आर्थिक भूगोल/मत्स्य पालन

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आर्थिक भूगोल
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मत्स्य पालन (प्राथमिक क्रियाएं)[सम्पादन]

मत्स्य पालन

मछली एक महत्वपूर्ण आहार है। मत्स्य एक प्रोटीन समृद्ध खाद्य है। विश्व में मछली के कुल 30,000 प्रजातियां पाई जाती है , जिसमें ह्वेल, सील, मोती, लोबस्टर, क्रेब, झींगा, श्रिम्प, मोलस्का, कस्तूरा, मस्ल, घोंघे तथा बड़ी सीपी जैसी मछलियां सम्मिलित हैं। अनुकूलतम की क्षमता के कारण विषुवतीय प्रदेश से लेकर ध्रुवों तक एवं नदियों तथा हिमानीयों से निकलने वाले ठंडे पानी तक में रह सकते हैं। मत्स्य पालन में विश्व के अधिकतर देश लगे हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय जल में कोई भी मत्स्य पालन कर सकता हैं। तटवर्ती प्रदेशों में यह एक महत्वपूर्ण उद्योग है,[१] जिसमें प्राचीन उपायों से लेकर नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। विश्व के सागरों एवं महासागरों में मछली इत्यादि का वितरण असमान है। यह समुद्री तटवर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं में बहुत अधिक महत्व रखता है। प्रतिध्वनि गंभीरता यंत्र (सोनार) का उपयोग जल के नीचे मछलियों के स्रोतों का पता लगाने में किया जा रहा है। ड्रिफ्टर की सहायता से सागर के अपेक्षाकृत गहरे एवं ट्रावॅलर की सहायता से गंज सागरीय भाग से मछलियों का दोहन किया जाता है। संसार में पकड़े जाने वाली मछलियों में अधिकांश भाग हेरिंग,एंट्री,सारडीन,काॅड,टूना,मैकेरल,हेक,पिल्चर्ड की होती है। जल की प्रकृति के आधार पर मछलियां दो प्रकार की होती है।

  1. ताजे जल की मछलियां(स्रोत-नदी, तालाब,झील)
  2. खारे जल की मछलियां(स्रोत-समुंद्र, नमकीन झील)


मत्स्योद्योग कई प्रकार के होते हैं और उसकी गतिविधियाँ स्थान, मछली के प्रकार, मछली पालने व पकड़ने के उपकरणों और नौकाओं के अनुसार भिन्न होती हैं

मत्स्य पालन के लिए अनुकूल परिस्थितियां[सम्पादन]

(i) जल की गहराई,
(ii) जलधाराएँ जहाँ ठंडे एवं गर्म पानी की धाराएँ मिलती हैं, वहाँ अधिक मछलियाँ पाई जाती हैं।
(iii) सागर के जल का तापमान तथा लवणता
(iv) जल में मछली आहार की उपलब्धि
(v) प्रशीतन व्यवस्था तथा द्रुतगामी यातायात की सुविधा

श्रीलंका के मत्स्यपालक

मत्स्यपालन सभी महासागरों एवं सागरों में की जाती है, परंतु माहीगिरी के प्रमुख क्षेत्र शीत कटिबंध में स्थित हैं ।[२] व्यापारिक मत्स्य पालन ऊष्णकटिबंधीय सागरों में कम विकसित है ।
शीतोष्ण अक्षांश (Temperate Latitudes):- शीतोष्ण तथा ऊच्च अक्षांशों में प्लवक की बहुतायत होती है। प्लैंक्टन (प्लवक) ही मछली का मुख्य आहार है। ऊष्ण कटिबंध के गर्म जल में प्लवक की मात्रा कम होती है।
ठंडी जलवायु (Cool Climate):- जिन सागरों तथा महासागरों का तापमान 20०C से कम रहता है,वहाँ मछलियों की संख्या में तीव्र गति से वृद्धि होती है ।
सस्ते श्रमिक (Cheap Labour):- मछली पकडना, उसे साफ करना, काटना, सुखाना, डब्बों में बंद करने के लिए सस्ते एवं बहुतायात में श्रमिकों की आवश्यकता होती है ।
बाजार की उपलब्धि (Availability of Market):- मछली उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए अधिक जनसंख्या बड़े नगरों अर्थात बाजार का निकट होना भी आवश्यक है ।
मत्स्य ग्रहण के प्रमुख क्षेत्र 40° और 60° अक्षांश के मध्य पाए जाते हैं।

प्रमुख मत्स्य क्षेत्र[सम्पादन]

वैश्विक मछली उत्पादन

विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र 5 है।

  1. प्रशांत महासागर का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
  2. प्रशांत महासागर का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
  3. अटलांटिक महासागर का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
  4. अटलांटिक महासागर का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
  5. दक्षिणी प्रशांत का पेरू तट

प्रशांत महासागर का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र :- यह विश्व में मछली पकड़ने का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र उत्तर में बेरिंग सागर से दक्षिण में फिलिपिंस सागर तक फैला हुआ है। इसके महाद्वीपीय निमग्न पेट पर गर्म क्यूरोशियो धारा का ठंडी ओतावियो धारा में मिलन होता है। इस क्षेत्र में चीन, जापान, ताइवान, कोरिया, तथा रूस के मछुआरे मछली पकड़ा करते हैं।

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प्रशांत महासागर का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र :- कैलिफोर्निया से अलास्का तक फैले इस मत्सय क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा द्वारा मत्स्यन किया जाता है।[३]

अटलांटिक महासागर का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र :- इस क्षेत्र का विस्तार न्यू इंग्लैंड और न्यूफाउंडलैंड से उत्तर में लेब्रोडोर तक है जिसमें बहुत सारे छोटे बड़े बैंक है।

ग्रैंड बैंक

जैसे-ग्रैंड बैंक, जार्जैज बैंक, सेंट पियरी बैंक, वैंकवरूम बैंक,सेबिल द्विप बैंक आदि।

ग्रैंड बैंक इनमें सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मत्स्य ग्रहण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में दक्षिण की ओर से आने वाली गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी लैब्राडोर की धारा से मिली है। नोवास्कोशिया(जार्जैज बैंक) तथा न्यूफाउंडलैंड(ग्रैंड बैंक) के निमग्न तट में अधिकांशतः मत्स्यन किया जाता है।

अटलांटिक महासागर का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र :- विस्तृत महाद्वीपीय निमग्न तट, लम्बी दंतुरित तट रेखा एवं तटीय देशों में कृषि योग्य भूमि की कमी आदि के कारण पश्चिमी यूरोप में मत्स्यन का विकास अधिक हुआ है।

बाल्टिक सागर

भूमध्य सागर व बिस्के की खाड़ी से लेकर उत्तर सागर, बाल्टिक सागर और श्वेत सागर तक अटलांटिक महासागर के उत्तरी पूर्वी मत्स्य क्षेत्र का विस्तार है।

उत्तर सागर का डाॅगर बैंक मत्स्यन हेतु विश्व विख्यात है। इस क्षेत्र में गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा के कारण समुंद्र सालों भर खुला रहता है। नार्वे, स्वीडन, नीदरलैंड तथा युनाइटेड किंगडम मछली पकड़ने वाले प्रमुख देश है।
दक्षिणी प्रशांत का पेरू तट:- दक्षिण गोलार्ध में मत्स्य उद्योग का एकमात्र क्षेत्र दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी भाग में है। यह उष्ण क्षेत्र में स्थित है। पेरू तथा चिल्ली इसके प्रमुख मत्स्य उत्पादक देश हैं। यहां पेरू तथा हंबोल्ट ठंडी धारा का ठंडा जल नीचे से निकलता है जिसमें मछलियों के लिए भरपूर आहार होता है। विश्व के अन्य मत्सय क्षेत्रों में दक्षिण अफ्रीकी क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के तटीय क्षेत्र और हिंद महासागर में प्रायद्वीपीय भारत के तटीय क्षेत्र महत्वपूर्ण है। विश्व के प्रमुख मत्सय उत्पादक देश चीन, जापान,रूस, पेरू,चिली तथा संयुक्त राज्य अमेरिका है।

संबंधित प्रश्न[सम्पादन]

इस अध्याय से संबंधित प्रश्न कुछ इस प्रकार हैं:-

  1. मत्स्य पालन की विशेषताएं बताएं।
  2. विश्व में मत्स्य पालन के प्रमुख क्षेत्रों की व्याख्या करें।
  3. मत्स्य पालन की अनुकूल परिस्थितियां क्या है।
  4. मत्स्य पालन किन क्षेत्रों के लिए लाभदायक कार्यकलाप है।

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. Robert S. Pomeroy (1989). The economics of production and marketing in a small-scale fishery: Matalom, Leyte. Cornell University, Aug.
  2. K.P. Biswas; Kamakhya Pada Biswas (2006). Economics in Commercial Fisheries. Daya. पृप. 234–. आइएसबीएन 978-81-7035-430-7.
  3. R. Santhanam (1990). Fisheries Science. Daya Publishing House. आइएसबीएन 978-81-7035-085-9.