बैंकिंग संबंधी मामलों पर बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न

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बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग, केन्द्रीय कार्यालय
भारतीय रिजर्व बैंक

देशी जमाराशियां[सम्पादन]

1. क्या बैंक ब्याजमुक्त जमाराशियां स्वीकार कर सकते हैं?

चालू खाते को छोड़कर अन्य खातों में बैंक ब्याजमुक्त जमाराशियां स्वीकार नहीं कर सकते

2. क्या बैंक बचत बैंक खातों पर तिमाही ब्याज अदा कर सकते हैं?

बैंक तिमाही या अधिक अंतरालों पर बचत बैंक खातों पर ब्याज अदा कर सकते हैं

3. क्या बैंक मीयादी जमाराशियों पर मासिक ब्याज अदा कर सकते हैं?

मीयादी जमाराशियों पर तिमाही या अधिक अंतरालों पर ब्याज देय होता है प्रोद्भूत तिमाही ब्याज को बट्टा करके बैंक मासिक ब्याज अदा कर सकते हैं

4. क्या बैंक 15 लाख रूपये या अधिक की कुल जमाराशियों पर विभेदक दर पर ब्याज अदा कर सकते हैं?

15 लाख रूपये और अधिक की एक जमाराशि पर विभेदक दर पर ब्याज अदा किया जा सकता है अलग-अलग जमाराशियों का जोड़ 15 लाख रूपये से अधिक होने पर ऐसा नहीं किया जा सकता

5. क्या बैंक अपने स्तर पर मीयादी जमाराशियों की अवधिपूर्व चुकौती कर सकते हैं

मीयादी जमाराशि बैंक और ग्राहक के बीच निश्चित अवधि की संविदा है तथा बैंक के विकल्प पर इसे अवधि से पहले नहीं चुकाया जा सकता ग्राहक के अनुरोध पर ही मीयादी जमाराशि की अवधिपूर्व चुकौती की जा सकती है

6. छुट्टी के दिन/गैर-कारोबारी कार्य-दिवस/रविवार को अवधि-पूर्ण होनेवाली जमाराशियों पर बैंकों द्वारा कैसे और कब ब्याज देय होता है?

बैंकों को जमाराशिकी विनिर्दिष्ट अवधि समाप्त होने की तारीख तथा अगले कार्य-दिवस में जमाराशियों की आगाम राशियों की अदयगी की तारीख के बीच आने वाले छुट्टी के दिनों/रविवार/गैर-कारोबारी कार्य-दिवसों के लिए जमाराशि पर मूलतः संविदा की गयी दर पर ब्याज अदा करना चाहिए

7. (क) क्या बैंक मीयादी जमाराशियों के अवधिपूर्व आहरण से इन्कार कर सकते हैं?

(क) बैंक मीयादी जमाराशियों के अवधिपूर्व आहरण से इन्कार नहीं कर सकते

(ख) क्या बैंक अवधिपूर्व आहरण के लिए दण्डराशि वसूल कर सकते हैं?

(ख) बैंक मीयादी जमाराशियों के अवधिपूर्व आहरण के लिए अपनी स्वयं की दण्डस्वरूप ब्याज दर निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं

8. क्या बैंक मृत स्टाफ-सदस्य के नाबालिग बच्चे/बच्चों के नाम में रखी जमाराशियों पर बैंक के स्टाफ को स्वीकार्य अतिरिक्त ब्याज अदा कर सकते हैं?

नहीं बच्चें (नाबालिग सहित) बैंक के स्टाफ-सदस्य/सेवानिवृत्त स्टाफ-सदस्य को स्वीकार्य अतिरिक्त ब्याज के लिए पात्र नहीं हैं

9. क्या न्यायालय द्वारा नाबालिग बच्चे को दी गयी क्षतिपूर्ति और नाबालिग बच्चे और माता-पिता के संयुक्त नाम में जमा की गयी राशि पर बैंक के स्टाफ को स्वीकार्य अतिरिक्त ब्याज अदा किया जा सकता है?

नहीं चूंकि राशि नाबालिग बच्चे से संबंधित होती है, न कि बैंक के स्टाफ से; अतः अतिरिक्त ब्याज अदा नहीं किया जा सकता

10. क्या बैंक सरकारी विभागों/सरकारी योजना के नाम में बचत बैंक खाते खोल सकते हैं?

अनुबंध में उल्लिखित सरकारी संगठनों/एजेंसियों की जमाराशियों को छोड़कर सरकारी विभागों/सरकारी योजनाओं के नाम में बचत बैंक खाते नहीं खोले जा सकते

11. मृत जमाकर्ता के नाम में मौजूद जमाराशि पर किस दर पर ब्याज देय होता है

मृत जमाकर्ता के नाम पर रहने वाली मीयादी जमाराशि के मामले में निम्नलिखित रूप में ब्याज अदा किया जा सकता हैः

  • यदि अवधिपूर्ण होने के पहले जमाराशि की अदायगी का दावा किया जाये, तो कोई दण्ड राशि लगाये बिना बैंक में रखी गयी जमाराशि की तारीख को बैंक के पास जितनी अवधि के लिए जमाराशि रखी गयी उस अवधि के लिए लागू दर पर ब्याज देय होगा
  • यदि जमाराशि की अदायगी का दावा उसके अवधिपूर्ण होने की तारीख के बाद किया गया हो, तो ब्याज अवधिपूर्णता की तारीख तक संविदा की गयी दर पर देय होगा अवधिपूर्णता की तारीख से जमाराशि अदा करने की तारीख तक, बैंक अवधिपूर्णता की तारीख से जमाराशि की अदायगी तक जमाराशि जितने दिन बैंक के पास रही उतनी अवधि के लिए अवधिपूर्णता की तारीख को लागू साधारण ब्याज दर पर ब्याज अदा करेगा
  • उक्त आधार पर ब्याज तभी अदा किया आयेगा यदि जमाकर्ता की मृत्यु जमाराशि की अवधिपूर्णता के पहले हो गयी हो यदि उसकी मृत्यु जमाराशिकी अवधिपूर्णता के बाद हुई हो, तो अवधिपूर्णता की तारीख के बाद कोई ब्याज देय नहीं होगा
12. क्या अतिदेय जमाराशि का नहीकरण अवधिपूर्णता की तारीख से किया जा सकता है और यदि हां, तो क्या चक्रवृद्वि ब्याज की अनुमति दी जा सकती है?

जीवित जमाकर्ता के नाम में रहने वाली अतिदेय जमाराशियां नवीकृत करने या न करने का विवेकाधिकार बैंक को है यदि बैंक अतिदेय जमाराशि को नहीकृत करने का निर्णय लेता है, तो परिपक्वता की तारीख से भविष्य की तारीख तक उसका नवीकरण उस दर पर किया जाना है, जो दर परिपक्वता की तारीख को, जितनी अवधि के लिए जमाराशि का नवीकरण किया जाना है उतनी अवधि कि लिए, लागू हो यदि पुनर्निवेश योजना या साधारण सावधि जमाराशि के अंतर्गत जीवित जमाकर्ता के नाम में रहनेवाली अतिदेय जमाराशि का नवीकरण जमाकर्ता के विशिष्ट अनुरोध पर बैंक द्वारा पुनर्निवेश योजना के अंतर्गत किया जा रहा हो तो चक्रवृद्वि दर पर ब्याज अदा करने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते चक्रवृद्वि की संकल्पना उस समय प्रचलन में रही हो

अनिवासी भारतीय जमाराशियां[सम्पादन]

13. विदेश मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशि की जमानत पर लिये गये ऋण की चुकौती विदेशी मुद्रा में किये जाने पर क्या जमा ब्याज दर से 2% अधिक की रियायती ब्याज दर लागू होती है?

अपने मूल ऋण दर के संदर्भ के बिना जमाकर्ताओं को विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों की जमानत पर दिये गये ऋणों और अग्रिमों पर प्रभार्य ब्याज दर निर्धारित करने की स्वतंत्रता बैंकों को रहती है चाहे चुकैती रूपयों में की गयी हो या विदेश मुद्रा में

14. क्या बैंक विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) योजना के अंतर्गत आवर्ती जमाराशियां स्वीकार कर सकते है?

नहीं बैंक विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) योजना के अंतर्गत आवर्ती जमाराशियां स्वीकार नहीं कर सकते

15. अनिवासी विदेशी और विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जामाराशियों पर ब्याज दरें कौन निर्धारित कर सकता है?

बैंकों के निदेशक मंडलों को ये शक्तियां प्रदान की गयी हैं कि वे जमाराशियों एवं अग्रिमों पर ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए आस्ति-देयता प्रबंधन समिति को प्राधिकृत करें

16. क्या बैंकों को अनिवासी विदेशी और विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों पर विभेदक ब्याज दर की अनुमति है?

हाँ, बैंकों को 15 लाख रूपये और अधिक की देशी मीयादी जमाराशियों की ही तरह अनिवासी विदेश मीयादी जमाराशियों पर ब्याज की विभेदक दरों की पेशकश करने की अनुमति है जहाँ तक विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों का संबंध है, बैंक निर्धारित समग्र अधिकतम सीमा की शर्त पर मुद्रावार न्यूनतम मात्रा, जिस पर विभेदक दर पर ब्याज की पेशकश की जा सकती है, के बारे में निर्णय लेने के लिए अब स्वतंत्र हैं

17. क्या बैंकों को अनिवासी अप्रत्यावर्तनीय (एन आर एन आर) जमाराशियों पर विभेदक ब्याज दर की पेशकश करने की अनुमति है?

हां बैंकों को अनिवासी अप्रत्यावर्तनीय (एन आर एन आर) जमाराशियों पर विभेदम ब्याज दर की पेशकश करने की अनुमति है

18. पुनर्निवेश जमाराशि से क्या अभिप्राय है?

पुनर्निवेश जामाराशिसे ऐसी जाराशियां अभिप्रेत हैं, जिनमें ब्याज (जब देय हो) का पुनर्निवेश उसी संविदाकृत दर पर अवधिपूर्णता तक किया जाता है तथा जिसका आहरण अवधिपूर्णता की तारीख को मूलधन सहित किया जा सके देश जमाराशियों पर भी यह लागू है

19. क्या अनिवासी विदेशी/विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जाराशियों का नवीकरण भूतलक्षी प्रभाव से (अर्थात परिपक्वता की तारीख से) किया जा सकता है? यदि हाँ, देय ब्याज दर क्या है?

बैंक, अपने विवेक पर, अतिदेय अनिवासी विदेशी/विदेश मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशि या उसके एक अंश का नवीकरण कर सकता है, बशर्ते परिपक्वता की तारीख से नवकिरण की तारीख तक (दोनों दिन शामिल अतिदेय अवधि 14 दिनों से अधिक न हो और इस प्रकार नवीकृत जमाराशि पर देय ब्याज की दर अवधिपूर्णता की तारीख को अथवा जमाकर्ता द्वारा जब नवीकरण की मांग की जाती हो उस तारीख को, जो भी कम हो, नवीकरण की अवधि के लिए लागू उपयुक्त ब्याज दर होगी यदि अतिदेय जमाराशियों के मामले में अतिदेय अवधि 14 दिनों से अधिक की हो तो जमाराशि का नवीकरण उस दिन लागू ब्याज दर पर किया जा सकता है, जिस दिन नवीकरण की मांग की गयी हो यदि जमाकर्ता समग्र अतिदेय जमाराशि अथवा उसका एक भाग नये अनिवासी विदेशी/विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशि के रूप में रखता हो, तो बैंक नयी मीयादी जमाराशि के रूप में इस प्रकार रखी गयी राशि पर अतिदेय अवधि के लिए अपनी ब्याज दरें निर्धारित कर सकते हैं नवीकरण के बाद योजना के अंतर्गत न्यूनतम निर्धारित अवधि पूरी हो के पूर्व जमाराशि निकाले जाने पर बैंक अतिदेय अवधि के लिए इस प्रकार दिये गये ब्याज की वसूली के लिए स्वतंत्र हैं

20. क्या विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) योजना के अंतर्गत रूपयों में अंकित ऋणों पर लागू ब्याज दर संबंधी शर्ते विदेशी मुद्रा में अंकित ऋणों पर लागू हैं

नहीं विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) योजना के अंतर्गत रूपयों में अंकित ऋणों पर लागू ब्याज दर संबंधी शर्ते विदेशी मुद्रा में अंकित ऋणों पर, जो विदेशी मुद्रा नियंत्रण विभाग द्वारा जारी अनुदेशों द्वारा शसित होते हैं, जागू नहीं होतीं

21. विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों के मामले में किन परिस्थितियों में धोषित ब्याज दर से अधिक अतिरिक्त ब्याज अदा किया जा सकता है?

(क) बैंक के स्टाफ-सदस्य या सेवानिवृत्त स्टाफ-सदस्य के नाम में, अकेले अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य या किन्हीं सदस्यों के साथ संयुक्त रूप में, या

(ख) बैंक के मृत स्टाफ-सदस्य के पति/पत्नी के नाम में स्वीकृत जमाराशि के संबंध में बैंक, अपने विवेक पर, निर्धारित ब्याज दर से एक प्रतिशत वार्षिक से अनधिक दर पर अतिरिक्त ब्याज अदा करने की अनुमति दे सकते हैं बशर्ते -

  • जमाकर्ता या संयुक्त खाते के सभी जमाकर्ता भारतीय राष्ट्रिकता या मूल के अनिवासी हों, और
  • बैंक संबंधित जमाकर्ता से इस आशय की धोषणा प्राप्त करे कि इस प्रकार जमा की गयी राशि अथवा जो राशि समय-समय पर जमा की जायेगी उक्त खण्ड (क) और (ख) में अल्लिखित जमाकर्ता से संबंधित राशि होगी

स्पष्टीकरणः "परिवार" शब्द से बैंक के स्टाफ-सदस्य/सेवानिवृत्त स्टाफ-सदस्य का पति/पत्नी, उस रा निर्भर उसके बच्चे, माता-पिता, भाई और बहन अभिप्रेत हैं और शामिल हैं; परन्तु इसमें विधिक रूप से अलग हुए पति/पत्नी शामिल नहीं हैं

22. मृत जमाकर्ता की अनिवासी विदेशी/विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशि के मामले में निर्धारित अवधि पूरी होने के पहले विधिक अत्तराधिकारियों द्वारा अवधिपूर्व आहरण किये जाने पर क्या कोई ब्याज देय है?

नहीं ब्याज अर्जित करने के लिए जमाराशि न्यूनतम निर्धारित अवधि तक रखी जानी चाहिए, जो वर्तमान में विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) के लिए एक वर्ष और अनिवासी विदेशी जमाराशियों के लिए छः माह है

23. क्या बैंक परिपक्वता और अदायगी की तारीख के बीच के शनिवार और छुट्टी के दिनों के लिए अनिवासी विदेशी और विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों पर ब्याज अदा कर सकते हैं?

हां जब भी नियत तारीखें शनिवार/रविवार/गैर-कारोबारी कार्य-दिवस/छुट्टी के दिन पड़ती हों, बैंकों को नियत तारीख तथा अदायगी की तारीख के बीच की अवधि के लिए मूल रूप से संविदा की गयी दर पर अनिवासी विदेश एवं विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों पर ब्याज अदा करने की अनुमति है, ताकि जमाकर्ताओं को ब्याज का कोई नुकसान न हो

अग्रिम[सम्पादन]

24. ऋण दर संबंधी निर्धारण में `स्वतंत्र' शब्द से क्या अभिप्रेत है?

बैंक अपने संबंधित बोड़ के अनुमोदन से 2 लाख रूपये से अधिक की ऋण सीमाओं के लिए मूल ऋण दर निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं, जो ऐसी ऋण सीमाओं के लिए उनके द्वारा लगायी जाने वाली न्यूनतम दर होनी चाहिए मूल ऋण दर धेषित की जानी चाहिए तथा उसे सभी शाखाओं में एक समान रूप से लागू किया जाना है बैंक अपनी आस्ति-देयता प्रबंधन समिति को इस बात के लिए अधिकृत कर सकते हैं कि वह जमाराशियों और अग्रिमों पर ब्याज दरें निर्धारित करे बशर्ते वे उसके बाद तत्काल उसे बोड़ को सूचित करें बैंकों को उपभोक्ता ऋण से इतर सभी अग्रिमों के लिए आस्ति-देयता प्रबंधन समिति/बोड़ के अनुमोदन से मुल ऋण दर पर अधिकतम अंतर (स्प्रेड) भी निर्धारित करना चाहिए

25. `मध्यवर्ती एजेंसिया' क्या हैं? `आवास-वित्त की मध्यवर्ती एजेंसियां' क्या हैं?

मध्यवर्ती एजेंसियों की उदाहरणस्वरूप सूची निम्नानुसार हैः

कमजोर वर्गो @ को आगे ऋण देने के लिए राज्य प्रायोजित संस्थाएं
कृषि निविष्टियों/उपकरणों के वितरक
राज्य वित्त निगम/राज्य औद्योगिक विकास निगम, जिस सीमा तक वे कमज़ोर वर्गो को ऋण प्रदान करते हैं
राष्टट्र्रीय लधु उद्योग निगम (एन एस आइ सी)
खादी और ग्रामीण उद्योग आयोग (के वी आइ सी)
विकेन्द्रीकृत क्षेत्र की सहायता में शामिल एजेंसियां
आवास और शहरी विकास निगम लि. (हुडको)
राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पुनर्वित्त के लिए अनुमोदित आवास वित्त कंपनियां
अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के लिए राज्य प्रायोजित संगठन (इन संगठनों को निविष्टियों की खरीद और आपूर्ति के लिए और/या इनके लाभार्थियों के उत्पादों के विनणन के लिए)
स्वयं सहायता समूहों को आगे ऋण देने के लिए व्यष्टि वित्त संस्थाएं/गैर सरकारी संगठन

@ प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र के तहत `कमजोर वर्ग' में निम्नलिखित शामिल हैं

5 एकड़ या कम की भूधारिताओं वाले छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन श्रमिक, काश्तकार और बँटाईदार;
शिल्पी, ग्रामीण और कुटीर उद्योग, जहाँ ऋण संबंधी अलग-अलग अपेक्षाएं 25000 रूपये से अधिक नहीं होतीं
लधु और सीमांत किसान, बँटाईदान, कृषि और कृषीतर श्रमिक, ग्रामीण शिल्पी और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार लाभार्थी हैं पारिवारिक आय 11,000 रूपये वार्षिक से अधिक नहीं होनी चाहिए
अनुसूचित जाति और अनुाूचित जनजाति
लाभार्थी ऐसे व्यक्ति हों, जिनकी सभी स्रोतों से पारिवारिक आय शहरी या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 7200 रूपये वार्षिक अथवा ग्रामीण क्षेंत्रों में 6400 रूपये वार्षिक से अधिक न हो उनके पास कोई भूमि नहीं होनी चाहिए अथवा उनकी भूधारिता का आकार सिंचित भूमि के मामले में 2.5 एकड़ से अधिक न हो (भूधारिता का मानदण्ड अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होता)
मेहतरों की मुक्ति और पुनर्वास की योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थी
ग्रामीण गरीबों तक पहुँचने के लिए स्वयं सहायता समूहों को स्वीकृत अग्रिम
26. क्या बैंक मूल ऋण दर के संदर्भ के बिना ब्याज दर लगा सकते हैं?

हां निम्नलिखित श्रेणियों के मामले में बैंकों को मूल ऋण दर के संदर्भ के बिना ब्याज दर लगाने की स्वतंत्रता हैः

मीयादी ऋणदात्री संस्थाओं की पुनर्वित्त योजनाओं के अंतर्गत ऋण
मध्यवर्ती एजेंसियों को दिये गये बैंक ऋण पर ब्याज दरें
बैंकों द्वारा बिलों की भुनाई
देशी/अनिवासी विदेशी/विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमाराशियों की जमानत पर अग्रिम/ओवरड्राप्ट

बैंक निम्नलिखित श्रेणियों के लिए मूल ऋण दर के संदर्भ के बिना ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए भी स्वतंत्र हैंः

(क) उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए ऋण

(ख) शेयरों और डिबेंचरांें/बांडों की जमानत पर अलग-अलग व्यक्तियों को ऋण

(ग) गैर-प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र के अन्य व्यक्तिगत ऋण

तथापि, ऐसे ऋणों के मामले में किसी रियायत की अनुमति देने का इरादा नहीं है, अतः बैंकों को मूल ऋण दर से कम दरों पर ब्याज नहीं लगाना चाहिए, चाहे ऋण की राशि का आकार कुछ भी क्यों न हो

27. क्या बैंकों द्वारा कई मूल ऋण दरें रखना नियमानुसार है

हाँ बैंक विभिन्न अवधिपूर्णताओं के लिए 2 लाख रूपये से अधिक की ऋण सीमाओं के लिए अलग-अलग मूल ऋण दर धोषित कर सकते हैं, बशर्ते मूल रूप से परिकल्पित पारदर्शिता और प्रयोग की एकरूपता को बनाये रखा जाये जो बैंक अवधि संबंद्व मूल ऋण दर धोषित करने लगे है, उन्हें हमेशा वह विनिर्दिष्ट अवधि दर्शानी चाहिए जिसके लिए धोषित मूल ऋण दर लागू है बैंक तीन वर्ष और अधिक के मीयादी ऋणों के लिए अलग मूल मीयादी ऋण दर धोषित कर सकते हैं बैंक ऋण धटक तथा नकदी ऋण धटक के लिए अलग मूल दर तथा मूल ऋण दरों पर अंतर (स्प्रेड) भी निर्धारित कर सकते हैं

28. क्या बैंक परियोजना वित्तपोषण से इतर प्रयोजनों के लिए निश्चित दर पर ऋण स्वीकृत कर सकते हैं?

बैंक निश्चित अथवा अस्थिर दरों पर सभी प्रकार के ऋणों की पेशकश करने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते वे आस्ति देयता प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों तथापि, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मूल ऋण दर के संदर्भ में जो भी शर्ते लागू हों, उनका अनुपालन किया जाये मूल ऋण दर के साथ संबद्वता का स्वरूप, अर्थात् ऐसा स्वीकृति के समय या ऋण के वितरण के समय किया गया है, ऋण की स्वीकृति के समय स्पष्ट किया जाना चाहिए तथापि, 2 लाख रूपये तक के छोटे ऋणों के लिए `मूल ऋण दर से अधिक नही' (सुसंगत अवधिपूर्णता के लिए) की शर्त लागू होगी

29. क्या संशोधित मूल ऋण दर/दरें वर्तमान अग्रिमों पर भी लागू होगी/होंगी?

हाँ बैंको को मीयादी ऋणों सहित् सभी अग्रिमों के संदर्भ में ऋण करारों में निम्नलिखित परन्तुक अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए, जिसमें बैंकों को इस बात के लिए समर्थ बनाया गया हो कि वे नियत दर ऋणों को छोड़कर अन्य मामलों में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों के अनुरूप ब्याज दर लागू कर सकें

"परन्तु यह कि ऋणकर्ता द्वारा देय ब्याज समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में किये गये परिवर्तनों के अधीन होगा"

30. क्या बैंक ब्याज दर में ऐसी छूट दे सकते हैं, जिससे लगायी गयी ब्याज दर मूल ऋण दर की तुलना में कम हो?

नहीं जहाँ बैंक ने निश्चित दर पर ऋण देने की संविदा न की हो, वहाँ किसी भी समय किसी भी ऋणकर्ता से लागू मूल ऋण दर से कम दर पर ब्याज लेना हमारे निदेशों का उल्लंधन माना जायेगा ऐसी कोई छूट देना नियमानुसार नहीं होगा, जिसके फलस्वरूप किसी ऋणकर्ता से वसूली जानेवाली वास्त्विक ब्याज दर मूल ऋण दर से कम हो जाये तथापी, जहाँ तक प्रभावी ब्याज दर मूल ऋण दर से कम न हो, वहाँ तक छूट की अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं है अपनी आस्ति-देयता प्रबंध समिति/बोड़ के अनूमोदन से मूल ऋण दर धोषित करने के लिए बैंकों को सलाह देने के पीछे यह भावना निहित थी कि इसे सभी शाखाओं में समान रूप से लागू किया जाये तथा ऋण दरों के मामले में पारदर्शिता लायी आये

31. क्या बैंकों को सहायता संधीय व्यवस्था के अंतर्गत प्रमुख (लीडर) बैंक के समतुल्य दर देने के लिए अपनी धोषित मूल ऋण दर से कम ब्याज लगाने की अनुमति है?

नहीं, सहायता संधीय व्यवस्था के अंतर्गत भी बैंकों का एकसमान ब्याज दर नहीं लगानी चाहिए प्रत्येक सदस्य बैंक को उसके द्वारा ऋणकर्ताओं को दी गयी ऋण सीमाओं के अंश पर अपनी मूल ऋण दर की शर्त के अधीन ब्याज दर लगानी चाहिए

32. दंडस्वरूप ब्याज दर क्या ही चाहिए?

चूक की स्थिति में बैंक ऋण खातों में दंडस्वरूप ब्याज लगा सकते हैं बैंकों द्वारा लगाया जानेवाला समग्र दंडस्वरूप/अतिरिक्त ब्याज संबंधित ऋणकर्ताओं पर लागू/रामान्यतः लगायी जानेवाली ब्याज दर के ऊपर 2 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए दंडस्वरूप ब्याज नियमित ब्याज दर से स्वतंत्र है तदर्थ सीमाओं पर दंडस्वरूप ब्याज नहीं लगाया जाना चाहिए क्योंकि उक्त सीमाएं सामान्यतः ऋण की नियमित मंजूरी होने तक प्रदान की जाती हैं और उन पर ब्याज दर मूल ऋण दर के उपर अधिकतम अंतर (स्प्रेड) की शर्त के अधीन होनी चाहिए

33. अलग-अलग व्यक्तियों को दिये जानेवाले प्रत्यक्ष आवास वित्त के लिए ब्याज दर क्या होनी चाहिए?

अलग-अलग व्यक्तियों को दिये गये ग्रामीण/अर्ध शहरी क्षेत्र में 5 लाख रूपये तक और शहरी/महानगरीय क्षेत्र में 10 लाख रूपये तक के प्रत्यक्ष आवास ऋणों तथा अलग-अलग व्यक्तियों को क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत कराने के लिए दिये गये 50,000 रूपये तक के ऋणों को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अग्रिमों के रूप में माना जाना चाहिए ब्याज दर का निर्धारण ऋणसीमा की मात्रा के अनुसार किया जायेगा इस प्रकार 2 लाख रूपये तक के ऋणों पर सीमा के आकार के अनुसार ब्याज लगाया जाना चाहिए अर्थात् मूल ऋण दर से अधिक नहींं ग्रामीण/अर्ध शहरी क्षेत्र में 2 लाख रूपये से अधिक और 5 लाख रूपये तक के ऋणों या शहरी/महानगरीय क्षेत्र कें 10 लाख रूपये के ऋणों पर मूल ऋण दर तथा संबंधित बैंक द्वारा धोषित अंतर (स्प्रेड) के अधीन ब्याज लगाया जाना चाहिए ग्रामीण/अर्ध शहरी क्षेत्र में 5 लाख रूपये से अधिक और शहरी/मानगरीय क्षेत्र में 10 लाख रूपये से अधिक के ऋण `अन्य गैर-प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के वैयक्तिक ऋण' क्षेणी के अधीन आयेंगे, जिनके मामले में बैंक मूल ऋण दर को ध्यान में लिये बिना ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं

34. 18 अक्तूबर 1994 से 2 लाख रूपये से अधिक के अग्रिमों पर ब्याज दर को अविनियमित किये जाये के परिणामस्वरूप बैंक प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अग्रिमों के संदर्भ में निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम की गारंटी फीस कैसे वहन करेंगे?

जहां तक निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम की गारंटी फीस का संबंध है, बैंकों को यह विवेकाधिकार है कि वे कमजट्रोर वर्गो को दिये गये अग्रिमों का छोड़कर 25,000 रूपये तक के अग्रिमों और कमज़ोर वर्गो को दिये गये सभी अग्रिमों के संदर्भ में निक्षेप बिमा और प्रत्यय गारंटी निगम की गारंटी फीस वहन करनी चाहिए

35. क्या बैंक गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों को प्रदत्त अग्रिमों पर उनके द्वारा धोषित अंतर से अधिक ब्याज दर लगा सकते हैं?

बैंको को यह स्वतंत्रता है कि वे गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों को उपभोक्ता ऋणों के लिए आगे ऋण देने के लिए दिये गये अग्रिमों पर धेषित अंतर (स्प्रेड) से अधिक ब्याज दर लगायें

36. क्या ऋणों और अग्रिमों पर मासिक अंतरालों से लेकर वार्षिक अंतरालों की विभिन्न अवधियों में ब्याज लगाया जा सकता है?

ऋणों और अग्रिमों पर ब्याज दरें तिमाही या अधिक अंतरालों में लगायी जानी चाहिए अतः, मासिक अंतरालों पर ब्याज लगाना ठीक नहीं होगा

37. स्टाफ सदस्यों/स्टाफ सहकारी ऋण समितियों को दिये गये ऋणेंा/अग्रिमों पर किस दर पर ब्याज वसूल किया जाना चाहिए?

बैंक अग्रिमों के संबंध में ब्याज दर संबंधी निदेश किसी अनुसूचित बैंक द्वारा, अन्य बातों के साथ-साथ, अपने स्वयं के कर्मचारियों को दिये गये या प्रदत्त या नवीकृत ऋणों या अग्रिमों या अन्य वित्तीय सहायता पर लागू नहीं होंगे जहां बैंक के स्टाफ सदस्यों द्वारा गठित सहकारी ऋण समितियों को उनके ग्राहकों (अर्थात् बैंक के स्टाफ) को ऋण देने के लिए बैंक द्वारा अग्रिम प्रदान किये जाते हैं वहां ऐसे अग्रिमों पर रिजट्रर्व बैंक के ब्याज दर संबंधी निदेश लागू नहीं होंगे

4. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम
38. क्या बैंक, शयरों और डिबेंचरों की जमानत पर, न्यास और धर्मादाओं को ऋण मंजूर कर सकते हैं?

नहीं

39. क्या बैंक, कंपनी के ईक्विटी शेयरों की जमानत पर, उस कंपनी के निदेशकों को ऋण मंजूर कर सकते हैं?

नहीं

40. क्या निम्नलिखित प्रकार की पारस्परिक निधि (म्युच्युअल फंड) योजनाओं की यूनिटों में निवेश पिछलें वर्ष की 5 प्रतिशत वृध्दिशील जमाराशियों के दायरे के बाहर होंगेः
1. केन्द्र/राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश करनेवाले गिल्टफंड
2. निगमित ऋणों में निवेश करनेवाले म्युच्युअल फंड
3. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांडों में निवेश करनेवाले म्युच्युअल फंड

हां, चूंकि उक्त निवेश ऋण निधियों के संबंध में हैंए इसलिए वे पिछले वर्ष की 5 प्रतिशत वृध्दिशील जमाराशियों के दायरे के बाहर है

41. क्या बैंक अपनी सहायक कंपनियों में निवेश कर सकते हैं?

बैंक अपनी सहायक कंपनियों में निवेश कर सकते हैं परंतु ये निवेश बैंककारी विनियमन धिनियम, 1949 की धारा 19 के अनुपालन की शर्त पर पिछले वर्ष की 5 प्रतिशत वृध्दिशील जमाराशियों के दायरे के बाहर होंगे

42. बैंकों द्वारा कौन से बिलों को बट्टाकृत नहीं किया जाना चाहिए?

बैंको द्वारा बिजली प्रभारों के भुगतान, सीमा-शुल्क, किराया खरीद/पट्टा किराया किस्तों, प्रतिभूतियों की बिक्री और अन्य वित्तीय सहायता से संबंधित बिल बट्टाकृत नहीं किये जाने चाहिए

43. क्या शेयरों में निवेश के लिए निर्धारित 5 प्रतिशत की उच्चतम सीमा के पिछले वित्तीय वर्ष के अप्रयुक्त अंशं का उपयोग नये वित्तीय वर्ष में किया जा सकता है?

नहीं

44. क्या बैंक गैर बैंकिंग गैर वित्तीय कंपनियों की सावधि जमाराशियों में निवेश कर सकते हैं?

गैर बैंकिंग गैर वित्तीय कंपनियों में उनकी सार्वजनिक जमा योजना में अपनी निधियां लगाने पर बैंकों पर कोई पाबंदी नहीं है परंतु सार्वजनिक जमा योजना में किये गये बैंकों द्वारा ऐसे निवेशों को अपने तुलन पत्रों, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत विवरणियों में और अनुसूचित वाणिज्य बैंकों द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत पाक्षिक विवरणियों में ऋणों/अग्रिमों के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए

45. क्या बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांडों के संबंध में आबंटन पत्र क्रय कर सकते हैं?

बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांडों के संबंध में आबंटन पत्र निम्नलिखित शर्तोपर क्रय कर सकते हैं

  • ऐसे लेनदेन (अंतर बैंक लेनदेनों से इतर) मान्यता प्राप्त स्टाफ एक्सचेंजों और पंजीकृत दलालों के माध्यम से किये जाने चाहिए
  • प्रतिभूति क्रय करते समय बैंक यह सुनिश्चित करे िे उसे उक्त प्रतिभूति पर स्पष्ट स्वामित्व प्राप्त हो रहा है और इस प्रतिभूति का द्वितीयक बाजार (सेकंडरी मार्केट) में विपणन होता है

ऐसे लेनदेन करने के लिए बैंक को अपने निदेशक मंडल के अनुमोदन से अपने आंतरिक दिशा-निर्देश बनाने चाहिए

46. शेयरों/डिबेंचरों/बांडों की जमानत पर अग्रिमों के लिए मूल्यांकन की क्या पध्दति होनी चाहिए?

जब शेयर/डिबेंचर/बांड अग्रिमों की जमानत के रूप में जमा किये जायें तब उनका मूल्यांकन प्रचलित बाज़ार मूल्यों पर किया जाना चाहिए

47. क्या बैंक सूचना प्रौद्योगिकी के लिए बनायी गयी समर्पित जोखिम पूंजी निधियों में निवेश कर सकते हैं और क्या 5 प्रतिशत की उच्चतम सीमा उन पर लागू होगी?

हां,बैंक सूचना प्रौद्योगिकी के लिए बनायी गयी समर्पित जोखिम पूंजी निधियों में निवेश कर सकते हैं 5 प्रतिशत की समग्र उच्चतम सीमा सूचना प्रौद्योगिकी के लिए बनायी गयी समर्पित जोखिम निधि में बैंक के निवेश की सीमा तक स्वतः बढ़ जायेगी

48. क्या बैंक कंपनियों को पूरक ऋण मंजूर कर सकते हैं?

हां, एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए अपेक्षित ईक्विटी प्रवाह/निर्गमों की जमानत पर तथा अपनिवर्तनीय डिबेंचरो की अपेक्षित आगम राशियों, बाह् य वाणिज्यिक उधारों, सार्वभौमिक जमा रसीदों और/या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के स्वरूप की निधियों की जमानत पर, बशर्ते बैंक इस बात से संतुष्ट हो कि ऋण लेनेवाली कंपनी ने उक्त संसाधन/निधियां जुटाने के लिए ठोस व्यवस्थाएं की हैं ऐसे ऋण पिछले वर्ष की वृध्दिशील जमाराशियों की 5 पेतिशत की उच्चतम सीमा के भीतर रखना अपेक्षित है

49. यदि शेयर, डिबेंचर और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांड भौतिक रूप में और अभौतिक रूप में हो तो उनकी जमानत पर अलग-अलग व्यक्तियों को दिये जानेवाले ऋणों की मात्रा क्या है?

अलग-अलग व्यक्तियों को भौतिक रूप में रखे जानेवाले शेयरों, डिबेंचरों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांडों की जमानत पर दिये जानेवाले ऋण प्रति ऋणकर्ता 10 लाख रूपये की सीमा से अधिक नहीं होने चाहिए तथा यदि उक्त प्रतिभूतियां अभौतिक रूप में हों तो उक्त ऋण 20 लाख रूपये से अधिक नहीं हो चाहिए

50. भौतिक रूप में और अभौतिक रूप में होने पर शयरों के लिए निर्दिष्ट मार्जिन क्या है?

यदि शेयर और डिबेंचर भौतिक रूप में हों तो निर्दिष्ट न्यूनतम मार्जिन ईक्विटी शेयरों/परिवर्तनीय डिबेंचरों के बाजार मूल्य का 50 प्रतिशत है तथा यदि शेयर और डिबेंचर अभौतिक रूप में रखे जायें तो निर्दिष्ट न्यूनतम मार्जिन 25 प्रतिशत है

दान[सम्पादन]

51. क्या बैंक दान दे सकते हैं?

हां, लाभ कमानेवाले बैंक किसी वित्तीय वर्ष के दौरान पिछले वर्ष के लिए बैंक के प्रकाशित लाभ के कुल एक प्रतिशत तक दान दे सकते हैं, इसमें छूट प्राप्त श्रेणी के अंतर्गत पहले किये गये दान तथा राष्ट्रीय निधियों और अन्य निधियों में किये गये दान शामिल हैं बैंकों को ऊपर उल्लिखित एक प्रतिशत की निर्धारित उच्चतम सीमा से अधिक दान नहीं देना चाहिए किसी वर्ष में अनुमत सीमा की अप्रयुक्त राशि को दान देने के प्रयोजन के लिए अगले वर्ष में आगे नहीं ले जाया जाना चाहिए

52. क्या हानि उठानेवाले बैंक दान दे सकते हैं?

हां, हानि उठानेवाले बैंक किसी वित्तीय वर्ष में कुल 5 लाख रूपये दान दे सकते हैं

53. क्या बैंकों की विदेश स्थित शखाएं विदेश में दान दे सकती हैं?

हां, बैंको की विदेश स्थित शखाएं विदेश में दान दे सकती हैं, बशर्ते बैंक पिछले वर्ष के अपने प्रकाशित लाभ के एक प्रतिशत की निर्धारित उच्चतम सीमा से अधिक राशि न दें

परिसर ऋण[सम्पादन]

54. वाणिज्य बैंकों, द्वारा अपने उपयोग अर्थात् कार्यालय और स्टाफ के आवास के लिए पट्टे/किराये के आधार पर स्थान अभिगृहीत करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्या मानदंड और क्रियाविधि निर्धारित की है?
  • बैंकों के निदेशक मंडलों को नीति निर्धारित करनी चाहिए और महानगरीय, शहरी, अर्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में अलग से परिचालन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए इसमें विभिन्न स्तरों पर शक्तियों के प्रत्यायोजन सहित बैंक के उपयोग के लिए पट्टे/किराये के आधार पर लिये जानेवाले परिसरों के संदर्भ में सभी क्षेत्र शामिल हैं ग्रामीण केन्द्रों से भिन्न केन्द्रों में परिसर छोड़ने या बदलने का निर्णय केंद्रीय कार्यालय के स्तर पर वरिष्ठ कार्यपालकों की समिति द्वारा लिया जाये
  • पट्टे/किराये के आधार पर परिसर देनेवाले मकान मालिकों को दिये जानेवाले ऋणों के संदर्भ में बैंकों के बोर्डो द्वारा अलग नीति निर्धारित की जानी चाहिए ऐसे ऋणों पर ली जानेवाली ब्याज दर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ऋण दर संबंधी निदेशों के अनुसार होनी चाहिए और 2 लाख रूपये से अधिक के ऋणों के लिए मूल ऋण दर से कम नहीं होनी चाहिए ब्याज तिमाही या अधिक के अंतरालों पर लिया जाना चाहीए ब्याज दर अन्य मीयादी ऋणों पर लागू बैंक की सामान्य प्रथा के अनुसार साधारण दर या चक्रवृध्दि दर होगी
  • शीध्र निपटान के लिए मकान मालिक की वास्तविक शिकायतों को दूर करने के लिए बैंकों को उपयुक्त तंत्र बनाना चाहिए
  • सरकारी क्षेत्र के बैंकों द्वारा पट्टे/किराये के आधार पर लिये गये परिसरों के संदर्भ में मकान मालिकाें को दिये गये अग्रिमों और किराये (कर आदि और 25 लाख रूपये और इससे ऊपर की जमाराशियों सहित) के संदर्भ में बातचीत से तय संविदाओं के मामले में सरकार के वर्तमान अनुदेशों के अनुसार केंद्रीय जांच ब्यूरो का मामले भेजे जायेंगे यह अपेक्षा निजी क्षेत्र के बैंकों पर लागू नहीं है

अनुबंध[सम्पादन]

वाणिज्य बैंकों में बचत बैंक खाते खोलने के लिए पात्र संगठनों/एजेंसियों की सूची
  • प्राथमिक सहकारी ऋण समिति जो बैंक द्वारा वित्तपोषित की जा रही हो
  • लधु कृषक विकास एजेंसी/मत्स्यपालक विकास एजेंसियां
  • सीमांत कृषक और कृषि श्रमिक एजेंसियां
  • सूखा प्रवण श्रेत्र कार्यक्रम
  • जिला विकास प्राधिकरण
  • जिला ग्रामीण विकास एज़ेंसी/समिति
  • समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम/ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों का विकास/पंजीकृत या अपंजीकृत स्व-सहायता समूह, जो अपने सदस्यों में बचत की आदत को बढ़ावा देने में लगे हैं/कृषक क्लब-विकास वालंटियर वाहिनी
  • समेकित जनजातीय विकास एज़ेंसी
  • कृषि अत्पाद बाजार समितियां
  • खादी और ग्रामोद्योग बोड़
  • सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 या राज्य अथवा किसी संध शासित क्षेत्र में जागू इसी तरह के किसी अन्य कानून के अंतर्गत पंजीकृत समितियां
  • कंपनी अधिनियम, 1956 द्वारा संचलित कंपनियां जिन्हें उक्त अधिनियम की धारा 25 के अंतर्गत या भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 के उसी तरह के उपबंधों के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा लाइसेंस दिया गया है और अनुमति दी गयी है कि वे अपने नाम के साथ `लिमिटेड' शब्द या `प्रायवेट लिमिटेड' शब्द न जोड़ें
  • विशेष रूप से प्रतिबंधित संस्थाओं से भिन्न संस्थाएं और जिनकी संपूर्ण आय आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत आय कर की अदायगी से छूट प्राप्त है
  • विभिन्न ग्रामीण विकास/कल्याण कार्यक्रमों और/या राज्य सरकारों/भारत सरकार द्वारा प्रायोजित उपदान/मार्जिन धन से जुड़े कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए जारी निधियों के संदर्भ में जिला परिषदें/ग्राम पंचायतें, किन्तु इस शर्त पर कि ऐसा कोई खाता सरकारी क्षेत्र के बैंक से भिन्न किसी बैंक में नहीं खोला जायेगा
  • नेहरू रोज़गार योजना के अंतर्गत निम्नलिखित धटकों के लिए दी गया निधियों (केन्द्रीय सहायता + राज्य का हिस्सा) के संबंध में नगर पंचायतें, नगर पलिकाएं और म्यूनिसिपल निकाय (i) उपदान और (ii) शहरी व्यष्टि उद्यम योजना और शहरी मजदूरी रोजगार योजना के प्रशिक्षण और मूलभूत सुविधाएं तथा शहरी व्यष्टी उद्यम योजना के दोनों धटकों के अंतर्गत जमाराशियों और शहरी मजदूरी रोजगार योजना के अंतर्गत जमाराशियों पर अर्जित ब्याज, किंतु शर्त यह है कि ऐसा कोई खाता सरकारी क्षेत्र के बैंक से भिन्न किसी बैंक में नहीं खोेला जायेगा
  • संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, किंतु शर्त यह है कि ऐसा कोई खाता सरकारी क्षेत्र के बैंकों से भिन्न किसी बैंक में नहीं खोला जायेगा