कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति के कवि/नन्ददास का जीवन परिचय

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नन्ददास की गणना वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख भक्त कवियों में की जाती है। ये गोस्वामी विट्ठलनाथ के शिष्य थे। इनका जन्म सनाढ्य ब्राह्मण कुल में वि ० सं ० १५९० में हुआ। (अष्टछाप और वल्लभ :डा ० दीनदयाल गुप्त :पृष्ठ २५६-२६१ ) ये संस्कृत और बृजभाषा के अच्छे विद्वान थे। भागवत की रासपंचाध्यायी का भाषानुवाद इस बात की पुष्टि करता है। वैषणवों की वार्ता से पता चलता है कि ये रसिक किन्तु दृढ़ संकल्प से युक्त थे। एक बार ये द्वारका की यात्रा पर गए और वहाँ से लौटते समय ये एक क्षत्राणी के रूप पर मोहित हो गये। लोक निन्दा की तनिक भी परवाह न करके ये नित्य उसके दर्शनों के लिए जाते थे। एक दिन उसी क्षत्राणी के पीछे-पीछे आप गोकुल पहुँचे। इसी बीच वि ० सं ० १६१६ में आपने गोस्वामी विट्ठलनाथ दीक्षा ग्रहण की और तदुपरान्त वहीं रहने लगे। डा० दीनदयाल गुप्त के अनुसार इनका मृत्यु-संवत १६३९ है। वार्ता के अनुसार नन्ददास गोस्वामी तुलसीदास के छोटे भाई थे। विद्वानों के अनुसार वार्ताएं बहुत बाद में लिखी गई हैं। ( हिन्दी साहित्य का इतिहास :आचार्य रामचन्द्र शुक्ल :पृष्ठ १७४ ) अतः इनके आधार पर सर्वसम्मत निर्णय सकता। पर इतना निश्चित है कि जिस समय वार्ताएं लिखी गई होंगी उस समय यह जनश्रुति रही होगी कि नन्ददास तुलसीदास भाई हैं चाहे चचेरे हों ( हिन्दी साहित्य :डा० हजारी प्रसाद द्विवेदी :पृष्ठ१ ८८ )या गुरुभाई ( हिन्दी सा० का इति० :रामचन्द्र शुक्ल :पृष्ठ १२४ ) बहुत प्रचलित रही होगी।