हिन्दी व्याकरण/समास

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समास का तात्पर्य है ‘संक्षिप्तीकरण’। दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं। जैसे - ‘रसोई के लिए घर’ इसे हम ‘रसोईघर’ भी कह सकते हैं। संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं में समास का बहुतायत में प्रयोग होता है। जर्मन आदि भाषाओं में भी समास का बहुत अधिक प्रयोग होता है।

जिस समास का पहला पद प्रधान हो और वह अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे - यथामति (मति के अनुसार), आमरण (मृत्यु कर) न् इनमें यथा और आ अव्यय हैं।

कुछ अन्य उदाहरण -

   आजीवन - जीवन-भर
   यथासामर्थ्य - सामर्थ्य के अनुसार
   यथाशक्ति - शक्ति के अनुसार
   यथाविधि- विधि के अनुसार
   यथाक्रम - क्रम के अनुसार
   भरपेट- पेट भरकर
   हररोज़ - रोज़-रोज़
   हाथोंहाथ - हाथ ही हाथ में
   रातोंरात - रात ही रात में
   प्रतिदिन - प्रत्येक दिन
   बेशक - शक के बिना
   निडर - डर के बिना
   निस्संदेह - संदेह के बिना
   प्रतिवर्ष - हर वर्ष