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समसामयिकी नवंबर 2019/विज्ञान और प्रौद्दोगिकी

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इसरो का ‘विक्रम’ प्रोसेसर[सम्पादन]

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने भविष्य में सभी भारतीय रॉकेटों का मार्गदर्शन और नियंत्रण करने के लिये स्वदेश निर्मित विक्रम प्रोसेसर बनाया है। इसने 27 नवंबर को 'कार्टोसैट-3' सैटेलाइट के साथ लॉन्च किये गए PSLV-C47 रॉकेट का मार्गदर्शन किया। PSLV-C47 रॉकेट में पहली बार स्वदेश निर्मित प्रोसेसर का इस्तेमाल हुआ। PSLV-C47 रॉकेट को ‘विक्रम’ प्रोसेसर के साथ फिट किया गया था, जिसे चंडीगढ़ स्थित सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला द्वारा अंतरिक्ष विभाग के तहत डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किया गया था। ‘विक्रम’ प्रोसेसर का उपयोग रॉकेट के नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण व सामान्य प्रसंस्करण अनुप्रयोगों के लिये भी किया जा सकता है।

चीनी वैज्ञानिकों द्वारा सूर्य से 70 गुना बड़े एलबी-1 ब्लैक होल (LB-1 Black Hole) की खोज की गई[सम्पादन]

  • मिल्की वे आकाशगंगा में लगभग 100 तारकीय ब्लैक होल होने की संभावना है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी तक मिल्की वे आकाशगंगा में कोई भी ब्लैक होल सूर्य से 20 गुना बड़ा नहीं है त्तथा LB-1 द्रव्यमान अनुमानित से लगभग 2 गुना ज्यादा है।
  • नामकरण चाइनीज विज्ञान अकादमी ( Chinese Academy of Sciences- NAOC) की राष्ट्रीय खगोलीय वेधशाला के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।
  • यह पृथ्वी से लगभग 15000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मिल्की वे आकाशगंगा में स्थित है।

लाभ: LB-1 का प्रत्यक्ष दर्शन यह साबित करता है कि अति-विशाल तारकीय ब्लैक होल की यह आबादी हमारी अपनी आकाशगंगा में भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज उन्हें बड़े ब्लैक होल बनने के मॉडल की फिर से जाँच करने के अध्ययन को चुनौती देगी।

इनसैट 3D और 3DR (INSAT-3D & 3DR) उपग्रह[सम्पादन]

इसरो के इन उपग्रहों पर लगे हुए इमेज़र पेलोड द्वारा ज्ञात हुआ है कि गंगा के मैदान,दिल्ली,उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों में अक्तूबर तथा नवंबर के दौरान एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ, PM2.5 एवं PM10 की सांद्रता सबसे अधिक है। AOD, जैवभार के जलने से होने वाले कणों और धुएँ का सूचक है जो दृश्यता को प्रभावित करता है तथा वातावरण में PM2.5 व PM10 की सांद्रता के बढ़ने का कारक है। इसके अलावा इस उपग्रह आधारित जलवायु वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 2003 से 2017 के मध्य अक्तूबर-नवंबर के दौरान पंजाब और हरियाणा क्षेत्र में आग की घटनाओं में 4% की वृद्धि हुई।

26 दिसंबर, 2019 को होने वाला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) केरल के चेरुवथुर (Cheruvathur) में दिखाई देगा। चेरुवथुर विश्व के उन तीन स्थानों में से एक है, जहाँ सूर्य ग्रहण सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह सूर्य ग्रहण कतर, संयुक्त अरब अमीरात तथा ओमान में शुरू होगा परंतु चेरुवथुर की विशेष भू-वैज्ञानिक स्थिति होने के कारण यह भारत में सर्वप्रथम दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण के बारे में जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है, तो पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश के बजाय चंद्रमा की परछाई दिखती है, इस स्थिति को सूर्यग्रहण कहते हैं। सामान्यतः सूर्यग्रहण अमावस्या से संबंधित माना जाता है परंतु चन्द्रमा के कक्ष तल में 5 डिग्री झुकाव होने के कारण यह अमावस्या से आगे-पीछे हो जाता है।

अल्टिमा थुले[सम्पादन]

  • इसका नाम परिवर्तित करअरोकोथ (Arrokoth) कर दिया गया है जो ब्रह्मांड तथा सितारों के बारे में सोच की प्रेरणा को दर्शाता है।
  • नासा के न्यू हॉरिजन्स अंतरिक्षयान द्वारा किया गया जो सौर मंडल में सबसे दूर स्थित पिंड है।
  • यह पृथ्वी से अब तक का सबसे दूर स्थित आकाशीय बर्फीला पिंड है।
  • प्लूटो से करीब एक बिलियन (1.6 बिलियन किलोमीटर) मील दूर है।
  • इस कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट को वर्ष 2014 में हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया था।
  • अभी तक आधिकारिक तौर पर इसे 2014 MU69 के रूप में जाना जाता था और अल्टिमा थुले उपनाम दिया गया था।

अल्फांसो आम का अफ्रीका के मलावी से आयात[सम्पादन]

भारत में अक्तूबर से दिसंबर माह के दौरान आम उपलब्ध नहीं होता है, परंतु इस अवधि में अफ्रीका के मलावी में आम की पैदावार की जाती है। इस आम की गंध और स्वाद अफ्रीका से आने के बावजूद भी महाराष्ट्र के देवगड ज़िले के अल्फांसो की तरह ही है। अल्फांसो आम को फलों का राजा माना जाता है तथा महाराष्ट्र में इसे ‘हापुस’ नाम से भी जाना जाता है। अपनी सुगंध और रंग के साथ-साथ अपने स्वाद के चलते इस आम की मांग भारतीय बाज़ारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भी है। महाराष्ट्र के रत्नागिरि, सिंधुदुर्ग, पालघर, ठाणे और रायगढ़ ज़िलों के अल्फांसो आम को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication- GI) टैग प्रदान किया जा चुका है। भारत से इसका निर्यात जापान, कोरिया तथा यूरोप को किया जाता है।