भारतीय अर्थव्यवस्था/रोजगार से संबंधित विषय

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भारतीय अर्थव्यवस्था
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रोजगार(employment) दो पक्षों के बीच एक संबंध है,जो आमतौर पर एक अनुबंध पर आधारित होता है।जहां काम के लिए भुगतान किया जाता है।जहां एक पार्टी, जो एक निगम हो सकती है, लाभकारी,गैर-लाभकारी,सहकारी नियोक्ता और अन्य कर्मचारी है। एक कर्मचारी,एक नियोक्ता या किसी व्यक्ति के व्यवसाय या उपक्रम का संचालन करने के लिए श्रम और विशेषज्ञता का योगदान देता है।[१] और आमतौर पर विशिष्ट कर्तव्यों को निभाने के लिए काम पर रखा जाता है जो नौकरी में पैक किए जाते हैं। कॉर्पोरेट संदर्भ में, एक कर्मचारी वह व्यक्ति होता है,जो मुआवजे के बदले एक कंपनी को नियमित आधार पर सेवाएं प्रदान करने के लिए काम पर रखा जाता है और जो एक स्वतंत्र व्यवसाय के हिस्से के रूप में इन सेवाओं को प्रदान नहीं करता है।

श्रमिक और रोजगार[सम्पादन]

किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य इसका सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है। सकल घरेलू उत्पाद में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को हम आर्थिक क्रियाएं तथा आर्थिक क्रियाओं में संलग्न व्यक्ति श्रमिक कहलाते हैं। स्व-नियोजित व्यक्ति भी श्रमिक ही होते हैं। वर्ष 2011-12 में भारत की कुल श्रमशक्ति का आकार 473 मिलियन आँका गया था। चूकि देश की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में रहती है। इसलिए ग्रामीण श्रमबल का अनुपात शहरी श्रमबल से अधिक है। इन 473 मिलियन श्रमिकों में तीन-चौथाई श्रमिक ग्रामीण हैं। में भारत में श्रमशक्ति में 70% पुरुष तथा शेष(इसमें महिला तथा पुरुष बाल श्रमिक शामिल) महिलाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिला श्रमिक कुल श्रमबल का एक तिहाई हैं। तो शहरों में केवल 20% महिलाएँ हीं श्रमबल में भागीदार पाई गई हैं। [२]

2011 में भारत की राष्ट्रीय जनगणना में कुल श्रमिकों में बाल मजदूरों की संख्या 10.1 मिलियन,है,जो 5 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के कुल 259.64 मिलियन बच्चों में से हैं।

भारत में रोजगार की स्थिति[सम्पादन]

2010 में अपने आर्थिक क्षेत्रों द्वारा भारत में प्रतिशत श्रम रोजगार

भारत में श्रम का तात्पर्य भारत की अर्थव्यवस्था में रोजगार से है।2012 में, भारत में लगभग 487 मिलियन कर्मचारी थे, जो चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा था।[३] इनमें से 94 प्रतिशत से अधिक अनिगमित,असंगठित उद्यमों में काम करते हैं,जिनमें ठेला चलानेवाले फल और सब्जी विक्रेताओं से लेकर घर-घर हीरे और मणि चमकाने वाले कार्य शामिल हैं।[४] संगठित क्षेत्र में सरकार, राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों और निजी क्षेत्र के उद्यमों द्वारा नियोजित श्रमिक शामिल हैं। 2008 में, संगठित क्षेत्र में 27.5 मिलियन श्रमिक कार्यरत थे, जिनमें से 17.3 मिलियन ने सरकारी या सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं के लिए काम किया। [५]

2009-10 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में कुल कार्यबल का लगभग 52.1% था। जबकि कृषि रोजगार श्रम के प्रतिशत में समय के साथ गिरावट दर्ज किया गया है।सेवाओं जिसमें निर्माण और बुनियादी ढाँचे भी शामिल हैं, 2012-14 में रोजगार के 20.3% के लिए एक स्थिर विकास लेखांकन देखा गया है।[६] कुल कार्यबल में से, 7% संगठित क्षेत्र में है, जिनमें से दो-तिहाई सरकार द्वारा नियंत्रित सार्वजनिक क्षेत्र में हैं। [७]भारत में लगभग 51.2% कर्मचारियों की संख्या स्व-नियोजित है।

मशीनीकरण और बेरोजगारी[सम्पादन]

भारत में निजी और सार्वजनिक उद्योग रोजगार (2003)

रोजगार में यंत्रों(मशीनों) के प्रयोग के संबंध में महात्मा गांधी ने कहा था कि "मेरी आपत्ति मशीन से नहीं मशीन के प्रति सनक को लेकर है। इसी सनक का नाम श्रम का बचत करने वाली मशीनें हैं। हम उस सीमा तक श्रम की बचत करते जाएँगे। जब तक कि हजारों लोग बेरोजगार होकर भूखों मरने के लिए सड़कों पर नहीं फेंक दिए जाते।" [८] महात्मा गांधी ने शिक्षा और हस्तकलाओं के माध्यम से प्रशिक्षण पर बल दिया।

भारत के श्रम और रोजगार मंत्रालय (MLE) द्वारा हर पांच साल में एक बार पारंपरिक रूप से भारत के आँकड़ों में बेरोजगारी को संग्रहित,संकलित और प्रसारित किया जाता है। मुख्यतः ये आँकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा संग्रहित आँकड़ों पर आधारित होता है। [९]

बेरोजगारी के प्रकार[सम्पादन]

बेरोजगारी के प्रमुख स्वरूप चक्रीय बेरोजगारी ऐसी बेरोजगारी जो बाजार ऊंचा वचनों के कारण मांग में कमी से उत्पन्न होती है तथा मांग में वृद्धि होने से पुनः समाप्त हो जाती है चक्रीय बेरोजगारी या विकसित देशों में सामान्यतः देखी जाती है।

  1. घर्षणजनित बेरोजगारी:-वास्तव में एक रोजगार को छोड़कर दूसरे रोजगार की प्राप्ति के मध्य की अवधि की बेरोजगारी है तकनीक आदि में परिवर्तन के कारण नौकरियों में छंटनी इस बेरोजगारी का प्रमुख कारण है यह भी विकसित देशों की सामान्य विशेषता है।
  2. संरचनात्मक बेरोजगारी:-इस तरह की बेरोजगारी लोगों में कौशल के अभाव की स्थिति में उत्पन्न होती है।अर्थात जब लोग रोजगार के अनुरूप योग्यता आधारित कर पाने के कारण बेरोजगार बने रहें तो इस बेरोजगारी को संरचनात्मक बेरोजगारी कहा जाता है यह विकास एवं सामान्य विशेषता है भारत में भी संरचनात्मक बेरोजगारी का स्तर उच्च है।
  3. मौसमी बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक पाई जाने वाली कृषि क्षेत्र में वर्ष के महीनों में काम बढ़ जाता है,जिससे रोजगार की संख्या बढ़ जाती है परंतु शेष महीनों में बेरोजगारी बनी रहती है मौसमी बेरोजगारी विकासशील एवं देशों की सामान्य विशेषता है।
  4. प्रच्छन्न बेरोजगारी किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लगे हुए लोगों को तकनीकी रूप से बेरोजगार माना जाता है।अर्थात यदि किसी रोजगार में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए हों,तो उस रोजगार से अतिरिक्त लोगों को निकाल देने पर भी उत्पादन का स्तर वही बना रहे,तो निकाले गए अतिरिक्त लोगों को प्रच्छन्न बेरोजगार माना जाता है। तकनीकी शब्दों में जिस व्यक्ति की सीमांत उपयोगिता शून्य हो।(अर्थात उसका उत्पादन में कोई अतिरिक्त योगदान ना हो)भले ही वह रोजगार में क्यों ना हो?

प्रच्छन्न बेरोजगारी प्राथमिक क्षेत्र (विशेषकर कृषि क्षेत्र)में बहुतायत में पाई जाती है। भारत में बेरोजगारी मापन की तीन विधियां प्रचलन में हैं-सामान्य स्थिति,चालू साप्ताहिक स्थिति तथा चालू दैनिक स्थिति।यदि कोई व्यक्ति वर्ष में आधे से अधिक दिनों (183)दिन तक रोजगार प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसे सामान्य स्थिति का बेरोज़गार बार माना जाता है।

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. Archer, Richard; Borthwick, Kerry; Travers, Michelle; Ruschena, Leo (2017). WHS: A Management Guide (4 संस्क.). Cengage Learning Australia. पृप. 30–31. आइएसबीएन 978-0-17-027079-3. पहुँच तिथि 2016-03-30. The most significant definitions are 'person conducting a business or undertaking' (PCBU). 'worker' and 'workplace'. [...] 'PCBU' is a wider ranging term than 'employer', though this will be what most people understand by it.
  2. http://ncert.nic.in/ncerts/l/khec107.pdf,p-4
  3. "India". CIA, United States. 2012.
  4. Chandra Korgaokar; Geir Myrstad (1997). "Protecting children in the world of work (see article on Child Labour in the Diamond Industry)". International Labour Organization. पृप. 51–53. मूल से 27 सितंबर 2013 को पुरालेखित.
  5. "Economic Survey 2010-2011" (PDF). The Government of India. 2012.
  6. "Report on Employment & Unemployment Survey (2012–13)" (PDF). Bureau of Labour Statistics, Indian Government. January 2014. मूल (PDF) से 1 August 2014 को पुरालेखित. पहुँच तिथि 25 July 2014.
  7. Datt & Sundharam 2009, pp. 423–424
  8. http://ncert.nic.in/ncerts/l/khec107.pdf,p-2
  9. Papola, TS (1 May 2014). An assessment of labour statistics system in India (PDF). Country office New Delhi: International Labor Organization, United Nations. पहुँच तिथि 9 November 2018.