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आधुनिक चिंतन और साहित्य/आधुनिकतावाद

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आधुनिकता[सम्पादन]

आधुनिकता उन्नीसवीं सदी में स्वच्छंदतावाद के विरुद्ध उभरी एक प्रवृत्ति थी जो तार्किक सोच और वैज्ञानिक क्रिया पद्धति पर आधारित थी।

आधुनिकतावाद[सम्पादन]

यह उन्नीसवीं सदी के अंतिम दौर तथा बीसवीं सदी के पूर्वार्ध का दर्शन और कला संबंधी आंदोलन है जिसने बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक प्रचलनों में परिवर्तन करके पश्चिमी दुनिया को बहुत गहराई से प्रभावित किया। आधुनिकतावाद को रूपाकार देने वाले कारकों में आधुनिक औद्योगिक समाज का विकास तथा शहरों का तीव्र विकास, जिसका अनुसरण विश्वयुद्ध जैसी भीषण घटना के रूप में हुआ, शामिल हैं। आधुनिकतावाद ने ज्ञानोदय के चिंतन की सुनिश्चितता को चुनौती दी। अनेक आधुनिकतावादियों ने धार्मिक विश्वासों को भी अस्वीकार कर दिया। आधुनिकतावाद के अंतर्गत सामान्यतः उन लोगों के चिंतन और रचनाओं को शामिल किया जाता है जो महसूस करते थे कि उभरते हुए सम्पूर्ण औद्योगीकृत विश्व की नवीन आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थितियों में परंपरागत कला, वास्तुकला, साहित्य, धार्मिक विश्वास, सामाजिक संगठन और दैनिक जीवन की गतिविधियाँ और विज्ञान अनफिट होते जा रहे हैं। १९३४ में एजरा पाउंड की रचना "मेक इट न्यु (Make it new)" इस आंदोलन के तरह के विचारों के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसका प्रवर्त्तन बाद्लेयर से माना जाता है। प्रतीकवाद, बिंबवाद, अभिव्यंजनावाद, दादावाद तथा यथार्थवाद सरीखे उस दौर के आंदोलनों पर एक-दूसरे का विरोध करते हुए, बाद में उनमें समानता देखी गई। आधुनिकतावाद की कुछ विशेषताएँ दृष्टव्य हैं-

  • आत्मसजगता और विडंबना आधुनिकता की साहित्यिक रचनाओं में अभिव्यक्त होने वाली दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। आधुनिकता की प्रवृत्ति ने साहित्य में रूप संबंधी प्रयोगों को भी जन्म दिया। हिंदी साहित्य में इसे प्रयोगवाद, नई कविता आदि की रचनाओं में देखा जा सकता है।
  • रचना-प्रक्रिया

आधुनिकतावादियों ने पुरानी रचनाओं की पुनर्रचना की। यह पुनर्व्याख्या, पुनर्निर्माण या पैरोडी के रूप में भी किया गया। धर्मवीर भारती के अंधा युग को या सूरज का सातवाँ घोड़ा में पंचतंत्र के शिल्प को अपनाने को इसी रूप में देख सकते हैं। अज्ञेय ने 'असाध्यवीणा' में भी एक पुरानी जापानी कथा की पुनर्रचना की। आधुनिकतावादियों ने यथार्थवाद का विरोध किया। उन्होंने कला की स्वायत्ता पर बल दिया।