कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति के कवि/स्वामी हरिदास का जीवन परिचय

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हरिदासी सम्प्रदाय के संस्थापक स्वामी हरिदास की गणना ब्रज भाषा के प्रमुख भक्त कवियों में की जाती है । उनकी भजन भावना और विरक्ति के विषय में कई समकालीन तथा परवर्ती कवियों ने उल्लेख किया है किन्तु इनके जन्म-संवत,जन्म-स्थान,जाति,कुल, गुरु आदि का उल्लेख किसी भी समकालीन कवि या लेखक ने अपनी रचना में नहीं किया। इसलिए आज इनके जन्म-संवत आदि के सम्बन्ध में निश्चित रूप से कहना कठिन है.

  • स्वामीजी के जन्म के सम्बन्ध में दो मत प्रचलित हैं। पहले मत के पोषक हैं वृन्दावनस्थ बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामियों के अनुसार स्वामी जी वि० सं० १५६९ में अलीगढ जिले के अंतर्गत हरिदास नामक ग्राम में उत्पन्न हुए थे। इनके अनुसार स्वामीजी का जन्म गर्ग गोत्रीय सारस्वत ब्राह्मण कुल में हुआ था। दूसरे मत के अनुसार स्वामी जी जन्म वि० सं० १५३७ में वृन्दावन से १.५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित राजपुर ग्राम के एक सनाढ्य ब्राह्मण कुल में हुआ था।
  • स्वामी हरिदास की मृत्यु ९५ वर्ष की अवस्था में हुई इससे दोनों मतों के विद्वान सहमत हैं। वि० सं० १५६९ में जन्म मानने वालों के अनुसार स्वामी जी की मृत्यु वि० सं० १६६४ और दूसरे मत के अनुसार वि० सं० १६३१।
  • स्वामी जी के परम्परानुयायी विद्वान आशुधीरदेव जी को स्वामी जी का गुरु स्वीकार करते हैं। इस मत की पुष्टि टट्टी संस्थान के छठे आचार्य रसिकदेव के इस श्लोक से हो जाती है :
अशुधीरस्य शिष्यों यो हरिदासः प्रकीर्तितः।
अनन्याधिपतिः श्रीमान गुरुणांच गुरुः प्रभुः।।