देवनागरी/इतिहास

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अंग्रेजों ने अपने भाषा के विस्तार करने हेतु देवनागरी लिपि को हमेशा नष्ट और हटाने के बारे में ही सोचते थे। हालांकि इस लिपि में अंग्रेजी के शब्द का समान उच्चारण आ जाता है, लेकिन लोग उसके शब्द को अंग्रेजी में नहीं लिख सकते हैं, क्योंकि देवनागरी लिपि पूरी तरह उच्चारण पर आधारित है। इस कारण अंग्रेजी भाषा से केवल हिन्दी भाषा में कुछ शब्द ही आ सके। लेकिन अंग्रेज अपनी लिपि ला कर हिन्दी में और भी अंग्रेजी शब्दों को डालना चाहते थे।

देवनागरी लिपि के सरल होने के कारण अंग्रेजों के द्वारा रोमन लिपि का उपयोग न के बराबर होने लगा था। लेकिन बाद में जब कम्प्युटर के आने पर देवनागरी लिपि में लिखने के साधन कई समय पहले ही आ गए थे। लेकिन लोगों को इसके बारे में अधिक जागरूक नहीं किया जा सका। देवनागरी लिपि में लिखने हेतु कई लाखों साधन सभी जगह मौजूद है, लेकिन कोई एक साधन का उपयोग हर व्यक्ति नहीं करता है। इस कारण इसके साधन के बारे में लोगों में अधिक जानकारी नहीं है।

जानकारी की कमी[सम्पादन]

जानकारी के अभाव में हिन्दी भाषा के 50 करोड़ मातृ भाषा होने के बाद भी सभी लोग देवनागरी लिपि में न लिख पाने के कारण हिन्दी व अन्य भाषाओं की सामग्री तक नहीं पहुँच पाते हैं। देवनागरी लिपि में लिखने के कई ऐसे साधन भी मौजूद हैं, जिससे कोई भी आसानी से हिन्दी लिख सकता है। लेकिन उसे इसकी जानकारी नहीं है। यही इस लिपि के प्रसार में सबसे बड़ी बाधा है।