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हिंदी भाषा 'ख'/शब्द शक्ति

विकिपुस्तक से

शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को शब्द-शक्ति कहते हैं। सामान्यतः ये तीन प्रकार की होती हैं-

अभिधा शब्द-शक्ति

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यह शब्द शक्ति का पहला प्रकार है, जो शब्दों के शब्दकोशीय अर्थ का बोध कराती है। इसके द्वारा किसी भी शब्द के सामान्य अर्थ का बोध होता है। अभिधा शब्द-शक्ति को तीन भागों में बाँटा जाता है-

  1. रूढ़ि- जब कोई शब्द किसी निश्चित अर्थ का बोध कराए तब वह इसके अंतर्गत लिया जाता है। यह अर्थ यादृच्छिक होता है। जैसे- 'कमल'। किसी भी फूल को कमल नहीं कहा जा सकता है, कमल एक पुष्प विशेष के लिए रूढ़ हो चुका है।
  2. यौगिक- इसमें शब्द के अवयव से उसके अर्थ का बोध होता है। ये अवयव ही शब्द का सही अर्थ जानने में सहायक होते हैं। जैसे- 'भूपति', इसमें भू का अर्थ 'पृथ्वी' होगा तथा पति का अर्थ स्वामी होगा। किंतु इन अवयवों को मिला देने से 'भूपति' का अर्थ 'राजा' होगा।[]
  3. योगरूढ़ि- जब किसी शब्द का अर्थ उसके समूह की सहायता से प्राप्त हो तथा वह शब्द उसी अर्थ के लिए रूढ़ हो चुका हो, वहाँ अभिधा की योगरूढ़ि शक्ति का प्रयोग किया जाता है। जैसे- 'दशानन' शब्द दस सिर वाले 'रावण' के लिए रूढ़ हो चुका है।[]

यह शब्द शक्ति का दूसरा प्रकार है। लक्षणा शब्द शक्ति के दो भेद तथा दो ही उपभेद भी हैं।

रूढ़ा लक्षणा

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प्रयोजनवती लक्षणा

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इसके भी दो भेद हैं-

  1. गौणी लक्षणा
  2. शुद्धा लक्षणा

यह शब्द शक्ति का तीसरा प्रकार है।

  1. डॉ. राजवंश सहाय, 'हीरा' (२००९). भारतीय साहित्यशास्त्र कोश. पटना: बिहार हिन्दी ग्रंथ अकादमी. पृ॰ ९२
  2. अभिधा