सामान्य अध्ययन२०१९/ई-गवर्नेंस

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  • इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इंडिया इंटरनेट 2019 रिपोर्ट के अनुसार,भारत में 5 वर्ष या उससे अधिक आयु के कुल सक्रिय उपयोगकर्त्ताओं की संख्या 485 मिलियन है।

राज्य स्तर पर राजधानी दिल्ली सर्वाधिक 69% उपयोगकर्त्ताओं के साथ प्रथम स्थान पर है, केरल 54% उपयोगकर्त्ताओं के साथ दूसरे स्थान पर है।

  • ई-समिति तकनीकी संचार एवं प्रबंधन संबंधी परिवर्तनों के लिये सलाह देनेवाली एक निकाय है जो देती है।

यह भारतीय न्यायपालिका का कंम्प्यूटरीकरण कर राष्ट्रीय नीति तैयार करने में सहायता के लिये भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से प्राप्त एक प्रस्ताव के अनुसरण में बनाई गई है। ई-समिति की स्थापना वर्ष 2004 में न्यायपालिका में IT के उपयोग तथा प्रशासनिक सुधारों के लिये एक गाइड मैप प्रदान करने हेतु की गई थी।

  • mSBM एप राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्तएक मोबाइल एप है।

यह बैकएंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रारूप का उपयोग करते हुए अपलोड की गई फोटो में लाभार्थी का चेहरा और टॉयलट सीट को पहचानने में मदद करता है। यह एप व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के लिये आवेदकों को फोटोग्राफ अपलोड करने के बाद SBM-U के तहत उनके आवेदन की स्थिति को रियल टाइम यानी उसी समय जानने की सुविधा देगा।

  • CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड को कंपनी अधिनियम,1956 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा स्थापित किया गया है जिसका उद्देश्य सीएससी योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करना है।

योजना को प्रणालीगत व्यवहार्यता और स्थिरता प्रदान करने के अलावा यह सीएससी के माध्यम से नागरिकों को सेवाओं की डिलीवरी हेतु एक केंद्रीकृत और सहयोगी रूपरेखा भी प्रदान करता है।

  • परफॉर्मेंस स्मार्ट-बोर्ड(Performance Smart-Board) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 02 अक्तूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर लॉन्च एक स्वचालित रियल टाइम बोर्ड है।

इसका उद्देश्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों जैसे डिजिटल इंडिया,आधार और डिजिटल भुगतान की प्रभावी निगरानी करना है। इसके अतिरिक्त स्मार्ट-बोर्ड केंद्र,राज्य या ज़िला विशिष्ट परियोजनाओं के लिये नागरिकों को एकल खिड़की तक पहुँच भी प्रदान करेगा। यह मंत्रालय के महत्त्वपूर्ण और उच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों को वास्तविक समय पर गतिशील विश्लेषणात्मक परियोजना निगरानी (Dynamic Analytical Project Monitoring) प्रदान करेगा। स्मार्ट-बोर्ड डेटा इंटीग्रेशन के माध्यम से विश्लेषण दक्षता को बढ़ाएगा, इसके लिये API/वेब सेवाओं का उपयोग करके केंद्रीकृत तथा आसान-पहुँच वाले प्लेटफॉर्मों के डेटा का प्रयोग किया जाएगा। यह स्वचालित रियल टाइम स्मार्ट-बोर्ड पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। API (Application Programming Interface) एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस क्लाइंट या अलग-अलग सर्वर के बीच एक इंटरफेस या संचार प्रोटोकॉल है।

  • उपभोक्ता एप(Consumer App) उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निवारण के लिये केंद्रीय उपभोक्ता मामले,खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के द्वारा लॉन्च किया।

डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में यह एक कदम है, इस एप का उद्देश्य मोबाइल फोन के माध्यम से देश भर में उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र संबंधी वन स्टॉप सॉल्यूशन समाधान उपलब्ध कराना है।

इस एप के तहत पंजीकृत उपभोक्ताओं को एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से उनकी शिकायत के बारे में एक यूनिक नंबर (Unique Number) के माध्यम से सूचित किया जाएगा, जिसे उपभोक्ताओं द्वारा ट्रैक किया जा सकता है।
उपभोक्ता शिकायतों का समयबद्ध समाधान होगा और जो शिकायतें प्रकृति में सरल हैं उन्हें 20 दिनों के भीतर हल किया जाएगा। ऐसी शिकायतें जिसमें लोग कंपनियों से प्रतिक्रिया चाहते हैं, को 60 दिनों के भीतर हल किया जाएगा।

उपभोक्ताओं की 60 दिनों के बाद भी शिकायत का समाधान नहीं होने की स्थिति में उन्हें उपभोक्ता मंचों के प्रयोग की सलाह दी जाएगी।

शिकायत को बंद करने से पहले उपभोक्ता को सूचित किया जाएगा और यदि उपभोक्ता संतुष्ट नहीं है तो शिकायत को संबंधित विभाग के पास भेज दिया जाएगा।
उपभोक्ता OTP (वन टाइम पासवर्ड) के साथ साइन-अप कर सकते हैं और एप का उपयोग करने के लिये एक यूज़र आईडी तथा पासवर्ड बना सकते हैं।

एप में उपलब्ध नॉलेजबेस (knowledgebase) फीचर उपभोक्ताओं को उपभोक्ता ड्यूरेबल्स (Consumer Durables), इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ई-कॉमर्स, बैंकिंग और बीमा जैसे 42 सेक्टरों से संबंधित जानकारी प्रदान करेगा। उपभोक्ता इस एप को मुफ्त में गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से डाउनलोड कर, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों ही भाषाओं में इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम(Emergency Response Support System (ERSS)

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा चंडीगढ़ में तीन नागरिक केंद्रित सेवाओं का शुभारंभ किया गया। इन सेवाओं में इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम- डाॅयल 112 (Emergency Response Support System- Dial 112) , ई-बीट बुक (E-Beat Book) सिस्टम और ई-साथी एप (E-Saathi App) शामिल हैं।

ERSS निर्भया फंड के तहत क्रियान्वित केंद्रीय गृह मंत्रालय की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। इससे विशेषकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी। इसके द्वारा प्रदत एक एकल आपातकालीन नंबर 112 कंप्यूटरीकृत प्रणाली के प्रयोग के माध्यम से तुरंत आवश्यक मदद करता है।

नागरिक कॉल, SMS, ईमेल और 112 इंडिया (112 India) मोबाइल एप के माध्यम से आपातकालीन सहायता प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की मदद हेतु 20 से अधिक आपातकालीन सहायता नंबर हैं इसकी वजह से सहायता की आवश्यकता वाले नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिये अब ERSS की मदद से सभी आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत कर दिया जाएगा जिससे नागरिकों को सेवा प्राप्त करने में आसानी होगी। भविष्य में सड़क दुर्घटना हेतु आपातकालीन नंबर (1073), महिला हेल्पलाइन (1091, 181) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) सहित अन्य हेल्पलाइन सेवाओं को 112 एकीकृत आपातकालीन सेवा के तहत जोड़ दिया जाएगा।

ई-बीट बुक (E-Beat Book) एक मोबाइल आधारित एप है जो वास्तविक समय में अपराध तथा अपराधियों से संबंधित जानकारी के संग्रह,अपडेशन एवं विश्लेषण को आसान बनाएगा। अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क तथा सिस्टम (Crime and Criminal Tracking Network & Systems- CCTNS) के साथ जोड़ा जाएगा, जो अपराध/आपराधिक डेटा के वास्तविक समय अपडेशन में मदद करेगा
ई-साथी एप वरिष्ठ नागरिकों सहित आम जनता को पुलिस के संपर्क में रहने में मदद करेगा और सहभागी सामुदायिक पुलिसिंग (Your Police at Your Door Step) की सुविधा के लिये सुझाव भी देगा।

बीट अधिकारी इस एप के माध्यम से लोगों के पुलिस स्टेशन में उपस्थिति हुए बिना ही पासपोर्ट सत्यापन,किरायेदार सत्यापन, नौकर सत्यापन और चरित्र प्रमाणन जैसी सेवाएंँ प्रदान करने में सक्षम होंगे।

  • 8-9 अगस्त, 2019 को मेघालय की राजधानी शिलांग में (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पहली बार) ई-गवर्नेंस पर 22वें राष्ट्रीय सम्मेलनका आयोजन किया गया।

इस सम्मेलन का आयोजन प्रशासनिक सुधार, लोक शिकायत विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा मेघालय सरकार द्वारा मिलकर किया जा रहा है। शिलांग में आयोजित 22वाँ राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन इस क्षेत्र में ई-गवर्नेंस पहलों को महत्त्वपूर्ण गति प्रदान करेगा। यह सम्मेलन सभी तरह की डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने, समस्याओं के समाधान में अनुभवों का आदान-प्रदान करने, जोखिम कम करने, मुद्दों को सुलझाने आदि के लिये स्थायी ई-गवर्नेंस पहलों को तैयार करने एवं उन्हें लागू करने के प्रभावी तरीकों के बारे में जानकारी साझा करने के लिये एक मंच उपलब्ध कराता है। इस सम्मेलन का विषय “डिजिटल इंडिया: सफलता से उत्कृष्टता” है। सम्मेलन के दौरान पूर्ण सत्र में विभिन्न उप-विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा:

  1. इंडिया इंटरप्राइज़ आर्किटेक्चर (India Enterprise Architecture-INDEA)
  2. डिजिटल बुनियादी ढाँचा
  3. वन नेशन- वन प्लेटफॉर्म
  4. पेशेवरों के लिये उभरती प्रौद्योगिकी
  5. सचिवालय सुधार
  6. राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा आपूर्ति आकलन (National e-Governance Service Delivery Assessment-NeSDA)
  7. समावेश और क्षमता निर्माण
  8. नवाचारियों और उद्योगों के साथ तालमेल


भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय चिकित्सा सांख्यिकी संस्थान ने जनसंख्या परिषद के साथ मिलकर नेशनल डेटा क्वालिटी फोरम (National Data Quality Forum-NDQF) लॉन्च किया है। NDQF का उद्देश्य समय-समय पर कार्यशालाओं और सम्मेलनों के माध्यम से वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित पहल तथा मार्गदर्शन कार्यों आदि के माध्यम से लोगों को एकत्रित करना है। इस प्रक्रियाओं में संग्रहीत आँकड़े सटीक होंगे जिनका उपयोग स्वास्थ्य एवं जनसांख्यिकीय आँकड़ों में किया जा सकता है।


गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (Crime & Criminals Tracking Network and Systems-CCTNS) की सुविधा को देश के सभी थानों में लागू किया है। अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (Crime & Criminals Tracking Network and Systems-CCTNS) वर्ष 2009 मे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है।CCTNS का उद्देश्य ई-गवर्नेंस के सिद्धांतों को अपनाते हुए एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली का निर्माण करना है। इसके माध्यम से पुलिस सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिये अपराधियों एवं अपराधों की एक राष्ट्रव्यापी आधारभूत नेटवर्क संरचना तैयार की जाएगी

इंटरनेट साथी (Internet Saathi) गूगल इंडिया (Google India) और टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) ने पंजाब और ओडिशा के गाँवों में इंटरनेट साथी (Internet Saathi) पहल का विस्तार किया है। इंटरनेट साथी कार्यक्रम वर्ष 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में महिलाओं के बीच डिज़िटल साक्षरता की सुविधा प्रदान करना है। कार्यान्वयन: गाँवों की महिलाओं को इंटरनेट का उपयोग करने के लिये प्रशिक्षित किया जाता है और उन्हें डेटा-सक्षम उपकरणों से सुसज्जित किया जाता है। इन महिलाओं को इंटरनेट साथीज़ के रूप में जाना जाता है ये ट्रेनर के रूप में काम करती हैं, ताकि उनके गाँव की अन्य महिलाओं को इंटरनेट इस्तेमाल करने में मदद मिल सके और वे इससे लाभान्वित हो सकें। कवरेज क्षेत्र: राजस्थान में पायलट के रूप में शुरू किये गए कार्यक्रम का विस्तार गुजरात, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, तमिलनाडु, गोवा, कर्नाटक उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्यों तक किया गया है। पंजाब और ओडिशा जल्द ही इस सूची में जुड़ जाएंगे। कार्यक्रम की प्रगति: इसने अब तक लगभग 70,000 इंटरनेट साथियों को प्रशिक्षित किया है, जिससे देश की लगभग 2.6 करोड़ महिलाएँ प्रभावित हुई हैं। प्रभाव: इस कार्यक्रम ने ग्रामीण भारत में लैंगिक आधार पर डिज़िटल साक्षरता के अंतराल को कम करने में योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि डिजिटल साक्षरता के मामले में महिला-पुरुष अनुपात वर्ष 2015 में 1:10 था जो वर्ष 2018 में बढ़कर 4:10 हो गया। इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित महिलाओं में से कुछ ने अपना स्वयं का सूक्ष्म व्यवसाय भी शुरू किया है जैसे कि सिलाई, मधुमक्खी पालन/शहद उत्पादन और ब्यूटी पार्लर आदि।



दिल्ली हाईकोर्ट ने देश की पहली टेलीप्रजेंस सुविधा की शुरुआत अत्याधुनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये की है। न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता बढ़ेगी। टेलीप्रजेंस व्यवस्था के ज़रिये एक साथ अलग-अलग जगह पर मौजूद 20 लोगों को एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह उन सभी लोगों को आमने-सामने बैठे होने का आभास दिलाएगा। इसके ज़रिये अब दिल्ली हाईकोर्ट दूरदराज़ इलाकों की अदालतों के साथ बैठक कर सकेगा। साथ ही दस्तावेज़ों का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आदान-प्रदान भी हो सकेगा। इसका उपयोग आई-फोन, डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल आदि के ज़रिये किया जा सकता है। एक-दूसरे से जुड़ने के लिये ई-मेल के ज़रिये इसका लिंक भेजा जाएगा। इस लिंक को मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट पर कनेक्ट करते ही सभी आपस में जुड़ जाएंगे। इस सुविधा का लाभ पूर्वनियोजित तरीके से भी उठाया जा सकता है। ज़रूरत होने पर तत्काल इस सेवा के ज़रिये अन्य अदालत या व्यक्ति से कनेक्ट किया जा सकेगा।

एकल खिड़की हब ‘परिवेश’ ‘परिवेश’ (PARIVESH: Pro-Active and Responsive facilitation by Interactive, Virtuous and Environmental Single-window Hub) को राज्य सरकारें 15 जनवरी तक शुरू कर देंगी। प्रशिक्षण जारी है- ‘परिवेश’को विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर शुरू किया गया था जो एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली हेतु एकल खिड़की सुविधा है। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इस सुविधा को विकसित किया गया है। इसमें न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के विचार को भी शामिल किया गया है। राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC), नई दिल्ली के तकनीकी सहयोग से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस प्रणाली को डिज़ाइन और विकसित किया है।

ओडिशा सरकार ने वर्चुअल पुलिस स्टेशन की शुरुआत जहाँ लोग बिना ज़िले के पुलिस स्टेशनों में गए वाहन चोरी से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ओडिशा सरकार ने सड़क दुर्घटना मामले के दस्तावेज़ मॉड्यूल और ओडिशा पुलिस की मेडिको लीगल ओपिनियन सिस्टम परियोजनाओं (Medico Legal Opinion System Projects) के साथ वर्चुअल पुलिस स्टेशन की सुविधा शुरू की। यह वर्चुअल पुलिस स्टेशन (ई-पुलिस स्टेशन) ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के तहत कार्य करेगा। इस पहल से स्थानीय नागरिकों के पुलिस स्टेशन आने-जाने में लगने वाले समय की बचत होगी। इस सुविधा से मोटर वाहन चोरी मामलों में बीमा का दावा करने वाले लोगों को लाभ होगा।

सन्दर्भ[सम्पादन]