सामान्य अध्ययन२०१९/सामाजिक संस्थाएं

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  • भारत विश्व का पहला देश बन गया है,जिसने नाविकों के फेशियल बायोमैट्रिक डेटा का संग्रह कर बायोमैट्रिक नाविक पहचान दस्तावेज़ (Biometric Seafarer Identity Document-BSID) जारी किया है। नया पहचान पत्र BSID पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization-ILO) के समझौता संख्या-185 के अनुरूप है। भारत ने अक्तूबर 2015 में इस समझौते पर सहमति व्यक्त की थी।

भारत में BSID परियोजना सी-डैक (Centre for Development of Advanced Computing-CDAC) मुंबई के सहयोग से चलाई जा रही है।

  • समर्थ'(‘Samarth’) की शुरुआत ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस फ्लिपकार्ट ने भारतीय कारीगरों,बुनकरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने के लिये की है।

इसके लिये फ्लिपकार्ट ने गैर-सरकारी संगठनों (NGO) सरकारी निकायों और आजीविका मिशन के साथ भागीदारी की है। इस कदम से इन अनधिकृत समुदायों को पूरे भारतीय बाज़ार तक पहुँच बनाने तथा 150 मिलियन से अधिक ग्राहकों के साथ जुड़ने में मदद मिलेगी। इसके तहत महिलाओं की अगुवाई वाले उद्यमों पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ अलग-अलग तरह के उद्यमी, कारीगर और बुनकर, (जो अक्सर कार्यशील पूंजी, गरीब बुनियादी ढाँचे तक पहुँच की कमी तथा अपर्याप्त प्रशिक्षण जैसी समस्याओं का सामना करते हैं) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वित्त एवं कॉर्पोरेट मंत्रालय ने भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों का समर्थन करने तथा ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को प्रोत्साहित करने के लिये विभिन्न उपाय किये हैं। ई-कॉमर्स के ज़रिये अगले कुछ वर्षों में 1 मिलियन रोज़गार सृजित होने की साथ ही लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग जैसे उद्योगों में रोजगार बढ़ने की भी संभावना है।

पर्यावरण से संबंधित गैर-लाभकारी संगठन[सम्पादन]

ओशन क्लीनअप-यह गैर-लाभकारी संगठन विश्व के महासागरों को प्लास्टिक अपशिष्ट से मुक्त कराने हेतु उन्नत तकनीकों का विकास कर रहा है।यह द ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच(GPGP) की सफाई संबंधी कार्यों को संचालित करता है। द ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच(GPGP)हवाई और कैलिफोर्निया के मध्य का एक क्षेत्र है। प्रोजेक्ट ओशन क्लीनअप के तहत इस क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को महासागर से निकालने के लिए निर्मित एक फ्लोटिंग डिवाइस को द्वितीय प्रयास में पुन:परिनियोजित किया गया। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन ने समुद्री अपशिष्ट से निपटने हेतु "बैंकाक घोषणा-पत्र" पर हस्ताक्षर किए हैं।जो अपनी तरह का पहला घोषणा-पत्र है। 1.इसमें न तो घोषणा-पत्र और न ही इसमें संलग्न कार्रवाई फ्रेमवर्क में विशेष रुप से एकल -उपयोगवाले प्लास्टिक अथवा विदेशी अपशिष्ट के आयात पर प्रतिबंध का उल्लेख किया गया है। 2.इसमें सर्वाधिक उल्लंघन करनेवाली कंपनियों अथवा देशों के लिए दंड़ का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सन्दर्भ[सम्पादन]