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समसामयिकी 2020/मानव संसाधन

विकिपुस्तक से

5जी हैकथॉन की शुरुआत केंद्रीय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने शिक्षाविदों और औद्योगिक हितधारकों के साथ मिलकर' किया है। इसका उद्देश्य भारत के मुख्य अत्याधुनिक विचारों को शॉर्टलिस्ट कर उन्हेंं व्यावहारिक रूप से 5G उत्पादों एवं उनके समाधान के लिये उपयोग करना। इस कार्यक्रम का समापन 16 अक्तूबर, 2020 को इंडिया मोबाइल काॅन्ग्रेस में एक भव्य समारोह के साथ होगा। तीन चरणों में आयोजित इस हैकथॉन के विभिन्न चरणों के विजेताओं को कुल 2.5 करोड़ रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। हैकथॉन अलग-अलग क्षेत्र में उत्पादों एवं उनके समाधानों में नवोन्मेषी विचारों को लागू करेगा और भारत में 5G तकनीकी को विकसित करने में सहायक होगा। 5G हैकथॉन भारत और विदेशी तकनीकी डेवलपर्स,छात्रों,स्टार्ट-अप संचालकों,एसएमई,शैक्षणिक संस्थानों तथा पंजीकृत कंपनियों के लिये एक अवसर प्रदान करता है।

इसमें विदेशी हितधारक भारतीय संदर्भ में 5G नेटवर्क के उपयोग के मामलों को प्रस्तुत करने के लिये व्यक्तिगत तौर पर या एक टीम के रूप में भाग ले सकते हैं।

नवरत्नालु पेदलंदरिकी इलू कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों में संशोधन आंध्र प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्देशों के आधार पर किया है। ‘नवरत्नालु पेदलंदरिकी इलू’ का हिंदी में अर्थ है ‘सभी गरीबों के लिये घर’। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को मात्र 1 रुपए में आवास स्थल का आवंटन किया जाएगा। आवास स्थल आवंटन के लिये राज्य सरकार लोगों से केवल 20 रुपए लेगी, जिसमें 10 रुपए स्टांप पेपर शुल्क के लिये और 10 रुपए लैमिनेशन शुल्क के लिये हैं। लाभार्थी आवंटित आवास स्थल का उपयोग केवल घर बनाने के लिये ही कर सकेंगे, वे इस स्थल को बेच नहीं सकेंगे। हालाँकि, नियमों के अनुसार कम-से-कम पाँच वर्ष तक आवास स्थल का उपयोग कर इसे बेचा जा सकेगा। इस योजना के तहत आंध्र प्रदेश सरकार 25 मार्च को लाभार्थियों को आवास स्थल आवंटित करने वाली थी, किंतु कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के कारण इस कार्यक्रम को टाल दिया गया है और नए कार्यक्रम के अनुसार, लाभार्थियों को 14 अप्रैल को आवास आवंटित किये जाएंगे।

  • मुक्ति कारवाँ (Mukti Caravan) अभियान की शुरुआत राजस्थान सरकार ने बाल श्रम और मानव तस्करी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिये को हरी झंडी दिखाई।

इस अभियान का उद्देश्य बाल तस्करी, ज़बरन श्रम एवं बच्चों के यौन शोषण जैसे मामलों से निपटने के लिये निवारक प्रक्रियाओं के बारे में लोगों में जागरूकता का प्रसार करना है।

यह कारवाँ अगले दो महीने तक राजस्थान के आठ ज़िलों की यात्रा करेगा। इनमें जयपुर,टोंक,भीलवाड़ा,उदयपुर,राजसमंद,चित्तौड़गढ़,प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा ज़िले शामिल हैं जो मानव तस्करी से ग्रस्त हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2018 की रिपोर्ट में राजस्थान को मानव तस्करी के मामले में छठे स्थान पर रखा गया है।

इस कारवाँ में भाग लेने वाले प्रतिभागी सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के साथ विचार-विमर्श करेंगे और उन्हें मानव तस्करी के खिलाफ जागरूक करने के लिये चर्चाएँ, मेले, कविता पाठ और लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग जैसी गतिविधियों का आयोजन करेंगे। कारवाँ का नेतृत्त्व: इस अभियान का नेतृत्त्व कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) और राजस्थान पुलिस द्वारा किया जा रहा है। KSCF के कार्यकर्त्ता पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर लोगों को बच्चों के साथ होने वाले अपराधों से निपटने के साथ-साथ बाल अपराध के लिये कानूनी प्रावधानों के बारे में भी जागरूक करेंगे। बचपन बचाओ आंदोलन के अनुसार, पुलिस प्रशासन और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के साथ साझेदारी से राजस्थान को बाल-सुलभ राज्य बनाने में मदद मिलेगी। हालाँकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 (1) और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत भारत में मानव तस्करी प्रतिबंधित है।

रोजगार से संबंधित सरकारी प्रयास[सम्पादन]

  • असीम (ASEEM) पोर्टल की शुरुआत 10 जुलाई, 2020 को भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने किया। असीम (ASEEM) पोर्टल का पूर्ण रूप 'आत्मनिर्भर कुशल कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण (Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping) है।

असीम पोर्टल जो मोबाइल एप के रूप में भी उपलब्ध है, को बंगलुरु स्थित कंपनी बेटरप्लेस के सहयोग से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation) द्वारा विकसित एवं प्रबंधित किया गया है। उद्देश्य: इस पोर्टल का उद्देश्य असीम पोर्टल पर उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करके नीति निर्धारण में सहायता प्रदान करना है। इस पोर्टल में तीन आईटी आधारित इंटरफेस हैं:- नियोक्ता पोर्टल- नियोक्ता ऑनबोर्डिंग, डिमांड एग्रीगेशन, उम्मीदवार का चयन। डैशबोर्ड- रिपोर्ट, रुझान, विश्लेषण एवं अंतर को प्रमुखता से दिखाना। उम्मीदवार आवेदन- उम्मीदवार का प्रोफाइल बनाना और ट्रैक करना, नौकरी का सुझाव देना। असीम पोर्टल NSDC और इससे संबंधित ‘क्षेत्रीय कौशल परिषदों’ (Sector Skill Councils) को ‘रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स’ प्रदान करने में मदद करेगा। COVID-19 के कारण भारत के विभिन्न राज्यों से अपने घरों को वापस लौटे श्रमिकों तथा वंदे भारत मिशन के तहत स्वदेश लौटे भारतीय नागरिक जिन्होंने ‘कौशल कार्ड’ में पंजीकरण कराया है, उनके डेटाबेस को भी इस पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से कुशल कार्यबल को आजीविका के अवसर तलाशने, बाज़ार में मांग-आपूर्ति के अंतर को कम करने और नियोक्ताओं को कुशल कार्यबल खोजने में मदद करने के मामले में सूचना प्रवाह की स्थिति को बेहतर बनाने के लिये शुरू किया गया है। विशेष रूप से व्यावसायिक दक्षता एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले एक कुशल कार्यबल की भर्ती के अलावा इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित प्लेटफॉर्म को उद्योग-संबंधित कुशल कार्यबल प्राप्त करने और COVID-19 के बाद की स्थितियों में उभरते नौकरी के अवसरों का पता लगाने में कार्यबल की मदद करने के लिये तैयार किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में कौशल के अंतर की पहचान करने के अलावा असीम पोर्टल नियोक्ताओं को कुशल कार्यबल की उपलब्धता का आकलन करने एवं उनके लिये भर्ती प्रक्रियाओं को तैयार करने के लिये एक मंच प्रदान करेगा।

  • संतोष पोर्टल (Santusht Portal) की शुरुआत केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने ज़मीनी स्तर पर श्रम कानूनों के कियान्वयन की निगरानी के लिये किया।

इसका उद्देश्य पारदर्शिता,जवाबदेही,सार्वजनिक सेवाओं का प्रभावी वितरण तथा नीतियों का क्रियान्वयन,निरंतर निगरानी के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर श्रम और रोज़गार मंत्रालय की योजनाओं को बढ़ावा देना। भारत सरकार का उद्देश्य मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा,स्वास्थ्य एवं कामकाजी परिस्थितियों पर सभी चार कोडों को लागू करना है। इससे व्यापार में सुगमता के साथ ही श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सकेगी।

जन शिकायतों के लिये केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (Centralized Public Grievance Redressal and Monitoring System- CPGRAMS) पोर्टल पहले से ही काम कर रहा है।
  • रोज़गार संगी एप (Rojgaar Sangi app) की शुरुआत छत्तीसगढ़ सरकार ने कुशल एवं प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी खोजने में मदद करने के उद्देश्य से लाॅन्च किया। इस एप को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की मदद से विकसित किया गया है। यह एप छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण (Chhattisgarh State Skill Development Authority- CSSDA) द्वारा प्रस्तावित 705 पाठ्यक्रमों के तहत प्रशिक्षित 7 लाख छात्रों को लाभ पहुँचाएगा।
  • संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने विश्व रोज़गार और सामाजिक दृष्टिकोण रुझान रिपोर्ट (World Employment and Social Outlook Trends Report- WESO Trends Report), 2020 को प्रकाशित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में वैश्विक बेरोज़गारी में लगभग 2.5 मिलियन की वृद्धि का अनुमान है।

भारत में बेरोज़गारी से संबंधित आँकड़े CMIE की अक्तूबर 2019 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शहरी बेरोज़गारी दर 8.9% और ग्रामीण बेरोज़गारी दर 8.3% अनुमानित है। उल्लेखनीय है अक्तूबर 2019 में भारत की बेरोज़गारी दर बढ़कर 8.5% हो गई, जो अगस्त 2016 के बाद का उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य स्तर पर सबसे अधिक बेरोज़गारी दर त्रिपुरा (27%) हरियाणा (23.4%) और हिमाचल प्रदेश (16.7) में आँकी गई। जबकि सबसे कम बेरोज़गारी दर तमिलनाडु (1.1%), पुद्दुचेरी (1.2%) और उत्तराखंड (1.5%) में अनुमानित है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization- ILO) यह ‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक विशिष्ट एजेंसी है, जो श्रम संबंधी समस्याओं/मामलों, मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक, सामाजिक संरक्षा तथा सभी के लिये कार्य अवसर जैसे मामलों को देखती है। यह संयुक्त राष्ट्र की अन्य एजेंसियों से इतर एक त्रिपक्षीय एजेंसी है, अर्थात् इसके पास एक ‘त्रिपक्षीय शासी संरचना’ (Tripartite Governing Structure) है, जो सरकारों, नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों का (सामान्यतः 2:1:1 के अनुपात में) इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करती है। यह संस्था अंतर्राष्ट्रीय श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायतों को पंजीकृत तो कर सकती है, किंतु सरकारों पर प्रतिबंध आरोपित नहीं कर सकती है। इस संगठन की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् ‘लीग ऑफ नेशन्स’ (League of Nations) की एक एजेंसी के रूप में सन् 1919 में की गई थी। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य रहा है। इस संगठन का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है। वर्तमान में 187 देश इस संगठन के सदस्य हैं, जिनमें से 186 देश संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से हैं तथा एक अन्य दक्षिणी प्रशांत महासागर में अवस्थित ‘कुक्स द्वीप’ (Cook's Island) है। ध्यातव्य है कि वर्ष 1969 में इसे प्रतिष्ठित ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया था।

  • 11 सितंबर, 2019 को नई दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा डिज़ाइन जीवन कौशल (Life Skills) संबंधी पाठ्यक्रम लॉन्च किया। वर्तमान समय में परीक्षाओं में केवल अंक अर्जित करने की अवधारणा विद्यमान है। इस तरह की अवधारणा से समाज में संचालित शिक्षा में मात्र रटने की प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिलता है। अंततः इससे वास्तविक शिक्षा के स्तर में कमी आती है।

जीवन कौशल पर आधारित इस नए पाठ्यक्रम के माध्यम से देश के युवा वर्ग की कार्य कुशलता और सामूहिक दक्षता में सुधार होगा। भारत में रोज़गारपरक उत्पादन के लिये कौशल और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आवश्यकता है, इसीलिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस कार्यक्रम के अधिदेश तथा इसके उद्देश्य जारी किये हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्नातक स्तर के जीवन कौशल पाठ्यक्रम में संचार कौशल (Communication Skill), अन्तर्वैयक्तिक कौशल (Interpersonal Skill), समय प्रबंधन, समस्या सुलझाने की क्षमता, निर्णयन क्षमता और नेतृत्व क्षमता जैसे रोज़गारपरक विषयों को शामिल किया गया है। जीवन कौशल पाठ्यक्रम, किसी व्यक्ति को कक्षा में अनुभव के माध्यम से सीखने हेतु प्रेरित करता है जिससे मानव जीवन की दिन-प्रतिदिन की समस्याओं से निपटा जा सके। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission- UGC)-तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 28 दिसंबर, 1953 को औपचारिक तौर पर विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग नींव रखी थी। विश्‍वविद्यालयी शिक्षा के मापदंडों के समन्‍वय, निर्धारण और अनुरक्षण हेतु वर्ष 1956 में संसद के अधिनियम द्वारा स्‍थापित एक स्‍वायत्त संगठन है। पात्र विश्‍वविद्यालयों और कॉलेजों को अनुदान प्रदान करने के अतिरिक्‍त आयोग केंद्र तथा राज्‍य सरकारों को उच्‍चतर शिक्षा के विकास हेतु आवश्‍यक उपायों पर सुझाव भी देता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय पुणे, भोपाल, कोलकाता, हैदराबाद, गुवाहाटी एवं बंगलूरू में हैं।

  • कौशल विकास तथा उद्दयमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development & Entrepreneurship-MSDE) एवं अमेरिकी आईटी कंपनी आईबीएम (IBM) के सहयोग से स्किल बिल्ड प्लेटफॉर्म (Skill Build Platform) लॉन्च किया है।

स्किल बिल्ड प्लेटफॉर्म एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे IBM द्वारा विकसित किया गया है। इसके तहत युवाओं में तकनीकी कौशल तथा उद्द्यमशीलता को प्रोत्साहित किया जाएगा। यू.के., जर्मनी तथा फ्राँस के बाद स्किल बिल्ड प्लेटफॉर्म लागू करने वाला भारत चौथा देश होगा। इसके तहत देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (Industrial Training Institutes-ITIs) तथा राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (National Skill Training Institutes-NSTIs) में आईटी (IT), नेटवर्किंग एवं क्लाउड कंप्यूटिंग में दो वर्षीय डिप्लोमा कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म द्वारा ITIs तथा NSITs के शिक्षकों को बुनियादी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से दो वर्षीय डिप्लोमा पूरा करने वाले विद्यार्थियों को IBM द्वारा प्लेसमेंट में सहयोग दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के संचालन में देश के प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) जैसे- उन्नति (Unnati) तथा एडुनेट (Edunet) आदि की मदद ली गई है।

‘सहकार मित्र: इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना’ (Sahakar Mitra: Scheme on Internship Programme)[सम्पादन]

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ द्वारा ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम’ (National Cooperative Development Corporation- NCDC) की पहल से इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के प्रधानमंत्री के आह्वान के तहत स्‍वदेशी उत्‍पादों के प्रचार से संबंधी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ‘सहकार मित्र: इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना का शुभारंभ किया गया है। इसके तहत ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)’ ने क्षमता विकास, युवाओं को सवेतन इंटर्नशिप और स्टार्ट-अप मोड में युवा सहकारी कार्यकर्त्ताओं को उदार शर्तों पर सुनिश्चित परियोजना ऋणों के माध्यम से सहकारी क्षेत्र संबंधी उद्यमिता विकास परिवेश में अनेक पहलें की हैं। यह योजना’ शैक्षणिक संस्थानों के पेशेवरों को ‘किसान उत्पादक संगठनों’ (Farmers Producers Organizations- FPO) के रूप में सहकारी समितियों के माध्यम से नेतृत्त्व और उद्यमशीलता की भूमिकाओं को विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी। सहकार मित्र योजना युवा पेशेवरों के नवीन विचारों तक सहकारी संस्थाओं की पहुँच बनाने में मददगार साबित हो सकती है। इसके साथ ही युवाओं को ‘फिल्ड वर्क’ (क्षेत्र में कार्य करना) का अनुभव प्राप्‍त होगा जो उन्‍हें आत्मनिर्भर होने का विश्वास दिलाएगा। NCDC ने सहकार मित्र सवेतन इंटर्नशिप कार्यक्रम हेतु अलग से धनराशि आवंटित की है जिसके तहत प्रत्येक इंटर्न को 4 माह की इंटर्नशिप अवधि के दौरान वित्तीय सहायता दी जाएगी। NCDC ने स्टार्ट-अप सहकारी उपक्रमों को बढ़ावा देने के लिये एक पूरक योजना की भी शुरुआत की है। पात्रता: कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों और आईटी जैसे विषयों के पेशेवर स्नातक ‘इंटर्नशिप’ के लिये पात्र होंगे। कृषि-व्यवसाय, सहयोग, वित्त, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वानिकी, ग्रामीण विकास, परियोजना प्रबंधन, इत्‍यादि में एमबीए की डिग्री के लिये पढ़ाई कर रहे या अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके युवा भी इसके लिये पात्र होंगे। उद्देश्य: NCDC और सहकारी समितियों के कामकाज से युवाओं को व्यावहारिक अनुभव प्राप्‍त करने एवं सीखने का अवसर मिलेगा। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘सहकार मित्र: इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना’ का शुभारंभ किया गया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation- NCDC) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापना वर्ष 1963 में संसद के एक अधिनियम द्वारा कृषि एवं कि‍सान कल्‍याण मंत्रालय के अंतर्गत एक सांविधिक निगम के रुप में की गई थी। एनसीडीसी का उद्देश्य कृषि उत्पादन, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक वस्तुओं, पशुधन और सहकारी सिद्धांतों पर उत्पादित कुछ अन्य अधिसूचित वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात और आयात तथा इससे संबंधित या आकस्मिक मामलों के लिये कार्यक्रमों की योजना बनाना और उनका संवर्द्धन करना है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम[सम्पादन]

वर्तमान में वैश्विक महामारी COVID-19 के कारण विश्व के कई देशों में इमरजेंसी बेसिक इनकम (Emergency Basic Income) तथा यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income) को शुरू किया गया है। जापान ने प्रत्येक व्यक्ति को एक लाख येन देने का निर्णय किया है तो वहीं कनाडा ने प्रत्येक व्यक्ति को 2500 डॉलर प्रति माह देने का निर्णय किया है।

पृष्ठभूमि

प्रत्येक व्यक्ति को जीवन यापन के लिये न्यूनतम आय की गारंटी मिलनी चाहिये, यह कोई नया विचार नहीं है। ‘थॉमस मूर’ नाम के एक अमेरिकी क्रांतिकारी दार्शनिक ने हर किसी के लिये एक समान आय की मांग की थी। वह चाहते थे कि एक ऐसा ‘राष्ट्रीय कोष' हो जिसके माध्यम से हर वयस्क को एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाए। ‘बर्ट्रेंड रसेल’ ने 'सोशल क्रेडिट' आंदोलन चलाया जिसमें सबके लिये एक निश्चित आय की बात की गई थी। वर्ष 2016-17 के भारत के आर्थिक सर्वेक्षण में UBI को एक अध्याय के रूप में शामिल कर इसके विविध पक्षों पर चर्चा की गई है,साथ हीं इसे गरीबी कम करने के लिये एक संभावित विकल्प बताया गया था।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम देश के प्रत्येक नागरिक को दिया जाने वाला एक आवधिक (Periodic), बिना शर्त नकद हस्तांतरण है। इसके लिये व्यक्ति के सामाजिक या आर्थिक स्थिति पर विचार नहीं किया जाता है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम अवधारणा की दो मुख्य विशेषताएँ हैं-

  1. UBI अपनी प्रकृति में सार्वभौमिक (Universal) है, अर्थात् यह लक्षित (Targeted) नहीं है।
  2. यह बिना शर्त नकद ट्रांसफर है। अर्थात् किसी भी व्यक्ति को UBI हेतु पात्र होने के लिये बेरोज़गारी की स्थिति या सामाजिक-आर्थिक पहचान को साबित करने की आवश्यकता नहीं है।

UBI एक न्यूनतम आधारभूत आय की गारंटी है जो प्रत्येक नागरिक को बिना किसी न्यूनतम अर्हता के आजीविका के लिये हर माह सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके लिये व्यक्ति को केवल भारत का नागरिक होना ज़रूरी होगा।

इमरजेंसी बेसिक इनकम एक निर्धारित समय तक देश के प्रत्येक नागरिक को दिया जाने वाला बिना शर्त नकद हस्तांतरण है। इसके लिये व्यक्ति के सामाजिक या आर्थिक स्थिति पर विचार नहीं किया जाता है।

जब सरकार को इस बात का आभास हो जाता है कि देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की पर्याप्त माँग की जा रही है और लोगों को रोज़गार भी प्राप्त हो चुका है, तब सरकार हालात सामान्य होने के बाद इमरजेंसी बेसिक इनकम देना बंद कर देती है। वर्तमान में वैश्विक महामारी COVID-19 के कारण विश्व के कई देशों में इमरजेंसी बेसिक इनकम की अवधारणा को अपनाया गया है।

युवाओं से संबंधित विषय[सम्पादन]

  • प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वैश्विक साझेदारों द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day-WNTD) मनाया जाता है। वर्ष 2020 के लिये इस दिवस की थीम ‘युवाओं को तंबाकू आधारित उद्योगों की नकली वस्तुओं से बचाना और उन्हें तंबाकू और निकोटीन के उपयोग से रोकना’ (Protecting Youth From Industry Manipulation and Preventing Them From Tobacco and Nicotine Use) है।

इसका उद्देश्य तंबाकू के हानिकारक उपयोग एवं प्रभाव के विषय में जागरूकता फैलाना तथा किसी भी रूप में तंबाकू के उपयोग को हतोत्साहित करना है। तंबाकू गंभीर और अक्सर घातक स्थितियों जैसे कि हृदय रोग और फेफड़ों में कैंसर उत्पन्न करने वाले मुख्य कारणों में से एक है। तंबाकू के धुएँ में हज़ारों रसायन पाए जाते हैं, जिनमें कम-से-कम 70 रसायन कैंसर का कारण बनते हैं। तंबाकू के धुएँ में पाए जाने वाले कुछ रसायनों में निकोटीन, हाइड्रोजन साइनाइड, फॉर्मलडेहाइड, लेड/सीसा, आर्सेनिक, अमोनिया, रेडियोधर्मी तत्त्व जैसे- यूरेनियम, बेंजीन, नाइट्रोसेमिन (Nitrosamine), कार्बन मोनोऑक्साइड, पॉलीसाइक्लिक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन (Polycyclic aromatic hydrocarbons-PAHs) शामिल हैं।

  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह(National Road Safety Week)[11 जनवरी से 17, जनवरी 2020 तक]:- केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 31वाँ सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया।

इस वर्ष की थीम है:-‘युवाओं के माध्यम से परिवर्तन लाना’ (Bringing Change Through Youth)। उद्देश्य:-सभी हितधारकों को सड़क सुरक्षा के प्रति संयुक्त कार्रवाई में भाग लेने का अवसर देना है। प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह पूरे देश में मनाया जाता है ताकि सड़कों को सुरक्षित बनाये जाने पर ज़ोर दिया जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक रिपोर्ट में 5 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं की मौत के कारणों में सड़क दुर्घटना को एक प्रमुख कारण माना गया है।

भारत ने वर्ष 2015 में ब्रासीलिया सड़क सुरक्षा घोषणा पर हस्ताक्षर किये थे जिसके अंतर्गत वर्ष 2020 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।

उद्देश्य:-इसका मुख्य उद्देश्य देश का भविष्य माने जाने वाले युवाओं में तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देना है। देश के प्रति स्वामी विवेकानंद के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1984 में, इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था। राष्ट्रीय युवा दिवस का पहली बार वर्ष 1985 में मनाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है।

23वाँ राष्ट्रीय युवा महोत्सव-2020(23th National Youth Festival-2020)का आयोजन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय एवं उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप लखनऊ में किया गया।

इसका उद्देश्य एक ऐसा क्षेत्र विकसित करना है जहाँ युवा अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विशिष्टता का आदान-प्रदान कर सकते हैं। जिससे विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश का यह मिश्रण 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (Ek Bharat Shreshtha Bharat) के उद्देश्य को साकार कर सके।

केंद्र सरकार वर्ष 1995 से राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन कर रही है।

इस बार राष्ट्रीय युवा महोत्सव की थीम ‘फिट यूथ फिट इंडिया’ (FIT YOUTH FIT INDIA) है।

  • युवा वैज्ञानिक प्रयोगशाला(Young Scientists Laboratory)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की 5 युवा वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं (Young Scientists Laboratories) देश को समर्पित कीं। ये प्रयोगशालाएँ देश के पाँच शहरों (बंगलुरू, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद) से संचालित होंगी। प्रत्येक प्रयोगशाला भविष्य की रक्षा प्रणालियों जैसे- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology), संज्ञानात्मक प्रौद्योगिकी (Cognitive Technology), असममित प्रौद्योगिकी (Asymmetric Technology) और स्मार्ट सामग्री (Smart Materials) के विकास के लिये उन्नत प्रौद्योगिकी पर काम करेगी। बंगलुरू स्थित प्रयोगशाला में तेज़ी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अनुसंधान किया जाएगा। आईआईटी मुंबई स्थित प्रयोगशाला में क्वांटम प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान किया जाएगा। आईआईटी चेन्नई स्थित प्रयोगशाला में संज्ञानात्मक प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान किया जाएगा। जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता स्थित प्रयोगशाला में असममित प्रौद्योगिकी के नए क्षेत्रों जो युद्ध लड़ने के तरीके को बदल देंगे, में अनुसंधान किया जाएगा। हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला में स्मार्ट सामग्री एवं उसके अनुप्रयोग से संबंधित महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने अगस्त 2014 में आयोजित DRDO पुरस्कार समारोह के अवसर पर ऐसी प्रयोगशालाओं को शुरू करने की सिफारिश की थी। भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य में डीवाईएसएल (DRDO Young Scientists Laboratories-DYSL) अहम भूमिका निभाएंगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की पहले से ही 52 प्रयोगशालाएँ हैं जो सात व्यापक डोमेन में काम कर रही हैं।

मानवाधिकारों से संबंधित प्रश्न[सम्पादन]

  • 12 अक्टूबर, 2020 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अपनी स्थापना के 27 वर्ष पूरे किये। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत 12 अक्टूबर, 1993 को स्थापित यह एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है।
प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights- UDHR)की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है। UDHR एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को पेरिस में अपनाया गया था। मानव अधिकारों के इतिहास में यह बहुत महत्त्वपूर्ण घोषणा है, क्योंकि इसके द्वारा ही पहली बार मानव अधिकारों को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया था।

1991 में पेरिस में हुई संयुक्त राष्ट्र की बैठक ने सिद्धांतों का एक समूह (जिन्हें पेरिस सिद्धांतों के नाम से जाना जाता है) तैयार किया जो आगे चलकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की स्थापना और संचालन की नींव साबित हुए।

मानवाधिकार परिषद एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसका गठन 15 मार्च, 2006 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव द्वारा किया गया था। इसे पूर्व में रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के स्थान पर लाया गया था।

यह परिषद संयुक्त राष्ट्र महासभा में चुने गए 47 सदस्य देशों से मिलकर बनती है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है जिसमें एक अध्यक्ष सहित 7 सदस्य होते हैं।

यह आवश्यक है कि 7 सदस्यों में कम-से-कम 3 पदेन (Ex-officio) सदस्य हों। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी की सिफारिशों के आधार पर की जाती है। अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्षों या 70 वर्ष की उम्र, जो भी पहले हो, तक होता है। इन्हें केवल तभी हटाया जा सकता है जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की जाँच में उन पर दुराचार या असमर्थता के आरोप सिद्ध हो जाएं। इसके अतिरिक्त आयोग में पाँच विशिष्ट विभाग (विधि विभाग, जाँच विभाग, नीति अनुसंधान और कार्यक्रम विभाग, प्रशिक्षण विभाग और प्रशासन विभाग) भी होते हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के परामर्श पर की जाती है।