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OSIRIS-Rex द ओरिजिंस स्पेक्ट्रल इंटरप्रेटेशन रिसोर्स आइडेंटिफिकेशन सिक्योरिटी - रेगोलिथ एक्सप्लोर्र (Origins Spectral Interpretation Resource Identification Security - Regolith Explorer) नामक अंतरिक्ष यान को वर्ष 2016 में बेन्नु (Bennu) नामक पृथ्वी के क्षुद्रग्रह के लिये लॉन्च किया गया था। शोध कार्य हेतु यह पृथ्वी पर नमूना वापस लेकर लौटा। यह मिशन यह पता करने में मदद करेगा कि ग्रहों का गठन और जीवन कैसे शुरू हुआ, साथ ही पृथ्वी पर प्रभाव डालने वाले क्षुद्रग्रहों के संबंध में हमारी समझ में भी सुधार करने में सहायक सिद्ध होगा। क्षुद्रग्रह ग्रहों के अवशेष होते हैं। बेन्नु जैसे क्षुद्रग्रह में प्राकृतिक संसाधन जैसे- जल, ऑर्गेनिक्स और धातुएँ उपस्थित हैं। भविष्य अंतरिक्ष अन्वेषण और आर्थिक विकास हेतु इन सामग्रियों के लिये क्षुद्रग्रहों पर विश्वास किया जा सकता है। हमारे सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। वे ग्रह जो अन्य तारों के चारों ओर चक्कर लगाते हैं उन्हें एक्सोप्लेनेट कहा जाता है। बेन्नू पृथ्वी के निकट स्थित एक क्षुद्रग्रह है।

  • नासा का अपॉरच्यूनिटी रोवर मिशन मंगलग्रह के प्रारंभिक विकास को समझने, ग्रह एवं ग्रहों की प्रणाली के गठन एव प्रारंभिक रूप को समझने के लिये विकसित किया गया एक प्रौद्योगिकी चालित मिशन है। इसने हाल ही में अपनी सेवा के 15 साल पूरे किये हैं।

5 नवंबर 2013 को PSLV-C 25 द्वारा इसरो द्वारा लॉन्च किया गया पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन मार्स ऑर्बिटर मिशन (Mars Orbiter Mission-MOM) जिसने अपने पहले प्रयास में 24 सितंबर, 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया गया। अगस्त 2018 में ESA’s (Earth Explorer Aeolus satellite) को ध्रुवीय कक्षा में लॉन्च किया गया । परिवर्तनकारी आधुनिक लेज़र तकनीक का उपयोग करते हुए एओलस (Aeolus) दुनिया भर में हवाओं को मापता है और हमारे वायुमंडल के कामकाज को बेहतर ढंग से समझने के लिये हमारी खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है

  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (जिसे James Webb Space Telescope-JWST या वेब भी कहा जाता है), 6.5 मीटर प्राथमिक दर्पण युक्त एक बड़ा अवरक्त (Infrared) टेलीस्कोप है जिसे 2021 में फ्रेंच गुयाना से एरियन 5 रॉकेट की सहायता से लॉन्च किया जाएगा।

यह हमारे ब्रह्मांड के इतिहास के प्रत्येक चरण का अध्ययन करेगा, साथ ही बिग-बैंग के बाद पहली चमकदार उद्वीप्ति के विस्तार, सौरमंडल के गठन, पृथ्वी जैसे ग्रहों और हमारे अपने सौर मंडल के विकास का विस्तृत अध्ययन करेगा। Webb के लिये नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के बीच एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता किया गया है।

भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों की बात करें तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हालिया वर्षों में ऐसी कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी कहे जाने वाले अमेरिका और रूस जैसे देशों को भी चौंकाया है। 22 जनवरी 2020 को बंगलूरू में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (IAA) और एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) के पहले सम्मेलन में इसरो द्वारा मानवयुक्त गगनयान मिशन हेतु एक अर्द्ध-मानवीय महिला रोबोट ‘व्योममित्र’ को लॉन्च किया। 27 मार्च 2019 को भारत ने मिशन शक्ति को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए एंटी-सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) से तीन मिनट में एक लाइव भारतीय सैटेलाइट को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। 11 अप्रैल 2018 को इसरो ने नेवीगेशन सैटेलाइट IRNSS लॉन्च किया। यह स्वदेशी तकनीक से निर्मित नेवीगेशन सैटेलाइट है। इसके साथ ही भारत के पास अब अमेरिका के जीपीएस सिस्टम की तरह अपना नेवीगेशन सिस्टम है। 5 जून 2017 को इसरो ने देश का सबसे भारी रॉकेट GSLV MK 3 लॉन्च किया। यह अपने साथ 3,136 किग्रा का सैटेलाइट जीसैट-19 साथ लेकर गया। इससे पहले 2,300 किग्रा से भारी सैटेलाइटों के प्रक्षेपण के लिये विदेशी प्रक्षेपकों पर निर्भर रहना पड़ता था। 14 फरवरी 2017 को इसरो ने पीएसएलवी के जरिये एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च कर विश्व में कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले इसरो ने वर्ष 2016 में एकसाथ 20 सैटेलाइट प्रक्षेपित किया था जबकि विश्व में सबसे अधिक रूस ने वर्ष 2014 में 37 सैटेलाइट लॉन्च कर रिकार्ड बनाया था। इस अभियान में भेजे गए 104 उपग्रहों में से तीन भारत के थे और शेष 101 उपग्रह इज़राइल, कज़ाखस्तान, नीदरलैंड, स्विटज़रलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के थे। 25 सितंबर 2014 को भारत ने मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक मंगलयान स्थापित किया। इसकी उपलब्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ऐसा पहला देश था, जिसने अपने पहले ही प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की। इसके अलावा यह अभियान इतना सस्ता था कि अंतरिक्ष मिशन की पृष्ठभूमि पर बनी एक फिल्म ग्रैविटी (Graviti) का बजट भी भारतीय मिशन से महँगा था। भारतीय मंगलयान मिशन का बजट करीब 460 करोड़ रुपये (6.70 करोड़ डॉलर) था जबकि वर्ष 2013 में आयी ग्रैविटी फिल्म करीब 690 करोड़ रुपये (10 करोड़ डॉलर) में बनी थी। 22 अक्टूबर 2008 को इसरो ने देश का पहला चंद्र मिशन चंद्रयान-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया था।