सामान्य अध्ययन २०१९/अर्थव्यवस्था

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सामान्य अध्ययन २०१९
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  • भारत का विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (Purchasing Manager's Index- PMI) सितंबर (51.4) से अक्तूबर (50.6) में गिरकर दो वर्ष के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

PMI विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का एक संकेतक है। यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है।

PMI में 0 से 100 तक की संख्या होती है। 50 से ऊपर का आँकड़ा व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार या विकास को दर्शाता है जबकि 50 से नीचे का आँकड़ा गिरावट को दर्शाता है।
  • सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तर पर सबसे अधिक बेरोज़गारी दर त्रिपुरा (27%) हरियाणा (23.4%) और हिमाचल प्रदेश (16.7) में आंकी गई।

भारत में शहरी बेरोज़गारी दर 8.9% और ग्रामीण बेरोज़गारी दर 8.3% अनुमानित की गयी है।

  • फ्राँस की संसद ने गाफा टैक्स (GAFA Tax) के रूप में दिग्गज ऑनलाइन कंपनिओं (गूगल, एप्पल, फेसबुक और अमेज़न) के संदर्भ में कर से संबंधित एक कानून को मंजूरी दी है।

गाफा टैक्स संबंधी कानून के तहत इन ऑनलाइन दिग्गजों द्वारा देश में की गई बिक्री पर 3% कर लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।

  • देश के सबसे बड़े जिंस एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (Multi Commodity Exchange)ने इस मंच पर कारोबार किये जाने वाले जिंस वायदा अनुबंधों के आधार पर नए सूचकांकों की शृंखला MCX इंडिया कमोडिटी इन्डिसीज़ (MCX iComdex) जारी की है।

एक आंतरिक अनुसंधान और विकास दल द्वारा विकसित यह सूचकांक सेबी और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज़ कमिशंस (International Organisation of Securities Commissions-IOSCO) के मानकों के अनुरूप है। नए सूचकांकों का यह नया सेट उस मौजूदा सेट का स्थान लेगा जिसे कुछ साल पहले थॉमसन रॉयटर्स के साथ मिलकर विकसित किया गया था। MCX iCOMDEX एक्सेस रिटर्न इंडेक्स हैं जो एक कंपोज़िट इंडेक्स,सेक्टोरल इंडेक्स और सिंगल कमोडिटी इंडेक्स से मिलकर बनते हैं। ये भौतिक वस्तुओं के बजाय आगामी निवेश सूची से उत्पन्न वास्तविक रिटर्न को दर्शाते हैं। अत्यधिक रिटर्न आधारित ट्रेडेबल इंडेक्स (Tradable Index) शृंखला होने के कारण MCX iComdex S&P GSCI और ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स (Bloomberg Commodity Index) जैसे वैश्विक बेंचमार्क सूचकांकों की रैंक में शामिल होता है,जिस पर कमोडिटी की कीमतों से रिटर्न ट्रैक करने वाले डेरिवेटिव प्रोडक्ट लॉन्च किये जा सकते हैं। MCX ने खंड और जिंस विशेष से संबंधित सूचकांक भी पेश किये हैं जिन्हें विनियामक द्वारा अनुमति दिये जाने पर कारोबार के लिये स्वीकृत किया जा सकता है। जब इन सूचकांकों पर उत्पादों (उदाहरण के लिये वायदा,एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या ETF आदि) की शुरुआत की जाएगी, तब सभी वर्ग के निवेशक काफी कम लागत वाले तरीके से जिंस/जिंस खंडों तक अपनी पहुँच बना सकेंगे।

  • केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा राजस्व आसूचना निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence- DRI) की विशिष्ट सेवा और राष्ट्र की रक्षा में गौरवशाली योगदान की स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया गया।

DRI का गठन 4 दिसंबर,1957 को किया गया था। यह वित्त मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अधीन तस्करी के खतरे से निपटने के लिये एक शीर्ष आसूचना निकाय है। वस्तु और सेवा कर के लागू होने के बाद वर्ष 2018 में केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Excise and Customs- CBEC) का नाम बदलकर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs- CBIC) कर दिया गया था। CBIC सीमा शुल्क,केंद्रीय उत्पाद शुल्क,CGST और IGST शुल्क की चोरी की रोकथाम के संबंध में नीति निर्माण के कार्यों से संबंधित है। DRI का कार्य नशीले पदार्थों की तस्करी और वन्यजीव तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील वस्तुओं के अवैध व्यापार एवं तस्करी का पता लगा कर उन पर अंकुश लगाना है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित वाणिज्यिक धोखाधड़ी और सीमा शुल्क की चोरी से निपटना है। DRI को राष्ट्रीय तस्करी विरोधी समन्वय केंद्र ( Anti-Smuggling National Coordination Centre- SCord) के लिये प्रमुख एजेंसी के रूप में भी नामित किया गया है।

  • राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (National Financial Reporting Authority) ने वर्ष 2017-18 के लिये IL & FS वित्तीय सेवा लिमिटेड की लेखापरीक्षा गुणवत्ता समीक्षा (AQR) रिपोर्ट जारी की।

वर्ष 2018 में अपने गठन के बाद से NFRA की यह पहली लेखापरीक्षा गुणवत्ता समीक्षा (AQR) रिपोर्ट है। यह ऑडिट कंपनी अधिनियम 2013 और NFRA नियम- 2018 की धारा 132 (2) (b) के अनुसार आयोजित किया गया था।

IL&FS एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है जिसे 30 साल पहले भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिये धन एकत्र करने हेतु स्थापित किया गया था।

यह कंपनी वर्ष 2018 में कर्ज चुकाने में डिफॉल्टर साबित हुई थी जिस कारण इससे जुड़ी अन्य कंपनियों और देश के वित्तीय सेक्टर पर बड़ा खतरा मंडराने लगा था। राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत वर्ष 2018 में की गई थी। इसकी स्थापना के कारण भारत अब ‘अंतर्राष्ट्रीय फोरम ऑफ इंडिपेंडेंट ऑडिट रेगुलेटर’ की सदस्यता के लिये पात्र है। अंतर्राष्ट्रीय फोरम ऑफ इंडिपेंडेंट ऑडिट रेगुलेटर की स्थापना 2006 में पेरिस में हुई थी। यह एक वैश्विक सदस्य संगठन है जिसमें 53 न्यायालयों के नियामक शामिल हैं। यह विश्व स्तर पर ऑडिटिंग में सुधार करके निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाने का काम करता है।

  • शराब निर्माता कंपनियों ने वैश्विक बाज़ारों से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (Extra Neutral Alchohol- ENA) के आयात करने और इसे लागत-प्रभावी बनाने के लिये नीति आयोग से आयात शुल्क में कमी करने की मांग की है।

विशेषताएँ:-

  1. एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल मादक पेय बनाने हेतु प्राथमिक कच्चा माल है।
  2. यह खाद्य-श्रेणी का एक रंगहीन अल्कोहल है जिसमें कोई अशुद्धि नहीं होती है।
  3. यह गंधहीन और स्वादहीन होता है तथा आमतौर पर इसमें 95% से अधिक अल्कोहल की मात्रा होती है।

इसे विभिन्न स्रोतों जैसे-शीरा और अनाज से प्राप्त किया जाता है। उपयोग:- अल्कोहल युक्त मादक पेय पदार्थों के उत्पादन में इसका उपयोग किया जाता है। इसके अलावा एक अच्छा विलायक होने के कारण इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों जैसे- इत्र, हेयर स्प्रे तथा साथ-ही-साथ फार्मास्यूटिकल उत्पादों जैसे- एंटीसेप्टिक्स, ड्रग्स, सिरप, मेडिकेटेड स्प्रे आदि के निर्माण में एक आवश्यक घटक के रूप में किया जाता है। भारत में ENA बाजार वर्ष 2018 में 2.9 बिलियन लीटर की मात्रा में था।

  • निर्विक योजना (Nirvik scheme)

केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिये ऋण लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने और ऋण उपलब्धता को बढ़ाने के उद्देश्य से निर्यात ऋण विकास योजना- निर्विक योजना (Niryat Rin Vikas Yojna- Nirvik scheme) की घोषणा की है।

इस योजना के तहत भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (Export Credit Guarantee Corporation of India- ECGC) 90% कवर प्रदान करेगा।
वर्तमान में ECGC द्वारा बैंकों को दिया जाने वाला औसत कवर 60% है। पिछले चार से पाँच वर्षों में ECGC ने विभिन्न बैंकों को दावों हेतु एक वर्ष में लगभग 1,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया है और बाद में धीरे-धीरे इस कवर को कम कर दिया।
  • भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम के बारे में
वर्ष 1957 में भारत सरकार के स्वामित्व में स्थापित निर्यात के लिये ऋण जोखिम बीमा (Credit Risk Insurance) और संबंधित सेवाएँ प्रदान करके निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
निर्यात ऋण का विस्तार करने वाले वाणिज्यिक बैंकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये इसने विभिन्न निर्यात ऋण बीमा योजनाएँ शुरू की हैं।
यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • ऋण मेला(Loan Mela)-वित्त मंत्रालय ने धीमी अर्थव्यवस्था को गति देने तथा बाज़ार में तरलता को बढ़ाने के उद्येश्य से देश के 400 जिलों में ऋण मेलों (Loan Mela) के आयोजन की घोषणा की है।तरलता के बावजूद बैंक मानक मौद्रिक नीति के उपायों का सख्ती से पालन नहीं कर रहे थे।
वित्त मंत्रालय का यह कदम बैंकों को मजबूर करेगा की वे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non-Banking Financial Company), जो कि देश में छोटे व्यवसायों को ऋण प्रदान करने के लिये प्रमुख स्रोत हैं, को आवश्यक धन की पूर्ति करें ताकि वह धन अंतिम ग्राहकों तक पहुँच सके।
ग्राहकों को ऋण वितरण हेतु बैंक तथा NBFC एक-दूसरे के साथ भागीदारी करेंगे।

ऋण मेले के तहत मुख्यतः (1) घर खरीदारों सहित खुदरा ग्राहकों (2) कृषि तथा किसानों और (3) सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों को ऋण प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

MSME के तनाव को कम करने तथा अपने कर्ज़ को डूबने से बचाने के लिये सभी सार्वजनिक बैंक अब 31 मार्च, 2020 तक MSME संबंधी तनावग्रस्त ऋणों को NPA या नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स के रूप में वर्गीकृत नहीं करेंगे।
  • NASSCOM, भारत सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार ILFS (Infrastructure Leasing & Financial Services Limited) के साथ इसके मुख्य प्रवर्तक हैं,साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार, मेघालय सरकार और विजाग नगर निगम इसके अन्य हितधारक हैं।
  • आर्थिक गतिशीलता एक निश्चित अवधि में लोगों की आर्थिक स्थिति में आने वाले बदलाव को प्रदर्शित करती है।

किसी व्यक्ति अथवा परिवार के जीवनकाल अथवा उसकी पीढ़ियों के बीच आय तथा सामाजिक प्रस्थिति में आने वाले सुधार को आर्थिक गतिशीलता के रूप में व्यक्त करते हैं। यह गतिशीलता पीढ़ियों के बीच या अंतर पीढ़ीगत अथवा व्यक्ति के जीवनकाल में हो सकती है। गतिशीलता निरपेक्ष अथवा सापेक्ष भी हो सकती है।

  • उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम,2016 के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु दिशा निर्देश जारी किये गए।
  1. वर्ष 2016 के अधिनियम के तहत जारी भारतीय मानक ब्यूरो ने (हॉलमार्किंग) विनियम 2018 जारी किया जिसमे सोने और चांदी के आभूषण और कलाकृतियों को हॉलमार्क के साथ चिह्नित करने के लिये अधिसूचित किया है।
  2. अनुपालन की स्वघोषणा (Self Declaration Of Conformity) सहित विनियम 2018 में कई अन्य प्रकार के मानकों को भी सरलीकृत किया गया है। जिससे निर्माताओं को मानकों का पालन करने और अनुपालन का प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी। अंततः इससे ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भी सुधार होगा।
  3. भारतीय मानक ब्यूरो की धारा 16 (1) के तहत अनुपालन मूल्यांकन प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही मूल्यांकन से संबंधित अन्य संस्थाओं के लिये भी दिशानिर्देश जारी किये है।
  4. मूल्यांकन अनुपालन ठीक से न होने की स्थिति में दंड के प्रावधानों को सख्त कर दिया गया है।
  5. भारतीय मानक ब्यूरो की मुख्य गतिविधियों जैसे मानक निर्माण,प्रमाणन,हॉलमार्किंग, प्रयोगशाला परीक्षण, उपभोक्ता मामले और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आदि की समीक्षा प्रक्रिया में सुधार किया जा किया जा है।
  6. इसके अलावा सरकार शिकायतों के आसान निवारण तंत्र, अनिवार्य प्रमाणीकरण और प्रचार के माध्यम से उपभोक्ता के विश्वास को बढ़ाने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
भारतीय मानक ब्यूरो वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन और गुणवत्ता प्रमाणन जैसी गतिविधियों के सामंजस्यपूर्ण विकास के लिये बी.आई.एस. अधिनियम 2016 के तहत स्थापित भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है।

इसके अतिरिक्त यह संस्था उक्त विषयों से जुड़े आकस्मिक या अतिरिक्त मामलों को नियंत्रित और व्यवस्थित करने के लिये भी उत्तरदायी है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

  • पाँच सदस्यीय स्टार्ट-अप सेल (Start-up Cell) का गठन
CBDT द्वारा गठित इस सेल का उद्देश्य सेल आयकर अधिनियम, 1961 के प्रशासन के संबंध में एंजेल कर (Angel Tax) तथा अन्य करों से संबंधित मुद्दों के साथ स्टार्टअप्स की शिकायतों का निवारण करना है।स्टार्टअप संस्थाएँ अपनी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिये इस सेल से संपर्क कर सकती हैं।

'स्टार्टअप सेल' की अध्यक्षता बोर्ड के सदस्य (आयकर और कंप्यूटरीकरण) करेंगे। स्टार्ट-अप सेल में शामिल हैं:

  1. सदस्य (आयकर और कंप्यूटरीकरण): अध्यक्ष
  2. संयुक्त सचिव (कर नीति और कानून- II): सदस्य
  3. आई-टी (ITA) के आयुक्त: सदस्य
  4. निदेशक (ITA-I): सदस्य सचिव
  5. अवर सचिव (आईटीए- I): सदस्य
  • फ्लोक्सिनॉसिनिहिलिपिलिफिकेशन'(Floccinaucinihilipilification)

मौद्रिक नीति समिति के सदस्य चेतन घाटे द्वारा इस 29 अक्षरों वाले शब्द का प्रयोग किया गया।जिसके बाद यह शब्द एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने इस शब्द को “the action or habit of estimating something as worthless” अर्थात् “किसी भी बात पर आलोचना करने की आदत, चाहे वो गलत हो या सही” के रूप में परिभाषित किया है।
चेतन घाटे ने इस शब्द का इस्तेमाल भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमानों की वैधता पर संदेह करने वाले कई अर्थशास्त्रियों के प्रयासों को चिह्नित करने के लिये किया।

इससे पहले इस शब्द का प्रयोग वर्ष 2018 में किया गया था। तब शशि थरूर द्वारा अपनी पुस्तक “THE PARADOXICAL PRIME MINISTER” के प्रचार के दौरान ट्विटर पर इस शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

भारत का चालू खाता घाटा वर्ष 2017 में GDP के 1.9% से बढ़कर दिसंबर 2018 में 2.6% पर आ गया। इसको बढ़ने का मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि थी। कच्चे तेल की कीमतों ने भारत की अर्थव्यवस्था की उत्पादकता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया जिसके परिणामस्वरूप भारत की विकासदर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
बैंकिंग क्षेत्र में दोहरी बैलेंस शीट समस्या ने भी कॉर्पोरेट क्षेत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया। कॉर्पोरेट क्षेत्र की गतिविधियों के प्रभावित होने के कारण भारत की GDP विकासदर कम हो गई।
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार के कारण भी वैश्विक स्तर पर विकास दर वर्ष 2017-18 में 3.8% के स्तर से घटकर 2018-19 में 3.6% हो गई। ट्रेड वार के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई।
  • आधार क्षरण एवं लाभ हस्तांतरण को रोकने के लिये भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समझौते की पुष्टि कर दी है।
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को अपने लाभ को देश से बाहर ले जाने और देश की सरकार को कर राजस्व से वंचित करने से रोकना है।
यह समझौता एक बहुपक्षीय उपकरण (Multilateral Instruments - MLI) है जिसके प्रयोग से BEPS को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
MLI का निर्माण सभी G20 देशों के एकजुट प्रयासों का परिणाम है,जो कहीं न कहीं BEPS से प्रभावीत होते हैं।
इस समझौते में भारत के अतिरिक्त 65 अन्य देशों का भी प्रतिनिधित्व है।
MLI यह सुनिश्चित करेगा की लाभ जिस देश में कमाया जा रहा है उसी देश में उसके कर का भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे भारत की राजस्व हानि को कम किया जा सकेगा।
आधार क्षरण एवं लाभ हस्तांतरण (Base Erosion and Profits Shifting - BEPS)
इसका तात्पर्य ऐसी टैक्स प्लानिंग रणनीतियों से है जिनके तहत टैक्स नियमों में अंतर और विसंगतियों का लाभ उठाकर कम्पनियाँ अपने लाभ को किसी ऐसे स्थान या क्षेत्र में हस्तांतरित कर देती हैं जहाँ या तो टैक्स नहीं होता और यदि होता भी है तो बहुत कम अथवा नाम-मात्र। इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ या तो नहीं होती हैं या मामूली आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं। ऐसे में संबंधित कंपनी द्वारा या तो कोई भी कॉरपोरेट टैक्स अदा नहीं किया जाता है अथवा मामूली कॉरपोरेट टैक्स का ही भुगतान किया जाता है।
जून 2017 में भारत ने पेरिस स्थित OECD के मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में आधार क्षरण एवं लाभ स्थानांतरण (BEPS) की रोकथाम हेतु कर संधि से संबंधित उपायों को लागू करने के लिये बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।

इस समझौते का उद्देश्य कृत्रिम ढंग से कर अदायगी से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना, संधि के दुरुपयोग की रोकथाम सुनिश्चित करना और विवाद निपटान की व्यसस्था को बेहतर करना है।

  • ‘पूंजीगत लाभ’-किसी ‘पूंजीगत परिसंपत्ति’ की बिक्री से प्राप्त लाभ।आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार इस लाभ को ‘आय’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसीलिये संपत्ति हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति को अपने द्वारा कमाए गए लाभ पर आय के रूप में कर देना होता है जिसे ‘पूंजीगत लाभ कर’ कहा जाता है।
  • पूंजीगत व्यय (जिसे आमतौर पर CapEx के रूप में जाना जाता है) को किसी कंपनी द्वारा संपत्ति, भवन, औद्योगिक संयंत्र, प्रौद्योगिकी या उपकरण जैसी भौतिक परिसंपत्तियों को हासिल करने, उनका उन्नयन करने तथा उन्हें बनाए रखने हेतु उपयोग में लाया जाता है।
  • RBI ने वित्तीय वर्ष2019-20 के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड (SGB)योजना की तारीखें,नियम और शर्ते जारी की।
यह योजना निवेशकों के लिए इस साल चार सीरीज़ में पेश की जाएगी।जून 2019 से सितंबर 2019 तक हर महीने जारी किए जाएंगे।
देश में सोने की मांग में कमी लाने तथा घरेलू बचत के लिए सोना खरीदने वाले लोगों को वित्तीय बचत में शामिल करने के उद्देश्य से प्रारंभ योजना।
इस योजना से सोने के आयात पर सही तरीके से निगरानी रखने में आसानी होगी।यह योजना पूर्णतः पारदर्शी है तथा इसमें निवेश करने वालों का सोना पूरी तरह सुरक्षित रहेगा,साथ ही ब्याज के रूप में अतिरिक्त आय भी होगी। इस योजना को भारत सरकार ने 2015 के बजट में पेश किया था।
  • गूगल, अमेज़ॅन और एंटीट्रस्ट स्क्रूटनी
गूगल और अमेज़ॅन उपभोक्ता गोपनीयता,श्रम की स्थिति और सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित करने तथा साख विरोधी कानून के उल्लंघन के आरोपों के तहत जाँच के दायरे में हैं।
अमेरिकी सरकार की एंटी ट्रस्ट प्रवर्तन एजेंसियाँ, संघीय व्यापार आयोग (Trade Commission) और न्याय विभाग क्रमशः अमेज़ॅन और गूगल के खिलाफ एंटीट्रस्ट जाँच कर रहे हैं।
वर्ष 2018 में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) ने भी अनुचित व्यापार व्यवहारों और भारत में साख विरोधी आचरण का उल्लंघन करने के आरोप में गूगल पर 1 करोड़ 36 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।
अमेज़ॅन के मार्केटप्लेस प्लेटफ़ॉर्म पर एकतरफा अनुबंध,विज्ञापन नीतियों और क्रूर प्रतिस्पर्द्धात्मक वातावरण का आरोप लगाया जाता है।अमेज़ॅन की निरंतर वृद्धि भी इसे क्रेता एकाधिकार जैसी शक्ति प्रदान कर सकती है।

गूगल पर कुछ विज्ञापनों और ऑनलाइन सर्च के प्रति पक्षपात करते हुए ऑनलाइन सर्च मार्केट के प्रभुत्व का दुरुपयोग करने का आरोप है।वर्ष 2017 में यूरोपीय नियामकों ने भी विज्ञापनों से संबंधित एक मामले में गूगल पर 1.7 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था। साख विरोधी कानून (Antitrust Law) को प्रतिस्पर्द्धा कानूनों के रूप में भी जाना जाता है,जिसका उद्देश्य व्यापार और वाणिज्य को अनुचित प्रतिबंधों,एकाधिकार और मूल्य निर्धारण से सुरक्षित रखना है। साख विरोधी कानून यह सुनिश्चित करते हैं कि खुले बाज़ार की अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा मौजूद है। प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम,2002 भारत का साख विरोधी कानूनजिसने एकाधिकार और अवरोधक व्यापार व्यवहार अधिनियम,1969 (Monopolistic and Restrictive Trade Practices Act of 1969) को निरस्त किया एवं प्रतिस्पर्द्धा संरक्षण की आधुनिक संरचना की व्यवस्था की। प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम,2002 3 प्रतिस्पर्द्धा विरोधी समझौतों का निषेध प्रभुत्व के दुरुपयोग की रोकथाम संयोजनों (विलय और अधिग्रहण) का विनियमन

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने किसी ट्रस्ट या संस्थान के लिये ऑडिट नियमों से संबंधित आयकर नियमों, 1962 के नियम 17B के संशोधन के लिये एक मसौदा अधिसूचना जारी की। नियम 17B और फॉर्म संख्या 10B को आयकर नियम, 1962 (आयकर (द्वितीय संशोधन) नियम, 1973) में शामिल किया गया। नियम 17B के अनुसार किसी भी ट्रस्ट अथवा संस्थान के लेखा के अंकेक्षण की रिपोर्ट (Report of Audit) फॉर्म संख्या 10B में होगी। फॉर्म संख्या 10B के अंतर्गत ऑडिट रिपोर्ट के अलावा अनुलग्नक के रूप में ‘ब्योरेवार रिपोर्टों का विवरण’ (Statement of particulars) भी उपलब्ध कराया जाता है।

  • फ्रीमियम मॉडल (Freemium Model)

‘फ्रीमियम’, फ्री और प्रीमियम शब्दों का एक संयोजन है, जिसका उपयोग व्यवसाय मॉडल का वर्णन करने के लिये किया जाता है। इसके अंतर्गत मुफ्त और प्रीमियम दोनों तरह की सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

इस व्यापार मॉडल के तहत उपयोगकर्त्ताओं को सरल और बुनियादी सेवाएँ मुफ्त में तथा अधिक उन्नत या अतिरिक्त सुविधा शुल्क लेकर प्रदान की जाती हैं।
  • ई-वे बिल सिस्टम में वित्त मंत्रालय द्वारा हाल में किये गए बदलाव के पश्चात पिन कोड के आधार पर दूरी की स्वतः गणना और एक ही इनवॉइस पर कई बिलों को रोकना भी शामिल है।
जीएसटी की चोरी करने वालों पर नकेल कसने के लिये ऐसा किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त दो महीनों तक जीएसटी रिटर्न फाइल न करने वालों को माल के परिवहन हेतु ई-वे बिल जनरेट करने से रोक दिया जाएगा। ई-वे बिल, जी.एस.टी. के तहत एक बिल प्रणाली है जिसे वस्तुओं के हस्तांतरण की स्थिति में जारी किया जाता है। इसमें ट्रांसपोर्ट की जाने वाली वस्तुओं का विवरण तथा उस पर लगने वाले जी.एस.टी. की पूरी जानकारी होती है। नियम के अनुसार ₹50000 से अधिक मूल्य की वस्तु, जिसका हस्तांतरण 10 किलोमीटर से अधिक दूरी तक किया जाना है,पर इसे आरोपित करना आवश्यक होगा। जनता की सुविधा के लिये लिक्विड पेट्रोलियम गैस, खाद्य वस्तुओं, गहने इत्यादि 150 उत्पादों को इससे मुक्त रखा गया है।

  • दिल्ली भारत के तकनीकी सक्षम गिग इकॉनमी (Gig Economy) के शीर्ष गंतव्य के रूप में उभर कर सामने आई है।
स्टार्टअप राजधानी बंगलूरु को दूसरे स्थान पर छोड़ते हुए दिल्ली ने यह स्थान हासिल की।मानव संसाधन फर्म टीमलीज के आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली ने पिछले छह महीनों (31 मार्च तक) में अपनी विशाल अर्थव्यवस्था में 560,600 लोगों को शामिल किया है।यह आँकड़ा पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 298,000 (88% की छलांग) था।वहीं बंगलूरु की गिग इकॉनमी में शामिल होने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या पिछले छह महीनों में 29% की मामूली बढ़त के साथ 194,400 से 252,300 हो गई है।
रोज़गार की तलाश में बढ़ता प्रवास और गिग इकॉनमी को बढ़ावा देने वाली कंपनियों द्वारा प्रशिक्षण देने में तत्परता ने इस क्षेत्र को काफी हद तक बढ़ावा दिया है।
एक अनुमान के मुताबिक, भारत में नए रोज़गारों (ब्लू-कॉलर और व्हाइट-कॉलर दोनों) का 56% हिस्सा गीग इकॉनमी कंपनियों द्वारा सृजित हो रहा है।
गिग इकॉनमी में फ्रीलान्स कार्य और एक निश्चित अवधि के लिये प्रोजेक्ट आधारित रोज़गार शामिल हैं।:गिग इकॉनमी में किसी व्यक्ति की सफलता उसकी विशिष्ट निपुणता पर निर्भर होती है। असाधारण प्रतिभा, गहरा अनुभव, विशेषज्ञ ज्ञान या प्रचलित कौशल प्राप्त श्रमबल ही गिग इकॉनमी में कार्य कर सकता है।
आज कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी कर सकता है या किसी प्राइवेट कंपनी का मुलाज़िम बन सकता है या फिर किसी मल्टीनेशनल कंपनी में रोज़गार ढूंढ सकता है, लेकिन गिग इकॉनमी एक ऐसी व्यवस्था है। जहाँ कोई भी व्यक्ति मनमाफिक काम कर सकता है।
गिग इकॉनमी में कंपनी द्वारा तय समय में प्रोजेक्ट पूरा करने के एवज़ में भुगतान किया जाता है, इसके अतिरिक्त किसी भी बात से कंपनी का कोई मतलब नहीं होता।

MCA-21 (Ministry of Company Affairs-21)

कंपनी मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित एक ‘पाथ-ब्रेकिंग प्रोजेक्ट’ है।
इसके तीसरे चरण की शुरुआत के दौरान कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence- AI) की शुरुआत करेगा।
भारतीय उद्योग परिसंघ (Confederation of Indian Industry- CII) के वार्षिक सत्र 2019 का आयोजन राजधानी दिल्ली में किया गया।
इस अवसर पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम के अंतर्गत MCA-21 परियोजना में विभिन्न दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने की अनुमति दी है।
MCA-21 पोर्टल सभी हितधारकों के लिये सूचना के प्रसार हेतु इलेक्ट्रॉनिक आधार प्रदान करता है, जिसमें नियामक, कॉर्पोरेट और निवेशक शामिल हैं।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ द्वारा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की ई-गवर्नेंस पहल के पहले चरण को लागू किया गया था।
दूसरा चरण इंफोसिस द्वारा जनवरी 2013 से जुलाई 2021 की अवधि के लिये लागू किया गया है।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्मार्ट गवर्नमेंट (NISG) ने मंत्रालय को परियोजना की अवधारणा और डिज़ाइन, बोली प्रक्रिया प्रबंधन, परियोजना कार्यान्वयन एवं समायोजन में सहायता की है। वर्तमान में NISG परियोजना के लिये कार्यक्रम प्रबंधन इकाई की स्थापना के माध्यम से परियोजना के संचालन और रखरखाव में MCA की सहायता कर रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्मार्ट गवर्नमेंट (NISG):-2002 में स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी तथा सॉफ्टवेयर के विकास के लिये राष्ट्रीय कार्यबल की सिफारिशों के तहत बनाई गई नॉट-फॉर-प्रॉफ़िट कंपनी सेटअप है।
इसमें 51% इक्विटी निजी क्षेत्र और 49% सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा योगदान दिया गया है।
  • संशोधित क्रेडिट अनुपात (Modified Credit Ratio- MCR)रेटिंग की गतिशीलता मापने में मदद करता है।
इसे 'उन्नयन और पुन: पुष्टि' से ‘अवनयन और पुन: पुष्टि’ के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
एमसीआर में वृद्धि का तात्पर्य स्थिर और रेटेड संस्थाओं की क्रेडिट गुणवत्ता में सुधार है।
MCR में कमी का अर्थ है रेटेड संस्थाओं की क्रेडिट गुणवत्ता में गिरावट।
बिक्री में वृद्धि, लाभ मार्जिन में वृद्धि, अनुकूल लिक्विडिटी स्थिति के कारण संस्थाओं को अपग्रेड (उन्नयन) किया जाता है।
लिक्विडिटी की कमी, पूंजी संरचना में गिरावट और संचालन की मात्रा में गिरावट के कारण संस्थाओं को डाउनग्रेड (अवनयन) किया जाता है।
  • अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते Advance Pricing Agreements (APAs)
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा दी गई जानकारी में शामिल 18 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (APAs) में 2 द्विपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते शामिल हैं।
इस हस्ताक्षर के साथ,वर्ष 2018-19 में CBDT द्वारा दर्ज किये गए APAs की कुल संख्या 52 है, जिसमें 11 द्विपक्षीय APAs शामिल हैं।
CBDT द्वारा दर्ज किये गए APAs की कुल संख्या अब 271 हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया,नीदरलैंड्स और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय APA पर हस्ताक्षर किये गए, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों एवं उप-क्षेत्रों से संबंधित है।
  • व्यापार प्राप्य बट्टाकरण/छूट प्रणाली (Trade Receivable Discounting System-TReDS)

MSME को कॉर्पोरेट से मिलने वाले प्राप्यों के भुगतान के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 (Payment and Settlement Systems Act 2007) के तहत स्थापित एक नियामकिय ढाँचा है।[१]

इसका मुख्य उद्देश्य MSMEs की महत्त्वपूर्ण ज़रूरतों जैसे-तत्काल प्राप्यों का नकदीकरण और ऋण जोखिम को समाप्त करने वाले दोहरे मुद्दों का समाधान करना है।
यह एक नीलामी तंत्र द्वारा सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित बड़े कॉर्पोरेटों के समक्ष MSMEs के विक्रेताओं के विनिमय बिलों के बट्टाकरण (Discounting)(bills discounting) में सहायता प्रदान करता है। इससे प्रतिस्पर्द्धात्मक बाज़ार दरों पर व्यापार प्राप्यों की त्वरित वसूली सुनिश्चित होती है।[२]
TReDS भारत में विक्रेताओं के लिये फैक्टरिंग विदाउट रीकोर्स (Factoring Without Recourse) शुरू करने का एक प्रयास है, इससे MSMEs को प्राप्यों की त्वरित वसूली के साथ-साथ योग्य मूल्य का पता लगाने में सहायता होगी।

TReDS प्लेटफॉर्म में हिस्सा लेने हेतु पात्र निकाय :

TReDS, MSMEs के बीजक/बिलों को अपलोड, स्वीकार, बट्टाकरण, व्यापार और निपटान करने हेतु विभिन्न प्रतिभागियों को एक जगह पर लाने हेतु एम मंच/प्लेटफॉर्मर प्रदान करता है।
  • सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम विकास, अधिनियम 2006 (MSMED अधिनियम, 2006) के प्रावधानों का अनुपालन।
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ (Credit Rating Agencies)
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति ने क्रेडिट रेटिंग की गुणवत्ता से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के तरीकों पर चर्चा की।
भारत में सेबी (SEBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज़) विनियम, 1999 के तहत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को परिचालित करता है।
वर्त्तमान में 7 क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ CRISIL, ICRA, CARE, INFOMERICS, BRICKWORK, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च और ACUITE रैंकिंग एंड रिसर्च लिमिटेड सेबी के अंतर्गत पंजीकृत हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है। सेबी के मुख्य कार्य हैं-

  1. प्रतिभूतियों (Securities) में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना।
  2. प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market) के विकास का उन्नयन तथा उसे विनियमित करना और उससे संबंधित या उसके अनुषांगिक विषयों का प्रावधान करना।
  • वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। इसके पास 11वाँ सबसे बड़ा सोने का भंडार है, वर्तमान में इसकी हिस्सेदारी 607 टन है।

इस रिपोर्ट में अमेरिका 8,133.5 टन स्वर्ण भंडार के साथ सबसे ऊपर है, उसके बाद जर्मनी 3,369.7 टन है।

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के माध्यम से शुरू। PLFS का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में श्रम बाजार के विभिन्न सांख्यिकीय संकेतकों के तिमाही बदलावों को मापने के साथ-साथ ग्रामीण एवं शहरी दोनों ही क्षेत्रों में श्रम बल संबंधी विभिन्न संकेतकों के वार्षिक अनुमानों को सृजित करना है। PLFS आँकड़ों के अनुसार, 55% ग्रामीण पुरुष और 73.2% ग्रामीण महिलाएँ कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं।

  • बाह्य वाणिज्यिक उधार एक गैर-निवासी ऋणदाता से न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि के लिये भारतीय इकाई द्वारा प्राप्त किया गया ऋण है। इनमें से अधिकतर ऋण विदेशी वाणिज्यिक बैंक खरीदारों के क्रेडिट, आपूर्तिकर्त्ताओं के क्रेडिट, फ्लोटिंग रेट नोट्स और फिक्स्ड रेट बॉन्ड इत्यादि जैसे सुरक्षित उपकरणों द्वारा प्रदान किये जाते हैं। ECB की आय का उपयोग अचल संपत्ति की गतिविधियों, पूंजी बाज़ार में निवेश, इक्विटी निवेश, कार्यशील पूंजी के उद्देश्यों (विदेशी इक्विटी धारक को छोड़कर) और रुपए ऋण के पुनर्भुगतान (विदेशी इक्विटी धारक को छोड़कर) के लिये नहीं किया जा सकता है।
  • पूंजी संरक्षण बफर (capital conservation buffer-CCB)

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 31 मार्च, 2020 तक के लिये पूंजी संरक्षण बफर (Capital Conservation Buffer-CCB) की अंतिम किश्त के कार्यान्वयन को स्थगित कर दिया है।

पूंजी संरक्षण बफर (capital conservation buffer-CCB) वह पूंजी बफर है, जिसे बैंकों को आम दिनों में जमा करना पड़ता है ताकि आर्थिक संकट के दौरान नुकसान की भरपाई हेतु इसका इस्तेमाल किया जा सके।
यह आवश्यक न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं (Minimum Capital Requirements) के उल्लंघन से बचने हेतु डिज़ाइन किये गए सरल पूंजी संरक्षण नियमों (Capital Conservation Rules) पर आधारित है।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा जापानी सरकार के साथ साझेदारी का उद्देश्य भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के आधार को विस्तारित करना तथा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेडिंग हब’ के रूप में विकसित करना है।
  • रेलटेल एक 'मिनी रत्न' है, जो रेल मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।

देश भर के 746 रेलवे स्टेशनों पर रेल वायर वाईफाई दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेज़ सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्कों में से एक के रूप में उभरकर सामने आया है।

  • एंजेल टैक्स’ (Angel Tax) स्टार्टअप उद्दमियों द्वारा उचित मूल्य से अधिक किमत पर शेयर जारि करने से प्राप्त आय पर लगने वाला टैक्स।
  • वस्तु एवं सेवा कर परिषद

वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को सिफारिश करने हेतु एक संवैधानिक निकाय है।

इसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री द्वारा की जाती है,अन्य सदस्यों में राज्य मंत्री या वित्त मंत्री तथा सभी राज्यों के वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री शामिल हैं।

संविधान के अनुच्छेद 279A (1) के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा GST परिषद का गठन किया गया था।

  • रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP),2016 रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन,विकास एवं रक्षा प्लेटफार्मों और प्रणालियों के निर्माण को बढ़ावा देकर मेक-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।इसके माध्यम से सरकार ने "भारतीय खरीद (IDDM)" नामक एक नई खरीद क्लास की शुरूआत की,IDDM का तात्पर्य स्वदेशी डिज़ाइन के विकास और निर्माण से है। DPP के प्रभावी होने के बाद सभी अधिग्रहणों में यह पहली प्राथमिकता होगी।
  • राष्ट्रीय डेटा रिपोज़िटरी (NDR) सरकार द्वारा प्रायोजित अन्वेषण और उत्पादन डेटा बैंक है जिसमें भविष्य की खोज और विकास के लिए इसके व्यवस्थित उपयोग को सक्षम करने के लिए डेटा के संरक्षण, रखरखाव और प्रसार के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और बुनियादी ढाँचा है। यह 28 जुलाई 2017 से चालू है। एनडीआर बिल्ड, पॉप्युलेट और ऑपरेट आधार पर टर्नकी प्रोजेक्ट है। नीचे NDR में संग्रहित किया जा रहा डेटा नीचे दिया गया है।
भारतीय अवसादी घाटियों के अन्वेषण और उत्पादन के आँकड़ों का संग्रह है।हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) की देख-रेख में(पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय)[३]

राष्ट्रीय अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (NELP) की जगह हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (HELP) लॉन्च की गई। HELP के चार मुख्य पहलू इस प्रकार हैं: हाइड्रोकार्बन के सभी रूपों की खोज और उत्पादन हेतु एकसमान लाइसेंस। यह एक मुक्त क्षेत्रफल नीति है। राजस्व साझाकरण मॉडल का बंदोबस्त करना आसान है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादों हेतु विपणन एवं मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता

  • भारतीय अर्थव्यवस्था को मिज़री इंडेक्स (Misery Index) के आधार पर मापने की मांग
अर्थशास्त्री आर्थर ओकुन द्वारा विकसित यह इंडेक्स 1970 के शुरुआती दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका की आर्थिक स्थिति को मापने के कारण लोकप्रिय हुआ।
यह इंडेक्स किसी देश में मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी की दर को जोड़कर निकाला जाता है।
इस सूचकांक का स्कोर जितना अधिक होगा देश के नागरिकों की स्थिति उतनी ही दयनीय होगी।
हाल के दिनों में इस सूचकांक में व्यापक रूप से अन्य आर्थिक संकेतकों जैसे बैंक ऋण दरों को शामिल किया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति को मापने के लिये मिज़री इंडेक्स लोकप्रिय हो रहा है।
मूल मिज़री इंडेक्स का एक रूप ब्लूमबर्ग मिज़री इंडेक्स (Bloomberg Misery Index) है जिसे ऑनलाइन पब्लिकेशन (Online Publication) द्वारा विकसित किया गया है

IMF द्वारा पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज प्रदान[सम्पादन]

आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिये।

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान चार्वाक दर्शन के यावज्जीवेत सुखं जीवेद ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः सिद्धांत का प्रबल समर्थक है।
पाकिस्तान पिछले 30 वर्षों में से 22 वर्षों तक एक दर्जन अलग-अलग IMF बेलआउट पैकेज के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था की गाड़ी खींचता रहा है।

IMF बेलआउट पैकेज की प्रभावशीलता इस संदर्भ में दो परस्पर विरोधी या विपरीत मामलों का दृष्टांत लिया जा सकता है:

1994 में लातिनी अमेरिका का टकीला (Tequila) संकट 1997 का पूर्वी एशिया संकट

  • टकीला (Tequila) संकट:-मैक्सिको की मुद्रा पेसो के अचानक अवमूल्यन के वज़ह से उत्पन्न हुई स्थिति, जिसने इस क्षेत्र की दक्षिणी कोन और ब्राजील की मुद्राओं को भी प्रभावित किया और उनमें भी गिरावट दर्ज़ की गई।(Southern Cone = दक्षिण अमेरिका के सुदूरवर्ती दक्षिणी इलाके, जिनमें अधिकांश मकर रेखा के दक्षिण में स्थित)
बेलगाम मुद्रास्फीति,पूंजी पर लगने वाले सट्टे की वज़ह से होने वाली परेशानी और विकास दर में गिरावट को रोकने के लिये IMF ने सहायता उपायों के तहत इन देशों को कई बेलआउट पैकेज दिये।
बेलआउट पैकेज देने के बाद कुछ समय तक तो अस्थायी सुधार दिखाई दिया, लेकिन इसके बाद इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने आर्थिक संकटों में डूबना-उतराना जारी रखा।
ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि अधिकांश देशों में सैन्य शासक थे, जो लोकलुभावन आर्थिक प्रतिबद्धताओं और नीतियों के आधार पर चुनकर आए थे।
लोकलुभावन आर्थिक प्रतिबद्धता और नीति=ऐसी नीतियाँ जो राजनीतिक रूप से तो बेहतर होती हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था के नज़रिए से ख़राब।
स्पष्ट रूप से ये देश खराब राजकोषीय संरचना और आर्थिक कुप्रबंधन से ग्रस्त थे और इसी वज़ह से IMF के बेलआउट पैकेज भी विफल हो गए।

1997 का पूर्वी एशिया संकट थाईलैंड की मुद्रा थाई बात (Thai Baht) के अवमूल्यन के बाद यह संकट उत्पन्न हुआ।

अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित भार,शेयर बाजार का ढह जाना तथा बाहरी घाटे इस संकट के प्रमुख कारण।
इसके अलावा यूरोपीय संघ, जापान आदि विकसित देशों में वैश्विक निर्यात मांग में गिरावट ने दक्षिण-पूर्व एशिया से होने वाले निर्यात को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
इन सभी वज़हों ने बाज़ार की धारणा को उलट दिया तथा बड़े पैमाने पर पूंजी बाहर चली गई और तरलता के अभाव में बैंकों के सामने नकदी का संकट उत्पन्न हो गया।
ऐसे में आर्थिक सुधारों की कुछ पूर्व-निर्धारित शर्तों के साथ IMF दक्षिण-पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिये सामने आया।
इसके परिणामस्वरूप इन देशों की अर्थव्यवस्था ने तेज़ी से विकास किया और कुछ ही वर्षों में पहले जैसी स्थिति प्राप्त कर ली।

ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि पूर्वी एशियाई देशों का संकट दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तर्कहीन परिकल्पनाओं की वज़ह से अधिक था तथा वृहद् आर्थिक प्रबंधन में प्रमुख मूलभूत दोषों का इसमें कोई योगदान नहीं था।

संदर्भ[सम्पादन]

  1. https://www.rbi.org.in/scripts/bs_viewcontent.aspx?id=2904
  2. https://www.business-standard.com/article/markets/treds-how-the-system-meant-to-help-msmes-get-capital-works-117041300418_1.html
  3. https://www.ndrdgh.gov.in/NDR/?page_id=6