देवनागरी/बाधा

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देवनागरी लिपि के प्रसार और विकास में सबसे बड़ी बाधा इसके लिखने के साधन का सही तरीके से विकास और प्रचार का न होना है। इसके कई लिखने के साधन तो हैं, लेकिन इसके बारे में आम जन में बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी होती है। इस कारण मजबूरी में उन्हें दूसरे लिपि का सहारा लेना पड़ता है। देवनागरी लिपि की 10 कमियाँ ! 1.ग, ण,और श में आकार लगे होने का भ्रम होता है ! 2.वर्ण के प्रकार -- क, र ध्वनि-राजा,क्रम,कर्म,ट्रक,ऋण,कृपा ख.द - दम,विद्या,छद्म,गद्दी ग. क-कर,वक्त ,क्वाथ घ .श-शाम,श्रम,श्याम ङ.म-मन,म्यान,छद्म,ब्रह्म च.भ-भवन,अभ्युक्ति,उद्भव, 3.संयुक्ताक्षर में आधे अक्षर बाएँ,दाएँ और नीचे लगते हैं-वह, व्यय, द्वार,जिह्वा! 4.शुद्ध में द पूरा अक्षर लिखा है,लेकिन उच्चारण आधा होता है!ध आधा लिखा होता है,लेकिन उच्चारण पूरा होता है !इसी तरह वृद्ध,श्रद्धा आदि! 5.शक्ति में क पर भी इकार लगता है!ऐसे ही निश्चित,बल्कि आदि! 6.द्विज का उच्चारण दु+वि+ज होता है!लिखने और पढ़ने दोनों में दुविधा होती है! 7.जो लिखा दिखता है वह उच्चारित नहीं होता है!और जो कहते हैं वह नहीं लिखा जाता है! क.शुरू में एकार लगा नहीं है लेकिन उच्चारित होता है! जैसे-क्या का उच्चारण के+या होता है!इसी तरह-व्यय, प्यास,प्याज,ब्याज,व्यापार,व्यवस्था,व्यवहार,आदि! ख.शुरू में ओकार नहीं लगा है,लेकिन उच्चारित होता है! जैसे-द्वार दो+वा+ र,द्वंद्व,ज्वर,त्वरित आदि! 8.शब्दों के उच्चारण के हिसाब से वर्णों का क्रम अस्पष्ट होता है!असमंजस की स्थिति रहती है!जैसे-क.वृद्ध उच्चारण वृ+द्+ध होता है! ख.निर्देश लिखे वर्ण का क्रम देखें तो नि+दे+र्+श उच्चारण के अनुसार ' दे ' के पहले ' र ' ध्वनि संकेत लिखा होना चाहिए ! लेकिन ऐसा नहीं है-दे के बाद र का संकेत लगता है! 9.अनुनासिक अनेक ध्वनि संकेतों के बदले सिर्फ अनुस्वार का प्रयोग होने के कारण ध्वनि का गलत संकेत लिखा जा रहा है ! जैसे-अंत उच्चारित करें तो अ+न्+त=अन्त होता है!इसी तरह कंपनी/कम्पनी,खंड/खन्ड/खण्ड आदि! 10.देवनागरी एक हजार साल पुरानी लिपि है!कम्प्यूटर से हिंदी टाइपिंग में लगभग140ध्वनि संकेतों की आवश्यकता होती है! देवनागरी लिपि से विकसित होडो़ सेंणा लिपि में उपर्युक्त सभी कमियों का समाधान है!इस लिपि से मात्र 45 ध्वनि संकेत चिह्नों से शुद्ध वर्तनी लिखी जा सकती है!सिर्फ हिंदी और मुंडा भाषाएँ ही नहीं,अनेक भारतीय भाषाएँ भी शुद्ध वर्तनी के साथ लिखी जा सकती हैं ! रवीन्द्र नाथ सुलंकी www.hindikinailipi.com

साधन के सही विकास की कमी[सम्पादन]

पहली विधि

देवनागरी लिपि में लिखने हेतु साधन कई सारे हैं, लेकिन सभी में कुछ न कुछ कमी होती है। जैसे कृति देव नामक फॉन्ट से कार्यालय में लोग हिन्दी लिखते हैं। लेकिन यह फॉन्ट यूनिकोड में नहीं होता है। अर्थात यह केवल एक दिखावटी हिन्दी है, जो केवल फॉन्ट के रखने तक ही होती है। इसका उपयोग इंटरनेट पर नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसका उपयोग छपाई और चित्र बनाने जैसे फोटो शॉप आदि में सरलता से किया जा सकता है।

दूसरी विधि

इसके दूसरी विधि है। उच्चारण के अनुसार रोमन लिपि के कुंजीपटल पर लिखना। इससे यदि आप रोमन लिपि अच्छे से लिख सकते हो तो उससे उच्चारण के समान कुछ देवनागरी लिपि में भी लिख सकते हो। लेकिन इससे हर शब्द नहीं लिखा जा सकता है और कुछ इस तरह के साधन में यदि लिखा भी जाता है तो उसके लिए भी काफी मेहनत करनी पड़ती है।

तीसरी विधि

तीसरी विधि कुंजीपटल से अलग अलग अक्षर लिखने की है। लेकिन लोग ज़्यादातर या हमेशा रोमन लिपि के कुंजीपटल का उपयोग करते हैं। इस कारण यह विधि काफी कठिन है। लेकिन एक बार यह विधि कोई सीख ले तो बहुत आसानी हो जाती है। लेकिन इस विधि में भी कई बार कई अक्षर नहीं होते हैं। इस कारण यदि कोई इस विधि को सीख भी ले तो उसे बार बार अपने कुंजी पटल की व्यवस्था को बदलते रहना पड़ेगा।

साधन के प्रचार की कमी[सम्पादन]

यदि कोई हिन्दी लिखने का अच्छा साधन है, तो भी उसके प्रचार में इतनी कमी है कि लोग उस तक पहुँच भी नहीं पाते हैं। कुछ लोग जो लिखने के लिए सरल तरीका चाहते हैं, उनके लिए भी कई तरह के साधन है और जो लोग कृति देव आदि फॉन्ट का उपयोग लिखने के लिए करना चाहते हैं, उनके लिए परिवर्तक भी मौजूद है जो आपके द्वारा कृति देव के रोमन लिपि को देवनागरी लिपि के यूनिकोड में बदल देता है। इससे आप इंटरनेट पर कहीं भी इसे किसी को भी दिखा सकते हो।

हिन्दी में उपलब्ध हर जालस्थल (वेबसाइट) अपने ओर से या तो कोई साधन उपलब्ध कराता है या उतना भी उपलब्ध नहीं कराता है। इस कारण लोगों के पास हिन्दी लिखने के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है या फिर उपलब्ध साधन उनके लिए ठीक नहीं होता है। इस कारण देवनागरी लिपि के सही साधनों के प्रचार की बहुत आवश्यकता है।

बाधा दूर करने के उपाय[सम्पादन]

  • एक मुख्य साधन बनाया जाये, जिसमें सभी अक्षर शामिल हो।
  • इस साधन का प्रचार हर हिन्दी जालस्थल करे।
  • साधन को ऐसा होना चाहिए कि सभी आसानी से बहुत देर तक उसका उपयोग कर सकें।
  • हर चित्र बनाने आदि का सॉफ्टवेयर भी यूनिकोड में लिखे देवनागरी को आसानी से उपयोग कर सके।
  • देवनागरी लिपि में कई नए फॉन्ट उपलब्ध हो। जिससे लोगों को अच्छे पढ़ने लायक फॉन्ट मिले।
  • फॉन्ट ऐसा होना चाहिए कि उससे छोटे रखने पर भी आसानी से पढ़ा और समझा जा सके।
  • सभी हिन्दी जालस्थल वाले इस लिपि के लिए अलग से आकार तय करें। इससे लोगों को पढ़ने में सहायता होगा।देवनागरी लिपि से विकसित होडो़ सेंणा लिपि में देवनागरी लिपि की सभी कमियों के समाधान हैं! कृपया सम्पूर्ण जानकारी के लिए निम्नलिखित वेबसाइट पर देखें -

www.hindikinailipi.com रवीन्द्र नाथ सुलंकी www.hindikinailipi.com