कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति के कवि/वल्लभ रसिक का जीवन परिचय

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वल्लभ रसिक गौड़ीय सम्प्रदाय के ऐसे दूसरे कवि हैं जिनका साहित्य के किसी ग्रन्थ में उल्लेख नहीं मिलता। गदाधर भट्ट जी के वंशजों के अनुसार वल्लभ रसिक भट्ट जी के द्वितीय पुत्र थे। इनके बड़े भाई का नाम रसिकोत्तंस था। भट्ट जी अपने दोनों पुत्रों को स्वयं शिक्षा और दीक्षा दी। इस आधार पर वल्लभ रसिक का कविताकाल वि ० सं ० १६५० के आस पास स्वीकार किया जा सकता है। क्योंकि गदाधर भट्ट का समय वि ० सं ० १६०० से कुछ पूर्व का अनुमानित किया गया है । भट्ट जी के पुत्र होने के कारण ये भी दक्षिणात्य ब्राह्मण हैं। किन्तु इन सभी तथ्यों ~~ समय,वंश सम्प्रदाय आदि के विषय में वल्लभ रसिक ने स्वयं कुछ नहीं लिखा। अपनी वाणी में तो महाप्रभु चैतन्य अथवा षट्गोस्वामियों की उन्होंने वन्दना भी नहीं की।