देवनागरी/विकास

विकिपुस्तक से
Jump to navigation Jump to search

हिन्दी एवं अन्य भारतीय व नेपाली भाषाओं के विकास हेतु देवनागरी लिपि का विकास करना अति आवश्यक है। क्योंकि इन भाषाओं में कई ऐसे उच्चारण होते हैं, जिसे किसी अन्य लिपि में लिखा नहीं जा सकता है। और यदि लिखा भी गया तो उसका सही उच्चारण नहीं होगा। इस कारण इससे भाषा के शब्दों का विलुप्त होने की प्रक्रिया शुरू होने लगेगी। जो किसी भी भाषा के विलुप्त होने के पहले चरण में आता है। इस कारण इस लिपि का विकास बहुत आवश्यक है।

विकास[सम्पादन]

उच्चारण और विभिन्न तरीकों में यह लिपि पहले ही विकसित है। लेकिन कम्प्युटर व इंटरनेट के अधिक उपयोग के साथ इसे भी इनमें अपना स्थान बनाना होगा। लेकिन इसके लिए इसके साधन और समर्थन की आवश्यकता है। देवनागरी लिपि की 10 खामियाँ ! 1.ग, ण,और श में आकार लगे होने का भ्रम होता है ! 2.वर्ण के प्रकार -- क, र 'ध्वनि-राजा , क्रम , कर्म , ट्रक , ऋण , कृपा ख.द - दम , विद्या , छद्म , गद्दी ग. क-कर , वक्त , क्वाथ , घ .श-शाम,श्रम,श्याम ङ.म-मन,म्यान,छद्म,ब्रह्म च.भ-भवन,अभ्युक्ति,उद्भव, 3.संयुक्ताक्षर में आधे अक्षर बाएँ, दाएँ और नीचे लगते हैं-वह, व्यय, द्वार,जिह्वा! 4.शुद्ध में द पूरा अक्षर लिखा है,लेकिन उच्चारण आधा होता है!ध आधा लिखा होता है,लेकिन उच्चारण पूरा होता है !इसी तरह वृद्ध,श्रद्धा आदि! 5.शक्ति में क पर भी इकार लगता है!ऐसे ही निश्चित,बल्कि आदि! 6.द्विज का उच्चारण दु+वि+ज होता है!लिखने और पढ़ने दोनों में दुविधा होती है! 7.जो लिखा दिखता है वह उच्चारित नहीं होता है!और जो कहते हैं वह नहीं लिखा जाता है! क.शुरू में एकार लगा नहीं है लेकिन उच्चारित होता है! जैसे-क्या का उच्चारण के+या होता है!इसी तरह-व्यय, प्यास,प्याज,ब्याज,व्यापार,व्यवस्था,व्यवहार,आदि! ख.शुरू में ओकार नहीं लगा है,लेकिन उच्चारित होता है! जैसे-द्वार दो+वा+ र,द्वंद्व,ज्वर,त्वरित आदि! 8.शब्दों के उच्चारण के हिसाब से वर्णों का क्रम अस्पष्ट होता है!असमंजस की स्थिति रहती है ! जैसे-क.वृद्ध उच्चारण वृ+द्+ध होता है! ख.निर्देश लिखे वर्ण का क्रम देखें तो नि+दे+र्+श उच्चारण के अनुसार ' दे ' के पहले ' र ' ध्वनि संकेत लिखा होना चाहिए ! लेकिन ऐसा नहीं है-दे के बाद र का संकेत लगता है! 9.अनुनासिक अनेक ध्वनि संकेतों के बदले सिर्फ अनुस्वार का प्रयोग होने के कारण ध्वनि का गलत संकेत लिखा जा रहा है ! जैसे-अंत उच्चारित करें तो अ+न्+त=अन्त होता है!इसी तरह कंपनी/कम्पनी,खंड/खन्ड/खण्ड आदि! 10.देवनागरी एक हजार साल पुरानी लिपि है! कम्प्यूटर में हिंदी टाइपिंग में लगभग140ध्वनि संकेतों की आवश्यकता होती है! देवनागरी लिपि से विकसित होडो़ सेंणा लिपि में उपर्युक्त सभी कमियों का समाधान है!इस लिपि से मात्र 45 ध्वनि संकेत चिह्नों से शुद्ध वर्तनी लिखी जा सकती है!सिर्फ हिंदी और मुंडा भाषाएँ ही नहीं,अनेक भारतीय भाषाएँ भी शुद्ध वर्तनी के साथ लिखी जा सकती हैं ! रवीन्द्र नाथ सुलंकी www.hindikinailipi.com

हर क्षेत्र में[सम्पादन]

फिल्म (चलचित्र)

हिन्दी फिल्मों का भारत के अलावा कई देशों में बहुत अधिक लोकप्रियता है, लेकिन अन्य देशों में अधिक कमाई के कारण यह देवनागरी लिपि के स्थान पर रोमन लिपि का अधिक उपयोग करते हैं। जब कई वर्ष पूर्व हिन्दी फिल्में केवल यहीं के दर्शक देखते थे, तब हिन्दी/उर्दू के लिखे जाने वाले लिपि में होता था। लेकिन बाद बाद में क्षेत्र के विस्तार के साथ साथ यह इन सभी को भूल कर रोमन लिपि का उपयोग करने लगे। इस कारण इस लिपि को काफी हानि हुई। इसे फिर से इस क्षेत्र में विकास करने हेतु इसके साथ देवनागरी लिपि में लिखे नाम की भी आवश्यकता है।

धारावाहिक

वैसे तो धारावाहिक में कई बार नाम देवनागरी लिपि में ही होता है। लेकिन कुछ लोग फॉन्ट की कमी या अन्य कारण से इस लिपि के स्थान पर अन्य लिपि का उपयोग कर रहे हैं। धारावाहिक देखने वाला व्यक्ति हर दिन इसे देखता है। यदि इसमें देवनागरी लिपि नहीं होने से उससे उसके पढ़ने में भी देवनागरी लिपि कमजोर होती जाएगी। इससे लोगों को धीरे धीरे देवनागरी लिपि पढ़ने में कठिन लगने लगेगा। इस कारण यदि देवनागरी लिपि का विकास करना है तो हर धारावाहिक के नाम को भी देवनागरी में ही होना चाहिए और हर विज्ञापन जो दिखाया जाता है उसे भी देवनागरी लिपि में ही होना चाहिए।

समाचार पत्र

वैसे समाचार पत्र में जो हिन्दी भाषा में होते हैं, उनमें इस लिपि को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं और इसी लिपि का उपयोग करते हैं। लेकिन कई बार इसके समाचार में भी देवनागरी लिपि के स्थान पर अन्य लिपि का उपयोग होता है। इससे उस समाचार को पढ़ने वाले पाठक के मन में भी धीरे धीरे अन्य लिपि के शब्द आने लगते हैं। जो किसी भी लिपि के लिए अच्छे संकेत नहीं है। इस लिपि के विकास हेतु हर समाचार पत्र को देवनागरी लिपि का सम्मान के साथ उपयोग करना चाहिए और जो विज्ञापन देने वाले ऐसा नहीं करते, उन्हें समझाना चाहिए कि इससे देवनागरी लिपि को बहुत हानि होगी। इस तरह के विज्ञापन देने वाले लोगों को भी यह स्वयं से समझना चाहिए कि वे बिना जाने की गलती से देवनागरी लिपि का विनाश कर रहे हैं।

मोबाइल

मोबाइल सेवा प्रदाता कई बार देवनागरी लिपि में यूनिकोड का उपयोग कर संदेश भेज देते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता रहता है कि वह जिस उपकरण में यह भेज रहे हैं, वह उसे आसानी से दिखा सकता है या नहीं। इस कारण मोबाइल सेवा प्रदाता हिन्दी में संदेश ही लिखना बंद कर देते हैं। जबकि उन्हें हर मोबाइल ग्राहक को एक संदेश भेज कर यह जानना चाहिए कि उन्हें यह संदेश स्पष्ट दिख रहा है या नहीं। ताकि भविष्य में उन्हें आसानी से वे लोग हिन्दी में संदेश भेज सकें। इसके अलावा जो मोबाइल बनाते हैं, उन्हें भी अपने हर मोबाइल पर हिन्दी लिखने और पढ़ने की सेवा उपलब्ध रखनी चाहिए। इसके अलावा हर मोबाइल खरीदने वाले व्यक्ति को भी यह ध्यान देना चाहिए कि उसके मोबाइल में हिन्दी में लिखने और पढ़ने कि एक बहुत छोटी सी सुविधा है या नहीं। यह बहुत ही छोटी सी सुविधा है और इसके होने या न होने से मोबाइल के दाम में कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन इससे आपके लिए बहुत सारे काम आसान हो जाएँगे।

वार्तालाप

सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट पर वार्तालाप के दौरान होती है। लेकिन हिन्दी में शब्दों का आकार अन्य भाषाओं की तुलना में काफी कम होता है। इस कारण कोई भी वार्तालाप में भी यूनिकोड के साथ हिन्दी लिख सकता है। लेकिन लोग ऐसा नहीं करते हैं। इस कारण यह देवनागरी के विकास में सबसे बड़ी बाधा भी है। जब तक लोग एक दूसरे से वार्तालाप के लिए इस लिपि का उपयोग नहीं करते तब तक इसका सही विकास नहीं हो सकता है। लेकिन इसमें एक बहुत उपयोगी बात यह है कि देवनागरी लिपि में अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए आप अमर लिखते हो तो आपको कुछ हिन्दी लिखने के साधन में केवल तीन अक्षर ही लिखने होते हैं। यह अपने आप ही बाकी को तय कर के आपके लिए अमर लिख देता है। इससे कोई भी आसानी से वार्तालाप के लिए इस लिपि का उपयोग कर सकता है।

यदि आप देवनागरी लिपि में लिखने वाले कुछ साधन को उपयोग कर देखें तो आपको पता चलेगा कि केवल कुछ शब्दों को छोड़ कर हिन्दी के हर शब्द के लिए आपको दो से तीन बटन दबाने पड़ेंगे। अर्थात जो अन्य भाषाओं में आपको छोटे रूप में लिखने पर 3 से 5 बटन दबाने पड़ते हैं। उनके लिए सही मात्रा के साथ हिन्दी यूनिकोड में आप को मात्र 2 से 3 बटन ही दबाने होते हैं। यह एक आश्चर्य की बात है, लेकिन आप हिन्दी के लिखने वाले कई साधन से आसानी से ऐसा कर के फेसबूक आदि में अपने मित्रो से बात कर सकते हो। इसके अलावा उन्हें पढ़ने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आप देवनागरी लिपि में लिख रहे होंगे। देवनागरी लिपि की मुख्य विशेषताओं में से यह भी है कि आप जो भी बोल सकते हो वह आप लिख भी सकते हो। जबकि अन्य लिपियों में ऐसा नहीं है।

तेजी[सम्पादन]

देवनागरी लिपि को लोग शायद धीमी गति के कारण नहीं लिखते होंगे। ऐसा हो सकता है लेकिन देवनागरी लिपि में लिखने वाले साधन इतने अधिक तेजी से आपको देवनागरी लिपि में लिखने देते हैं कि आप रोमन लिपि से भी तेजी से इस लिपि को लिख सकते हो।

रोमन लिपि में जो शीघ्र लेखन का उपयोग कर स्वर को भूल कर अपने लेख लिखते हैं। वैसा ही यदि आप देवनागरी लिपि में करोगे तो आप स्वर अपने आप ही लिखोगे। इसमें देवनागरी लिपि की विशेषता है कि इसके व्यंजन को लिखते समय स्वतः ही इसमें स्वर आ जाता है और आपके द्वारा लिखा गया एक अक्षर रोमन लिपि के दो से चार अक्षर के समान होता है।

शीघ्र लेखन[सम्पादन]

क्या लोग रोमन लिपि कि तरह शीघ्र लेखन का कार्य इस लिपि में कर सकते हैं? हमेशा, क्योंकि इसके कई साधन आपको केवल शीघ्र लेखन के द्वारा ही इस लिपि को लिखने देते हैं। मतलब आप इस कला से अच्छे गुणवत्ता वाले हिन्दी शब्दों को रोमल लिपि के शीघ्र लेखन की तरह ही लिख सकते हो।

यदि आपको शीघ्र लेखन कला आती है तो भी आप समान गुणवत्ता में देवनागरी लिपि में अपनी बात लिख सकते हो। या ये भी बोल सकते हैं कि देवनागरी लिपि को लिखने के लिए आपको शीघ्र लेखन कला आना चाहिए या आप इस लिपि में लिख कर यह कला सीख सकते हो।

कुल मिला कर यदि आप पूरे ज़ोर शोर से रोमन लिपि को आधे अधूरे शब्दों में लिख कर कुछ लिखोगे ठीक उतनी गति में आप बड़े बड़े देवनागरी लिपि के शब्द भी लिख सकते हो। लेकिन यह जानकारी लोगों तक नहीं पहुँचती है।