन इसके बदले वह अपने डेयरी, शराब और सेब जैसे उत्पादों की भारतीय बाज़ारों तक पहुँच चाहता है। न्यूजीलैंड क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP) संधि के हिस्से के रूप में भारत में अपने डेयरी उत्पादों, सेब, कीवी और शराब के लिये अधिक-से-अधिक बाज़ार पहुँच चाहता है। भारतीय कृषि मंत्रालय अधिकांश RCEP सदस्यों के लिये डेयरी क्षेत्र के उदारीकरण के पक्ष में नहीं है।

भारत और एशियाई देशों के मध्य संबंध[सम्पादन]

  • अक्टूबर 2019 को मालदीव के माले में ‘हिंद महासागरीय सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया में नियुक्त अमेरिकी राजदूत ने दक्षिणी चीन सागर द्वारा चीन में कृत्रिम द्वीप समूहों का निर्माण करने और उनका सैन्यीकरण करने पर चीन की भर्त्सना की है। चीन ने इस निंदा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि नान्शा अर्थात् स्प्रेटली द्वीपसमूह पर चीन की निर्विवाद संप्रभुता है।
चीन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले का खंडन करते हुए कहा है कि दक्षिण चीन सागर विवाद पर चीन फिलीपींस से कोई भी बात करने को तैयार नहीं है।
हिंद महासागरीय सम्मेलन(Indian Ocean Conference)2019 का आयोजन इंडिया फाउंडेशन द्वारा मालदीव सरकार के सहयोग से किया गया। इसका विषय ‘हिंदमहासागरीय क्षेत्र की सुरक्षा: परंपरागत और अपरंपरागत चुनौतियाँ’ थी। इस दौरान समुद्री पारिस्थितिकी, आतंकवाद और नौपरिवहन सुरक्षा आदि बिंदुओं पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
समुद्री कानून के लिये अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरणInternational Tribunal for the law of the sea (ITLoS)/मुख्यालय-हैम्बर्ग (जर्मनी)

(क) अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के पश्चात् 16 नवंबर, 1924 को इसकी स्थापना की गई। (ख) Law of the Sea Convention or Law of the Sea Treaty or United Nation Convention on the Law of the Sea (UNCLOS)- नामक अंतर्राष्ट्रीय समझौता तृतीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान किया गया। (ग) यह समझौता विश्व के विभिन्न देशों को यह निर्देश देता है कि वह अपने महासागरीय जल, पर्यावरणीय एवं समुद्री संसाधनों आदि के उपयोग के संबंध में विभिन्न राष्ट्रों को उनके अधिकारों और कर्त्तव्यों का बोध कराएँ। संयुक्त राष्ट्र के साथ संबद्ध यह एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय है।

दक्षिणी चीन सागर के सीमावर्ती राज्य- चीन का जनवादी गणराज्य,चीन गणराज्य (ताइवान) फिलीपींस, मलेशिया,ब्रेुनेई,इडोनेशिया,सिंगापुर और वियतनाम है।

यह पूर्वी चीन सागर के साथ ताइवान जलसंधि द्वारा तथा फिलीपींस सागर के साथ लूजॉन जलसंधि द्वारा जुड़ा है। इनमें पैरोकल द्वीपसमूह, स्प्रेटली द्वीपसमूह और स्कारबोरो शाल आदि महत्त्वपूर्ण है।

  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (CHGs) की 18वीं बैठक उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित की गई। इस प्रकार की बैठक में भारत की यह तीसरी भागीदारी थी।
पहली बैठक नवंबर-दिसंबर 2017 में रूस के सोची नगर में हुई थी और दूसरी बार की बैठक 2018 में ताजिकिस्तान के दुशांबे शहर में हुई थी।

भारत के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय रक्षा मंत्री ने इसमें हिस्सा लिया।

  • भारत वर्ष 2019 में फिलीपींस के साथ राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगाँठ मना रहा है।

भारत का फिलीपींस के साथ एक सकारात्मक व्यापार संतुलन है। भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने 19 अक्तूबर, 2019 को मनीला, फिलीपींस में भारत-फिलीपींस व्यापार सम्मेलन (India-Philippines Business Conclave) तथा 4th आसियान-भारत व्यापार सम्मेलन (4th ASEAN- India Business Summit) को संबोधित किया।

  • 8 दिसंबर,2019 को सार्क के 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री ने एक समृद्ध व शांतिपूर्ण दक्षिण एशिया के उभार की संभावनाओं पर चर्चा की।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की स्थापना 8 दिसंबर,1985 को ढाका में सार्क चार्टर पर हस्ताक्षर के साथ की गई थी। मालदीव,भारत,भूटान,पाकिस्तान,नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका सार्क के संस्थापक सदस्य हैं जिन्होंने इसकी स्थापना के लिये इस चार्टर पर हस्ताक्षर किये। सार्क को प्राय: दक्षेस भी कहा जाता है और इसका मुख्यालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में है।

वर्ष 2007 में अफगानिस्तान सार्क का आठवाँ सदस्य देश बना।

आमतौर पर सार्क शिखर सम्मेलन का द्विवार्षिक आयोजन सदस्य देशों द्वारा अंग्रेजी वर्णमाला क्रम में किया जाता है। शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने वाले सदस्य को उस वर्ष संगठन का अध्यक्ष माना जाता है। अंतिम सार्क सम्मेलन का आयोजन वर्ष 2014 में काठमांडू में किया गया था।

वर्ष 2016 में सार्क सम्मेलन का आयोजन इस्लामाबाद में होना था लेकिन उसी वर्ष 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के एक शिविर पर आतंकवादी हमले के बाद भारत ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने से मना कर दिया था ।

बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान द्वारा भी इस्लामाबाद की बैठक में भाग लेने से मना करने के बाद यह शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया गया था। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों द्वारा इस क्षेत्र में की जा रही सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र पिछले तीन वर्षों से भारत सार्क से दूर हट रहा है।

  • व्लादिवोस्तोक रूस के प्रशांत तट (Pacific Coast) पर स्थित सबसे बड़ा बंदरगाह है। इसके अलावा यह प्रसिद्ध ट्रांस साइबेरियन रेलवे (Trans Siberian Railway), जो कि रूस के सुदूर पूर्व को रूस की राजधानी मॉस्को (Moscow) और पश्चिम में यूरोप के देशों से जोड़ता है, का अंतिम स्टेशन भी है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान भारत के चेन्नई और रूस के व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) के बीच समुद्री मार्ग बनाने के लिये मेमोरेंडम ऑफ इंटेंट (Memorandum of Intent) पर हस्ताक्षर किये गए हैं।

  • हाल ही में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने नई दिल्‍ली में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिये विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की क्षेत्रीय समिति की 72वीं बैठक (72nd Session of the WHO Regional Committee for South-East Asia) का उद्घाटन किया।

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिये विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की क्षेत्रीय समिति की 72वीं बैठक का सर्वसम्‍मति से अध्‍यक्ष चुना गया। यह दूसरा मौका है जब भारत क्षेत्रीय समिति की बैठक का आयोजन कर रहा है।

  • इंडोनेशिया ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरा करने के उपलक्ष्य में रामायण की थीम पर विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस डाक टिकट का डिज़ाइन इंडोनेशिया के जाने-माने मूर्तिकार पद्मश्री बपक न्योमन नुआर्ता ने तैयार किया है। इस पर रामायण की वह घटना अंकित है, जिसमें सीता को बचाने के लिये जटायु बहादुरी से लड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। भारत-इंडोनेशिया के राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरा होने के अवसर पर दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान 1949 से 2019 तक भारत और इंडोनेशिया के संबंधों से जुड़े ऐतिहासिक पलों को तस्वीरों के माध्यम से दिखाया गया।
श्रीलंका ने भारत और जापान के साथ गहरे समुद्री क्षेत्र कंटेनर टर्मिनल विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। तीनों देश संयुक्त रूप से कोलंबो बंदरगाह पर ईस्ट कंटेनर टर्मिनल का निर्माण करेंगे।
  • ऑपरेशन संकल्प भारतीय नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में प्रारंभ किया गया।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा से संबंधित हालिया घटनाओं को देखते हुए शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में मौजूद और वहाँ से गुजरने वाले भारतीय पोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

INS चेन्नई और INS सुनयना को समुद्री सुरक्षा अभियान के लिये ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में तैनात किया गया है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के विमान क्षेत्र में हवाई निगरानी भी की जा रही है।

  • रणनीतिक आर्थिक वार्ता (SED) की स्थापना, दिसंबर 2010 में चीनी प्रधानमंत्री, वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के दौरान पूर्ववर्ती योजना आयोग और चीन के राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (National Development and Reform Commission-NDRC) द्वारा की गई।

भारतीय पक्ष में नीति आयोग (पूर्व में योजना आयोग) और चीनी पक्ष में राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (NDRC) SED तंत्र का नेतृत्व करते हैं, जिसमें दोनों देशों की राजधानी में बारी-बारी से एक वार्षिक वार्ता का आयोजन किया जाता है। नवंबर 2012 में नई दिल्ली में आयोजित किये गए दूसरे SED में, नीति समन्वय, अवसंरचना, पर्यावरण, ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी पर 5 स्थायी संयुक्त कार्यदलों का गठन करने का निर्णय लिया गया था ताकि SED के अंतर्गत इन क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत किया जा सके। पाँचवें SED के बाद फॉर्मास्यूटिकल्स पर छठे संयुक्त कार्य समूह का भी गठन किया गया है। अतः कथन 2 सही है।

भारत और चीन[सम्पादन]

  • आँसू गैस-जिनेवा प्रोटोकॉल 1925:- अमेरिका ने हाॅन्गकाॅन्ग में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर एक विधेयक पारित किया है जो कुछ भीड़-नियंत्रण संबंधी सामानों जैसे-आँसू गैस आदि के निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगा।

आँसू गैस (Tear Gas) एक रासायनिक संघटक है जिसका इस्तेमाल अक्सर दंगा नियंत्रण के लिये किया जाता है। यह एक विषैली गैस है। आँसू गैस के रूप में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाला पदार्थ सिंथेटिक कार्बनिक हैलोजन यौगिक हैं। इसे औपचारिक रूप से एक लैक्रिमेट्री एजेंट (Lacrimatory Agent) या लैक्रिमेटर (Lacrimator) के रूप में जाना जाता है यह आंखों में कॉर्निया की नसों को उत्तेजित कर देता है जिससे आँखों में आँसू, दर्द और यहाँ तक ​​कि अंधापन भी हो सकता है। पहली बार इसका प्रयोग प्रथम विश्व युद्ध में रासायनिक हथियार के रुप में किया गया था।

वर्ष 1925 का जिनेवा प्रोटोकॉल युद्ध में रासायनिक और जैविक हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। यह प्रोटोकॉल 8 फरवरी,1928 को लागू हुआ था।
  • एक चीन सिद्धांत (One China Principle) के अनुसार,ताइवान कोई स्वतंत्र देश नहीं बल्कि चीन का ही एक प्रदेश है इसलिये यदि कोई देश ताइवान के साथ राजनीतिक संबंध बनाता है तो उसे चीन के साथ राजनीतिक संबंध समाप्त करने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त चीन यह मानता है कि एक दिन वह ताइवान का चीन में विलय कर लेगा।
वर्तमान में विश्व केवल 16 देश ही एक चीन सिद्धांत (One China Principle) का समर्थन नहीं करते हैं और ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता प्रदान करते हैं। इन 16 देशों में से 5 प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देश शामिल हैं। इन द्वीपीय देशों में से सोलोमन ने हाल ही में एक चीन सिद्धांत (One China Principle) का समर्थन कर दिया है। भारत एक चीन सिद्धांत (One China Principle) का समर्थन करता है अतः वह ताइवान को अलग देश के रूप में मान्यता नही प्रदान करता है।
  • दोनों देेशों ने अधिक संतुलित व्यापार को बढ़ावा देकर बाज़ार पहुँच के मुद्दों को तेज़ी से हल करने पर सहमति जताई है। इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच हुई बैठक के अंत में भारत से चीन तक मिर्च खली (Chilli Meal) के निर्यात के लिये एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गए। दोनों पक्षों ने कृषि उत्पादों को मंज़ूरी के भारतीय अनुरोधों सहित व्यापार से जुड़े मामलों पर विचार -विमर्श किया।भारत देश में विनिर्मित और कृषि उत्पादों के लिये चीन में अधिक बाजार पहुँच की मांग कर रहा है ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके। हाल ही में भारत ने 380 उत्पादों की सूची चीन के साथ साझा की थी। इनमें बागवानी, वस्त्र, रसायन और फार्मा उत्पाद शामिल हैं

भारत सरकार द्वारा नेपाल के लिये बनाई गई जयनगर-कुर्था ब्रॉडगेज पर रेल सेवा शुरू करने के लिये भारत का कोंकण रेलवे नेपाल को दो DEMU ट्रेन एवं आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति करेगा। पाँच कोचों वाले दोनों DEMU ट्रेन सेटों की लागत करीब 50 करोड़ रुपए है और इनका निर्माण तमिलनाडु के चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया जाएगा। 1600 हॉर्स पावर वाले प्रत्येक ट्रेन सेट में एक ड्राइविंग पावर कार, एक वातानुकूलित के साथ तीन ट्रेलर कार, मानक सामान के साथ एक ड्राइविंग ट्रेलर कार शामिल होगी। भारत-नेपाल विकास साझेदारी कार्यक्रम के तहत भारतीय वित्तीय अनुदान के साथ IRCON (भारत सरकार का उपक्रम) द्वारा 34 किलोमीटर जयनगर-कुर्था रेलवे लिंक बनाया गया है।
एशिया सहयोग वार्ता (ACD) की 16वीं मंत्रिस्तरीय बैठक दोहा, कतर में आयोजित की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता विदेश राज्यमंत्री वी.के. सिंह ने बैठक में पार्टनर्स इन प्रोग्रेस विषय पर ज़ोर देते हुए सभी ACD सदस्य राज्यों के साथ ‘सामूहिक प्रयासों, समावेशी विकास’ के दृष्टिकोण के अनुरूप सहयोगी रूप से काम करने की भारत की इच्छा को रेखांकित किया।
बीजिंग में आयोजित‘बेल्ट एंड रोड फोरम की दूसरी बैठक’ (Belt and Road Forum-BRF)में विश्व के विभिन्न देंशो ने भाग लिया।चीन ने बेल्ट एंड रोड परियोजना सूची से बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (Bangladesh-China-India-Myanmar) आर्थिक गलियारे को हटा दिया है।भारत ने बेल्ट एंड रोड फोरम की इस बैठक में भाग नहीं लिया। पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे (Pakistan-China Economic Corridor- CPEC) की तरह BCIM आर्थिक गलियारा भारत, बांग्लादेश, चीन एवं म्याँमार के बीच रेल एवं सड़क संपर्क परियोजना थी, जिसके तहत भारत के कोलकाता, चीन के कुनमिंग, म्याँमार के मंडाले और बांग्लादेश के ढाका और चटगाँव को आपस में जोड़ा जाना था।

  • वन बेल्ट वन रोड परियोजना 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई थी।

इसे ‘सिल्क रोड इकॉनमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी की समुद्री सिल्क रोड (वन बेल्ट, वन रोड) के रूप में भी जाना जाता है। यह एक विकास रणनीति है जो कनेक्टिविटी पर केंद्रित है। इसके माध्यम से सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ज़मीन एवं समुद्र होते हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने का विचार है। हालाँकि इसका एक उद्देश्य यह भी है कि इसके द्वारा चीन वैश्विक स्तर पर अपना प्रभुत्व बनाना चाहता है।

भारत और यूरोपिय देशों के मध्य संबंध[सम्पादन]

नौसैनिक युद्ध-अभ्यास का छ्ठा संस्करण भारतीय वायु सेना ने फ्राँस द्वारा आयोजित द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास गरुड़ के छठे संस्करण में भाग लिया।

इस युद्धाभ्‍यास का उद्देश्य हवाई रक्षा और ज़मीनी हमले संबंधी अभियानों में फ्रांसीसी और भारतीय चालक दल के मध्य अंतर-सक्रियता को बढ़ावा देना है। यह युद्धाभ्‍यास दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग का हिस्सा है। गरुड़ अभ्यास वैकल्पिक रूप से फ्राँस और भारत में आयोजित किया जाता है। भारतीय वायुसेना की इस युद्धाभ्‍यास में भागीदारी से फ्रांसीसी वायुसेना के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के अलावा पेशेवर बातचीत, अनुभवों के विनिमय और परिचालन संबंधी ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा।



भारत-ब्रिटेन नौसेना सहयोग भारत और ब्रिटेन द्वारा एक नए अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के लिये बातचीत की जा रही है।इसे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में ब्रिटेन की एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ (HMS Queen Elizabeth) की तर्ज पर बनाया जाएगा। भारतीय नौसेना ने 65,000 टन के युद्धपोत एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ की विस्तृत योजना को खरीदने और 2022 में ‘आईएनएस विशाल’ नामक एक नया संस्करण बनाने की इच्छा जाहिर की है। इस विमान वाहक के डिज़ाइन पर ब्रिटिश और फ्राँसीसी एयरोस्पेस बीएई और थेल्स (BAE and Thales) का स्वामित्व है। भारतीय नौसेना और स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये ब्रिटेन के इस विमान वाहक के डिज़ाइन में संशोधन किया जाएगा। यह विमान वाहक भारत के INS विक्रमादित्य (जिसे 2004 में रूस से खरीदा गया) और निर्माणाधीन INS विक्रांत के साथ काम करेगा और भारतीय नौसेना को मज़बूती प्रदान करेगा।

भारत और अमेरिका[सम्पादन]

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को 13 एमके-45 (MK- 45) नौसैनिक बंदूकें और संबंधित उपकरणों की बिक्री किये जाने के समझौते को मंज़ूरी दी है।

MK-45 नौसैनिक बंदूक का इस्तेमाल तटों पर बमबारी,युद्धपोतों तथा युद्धक विमानों के खिलाफ किया जाता है। इनका निर्माण बीएइ सिस्टम्स लैंड एंड आर्मामेंट्स (BAE Systems Land and Armaments) द्वारा किया जाएगा। इसकी मारक क्षमता 20 समुद्री मील से भी अधिक है। ऑस्ट्रेलिया,जापान,दक्षिण कोरिया और थाईलैंड के बाद भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। जिन्हें अमेरिका ने इस बंदूक के नवीनतम संस्करण (MOD4) बेचने का फैसला किया है।

  • भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के ‘संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास 2019’ के 15वें संस्‍करण का आयोजन 5-18 सितंबर, 2019 तक वाशिंगटन में किया जाना है।

दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किये जाने वाले इस युद्ध अभ्‍यास को इस बार ज्‍वाइंट बेस लुईस मैक कॉर्ड, वाशिंगटन (Joint Base Lewis Mc Chord, Washington, USA) में किया जाएगा। यह भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा संयुक्‍त सैन्‍य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग है। यह युद्ध अभ्‍यास दोनों देशों के सशस्‍त्र बलों को ब्रिग्रेड स्‍तर पर संयुक्‍त नियोजन के साथ बटालियन स्‍तर पर एकीकृत रूप से प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करेगा। संगठनात्‍मक ढाँचे और युद्ध प्रक्रियाओं को समझने के लिये इस संयुक्‍त अभ्‍यास के दौरान विविध कार्रवाइयाँ की जाएंगी। इससे दोनों देशों के सशस्‍त्र बलों के बीच अंतर-संचालन में सहायता मिलेगी और अप्रत्‍याशित स्थिति से निपटा जा सकेगा।

  • राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियमअमेरिकी सीनेट ने वित्तीय वर्ष 2020 के लिये पारित इस अधिनियम में रक्षा सहयोग को बढ़ावा देते हुए भारत को अमेरिका के नाटो सहयोगियों, इज़रायल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के समान दर्ज़ा प्रदान किया है।

इस अधिनियम में मानवीय सहायता, आतंकवाद, समुद्री डकैती और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में हिंद महासागर में अमेरिकी-भारत रक्षा सहयोग बढ़ावा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। यह विधेयक अमेरिकी कॉन्ग्रेस के दोनों सदनों, अर्थात् प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) द्वारा पारित हो जाने के बाद कानून में परिवर्तित हो जाएगा। नाटो सहयोगी का दर्जा मिलने से भारत एवं अमेरिका के बीच अत्याधुनिक अमेरिकी सैन्य तकनीक का आदान-प्रदान भी आसन हो जाएगा। अमेरिका पहले ही भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 (Strategic Trade Authorization, STA Tier-1) का दर्जा दे चुका है, STA एक ऐसा कदम है जो उच्च प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान को सुलभ बनाता है तथा दोनों देशों के बीच संबंधो को मज़बूत बनाता है। अमेरिका वर्ष 2016 में भारत को "प्रमुख रक्षा साझेदार" के रूप में भी नामित कर चुका है।

अमेरिका ने वापस लिये भारत के GSP लाभ[सम्पादन]

  • अमेरिका ने सामान्‍य प्राथमिकता प्रणाली (Generalized System of Preferences- GSP) के तहत भारतीय उत्पादों को शुल्क में मिलने वाली छूट आगे और जारी न रखने का एलान किया है। यह छूट 5 जून,2019 से समाप्त हो जाएगी।
  • GSP विकसित देशों (प्राथमिकता देने वाले या दाता देश) द्वारा विकासशील देशों (प्राथमिकता प्राप्तकर्त्ता या लाभार्थी देश) के लिये विस्तारित एक अधिमान्य प्रणाली है।
  • वर्ष 1974 के ट्रेड एक्ट (Trade Act) के तहत वर्ष 1976 में शुरू की गई।भारत सहित 121 देशों को शामिल। GSP व्यवस्था के अंतर्गत विकासशील देशों को अमेरिका को निर्यात की गई कुछ सूचीबद्ध वस्तुओं पर करों से छूट मिलती है।
  • GSP अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी व्यापार तरजीही (Business preferential) योजना है, जिसका उद्देश्य हज़ारों उत्पादों को आयात शुल्क में छूट देकर विकासशील देशों को आर्थिक विकास में मदद करना है।
  • नामित लाभार्थी विकासशील देशों के लगभग 30-40 प्रतिशत उत्पादों के लिये वरीयता शुल्क मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। भारत भी एक लाभार्थी विकासशील देश है।

ऑस्ट्रेलिया, बेलारूस, कनाडा,यूरोपीय संघ,आइसलैंड,जापान,कज़ाखस्तान,न्यूज़ीलैंड,नॉर्वे,रूसी संघ,स्विट्ज़रलैंड,तुर्की और अमेरिका GSP को प्राथमिकता देने वाले देशों में प्रमुख हैं। भारत और GSP

  1. भारत GSP का सबसे बड़ा लाभार्थी है, जिसे वर्ष 2017-18 में 19 करोड़ डॉलर का फायदा हुआ था।
  2. GSP के तहत भारत ने 5.6 अरब डॉलर का निर्यात किया था,जो कुल निर्यात का 11% है।
  3. GSP के तहत 3700 उत्पादों को छूट मिली हुई है, परंतु भारत केवल 1900 उत्पादों का निर्यात करता है।

अमेरिका की चिंताएँ

  • भारत को होने वाले GSP लाभों के तहत अमेरिका प्रतिवर्ष 190 मिलियन डॉलर की कर छूट दे रहा था। लेकिन भारत को अपने यहाँ से निर्यात होने वाले स्टेंट जैसे कुछ मेडिकल उपकरणों को लेकर वह समय-समय पर चिंताएँ जाहिर करता रहा है। भारत सैद्धांतिक रूप से मेडिकल उपकरणों के बारे में अमेरिका की चिंताओं को हल करने के लिये तैयार था।
  • इसी प्रकार दुग्‍ध उत्‍पादों की बाज़ार पहुँच से जुड़े मुद्दों पर भारत ने स्‍पष्‍ट किया कि इनके लिये यह प्रमाणित होना आवश्यक है कि स्रोत पशुधन को अन्‍य पशुधन से प्राप्‍त रक्‍ताहार कभी नहीं दिया गया है। यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए है और इसके बारे में कोई वार्ता संभव नहीं है।
  • अल्फाफा, चैरी और पोर्क जैसे उत्‍पादों के बारे में अमेरिकी बाज़ार पहुँच के अनुरोधों की स्‍वीकार्यता से अवगत कराया गया था। भारत ने स्‍पष्‍टत: अमेरिका के हितों से जुड़ी विशेष वस्तुओं पर कर में रियायत देने की इच्‍छा से अवगत कराया।
  • गौरतलब है कि तेल और प्राकृतिक गैस तथा कोयला जैसे सामानों की खरीद बढ़ने से भारत के साथ अमेरिकी व्‍यापार घाटे में वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में काफी कमी हुई है। वर्ष 2018 में 4 बिलियन डॉलर से अधिक कमी का अनुमान है।
  • भारत में ऊर्जा और विमानों की बढ़ती मांग जैसे घटकों के परिणामस्‍वरूप भविष्‍य में इसमें और भी कमी होने का अनुमान है। अरबों डॉल्रर के राजस्‍व वाली अमेरिकी सेवाओं और एमेज़न/अमेज़न, उबर, गूगल तथा फेसबुक आदि जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिये भी भारत एक महत्त्वपूर्ण बाज़ार है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के वीज़ा आवेदन में सोशल मीडिया का विवरण देना अनिवार्य[सम्पादन]

  • नए नियमों के तहत अब आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट का नाम और उसके पाँच सालों के रिकॉर्ड की जानकारी जमा करवानी होगी। साथ ही उसे अपना ईमेल अड्रेस और फोन नंबर भी देना होगा। अमेरिकी ग्रह मंत्रालय द्वारा इन नियमों को लाने का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों और अन्य खतरनाक लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना है।
  • अमेरिका में पढ़ाई करने और नौकरी के लिये वीज़ा का आवेदन करने वाले लोगों पर भी यह नियम लागू ।
  • आधिकारिक और राजनयिक वीज़ा के लिये किये जाने आवेदनों को इन नियमों में शामिल नहींं किया जाएगा।
  • सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने वाले आवेदकों के पास यह विकल्प उपलब्ध होगा,जिसमें वे यह बता सकें कि वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं।
  • इन नियमों के तहत अस्थायी आगंतुकों समेत सभी वीज़ा आवेदकों को अन्य जानकारियों के साथ-साथ एक ड्रॉप डाउन मेनू (Drop-Down Menu) में अपने सोशल मीडिया पहचानकर्त्ताओं को भी सूचीबद्ध करना होगा। अभी तक इस ड्राप डाउन मेनू में केवल बड़ी सोशल मीडिया वेबसाइटों की जानकारी शामिल थी, लेकिन अब इसमें आवेदकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सभी वेबसाइटों की जानकारी देने की सुविधा दी जाएगी।
  • हालाँकि गलत जानकारी दिये जाने के संबंध में गंभीर आव्रजन परिणाम (Serious Immigration Consequences) भी भुगतने पड़ सकते है।

भारत पर प्रभाव प्रत्येक वर्ष भारत से बड़ी संख्या में लोग शिक्षा एवं नौकरी की तलाश में अमेरिका जाते हैं, नए नियमों से लगभग 10 से 12 लाख भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की संभावना हैं।


अमेरिका के बोइंग उत्पादन केंद्र में 10 मई को प्रथम AH-64E(I)-अपाचे गार्जियन हेलीकॉप्टर औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना को सौंप दिया गया।
एक संयुक्त पनडुब्बी-भेदी अभ्यास हिंद महासागर में दोनों देशों की नौसेनाओं द्वारा किया गया। इसका उद्देश्य समुद्री गश्त और टोही अभियानों में समन्वय का आधार तैयार करना था। भारत और अमेरिका के P-8 पनडुब्बी-भेदी विमानों ने गाइडेड मिसाइल विध्वंसक USS स्प्रुएंस के साथ इस युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया। इस युद्धाभ्यास में तमिलनाडु के अरक्कोणम में नौसेना केंद्र रजाली में स्थित नेवल एयर स्क्वाड्रन 312 के भारतीय विमान P-8I नेपच्यून ने फ्लोरिडा के जैक्सनविले में स्थित पेट्रोल स्कवाड्रन VP-8A फाइटिंग टाइगर्स के US P-8A पोसीडॉन विमान के साथ हिस्सा लिया।
27 मार्च को भारत और अमेरिका के बीच अंतर-सरकारी एग्रीमेंट (Inter-Governmental Agreement)समझौताइसपर हस्ताक्षर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष श्री पी.सी. मोदी और अमेरिकी राजदूत ने किया।दोनों देशों के बीच कंट्री-बाइ-कंट्री (CbC) रिपोर्टों का आदान-प्रदान सुगमता से हो सकेगा।देनों देशों में मौजूद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।[१]

इसके साथ द्विपक्षीय सक्षम प्राधिकरण की व्यवस्था भी भारत-अमेरिका के बीच लागू हो जाएगी। यह समझौता 1 जनवरी, 2016 को या उसके बाद संबंधित न्यायालयों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अंतिम मूल संस्थाओं द्वारा दायर CbC रिपोर्टों पर लागू होगा।ट्रांसफर प्राइसिंग डॉक्यूमेंटेशन और CbC रिपोर्टिंग, बहुराष्ट्रीय उद्यमों (MNEs) को सालाना रिपोर्ट दायर करने तथा प्रत्येक कर-क्षेत्र के लिये एक रूपरेखा प्रदान करती है। इसमें वे व्यापार की जानकारी साझा करते हैं। कर मामलों पर दोनों देशों के बीच पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (एफएटीसीए) को लागू करने हेतू इस प्रकार के समझौते 2015 में भी हुए थे।Foreign Account Tax Compliance Act (FATCA)[२]

भारत और अफ्रीका संबंध[सम्पादन]

  • भारत ने मलावीमें भारत-अफ्रीका कृषि और ग्रामीण विकास संस्थान (IAIARD) की स्थापना के लिये नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट कंसल्टेंसी सर्विस (NABCONS) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता अफ्रीकी देशों के साथ कृषि-वित्तपोषण और उद्यमिता विकास के क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के भारत के प्रयासों का एक हिस्सा है। IAIARD एक पैन-अफ्रीकी संस्थान होगा जिसमें न केवल मलावी बल्कि अन्य अफ्रीकी देशों के प्रशिक्षु अपने देश में मानव संसाधन को विकसित करने और अपनी क्षमता का निर्माण करने के लिये प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। फैकल्टी पर पूरा खर्च, अन्य अफ्रीकी देशों के छात्रों के लिये यात्रा, लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग कोर्स का खर्च भारत सरकार द्वारा शुरुआती तीन साल की अवधि के लिये वहन किया जाएगा। यह संस्थान भारत द्वारा स्थापित किया जाने वाला किसी अफ्रीकी देश में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा।[३]
  • वर्ष 1962 में स्थापित अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (AARDO)का मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें अफ्रीका और एशिया के 33 देश शामिल हैं।

भारत इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक है और सदस्यता योगदान के मामले में सबसे बड़ा भागीदार है।

  • नेपाल निवेश शिखर सम्मेलन-2019 के दौरान नेपाल ने भारत को पनबिजली, सड़क एवं राजमार्ग और होटल उद्योग क्षेत्रों में निवेश के लिये आमंत्रित किया है। नेपाल निवेश बोर्ड (IBN) के अनुसार, उनके देश में सड़क एवं राजमार्ग, पनबिजली इत्यादि क्षेत्रों में व्यापक कारोबारी संभावनाएँ मौजूद हैं।IBN प्रधानमंत्री खड़ग प्रसाद ओली की अध्यक्षता वाला नेपाल की एक उच्चस्तरीय एजेंसी है,जिसका मुख्य लक्ष्य निवेश अनुकूल माहौल तैयार कर नेपाल का आर्थिक विकास करना और इसके लिये घरेलू तथा विदेशी निवेश आकर्षित करना है।
  • तीन देशों क्रोएशिया,बोलीविया और चिली की यात्रा के अंतिम चरण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद चिली की राजधानी सेंटियागो पहुँचे। इस दौरान उन्होंने चिली में अपने समकक्ष सेबेस्टियन पिनेरा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी हुई। इसके बाद दोनों देशों ने खनन, संस्कृति व अन्य क्षेत्र में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये।दोनों देश सभी तरह के आतंकवाद से लड़ने और उसे समाप्त करने की दिशा में वैश्विक कार्रवाई को मजबूत करने के लिये एक साथ काम करने को सहमत हुए।सैंटियागो में प्लाजा डे ला इंडिया में महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और रबींद्र नाथ टैगोर की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। राष्ट्रपति कोविंद चिली की यात्रा करने वाले भारत के तीसरे राष्ट्रपति हैं।[४]
  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच इसी वर्ष फरवरी में स्टार्टअप सहयोग पर हुए समझौते को भारत सरकार ने मंज़ूरी दे दी है। भारत में एक कोरिया स्टार्टअप सेंटर की स्थापना करना है ताकि स्टार्टअप कंपनियों के विचार, तकनीक और डिज़ाइन का वाणिज्यीकरण किया जा सके।[५]
  • मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के लिये भारत और इंडोनेशिया मिलकर काम करने पर सहमत हो गए हैं। भारत ने 37 देशों के साथ ऐसी संधियों/सहमति पत्रों/समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। इस सहमति पत्र के तहत सहयोग के रूप में मादक पदार्थों, नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी और इनकी आवाजाही से निपटने में दोनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों के मौजूदा वैधानिक प्रावधानों पर आधारित विवरण का आदान-प्रदान किया जाएगा।
  • लांगकावी अंतर्राष्ट्रीय मैरीटाईम एयरो एक्सपो (LIMA-2019) 26 मार्च से 30 मार्च, 2019 तक मलेशिया के लांगकावी में आयोजित किया जाना है।[६]
  • भारतीय वायुसेना पहली बार मैरीटाइम एयरो एक्सपो में भाग ले रही है। इस दौरान अपने देश में विकसित एलसीए युद्धक विमान को प्रदर्शित किया जाएगा।
  • भारतीय वायुसेना की टीम वायुसेना स्टेशन कलईकुंडा से 22 मार्च, 2019 को रवाना हुई। यह टीम म्यामाँर (यांगून) होते हुए लांगकावी जाएगी।
  • दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच निकट संपर्क कायम हो सकेगा।यह भविष्य में मलेशियाई वायुसेनाRMAF के साथ किसी प्रकार के संपर्क के लिये एक आधार के रूप में काम करेगा। इससे RMAF को भी एलसीए की क्षमताओं को परखने का एक अवसर मिलेगा।[७]
  • भारतीय वायुसेना की खेप में 2 एलसीए, 1 सी-130जे और 1 आईएल-76 के साथ 27 अधिकारी, 42 वायुसैनिक और 11 एचएएल कार्मिक शामिल हैं।

भारत और डेनमार्क के बीच अपतटीय पवन ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता हुआ। साथ ही भारत में भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिन्यूअबल एनर्जी की स्थापना पर भी सहमति जताई गई। इस सहयोग समझौते का उद्देश्य अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्यान देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। सहयोग के क्षेत्रों में अपतटीय पवन परियोजनाओं के प्रबंधन के लिये तकनीकी क्षमता विकसित करना, विंड पवन टर्बाइन, कलपुर्जे और अनुमान लगाना व समय-सारणी बनाना आदि शामिल हैं। भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्सिलेंस नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के मूल्यांकन का काम करेगा। इसके अतिरिक्त यह केंद्र पवन, सौर, जल-विद्युत और भंडारण तकनीक को आपस में जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा को उच्च स्तर के पवन ऊर्जा से एकीकृत करने, जाँच और अनुसंधान तथा कौशल विकास व क्षमता निर्माण करने पर भी विशेष ध्यान देगा।

  • भारत और कम्बोडिया-संचार क्षेत्र में सहयोग के लिये समझौता।
  • भारत और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से डाक टिकट जारी करने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षा किये हैं। इसके तहत भारत के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग और दक्षिण कोरिया के विज्ञान तथा आईसीटी (कोरिया डाक) मंत्रालय ने ‘कोरिया की रानी – ह्यो ह्वांग-ओक’ की थीम पर एक संयुक्त डाक टिकट जारी करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत 2019 के अंत तक आपसी सहमति द्वारा तय की गई तिथि को संयुक्त डाक टिकटें जारी की जाएंगी।

भारत और बोलिविया[सम्पादन]

  • इनके बीच चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग के लिये समझौता हुआ है। यह समझौता चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिये दोनों देशों के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार करेगा। इससे बोलिविया में चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनका प्रचार-प्रसार होगा तथा बोलिविया में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के महत्त्व को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देने तथा सहयोगपूर्ण अनुसंधान के उद्देश्य से विशेषज्ञों के आदान-प्रदान की सुविधा को बढ़ाएगा, जिससे औषधि विकास और चिकित्सा की परंपरागत पद्धतियों में नए अविष्कार किये जा सकेंगे।
  • इसके अलावा भारत और बोलिविया के बीच भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग के लिये भी एक समझौते पर दस्तखत किये गए हैं। यह समझौता खनिज संसाधनों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के लिये एक संस्थागत तंत्र प्रदान करेगा। समझौता ज्ञापन संसाधनों के बारे में जानकारी के आदान-प्रदान, कानून और नीति, विकास रणनीति के बारे में विचारों का आदान-प्रदान करने के लिये सेमिनारों के आयोजन, दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन और मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देगा, जिससे प्रलेखन और प्रसार आदि का कार्य करने में मदद मिलेगी।

भारत और ब्राज़ील[सम्पादन]

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्गत नवोन्मेष में सहयोग हेतु द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य जैव-प्रौद्योगिकी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में ठोस रणनीतिक योजना तैयार करना है। इस समझौते के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में जैव औषधि और स्वास्थ्य (विशेषकर जैव आधारित उत्पाद), कृषि प्रजनन अभ्यास, जैव ईंधन और जैव ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी एवं जैव यंत्र विन्यास तथा जैव विविधता और वर्गीकरण विज्ञान आदि क्षेत्र शामिल हैं।

प्रमुख सैन्य-अभ्यास[सम्पादन]

  • IN-VPN BILAT-EX द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास भारतीय नौसेना ने 13 से 16 अप्रैल तक कैम रण खाड़ी, वियतनाम में वियतनाम पीपुल्स नेवी के साथ के दूसरे संस्करण में हिस्सा लिया। यह अभ्यास दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पूर्वी बेड़े के जहाजों की चल रही प्रवासी तैनाती के एक भाग के रूप में किया गया था। इस अभ्यास का पहला संस्करण वियतनाम के डा नांग में पिछले वर्ष 21 से 26 मई तक आयोजित किया गया था।दोनों देशों ने व्हाइट शिपिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और एक ‘सूचना साझाकरण’ कार्यक्रम चलाया है।
  • ‘वरुण’-भारत और फ्राँस के मध्य सबसे बड़ा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास का आयोजन इस वर्ष मई के महीने में होने वाला हैं।

दोनों देश क्रमश: मिग-29 के और राफेल-एम नौसैनिक लड़ाकू जेट विमानों के साथ अपने विमान वाहक आईएनएस विक्रमादित्य और एफएनएस चार्ल्स डी गॉल के साथ इस अभ्यास में भाग लेंगे। संयुक्त द्विपक्षीय नौसेन्य अभ्यास ‘वरुण’ की शुरूआत वर्ष 2000 में हुई थी।

  • मित्र शक्ति’ भारत और श्रीलंका का संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास प्रत्येक वर्ष भारत एवं श्रीलंका में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।

यह 2012 में प्रारंभ हुआ था तथा इस वर्ष इसका छठा संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के मध्य घनिष्ठ संबंध स्थापित करना और रणनीतिक समझ बढ़ाना है।

  • 19 मार्च से 4 अप्रैल, 2019 तक पोर्ट ब्लेयर में आयोजित 33वें भारत–इंडोनेशिया समन्वित निगरानी (IND-INDO CORPAT) अभियान प्रारंभ हो चुका है। यह निगरानी अभियान किया जाना है।

दोनों देशों की नौसेनाएँ रणनीतिक साझेदारी की व्यापक परिधि के अंतर्गत 2002 से वर्ष में दो बार ‘अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा’ (IMBL) पर समन्वित निगरानी का कार्य कर रही हैं।

  • AFINDEX-19 भारत और 16 अफ्रीकी देशों के बीच 10 दिवसीय अफ्रीका-भारत संयुक्त क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास (Africa-India Joint Field Training Exercise-AFINDEX) पुणे में आयोजित किया जाएगा।

यह अभ्यास 18 से 27 मार्च, 2019 तक पुणे के औंध मिलिट्री स्टेशन (Aundh Military Station) और कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (College of Military Engineering) में चलेगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास भारत और एक दर्जन से अधिक अफ्रीकी देशों के बीच किया जाएगा। इसका उद्देश्य मानवीय मूल्यों को बढ़ाना और संयुक्त शांति अभियानों को गति देना है। AFINDEX-19 अफ्रीकी महाद्वीप के सदस्य राष्ट्रों के साथ बढ़ते राजनीतिक और सैन्य संबंधों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है और इससे इन देशों के साथ पहले से ही मज़बूत रणनीतिक सहयोग को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO और फ्राँसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES द्वारा भारत में एक संयुक्त समुद्री निगरानी प्रणाली स्थापित करने के लिये समझौते पर मुहर लगाई।[सम्पादन]

दोनों राष्ट्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में परिक्रमा करने वाले उपग्रहों का समूह स्थापित करेंगे जो वैश्विक स्तर (विशेष रूप से हिंद महासागर का वह क्षेत्र जहाँ फ्राँस का रीयूनियन द्वीप स्थित है) पर जहाज़ों के आवागमन की निगरानी करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत सबसे पहले दोनों देश अपने वर्तमान अंतरिक्ष प्रणालियों से प्राप्त आँकड़ों को आपस में साझा और उनका विश्लेषण करने के लिये नए एल्गोरिदम (Algorithms) विकसित करेंगे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर में जहाज़ोंका पता लगाने, पहचान करने और उनकी निगरानी के लिये एक संचालन प्रणाली की स्थापना करना है।[८]

  1. मैत्री-भारत-थाईलैंड
  2. अल नागाह-भारत-ओमान
  3. प्रबल दोस्त्यक-भारत-कज़ाखस्तान
  4. गरुड़ शक्ति-भारत-इंडोनेशिया


उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 25 अप्रैल को पहली बार आमने-सामने वार्ता हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।रूस के बंदरगाह शहर व्लादिवोस्तक के एक यूनिवर्सिटी कैंपस में शिखर वार्ता समपन्न हुई। उत्तर कोरिया के परमाणु मसले का हल निकालने के लिये अमेरिका ही एकमात्र शक्ति नहीं
सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (Generalised System of Preferences-GSP)

  • यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (US Trade Representative-USTR) भारत के लिये इस वरीयता व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत अमेरिका कुछ निश्चित निर्यात सीमा पर भारत से कोई शुल्क नहीं लेता है।
  • वर्ष 1968 में नई दिल्ली में UNCTAD में अपनाया गया था और इसकी स्थापना 1971 में की गई थी।
  • यह विकसित देशों (वरीयता देने वाले या दाता देश) द्वारा विकासशील देशों (वरीयता प्राप्तकर्त्ता या लाभार्थी देश) के लिये विस्तारित एक अधिमान्य प्रणाली है। जिसके तहत विकासशील देशों को विकसित देशों के बाज़ार में कुछ शर्तों के साथ न्यूनतम शुल्क या शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता है।[९]
  • भारत-बांग्लादेश के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सम्प्रीति के 8वें संस्करण, 'Exercise Sampriti 2019' का आयोजन 2 मार्च से 15 मार्च, 2019 तक बांग्लादेश के तंगेल में किया जाएगा। सम्प्रीति सैन्य अभ्यास का आयोजन दोनों देशों में वैकल्पिक रूप से किया जाता है। इस युद्धाभ्यास के 7वें संस्करण का आयोजन भारत के मिज़ोरम में किया गया था
  • अफगानिस्तान के द्वारा ईरान के चाबहार बंदरगाह से भारत को सामान निर्यात प्रारंभ।
  • चाबहार बंदरगाह को भारत, ईरान और अफगानिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
  • यह ईरान के एकमात्र समुद्री बंदरगाह के रूप में कार्य करता है और इसमें दो अलग-अलग बंदरगाह शाहिद कलंतरी एवं शाहिद बेहेशती शामिल हैं।इनमें से प्रत्येक में पाँच बर्थ हैं। हाल ही में, भारतीय फर्म इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (India Ports Global Limited) ने शाहिद बेहेशती पोर्ट का संचालन संभाला है।
  • अल-बरूनी द्वारा चाबहार को भारत का प्रवेश द्वार (मध्य एशिया से) कहा गया था।यहाँ से पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह भी महज़ 72 किलोमीटर की दूरी पर है।

चाबहार गहरे पानी में स्थित बंदरगाह है और यह ज़मीन के साथ मुख्य भू-भाग से भी जुड़ा हुआ है, जहाँ सामान उतारने-चढ़ाने का कोई शुल्क नहीं लगता।

  • काबुल से मेवा, टैक्सटाइल्स, कार्पेट और खनिज मिनरल प्रॉडक्ट्स 23 ट्रकों में भरकर चाबहार पोर्ट के लिए रवाना किया।यह खेप वहां से जहाज के जरिये मुंबई पहुंचेगी।
  • इससे भारत,ईरान तथा अफगानिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय परिवहन एवं पारगमन समझौता पूरी तरह से क्रियान्वित हो गया है।[१०]
  • मई 2016 में इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तेहरान में हस्ताक्षर किये थे।
  • इससे पूर्व भारत ने भी चाबहार पोर्ट के ज़रिये अफगानिस्तान को 1.1 मिलियन टन गेहूँ और 2000 टन मसूर की दाल निर्यात किया था।

अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (AARDO), जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, वर्ष 1962 में स्थापित किया गया था। यह एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें अफ्रीका और एशिया के 33 देश शामिल हैं। भारत इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक है और सदस्यता योगदान के मामले में सबसे बड़ा भागीदार है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब ने अपनी खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंता को दूर करने हेतु भारत को एक आधार के रूप में उपयोग करने का फैसला किया, इस संबंध में भारत ने एक ‘फार्म टू पोर्ट योजना’ की घोषणा की है। यह विशेष आर्थिक क्षेत्र के समान है, लेकिन इसे कॉर्पोरेट खेती के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जहाँ फसलों को UAE और सऊदी अरब के बाज़ारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उगाया जाएगा। भारत और अमेरिका ने वर्ष 2016 में LEMOA पर हस्ताक्षर किये थे। LEMOA दोनों देशों को ईंधन भरने और पुनःपूर्ति के लिये एक दूसरे की निर्दिष्ट सैन्य सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करने की अनुमति देता है। यह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।


रायसीना वार्ता एक बहुपक्षीय सम्मेलन है जो अंतर्राष्ट्रीय नीतिगत मामलों में वैश्विक समुदाय के समक्ष सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने हेतु प्रतिबद्ध है। यह सम्मेलन विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जाता है।

संदर्भ[सम्पादन]

  1. https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1569599
  2. https://pib.gov.in/newsite/printrelease.aspx?relid=123113
  3. https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/foreign-trade/india-sets-up-institute-in-africa-to-augment-agrarian-economy/articleshow/68693041.cms?from=mdr
  4. https://presidentofindia.nic.in/press-release-detail.htm?1594
  5. https://pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=189554
  6. https://www.aviation-defence-universe.com/indian-air-force-to-participate-in-langkawi-international-maritime-aero-expo-lima-2019/
  7. https://pib.gov.in/newsite/printrelease.aspx?relid=189503
  8. https://www.thehindu.com/news/national/isro-french-space-agency-seal-agreement-on-maritime-security/article26449883.ece
  9. https://ustr.gov/issue-areas/trade-development/preference-programs/generalized-system-preference-gsp
  10. https://www.jagranjosh.com/current-affairs/afghanistan-begins-export-to-india-through-chabahar-port-in-hindi-1551181467-2