सामान्य अध्ययन२०१९/राजव्यवस्था एवं संविधान

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  • 9 से 27 सितंबर, 2019 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 42वें सत्र का आयोजन जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में किया जा रहा है। इस बैठक का केंद्रीय बिंदु पर्यावरण एवं मानवाधिकारों के बीच संबंधों को परिभाषित करते हुए जलवायु संकट का समाधान निकालना है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का गठन वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के स्थान पर किया गया था। इसमें 47 सदस्य हैं और सीटों का बंँटवारा भोगौलिक आधार पर होता है। सदस्यों का चुनाव तीन वर्षों की अवधि के लिये किया जाता है और इनका कार्यकाल अधिकतम दो बार के लिये होता है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा के तहत मानवाधिकार पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Human Rights-NAPHR) तैयार करने हेतु एक टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस (12 अक्तूबर) पर NAPHR की घोषणा की जा सकती है।

यह योजना 11 वर्षों से (2008 से) लंबित है, जबकि NHRC इसे तैयार करने के लिये सरकार से कई बार आग्रह कर चुका है। योजना तैयार करने के संबंध में अगस्त 2019 में बैठक हुई थी जिसमें टास्क फोर्स के गठन का निर्णय लिया गया । टास्क फोर्स में केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) सहित सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य से संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और परवर्ती चरण में सिविल सोसाइटी के संगठनों से भी परामर्श किया जाएगा। टास्क फोर्स अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने से पहले अन्य देशों की योजनाओं की भी जाँच करेगी ।

सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा(Universal Periodic Review-UPR) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तत्त्वावधान में एक राज्य-संचालित प्रक्रिया है जिसमें सदस्य राज्यों को यह बताना पड़ता है कि उन्होंने मानवाधिकार संरक्षण तथा अपने दायित्वों को पूरा करने के लिये क्या कार्रवाई की है।

UNHRC के अनुसार, UPR की अभिकल्पना हर देश के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिये की गई है। क्योंकि इस समीक्षा से सभी देशों में उनके क्रियान्वयन को सुधारने के प्रयासों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का पता लगाया जा सकता है। एक समीक्षा चक्र साढ़े चार साल तक चलता है, जिसके दौरान सदस्य राज्यों के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाती है। पहला चक्र 2008 से 2011 तक चला, जबकि तीसरा चक्र 2017 से चल रहा है। 2017 में संयुक्त राष्ट्र की तीसरी UPR में भारत ने मानवाधिकारों पर 250 सिफारिशों में से 152 को स्वीकार किया। हालाँकि भारत ने सशस्त्र बल विशेष शक्तियाँ अधिनियम (AFSPA)और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA ) संबंधी कुछ सिफारिशों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। UPR-1 और UPR-3 में संयुक्त राष्ट्र ने सिफारिश की है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा एवं आवास का अधिकार, सभी के लिये न्याय, महिलाओं और बच्चों की तस्करी के विरुद्ध उपाय जैसे मुद्दों को कवर करने हेतु भारत के पास NAPHR होना चाहिये।

  • 24 दिसंबर,2019 को उपभोक्ता आंदोलन के महत्त्व और प्रत्येक उपभोक्ता को उनके अधिकारों तथा ज़िम्मेदारियों के बारे में अधिक जागरूक करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया गया। इस वर्ष उपभोक्ता दिवस की थीम- ‘उपभोक्ता शिकायत/विवाद के समाधान की वैकल्पिक प्रणाली’ (Alternate Consumer Grievance/Dispute Redressal’) है। 24 दिसम्बर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू हुआ था। इस अधिनियम का उद्देश्य खराब सामान, त्रुटिपूर्ण सेवाओं और अनुचित व्यापार परिपाटियों जैसे विभिन्न प्रकार के शोषण से उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करना है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,2019 अगस्त 2019 में संसद द्वारा पारित किया गया।

इसके अतिरिक्त 15 मार्च को प्रत्येक वर्ष विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। वर्ष 2019 की थीम Trusted Smart Products रखी गई है।इसकी घोषणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी (John F. Kennedy) द्वारा की गई थी, जिसमें चार मूलभूत अधिकार बताए गए हैं-

  1. सुरक्षा का अधिकार
  2. सूचना पाने का अधिकार
  3. चुनने का अधिकार
  4. सुनवाई का अधिकार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 देशभर में 500 से भी अधिक ज़िला उपभोक्ता फोरम हैं तथा प्रत्येक राज्य में एक राज्य उपभोक्ता आयोग है, जबकि राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली में स्थित है।

  • 19 दिसंबर, 2019 को गोवा ने अपना 58वाँ मुक्ति दिवस मनाया यह भारत के स्वतंत्र होने के 14 वर्ष बाद तक पुर्तगालियों के अधीन रहा।पुर्तगालियों ने वर्ष 1510 में भारत के कई हिस्सों पर अपना उपनिवेश स्थापित किया परंतु 19वीं शताब्दी के अंत तक भारत में पुर्तगाली उपनिवेश गोवा,दमन,दीव,दादरा,नगर हवेली और अंजेडिवा द्वीप तक ही सीमित रहा।

गोवा मुक्ति आंदोलन ने पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने की मांग की यह आंदोलन छोटे पैमाने पर एक विद्रोह के साथ शुरू हुआ लेकिन :वर्ष 1940 से 1960 के बीच यह अपने चरम पर पहुँच गया। भारतीय सेना द्वारा गोवा में ‘ऑपरेशन विजय' चलाकर 19 दिसंबर,1961 को इस राज्य को पुर्तगालियों से मुक्त करा लिया गया। तत्पश्चात इसे दमन और दीव के साथ मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।

30 मई,1987 में गोवा को पूर्ण राज्य तथा दमन और दीव को केंद्रशासित प्रदेश का दर्ज़ा दिया गया।

गोवा के उत्तर में बहने वाली तेरेखोल नदी गोवा को महाराष्ट्र से अलग करती है। राज्य की अन्य प्रमुख नदियों में मांडवी,जुआरी,चपोरा, साल आदि हैं। गोवा को बायोटेक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मछली पालन यहाँ का प्रमुख उद्योग है तथा पर्यटन यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। कोंकणी (राजभाषा) तथा मराठी यहाँ की मुख्य भाषाएँ हैं। कोंकण रेलवे के माध्यम से मुंबई तथा मंगलुरु से जुड़ा हुआ है तथा यह मुंबई उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

  • भारत सरकार ने ब्रिटिश पत्रकार और लेखक आतिश तासीर (Aatish Taseer) के ओवरसीज़ सिटीज़नशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड को निरस्त कर दिया है। गृह मंत्रालय का कहना है कि उनके OCI कार्ड को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निरस्त किया गया है, क्योंकि अपने आवेदन में उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया कि उनके पिता पाकिस्तानी मूल के नागरिक हैं, जो कि OCI कार्ड हेतु एक अयोग्यता है।
  • गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs- MHA) ने चेन्नामनेनी रमेश (Chennamaneni Ramesh) की नागरिकता रद्द कर दी, चेन्नामनेनी वेमुलावाड़ा (तेलंगाना) से विधानसभा के सदस्य (Member of the Legislative Assembly- MLA) हैं।MHA के अनुसार, चेन्नामनेनी रमेश ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 (1) (f) के तहत नागरिकता के संबंध में धोखाधड़ी, गलत प्रतिनिधित्व और फर्जी तरीके से तथ्यों को छुपाया है।
  • ग्राम सचिवालय प्रणालीकी स्थापना आंध्र प्रदेश के काकीनाडा ज़िले में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर।
आंध्र प्रदेश ग्राम और वार्ड सचिवालयों की स्थापना करके अन्य राज्यों के लिये एक आदर्श बन गया है।

इसके माध्यम से शासन के विकेंद्रीकरण के स्वरूप का आधुनिकीकरण किया गया है। इस प्रकार की प्रणाली के माध्यम से सरकार की योजनाओं और नीतियों का सीधा लाभ नागरिकों को मिलेगा साथ ही कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन और विश्लेषण भी किया जा सकेगा।

  • व्यय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति(Apointment of expenditure observers) भारतीय निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिये भारतीय राजस्व सेवा के दो पूर्व अधिकारियों मधु महाजन तथा बी. मुरली कुमार को विशेष व्यय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया।

निर्वाचन आयोग, संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representative Of Peoples Act), 1951 की धारा 20 B के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर व्यय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है। व्यय पर्यवेक्षकों का कार्य चुनाव के दौरान सभी गतिविधियों और खुफिया इनपुट्स पर कार्यवाही की निगरानी करना है। इसके अतिरिक्त व्यय पर्यवेक्षकों का कार्य सीविज़िल (CIVIJIL) और मतदाता हेल्पलाइन 1950 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर कठोर और प्रभावी कार्यवाही करना है।

  • उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने ‘लोकतंत्र के स्वर’ (खंड-2) तथा ‘ द रिपब्लिकन एथिक’ (खंड-2) पुस्तकों का विमोचन किया। दोनों पुस्तकें राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के कार्यकाल के दूसरे वर्ष (जुलाई, 2018 से जुलाई, 2019) में दिये गए 95 भाषणों का संकलन है।

इन पुस्तकों को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग ने प्रकाशित किया है। इस पुस्तक में राष्ट्रपति के भाषण को आठ श्रेणियों में बाँटा गया है।

  1. एड्रेसिंग द नेशन
  2. विंडोज़ टू द वर्ल्ड
  3. एडुकेटिंग इंडियाः इक्यूपिंग इंडिया
  4. धर्म ऑफ पब्लिक सर्विस
  5. ऑनरिंग अवर सेंटीनल्स
  6. स्पीरिट ऑफ कान्स्टिटूशन एंड लॉ
  7. एकनॉलेजिंग एक्सेलेंस तथा महात्मा गांधीः मोरल एकजेम्पलर
  8. गाइडिंग लाइट
  • गृह मंत्रालय ने सेवानिवृत्त IAS और पूर्व रक्षा सचिव संजय मित्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है जो लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बीच जम्मू और कश्मीर की परिसंपत्तियों और देनदारियों के विभाजन पर निर्णय लेगी।

संजय मित्रा के अतिरिक्त इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अरुण गोयल तथा वर्तमान महालेखा-नियंत्रक (Controller General of Accounts-CGA) गिरिराज प्रसाद गुप्ता भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने यह निर्णय जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 85 के तहत लिया है।

  • NRC वह रजिस्टर है जिसमें सभी भारतीय नागरिकों का विवरण शामिल है। इसे 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। रजिस्टर में उस जनगणना के दौरान गणना किये गए सभी व्यक्तियों के विवरण शामिल थे।

इसमें केवल उन भारतीयों के नाम को शामिल किया जा रहा है जो कि 25 मार्च, 1971 के पहले से असम में रह रहे हैं। उसके बाद राज्य में पहुँचने वालों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा। NRC उन्हीं राज्यों में लागू होती है जहाँ से अन्य देश के नागरिक भारत में प्रवेश करते हैं।

  • केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के अनुसार,टीवी पर कोई भी ऐसा कार्यक्रम नहीं दिखाया जाना चाहिये जो बच्चों की छवि को खराब करता हो। ऐसे कार्यक्रमों में किसी तरह की अभ्रद भाषा और हिसंक दृश्‍यों का प्रयोग भी नहीं होना चाहिये।
  • 2019 के 17वीं लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को नेता प्रतिपक्ष पद की पात्रता हेतू आवश्यक न्यूनतम 10% सीटें प्राप्त नहीं हो सकी। यह एक सांविधिक पद है,जो संसद में विपक्ष नेता वेतन और भत्ता अधिनियम,1977 से शक्ति प्राप्त करता है। राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष विपक्ष में सबसे अधिक संख्या वाले दल के नेता को इसका दर्जा प्रदान किया जाता है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 1956 में जारी किए गए निर्देशों का पालन,अध्यक्ष द्वारा इस दौरान किया जाना चाहिए।जिसके अनुसार सदन की बैठक आयोजित होन के लिए आवश्यक गणपूर्ति के 1/10वें भाग के बराबर सीटें नहीं होने पर लोकसभा अध्यक्ष,उक्त दल के सदस्य को इस पद हेतू मान्यता प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं है।

इसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।तथा उस पैनल का सदस्य होता है,जो प्रमुख संवैधानिक और सांविधिक पदों जैसे-CVC,CBI के निदेशक,लोकपाल के लिए उम्मीदवारों का चयन करता है। महत्व:-यह दो राजनीतिक दलों के बीच समझौता करते हैं जो आमतौर पर एक दूसरे की नीतियोों का विरोध करते हैं।साथ हीं निष्पक्षता की स्थिति उत्पन्न करता है।

  • यह नीतिगत व विधायी कार्यों में विपक्ष की कार्यप्रणाली में सामंजस्य और प्रभावशीलता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निष्पादन भी करता है।
  • 16वीं लोकसभा(2014) में मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण नियुक्तियों में विलम्ब हुआ।

प्रोटेम स्पीकर-मध्य प्रदेश की टीकमगढ़ लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार 17वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर होंगे। सदन का सबसे वरिष्ठ सदस्य होता है जो स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं होने तक सदन की कार्यवाही को संचालित करता है। राष्ट्रपति अल्पकाल के लिये एक अध्यक्ष की नियुक्ति करता है जिसे प्रोटेम या सामयिक अध्यक्ष कहते हैं। प्रोटेम लैटिन भाषा के ‘प्रो टेम्पोर’ शब्द का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ ‘कुछ समय के लिये’ होता है।प्रोटेम स्पीकर का मुख्य उद्देश्य नए सदस्यों को शपथ दिलाना होता है।

  • मेघालय के मुख्यमंत्री ‘कॉनराड के संगमा’ (Conrad K Sangma) के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त।इसको अरूणाचल प्रदेश,मणिपुर,मेघालय और नागालैंड़ में राज्यस्तरीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त है।राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त करनेवाली पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली पार्टी बन गई है।वर्ष 2013 में मेघालय के पूर्व लोकसभा अध्यक्ष, दिवंगत पूर्णो अगितोक संगमा (Purno Agitok Sangma) द्वारा गठित इस पार्टी का चुनाव चिह्न ‘किताब’ है।
  • यह देश का 8वाँ राष्ट्रीय राजनीतिक दल बन गया है।अन्य सात राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं:-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,भारतीय जनता पार्टी,बहुजन समाज पार्टी,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(मार्कसवादी),नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी तथा अॉल इंडिया तृणमूल कांग्रेस।
  • निर्वाचन आयोग द्वारा किसी दल को राष्ट्रीय दल के रुप में मान्यता प्रदान की जाती हैं यदि वह निम्नलिखित अहर्ताओं में से कम से कम एक को पूरा करता है।

1.यदि उसे लोकसभा अथवा विधानसभा के आम चुनावों में चार या अधिक राज्यों में डाले गए कुल वैध मतों का 6% प्राप्त हुआ हो।तथा इसके अतिरिक्त उस दल ने किसी भी राज्य या राज्यों से लोकसभा की कम से कम चार सीटें प्राप्त की हों;अथवा 2.यदि उसने आम चुनाव में लोकसभा की 2% सीटों पर विजय प्राप्त की हो;और ये सदस्य तीन विभिन्न राज्यों से निर्वाचित हुए हों;अथवा 3.यदि किसी दल को कम से कम चार राज्यों में राज्यस्तरीय दल के रुप में मान्यता प्राप्त हो।

  • जलशक्ति मंत्रालयका गठन जल संसाधन,नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को मिलाकर किया गया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत को जल शक्ति मंत्री बनाया गया है।जल संबंधी सभी कार्यों का विलय इस मंत्रालय में किया जाएगा। वर्तमान में कई केंद्रीय मंत्रालय हैं जो जल संबंधी अलग-अलग कार्यों का निर्वहन करते हैं। जैसे- ‘पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय’ को देश की अधिकांश नदियों के संरक्षण का काम सौंपा गया है।शहरी जल आपूर्ति की देख-रेख ‘आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय’ द्वारा की जाती है जबकि सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएँ ‘कृषि मंत्रालय’ के अंतर्गत आती हैं। अंतर्राष्ट्रीय तथा अंतर्राज्यीय जल-विवादों के साथ ही नमामि गंगे (Namami Gange) परियोजना को भी इस मंत्रालय के दायरे में लाया जाएगा।


24 अप्रैल, 1993 को किए गए 73 वें संशोधन के कारण इस दिन को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

25 खासी किंगडम के महासंघ ने वर्तमान मेघालय को भारत का हिस्सा बनाने वाले 1947 के समझौतों के पुनरावलोकन की योजना तैयार की है।इसका उद्देश्य केंद्रीय कानूनों से आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं की रक्षा करना है।15 दिसंबर, 1947 से 19 मार्च, 1948 के बीच खासी किंगडम के महासंघ ने भारत के डोमिनियन के साथ इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसन और एनेक्सड (Instrument of Accession and Annexed) समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।17 अगस्त, 1948 को गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने इन राज्यों के साथ सशर्त संधि पर हस्ताक्षर किये। हालाँकि, खासी किंगडम ने भारत के अन्य राज्यों के विपरीत विलय पत्र (Instrument of Merger) पर हस्ताक्षर नहीं किये। ब्रिटिश शासन में खासी क्षेत्र को खासी किंगडम और ब्रिटिश क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। उस समय ब्रिटिश सरकार को खासी किंगडम पर कोई क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त नहीं था और अगर उन्हें किसी उद्देश्य के लिये ज़मीन की आवश्यकता होती थी तो उन्हें इन राज्यों के प्रमुखों से संपर्क करना पड़ता था। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश क्षेत्र भारतीय प्रभुत्व का हिस्सा बन गया लेकिन खासी राज्यों ने स्टैंडस्टिल समझौते के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किये, जिसके तहत इन राज्यों को कुछ अतिरिक्त अधिकार प्राप्त थे।

भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान निर्वाचन आयोग ने जून 2011 में ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान’ (India International Institute of Democracy and Election Management-IIDEM) की स्थापना की थी। भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIDEM) सहभागी लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन हेतु अनुसंधान और प्रशिक्षण का एक उन्नत संसाधन केंद्र है। यह संस्थान भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र, स्वीडन के ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस’ (International Institute of Democracy and Electoral Assistance- IDEA) जैसे राष्ट्रमंडल और अंतर-सरकारी संगठनों के सहयोग से विकसित किया गया है। ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस’ के चार घटक इस प्रकार हैं- प्रशिक्षण और क्षमता विकास मतदाता शिक्षा और नागरिक भागीदारी अनुसंधान, नवाचार और प्रलेखन अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाएँ और तकनीकी सहयोग। चुनाव आयोग पर्यवेक्षकों का चयन विभिन्न केंद्रीय सेवाओं से किया जाता है जैसे- भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा। ये पर्यवक्षक चुनाव प्रक्रिया के समापन तक निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। अगस्त 1996 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में एक नई धारा 20B को जोड़ने हेतु संशोधन किया गया। जो पर्यवेक्षकों को चुनाव के संचालन, विशेष रूप से वोटों की गिनती के संबंध में वैधानिक शक्तियाँ प्रदान करता है। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20B और भारत के संविधान के तहत समस्त शक्तियों प्राप्त हैं। ये आयोग के सदस्य होते हैं, जो नियुक्ति से लेकर चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने तक आयोग के अधीक्षण, नियंत्रण और अनुशासन में कार्य करते हैं।
वोटर टर्नआउट एप चुनाव आयोग द्वारा एंड्रायड यूज़र्स के लिये लॉन्च इस एप की मदद से मतदान के दौरान रियल टाइम में यह जाना जा सकता है कि वोटरों की संख्या और कहाँ कितने प्रतिशत मतदान हुआ, इस बात की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जल्दी ही इस एप को अपडेट किया जाएगा, जिसके बाद यूज़र्स मतदाता उपस्थिति को चुनाव के चरण, लिंग और क्षेत्र के हिसाब से फिल्टर करके भी देख सकेंगे। इसके अलावा संसदीय क्षेत्र स्तर पर डेटा को एक अन्य एप के ज़रिये लगातार अपडेट किया जाएगा ताकि रियल टाइम जानकारी दी जा सके।

गुरुग्राम में देश का पहला वोटर पार्क बनाया गया है। हरियाणा के साइबर सिटी स्धित इस पार्क के माध्यम से लोगों को मतदान के लिये जागरूक किया जाएगा और उन्हें मतदान के महत्त्व से अवगत कराया जाएगा। गुरुग्राम में विकास भवन के टेक्नोलॉजी पार्क में इस वोटर पार्क को बनाने में छह लाख रुपए की लागत आई है और इस पार्क को हरियाणा विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखा जाएगा।


केंद्र सरकार ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के कार्यालय में उप-नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (समन्वय, संचार और सूचना प्रणाली) के एक पद के सृजन को मंजूरी दे दी। इस पद के धारक का काम राज्य लेखाधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना, दूरसंचार के लेखा और भारतीय लेखा विभाग (IA&AD) के अंतर्गत विभिन्न सूचना प्रणाली की पहलों का निरीक्षण करना होगा। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का पद संवैधानिक है तथा संवैधानिक पदाधिकारी के रूप में इसे मुख्यत: त्रिस्तरीय सरकार- संघीय, प्रांतीय और स्थानीय; राज्य के स्वामित्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक उपक्रमों और संघीय तथा प्रांतीय सरकारों द्वारा वित्तपोषित स्वायत्त निकायों के एकाउंट्स का ऑडिट और इससे संबंधित कार्यकलापों का उत्तरदायित्व निभाना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगामी लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिये निर्वाचन आयोग को मतगणना के दौरान एक विधानसभा क्षेत्र में VVPAT से पर्चियों की आकस्मिक जाँच के लिये अब पाँच EVM की पर्चियों का मिलान करने का आदेश दिया है। इनमें से किन्हीं भी पाँच मशीनों की पर्चियाँ जाँच के लिये चुनी जाएंगी। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू तथा 21 अन्य पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर परिणाम की घोषणा से पहले एक लोकसभा सीट पर 50% EVM की VVPAT से मिलान की मांग की थी।


सामुदायिक रेडियो स्टेशन और SVEEP (Community Radio Stations and SVEEP) भारत के चुनाव आयोग ने मतदाताओं को शिक्षित करने और उन तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिये देश भर में 150 से अधिक सामुदायिक रेडियो स्टेशनों (Community Radio Stations) तक पहुँच बनाई है। सामुदायिक रेडियो (Community Radio) एक प्रकार की रेडियो सेवा है जो एक निश्चित क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रसारण सामग्री प्रेषित करती है। इसका प्रसारण छोटे से भौगोलिक क्षेत्र तक ही सीमित होता है। इसमें सामान्य विकास के मुद्दे और चिंताएँ प्रेषित की जाती हैं, जो स्थानीयकृत होने के बावजूद हैं राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास लक्ष्यों से जुड़ी होती हैं। वर्तमान में भारत भर में 180 से अधिक सामुदायिक रेडियो स्टेशन हैं, जो बुंदेलखंडी, गढ़वाली, अवधी और संथाली आदि भाषाओं में प्रसारण का कार्य करते हैं।

व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी (SVEEP) Systematic Voters Education and Electoral Participation SVEEP विभिन्न मोड और मीडिया के माध्यम से नागरिकों, निर्वाचकों तथा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करने और चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में उनकी जागरूकता तथा भागीदारी बढ़ाने के लिये डिज़ाइन किया गया एक कार्यक्रम है। इसे राज्य के सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल के साथ-साथ चुनावों के पिछले अनुभवों के आधार पर डिज़ाइन किया गया है।

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से 50% सदस्य न्यायिक पृष्ठभूमि के होने चाहिये। इस अधिनियम में सार्वजनिक क्षेत्र के व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच के लिये एक सांविधिक निकाय के गठन का प्रावधान है।

  • 25 जनवरी, 1950 को भारत निर्वाचन आयोग के गठन के कारण 'भारत सरकार' ने राजनीतिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस '25 जनवरी' को ही वर्ष 2011 से 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य, विशेषकर नए मतदाताओं के लिये नामांकन को प्रोत्साहित करना, सुविधा प्रदान करना और उनकी संख्या को अधिकतम करना है।

इस संस्करण की थीम ‘नो वोटर टू बी लेफ्ट बिहाइंड’ चुनी गई है।

सन्दर्भ[सम्पादन]