कार्यालयी हिंदी/टिप्पण

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टिप्पण अंग्रेजी शब्द नोटिंग (Noting) का समानार्थी शब्द है। आम तौर पर टिप्पण का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है-

  1. प्रशासनिक कामकाज में किसी विचाराधीन पत्र पर कार्यवाई करने की प्रक्रिया में कार्यालय कर्मचारियों द्वारा जो अभिव्यक्तियाँ लिखी जाती हैं वे टिप्पण कहलाती हैं।
  2. किसी विचारणीय सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक विषय पर किसी विद्वान द्वारा, प्रस्तुत संक्षिप्त विचार या टीकाएं भी टिप्पण कहलाती हैं।

कार्यालयों में औपचारिक रूप से प्रायः टिप्पण का प्रयोग पहले अर्थ में किया जाता है। 'मैन्युअल ऑफ ऑफिस प्रोसिजर' में टिप्पण को परिभाषित करते हुए लिखा गया है कि-

“टिप्पण वे लिखित अभ्युक्तियाँ हैं जो किसी विचाराधीन कागज़ के संबंध में लिखी जाती हैं, जिससे उसके निस्तारण में सहूलियत हो सके।”

टिप्पण के प्रकार[सम्पादन]

टिप्पण दो प्रकार के होते हैं- १. संक्षिप्त और २. विस्तृत।

संक्षिप्त टिप्पण[सम्पादन]

संक्षिप्त टिप्पण निस्तारण के लिए अधिकारियों द्वारा की गई कुछ शब्दों से लेकर कुछ वाक्य तक के टिप्पण होते हैं। उदाहरण-

  • उत्तर की प्रतीक्षा करें।
  • प्रारूप पर सहमति दी जा रही है।
  • उपयुक्त प्राधिकारियों का अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाए।
  • प्रार्थना अस्वीकृत कर दी जाए।
  • आदेश के लिए प्रस्तुत है।
  • सूचना के लिए प्रस्तुत है।
  • उत्तर का प्रारूप अनुममोदन के लिए प्रस्तुत है।
  • अपेक्षित जानकारी...विभाग से मंगवायी जा रही है।
  • ..................... को प्रतिलिपि प्रेषित।
  • अनुमति देना लोकहित के प्रतिकूल होगा।
  • इस संबंध में पृष्ठ .................... पर दिए गए आदेश और टिप्पणियां देख ली जाएं।
  • आवेदित आकस्मिक अवकाश प्रदान की जाए।
  • आवश्यक कार्यवाई करें।
  • आगे कोई कार्यवाई अपेक्षित नहीं है।
  • मामला अभी ......मंत्रालय के विचाराधीन है।
  • प्रस्ताव स्पष्ट है। इसे मान लिया जाय।
  • तुरंत अनुस्मारक भेजें।
  • प्रारूपण जारी कर दिया जाय।
  • प्रारूप जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
  • पुराने अभिलेखों से जांच की गई है कि बिल सं. ................. दिनांक ..................... का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।

विस्तृत टिप्पण[सम्पादन]

विस्तृत टिप्पण संबंधित अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा लिखे गए एक से अधिक वाक्यों से लेकर कई पृष्ठों तक के टिप्पण होते हैं। इसमें विचाराधीन विषय से संबंधित पूरी जानकारी, सुझाव या समीक्षा प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण-

अनुभाग अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के संदर्भ में टिप्पणी-

(क). अवर श्रेणी कर्मचारी के विरुद्ध उनके अनुभाग अधिकारी ने शिकायत की है कि उन्होंने अपना वास्तविक पहचान-पत्र खो जाने पर तुरंत सूचना नहीं दी।

(ख). उन्होंने फिर से सूचना दी है कि उनका पहचान पत्र दोबारा खो गया है और वे गत मास से ही अवकाश प्राप्ति से पूर्व छुटटी पर हैं। इस संबंध में गृहमंत्रालय से परामर्श लिया जा रहा है।

(ग). मेरा सुझाव है कि इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाए। ज्ञापन का मसौदा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत है।

विशेषताएं[सम्पादन]

अच्छे टिप्पण में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं-

  1. पूर्णता- अच्छा टिप्पण विचाराधीन विषय के सभी महत्वपूर्ण बातों को व्यक्त करता है।
  2. समाधानपरक- अच्छे टिप्पण में समस्या का समाधान सुझाया जाता है। एक से अधिक समाधान होने पर समाधान के सभी विकल्पों का उल्लेख किया जाता है तथा इनमें से सबसे उपयुक्त विकल्प सुझाया जाता है।
  3. व्यक्तिगत आक्षेप से मुक्त - टिप्पण औपचारिक भाषा में लिखा जाता है। इसमें किसी व्यक्ति या अधिकारी पर कोई आक्षेप नहीं लगाया जाता है। इसका उद्देश्य विचाराधीन पत्र पर कार्यवाई में सहयोग करना है।
  4. संक्षिप्त - टिप्पण में कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक सार्थक मत व्यक्त किया जाता है।
  5. प्रासंगिकता- टिप्पण विचाराधीन विषय से संबंधित ही होता है। उसमें विषयांतर होने के लिए स्थान नहीं होता है।
  6. तारतम्यता- टिप्पण के विस्तृत रूप में करने पर उसमें प्रस्तुत तथ्यों के बीच पारस्परिक संबंध और एक सुनिश्चित क्रम होना आवश्यक होता है। अच्छा टिप्पण इस तारतम्यता के कारण ही विचाराधीन विषय को सहजता से समझने योग्य बनाने में सफल होता है।
  7. अभिधात्मक भाषा- कार्यालयी टिप्पण की भाषा अभिधात्मक होती है। उसमें प्रयुक्त शब्दों के अन्य अर्थ निकाले जाने की संंभावना कम-से-कम होनी आवश्यक है। समस्या का समाधान प्रस्तुत करने वाली भाषा को एक से अधिक अर्थ निकाले जाने योग्य नहीं होना चाहिए। उसका सीधा और सुस्पष्ट होना आवश्यक होता है।