कार्यालयी हिंदी/कार्यालयी हिंदी की शब्दावली

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पाठ-2

     "कार्यालयी हिंदी की शब्दावली"
 (कार्यालयी हिंदी की पारिभाषिक शब्दावली)

भाषा की सबसे छोटी, सार्थक एवं स्वतंत्र इकाई 'शब्द' है।प्रयोग की दृष्टि से शब्दों को तीन वर्गों में बांटा गया है। (i) सामान्य शब्द (ii) अर्द्ध-पारिभाषिक शब्द (iii) तकनीकी/पारिभाषिक शब्द ।

(i) सामान्य शब्द:- जिन शब्दों की सीमा नहीं बाँधी जाती और जिनका इस्तेमाल हम दिन-प्रतिदिन के सामान्य व्यवहार में करते हैं? उनको सामान्य शब्दों की श्रेणी में रखा जा सकता है जैसे वस्तुओं, स्थानों और संबंधों आदि के वाचक शब्द। इन शब्दों का संबंध मूलतया मूर्त वस्तुओं, स्थितियों अथवा अवस्थाओं से होता है। किताब, घर, कलम, विद्यालय, बचपन, बुढ़ापा आदि सामान्य शब्द हैं।

(ii) अर्द्ध-पारिभाषिक शब्द:- जो शब्द सामान्य और पारिभाषिक दोनों रूपों में प्रयुक्त होते हैं। उन शब्दों में को अर्द्ध-पारिभाषिक शब्द कहते हैं। अर्थात् जिन शब्दों का इस्तेमाल सामान्य व्यवहार में प्रयुक्त होने के अलावा किसी क्षेत्र विशेष के संदर्भ में भी होता है उन्हें अर्द्ध-पारिभाषिक शब्दों की श्रेणी में रखा जा सकता है। जैसे- आदेश, दावा, रस आदि अर्द्ध-पारिभाषिक शब्द हैं।

(iii) तकनीकी/पारिभाषिक शब्द:- जिन शब्दों की सीमा बाँध दी जाती है और जो शब्द व्याकरणिक दृष्टि से सामान्य शब्दों की निर्माण प्रक्रिया के नियमों से ही परिचालित होते है, किंतु अर्द्ध-संरचना के धरातल पर दोनों में स्पष्ट अंतर होता हैं; उन्हें पारिभाषिक शब्द कहते हैं। पारिभाषिक शब्दों रसायन, दर्शन, भौतिक, राजनीति एवं विज्ञान आदि शास्त्रों में इस्तेमाल होकर अपने क्षेत्र में विशिष्ट अर्थ के लिए सुनिश्चित रूप से रूढ़ से हो जाते हैं। इन शब्दों की निश्चित परिभाषा दी जा सकती है इसलिए इन्हें पारिभाषिक शब्द कहते हैं। जैसे- 'आयकर'। इस शब्द का प्रयोग किसी व्यक्ति अथवा संस्था की आय पर सरकार द्वारा वसूल किए जाने वाले 'कर' के अर्थ में किया जाएगा। सरकार के अलावा अन्य संस्था द्वारा वसूल की जाने वाली राशि आयकर नहीं कहलाएगी। इस तरह शब्दावली के साथ पारिभाषिक विश्लेषण के अधिक चलन के कारण 'पारिभाषिक शब्द' ही हिंदी में ज्यादा प्रचलित हैं।

'तकनीकी' और 'पारिभाषिक' दोनों शब्द अंग्रेजी के 'Technical' शब्द के हिंदी पर्याय है। 'तकनीकी' जहाँ ध्वनि-साम्य के आधार पर निर्मित पर्याय है, वही 'पारिभाषिक' उससे जुड़े अर्थ के आधार पर बनाया गया पर्याय है। इस तरह जो शब्द किसी क्षेत्र विशेष में निश्चित और परिसीमित अर्थ के द्योतक हों जिनके पीछे कोई संकल्पना, प्रतिपादित विचार या घटना जुड़ी हुई हो और जिसकी परिभाषा या व्याख्या करने पर उस भाषा के प्रयोक्ताओं को वह उसी अर्थ में स्वीकार हो उसे तकनीकी/ पारिभाषिक शब्द कहते हैं।

    "पारिभाषिक शब्द का स्वरूप"

पारिभाषिक शब्द शास्त्रबद्ध शब्द होते है। सामान्य शब्द लोक व्यवहार द्वारा निर्धारित होते हैं, वहीं पारिभाषिक शब्द रसायन, भौतिक, राजनीति, विज्ञान आदि शास्त्रों में प्रयुक्त होते है इसलिए पारिभाषिक शब्दों का सीधा संबंध उस भाषा-भाषी समाज के सांस्कृतिक और वैचारिक विकास से भी जुड़ा होता है। जैसे- जन-समुदाय का जीवन विकास की ओर बढ़ता गया वैसे-वैसे भाषा में नई संकल्पनाओं के साथ पारिभाषिक शब्दावली भी विकसित होती गयी। इस तरह विभिन्न क्षेत्रों में चिंतन और ज्ञान की अभिव्यक्ति उस क्षेत्र विशेष की पारिभाषिक शब्दावली द्वारा होती है। समाज ने जिन-जिन क्षेत्रों में विकास किया, उन-उन क्षेत्रों की पारिभाषिक शब्दावली भी उस समाज की भाषाओं में विकसित हुई। इस तरह किसी समाज का सांस्कृतिक वैज्ञानिक विकास और भाषा-विकास इसी दृष्टि से एक दूसरे से अभिन्न होते हैं। उदाहरण- ‘ओवर ड्राफ्ट’, ‘मियादी जमा', 'चालू खाता' आदि शब्दों के गर्भ में छिपे अभीष्ट अर्थ को बैंकिंग व्यवहार क्षेत्र के संदर्भ में ही समझा जा सकता है।

पारिभाषिक शब्द अपने क्षेत्र-विशेष में सूक्ष्म या सुनिश्चित अर्थ का वाचक होता है जो अर्थ के सूक्ष्मीकरण की प्रवृत्ति से युक्त होता है। सूत्र, कूट शब्द, संकेताक्षर, विशिष्ट चिन्ह और गणितीय फार्मूला इसी अर्थ के सूक्ष्मीकरण की प्रक्रिया के परिणाम हैं। पारिभाषिक शब्द प्रायः अपारदर्शी होते हैं। अर्थात् उनकी बाह्य । संरचना से उनके वास्तविक तकनीकी अर्थ का स्पष्ट बोध नहीं होता। उदाहरण 'रेखांकित चेक' अर्थात् जिस चेक के बाईं ओर दो समानांतर रेखाएं खिंची हों और जिसका भुगतान उसी को हो सकता हो जिसके नाम का चेक करा हो इस तरह पारिभाषिक शब्द और उनके अर्थ के बीच के संबंध को अर्थारोपण के माध्यम से जोड़ा जाता है।

    "पारिभाषिक शब्द के लक्षण के"

अर्थ और प्रयोग के स्तर पर तकनीकी शब्दों के कुछ खास गुण धर्म होते हैं। जिनके आधार पर हम उन्हें गैर-पारिभाषिक शब्दों से अलग करते हैं। वैज्ञानिक तथा तकनीकी संदर्भों में सामान्य शब्द भी विशिष्ट अर्ध व्यक्त करने की क्षमता विकसित कर लेता है। वैज्ञानिक संदर्भों में अर्थों और संकल्पनाओं में सूक्ष्मता की आवश्यकता पड़ती हैं, इसलिए इन सूक्ष्म अर्थों को व्यक्त करने के लिए अनेक शब्दों की जरूरत पड़ती है जो किसी भी भाषा के शब्द भंडार में संभव नहीं इसलिए जहाँ नए शब्द बनाने या सृजित करने की संभावना नहीं होती, वहाँ प्रचलित शब्दों को ही नया अर्थ अथवा अर्थ छटा प्रदान कर दी जाती है। इस तरह पारिवारिक शब्दों में नए अर्थों का आरोपण एक सतत् प्रक्रिया है। अर्थ का सूक्ष्म और सूक्ष्मतम होते जाना तकनीकी शब्दों की विशेषता है।

लक्षण:- (i) अभिधार्य प्रयोग पारिभाषिक शब्द हमेशा अभिधार्थ में ही समझे जाते हैं। सामान्य प्रयोग या अलग-अलग संदर्भों में किसी शब्द के एक से अधिक अर्थ प्रचलित हो सकते हैं, लेकिन यदि वह पारिभाषिक शब्द के रूप में विकसित हो जाता है तो उस शब्द का एक विषय क्षेत्र में एक तकनीकी शब्द 'एक शब्द एक अर्थ' के सिद्धांत के अनुरूप चलता है। उदाहरण-'उर्जा (Energy) शब्द का एक ही विशिष्ट अर्थ होगा जो 'शक्ति', 'ताकत', 'स्फूर्ति' आदि शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता।

(ii) विषय सापेक्षता:- हर पारिभाषिक शब्द अपने विषय क्षेत्र से ही अपना तकनीकी अर्थ और अपनी परिभाषा प्राप्त करता है अतः वह किसी न किसी विषय-क्षेत्र या शास्त्र से संबद्ध होता है। इस तरह किसी भी विषय के पारिभाषिक शब्द के अर्थ को पूर्ण समझने के लिए उस विषय की जानकारी आवश्यक है। यही कारण है कि तकनीकी शब्दों को 'विशेषज्ञों की शब्दावली' भी कहा जाता है। इस तरह विषय से अनभिज्ञ व्यक्ति इस शब्दावली को नहीं समझ सकता। उदाहरण 'कम्प्यूटर वाइरस', 'प्रोग्रामिंग', 'हार्ड डिस्क', 'फ्लॉपी' आदि शब्द कम्प्यूटर विज्ञान के संदर्भ में ही समझे जा सकते हैं।

(iii)अर्थ भेदकता:- तकनीकी शब्दों के अर्थ न केवल सूक्ष्म होते हैं बल्कि निरन्तर अनुसंधान के साथ-साथ उनके अर्थ के भेद-उपभेद विकसित होते चले जाते हैं। इन भेद-उपभेदों को सुरक्षित रखने के लिए सबके लिए अलग-अलग तकनीकी शब्दों का विधान करना जरूरी हो जाता है। उदाहरण:-

वेग- Velocity, चाल - Speed, किरण-Ray, महामारी - Epidemic, लघुमारी- Endemic, शक्ति - Power

(IV) अर्थ की सूक्ष्मता:- पारिभाषिक शब्द न केवल एक अर्थ को व्यक्त ( करता है, बल्कि वह उस एक अर्थ के भी एक सूक्ष्म अर्थ-बोध को प्रकट करता है। जैसे-जैसे तकनीकी और वैज्ञानिक सोच की संकल्पना में परिमार्जन होता जाता है, वैसे-वैसे ही शब्द का अर्थ सूक्ष्म से सूक्ष्मतम होता जाता है। उदाहरण 'संसद' कोश अर्थ संस्कृत में 'सभा' होता था लेकिन आज तकनीकी शब्द बनने के बाद इसक सूक्ष्मतम अर्थ 'पार्लियामेंट' तक सीमित हो गया है।

(V) अर्थ रूढ़िता:- नये-नये अनुसंधानों, विचारों एक अविष्कारों को व्यक्त क करने के लिए नए शब्दों की आवश्यकता होती है। इस तरह जब नई तकनीकी अर्थ शब्द में आरोपित किया जाता है तब वह उस शब्द के साथ रूढ़ हो जाता है, और लोग उसे उसी अर्थ में ग्रहण करने लग जाते हैं। उदाहरण 'Mouse' एक चूहे की तरह का छोटा उपकरण है जिसका अंग्रेजी में कोई मूल अर्थ नहीं। इसका प्रयोग कम्प्यूटर में रेखाएं खींचने के लिए किया जाता है। चूहे की तरह दिखने के कारण है ने इसे ‘Mouse' नाम दे दिया है। इस तरह शब्द और अर्थ के वी संबंध को स्थापित करने में अविष्कारकर्ता का प्रमुख हाथ होता है यही शब्द लगाता प्रयोग और व्यवहार से रूढ़ हो जाते हैं।

पारिभाषिक शब्दावली संबंधी विचारधाराएँ:- आजादी के बाद स्वतंत्र भारत का संविधान लागू हुआ और 14 सितंबर 195/I को हिंदी संघ की राजभाषा घोषित की गई। सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग का प्रावधान बनाया गया। इसके लिए तकनीकी शब्दों के निर्माण का कार्य शु किया गया। लेकिन हिंदी भाषा-भाषी क्षेत्र में भाषा संबंधी परिदृश्य कुछ असाधारण सा था। शिक्षित वर्ग अंग्रेजी भाषा तथा वैज्ञानिक शब्दों से परिचित था क्योंकि अंग्रेज ही वह भाषा थी जिसके माध्यम से उसने विज्ञान एवं वाणिज्य की शिक्षा हासिल की, थी। एक तरफ अंग्रेजी बोलने वाले लोगों की संख्या भले ही बहुत कम थी लेकि इनका प्रभाव क्षेत्र व्यापक था। दूसरी तरफ, देश में अधिकांश आबादी निरक्षर थी हिंदी-भाषी प्रदेशों की जनता केवल हिंदी-उर्दू ही जानती थी। इनमें भी अधिकांशत निजी एवं पारिवारिक में बोली जाने वाली भाषा एवं शब्दों का प्रयोग कर थे। इस तरह बोलचाल एवं आम व्यवहार में हिन्दुस्तानी का प्रयोग ही अधिक होत था। भारत के इस विविध-रूपी परिदृश्य में पारिभाषिक शब्दावली के निर्माण के प्रश् को लेकर विद्वानों में परस्पर मतभेद स्वाभाविक था। इस तरह पारिभाषिक शब्दावल के निर्माण के संबंध में चार विचारधाराएँ उभरकर सामने आईं:-

(1) शुद्धतावादी:-

पारिभाषिक शब्दावली के निर्माण से संबंधित इस विचारधारा के प्रवर्तक डा.रघुवीर थे। जिन्होंने 1955 में ‘Comprehensive English-Hindi Dictionary' शब्दकोश प्रकाशित किया। डा. रघुवीर ने हिंदी को विदेशी शब्दों के प्रभाव से मुक्त रखने का आग्रह किया । उन्होंने अंग्रेजी व उर्दू के शब्दों का बहिष्कार कर यह संकल्प लिया कि वे संस्कृत-निष्ठ वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दों का अधिकाधिक निर्माण करेंगे। उन्होंने संस्कृत व्याकरण के नियमों को आधार मानकर संस्कृत धातुओं और प्रत्ययों-उपसर्गों की सहायता से प्रत्येक अंग्रेजी शब्द के लिए संस्कृतनिष्ठ हिंदी के पर्याय निर्धारित किए। उदाहरण:-

Peri +meter। परि+माप= परिमाप

Bi+cycle। द्वि+चक्र = द्विचक्र


डा. रघुवीर ने संस्कृनिष्ठ पारिभाषिक शब्दावली के निर्माण को एक विशिष्ट अंतर्दृष्टि तो प्रदान की लेकिन अत्यंत जटिलताओं और अधिकांश प्रयोक्ताओं का इन शब्दों से अपरिचित होने के कारण यह प्रयास दुरुह सिद्ध हुआ।

(ii) शुद्धताविरोधी ( हिंदुस्तानीवादी):-

इस विचारधारा के प्रवर्तक हिंदुस्तानी कल्चर सोसाइटी के पंडित सुंदरलाल एवं डा. जाफर हसन थे। डा. रघुवीर की शुद्धतावादी विचारधारा की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप ही इस विचारधारा का जन्म हुआ। शुद्धताविरोधी विचारकों का मानना था कि पारिभाषिक शब्दों को बोलचाल की भाषा और व्याकरण के निकट लाना चाहिए भले ही ऐसा करने पर भाषा के पूर्ण स्थापित व्याकरणिक नियमों और विसंगतियों को तिलांजलि देनी पड़े। इस तरह ये हिंदी में नए वैज्ञानिक शब्दों का निर्माण बोलचाल की हिंदी-उर्दू मिश्रित शब्दावली के आधार पर करने के समर्थन में थे। इस विचारधारा की प्रवर्तक संरचनाएँ उस्मानिया विश्वविद्यालय और हिंदुस्तानी कल्चर सोसाइटी थी। आमबोलचाल की पद्धति के आधार पर इन्होंने एक शब्दकोश का निर्माण किया लेकिन शब्दावली में व्याप्त विचित्रताओं के कारण हिंदीभाषी समाज उसे आज तक स्वीकार नहीं कर सका। उदाहरण:-

Standardise - स्टैन्डर्डियाना (स्टैन्डर्ड + याना)

Atomize - अणुयाना

Legelize - कानूनियाना

Chairman - मसनदी

Emergency - अचानकी

जिस तरह डॉ. रघुवीर शुद्धतावादी शब्दावली को संस्कृत की दुरूहता के ए छोर पर ले गए उसी तरह शुद्धताविरोधी विचारकों ने इस शब्दावली का देशीकर कर दिया। इस तरह प्रयोक्ताओं ने इन दोनों ही विचारधारा की शब्दावलियों • पूर्णतः स्वीकार नहीं किया।

(iii) अंग्रेजीवादी:-

इस विचारधारा के अधिकांश पक्षधर अंग्रेजी तकनीकी के शब्दों को बिन अनुवाद किए उसी रूप में भारतीय भाषाओं में ग्रहण करने के पक्ष में थे। इनद मानना था कि जिस प्रकार हम बोलते समय अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं उ तरह लेखन में भी हमें अंग्रेजी शब्दों को उसी रूप में अपना लेना चाहिए। साथ अंग्रेजी तथा अन्य अंतराष्ट्रीय शब्दों के लिए हिंदी का अन्य किसी भारतीय भाषाउ में नए पर्यायों का विधान करने के स्थान पर उन्हें यथावत हिंदी की ध्वनि व्यवस के अनुरूप ही ग्रहण कर लेना चाहिए। उदाहरण:-

Blood - ब्लड

Mind - माइंड

Colour - कलर

Radio - रेडियों

Police - पुलिस

Station - स्टेशन

अंग्रेजीकरण की इस शब्दावली को भी हिंदी भाषी समाज ने पूर्णतः स्वीकार न किया। क्योंकि आज मौखिक स्तर पर हम भले ही अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल कर हो लेकिन लिखित स्तर पर ऐसे बहुत कम शब्दों का प्रयोग करते हैं।

समन्वयवादी ( संतुलनवादी):-

उपर्युक्त तीनों विचारधाराएँ अपने विचारों में अतिवादी थी जिन्होंने समरूप और समन्वय की परवाह किए बिना शब्द निर्माण की अपनी-अपनी टकसालें खो - थीं। इन्हीं तीनों अतिवादी विचारधाराओं से मूल तत्व ग्रहण करके सन् 1961 भारत सरकार ने वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग की स्थापना की। इ आयोग ने उपर्युक्त तीनों विचारधाराओं में संतुलन स्थापित करते हुए ऐसी शब्दाव का निर्माण किया जिसके सिद्धांत न केवल हिंदी बल्कि सभी भारतीय भाषाओं लागू हो। इसका प्रमुख उद्देश्य सभी भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिक शब्दावली समरूपता एवं अखिल भारतीयता की छाप स्थापित करना था। उदाहरण:-

Director - निर्देशक

Government - सरकार, शासन


    "पदनाम तथा अनुभाग के नाम"