भाषा शिक्षण/अधिगम

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भाषा अधिगम[सम्पादन]

          भाषा अधिगम जिन भाषाओ को सीखने के लिए हम औपचारिक साधनों का प्रयोग करते है। साथ ही साथ जिसे सीखने के लिए नियम और ग्रामर होती है। उसे भाषा अधिगम कहते है।इसे भाषा द्वितीय के नाम से जानते है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा के अलावा अन्य भाषाएँ आ जाती है। इसमे अंग्रेजी भाषा भी आ जाती है।

            इसके लिए कॉपी किताब और स्कूली शिक्षा की आवश्यकता पड़ती है। द्वितीय भाषा मे शुद्धता और धारा प्रवाहिता समय के साथ आती है। द्वितीय भाषा को सीखने के लिए सम्प्रेषणपरख मौहाल, बोधगम्य सामग्री की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।           1.भाषा अधिगम के लिए नियम और ग्रामर की जरूरत पड़ती है।           2.भाषा अधिगम के द्वारा हम पढ़ना लिखना सीखते है।         3.भाषा अधिगम में किताब और व्याकरण की जरूरत पड़ती हैं।

विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के अनुसार भाषा-अधिगम[सम्पादन]

      पॉवलाव और स्किनर के अनुसार- ‘‘भाषा की क्षमता का विकास कुछ शर्तों के अंतर्गत होता है, जिसमें अभ्यास, नकल, रटने जैसी प्रक्रिया शामिल होती है।’’

      चॉम्स्की के अनुसार- ‘‘बालकों में भाषा सीखने की क्षमता जन्मजात होती है तथा भाषा मानव मस्तिष्क में पहले से विद्यमान होती है।’’

      पियाज़े के अनुसार- ‘‘भाषा परिवेश के साथ अंत:क्रिया द्वारा विकसित होती है।’’

      वाइगोत्सकी के अनुसार– ‘‘भाषा-अधिगम में बालक का सामाजिक परिवेश एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चे की भाषा समाज के संपर्क में आने तथा बातचीत करने के कारण होती है।’’