कार्यालयी हिंदी/सामान्य हिंदी तथा कार्यालयी हिंदी में संबंध और अंतर

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आमतौर पर सरकारी कार्यालयों को कार्यप्रणाली से अपरिचित लोगों को इस बात का ज्ञान नहीं होता की सामान्य जीवन में जिस हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं वह कार्यालय हिंदी नहीं है इतना ही नहीं विश्व के अनेक देशों की सामान्य बोलचाल की भाषा, जिसे राष्ट्रभाषा कहा जाता है और सरकारी कामकाज की भाषा एक ही है। उन देशों में जब एक ही भाषा होने के बावजूद उसकी प्रयोगात्मक के समय भ्रम रहता है तो भारत जैसे देश में यह और भी अस्पष्ट हो जाती है। भारत के संविधान में आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध इस समय 22 भाषाओं को राष्ट्रीय भाषाओं का स्थान दिया गया है। इसलिए संवैधानिक रूप से भारत की एक राष्ट्रभाषा नहीं है। इसलिए आम समाज में बोली जाने वाली हिंदी और कार्यालय हिंदी की कार्य प्रक्रिया में भिन्नता का ज्ञान समाज का होना अनिवार्य है। वैसे तो सामान्य हिंदी भाषा और कार्यालय हिंदी मैं आपसी संबंध आत्मकता भी हैं। इन दोनों की भाषिक संरचना या व्याकरणिक आधार एक ही है। सामान्य हिंदी का मौखिक रूप भले ही व्याकरण सम्मत ना हो लेकिन सामान्य हिंदी का लिखित रूप मूलतः व्याकरणिक आधार पर ही निर्धारित किया जाता है उसी तरह कार्यालय हिंदी का स्वरूप भी सामान्य हिंदी की तरह ही व्याकरण सम्मत होता है। किसी भी भाषा की भाषिक संरचना से उसकी मानकता का आधार बिंदु एक ही है। लेकिन वाक्य संरचना और प्रयोग की दृष्टि से दोनों में बहुत अंतर होता है। सामान्य हिंदी और कार्यालय हिंदी में आपसी संबंध होने के बावजूद भी बहुत अंतर है। जिसे निम्न बिंदुओं द्वारा समझा जा सकता है।-

1. सामान्य हिंदी समाज के अपने व्यवहार की भाषा है इस भाषा का प्रयोग सामान्य नागरिक अपने दैनिक क्रियाकलापों में करता है उसके लिए यह संपर्क की भाषा है अपनी अभिव्यक्ति को सहज रूप से संप्रेषित करने के लिए समाज सामान्य हिंदी की सरल शब्दावली का चयन करता है जिसमें वह अन्य भाषाओं या गोलियों के शब्दों को सहजता से ग्रहण कर लेता है जबकि कार्यालय हिंदी शासक वर्ग की भाषा है इसका प्रयोग सरकारी अर्द्ध सरकारी और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है सामान्य तौर पर कार्यालय में सरकार के विभागीय कार्य वृत्ति का विवरण ही होता है सरकार द्वारा उचित दिशा निर्देशों को जारी करना, विभिन्न सरकारी नियमों को सर्वमान्य संज्ञा देना, विनिमय बनाना, मंत्रालयों के बीच संवाद करना,विभागों के मध्य संपर्क स्थापित करना आदि कार्य किसी भी सरकारी कार्यालय में होते हैं।

2. समाने हिंदी का क्षेत्र अध्ययन व्यापक है वह समाज के प्रत्येक वर्ग द्वारा बोली जाती है। शिक्षित अथवा अशिक्षित प्रत्येक वर्ग का सामाजिक इस भाषा का प्रयोग करता है विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य हिंदी में क्षेत्रीय ता का प्रभाव लक्षित होता है अर्थात जिस क्षेत्र का सामाजिक हिंदी का प्रयोग करता है वह अपने क्षेत्र की बोलियों की शब्दों को सहजता से समाने हिंदी में स्वीकार कर लेता है सामान्य हिंदी मूल रूप से विभिन्न बोलियों का समुच्चय ही है इसलिए सामान्य हिंदी लगातार विकसित होती रहती है लेकिन कार्यालय हिंदी कार्यवृत्त की अपनी एक विशिष्ट भाषा होती है कार्यालय पर युक्तियों की भाषागत संरचना और उसकी शाब्दिक अन्यती द्वारा ही कार्यालय का कार्य सुचारू रूप से चलाया जा सकता है इसके शब्दों में परिवर्तन संभव नहीं होता इसमें प्रयोग में लिए जाने वाले शब्द परिभाषिक शब्द होते हैं यह प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक स्थान पर एकरूपता का निर्वाह करते हैं प्रत्येक क्षेत्र का सामाजिक चाहे उसकी अपने क्षेत्र की कोई भी बोली क्यों ना हो वह कार्यालय हिंदी में उस बोली का प्रभाव नहीं ला सकता इसलिए प्रयोग की दृष्टि से कार्यालय हिंदी मानक होती है और सामान्य हिंदी और अमानक।

3. सामान्य हिंदी का प्रयोग कोई भी सामाजिक कर सकता है वह अपने दैनिक कार्यों के अतिरिक्त पत्र व्यवहार में भी इसका प्रयोग कर सकता है वह सामान्य हिंदी को सुव्यवस्थित बनाते हुए उसमें साहित्य रचना भी कर सकता है ध्यातव्य है कि प्रत्येक सामान्य भाषा या बोली ही धीरे-धीरे साहित्य की भाषा बन जाती है साहित्य की भाषा भी सामान्य हिंदी की तरह निरंतर परिवर्तनशील होती है लेकिन कार्यालय हिंदी अपरिवर्तनीय होती है उसमें किसी एक शब्द के स्थान पर उस का पर्यायवाची शब्द नहीं रखा जा सकता।

4. सामान्य हिंदी का प्रयोग पूरे राष्ट्र के बहुसंख्यक सामाजिक ओ द्वारा किया जाता है यहां तक कि अहिंदिभाशी प्रदेशों के लोग भी इस भाषा को जान समझ सकते हैं और आंशिक तौर पर संपर्क के लिए इसका प्रयोग भी करते हैं लेकिन कार्यालय हिंदी के प्रयोक्ता बहुत ही कम होते हैं कार्यालय की कार्यप्रणाली और पद्धति के अनुसार उसके प्रयोक्ता किसी भी क्षेत्र से संबंध होने पर भी कार्यालय हिंदी का एक जैसा प्रयोग ही करते हैं।

5. सामान्य हिंदी पूर्णता अनौपचारिक होती है और उस पर अन्य भाषाओं और बोलियों का प्रभाव सहज रूप से पड़ता है इसलिए शामा ने हिंदी को उन्मुक्त और स्वच्छंद भाषा कहा जाता है। थोड़ी थोड़ी दूरी पर सामान्य हिंदी में अपेक्षित परिवर्तन सहज रूप से दिखाई देता है वह कई बार व्याकरण का भी अतिक्रमण करती है लेकिन कार्यालय हिंदी औपचारिक होती है इस हिंदी का प्रयोग कार्यालयों में विभिन्न विषयों की सूचना पहुंचाना होता है वह भाषा की संरचनाओं के भीतर रहकर ही कार्य करती है।

6. सामान्य हिंदी में आम नागरिक अपने लोक के मुहावरों, लोकोक्तियां और व्यंजन आत्मक शब्दों का प्रयोग करता है इतना ही नहीं सामान्य हिंदी में अलंकारिक और लाक्षणिक्ता का पुत्र सहज ही दिखाई देता है। लेकिन कार्यालय हिंदी में लक्षणा या व्यंजना का प्रयोग पूर्णतया वर्जित है। सूचना प्रधान होने के कारण उसमें मुहावरों, लोकोक्तियों या अलंकारिक ता का प्रयोग पूरी तरह से निषिद्ध है।

7. सामान्य हिंदी का प्रयोग संवेदना ओं की अभिव्यक्ति के लिए किया जाता है इसमें सामाजिक अपने राग द्वेष, आक्रोश, राष्ट्र प्रेम तथा विद्रोह कि अभी व्यक्तियों को आवश्यकता अनुरूप प्रयोग में लाता है लेकिन कार्यालय हिंदी का संबंध सामाजिक की संवेदना हो या भावनाओं से नहीं होता ना ही वह सामाजिक के विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान करती है वह केवल शासन की कार्यप्रणाली और उसकी सूचनाओं को संप्रेषित करने का आधार बिंदु है।

8. सामान्य हिंदी में राष्ट्र के लोगों की सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक चेतना विद्यमान रहती है वह भारत राष्ट्र की आत्मा की प्रतिध्वनि है लोक के समस्त व्यापार, जिनका संबंध उसकी सामाजिक सांस्कृतिक चेतना से है, उसे क्रियान्वित करने के लिए सामान्य हिंदी का प्रयोग किया जाता है किंतु कार्यालय हिंदी में प्रशासन, विधि और संवैधानिक विधाओं का विवेचन किया जाता है उसका प्रयोग भले ही समाज के सामाजिक द्वारा किया जा रहा हो लेकिन उसमें सामाजिक की सोच, उसकी आस्था और विश्वास का प्रभाव नहीं होता वह पूर्णत निर्व्यक्तिक होती है।

9. भाषिक संरचना की दृष्टि से सामान्य हिंदी और कार्यालय हिंदी दोनों में पर्याप्त अंतर है जहां सामान्य हिंदी में कृत वाच्य का प्रयोग अधिक होता है वही कार्यालय हिंदी में कर्म वाच्य को अधिक महत्व दिया जाता है।

10. सामान्य हिंदी और कार्यालय हिंदी में एक विशेष अंतर उसकी शब्दावली को लेकर भी है जहां कार्यालय हिंदी में परिभाषित शब्दों का प्रयोग किया जाता है वहीं सामान्य हिंदी में इनका प्रयोग संभव नहीं है।

अंततः कहा जा सकता है कि सामान्य हिंदी में आम सामाजिक की भावक्तमकता और संवेदनाएं अभिव्यक्त होकर आती है इसलिए वह निरंतर समय हुआ क्षेत्र अनुसार परिवर्तित होती रहती है कार्यालय हिंदी यांत्रिक होती है और उसका एक सुनिश्चित प्रारूप होता है जिसमें कार्यालय की अभिव्यक्ति यां प्रस्तुत की जाती है।