सामान्य अध्ययन२०१९/सामाजिक न्याय

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  • छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की पंचायतों में दिव्यांगों (Differently Abled) के लिये आरक्षण का प्रावधान करने का निर्णय लिया है। प्रत्येक पंचायत में एक स्थान दिव्यांग सदस्य के लिये आरक्षित होगा।

छत्तीसगढ़ राज्य में दिव्यांगों की संख्या राज्य की कुल जनसंख्या का 6 प्रतिशत है। दिव्यांग सदस्यों का या तो चुनाव होगा या उन्हें नामित किया जाएगा। यदि दिव्यांग सदस्य का चयन चुनावी प्रक्रिया द्वारा नहीं होता, तो किसी एक पुरुष या महिला सदस्य को बतौर पंच नामित किया जाएगा। ब्लाक तथा ज़िला पंचायतों के लिये ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य सरकार दो दिव्यांग सदस्यों को नामित करेगी जिसमें एक महिला तथा एक पुरुष शामिल होगा। इस निर्णय के क्रियान्वयन के लिये छत्तीसगढ़ सरकार को राज्य पंचायती राज अधिनियम, 1993 (State Panchayati Raj Act, 1993) में संशोधन करना होगा। निर्णय का महत्त्व:

इस प्रावधान के लागू होने के बाद राज्य में लगभग 11,000 दिव्यांग सदस्य राज्य की पंचायती व्यवस्था का हिस्सा होंगे। इस निर्णय के माध्यम से राज्य के दिव्यांग वर्गों की न सिर्फ सामाजिक तथा राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी बल्कि वे मानसिक रूप से सशक्त होंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़, पंचायतों में दिव्यांगों के लिये आरक्षण लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा। दिव्यांगों से संबंधित संवैधानिक तथा कानूनी उपबंध:

राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों (Directive Principles of State Policy-DPSP) के अंतर्गत अनुच्छेद-41 बेरोज़गार, रोगियों, वृद्धों तथा शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को काम, शिक्षा तथा सार्वजनिक सहायता का अधिकार दिलाने के लिये राज्य को दिशा निर्देश देता है। संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य सूची (State List) के विषयों में दिव्यांगों तथा बेरोज़गारों के संबंध में प्रावधान दिये गए हैं। दिव्यांग अधिकार कानून, 2016 (Rights of Person with Disability Act, 2016) के तहत दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में 4% तथा उच्च शिक्षा के संस्थाओं में 5% के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

  • असम सरकार ने घोषणा की है कि जनवरी 2021 से दो से अधिक बच्चों वाले लोग सरकारी नौकरी के आवेदन हेतु पात्र नहीं होंगे। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद असम चौथा राज्य है जहाँ सरकारी नौकरियों के लिये आवेदन करने हेतु इस प्रकार के नियम की घोषणा की गई है।
  • 10 दिसंबर को विश्व भर में मानवाधिकार दिवस (Human Rights Day)मनाया गया। वर्ष 2019 की थीम ‘यूथ स्टैंडिंग अप फॉर ह्यूमन राइट्स’ है।

लक्ष्य:-इस मानवाधिकार दिवस पर संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य युवाओं को परिवर्तन के एजेंट के रूप में आगे लाना तथा नस्लवाद,घृणास्पद भाषण,गुंडागर्दी,भेदभाव के खिलाफ एवं जलवायु न्याय के लिये संघर्ष को प्रोत्साहित करना है। पृष्ठभूमि:-मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights- UDHR) एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर, 1948 को पेरिस (फ्राँस) में अपनाया था। इस घोषणा में बताया गया है कि विश्व में न्याय,स्वतंत्रता और शांति के स्तंभ,मानव जाति के समान तथा अक्षम्य अधिकार एवं उनकी अंतर्निहित गरिमा पर टिके हुए है।

वर्ष 1991 में पेरिस में हुई संयुक्त राष्ट्र की बैठक ने सिद्धांतों का एक समूह(जिन्हें पेरिस सिद्धांतों के नाम से जाना जाता है) तैयार किया जो आगे चलकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की स्थापना और संचालन की नींव साबित हुआ।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1993 में 10 दिसंबर को प्रतिवर्ष मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की।

  • प्रत्येक वर्ष 2 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय गुलामी उन्मूलन दिवस (International Day for the Abolition of Slavery) मनाया जाता है।

इसका उद्देश्य मानव तस्करी,बाल श्रम,आधुनिक गुलामी के अन्य रूपों जैसे- ज़बरदस्ती शादी और सशस्त्र संघर्ष के दौरान बच्चों की सेना में ज़बरन भर्ती से संबंधित मुद्दों पर जागरूकता फैलाना है। 2 दिसंबर,1929 को इसकी शुरुआत की गई थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्रत्येक 4 में से 1 बच्चा आधुनिक गुलामी का शिकार है। ILO के अनुसार,विश्व में लगभग 40 मिलियन लोग आधुनिक गुलामी के शिकार हैं जिसमें 15.4 मिलियन ज़बरन शादी के है और 24.9 मिलियन लोग बंधुआ श्रम में शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन(International Labour Organisation- ILO)

यह ‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक विशिष्ट एजेंसी है, जो श्रम संबंधी समस्याओं/मामलों, मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक, सामाजिक संरक्षा तथा सभी के लिये कार्य अवसर जैसे मामलों को देखती है। इस संगठन की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् ‘लीग ऑफ नेशन्स’ (League of Nations) की एक एजेंसी के रूप में सन् 1919 में की गई थी। भारत इस संगठन का एक संस्थापक सदस्य रहा है। मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है।

  • बोपल घोषणा संबंधित है:-गैर सरकारी संगठनों से
बोपल घोषणा में भारत के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं तथा NGO समुदाय के लगभग 30 नेताओं ने भाग लिया। इस बैठक में निम्नलिखित प्रस्तावित आठ सिद्धांतों के आधार पर घोषणाएँ तैयार कीं गई-

समुदाय आधारित संगठनों (Community-Based Organisations-CBOs) की प्रमुखता।

  1. समानता।
  2. विकेंद्रीकरण
  3. एक सहायक एजेंसी की आवश्यकता।
  4. मॉनीटरिंग और मूल्यांकन।
  5. प्रशिक्षण और सॉफ्टवेयर।
  6. विकास की सतत् गति।
  7. संगठनात्मक पुनर्गठन।
  • मोची स्वाभिमान पहल की शुरुआत केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री ने की। यह एक राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसके तहत चमड़ा क्षेत्र कौशल परिषद ( Leather Sector Skill Council-LSSC),कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (Corporate Social Responsiblity-CSR) फंड के माध्यम से चमड़ा आधारित सेवाएँ प्रदान करने वाले मोची समुदाय को समर्थन देगी।

यह पहल मोची समुदाय के सम्मानजनक तरीके से कार्य करने में सहायक होगी।

  • प्रधानमंत्री ने 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में फिट इंडिया अभियान की शुरुआत की। इसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय को रोज़मर्रा के जीवन में फिट रहने के साधारण और आसान तरीके शामिल करने के लिये प्रेरित करना है।

फिट इंडिया एक मज़बूत और प्रगतिशील भारत की मांग है । अतः सभी को मानसिक एवं शारीरिक रूप से फिट रहने के लिये इस अभियान की अत्यंत आवश्यकता है। इस कार्यक्रम के तहत खेलों और नृत्य के रूप में भारत की समृद्ध स्वदेशी विरासत का प्रदर्शन किया गया तथा फिटनेस को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया।।

  • विश्व स्तनपान सप्ताह (जननी पूर्ण स्नेह कार्यक्रम)-1 से 7 अगस्त, 2019 तकआयोजित किया गया।

इसके तहत कई गतिविधियों का आयोजन व स्तनपान के संरक्षण,प्रचार और समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस बार की थीम थी:-‘माता-पिता को सशक्त बनाना,स्तनपान को सक्षम करना (Empower Parents. Enable Breastfeeding)।

स्तनपान महत्वपूर्ण है क्योंकिः
  1. यह माँ और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
  2. यह प्रारंभिक अवस्था में दस्त और तीव्र श्वसन संक्रमण जैसे रोगों को रोकता है और इससे शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।
  3. यह माँ में स्तन कैंसर,अंडाशय के कैंसर,टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग होने के खतरे को कम करता है।
  4. यह नवजात को मोटापे से संबंधित रोगों,मधुमेह/डायबिटीज से बचाता है और IQ बढ़ाता है।

परिणाम ऐसे प्रयासों से कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ने और सरकार को सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में मदद मिलेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्तनपान को बढ़ाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने से प्रत्येक वर्ष 8,00,000 से ज़्यादा जीवन बचाने में सक्षम है।

  • पेरिस सिद्धांत (Paris Principles) मानवाधिकारों के संरक्षण से संबंधित है।

20 दिसंबर,1993 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु पेरिस सिद्धांतों को अपनाया था। इसने दुनिया के सभी देशों को राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ स्थापित करने के लिये निर्देश दिये थे। पेरिस सिद्धांतों के अनुसार, मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त एवं स्वतंत्र संस्था होनी चाहिये।

  • संकल्प योजना का आह्वान कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने की। इसका उद्येश्य समन्वय के माध्यम से ज़िला-स्तरीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान केंद्रित करना है। ज़िला-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने के लिये मंत्रालय द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:-
  1. स्किल इंडिया पोर्टल:-इस प्रणाली का प्रयोग ज़िला स्तर पर भी कौशल संबंधी आंकडों को प्राप्त करने और उसे अभिसरित करने के लिये किया जाता है।
  2. राज्यों को अनुदान:-आंध्र प्रदेश सहित असम,बिहार,गुजरात,जम्मू और कश्मीर,महाराष्ट्र,मणिपुर,पंजाब तथा उत्तर प्रदेश को मिलाकर कुल 9 राज्यों को मंत्रालय द्वारा अनुदान भी दिया गया है।
  3. ज़िलों को भी दिया गया अनुदान:- इन राज्य के अलावा,मंत्रालय द्वारा आकांक्षात्मक कौशल अभियान के तहत 117 आकांक्षी जिलों को भी अनुदान जारी किया गया है।

पृष्ठभूमि भारत सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से ‘संकल्प’ (SANKALP- Skills Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion) तथा ‘स्ट्राइव’ (STRIVE -Skill Strengthening for Industrial Value Enhancement) नामक योजनाओं को मंज़ूरी दी है। 4,455 करोड़ रुपए की केंद्र प्रायोजित योजना ‘संकल्प’ में विश्व बैंक द्वारा 3,300 करोड़ रुपए की ऋण सहायता शामिल है।

संकल्प का उद्देश्य महिलाओं, अजा./अजजा. और दिव्यांगों सहित हाशिये पर जीवन जी रहे समुदायों को बड़े पैमाने पर दक्षता प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करना है।
‘स्ट्राइव’2,200 करोड़ रुपए की केंद्र प्रायोजित योजना जिसके लिए विश्व बैंक द्वारा आधी राशि ऋण सहायता के रूप में दी जाएगी।

इसके द्वारा ITI के कार्य निष्पादन में संपूर्ण सुधार को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण एवं बाज़ार की मांग के अनुरूप व्यावसायिक प्रशिक्षण तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना है। इसकी समापन तिथि 30 नवंबर 2022 निर्धारित की गई है।

  • संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ और अपराध कार्यालय (United Nations Office on Drugs and Crime - UNODC) द्वारा मानव हत्याओं पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार,दुनियाभर के तमाम देशों में हत्याओं के कारण मरने वाले लोगों की संख्या सशस्त्र संघर्षों (Armed Conflicts) के कारण मरने वाले लोगों की संख्या से 5 गुना अधिक है।

मानव हत्या संबंधी इन आँकड़ों में सबसे अधिक लगभग 37.4 प्रतिशत, अमेरिका में हुई थी । भारत के संदर्भ में वर्ष 2009 से वर्ष 2015 के बीच यहाँ होने वाली कुल हत्याओं में 10 प्रतिशत की कमी आई है। भारत के मुख्यतः उत्तरी राज्यों में हत्या की दर में वृद्धि देखने को मिली है, जबकि कुछ दक्षिणी राज्यों (विशेषतः आंध्र प्रदेश) में यह दर काफी कम है।

  • आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2018-19 के अनुसार भारत की जनसंख्या वृद्धि दर अनुमान की अपेक्षा और अधिक तेज़ी से घटेगी।

लेकिन इसी समयावधि में भारत के समक्ष अपनी जनसंख्या की बढ़ती उम्र को प्रबंधित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। वर्ष 1971-81 के दौरान भारत की जनसंख्या वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011-16 में 1.3 प्रतिशत हो गई। आँकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 1970-80 से अब तक भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में काफी गिरावट आई है।

युवा[सम्पादन]

  • जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन माँ (Operation 'Maa') के माध्यम से इस वर्ष लगभग 50 युवक,आतंकी संगठनों को छोड़कर समाज की मुख्य धारा में शामिल हुए हैं।

यह ऑपरेशन सेना के चिनार कोर द्वारा चलाया गया। यह एक प्रकार का मानवीय ऑपरेशन है जिसके अंतर्गत घरों से लापता हुए युवाओं का पता लगाकर और उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें वापस घर लाना था।

  • 23 अगस्त, 2019 को नई दिल्ली में दयालुता पर पहले विश्व युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया।

उद्देश्य: इस सम्मेलन का उद्देश्य संवेदना, सद्भाव, करुणा जैसे गुणों के ज़रिये युवाओं को प्रेरित करना था,ताकि वे आत्मविकास कर सकें और अपने समुदायों में शांति स्थापित कर सकें। थीम:-कार्यक्रम की विषयवस्तु/थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम् : समकालीन विश्व में गांधीः महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह’ (Vasudhaiva Kutumbakam: Gandhi for the Contemporary World: Celebrating the 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi) थी। आयोजनकर्त्ता:-इसका आयोजन UNESCO के महात्मा गांधी शांति और विकास शिक्षा संस्थान (Mahatma Gandhi Institute of Education for Peace and Sustainable Development-MGIEP) तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development) ने किया।

  • विश्व युवा कौशल दिवस (World Youth Skills Day)-15 जुलाई के अवसर पर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने स्किल इंडिया अभियान की चौथी वर्षगाँठ पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।

इस अवसर पर युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिये कई घोषणाएँ तथा समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए। प्रतिवर्ष एक करोड़ से ज़्यादा युवा कौशल विकास कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं।

मंत्रालय द्वारा की गई महत्त्वपूर्ण घोषणाएँ

अप्रेन्टिसशिप में डिग्री,इलेक्ट्रिक वाहनों पर ITI में नए पाठ्यक्रम तथा उन्नत कृषि पर नए पाठ्यक्रमों की घोषणा। प्रतिभागियों के संदर्भ में मुद्दों और उनसे जुड़े संभावित समाधानों पर चर्चा के लिये कौशल युवा संवाद नाम से युवाओं के लिये राष्‍ट्रीय स्‍तर पर संवाद का आयोजन। वित्‍तीय क्षेत्र में अप्रेन्टिसशिप ट्रेंनिंग के लिये भारतीय स्‍टेट बैंक और HDFC बैंक के साथ सहयोग की घोषणा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 170,000 ग्रामीण डाक सेवकों को प्रमाण-पत्र देने के लिये भारतीय डाक भुगतान बैंक के साथ करार की घोषणा। महिला सशक्तीकरण के लिये अर्बन क्‍लैप, नेस वाडिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स तथा मेकडोनाल्‍ड, श्री शंकरलाल सुंदरबाई शासून जैन कॉलेज फॉर वूमेन, बॉट VFX लिमिटेड तथा विक्रम ग्रुप जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियों और संस्‍थाओं के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर। ITI नागपुर में एयरोस्‍ट्रक्‍चर फिटर और वेल्‍डर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा।

जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्ग[सम्पादन]

लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिये योजना (SPPEL) इस योजना की निगरानी कर्नाटक के मैसूर में स्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (Central Institute of Indian Languages-CIIL) द्वारा की जाती है। इस योजना का एकमात्र उद्देश्य देश की ऐसी भाषाओं का दस्तावेज़ीकरण करना और उन्हें संग्रहित करना है जिनके निकट भविष्य में लुप्तप्राय या संकटग्रस्त होने की संभावना है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission-UGC) अनुसंधान परियोजनाओं को शुरू करने के लिये केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में लुप्तप्राय भाषाओं के लिये केंद्र स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

बच्चों से संंबंधित विषय[सम्पादन]

  • यूनिसेफ (UNICEF) ने पिछले 20 वर्षों में पहली बार बच्चों के पोषण से संबंधित वर्ल्ड चिल्ड्रन रिपोर्ट-2019 जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 5 वर्ष तक की उम्र के हर 3 बच्चों में से एक बच्चा कुपोषण अथवा अल्पवजन की समस्या से ग्रस्त है। पूरे विश्व में लगभग 200 मिलियन तथा भारत में प्रत्येक दूसरा बच्चा कुपोषण के किसी न किसी रूप से ग्रस्त है।

एक वर्ष के भीतर 5 वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर को बाल मृत्यु दर कहते हैं। वर्ल्ड चिल्ड्रन रिपोर्ट (World’s Children Report) के अनुसार वर्ष 2018 में भारत में कुपोषण के कारण 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 8 लाख बच्चों की मृत्यु हुई जो कि नाइजीरिया (8.6 लाख ), पाकिस्तान (4.09 लाख ) और कांगो गणराज्य (2.96 लाख ) से भी अधिक है।

यूनिसेफ की स्थापना 11 दिसंबर, 1946 को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप और चीन में बच्चों तथा महिलाओं की आपातकालीन ज़रुरतों को पूरा करने के लिये की गई थी।

वर्ष 1950 में यूनिसेफ की कार्य सीमाओं को विकासशील देशों के बच्चों तथा महिलाओं की दीर्घकालिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये विस्तारित कर दिया गया। वर्ष 1953 में यह संयुक्त राष्ट्र का स्थायी अंग बन गया।

  • वर्ष 2019 की तस्करी रिपोर्ट में तस्करी की राष्ट्रीय प्रकृति पर प्रकाश डाला गया है जिसके अनुसार वैश्विक स्तर पर (कुछ विशेष क्षेत्रों को छोड़कर) लगभग 77% मामलों में पीड़ितों को उनके देश की सीमाओं से बाहर ले जाने के बजाय देश के अंदर ही उनकी तस्करी की जाती है।

विश्व भर में लगभग 25 मिलियन वयस्क तथा बच्चे श्रम एवं यौन तस्करी से पीड़ित हैं। भारत को टियर 2 श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार तस्करी के उन्मूलन के लिये न्यूनतम मानकों को पूरी तरह से पूरा नहीं कर पाई है लेकिन तस्करी उन्मूलन के लिये महत्त्वपूर्ण प्रयास कर रही है। हालाँकि पिछले रिपोर्ट की तुलना में इस बार भारत की स्थिति बेहतर है।

12 जून को दुनियाभर में आयोजित ‘बाल श्रम निषेध दिवस’ की थीम- “Children Shouldn't work in fields, but on dreams” रखी गई है। बालश्रम उन्मूलन को दृष्टिगत रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2002 में की थी। बाल मज़दूरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इस काम से निकालकर उन्हें शिक्षा दिलाना इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य है। ILO के अनुसार, आज भी दुनियाभर में 152 मिलियन बच्चे मज़दूरी करते हैं।

यूनेस्को द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार, 60% बच्चे माध्यमिक/उच्च विद्यालय के दौरान तथा 50% बच्चे उच्च माध्यमिक विद्यालय के दौरान Bullying (बच्चों का एक-दूसरे को सताना) के शिकार पाए गए। प्राथमिक विद्यालय के दौरान लगभग 40% बच्चों का यौन उत्पीड़न किया गया। 18% बच्चों ने स्कूल प्राधिकारियों को अपने SOGI आधारित Bullying की जानकारी दी।

सेव द चिल्ड्रेन (Save the Children) नामक गैर-सरकारी संस्था द्वारा जारी ग्लोबल चाइल्डहुड रिपोर्ट (Global Childhood Report) में वैश्विक स्तर पर बाल अधिकारों की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए इस संबंध में उचित कदम उठाने की वकालत की गई है। भारत में संक्रामक रोगों को बाल मृत्यु के लिये सर्वाधिक ज़िम्मेदार तत्त्व माना गया है, इसके बाद चोट, मस्तिष्क ज्वर, खसरा और मलेरिया को शामिल किया गया है। बाल मृत्यु दर के मामले में भारत का प्रदर्शन केवल पाकिस्तान (74.9%) से बेहतर पाया गया। इस संबंध में भारत अपने अन्य पड़ोसी देशों जैसे- श्रीलंका, चीन, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से पीछे रहा।वर्ल्ड चाइल्डहुड रिपोर्ट विभिन्न देशों के बच्चों और किशोरों (0-19 वर्ष) की स्थिति का मूल्यांकन आठ संकेतकों के आधार पर करती है जो इस प्रकार हैं- पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर कुपोषण अशिक्षा बाल श्रम बाल विवाह किशोर अवस्था में बच्चों का जन्म बाल हत्या विस्थापन,भारत में वर्ष 2000 के बाद से किशोर उम्र में बच्चों को जन्म देने की दर में 63% तक की कमी दर्ज की गई है। परिणामस्वरूप वर्तमान में भारत में 2 मिलियन कम युवा माताएँ हैं।

दिव्यांगों से संबंधित विषय[सम्पादन]

  • अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस (International Day Of Persons With Disabilities) 3 दिसंबर को प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

वर्ष 2019 के लिये इसकी थीम- विकलांग व्यक्तियों और उनके नेतृत्व की भागीदारी को बढ़ावा देना: 2030 विकास एजेंडा पर कार्रवाई करना (Promoting the participation of persons with disabilities and their leadership: taking action on the 2030 Development Agenda) है उद्देश्य:-दिव्यांगजनों की अक्षमता के मुद्दों पर समाज में जागरूकता,लोगों की समझ और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है। दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान,कल्याण और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी सहायता करना। आधुनिक समाज में दिव्यांगजनों के साथ हो रहे हर प्रकार के भेद-भाव को समाप्त करना। भारत में प्रयास:-इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) का दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग प्रत्येक वर्ष दिव्यांगजन सशक्तीकरण की दिशा में अर्जित उत्कृष्ट उपलब्धियों एवं कार्यों के लिये व्यक्तियों, संस्थानों, संगठनों और राज्य/ज़िला आदि को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करता है।

  • विकलांगता शिखर सम्मेलन 2019’ (Disability Summit, 2019) का आयोजन 6-8 जून,2019 के बीच अर्जेंटीना गणराज्य के ब्यूनस आयर्स शहर में किया जा रहा है।

‘विकलांगता शिखर सम्मेलन 2019’ (Disability Summit, 2019) का यह द्वितीय संस्करण है। प्रथम ‘वैश्विक विकलांगता शिखर सम्मेलन, 2018’ का आयोजन लंदन में किया गया था।

बुजुर्गों से संबंधित विषय[सम्पादन]

वयोश्रेष्ठ सम्मान वरिष्‍ठ नागरिकों की सराहनीय सेवा करने वाले संस्‍थानों और वरिष्‍ठ नागरिकों को उनकी उत्तम सेवाओं तथा उपलब्धियों के सम्‍मान स्‍वरूप प्रदान किया जाता हैं। वयोश्रेष्ठ सम्मान हर साल 1 अक्तूबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (International Day of Older Person) की पूर्व संध्या पर वितरित किये जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस को मनाने के लिये 1 अक्तूबर, 1999 को एक प्रस्ताव अपनाया था।

वर्ष 2013 से 13 विभिन्‍न श्रेणियों में वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान प्रदान किया जाता है। वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान की स्‍थापना सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2005 में की थी और इसे वर्ष 2013 में राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों की श्रेणी में लाया गया। यह युवा पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के निर्माण में बुज़ुर्गों के योगदान को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। इस पुरस्‍कार के लिये भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों और उनके स्वायत्त संगठनों से नामांकन आमंत्रित किये जाते हैं।


प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM- SYM)कोअंतरिम बजट -2019 में घोषित किया गया था, श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 15 फरवरी, 2019 को लागू किया गया।

इस योजना के तहत न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी करने के पश्चात् न्यूनतम 3000 रुपए प्रति माह पेंशन प्रदान की जाएगी।

श्रम और रोज़गार मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान-धन योजना लॉन्च की गई है।सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है

इस योजना के पात्र 18-40 वर्ष की आयु समूह के घर से काम करने वाले श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, ईंट यह मज़दूर, धोबी, घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, निर्माण मज़दूर तथा इसी तरह के अन्य व्यावसायों में काम करने वाले ऐसे श्रमिक होंगे जिनकी मासिक आय 15,000 या उससे कम है। पात्र व्यक्ति को नई पेंशन योजना, कर्मचारी राज्य बीमा निगम और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लाभ के अंतर्गत कवर न किया गया हो और उसे आयकर दाता नहीं होना चाहिये।

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये किसानों को 55 रुपए से 200 रुपए प्रति माह का योगदान देना होगा। उनके द्वारा किये जाने वाले योगदान की धनराशि का निर्धारण योजना से जुड़ने के समय उनकी आयु के आधार पर किया जाएगा

किसान द्वारा जितनी राशि का योगदान किया जाएगा केंद्र सरकार भी उसके बराबर धनराशि का योगदान करेगी। पीएम-किसान (PM-KISAN) योजना के तहत मिलने वाली धनराशि का किसान सीधे पेंशन योजना की योगदान राशि के रूप में भुगतान कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि लघु और सीमांत किसानों (Small and Marginal Farmers- SMF) की आय में वृद्धि करने के लिये, सरकार ने हाल ही में केंद्रीय क्षेत्र की एक नई योजना ‘प्रधानमंत्री किसान निधि’ [Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi (PM-KISAN)] की शुरुआत की है।

यदि पति/पत्‍नी योजना को जारी नहीं रखना चाहते हैं तो ब्‍याज सहित कुल योगदान राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। यदि पति या पत्‍नी नहीं है तो नामित व्‍यक्ति को ब्‍याज सहित योगदान राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। यदि अवकाश प्राप्ति की तारीख के पश्चात् लाभार्थी की मृत्‍यु हो जाती है तो उसकी पत्‍नी को पेंशन धनराशि का 50 प्रतिशत परिवार पेंशन के रूप में दिया जाएगा। पेंशन कोष का प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India-LIC) को पेंशन कोष का फंड प्रबंधक नियुक्‍त किया गया है। निगम पेंशन भुगतान के लिये जवाबदेह होगा। योजना से बाहर निकलना तथा वापसी यदि लाभार्थी कम-से-कम 5 साल तक नियमित योगदान देते हैं और इसके बाद योजना को छोड़ना चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) बैंक की बचत खाता ब्‍याज दर के आधार पर ब्‍याज सहित धनराशि का भुगतान करेगी। यदि नियमित भुगतान में विलंब होता है या अल्‍प समय के लिये भुगतान रूक जाता है तो किसान ब्‍याज के साथ संपूर्ण पिछले बकाए का भुगतान कर सकते हैं। साझा सेवा केंद्र इस योजना का पंजीकरण साझा सेवा केंद्रों के ज़रिये किया जा रहा है। पंजीयन नि:शुल्‍क है। सरकार साझा सेवा केंद्रों को प्रति पंजीयन 30 रुपए का भुगतान करेगी। शिकायत निवारण प्रणाली इस योजना के तहत शिकायतों के निवारण हेतु एक शिकायत निवारण व्‍यवस्‍था भी बनाई जाएगी जिसमें भारतीय जीवन बीमा निगम, बैंक और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पारिवारिक पेंशन: योगदानकर्त्ता की मृत्‍यु होने पर उसका/उसकी पति/पत्‍नी शेष योगदान देकर योजना को जारी रख सकते हैं और पेंशन का लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।


  • उत्कर्ष बांग्ला औरसबूज साथी पश्चिम बंगाल सरकार की इन दोनों योजनाओं को संयुक्त राष्ट्र सूचना सोसाइटी (WSIS) पुरस्कारों में प्रतिष्ठित विश्व शिखर सम्मेलन प्रदान किया गया।

कौशल विकास और छात्रों को साइकिलों के वितरण के लिये दी जाती है।उत्कर्ष बांग्ला के तहत 400 से 1200 घंटे तक निःशुल्क प्रशिक्षण देकर स्कूल छोड़ने वालों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस योजना के तहत, लाभार्थियों को ड्राइविंग, टेलरिंग, टीवी रिपेयरिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ब्यूटीशियन पाठ्यक्रम आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। ‘सबूज साथी’ योजना का उद्देश्य छात्रों, विशेष रूप से लड़कियों को सशक्त बनाना और उच्च शिक्षा में ड्रॉप-आउट रेट को कम करना है। इस योजना के तहत, कक्षा 9 से 12 के लक्षित विद्यार्थियों को 34.94 लाख साइकिलें अब तक वितरित की जा चुकी हैं।

सामाजिक प्रभाव बॉण्ड सामाजिक प्रभाव बॉण्ड (SIB) सार्वजनिक क्षेत्र या प्रशासकीय प्राधिकरण के साथ किया गया एक अनुबंध है, जिसके तहत वह कुछ क्षेत्रों में बेहतर सामाजिक परिणामों के लिये भुगतान तथा निवेशकों को प्राप्त बचत में भागीदारी प्रदान करता है। सामाजिक प्रभाव बॉण्ड कोई अनुबंध (बॉण्ड ) नहीं है, क्योंकि पुनर्भुगतान और निवेश पर वापसी वांछित सामाजिक परिणामों की उपलब्धि पर निर्भर करती है, यदि उद्देश्य प्राप्त नहीं होता है, तो निवेशकों को रिटर्न या मूलधन में से कुछ भी प्राप्त नही होता। इस फंड का उपयोग कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवाओं और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को ऋण देने के लिये किया जाएगा।

  • हाल ही में राजस्थान सरकार ने छात्रवृत्ति और कैरियर विकल्पों की जानकारी प्रदान करने के लिये माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक छात्रों (कक्षा 9वीं से 12वीं तक) की ज़रूरतों को पूरा करने हेतु भारत का पहला ‘कैरियर पोर्टल’ लॉन्च किया है।
  • यह पोर्टल संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (UNICEF) की सहायता से शुरू किया गया है
  • हर साल 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के लिए राष्ट्रीय अनुपालन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह आयोजन देश में लड़कियों को अधिक समर्थन और नए अवसर प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था।
  • वर्ष 2019 ‘उज्ज्वल कल के लिये बालिकाओं का सशक्तीकरण’ थीम के साथ मनाया गया।
  • किशोर न्याय अधिनियम,2015 की धारा 15 के तहत,16-18 वर्ष की आयु के जघन्य अपराध करने वाले बाल अपराधियों से निपटने के लिये विशेष प्रावधान किये गए हैं। किशोर न्याय बोर्ड को प्रारंभिक मूल्यांकन करने के बाद ऐसे बच्चों द्वारा जघन्य अपराधों के मामलों को बाल न्यायालय (सत्र न्यायालय) में स्थानांतरित करने का विकल्प दिया जाता है।
  • सभी बाल देखभाल संस्थानों (चाहे वे राज्य सरकार द्वारा या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित हों या चाहे वे सरकार से अनुदान प्राप्त करते हों) को अधिनियम शुरू होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है।

धार्मिक समूहों के बीच बेरोज़गारी दर में अंतर[सम्पादन]

  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey- PLFS) के आँकड़ों के आधार पर लोकसभा में एक रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया कि भारत के विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच बेरोज़गारी दर में काफी अंतर है।
  • श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के आधार पर भारतीय बेरोज़गारी दर- ग्रामीण पुरुष के लिये 5.8%,ग्रामीण महिलाओं के लिये 3.8%, शहरी पुरुषों के लिये 7.1% और शहरी महिलाओं के लिये 10.8% बताई थी।
  • केंद्र सरकार के अधिकांश सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तीकरण कार्यक्रम निर्धन और दलित वर्गों के लिये हैं,जिससे अल्पसंख्यकों को भी समान रूप से लाभ मिल रहा है।
  • शैक्षिक सशक्तीकरण, रोज़गारोन्मुखी कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अधिसूचित अल्पसंख्यकों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन) की रोज़गार क्षमता बढ़ाने हेतु रणनीति अपनाई गई है।

अल्पसंख्यकों से संबंधित कुछ प्रमुख योजनाएँ

  1. ग़रीब नवाज़ कौशल विकास प्रशिक्षण:-6 अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन) के युवाओं को रोज़गारोन्मुखी अल्पकालिक कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने की इस योजना का कार्यान्वयन मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है ।
  2. नया सवेरा योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है,जिससे सरकारी और निजी नौकरियों में उनकी भागीदारी में सुधार हो।
  3. जियो पारसी योजना का उद्देश्य भारत में पारसियों की कम होती जनसंख्या को बढ़ाना है।
  4. पढ़ो परदेश योजना के अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को विदेश में अध्ययन के लिये शैक्षिक ऋण के ब्याज पर सब्सिडी दी जाती है।
  5. नई मंज़िल:-औपचारिक स्कूली शिक्षा और स्कूल बीच में छोड़ने वालों के कौशल संवर्द्धन हेतू।
  6. उस्ताद (USTTAD):-पारंपरिक कला/शिल्प कौशल और प्रशिक्षण के उन्नयन के लिये।
  7. हुनर हाट योजना:-पारंपरिक शिल्प/कला उत्पादों की बाज़ार तक पहुँच को आसान करना।
  8. हमारी धरोहर:-भारतीय संस्कृति की समग्र अवधारणा के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की समृद्ध विरासत को संरक्षित किया जा रहा है।

केरल सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने फरवरी 2018 में ट्रांसजेंडर सेल की स्थापना की। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके अधिकारों को संरक्षित करना है। ट्रांसजेंडर सेल का मुख्य लक्ष्य राज्य ट्रांसजेंडर न्याय बोर्ड (State Transgender Justice Board) और ज़िला ट्रांसजेंडर न्याय समितियों (District Transgender Justice Committees) के कामकाज में सहायता प्रदान करना है।

ताइवान में समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी हाल ही में ताइवान ने एक विधेयक पारित करते हुए समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी दे दी है। ताइवान समलैंगिक विवाह की अनुमति देने वाला पहला एशियाई देश बन गया है। ताईवान संसद द्वारा पारित यह विधेयक समलैंगिक जोड़ों को भी पुरुष-महिला विवाहित जोड़ों की भाँति ही सुविधाएँ प्रदान करेगा। भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के कुछ प्रावधानों को खत्म करते हुए समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था। विषय से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ…

  1. द्विलैंगिक (Bisexual) - वे जो महिला और पुरुष दोनों के प्रति आकर्षित हों।
  2. विषमलैंगिक (Heterosexual) - वे जो केवल विपरीत लिंग की ओर आकर्षित हों।
  3. समलैंगिक - वे लोग जो अपने ही लिंग के किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति आकर्षित हों।
  4. लेस्बियन (Lesbian)- वे महिलाएँ जो महिलाओं के प्रति आकर्षित हों।
  5. गे (Gay)- वे पुरुष जो दूसरे पुरुष के प्रति आकर्षित हों।
  6. एल.जी.बी.टी. (LGBT) - लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर्ड।
  7. क्वीयर (Quier)- एक ऐसा शब्द जिसमें वे सभी लोग व नज़रिये शामिल हैं, जो मुख्यधाारा द्वारा मान्य जेंडर और यौनिकता की परिभाषा को चुनौती देते हैं।

संदर्भ[सम्पादन]