विकिपुस्तक:उपपृष्ठ

विकिपुस्तक से
Jump to navigation Jump to search

विकिपुस्तक पर उपपृष्ठ ऐसे पृष्ठ हैं जो अपने मूल पृष्ठ के नाम के आगे "/" (स्लैश) के बाद जोड़े गए अतिरिक्त नाम वाले होते हैं। अर्थात इनके नाम में कम से कम एक स्लैश कैरेक्टर का प्रयोग अवश्य होता है, और स्लैश के पहले वाला हिस्सा मूल पृष्ठ का नाम बताता है। यह एक तरह की पदानुक्रम (हैरार्की) निर्धारण की व्यवस्था है जिसके द्वारा विकिपुस्तक पर किसी पुस्तक का नाम "मूल पृष्ठ" के रूप में बनाया जाता है और उस पुस्तक के अध्याय उपपृष्ठों के रूप में बनाए जाते हैं।[नोट १]

इन उपपृष्ठों की कड़ियाँ [[मूल पृष्ठ/उप पृष्ठ]] के रूप में अन्य पन्नों पर जोड़ी जा सकती हैं; जबकि किसी मुख्य पृष्ठ पर रहते हुए उसके ही उप पृष्ठ की कड़ी उस पन्ने पर मात्र [[/उप पृष्ठ]] लिख कर भी जोड़ी जा सकती है। अतः कोई उपपृष्ठ बनाने का आम तरीका भी यही है कि मूल पृष्ठ पर उसकी [[/कड़ी]] जोड़ी जाय और उसके बाद उस कड़ी का अनुसरण करते हुए उस पृष्ठ का निर्माण किया जाय।

मुख्य नामस्थान के अतिरिक्त अन्य कई नामस्थान ऐसे हैं जहाँ इस व्यवस्था का उपयोग होता है। उदाहरण के लिए साँचों के उपसाँचे अथवा उनका विवरण पृष्ठ ऐसे ही उपपृष्ठों के रूप में बनाए जाते हैं; सदस्यगण अपने सदस्य पृष्ठ के उपपृष्ठों के रूप में प्रायोगिक कार्य हेतु पृष्ठ बना सकते हैं; और वार्ता पन्नों अथवा अन्य चर्चा पन्नों के उपपृष्ठ उनकी चर्चाओं के पुरालेखित करने के लिए बनाए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ नामस्थान ऐसे भी हैं जहाँ उप पृष्ठ बनाने की या तो अनुमति नहीं है अथवा वहाँ उपपृष्ठ निर्माण का कोई अर्थ नहीं है: जैसे, चित्रों के उपपृष्ठ, मीडियाविकि नामस्थान के उपपृष्ठ, श्रेणियों के उपपृष्ठ इत्यादि।

"मूल पृष्ठ" को अंग्रेजी में parent page और "उप पृष्ठ" को subpage के नाम से जाना जाता है।

इन्हें भी देखें[सम्पादन]

  • विकिपीडिया:उपपृष्ठ - हिंदी विकिपीडिया पर उपपृष्ठों के बारे में उपलब्ध जानकारी।
  • Wikipedia:Subpage - अंग्रेजी विकिपीडिया पर उपपृष्ठों के बारे में उपलब्ध जानकारी।

नोट[सम्पादन]

  1. यह व्यवस्था विकिपीडिया पर उपलब्ध व्यवस्था से कुछ भिन्न है क्योंकि विकिपीडिया पर मुख्य नामस्थान में ऐसे उपपृष्ठ नहीं बनाए जा सकते। जबकि विकिपुस्तक पर इस पदानुक्रम व्यवस्था का अनुपालन पुस्तकों के निर्माण में आवश्यक माना जाता ताकि पुस्तकों के नाम, उनके अध्यायों के नाम और अध्यायों के अनुभाग इत्यादि एक व्यवस्थित क्रम में चिह्नित किये जा सकें।