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गुल सनोबर/३ राजकन्या मेहेरंगेज से बदला

विकिपुस्तक से

बादशाह के एक के बाद एक छह पुत्र मेहेरअंगेज से विवाह करने निकले और मारे गए। छह पुत्रो को मरा हुआ देख पुरे महल और बादशाह के मन में काली छाया छा गयी। इतना ही नही बादशाह तो इतने दुखी हो गए की उनमे न तो एहसास थे, ना चैतन्य चेहरे पर था।

बादशाह का सबसे छोटा सातवा बेटा शहजादा अल्माशरूह्बख्ष भी बेहद अस्वस्थ हो गया था। मेहेरंगेजने अपने प्राणप्रिय भाइयो को मार दिया यह सोच कर उसके मन में राजकन्या मेहेरंगेज से बदला लेने का जुनून छा गया। मेहेरंगेज़ के बारे में उसके मन में इतनी नफरत भर गई थी की हरदम वह उससे बदला लेने के बारे में ही सोचता था।

आखिर उससे रहा नहीं गया और उसने अपने पिताजी से पूछा पिताजी एक बात पुछु? बादशाह ने कहा पूछो बेटा क्या पूछना है।। बादशाहने डूबे स्वर में पूछने को कहा। पिताजी उस दृष्ट मेहेरंगेज़ ने मेरे भाइयो को मारा है जब तक मै राजकन्या मेहरंगेज से बदला नहीं ले लेता मुझे शांति नही मिलेगी।

अपने हाथो के पंजे मसलते हुए वह बोला उसके इस कार्य की सजा उसको मिलने ही चाहिए, उसको इसका प्रायश्चित करना ही होगा। पुत्र के इस सवाल से बादशाह के मन को बहुत बड़ा धक्का लगा। वह कुछ घबरायेसे हो गए और थोड़ी देर की शांति के बाद बोले नही नहीं बीटा, अब तुम ऐसा मत कहो उस दुष्ट राजकन्या मेहेरंगेज़ की वजह से पहले ही हम हमारे पांच पुत्र और तुम अपने भाई खो बैठे हो। अब तुम अकेले मेरे पुत्र बचे हो जो मेरा आधार है, तुम हमें छोड़कर मत जाओ।

पिताजी आपको कुछ गलतफहमी हो गयी है। मै उस राजकन्या के रूप के जाल में नहीं फसा हूं! मै सिर्फ इतना चाहता हूं की उस मेहेरंगेज़ के रहस्यमय सवाल को जवाब खोजू और उसके महल में जाकर उसका गर्व हरण करू बस। उसको ऐसे छोड़कर नहीं चलेगा क्योकि अगर ऐसा किया तो वह दुष्ट और ना जाने कितने राजपुत्रो को मौत के घाट उतारेगी। क्या लगता है पिताजी आपको सही कहा ना मैंने।

बादशाह ने इस बारे में कुछ नहीं कहा वह कुछ कहे उससे पहले बादशाह का सर घूमने लगा मानो जैसे उसकी सोचने की शक्ति ही ख़त्म हो चुकी हो। फिर से बादशाह के पुत्र ने रूककर कहा अब्बाजान आप ही सोचिये जवानो के मरने के इस सिलसिले को रोकना होगा की नहीं? बादशाह ने कहा बेटे तुम जो कह रहे हो वह सही है लेकिन… बादशाह कहते कहते रुक गए।


मै आपके मन को समझता हु पिताजी शहजादा ने कहा, लेकिन मेरी जान की आप बिलकुल भी चिंता ना करे, मेरी जान इतनी सस्ती नहीं की कोई भी हरण करले। मै वचन देता हु आपको उस दॄष्ट राजकन्या के घमंड को चूर करने के लिए पहले उसके सवाल का जवाब खोजेंगे उसके बाद ही उसके दरबार में जाकर उसके गर्व का हरण करेंगे इसीलिए आप मेरी परवाह बिलकुल भी ना करे।

बादशाह पुत्र का विरोध भी नहीं कर सके, लेकिन शहजादे की मा को जब यह बात पता चली तो वह फूट-फूटकर रोने लगी, क्योकि अकेला बचा पुत्र भी उसी खाई में जाने की बात कर रहा था जहा पांच पुत्र पहलेसेही गिर कर अपनी जान गवा बैठे हों।


लेकिन आखिर शहजादे ने अपनी माँ को अपने पांचो भाइयो का वास्ता देकर मना लिया और कहा अम्मीजान आप दोनों के हाथ और भगवान अल्लाह का साथ जब तक मेरे सर पर है मेरा कोई बाल भी बाक़ा नहीं कर सकता आप बिलकुल भी मेरी चिंता ना करे।

शहजादे की माँ की आखो से आंसू रुक नही रहे थे, उनके वह आंसू पौछते हुए शहजादा ने कहा अम्मीजान आप रोइये मत हमने कहा न हम सही सलामत आपके पास वापस आएंगे। शहजादे की माँ ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा बेटा मै सिर्फ इतना चाहती हूं की कोई कुबुध्दि तुम्हारे मन में ना आये, भगवान अल्लाह तुम्हारी हिफ़ाजत करे। शाहजादे ने भी सर हिलाकर हां कहा।


और फिर दूसरे ही दिन पूरी तैयारी के साथ एक तेजधार तलवार को लेकर शहजादा अपने सफर पर निकल पड़ा। माँ-बाप को प्रणाम करते हुए अपने तेज घोड़े पर बैठा और उसे दौड़ने का आदेश दिया। उसके पीठ की तरफ देखते हुए माता-पिता की आँखों से गिरते आंसू बया कर रहे थे की पुत्रो को खोने का गम क्या होता है। थोड़ी ही देर में शाहजादा इतनी दूर चला गया की माँ-बाप की आँखों से ओझल हो गया।

लेकिन हवा से बात करती घोड़े की सवारी पर भी वह सिर्फ और सिर्फ एक ही बात सोच रहा था और वह थी राजकन्या मेहरंगेज से बदला लूंगा।