कार्यालयी हिंदी/कार्यालयी हिंदी का स्वरूप

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भाषा का मुख्य उद्देश्य है अपनी बात सामने वाले से या जिसके लिए प्रयुक्त हो उसे आसानी से समझाई जा सके वह आसानी से ग्राह्य हो । समस्त उपबंधों के होते हुए भी आम लोगों में यह धारणा है कि हिन्दी का प्रयोग कठिन होगा क्योंकि साहित्यिक हिन्दी अपेक्षाकृत कठिन होता है और यदि इस हिन्दी का प्रयोग आम पत्राचार में किया जाए तो हास्यास्पद या समझने में कठिनाई आएगी । शायद इसी भ्रम के आकरण लोग हिन्दी को अपनाने से कतराते हैं । इस समस्या के निजात के लिए भारत सरकार, राजभाषा विभाग द्वारा आसान हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया जाता है । आसान हिन्दी का अर्थ है स्थानीय एवं आम बोलचाल कि भाषा का प्रयोग सरकारी कार्यों के लिए किया जाए । इस प्रकार से हिन्दी का प्रचलन बढ़ेगा । चूंकि हमारा देश विभिन्न भाषा-भाषी समुदायों से युक्त है अतः आसान हिन्दी समझ पाना सबके लिए आसान होगा तथा क्षेत्र विशेष के प्रचलित शब्दों के प्रयोग से भाषा की धारा भी सुचारु रूप से चलती रहेगी तथा इससे हिन्दी का प्रयोग भी बढ़ेगा । आम तौर पर देखा गया है कि आसान शब्दों को ग्रहण करने में जितनी आसानी होगी उतनी ही कठिनाई एवं भारी भरकम शब्दों के साथ आएगी । जिन सरकारी कार्यालयों में इस विधि का अनुसरण किया गया वहाँ हिन्दी का प्रचार प्रसार अपेक्षाकृत अधिक ही हुआ । उदाहरणस्वरूप अंग्रेजी का शब्द approval के लिए हिन्दी के कई विकल्पों का प्रयोग किए जा सकते हैं जो अनुमोदन, संस्तुति आदि हो सकता है । यह भी प्रावधान किया गया कि यदि कोई कार्मिक हिन्दी लिखने में वर्तनी संबन्धित यदि कोई त्रुटि भी करता है तो उसे इस बात के लिए हतोत्साहित करने की बजाय प्रोत्साहित किया जाए कि उसने हिन्दी में लिखने का प्रयास तो प्रारम्भ किया ।


कई बार ऐसा देखा गया ही कि अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों को हिन्दी में अनूदित करवाने की आवश्यकता पड़ जाती है । अनुवाद करते समय अधिकांशतः लोग शब्दानुवाद का प्रयास करते हैं । शब्दानुवाद कुछ हद तक तो ठीक है पर जब हम यह अनुवाद आसानी से भाषा के कथ्य को समझने के लिए करते हैं तो कहीं कहीं शब्दानुवाद के कारण उस विषय का मूल अर्थ भारी और उबाऊ होने के साथ समझ से परे हो जाता है । ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि भावानुवाद किया जाए तथा दिये गए अंग्रेजी पाठ के मूल कथ्य को प्रदर्शित किया जाए ताकि उसे समझने में आसानी हो तथा उसके अनुरूप पत्राचार किया जा सके । सरकारी कामकाज में पहले देखा गया है कि अंग्रेजी के कुछ ऐसे वाक्य होते हैं जिनका हिन्दी अनुवाद बड़ा ही कठिन लगता है या हिन्दी में उन शब्दों या वाक्यों का प्रयोग करना बड़ा ही अटपटा लगता है जैसे I am directed to say /I am directed to forward… ऐसा माना जाता है कि पत्र जारी करने वाला अधिकारी अपने से कुछ नहीं कर रहा है । वह सरकार के अनुदेश पर समस्त कार्य करता है इसी लिए हमेशा पत्राचार में यह वाक्य प्रयोग किया जाता है । इनका हिन्दी में अनुवाद मुझे यह कहने का निदेश हुआ है/मुझे.... अग्रेषित करने का निदेश हुआ है । अंग्रेजी के पत्र में सम्बोधन के लिए Dear Sir का प्रयोग होता है पर हिन्दी में महोदय लिखा जाता है । अंग्रेजी पत्राचार में Yours faithfully, लिखा जाता है पर इसके हिन्दी रूपमें आपका विश्वासी लिखना कतई उपयुक्त नहीं होगा । इसके स्थान पर हम भवदीय लिखते हैं ।

कार्यालयों में आम पत्राचार के अतिरिक्त एक और चीज प्रचलन में है जिसे नोटिंग कहा जाता है। सरकारी कार्यालयों में कोई भी कार्य बिना फाइल पर टिप्पणी के नहीं की जा सकती । कार्य करने वाला सहायक कोई भी बात या अपने उच्चाधिकारी को फाइल पर नोट के रूप में लिखकर करता है । इसे अंग्रेजी में नोटिंग(Noting) कहा जाता है । उसकी बात पर उच्चाधिकारी द्वारा तदनुसार कार्य करने का अनुदेश दिया जाता है । कार्यालय के पत्राचार का यह प्रथम सोपान होता है । अंग्रेजी में लिखे जाने वाले नोट अमूमन passive voice, third person के रूप में लिखे जाते हैं पर हिन्दी में सीधे सपाट शब्दों में तथा आसान वाक्यों में लिखने पर बल दिया जाता है । उदाहरण के लिए नोट शीट में किसी बात को प्रस्तुत करने के लिए अंग्रेजी में Submitted please लिखकर शुरुवात की जात है हेसे मान लीजिये कार्यालय में दो कार्मिकों की कमी है । इस कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय से दो कार्मिकों की मांग की जानी है ।