शोध : प्रविधि और प्रक्रिया/शोध क्या है?

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अनुसन्धान चक्र : वैज्ञानिक विधि के कुछ अवयव जिन्हें एक चक्र के रूप में व्यवस्थित किया गया है, जो दर्शाता है कि अनुसन्धान एक चक्रीय प्रक्रम है।

'शोध' अंग्रेजी शब्द 'रिसर्च' का पर्याय है किन्तु इसका अर्थ 'पुनः खोज' नहीं है अपितु 'गहन खोज' है। इसके द्वारा हम कुछ नया आविष्कृत कर उस ज्ञान परम्परा में कुछ नए अध्याय जोड़ते हैं।

व्यापक अर्थ में शोध या अनुसन्धान (Research) किसी भी क्षेत्र में 'ज्ञान की खोज करना' या 'विधिवत गवेषणा' करना होता है। वैज्ञानिक अनुसन्धान में वैज्ञानिक विधि का सहारा लेते हुए जिज्ञासा का समाधान करने की कोशिश की जाती है। नवीन वस्तुओं की खोज और पुरानी वस्तुओं एवं सिद्धान्तों का पुनः परीक्षण करना, जिससे कि नए तथ्य प्राप्त हो सकें, उसे शोध कहते हैं। शोध के अंतर्गत बोधपूर्वक प्रयत्न से तथ्यों का संकलन कर सूक्ष्मग्राही एवं विवेचक बुद्धि से उसका अवलोकन-विश्लेषण करके नए तथ्यों या सिद्धांतों का उद्घाटन किया जाता है। शोध का परिचय देते हुए डॉ. नगेन्द्र लिखते हैं कि-"अनुसंधान का अर्थ है परिपृच्छा, परीक्षण, समीक्षण आदि। संधान का अर्थ है दिशा विशेष में प्रवृत्त करना या होना और अनु का अर्थ है पीछे, इस प्रकार अनुसंधान का अर्थ हुआ—किसी लक्ष्य को सामने रखकर दिशा विशेष में बढ़ना—पश्चाद्गमन अर्थात् किसी तथ्य की प्राप्ति के लिए परिपृच्छा, परीक्षण आदि करना।"[१]

अध्ययन से दीक्षित होकर शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए शिक्षा में या अपने शैक्षिक विषय में कुछ जोड़ने की क्रिया अनुसन्धान कहलाती है। पी-एच.डी./ डी.फिल या डी.लिट्/डी.एस-सी. जैसी शोध उपाधियाँ इसी उपलब्धि के लिए दी जाती हैं। इनमें अध्येता से अपने शोध से ज्ञान के कुछ नए तथ्य या आयाम उद्घाटित करने की अपेक्षा की जाती है।

परिभाषाएँ[सम्पादन]

  • ज्ञान की किसी भी शाखा में नवीन तथ्यों की खोज के लिए सावधानीपूर्वक किए गए अन्वेषण या जांच-पड़ताल को शोध की संज्ञा दी जाती है। (एडवांस्ड लर्नर डिक्शनरी ऑफ करेंट इंग्लिश)

अनुसंधान को विभिन्न तरीकों से परिभाषित किया गया है

  • रैडमैन और मोरी ने अपनी पुस्तक “द रोमांस ऑफ रिसर्च” में शोध का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है कि नवीन ज्ञान की प्राप्ति के व्यवस्थित प्रयत्न को हम शोध कहते हैं।
  • लुण्डबर्ग ने शोध को परिभाषित करते हुए लिखा है कि अवलोकित सामग्री का संभावित वर्गीकरण, साधारणीकरण एवं सत्यापन करते हुए पर्याप्त कर्म विषयक और व्यवस्थित पद्धति है।

महत्व[सम्पादन]

  • शोध मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है तथा ज्ञान भण्डार को विकसित एवं परिमार्जित करता है।
  • शोध जिज्ञासा मूल प्रवृत्ति (Curiosity Instinct) की संतुष्टि करता है।
  • शोध से व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होता है।
  • शोध पूर्वाग्रहों के निदान और निवारण में सहायक है।
  • शोध अनेक नवीन कार्यविधियों व उत्पादों को विकसित करता है।
  • शोध ज्ञान के विविध पक्षों में गहनता और सूक्ष्मता लाता है।
  • शोध से व्यक्ति का बौद्धिक विकास होता है
  • अनुसन्धान हमारी आर्थिक प्रणाली में लगभग सभी सरकारी नीतियों के लिए आधार प्रदान करता है।
  • अनुसन्धान के माध्यम से हम वैकल्पिक नीतियों पर विचार और इन विकल्पों में से प्रत्येक के परिणामों की जांच कर सकते हैं।
  • अनुसन्धान, सामाजिक रिश्तों का अध्ययन करने में सामाजिक वैज्ञानिकों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शोध सामाजिक विकास का सहायक है।
  • यह एक तरह का औपचारिक प्रशिक्षण है।
  • अनुसन्धान नए सिद्धांत का सामान्यीकरण करने के लिए हो सकता है।
  • अनुसन्धान नई शैली और रचनात्मकता के विकास के लिए हो सकता है।

शोध के प्रकार[सम्पादन]

शोध के प्रकारों का निर्धारण उनके कार्यों के आधार पर किया गया है। जैसे-

  • मात्रात्मक अनुसंधान- मात्रात्मक अनुसंधान शोध का एक प्रकार है। यह एक रेखीय होता है। इसके अंतर्गत संख्यात्मक तथ्यों की संकल्पना की जाती है। इसमें निगमनात्मक तर्क पद्धति का प्रयोग किया जाता है।[२]
  • गुणात्मक अनुसंधान- शोध के इस प्रकार में निर्णय के न केवल क्या, कहां, कब की छानबीन की जाती है, बल्कि क्यों और कैसे जैसे प्रश्नों की भी खोज की जाती है।
  • विवरणात्मक अनुसंधान- इस प्रकार के शोध के अंतर्गत अध्ययन के समय जो परिस्थितियाँ हैं उनका उसी रूप में शोधार्थी द्वारा प्रस्तुतीकरण किया जाता है। इसमें तथ्यों का संकलन महत्वपूर्ण होता है।
  • विश्लेषणात्मक अनुसंधान- विश्लेषणात्मक शोध (Analytical Research) – शोधकर्ता का चरों (variables) पर नियंत्रण होता है। शोधकर्ता पहले से उपलब्ध सूचनाओं व तथ्यों का अध्ययन करता है। इस प्रकार के अनुसंधान का परिचय देते हुए 'शोध प्रविधि' नामक पुस्तक में डॉ. विनयमोहन शर्मा लिखते हैं कि- "व्याख्यात्मक या वर्णनात्मक शोध में मानव-जीवन की सभी वर्तमान समस्याओं पर, चाहे वे साहित्य, समाज-विज्ञान या शुद्ध विज्ञान से सम्बन्ध रखती हों, अनुसन्धान किया जाता है।"[३]
  • ऐतिहासिक अनुसंधान

संदर्भ[सम्पादन]

  1. नगेन्द्र, डॉ. (1980). आस्था के चरण (PDF). नयी दिल्ली: नेशनल पब्लिशिंग हाउस. पृ. 49.
  2. मात्रात्मक अनुसंधान
  3. शर्मा, विनयमोहन (1973). शोध-प्रविधि (PDF) (प्रथम संस्क.). नई दिल्ली: नेशनल पब्लिशिंग हाउस. पृ. 11.