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देशप्रेम की कविताएं/हिमाद्रि तुंग श्रृंग से - जयशंकर प्रसाद

विकिपुस्तक से


हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती

स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती

'अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो,

प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!'


असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी

सपूत मातृभूमि के- रुको न शूर साहसी!

अराति सैन्य सिंधु में, सुवाड़वाग्नि से जलो,

प्रवीर हो जयी बनो - बढ़े चलो, बढ़े चलो!