सामान्य अध्ययन२०१९/आंतरिक सुरक्षा

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  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र सीमा बल (Sashastra Seema Bal- SSB) की 56वीं वर्षगाँठ का शुभारंभ किया।

सशस्त्र सीमा बल का गठन ‘विशेष सेवा ब्यूरो’ (Special Service Bureau) के रूप में वर्ष 1963 में हुआ। 15 जनवरी, 2001 को गृह मंत्रालय के अंतर्गत सीमा सुरक्षा बल घोषित किया गया तथा 15 दिसम्बर, 2003 को इसका नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया गया। भारत में छह अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों (असम राइफल्स,सीमा सुरक्षा बल,केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) के साथ-साथ यह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Central Armed Police Forces- CAPF) का हिस्सा है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है तथा तीन सीमांत मुख्यालय लखनऊ, पटना और गुवाहाटी में हैं।

19 जून,2001 को भारत-नेपाल सीमा (1751 किलोमीटर) की सुरक्षा करने का कार्य सौंपा गया तथा इसे उस क्षेत्र की प्रमुख खुफिया एजेंसी घोषित किया गया।

12 मार्च,2004 को भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व भी इसे सौंपा गया और इसके साथ ही इसे उस सीमा की भी प्रमुख खुफिया एजेंसी घोषित कर दिया गया।

वर्तमान में SSB उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल,सिक्किम,असम और अरुणाचल प्रदेश से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करता है।
  1. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देना।
  2. भारतीय सीमाओं पर तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकना।
  3. सीमा पार अपराध को रोकना तथा भारतीय क्षेत्र में अनाधिकृत प्रवेश या उससे बाहर जाने को रोकना।

उपलब्धि:-SSB को इसकी स्थापना के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा में मुख्य भूमिका निभाने की मान्यता में वर्ष 2004 में प्रेसिडेंट कलर्स (President’s Colours) प्रदान किया गया। प्रेसिडेंट कलर्स राष्ट्र की सुरक्षा में किसी रेजिमेंट के योगदान की मान्यता में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।

  • 15 अक्तूबर,2019 को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के 35वें स्थापना दिवस पर समारोह का आयोजन गुरुग्राम के मानेसर में स्थित इसके मुख्यालय पर किया गया।

यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। सामान्यतः इनको ब्लैक कैट (Black Cats) के नाम से जाना जाता है। NSG ने आपरेशन ब्लू स्टार और अक्षरधाम पर आतंकी हमले जैसे असाधारणीय स्थितियों में सफलतापूर्वक कार्य किया है।

  • हाल ही में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Central Armed Police Force-CAPF) के सभी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित कर दी गई । इसके अंतर्गत मुख्यतः 5 पुलिस सशस्त्र बल आते हैं।

CAPF का नेतृत्व आर्मी कमांडर के बजाय एक आईपीएस (IPS) अधिकारी करता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल पूरी तरह से गृह मंत्रालय के अधीन आता है और इसका रक्षा मंत्रालय से कोई भी संबंध नहीं है। राज्य में दंगा फसाद, सीमा पर हुई छोटी-मोटी झड़प और उग्रवाद जैसी समस्याओं से निपटना इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं।

  • सामुदायिक पुलिसिंग योजना- प्रहरी (Community Policing Scheme- Prahari) दिल्ली पुलिस द्वारा अपराध को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लॉन्च की गई एक योजना है।
इसके अंतर्गत नागरिक, वाणिज्यिक और वीआईपी क्षेत्रों में तैनात चौकीदार एवं सुरक्षा गार्ड अपराध की रोकथाम में पुलिस की सहायता करेंगे।
इसके अंतर्गत दिल्ली छावनी पुलिस स्टेशन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 400 से अधिक चौकीदारों और सुरक्षा गार्डों ने भाग लिया।

उद्देश्य:-

  1. सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मज़बूत करना।
  2. यह योजना चौकीदारों और सुरक्षा गार्डों के कार्यों में दक्षता बढ़ाने में सहायता करेगी।
  • दिल्ली शृंखला समुद्री शक्ति सेमिनार (Dilli Series Seapower Seminar)-एझिमाला (केरल) स्थित भारतीय नौसेना अकादमी में इसके छठे संस्करण का समापन 18 अक्तूबर, 2019 को किया गया।
सेमिनार के मुख्य विषय:-राष्ट्रों को आकार देने में समुद्री शक्ति की भूमिका।

वैश्विक राजनीति में समुद्री शक्ति की केंद्रीयता (Centrality of Sea Power to Global Politics)। भू-राजनीति को हिंद महासागरीय क्षेत्र में भारत की समुद्री रणनीति के साथ संबद्ध करना (Linking Geopolitics with India’s Maritime Strategy in the IOR)। समुद्री शक्ति का जन्म हुआ अथवा सृजन किया गया? (Are Sea Powers Born or Made?)। चीन की वैश्विक महत्त्वाकांक्षा: समुद्री क्षेत्र आयाम की समझ (China’s Global Ambitions: Understanding the Maritime Dimension)। प्रतिभागी: इस कार्यक्रम में कई सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, प्रख्यात शिक्षाविद, थिंक टैंक के प्रतिनिधि और रक्षा विश्लेषक शामिल हुए। माउंट दिल्ली: इस सेमिनार को एझीमाला स्थित माउंट दिल्ली में आयोजित किया गया इसलिये इस सेमिनार को 'दिल्ली' श्रृंखला कहा गया, यह इस क्षेत्र के समुद्री इतिहास के विकास का गवाह रहा है। महत्त्व: इस सेमिनार के अनुभव युवा अधिकारियों और कैडेटों को प्रोत्साहित करेंगे।

  • इंटरपोल (INTERPOL) ने कई अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के सिलसिले में भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी के भाई नेहाल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया है।

INTERPOL नोटिस सहयोग या अलर्ट के लिये अंतरराष्ट्रीय अनुरोध हैं जो सदस्य देशों में पुलिस को अपराध से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा करने की अनुमति देता है। संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों (International Criminal Tribunals) और अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) द्वारा भी अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर हुए अपराधों, विशेष रूप से नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता विरोधी अपराधों के दोषियों की मांग के लिये इंटरपोल नोटिस का उपयोग किया जा सकता है। इंटरपोल अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (International Criminal Police Organization- INTERPOL) एक अंतर सरकारी संगठन है जो 194 सदस्य देशों के पुलिस बलों के बीच समन्वय स्थापित में मदद करता है। प्रत्येक सदस्य देश में इंटरपोल का नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) होता है। यह उन देशों के राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन को अन्य देशों और जनरल सचिवालय से जोड़ता केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) को भारत के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (National Central Bureau) के रूप में नामित किया गया है। सामान्य सचिवालय सदस्य देशों को कई प्रकार की विशेषज्ञता और सेवाएँ प्रदान करता है। इसका मुख्यालय ल्यों, फ्राँस में है।

अभ्यास हिम विजय(Exercise HimVijay) भारतीय थल सेना अक्तूबर 2019 की शुरुआत में अरुणाचल प्रदेश और असम में पहले एकीकृत युद्ध समूह (Integrated Battle Groups) के साथ एक प्रमुख अभ्यास हिम विजय ‘HimVijay’ का आयोजन करेगी।

पर्वतीय सैन्य इकाई/माउंटेन कॉर्प्स को अधिक प्रभावी बनाने के लिये इसमें एक यूनिट एकीकृत युद्ध समूह (IBGs) की बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य युद्धाभ्यास को अधिक प्रभावी बनाना है। भारतीय वायु सेना (IAF) सैनिकों और उपकरणों के साथ-साथ अंतर-घाटी हस्तांतरण के लिये इस अभ्यास में भाग लेगी।

एकीकृत युद्ध समूह(Integrated Battle Groups) IBGs सेना द्वारा शुरू किये गए समग्र बल में परिवर्तन का हिस्सा हैं। IBG, ब्रिगेड के आकार की एक दक्ष और आत्मनिर्भर युद्ध व्यवस्था है जो युद्ध की स्थिति में शत्रु के विरुद्ध त्वरित आक्रमण करने में सक्षम है। प्रत्येक IBG का गठन संभावित खतरों, भू-भाग और कार्यो (Threat, Terrain and Task-T’s) के निर्धारण के आधार पर किया जाएगा और इन्हीं तीन आधारों पर IBG को संसाधनों का आवंटन भी किया जाएगा। IBG कार्यवाही करने हेतु अपनी अवस्थति के आधार पर 12 से 48 घंटों के भीतर संगठित होने में सक्षम होंगे।

17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स(17 Mountain Strike Corps) वर्ष 2013 में सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति ने कॉर्प्स के निर्माण को मंज़ूरी दी थी। यह भारतीय सेना का पहला माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स है जिसे त्वरित प्रतिक्रिया बल के साथ-साथ LAC (Line of Actual Control) के साथ चीन के खिलाफ आक्रामक बल के रूप में तैयार किया गया है। इसका मुख्यालय पूर्वी कमान के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के पनागढ़ में स्थित है। इसे ब्रह्मास्त्र वाहिनी के रूप में भी जाना जाता है।

  • कारगिल से कोहिमा (K2K) अल्ट्रा-मैराथन ग्लोरी रन’(Glory Run) का उद्घाटन 6 सितंबर,2019 को चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (CAS) के द्वारा किया गया।

इस अभियान का उद्देश्य सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि के अलावा हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए अभियान “फिट इंडिया मूवमेंट” और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है। इस अनोखे अभियान (कारगिल से कोहिमा अल्ट्रा-मैराथन “ग्लोरी रन”) का आयोजन कारगिल विजय (Kargil Victory) की 20वीं वर्षगाँठ मनाने और भारतीय वायुसेना की वास्तविक परंपरा एवं उद्देश्य “टच द स्काई विद ग्लोरी” (Touch the Sky with Glory) को आगे बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। K2K-ग्लोरी रन 21 सितंबर, 2019 से शुरू होकर 6 नवंबर, 2019 को पूरा होगा। इस अभियान के दौरान वायुसेना के 25 जांबाज़ों की टीम औसतन 100 किलोमीटर प्रतिदिन दौड़ लगाते हुए 45 दिनों में 4500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी। इसका आयोजन वायुसेना द्वारा कारगिल वार मेमोरियल, द्रास (जम्मू-कश्मीर) से लेकर कोहिमा वार सिमेट्री, कोहिमा (नगालैंड) तक किया गया है। इस अभियान के लिये कारगिल और कोहिमा का चयन इसलिये किया गया है क्योंकि कोहिमा और कारगिल भारत के पूर्वी और उत्तरी छोर के दो सीमावर्ती पोस्ट हैं जहाँ क्रमशः 1944 और 1999 में आधुनिक भारत की दो प्रमुख लड़ाइयाँ लड़ी गईं। इस अभियान का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर सुरेश राजदान करेंगे जो SU-30 विमान के पायलट हैं। इस टीम में एकमात्र महिला अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट रिषभजीत कौर शामिल हैं।

केंद्रीकृत प्रौद्योगिकी वर्टिकल(Centralized Technology Vertical) देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिये CBI एक अत्याधुनिक केंद्रीकृत प्रौद्योगिकी वर्टिकल (Centralized Technology Vertical-CTV) का निर्माण कर रही है जो अगले वर्ष तक पूरा हो जाएगा।

दरअसल CTV एक प्रौद्योगिकी केंद्र होगा जो डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण, फोरेंसिक अकाउंटिंग एंड फ्रॉड एनालिटिक्स से संबंधित मामलों की जाँच हेतु CBI की क्षमता में वृद्धि करेगा। CTV को 99 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है जो बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics), डेटा माइनिंग टूल्स (Data Mining Tools) जैसे उपकरणों से लैस डेटा वेयरहाउस तक अपनी पहुँच स्थापित करेगा। CTV को नमूना (Patterns), निशान (Trails), धोखाधड़ी और विसंगतियों आदि की पहचान करने हेतु डेटा का विश्लेषण करने के लिये आवश्यक उपकरणों के उचित सेट के साथ फोरेंसिक विशेषज्ञता से व्यवस्थित करने की परिकल्पना की गई है। केंद्रीकृत प्रौद्योगिकी वर्टिकल जटिल मामलों की जाँच के लिये वास्तविक-समय (Real-Time) सूचनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान करेगा। CTV उन्नत साधनों और प्रशिक्षित जनशक्ति के उचित सेट के साथ CBI के जटिल मामलों के लिये एक साझा संसाधन बन सकता है।

लियो परगेल’Leo Pargyil भारतीय सेना की एक टीम ने विषम मौसम की चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करते हुए ‘लियो परगेल’ (Leo Pargyil) पर्वत पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की।

भारतीय सेना ने यह सफलता 20 अगस्त, 2019 को सुबह 10.30 बजे हासिल की, इसके साथ ही इस पर्वत की चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ फहराया। ‘लियो परगेल’ पर्वत हिमाचल की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है जिसकी ऊँचाई लगभग 6773 मीटर है। इसे सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण एवं तकनीकी दृष्टि से अत्यंत कठिन चोटी माना जाता है। यह पर्वत ज़ास्कर रेंज (Zaskar Range) में आता है। इस अभियान दल को हिमाचल स्थित पूह (Pooh) से ट्राई पीक ब्रिगेड (Tri Peak Brigade) के कमांडर द्वारा 20 अगस्त को रवाना किया गया था तथा इसमें ट्राई पीक ब्रिगेड की महार रेजिमेंट की 18वीं बटालियन (18th Battalion the Mahar Regiment) के सैनिक शामिल थे।

माउंट कुन अभियान माउंट कुन (Mount Kun) अभियान को भारतीय सेना द्वारा लद्दाख के ज़ास्कर रेंज (Zaskar Range) में 30 जुलाई से 29 अगस्त, 2019 तक चलाया गया।


इस अभियान में 22 सदस्यों का एक दल था जिसमें 10 महिला अधिकारी भी शामिल थीं।

यह दल लेह से 30 जुलाई, 2019 को रवाना किया गया था जो अपना अभियान समय पर पूरा करके सुरक्षित वापस आ गया है। इस अभियान के दौरान दल को रास्ते में कई कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उसने गहरी खाइयों, बर्फीले तूफानों और सीधी चढ़ाई वाली बर्फीली चट्टानों का सामना करते हुए माउंट कुन पर विजय प्राप्त की। नून कुन मासिफ (Nun Kun Massif) नून कुन मासिफ (Nun Kun Massif) ऊपरी सुरू घाटी में क्षितिज पर स्थित दो चोटियाँ हैं। नून की ऊँचाई 7135 मी. तथा कुन की ऊँचाई 7077 मी. है जो लद्दाख के ज़ास्कर रेंज (Zaskar Range) में सबसे ऊँची हैं। दोनों चोटियों के बीच में लगभग 4 किमी. लंबा बर्फीला पठार पाया जाता है जो इन दोनों को अलग करता है। पिनेकल शिखर (Pinnacle Peak) इस समूह का तीसरा सबसे ऊँचा पर्वत है जिसकी ऊँचाई 6930 मी. है। पहली बार वर्ष 1913 में इतालवी पर्वतारोही मारियो पिआकेंज़ा द्वारा माउंट कुन पर चढ़ाई की गई थी। 58 वर्षों के पश्चात् एक भारतीय सैन्य अभियान द्वारा इस चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की गई थी।


लोकसभा ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 [Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019] पारित किया है। यह विधेयक गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 में संशोधन करता है। प्रमुख बिंदु विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य आतंकी अपराधों की त्वरित जाँच और अभियोजन की सुविधा प्रदान करना तथा आतंकी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान करना है। इस विधेयक का किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, लेकिन शहरी माओवादियों सहित भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।[१] यह संशोधन उचित प्रक्रिया तथा पर्याप्त सबूत के आधार पर ही किसी को आतंकवादी ठहराने की अनुमति देता है। गिरफ्तारी या ज़मानत प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह संशोधन राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को ऐसी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देता है जो उसके द्वारा की जा रही जाँच में आतंकवाद से होने वाली आय से बनी हो। इस संशोधन में परमाणु आतंकवाद के कृत्यों के दमन हेतु अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन (2005) को सेकेंड शिड्यूल में शामिल किया गया है। संशोधन की आवश्यकता वर्तमान में किसी भी कानून में किसी को व्यक्तिगत आतंकवादी कहने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिये जब किसी आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उसके सदस्य एक नया संगठन बना लेते हैं। जब कोई व्यक्ति आतंकी कार्य करता है या आतंकी गतिविधियों में भाग लेता है तो वह आतंकवाद को पोषित करता है। वह आतंकवाद को बल देने के लिये धन मुहैया कराता है अथवा आतंकवाद के सिद्धांत को युवाओं के मन में स्थापित करने का काम करता है। ऐसे दोषी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करना आवश्यक है। संशोधन के क्रियान्वयन में बाधाएँ वर्तमान में UAPA की धारा 43 के अध्याय IV और अध्याय VI के अनुसार DSP या समकक्ष पद से नीचे के अधिकारी इस कानून के तहत अपराधों की जाँच नहीं कर सकते हैं। NIA में पर्याप्त DSP की तैनाती नहीं है और इसके पास आने वाले मामलों की संख्या बराबर बढ़ती जा रही है। वर्तमान में NIA में 57 स्वीकृत पदों के मुकाबले 29 DSP और 106 स्वीकृत पदों के मुकाबले 90 निरीक्षक हैं। NIA के निरीक्षक आतंकी अपराधों की जाँच करने में पर्याप्त दक्ष हो चुके हैं और उपरोक्त संशोधन UAPA के अध्याय IV और अध्याय VI के तहत दंडनीय अपराधों की जाँच के लिये उन्हें और सक्षम बनाने के लिये किये जा रहे हैं।

भारत के विभिन्न प्रकार के सुरक्षा ईकाइयां[सम्पादन]

  • विशेष सुरक्षा इकाई (Special Protection Unit-SPU) प्रधानमंत्री,पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिये स्थापित एक विशेष दल है यह राष्ट्रपति की सुरक्षा नहीं करता है।

वर्तमान में इस दल में लगभग 3000 सिपाही शामिल हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सुरक्षा प्रदान करते हैं। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के पश्चात् उच्च पदों पर बैठे लोगों की सुरक्षा काफी महत्त्वपूर्ण विषय बन गया था। वर्ष 1985 में इस मुद्दे पर विचार करने हेतु बीरबल नाथ समिति का गठन किया गया, जिसने मार्च 1985 में इस कार्य हेतु SUP की स्थापना का सुझाव दिया। जिसके बाद वर्ष 1985 में ही SPU का पुनः नामकरण कर इसे SPG कर दिया गया।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड(National Security Guard)

15 अक्तूबर, 2019 को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के 35वें स्थापना दिवस पर समारोह का आयोजन गुरुग्राम के मानेसर में स्थित इसके मुख्यालय पर किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard- NSG) का गठन: देश में आतंकवाद से निपटने के लिये NSG का गठन वर्ष 1984 में एक संघीय आकस्मिक बल (Federal Contingency Force) के रूप में किया गया था। यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। सामान्यतः इनको ब्लैक कैट (Black Cats) के नाम से जाना जाता है। NSG ने आपरेशन ब्लू स्टार और अक्षरधाम पर आतंकी हमले जैसे असाधारणीय स्थितियों में सफलतापूर्वक कार्य किया है। सिद्धांत (MOTO): सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा (Omnipresent omnipotent security)। भूमिका: आंतरिक सुरक्षा को स्थिर रखने में NSG की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। असाधारण स्थितियों में विशेष आतंकवाद निरोधक बल के रूप में इनकी तैनाती । आतंकवाद के विरुद्ध भारत की ज़ीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति में NSG की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

भारत के प्रमुख युद्ध क्षेत्र तथा रक्षा बटालियन[सम्पादन]

  • सियाचिन (Siachen)
    जम्मू काश्मीर मानचित्र

रक्षा मंत्रालय द्वारा विश्व के सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में पर्यटकों को जाने की अनुमति प्रदान की गई है। सियाचिन ग्लेशियर या सियाचिन हिमनद हिमालय की काराकोरम रेंज में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के समीप स्थित है। भारत-पाकिस्तान की सीमाओं के आपस में मिलने के कारण सामरिक दृष्टिकोण से यह स्थान अति-महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ पर हैं। भारत ने इस क्षेत्र में आपरेशन मेघदूत के तहत विजय प्राप्त की थी। पर्यावरण के दृष्टिकोण से यह अति-संवेदनशील क्षेत्र है इसलिये यहाँ पर मानवीय हस्तक्षेप को सीमित रखा गया था। हाल ही में यहाँ पर अत्यधिक प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या देखी गई है, इसलिये सेना इसके निपटान हेतु प्रयासरत है। पर्यटन के निहितार्थ: इस क्षेत्र में विद्यमान पर्यटन संबंधी अपार संभावनाओं का समुचित लाभ उठाना। इस प्रकार की गतिविधियों से यहाँ के लोगों के लिये आजीविका के नए अवसर उत्पन्न करना। इस प्रकार की पहल से लद्दाख को विशेष रूप से फायदा मिलेगा।

  • रूद्रशिला’(Rudrashila)व्हाइट वाटर राफ्टिंग अभियान (White Water Rafting Expedition)को जैसलमेर मिलिट्री स्‍टेशन से झंडी दिखाकर रवाना किया गया।[२]

यह अभियान बैटल एक्स डिवीज़न के तत्‍वावधान में कालीधर बटालियन की ओर से संचालित किया जा रहा है। इसका संचालन 1 अक्तूबर से 4 अक्‍तूबर, 2019 तक किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कालीधर बटालियन (Kalidhar Batttalion) के 75वें स्‍थापना दिवस पर ‘रूद्रशिला’ अभियान आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान का नाम ‘रूद्रशिला’ उत्‍तराखंड की पहाडि़यों में अवस्थित गंगा नदी की सहायक नदी रुद्रप्रयाग के नाम पर पर रखा गया है। इस अभियान में शामिल दल रुद्रप्रयाग से ऋषिकेश तक कुल मिलाकर 140 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। कालीधर बटालियन कालीधर बटालियन की स्‍थापना 1 नवंबर, 1943 को हुई थी और इसने भारतीय सेना के सभी प्रमुख परिचालनों में भाग लिया है। वर्ष 1953 में कोरिया में तैनाती और वर्ष 2005-06 में कांगो में संयुक्‍त राष्‍ट्र के शांति मिशन (UN peacekeeping Mission) में तैनाती भी इन प्रमुख परिचालनों में शामिल है।

भारत द्वारा निर्मिति रक्षा उत्पाद[सम्पादन]

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल(Brahmos supersonic cruise missile) प्रमुख स्वदेशी प्रणालियों (Indigenous Systems) के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल में भारतीय प्रणोदन प्रणाली, एयरफ्रेम, बिजली आपूर्ति और अन्य प्रमुख स्वदेशी घटकों का प्रयोग किया गया है। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस को तीनों सेवाओं के साथ भारतीय सशस्त्र बलों में सक्रिय किया गया है। इन स्वदेशी प्रणालियों के सफल परीक्षण से भारत के रक्षा सामानों स्वदेशीकरण और प्रमुख 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को बढ़ावा मिला है। क्रूज़ मिसाइल (Cruise missile) क्रूज़ मिसाइल बहुत छोटी होती हैं और उन पर ले जाने वाले बम का वज़न भी ज़्यादा नहीं होता। अपने छोटे आकार के कारण उन्हें छोड़े जाने से पहले बहुत आसानी से छुपाया जा सकता है। क्रूज़ मिसाइल पृथ्वी की सतह के समानांतर चलती हैं और उनका निशाना बेहद सटीक होता है। क्रूज़ मिसाइल पारंपरिक और परमाणु हथियार दोनों को ले जाने में सक्षम है लेकिन अपने आकार एवं कम लागत के कारण उनका प्रयोग पारंपरिक हथियारों के साथ ज़्यादा होता रहा है।

भारतीय तटरक्षक पोत ‘वराह’(Indian Coast Guard Ship ‘Varaha’) 25 सितंबर 2019 को भारतीय तटरक्षक पोत (Indian Coast Guard Ship-ICGS) ‘वराह’ (Varaha) का चेन्नई में जलावतरण किया गया।

ICGS-Varaha का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो (L&T) द्वारा किया गया है जो कि एक निजी क्षेत्र की कंपनी है। अत्‍याधुनिक अपतटीय गश्‍ती पोत ICGS-Varaha उन सात पोतों की श्रृंखला में चौथा पोत है जिन्‍हें L&T द्वारा उपलब्‍ध कराया जाएगा। यह अत्‍याधुनिक नौवहन, संचार सेंसर और मशीनरी से लैस होने के साथ ही यह प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को भी ले जाने में सक्षम है। यह न्यू मंगलौर बंदरगाह से संचालित किया जाएगा एवं कन्याकुमारी तक के अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) में गश्त करेगा। ICGS-Varaha स्‍वदेश विकसित उन्‍नत हल्‍के हेलीकॉप्‍टर (Advanced Light Helicopter) का संचालन करने में सक्षम होने के साथ ही अत्‍यंत तेज़ गति से चलने वाली नौकाओं, चिकित्‍सा सुविधाओं और आधुनिक निगरानी प्रणालियों से लैस है।

Su-30 MKI हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-to-Air missile) ‘अस्त्र’ का ओडिशा के समुद्रतट परसफल परीक्षण किया गया।

अस्त्र भारत की पहली स्वदेश निर्मित दृश्य सीमा से परे हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (BVRAAM) है।

जिसकी मारक क्षमता 100 किमी. से अधिक है। इसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। DRDO ने ‘अस्त्र’ प्रक्षेपास्त्र को मिराज 2000 H, मिग 29, सी हैरियर, मिग 21, HAL तेजस और SU-30 विमानो में लगाने के लिये विकसित किया है। इसमें ठोस ईंधन प्रणोदक का इस्तेमाल किया जाता है।

आंतरिक सुरक्षा[सम्पादन]

  • समाधान (SAMADHAN) सिद्धांत वामपंथी अतिवाद को रोकने के लिये एक उपाय है। इसके अंतर्गत LWE से निपटने हेतु सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर तैयार की गई सभी अल्पकालिक व दीर्घकालिक रणनीतियाँ शामिल हैं। SAMADHAN का पूर्ण रूप निम्न प्रकार से है:-
S - कुशल नेतृत्व (Smart Leadership)
A - आक्रामक रणनीति (Aggressive Strategy)
M - प्रेरणा और प्रशिक्षण (Motivation and Training)
A - क्रियाशील खुफियातंत्र (Actionable Intelligence)
D - डैश बोर्ड आधारित ‘प्रमुख प्रदर्शन संकेतक’ (Dashboard Based Key Performance Indicators : KPI)
H - प्रोद्योगिकी का दोहन (Harnessing Technology)
A - एक्शन प्लान फॉर इच थिएटर (Action plan for each Theatre)
N - वित्त तक पहुँच रोकना (No access to Financing)

ऑपरेशन नंबर प्लेट (Operation Number Plate) भारतीय रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force- RPF) ने रेलवे परिसर में स्थित सभी वाहनों की पहचान करने तथा उनका सत्यापन करने के लिये एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नंबर प्लेट’ लॉन्च किया है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी रेलवे परिसरों में लावारिस वाहनों के खिलाफ कार्यवाही करना है जो लंबी अवधि के लिये 'नो पार्किंग' क्षेत्रों में भी मौजूद रहते हैं। इसे स्थानीय पुलिस एवं रेलवे के वाणिज्यिक विभाग के सक्रिय सहयोग से लॉन्च किया गया है। अज्ञात वाहनों को यात्रियों तथा रेलवे के अन्य हितधारकों की सुरक्षा के लिये एक गंभीर खतरा माना जाता है। यह अभियान (‘ऑपरेशन नंबर प्लेट’) विशेष रूप से 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनज़र आयोजित किया गया है। यह 9 अगस्त से 11 अगस्त तक भारतीय रेलवे के 466 रेलवे स्टेशनों पर एक विशेष अभियान के रूप में चलाया गया था जिसके दौरान चोरी हुए वाहन, 5 दिन से अधिक अवधि से खड़े वाहन, लावारिस वाहन, संदिग्ध वाहन आदि पाए गए। इस दौरान अनधिकृत पार्किंग के लिये लगभग 59,000 रुपए शुल्क के रूप में वसूल किये गए।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने सिक्यूरिटीपीडिया (Securitypedia) नामक एक ऑनलाइन विश्वकोश (Encyclopedia) की शुरुआत की है। CISF ने अपने कर्मचारियों के लिए CISFTube नामक अनुकूलित वीडियो इंटरफ़ेस भी लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य सिंगल बटन क्लिक करके CISF के कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना एवं उन्हें सशक्त बनाना है।

पुलिस स्टेशन सर्वेक्षण गृह मंत्रालय द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश के तीन सबसे अच्छे पुलिस स्टेशन राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह और पश्चिम बंगाल में हैं। उल्लेखनीय है कि इन तीन पुलिस स्टेशनों को देश भर के 15,666 पुलिस स्टेशनों में से चुना गया है। इन स्टेशनों का मूल्यांकन महिलाओं और अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों, संपत्ति से संबंधित अपराधों के विरुद्ध कार्यवाई के आधार पर किया गया। राजस्थान के बीकानेर ज़िले में उपस्थित कालू पुलिस स्टेशन ने प्रथम रैंक हासिल किया है क्योंकि यहाँ पर महिलाओं के लिये हेल्प डेस्क, पीने का पानी तथा वाई-फाई जैसी सभी सुविधाएँ पाई गईं। दूसरे स्थान पर निकोबार ज़िले में कैंपबेल बे है। इसमें बच्चों के अनुकूल कमरे तथा शिकायतकर्त्ताओं एवं आगंतुकों के लिये एक अलग प्रतीक्षालय है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में उपस्थित फरक्का पुलिस स्टेशन को इस रैंकिग में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जिसका कारण पुलिस स्टेशन में एयर कंडीशनर, व्यायामशाला, सीसीटीवी कैमरे और पुलिस-पब्लिक इंटरैक्शन के लिये एक उपयुक्त वातावरण है। पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में वार्षिक पुलिस महानिदेशक सम्मेलन के दौरान पुलिस स्टेशनों को ग्रेड देने का सुझाव दिया गया था जिसके बाद वर्ष 2016 से वार्षिक सर्वेक्षण किया जा रहा है।

निर्भया स्क्वाड:-नासिक पुलिस ने महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी और अन्य अपराधों पर लगाम लगाने हेतु हाल ही में ‘निर्भया स्क्वाड’ (Nirbhaya Squad) का गठन किया है जिसमें 10 सदस्य शामिल हैं। इस स्क्वाड में महिला और पुरुष सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं जो बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर कड़ी निगरानी रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। स्क्वाड को दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई युवती ‘निर्भया’ का नाम दिया गया है। 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में एक चलती बस में युवती के साथ बर्बर सामूहिक बलात्कार किया गया था। युवती की बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 के तहत् एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही उस पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मुंबई के इस व्यक्ति ने 30 अक्तूबर, 2017 की जेट एयरवेज की मुंबई-दिल्ली फ्लाइट के दौरान टॉयलेट मे अपहरण नोट लिखकर छोड़ा था। यह अधिनियम तब भी लागू होता है जब ऐसी कोई घटना भारत के बाहर घटित हो किंतु विमान भारत में पंजीकृत हो या किसी भारतीय व्यक्ति द्वारा विमान पट्टे पर लिया गया हो या अपराधी अवैध रूप से भारत में रहता हो।

नई दिल्ली में 8-13 अप्रैल, 2019 तक सेना के कमांडरों का द्विवार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सेना में कर्मठता सुनिश्चित करने के लिये कॉलेजिएट सिस्टम के ज़रिये फैसले लिये जाते हैं जिसमें सेना के कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।इसमें सुरक्षा की मौजूदा गतिविधियों,ऊभरते सुरक्षा हालात, सैन्य संचालन क्षमता में बढ़ोतरी और विपरीत परिस्थितियों में युद्ध के हालात से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। सम्मेलन में सेना की तैयारियों, तीनों सेनाओं के बीच ताल-मेल, सैन्य कूटनीति, संयुक्त अभ्यास जैसे मसले भी शामिल होते हैं। सम्मलेन का उद्देश्य गहरी समझ विकसित करने और मिलजुल कर काम करने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये दूरदृष्टि और उच्च विश्वसनीयता एवं समन्वित क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना भी है।

सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून यानी अफस्पा[सम्पादन]

अरुणाचल प्रदेश के नौ में से तीन ज़िलों से आंशिक रूप से हटा लिया गया है। जिन थाना क्षेत्रों से अफस्पा हटाया गया है उनमें पश्चिम कामेंग ज़िले के बालेमू तथा भालुकपोंग थाना, पूर्वी कामेंग ज़िले का सेइजोसा थाना और पापुमपारे ज़िले का बालीजान थाना क्षेत्र शामिल हैं। लेकिन म्यांमार से सटे राज्य के इलाकों में यह कानून लागूरहेगा।यह कदम राज्य में कानून लागू होने के 32 साल बाद उठाया गया है। 20 फरवरी, 1987 को राज्य के गठन के समय से अफस्पा लागू था, क्योंकि असम और तत्कालीन केंद्रशासित प्रदेश मणिपुर में यह पहले से लागू था। अरुणाचल प्रदेश के बाद मेघालय, मिज़ोरम और नगालैंड अस्तित्व में आए और इन राज्यों में भी यह कानून लागू किया गया था। इस कानून के तहत सुरक्षा बल किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं और किसी भी परिसर में छापा मार सकते हैं।

भारतीय नौसेना में यार्ड 2097 (LSU L- 56), लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (LCU) Mk- IV छठी श्रेणी का जहाज़ शामिल किया गया। यह जहाज़ Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd. द्वारा तैयार किया गया है। यह कोलकाता में Defence Public Sector Undertaking द्वारा तैयार किया गया 100वाँ जहाज़ है। इस लैंडिंग क्राफ्ट से सैनिकों, टैंकों और उपकरणों के परिवहन सहित भारतीय नौसेना की संचालन क्षमता भी बढ़ेगी, जो अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से संबंधित होगी।

मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group- APG)[सम्पादन]

Asia-Pacific Group Member States
  • वित्तीय कार्रवाई कार्य-बल (Financial Action Task Force-FATF) द्वारा पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट में शामिल किये जाने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया-प्रशांत समूह भी पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट में शामिल करने पर विचार कर रहा है।
  • APG एशिया-प्रशांत क्षेत्र हेतु वित्तीय कार्रवाई कार्य-बल (FATF) की शैली पर आधारित एक अंतर-सरकारी संगठन है।
  • भारत सहित 41 सदस्यों वाला यह समूह यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि इसके सदस्य बड़े पैमाने के विनाशकारी हथियारों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मानकों को प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं।
  • 13 मूल संस्थापक सदस्यों के बीच सर्वसम्मति से एक स्वायत्त क्षेत्रीय एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग निकाय के रूप में बैंकाक, थाईलैंड में 1997 में स्थापित किया गया॥[३]

वर्चुअल सिम कार्ड (Subscriber Identification Module Cards)[सम्पादन]

  • पुलवामा हमले की जाँच के दौरान जाँच एजेंसियों ने पाया है कि जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादियों द्वारा हमले में का इस्तेमाल किया गया था।
  • वर्चुअल सिम-इस तकनीक में कंप्यूटर द्वारा एक टेलीफोन नंबर उत्पन्न किया जाता है और उपयोगकर्त्ता अपने स्मार्टफोन पर सेवा प्रदाता का एक एप्लीकेशन डाउनलोड करता है।
  • यह एक क्लाउड-आधारित (उपयोगकर्त्ता की सक्रियता के बगैर इंटरनेट पर इस्तेमाल की जाने वाली सेवाएँ, खास तौर से डेटा स्टोरेज़) नंबर है जिसका उपयोग किसी भी उपकरण से एप के माध्यम से किया जा सकता है।
  • इस वर्चुअल फोन नंबर के माध्यम से होने वाली सभी वॉयस कॉल और एसएमएस मोबाइल में उपलब्ध मोबाइल डेटा/वाई-फाई कनेक्शन की सहायता से वर्चुअल सिम (Virtual Sim) सेवा प्रदाता के नेटवर्क पर स्थानांतरित किये जाते हैं।

आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923(Official Secrets Act,1923)[सम्पादन]

अटॉर्नी-जनरल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में राफेल सौदे वाले दस्तावेज़ के चोरी के लिये ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ ‘आपराधिक कार्रवाई’ हेतु इसको संज्ञान में लाया गया। औपनिवेशिक शासन का यह कानून, राष्ट्र की अखंडता सुनिश्चित करने तथा जासूसी, राजद्रोह और अन्य संभावित खतरों से निपटने हेतु रूपरेखा प्रदान करता है। यह कानून जासूसी, साझा 'गुप्त' जानकारी, वर्दी का अनधिकृत उपयोग, जानकारी रोकना, निषिद्ध/प्रतिबंधित क्षेत्रों में सशस्त्र बलों के कार्यों में हस्तक्षेप, अन्य लोगों के लिये दंडनीय अपराध बनाता है। यह जानकारी सरकार, दस्तावेजों, तस्वीरों, रेखाचित्रों, मानचित्रों, योजनाओं, मॉडल, आधिकारिक कोड या पासवर्ड से संबंधित किसी स्थान के संदर्भ में हो सकती है। अपराधी व्यक्ति को 14 साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों सज़ा दी जा सकती है।

  • उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इंदिरापुरम स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 50वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया।

‘केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968’ के तहत गठित यह केंद्रीय सशस्त्र बल,केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है। CISF पूरे भारत में स्थित औद्योगिक इकाइयों, सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं और सुविधाओं तथा प्रतिष्ठानों को सुरक्षा कवच प्रदान करता है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, खानों, तेल क्षेत्रों और रिफाइनरियों, मेट्रो रेल, प्रमुख बंदरगाहों आदि जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को CISF द्वारा संरक्षित किया जाता है। भारत में अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force-CRPF), सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force-BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (Indo-Tibetan Border Police-ITBP), सशस्त्र सीमा बल (Sashastra Seema Bal-SSB) शामिल हैं।

11 मार्च को राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने अपना 34वाँ स्थापना दिवस मनाया।[सम्पादन]

NCRB के अनेक अधिकारियों को उनके कार्य के प्रति लगन एवं समर्पण के लिये प्रशस्ति प्रमाणपत्र प्रदान करने के साथ-साथ क्रीडा एवं अन्य स्पर्द्धाओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। 1986 में गठित यह संस्था देश में अपराध आँकड़ों का संग्रह,रखरखाव एवं विश्लेषण के लिये उत्तरदायी है। यह नीतिगत मामलों एवं अनुसंधान के लिए अपराध, दुर्घटनाओं, आत्महत्याओं तथा कारागृहों पर आँकड़ों के प्रामाणिक स्रोत के लिये एक नोडल एजेंसी है। यह भारत सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत एक मिशन मोड परियोजना, अपराध एवं अपराधियों की ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली (The Crime and Criminal Tracking Networks and Systems- CCTNS) के कार्यान्वयन हेतु एक निगरानी एजेंसी है। CCTNS परियोजना का उद्देश्य देश में पुलिस कार्य की दक्षता में वृद्धि के लिये एक व्यापक एवं समेकित प्रणाली का सृजन करना है। NCRB भारतीय पुलिस अधिकारियों एवं विदेशी पुलिस अधिकारियों के लिये सूचना प्रौद्योगिकी एवं फिंगर प्रिंट विज्ञान में प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। इसका उद्देश्य भारतीय पुलिस/जाँच अधिकारियों को सूचना एवं प्रौद्योगिकी की सहायता प्रदान कर सशक्त बनाना है।


2006 के प्रकाश सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस सुधारों के लिये 7 निर्देश जारी किये। 7 निर्देशों में से एक निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि परिचालन कर्तव्यों पर अन्य पुलिस अधिकारियों (जिसमें एक ज़िले के पुलिस अधीक्षक प्रभारी और एक पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी शामिल हैं को भी दो साल का न्यूनतम कार्यकाल प्रदान किया जाए।

आपदा सुरक्षा[सम्पादन]

IMD द्वारा चक्रवात चेतावनी बुलेटिन के विभिन्न स्तरों को सूचित करने हेतु 2006 के बाद से लाल (Cyclone Alert ), नारंगी (Cyclone Warning) और पीले (Post landfall outlook) रंग का उपयोग किया जा रहा है। चक्रवात चेतावनी बुलेटिन हेतु IMD द्वारा बैंगनी रंग का उपयोग नहीं किया जाता है। 4 जनवरी को FATF ने पाकिस्तान और श्रीलंका सहित 11 ऐसे देशों की पहचान की है,जो धन-शोधन रोधी उपायों तथा आतंकवाद के वित्तपोषण (Combating of Financing of Terrorism-CFT) का मुकाबला करने में रणनीतिक रूप से कमज़ोर हैं।वित्तीय कार्रवाई कार्य-बल(FATF)वर्ष 1989 में जी-7 की पहल पर स्थापित एक अंतः सरकारी संस्था है। इसका उद्देश्य ‘टेरर फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है। इसका मुख्यालय फ्राँस के पेरिस में है। गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम 1958 (Armed Forces Special Powers Act-AFSPA) की धारा 3 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए समूचे नगालैंड को पुनः ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। केंद्र सरकार के आदेशानुसार, 30 दिसंबर, 2018 से छह महीने की अवधि के लिये नगालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है।

संदर्भ[सम्पादन]

  1. https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1580138
  2. https://pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=193149
  3. http://www.apgml.org/members-and-observers/page.aspx?p=8c32704a-5829-4671-873c-7b5a23ced347