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समसामयिकी 2020/भारत-यूरोपीय देश

विकिपुस्तक से

भारत और बेल्जियम के मध्य प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) पर हस्ताक्षर को मंज़ूरी

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नई संधि स्वतंत्रता-पूर्व वर्ष 1901 में ब्रिटेन और बेल्जियम के मध्य हुई संधि का स्थान लेगी जो स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भारत पर भी लागू हो गई थी। वर्तमान में उक्त संधि ही भारत और बेल्जियम के मध्य लागू है। स्वतंत्रता-पूर्व की गई संधि में अपराधों की संख्या काफी सीमित है जिसके कारण यह उपयोगी नहीं रह गई है। संधि की प्रमुख विशेषताएँ: प्रत्यर्पण हेतु दायित्त्व संधि के अनुसार, प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष के ऐसे व्यक्ति के प्रत्यर्पण की सहमति प्रदान करता है जो उसके देश के सीमा क्षेत्र में प्रत्यर्पण अपराध का आरोपी है या उसे सजा दी जा चुकी है। प्रत्यर्पण अपराध प्रत्यर्पण अपराध का अर्थ ऐसे अपराध से है जो दोनों देशों के कानूनों के अंतर्गत दंडनीय है और जिसमें एक वर्ष के कारावास अथवा अधिक कड़े दंड का प्रावधान है। जब किसी सज़ा प्राप्त व्यक्ति के प्रत्यर्पण की मांग की जाती है तो शेष सजा की अवधि कम-से-कम 6 महीने होनी अनिवार्य है। बेल्जियम के साथ की जा रही संधि में टैक्स, राजस्व और वित्त से संबंधित अपराध भी शामिल किये गए हैं।

अस्वीकार्यता के लिये अनिवार्य आधार

यदि अपराध की प्रकृति राजनीतिक है तो प्रत्यर्पण के प्रस्ताव को अस्वीकार किया जा सकता है। हालाँकि संधि में कुछ ऐसे अपराधों को भी शामिल किया गया है जिन्हें राजनीतिक अपराध नहीं माना जाएगा। यदि प्रत्यर्पण अपराध एक सैन्य अपराध है। यदि किसी व्यक्ति को उसके रंग, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक विचार के कारण दंडित किया जा रहा है। दंड को लागू करने की समय-सीमा बीत चुकी है। दोषी की राष्ट्रीयता राष्ट्रीयता का निर्धारण उस समय के अनुसार किया जाएगा जब अपराध किया गया है। इसमें एक सरकारी प्राधिकरण औपचारिक और कानूनी रूप से एक कथित अपराधी को अपराध हेतु अभियोजन का सामना करने के लिये किसी अन्य सरकार से उसकी मांग करता है। निर्वासन के विपरीत यह एक न्यायिक प्रक्रिया है। भारत और प्रत्यर्पण (India and Extradition): भारत दुनिया के किसी भी देश को प्रत्यर्पण का प्रस्ताव कर सकता है। यदि भारत ने इस संदर्भ में उस देश के साथ किसी प्रकार की संधि की है तो सभी नियम उस संधि के आधार पर ही निर्धारित किये जाएंगे, किंतु यदि भारत की उस देश के साथ संधि नहीं है, तो इस स्थिति में संपूर्ण प्रक्रिया उस देश की घरेलू कानूनों के आधार पर निर्धारित की जाएगी। उचित संधि के अभाव में प्रत्यर्पण भारत और उस देश के संबंधों पर भी निर्भर करेगा। इसी प्रकार कोई भी देश भारत को प्रत्यर्पण का अनुरोध कर सकता है। जिन राज्यों के साथ भारत ने प्रत्यर्पण संधि नहीं की है, उनके साथ प्रत्यर्पण का कानूनी आधार भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 3(4) द्वारा प्रदान किया गया है।

बेल्जियम (Belgium) :-तकरीबन 40 मील लंबे समुद्री तट वाला बेल्जियम पश्चिमी यूरोप में स्थित एक देश है। यह नीदरलैंडस, जर्मनी, लक्ज़मबर्ग, फ्रांँस और उत्तरी सागर से घिरा हुआ है। बेल्जियम की राजधानी और सबसे उसका सबसे बड़ा शहर ब्रसेल्स (Brussels) है, इसके अलावा यहाँ कई अन्य प्रमुख शहर भी हैं। भारत-बेल्जियम संबंध भारत, बेल्जियम का एक बड़ा निर्यात स्‍थल है और भारत बेल्जियम से अधिकांशतः जवाहरात और आभूषण (अपरिष्‍कृत हीरा), रसायन, रासायनिक उत्‍पाद, मशीन तथा मशीनी उत्‍पादों का निर्यात करता है। अनुमानित आँकड़ों के अनुसार, भारत में बेल्जियम की लगभग 160 कंपनियाँ कार्यरत हैं। इसके अलावा सूचना तथा सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे- TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और HCL ने बेल्जियम और यूरोपीय बाज़ारों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने हेतु बेल्जियम को ही अपना आधार बनाया है। भारत और बेल्जियम के मध्य राजनयिक संबंध वर्ष 1947 में स्थापित किये गए थे। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध काफी सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण रहे हैं तथा बीते कुछ वर्षों में बेल्जियम ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को मान्यता प्रदान की है।

आगामी पाँच वर्षों 2020-2025 के लिये वैज्ञानिक सहयोग पर समझौते

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जुलाई में आयोजित 15वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में आगामी पाँच वर्षों 2020-2025 के लिये वैज्ञानिक सहयोग पर समझौते को नवीनीकृत करने पर सहमत हो गए हैं। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ने वर्ष 2001 में हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी समझौते के अनुरूप आपसी लाभ और पारस्परिक सिद्धांतों के आधार पर अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भविष्य में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है। वर्ष 2001 में हुआ यह समझौता 17 मई 2020 को समाप्त हो गया था। दोनों पक्ष समयबद्ध तरीके से नवीनीकृत प्रक्रिया शुरू करने और अनुसंधान एवं नवाचार में 20 वर्षों के मज़बूत सहयोग को अंगीकृत करने के लिये वचनबद्ध हैं।

इस समझौते का महत्त्व इससे जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, एग्रीटेक, जैव स्वायत्ता, एकीकृत साइबर-भौतिक प्रणाली, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी और स्वच्छ प्रौद्योगिकी आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार सहयोग को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा अनुसंधान, शोधकर्त्ताओं के आदान-प्रदान, छात्रों, स्टार्टअप और ज्ञान के सह-सृजन के लिये संसाधनों के सह-निवेश में संस्थागत संबंधों को और मज़बूती मिलेगी।

दोनों देशों के मध्य स्थापित वैज्ञानिक सहयोग की समीक्षा के लिये भारत-यूरोपीय संघ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचालन समिति की वार्षिक बैठक आयोजित होती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूरोपीय आयोग (European Commission-EC) ने जलवायु परिवर्तन एवं ध्रुवीय अनुसंधान से संबंधित यूरोपीय रिसर्च एंड इनोवेशन फ्रेमवर्क कार्यक्रम ‘Hoizon 2020’ के तहत चयनित संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का समर्थन करने के लिये एक सह-निधि तंत्र (Co-Funding Mechanism-CFM) की स्थापना की है।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी: 1970 के दशक से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यूरोपीय संघ के साथ सहयोग कर रहा है। इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी पृथ्वी अवलोकन में सहयोग बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें वर्ष 2018 में हस्ताक्षरित कॉपरनिकस कार्यक्रम (Copernicus Programme) भी शामिल है। कॉपरनिकस यूरोपीय संघ का पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम (Earth Observation Programme) है।

यूरोपीय संघ 27 देशों (पूर्व में इस संघ में 28 देश शामिल थे) की एक आर्थिक और राजनीतिक सहभागिता है। ये 27 देश संधि के द्वारा एक संघ के रूप में जुड़े हुए हैं जिससे कि व्यापार आसानी से हो सके और लोग एक-दूसरे से कोई विवाद न करें क्योंकि अर्थव्यवस्था का एक सिद्धांत है कि जो देश आपस में जितना ज़्यादा व्यापार करते हैं उनकी लड़ाई होने की संभावना उतनी ही कम हो जाती है।

यही कारण है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में यह कोशिश की गई कि सभी देश आर्थिक रूप से एक साथ आएँ और एकजुट होकर एक व्यापार समूह का हिस्सा बनें। इसी व्यापार समूह की वज़ह से आगे चलकर वर्ष 1993 में यूरोपीय संघ का जन्म हुआ। वर्ष 2004 में जब यूरो करेंसी लॉन्च की गई तब यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक रूप से एकजुट हुआ। यूरोपीय संघ मास्ट्रिच संधि द्वारा बनाया गया था, जो 1 नवंबर, 1993 को लागू हुई थी।

  • ब्रिटेन 28 सदस्यीय यूरोपीय यूनियन के समूह को छोड़ने वाला पहला देश बन गया है।

23 जनवरी, 2020 को ब्रिटिश संसद और 29 जनवरी, 2020 को यूरोपीय यूनियन की संसद ने ब्रेक्ज़िट (Brexit) समझौते पर अपनी अनुमति दी। ब्रिटेन सबसे पहले वर्ष 1973 में यूरोपियन इकोनॉमिक कम्युनिटी (European Economic Community-EEC) में शामिल हुआ था। लिस्बन संधि का अनुच्छेद 50 यूरोपीय संघ के मौजूदा सदस्यों को संघ छोड़ने का अधिकार देता है।

भारत-नॉर्वे डायलॉग

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Jan Mayen ringed

व्यापार एवं निवेश पर आधारित इस डायलॉग के पहले सत्र का आयोजन 15-16 जनवरी,2020 को नई दिल्ली में किया गया। यह सत्र नॉर्वे के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली में 8 जनवरी, 2019 को भारत और नॉर्वे के बीच हस्ताक्षरित संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference- ToR) पर आधारित था। पहला सत्र 15 जनवरी, 2020 को भारतीय उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत से शुरू हुआ जिसमें आपसी हित जैसे- नीली अर्थव्यवस्था, शिपिंग एवं समुद्री सुरक्षा, आईसीटी, नवीकरणीय ऊर्जा, मत्स्य और MSME के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने देशों में निवेश अनुकूल वातावरण बनाने के लिये सरकारों द्वारा दी जा रहीं सुविधाओं से संबंधित जानकारियों का आदान-प्रदान किया।

इस अवसर पर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DMICDC) और इन्वेस्ट इंडिया द्वारा भी अपनी प्रस्तुतियाँ दी गईं।

अप्रैल 2000 से सितंबर 2019 के दौरान नॉर्वे से भारत में आने वाला विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 257 मिलियन अमेरिकी डालर के आसपास था। भारत ने समुद्री प्लास्टिक कूड़े की समस्या से निपटने के लिये नॉर्वे के साथ महासागर वार्ता शुरू की है।

हिमाद्रि- ध्रुवीय अनुसंधान स्टेशन वर्ष 2008 में भारत द्वारा नॉर्वे में खोला गाया पहला आर्कटिक अनुसंधान स्टेशन है।

इस स्टेशन के मुख्य अनुसंधान फूड-वेब डायनेमिक्स, स्पेस वेदर (Space Weather), एरोसोल विकिरण (Aerosol Radiation), ग्लेशियर, सूक्ष्मजीव समुदाय (Microbial Communities), कार्बन पुनर्चक्रण और सेडिमेटोलॉजी पर आधारित है।

IndARC आर्कटिक क्षेत्र में भारत की पहली अंडरवाटर वेधशाला है। नॉर्वे और उत्तरी ध्रुव के बीच स्थित इस वेधशाला का उद्देश्य आर्कटिक की जलवायु का अध्ययन करना है और पता लगाना है कि यह मानसून को कैसे प्रभावित करती है?

नॉर्वे उत्तरी यूरोपीय देश नॉर्वे स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप (Scandinavian Peninsula) के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। इसकी राजधानी ओस्लो (Oslo) है। यह यूरोप का दूसरा न्यूनतम घनत्व वाला देश है। इसके उत्तर में बारेंट्स सागर (Barents Sea) एवं नॉर्वेजियन सागर (Norwegian Sea) तथा पश्चिम में उत्तरी सागर (North Sea) एवं दक्षिण में स्कागेर जल संधि (Skager Strait) के साथ इसकी सीमा पूर्व में स्वीडन और उत्तर में फिनलैंड एवं रूस से लगती है। नॉर्वे की तटीय भूमि फियोर्ड तटों (Fiord Coast) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। विश्व में फियोर्ड तटों का संकेंद्रण सबसे अधिक नॉर्वे में है।

यहाँ औरोरा बोरेलिस (Aurora Borealis) नामक एक प्राकृतिक घटना आमतौर पर शरद और वसंत ऋतु के बीच आर्कटिक वृत्त के ऊपर देखी जाती है।

गर्मियों में सूर्य आर्कटिक वृत्त के उत्तर में अस्त नहीं होता है जिसके कारण नार्वे को ‘मध्यरात्रि के सूर्य का देश’ कहा जाता है।

14 फरवरी 2020 को पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रिबेलो डी सूजा भारत की यात्रा पर आए

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गोवा विवाद व स्वतंत्रता
  • वर्ष 1946 में समाजवाद के प्रणेता डॉ राम मनोहर लोहिया गोवा पहुँचे,वहाँ पर गोवा की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा हुई। लोहिया ने गोवा में सविनय अवज्ञा आंदोलन किया। आंदोलन का महत्त्व यह था कि गोवा 435 वर्षों में पहली बार स्वतंत्रता के लिये आवाज उठा रहा था।
  • स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सभी रियासतों को मिलाकर भारत को एक संघ राज्य का रूप दिया। वे गोवा को भी भारतीय संघ राज्य क्षेत्र में शामिल करना चाहते थे,परंतु ऐसा नहीं हो पा रहा था क्योंकि 1510 ई से गोवा और दमन एवं दीव में पुर्तगालियों का औपनिवेशिक शासन था।
  • 27 फरवरी,1950 को भारत सरकार ने पुर्तगाल से भारत में मौजूद कॉलोनियों के संबंध में बातचीत करने का आग्रह किया।लेकिन पुर्तगाल ने बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया।पुर्तगाल का कहना था कि गोवा उसका उपनिवेश नहीं है बल्कि महानगरीय पुर्तगाल का हिस्सा है,इसलिये इसे भारत को नहीं दिया जा सकता। इसके चलते भारत के पुर्तगाल के साथ कूटनीतिक संबंध खराब हो गए।
  • वर्ष 1954 में गोवा से भारत के विभिन्न हिस्सों में जाने के लिये वीज़ा लेना ज़रूरी हो गया। इसी बीच गोवा में पुर्तगाल के खिलाफ आंदोलन तेज़ हो गया और वर्ष 1954 में ही दादरा एवं नगर हवेली के कई क्षेत्रों पर भारतीयों ने अपना कब्जा स्थापित कर लिया।
  • भारत सरकार ने एक बार पुनः पुर्तगाली सरकार से बातचीत करने का प्रयास किया परंतु वार्ता के विफल रहने पर गोवा में सामान्य जन-जीवन बहाल करने के उद्देश्य से 18 दिसंबर, 1961 को भारत की सेना ने गोवा, दमन और दीव में हमला कर दिया।
  • 19 दिसंबर, 1961 को पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और गोवा को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। प्रतिवर्ष 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • पुर्तगाली राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि भारत और पुर्तगाल के बीच 500 वर्षों का साझा इतिहास है।
  • दोनों देश संस्कृति,भाषा और वंश परंपरा के माध्यम से गोवा तथा मुंबई के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।
  • भारत-पुर्तगाल द्विपक्षीय कार्ययोजना ने कई गुना विस्तार किया है। दोनों देश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा, नवाचार और स्टार्ट-अप, पानी तथा पर्यावरण सहित अन्य विषयों पर सहयोग कर रहे हैं।
  • आतंकवाद पूरी दुनिया के लिये गंभीर खतरा है।दोनों देशों को इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिये आपसी सहयोग को और मज़बूत करना चाहिये।
  • जलवायु परिवर्तन आज एक दबावकारी वैश्विक चुनौती है। भारत निकट भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में पुर्तगाल के शामिल होने की उम्मीद कर रहा है।
  • दोनों देशों के बीच समुद्री विरासत,समुद्री परिवहन एवं बंदरगाह विकास, प्रवास तथा गतिशीलता, स्टार्ट-अप, बौद्धिक संपदा अधिकार, उत्पादन, योग, राजनयिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, सार्वजनिक नीति, एयरोस्पेस, नैनो-जैव प्रौद्योगिकी और ऑडियो विज़ुअल के क्षेत्र में 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
  1. भारत और पुर्तगाल के बीच लगभग 500 वर्षों का साझा इतिहास है।पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा ने अफ्रीका महाद्वीप के रास्ते मई 1498 में भारत के कालीकट बंदरगाह पर पहुँचकर यूरोप और दक्षिण एशिया के मध्य प्रत्यक्ष मार्ग स्थापित कर दिया।
  2. इससे पूर्व वेटिकन और अरब के व्यापारियों द्वारा यूरोप से भारत जाने के लिये भूमध्य सागर से होते हुए अरब सागर का मार्ग चुना जाता था।
  3. भारत में पुर्तगाली औपनिवेशिक युग का प्रारंभ 1502 ई में हुआ,जब पुर्तगाली साम्राज्य ने कोल्लम (पूर्व में क्विलोन),केरल में पहला यूरोपीय व्यापारिक केंद्र स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने दीव, दमन,दादरा और नगर हवेली सहित भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कई अन्य परिक्षेत्रों का अधिग्रहण किया।
  4. 1510 ई में गोवा पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बना।
  5. भारत और पुर्तगाल के बीच आत्मीय संबंध वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद भी अनवरत रूप से ज़ारी हैं,साथ ही दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1949 में होती है।
वर्तमान स्थिति

वर्तमान में भारत-पुर्तगाल संबंध आत्मीय व मित्रतापूर्ण हैं।पुर्तगाल बहु क्षेत्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिये अनवरत रूप से समर्थन करता रहा है।पुर्तगाल ने वर्ष 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिये भी भारत का समर्थन किया था। अक्तूबर 2005 में पुर्तगाल ने अबू सलेम और मोनिका बेदी को भारत में प्रत्यर्पित कर,जघन्य आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति का प्रत्यर्पण कराने वाला पुर्तगाल यूरोपीय संघ का पहला देश बना। अक्तूबर 2015 में नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण करने में सहयोग हेतु भारत सरकार के साथ समझौता करने वाला पुर्तगाल यूरोपीय संघ का पहला देश बना। नवंबर 2017 में भारत ने लिस्बन में आयोजित वेब समिट में भाग लिया और हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन के लिये रोडमैप पर चर्चा की। फरवरी 2018 में जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन के विषय पर विमर्श करने के लिये गोवा सरकार का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पुर्तगाल की यात्रा पर गया था। अक्तूबर 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) भारत की यात्रा पर आए।,स्रोत: PIB

यूरोपीय संघ की डेटा रणनीति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर श्वेत-पत्र जारी

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यूरोपीय आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मानव-केंद्रित विकास को सुनिश्चित करने हेतू इसे जारी किया। नया दस्तावेज़ यूरोपीय संघ (European Union- EU) की विभिन्न परियोजनाओं, विधायी रूपरेखा और पहलों के लिये एक समयसीमा प्रस्तुत करता है। यह रणनीति सिलिकन वैली (Silicon Valley) के अधिकारियों और ब्रसेल्स के नियामकों के बीच बैठकों की शृंखला का अनुसरण करती है। मार्क ज़ुकरबर्ग के यूरोप के अधिकारियों से मिलने के बाद फेसबुक ने भी कंटेंट रेगुलेशन के लिये अपना प्रस्ताव जारी किया था जिसे यूरोपीय नियामकों ने खारिज कर दिया।

EU डेटा रणनीति के माध्यम से यूरोपीय संघ के भीतर डेटा के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करना चाहता है साथ ही यह वर्ष 2030 तक डेटा एकल बाज़ार (Data Single Market) निर्मित कर यूरोप के स्थानीय प्रौद्योगिकी बाज़ार को मज़बूत करना चाहता है।

डेटा एजाइल अर्थव्यवस्था (Data Agile Economy) के विकास के लिये आयोग वर्ष के उत्तरार्द्ध तक "सामान्य यूरोपीय डेटा स्पेस के शासन के लिये सक्षम विधायी फ्रेमवर्क" को लागू करना चाहता है। वर्ष 2021 की शुरुआत तक यूरोपीय आयोग एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (Application Programming Interfaces- APIs) के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के उच्च मूल्य वाले डेटा को मुफ्त में उपलब्ध कराएगा। ध्यातव्य है कि API दो अलग-अलग एप्लीकेशन्स के बीच आपसी संपर्क स्थापित करने का एक विकल्प है। वर्ष 2021 से 2027 के बीच डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिये एक उच्च प्रभाव वाली परियोजना में निवेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड सेवा बाज़ार सहित कई अन्य पहलें भी इस रणनीति के तहत प्रस्तावित हैं।

भारतीय प्रयास केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2012 में नेशनल डेटा शेयरिंग एंड एक्सेसिबिलिटी पॉलिसी (National Data Sharing and Accessibility Policy- NDSAP) को मंज़ूरी दी थी। इस पहल के तहत सरकार ने अमेरिकी सरकार के साथ सार्वजनिक उपयोग के लिये सरकारी डेटा की साइट data.gov.in को जारी किया था। वर्ष 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण में गैर-व्यक्तिगत डेटा के उपयोग से संबंधित बातों का उल्लेख किया गया था। नीति आयोग द्वारा नेशनल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म (The National Data & Analytics Platform), स्मार्ट सिटीज़ मिशन (इंडिया अर्बन डेटा एक्सचेंज) और ग्रामीण विकास मंत्रालय (DISHA डैशबोर्ड) के माध्यम से डेटा एकीकरण से संबंधित अन्य प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2018 से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र PwC और अन्य विक्रेताओं के साथ डेटा विश्लेषण के लिये उत्कृष्टता केंद्र बनाने पर काम कर रहा है। ग़ौरतलब है कि इस उत्कृष्टता केंद्र का उद्देश्य डेटा विश्लेषण प्रदान करना है।