सिविल सेवा मुख्य परीक्षा विषयवार अध्ययन/अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और मंच-उनकी संरचना,अधिदेश

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अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (The International Union for Conservation of Nature) दुनिया की प्राकृतिक स्थिति को संरक्षित रखने के लिये एक वैश्विक प्राधिकरण है जिसकी स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी। IUCN सरकारों तथा नागरिकों दोनों से मिलकर बना एक सदस्यता संघ है। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में स्थित है। IUCN द्वारा जारी की जाने वाली लाल सूची दुनिया की सबसे व्यापक सूची है, जिसमें पौधों और जानवरों की प्रजातियों की वैश्विक संरक्षण की स्थिति को दर्शाया जाता है। IUCN प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिये कुछ विशेष मापदंडों का उपयोग करता है। ये मानदंड दुनिया की अधिकांश प्रजातियों के लिये प्रासंगिक हैं। इसे जैविक विविधता की स्थिति जानने के लिये सबसे उत्तम स्रोत माना जाता है।


एशिया और प्रशांत महासागर के लिये संयुक्त राष्ट्र का आर्थिक और सामाजिक आयोग(UNESCAP) एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र की एक क्षेत्रीय विकास शाखा है। यह 53 सदस्य देशों और 9 एसोसिएट सदस्यों से बना एक आयोग है। इसका अधिकार क्षेत्र पश्चिम में तुर्की से पूर्व में किरिबाती तक और दक्षिण में न्यूज़ीलैंड से उत्तरी क्षेत्र में रूसी संघ तक फैला हुआ है। यही कारण है कि ESCAP संयुक्त राष्ट्र के पाँच क्षेत्रीय कमीशनों में सबसे व्यापक होने के साथ-साथ 600 से अधिक कर्मचारियों के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी संस्था है। इसकी स्थापना 1947 में की गई थी। इसका मुख्यालय थाईलैंड के बैंकॉक शहर में है। यह सदस्य राज्यों हेतु परिणामोन्मुखी परियोजनाएँ विकसित करने, तकनीकी सहायता प्रदान करने और क्षमता निर्माण जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों के संबंध में कार्य करता है।

एशियाई विकास बैंक(ADB)19 दिसंबर 1966 को स्थापित एशियाई विकास बैंक का मुख्यालय मनीला, फिलीपींस में है। इसका उद्देश्य एशिया में सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। 31 सदस्यों के साथ स्थापित इस बैंक के अब 67 सदस्य हैं -इसके 67 सदस्यों में से 48 एशिया-प्रशांत क्षेत्र के और 19 सदस्य बाहरी हैं। ADB में शेयरों का सबसे बड़ा अनुपात जापान का है।


वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force- FATF) वर्ष 1989 में पेरिस में G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान स्थापित एक अंतर- सरकारी निकाय है।प्रारंभ में, इसे धन शोधन से निपटने संबंधी उपायों की जाँच एवं मापदंडों को विकसित करने के लिये स्थापित किया गया था। FATF ने अक्तूबर 2001 में धन शोधन के अतिरिक्त आतंकवाद के वित्तीयन से निपटने के प्रयासों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लिया। अप्रैल 2012 में इसने जनसंहारक हथियारों (Weapons of Mass Destruction) के प्रसार हेतु वित्तपोषण से निपटने संबंधी मापदंडों को भी अपने एजेंडा में शामिल कर लिया।FATF दो सूचियाँ जारी करता है:

  • ग्रे लिस्ट: जो देश आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन जैसी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं उन्हें FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाता है। FATF की ग्रे लिस्ट किसी देश के लिये एक चेतावनी होती है कि उस देश को ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है।
  • ब्लैक लिस्ट: जो देश गैर-सहयोगी देश या क्षेत्र (Non-Cooperative Countries or Territories- NCCT) के रूप में जाने जाते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है। किसी देश के ब्लैक लिस्ट में शामिल होने का अर्थ है कि उस देश को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा वित्तीय सहायता मिलनी बंद हो जाएगी।


G-20 जापान के ओसाका शहर में वर्ष 2019में इसके 14वें शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। G20 समूह की स्थापना 1999 में 7 देशों-अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्राँस और इटली के विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में की गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता और सतत् आर्थिक संवृद्धि हासिल करने हेतु सदस्यों के मध्य नीतिगत समन्वय स्थापित करना है। G-20 का उद्देश्य वैश्विक वित्त को प्रबंधित करना था। संयुक्त राष्ट्र (United Nation), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक (World Bank) के स्टाफ स्थायी होते हैं और इनके हेड क्वार्टर भी होते हैं, जबकि G20 का न तो स्थायी स्टाफ होता है और न ही हेड क्वार्टर, यह एक फोरम मात्र है। इसमें भारत समेत 19 देश तथा यूरोपीय संघ शामिल है।

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO)[सम्पादन]

4 अप्रैल, 1949 को उत्तर अटलांटिक संधि (जिसे वाशिंगटन संधि भी कहा जाता है) द्वारा स्थापित एक राजनीतिक और सैन्य गठबंधन है। वर्तमान में इस संगठन में 29 सदस्य देश शामिल हैं। इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में है। NATO वाशिंगटन संधि के अनुच्छेद 5 में निहित सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित है जिसका अर्थ है कि उसके किसी भी एक या एक से अधिक सदस्यों के विरुद्ध हमले को सभी सदस्यों के विरुद्ध हमला माना जाएगा।

NATO का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्यों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देना है। राजनीतिक- NATO लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देता है तथा समस्याओं के समाधान, विश्वास निर्माण और संघर्षों की रोकथाम के लिये सदस्यों को सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर परामर्श और सहयोग करने हेतु मंच उपलब्ध कराता है। सैन्य- NATO विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिये प्रतिबद्ध है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो इसके पास संकट-प्रबंधन हेतु ऑपरेशन्स संचालित करने की सैन्य शक्ति है। इसका गठन संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और कई पश्चिमी यूरोपीय देशों द्वारा किया गया था। संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा कनाडा भी गठबंधन में शामिल उत्तर अमेरिकी देश है।

यूरोपियन निवेश बैंक[सम्पादन]

  • अपनी नई ऊर्जा ऋण नीति के तहत वर्ष 2021 से जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं का वित्तपोषण करने से मना कर दिया है।
  • यूरोपियन संघ (European Union-EU) के सभी सदस्य देशों द्वारा अनुमोदन किये जाने के एक वर्ष बाद यह निर्णय प्रभाव में आएगा।
  • अब EIB फंडिंग के लिये आवेदन करने वाली उर्जा परियोजनाओं को यह प्रदर्शित करना होगा कि वे 250 ग्राम से कम कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करते हुए एक किलोवाट/घंटे ऊर्जा का उत्पादन कर सकते हैं। इस कदम से पारंपरिक गैस द्वारा बिजली उत्पादन करने वाले संयंत्रों पर भी प्रतिबंध लग सकता है।
  • नई नीति के अनुसार नवीन प्रौद्योगिकी पर आधारित गैस परियोजनाएँ अभी भी संभव हैं, जिनमें कार्बन अधिग्रहण और भंडारण की क्षमता,ताप एवं बिजली उत्पादन का संयोजन तथा जीवाश्म प्राकृतिक गैसों को नवीकरणीय ऊर्जा में मिश्रित करने जैसी तकनीकें विद्यमान हों।
  • यूरोपियन संघ के सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों ने हाल ही में हुई एक बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिये गैस, तेल और कोयला परियोजनाओं को दी जाने वाली फंडिंग को चरणबद्ध तरीके से रोकने का निर्णय लिया था।
  • यूरोपियन संघ आयोग EIB में केवल एक पर्यवेक्षक की भूमिका निभाता है लेकिन यूरोपीय संघ के कार्यकारी निकाय EIB में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में EIB के 28 शेयरधारक सदस्य हैं।
  • EIB की स्थापना वर्ष 1958 में रोम की संधि के अस्तित्व में आने के बाद ब्रुसेल्स (Brussels) में हुई थी।
  • वर्ष 1968 में इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स से लक्ज़मबर्ग स्थानांतरित किया गया।
  • EIB यूरोपीय संघ की एक ऋणदाता इकाई है जो विश्व स्तर पर बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान के रूप में जलवायु वित्त के बड़े प्रदाताओं में से एक है।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)[सम्पादन]

  • 1969 में स्थापित यह संस्था संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है।
  • इसके विदेश मंत्रियों की परिषद के 46वें सत्र का आयोजन मार्च के पहले सप्ताह में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में किया जाना तय हुआ है।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने सुषमा स्वराज को 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में आमंत्रित किया है।
  • वर्तमान में इस संगठन में सभी महाद्वीपों से 57 देश शामिल हैं, जिसमें 40 मुस्लिम बहुल देश हैं।
  • इस संगठन को दुनिया भर के मुस्लिमों की सामूहिक आवाज़ कहा जाता है।
  • यह संगठन दुनिया के विभिन्न देशों के लोगों के बीच अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देने के साथ ही दुनिया के मुस्लिम समुदायों के हितों की रक्षा और संरक्षण का प्रयास करता है।

OIC का गठन येरूशलम में स्थित अल-अक्सा मस्ज़िद में आग लगने के बाद 25 सितंबर, 1969 को मोरक्को के रबात् प्रांत में एक शिखर सम्मेलन में किया गया था। अंतर-सरकारी संगठन (Inter-Governmental Organization-IGO) पद एक संधि द्वारा स्थापित संगठन को संदर्भित करता है जिसमें दो या दो से अधिक राष्ट्र साझा हितों पर आपसी विश्वास एवं सहयोग हेतु साथ आते हैं। संधि के अभाव में अंतर-सरकारी संगठन (IGO) का विधिक रूप से कोई अस्तित्व नहीं होता है। यह विश्व के विभिन्न देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सद्भावना को बढ़ावा देते हुए इस्लामिक राष्ट्रों और लोगों के हितों की रक्षा एवं संरक्षण का प्रयास करता है। संयुक्त राष्ट्र के एक-चौथाई से अधिक सदस्य देश OIC के सदस्य हैं। इसमें 57 सदस्य देश तथा संयुक्त राष्ट्र सहित 12 पर्यवेक्षक देश हैं। भारत OIC का सदस्य या पर्यवेक्षक राज्य नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN)[सम्पादन]

एक सदस्यता संघ है जो विशिष्ट रूप से सरकार और नागरिक समाज संगठनों, दोनों से मिलकर बना है। IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस हर चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है जिसमें सरकार, नागरिक समाज, स्थानीय लोगों, व्यापार और शिक्षाविदों के बीच से कई हज़ार नेताओं तथा निर्णयकर्त्ताओं को आमंत्रित किया जाता है ताकि पर्यावरण का संरक्षण किया जा सके एवं उन समाधानों को भुनाया जा सके जिसे प्रकृति वैश्विक चुनौतियों का सामना करने हेतु प्रस्तुत करती है

प्रमुख एशियाई संगठन[सम्पादन]

बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल-बिम्सटेक[सम्पादन]

आसियान का मानचित्र

6 जून,1997 को बैंकाक घोषणापत्र (Bangkok Declaration) के पश्चात स्थापित यह एक उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग समूह है। प्रारंभ में इस संगठन में बांग्लादेश,भारत,श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे और इसका नाम BIST-EC यानि बांग्लादेश,भारत,श्रीलंका और थाईलैंड इकॉनोमिक को-ऑपरेशन था।

दिसंबर 1997 में म्याँमार भी इस समूह से जुड़ गया और इसका नाम BIMST-EC हो गया।
इसके बाद फरवरी 2004 में भूटान और नेपाल भी इस समूह में शामिल हो गए।
  • जुलाई 2004 में बैंकाक में आयोजित इसके प्रथम सम्मेलन में बिम्सटेक (बांग्लादेश, भारत, म्याँमार, श्रीलंका और थाईलैंड तकनीकी और आर्थिक सहयोग) का नाम बदलकर बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल) रखा गया।
इसके 7 सदस्यों में से 5 दक्षिण एशिया से हैं, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं तथा दो- म्याँमार और थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया से हैं।
  • उद्देश्य:-सात देशों का यह संगठन मूल रूप से एक सहयोगात्मक संगठन है जो व्यापार, ऊर्जा, पर्यटन, मत्स्यपालन, परिवहन और प्रौद्योगिकी को आधार बनाकर शुरू किया गया था लेकिन बाद में इसमें कृषि, गरीबी उन्मूलन,आतंकवाद, संस्कृति,जनसंपर्क, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन को भी शामिल किया गया।
  • बिम्सटेक के मुख्य उद्देश्यों में बंगाल की खाड़ी के तट पर दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करना शामिल है।
  • भारत के लिये बिम्सटेक का महत्त्व
  • बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के बीच एक सेतु की तरह काम करता है। इस समूह में दो देश दक्षिण-पूर्व एशिया के हैं। म्याँमार और थाईलैंड भारत को दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों से जोड़ने के क्रम में अति महत्त्वपूर्ण है।
  • बिम्सटेक देशों के बीच मज़बूत संबंध भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को गति प्रदान कर सकता है। इससे भारत-म्याँमार के बीच परिवहन परियोजना और भारत-म्याँमार-थाईलैंड राजमार्ग परियोजना के विकास में भी तेज़ी आएगी।
  • चीन ने भूटान और भारत को छोड़कर लगभग सभी बिम्सटेक देशों में भारी निवेश कर रखा है। ऐसे में हिन्द महासागर तक पहुँचने के लिये बंगाल की खाड़ी तक पहुँच बनाना चीन के लिये ज़रूरी होता जा रहा है। जबकि भारत बंगाल की खाड़ी में अपनी पहुँच और प्रभुत्व को बनाए रखना चाहता है, इस उद्देश्य की सफलता में भी बिम्सटेक भारत के लिये काफी महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • पाकिस्तान की नकारात्मक भूमिका के चलते भारत बिम्सटेक को काफी महत्त्व देता है। इससे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

आसियान[सम्पादन]

8 अगस्त,1967 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थापित आसियान का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में स्थित है।

  • 10 सदस्य देशों के नाम इस प्रकार हैं : इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, वियतनाम, म्याँमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई।
  • आसियान का मुख्यालय इंडोनेशिया के जकार्ता में है। इसके राज्य-सचिव प्रत्येक देश की राजधानी में रहते हैं।
  • आसियान के महासचिव का पद प्रत्येक दो वर्षों के बाद सदस्य देश को वर्णानुक्रम के अनुसार प्रदान किया जाता है।
ASEAN countries capitals 2

आसियान के लक्ष्य एवं उद्देश्य

  • सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना;
  • आसियान डिक्लेरेशन (Asean Declaration) के अनुसार, आसियान का लक्ष्य दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास में तेज़ी लाने हेतु निरंतर प्रयास करना;
  • पारस्परिक सहयोग एवं संधि को बढ़ावा देना;
  • आसियान देशों में न्याय और कानून के शासन के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना इसका एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है;
  • साथ ही आसियान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन के प्रति भी दृढ़-प्रतिज्ञ है;
  • प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना:
  • आसियान देशों के बीच शैक्षणिक, पेशेवर, तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अनुसंधान सुविधाओं के संबंध में परस्पर सहयोग को बढ़ावा देना आसियान का एक प्रमुख उद्देश्य है।
  • कृषि एवं उद्योग तथा संबंधित क्षेत्रों का विकास;
  • कृषि और उद्योगों की बेहतरी हेतु परस्पर संबंधों को मज़बूती देना तथा आपसी व्यापार को विस्तार देना आसियान के लक्ष्यों में प्रमुखता से शामिल है।
  • आसियान के लक्ष्यों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की समस्याओं, परिवहन और संचार सुविधाओं में सुधार तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार के प्रयास करना भी शामिल है।
  • अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के साथ अनुपूरक संबंध;
  • मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के उद्देश्यों के सापेक्ष साझा सहयोग को बढ़ावा देना भी आसियान का एक प्रमुख उद्देश्य है।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)[सम्पादन]

वृहत-क्षेत्रीय मुक्त व्यापार समझौता है,इसमें शामिल 16 सदस्य देशों में 10 आसियान देश तथा छह अन्य देश FTA भागीदार भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं।इसका उद्देश्य वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, प्रतिस्पर्द्धा तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों को कवर करना है। यह एक प्रस्तावित मेगा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) है, इन देशों का पहले से ही आसियान से मुक्त व्यापार समझौता है।वस्तुतः RCEP वार्ता की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2012 में कंबोडिया में आयोजित 21वें आसियान शिखर सम्मेलन में हुई थी।

विश्व के अन्य महत्वपूर्ण संगठन[सम्पादन]

दक्षिण साझा बाज़ार (Southern Common Market){मर्कोसुर (MERCOSUR)(स्पेनिश भाषा में}[सम्पादन]

  • यह एक क्षेत्रीय एकीकरण प्रक्रिया है।जिसकी स्थापना अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे (Paraguay) और उरुग्वे (Uruguay) द्वारा की गई थी जबकि वेनेजुएला और बोलीविया इसमें बाद में शामिल हुए थे। बोलीविया को शामिल करने की प्रक्रिया अभी चल रही है।
  • वेनेजुएला के बोलीविया गणराज्य को MERCOSUR की एक राज्य पार्टी के रूप में अपनी स्थिति के लिये निहित सभी अधिकारों और दायित्वों में निलंबित कर दिया गया है। भारत मर्कोसुर का सदस्य नहीं है

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum)[सम्पादन]

  • विश्व आर्थिक मंच सार्वजनिक-निजी सहयोग हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है,जिसका उद्देश्य विश्व के प्रमुख व्यावसायिक,अंतर्राष्ट्रीय राजनीति,शिक्षाविदों,बुद्धिजीवियों तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अग्रणी लोगों के लिये एक मंच के रूप में काम करना है।
  • यह स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है,और इसका मुख्यालय जिनेवा में है।
  • इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम. श्वाब ने की थी।
  • इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तरों पर प्रदान की जानी है और ये स्तर संस्था के काम में उनकी सहभागिता पर निर्भर करते हैं।
  • इसके माध्यम से विश्व के समक्ष मौजूद महत्त्वपूर्ण आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों पर परिचर्चा का आयोजन किया जाता है।

अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (AARDO)का आह्वान[सम्पादन]

हाल ही में मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (Central Marine Fisheries Research Institute-CMFRI) में 15 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में AARDO के 12 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान संयुक्त एशियाई प्रबंधन योजनाओं को विकसित करने के लिये अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग का आह्वान किया गया। ओमान, लेबनान, ताइवान, मोरक्को, सीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, ज़ाम्बिया, मलावी, मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों ने बेहतर मत्स्य प्रबंधन पहल शुरू करने के लिये आपसी सहयोग की मांग की। व1962 में किया गया जिसमें अफ्रीका और एशिया के देशों की सरकारें शामिल हैं। AARDO एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है जिसका उद्देश्य एशिया और अफ्रीका देशों के बीच कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सहयोग कर उस पर कार्य करना है। केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) इसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा 3 फरवरी, 1947 को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। 1967 में इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research-ICAR) में शामिल कर दिया गया। अब यह संस्थान दुनिया के उष्णकटिबंधीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के रूप में उभर कर सामने आया है।

संयुक्त राष्ट्र संस्थान[सम्पादन]

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization -WIPO):-बौद्धिक संपदा सेवाओं,नीति,सूचना और सहयोग के लिये एक वैश्विक मंच है। यह संगठन 191 सदस्य देशों के साथ संयुक्त राष्ट्र की एक स्व-वित्तपोषित एजेंसी है। इसका उद्देश्य एक संतुलित एवं प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रणाली के विकास हेतु करना है जो सभी के लाभ के लिये नवाचार और रचनात्मकता को सक्षम बनाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1967 में की गई थी एवं इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विटज़रलैंड में है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद[सम्पादन]

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 15 मार्च, 2006 को संकल्प 60/251 द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का गठन किया गया था।
इस परिषद का गठन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के स्थान पर किया गया था।

संरचना: यह परिषद 47 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से बनी है जो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा चुने जाते हैं। परिषद की सदस्यता समान भौगोलिक वितरण पर आधारित है। इसकी सदस्य संख्या का वितरण निम्नलिखित है: अफ्रीका : 13 सदस्य देश एशिया-प्रशांत: 13 सदस्य देश लैटिन अमेरिकी और कैरीबिया: 8 सदस्य देश पश्चिमी यूरोपीय और अन्य: 7 सदस्य देश पूर्वी यूरोप: 6 सदस्य देश भारत वर्ष 2021 तक परिषद का सदस्य है। अधिदेश: यह एक अंतर-सरकारी निकाय है जो विश्व भर में मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण को मज़बूती प्रदान करने तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्थितियों को दूर करने एवं उन पर सिफारिशें लागू करने हेतु उत्तरदायी है। बैठक: इसकी बैठक संयुक्त राष्ट्र के ज़िनेवा कार्यालय में आयोजित की जाती है।

UNICEF (United Nations International Children's Emergency Fund)[सम्पादन]

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 दिसंबर, 1946 को स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्ध में नष्ट हुए राष्ट्रों के बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना था। 1950 में, विकासशील देशों में बच्चों और महिलाओं की दीर्घकालिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये इसके कार्य क्षेत्र में विस्तार किया गया। वर्ष 1953 में यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक स्थायी हिस्सा बन गया। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका में है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन[सम्पादन]

  • सार्वभौमिक और स्थायी शांति केवल तभी पूरी हो सकती है जब यह सामाजिक न्याय पर आधारित हो। इसी विश्वास को प्रतिबिंबित करने के लिये प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली वर्साय संधि के एक हिस्से के रूप में का गठन किया गया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन को राष्ट्रों के बीच बंधुत्व और शांति लाने, श्रमिकों को सम्मानजनक रोज़गार और न्याय दिलाने तथा अन्य विकासशील देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिये नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

भारत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का एक संस्थापक सदस्य है।

विश्व व्यापार संगठन[सम्पादन]

1995 में मारकेश संधि द्वारा स्थापित यह संगठन विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक व्यापार जितना संभव हो उतना सुगम, अनुमानित और स्वतंत्र रूप से संचालित हो। विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) ब्रेटन वुड्स संस्थान हैं। वर्तमान में विश्व के अधिकतम देश इसके सदस्य हैं। सदस्य देशों का मंत्रिस्तरीय सम्मलेन इसके निर्णयों के लिये सर्वोच्च निकाय है, जिसकी बैठक प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित की जाती है।

वर्तमान में विश्व के 164 देश इसके सदस्य हैं।

29 जुलाई, 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन[सम्पादन]

संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित है। विश्व स्वास्थ्य सभा (The World Health Assembly) WHO में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इस सभा की बैठक प्रत्येक वर्ष होती है और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग लेते हैं। सड़क सुरक्षा पर वैश्विक स्थिति रिपोर्ट WHO द्वारा दिसंबर 2018 में शुरू की ग

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन सभी देशों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की एक महत्त्वपूर्ण संस्था है।
  • 7 अप्रैल,1948 में स्धापित यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक आनुषंगिक इकाई है।मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में स्थित है।इसका भारतीय मुख्यालय राजधानी क्षेत्र नई दिल्ली में है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देश हैं।
  • वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) हैं।
  • इसका उद्देश्य सभी लोगों को स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर की प्राप्ति में सहायता प्रदान करना है।
  • यह अंतरिम स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित समन्वयकारी प्राधिकरण के रूप में भी कार्य करता है तथा स्वास्थ्य मामलों में सक्रिय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • इसके कार्यक्रमों में स्वास्थ्य सेवाओं का विकास,रोग निवारण व नियंत्रण, पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संवर्द्धन,जैव-चिकित्सा,स्वास्थ्य सेवाओं,शोध व स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विकास एवं प्रोत्साहन शामिल है।
  • खाद्य एवं कृषि संगठन:-संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की सबसे बड़ी विशेषज्ञता प्राप्त एजेंसियों में से एक है जिसकी स्‍थापना वर्ष 1945 में कृषि उत्‍पादकता और ग्रामीण आबादी के जीवन निर्वाह की स्‍थिति में सुधार करते हुए पोषण तथा जीवन स्‍तर को उन्‍नत बनाने के उद्देश्य के साथ की गई थी।मुख्यालय रोम,इटली में स्थित है।
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन:-यह दुनिया-भर में पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हेतु उत्तरदाई एक अंतर-सरकारी संगठन है।विश्व व्यापार संगठन द्वारा संदर्भित संगठन (Reference Organisation) के रूप में मान्यता प्राप्त है।वर्तमान में कुल 182 देश इसके सदस्य थे।मुख्यालय पेरिस,फ्राँस में स्थित है।

यूनिसेफ[सम्पादन]

(United Nations Children's Fund/United Nations International Children's Emergency Fund- UNICEF) संयुक्त राष्ट्र बाल कोष-यूनिसेफ (United Nations Children’s Fund) या संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष कहा जाता है। यूनिसेफ का गठन वर्ष 1946 में संयुक्त राष्ट्र के एक अंग के रूप में किया गया था। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। ध्यातव्य है कि वर्तमान में 190 देश इसके सदस्य हैं। वस्तुतः इसका गठन द्वितीय विश्वयुद्ध से प्रभावित हुए बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने तथा उन तक खाना और दवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)

  • UNSC के निर्णय संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों पर बाध्यकारी हैं।
  • भारत 7 बार अर्थात् 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है।

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (United Nations Industrial Development Organization) की स्थापना के लिये संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने वर्ष 1966 में UNIDO की स्थापना के लिये प्रस्ताव पारित किया था। यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो गरीबी में कमी लाने, समावेशी वैश्वीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिये औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है। 1 अप्रैल, 2019 तक 170 देश UNIDO के सदस्य हैं। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में है।


यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (Universal Postal Union-UPU) वर्ष 1874 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है। यह अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (1865) के बाद विश्व में दूसरा सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्यालय बर्न (स्विट्ज़रलैंड) में स्थित है और इसमें 192 देश शामिल हैं। भारत वर्ष 1876 में UPU में शामिल हुआ। यह अंतर्राष्ट्रीय डाकों के आदान-प्रदान को विनियमित करता है और अंतर्राष्ट्रीय डाक सेवाओं की दरों को तय करता है। यह सलाहकार, मध्यस्थ एवं संपर्क-बिंदु की भूमिका निभाता है और जहाँ आवश्यक हो वहाँ तकनीकी सहायता भी प्रदान कराता है। यह संगठन हाल ही में चर्चा में रहा था जब पाकिस्तान ने 27 अगस्त, 2019 से भारत के साथ डाक सेवाओं का आदान-प्रदान बंद कर दिया। पाकिस्तान द्वारा लिया गया यह निर्णय बिना किसी पूर्व सूचना पर आधारित था जो अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन है।

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (International Civil Aviation Organization- ICAO)=== संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है। इसकी स्थापना वर्ष 1944 में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन अभिसमय (शिकागो कन्वेंशन) के प्रशासन एवं प्रबंधन हेतु की गई थी। भारत इसके 193 सदस्यों में से एक है। भारत ने 1 मार्च, 1947 को इस अभिसमय की पुष्टि की थी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन के विकास एवं नियोजन को बढ़ावा देना है ताकि विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन की सुरक्षित एवं व्यवस्थित संवृद्धि सुनिश्चित हो सके। इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल (कनाडा) में स्थित है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष[सम्पादन]

विकसित देश लेनदारों की तरह हैं, जो वित्तीय संसाधन प्रदान करते हैं, लेकिन शायद ही कभी IMF ऋण समझौते करते हैं। विकासशील देश कर्ज लेने वाले की तरह हैं, जो ऋण सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन उधार देने के लिये उपलब्ध कोष में बहुत कम योगदान देते हैं क्योंकि उनका कोटा बहुत कम होता है। यह उधारकर्त्ता में अधीनता की भावना और लेनदार में प्रभुत्व को संस्थागत रूप प्रदान करता है। सुधारों को मिली जगह

  • 2010 में IMF के लिये कोटा और प्रशासन सुधार का मसौदा तैयार किया गया था, जो अंततः 2016 से प्रभावी हुआ। इसके तहत जो सुधार लागू किये गए, वे निम्नानुसार हैं:
  • इन सुधारों की वज़ह से अमेरिका और यूरोपीय देशों का 6% से अधिक कोटा उभरते और विकासशील देशों को स्थानांतरित हो गया।
  • भारत का मतदान अधिकार वर्तमान 2.3% से 0.3% बढ़कर 2.6% हो गया तथा चीन का मतदान अधिकार वर्तमान 3.8% से 2.2% बढ़कर 6% हो गया।
  • इन सुधारों की वज़ह से IMF का संयुक्त कोटा या पूंजीगत संसाधन भी पूर्व के 329 बिलियन डॉलर के तुलना में दोगुना बढ़कर 659 बिलियन डॉलर हो गया है।
  • IMF के सबसे निर्धन सदस्य देशों के मताधिकार और कोटे को संरक्षित किया जाएगा।
  • पहली बार IMF के कार्यकारी बोर्ड में पूरी तरह से निर्वाचित कार्यकारी निदेशक शामिल होंगे तथा इससे कार्यकारी निदेशकों को नियुक्त करने पर अंकुश लग जाएगा।

अफ्रीका, जिसे आशा का महाद्वीप कहा जाता है तथा यह माना जाता है कि दुनिया में आर्थिक विकास के अगले चरण को यहीं से बढ़ावा मिलेगा; लेकिन इसे IMF कोटे में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ)[सम्पादन]

  • 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा स्थापित संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है।यह नीदरलैंड के द हेग स्थित पीस पैलेस में स्थित है।[१]

इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा 1945 में की गई थी और अप्रैल 1946 में इसने कार्य करना प्रारंभ किया था। इसका मुख्यालय (पीस पैलेस) हेग (नीदरलैंड) में स्थित है। इसके प्रशासनिक व्यय का भार संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वहन किया जाता है। इसकी आधिकारिक भाषाएँ अंग्रेज़ी और फ्रेंच हैं। ICJ में 15 जज होते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद् द्वारा नौ वर्षों के लिये चुने जाते हैं। इसकी गणपूर्ति संख्या (कोरम) 9 है।

यूनेस्को (UNESCO)[सम्पादन]

-यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र का एक भाग है।

मुख्यालय- पेरिस (फ्राँस) गठन- 16 नवंबर, 1945 कार्य- शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना। उद्देश्य- इसका उद्देश्य शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार तथा मौलिक स्वतंत्रता हेतु वैश्विक सहमति बन पाए।

संयुक्त‍ राष्ट्र आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण कार्यालय (UNISDR)[सम्पादन]

सेंदाई फ्रेमवर्क के संरक्षक के रूप में कार्य करता है तथा इसके कार्यान्वयन, निगरानी और प्रगति की समीक्षा के संबंध में राष्ट्रों एवं संगठनों की सहायता करता है। UNISDR के स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क 2016-2021 में, संधारणीय भविष्य हेतु आपदा जोखिम में महत्त्वपूर्ण कमी लाने के साथ ही सेंदाई फ्रेमवर्क के संरक्षक के रूप में कार्य करने का अधिदेश तथा इसके कार्यान्वयन, निगरानी एवं प्रगति की समीक्षा में राष्ट्रों एवं संगठनों का समर्थन एवं सहायता करना शामिल है। सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-30) को जापान के सेंदाई (मियागी) में 14-18 मार्च, 2015 तक आयोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था। वर्तमान फ्रेमवर्क प्राकृतिक या मानव निर्मित खतरों के साथ-साथ संबंधित पर्यावरणीय, तकनीकी और जैविक खतरों एवं जोखिमों के कारण छोटे तथा बड़े पैमाने की, बारंबार एवं विरल, आकस्मिक तथा मंद आपदाओं के जोखिमों पर भी लागू होता है। सेंदाई फ्रेमवर्क ने ‘ह्यूगो फ्रेमवर्क फाॅर एक्शन (HFA) 2005-2015: आपदाओं के प्रति राष्ट्रों और समुदायों में लचीलेपन का निर्माण करना’ का स्थान लिया है। भारत ने 23 सितंबर, 2019 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिये एक वैश्विक गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure-CDRI) की घोषणा की। इसे 35 से अधिक देशों के साथ परामर्श के बाद विकसित किया गया है। अतः कथन 2 सही है। CDRI एक संयोजक निकाय के रूप में प्रस्तावित है जो निर्माण, परिवहन, ऊर्जा, दूरसंचार और जल क्षेत्र के पुनरुत्थान के लिये विश्व के सर्वोत्तम अनुभवों एवं संसाधनों का ऐसा पूल तैयार करेगा जिससे इन मुख्य अवसंरचना क्षेत्रों के निर्माण में प्राकृतिक आपदाओं संबंधी जोखिमों की भी गणना की जा सकेगी। CDRI आपदाओं और चरम मौसमी घटनाओं से होने वाले अवसंरचनात्मक और आर्थिक नुकसान में कमी लाने संबंधी उद्देश्य पर आधारित है। इसके अतिरिक्त यह उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये सेंदाई फ्रेमवर्क और पेरिस जलवायु समझौते के अनुरूप भी है। CDRI सदस्य देशों को आपदा-रोधी अवसंरचना प्रणालियों में निवेश को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने के लिये तकनीकी सहायता एवं क्षमता विकास, अनुसंधान एवं ज्ञान प्रबंधन एवं साझेदारी करने की सुविधा प्रदान करेगा। सयुंक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1999 में आपदा न्यूनीकरण के लिये अंतर्राष्ट्रीय रणनीति (ISDR) अपनाई और इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिये इसके सचिवालय के रूप में UNISDR की स्थापना की। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।

संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास[सम्पादन]

  • यह मानव बस्तियों के लिये संयुक्त की एजेंसी है। इसे वर्ष 1976 में कनाडा के वैंकूवर में आयोजित ह्यूमन सेटलमेंट्स एंड सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट [Human Settlements and Sustainable Urban Development (Habitat-I)] पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के परिणाम के रूप में स्थापित किया गया था।

यूएन-हैबिटेट: एक बेहतर शहरी भविष्य की दिशा में संयुक्त राष्ट्र का एक कार्यक्रम है। इसका मिशन सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से स्थायी मानव बस्तियों के विकास एवं सभी के लिये पर्याप्त आश्रय की उपलब्धि को बढ़ावा देना है। शहरी विकास के मुद्दों को संबोधित करने के लिये वर्ष 1978 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) द्वारा शासित शहरी विकास प्रक्रियाओं पर यह एक संज्ञानात्मक संस्था (knowledgeable institution) है।

  • यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का सदस्य है।
  • इसका मुख्यालय नैरोबी,केन्या के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सबके लिये उपयुक्त आवास प्रदान करने के लक्ष्य की दिशा में सामाजिक और पर्यावरण की दृष्टि से संवहनीय कस्बों और शहरों को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपा है।
  • संगठन के कार्य क्षेत्र से संबद्ध मुख्य दस्तावेज हैं:-वेंकूवर डेक्लेरेशन ऑन ह्यूमन सेटलमेंट्स, द हैबीटॉट एजेंडा, द इस्तांबुल डेक्लेरेशन ऑन ह्यूमन सेटलमेंट (Human Settlements (Habitat II) in Istanbul), द डेक्लेरेशन ऑन सिटीज एंड अदर ह्यूमन सेटलमेंट्स इन द न्यू मिलेनियम; रैज़ोल्यूशन 56/206 ।
  1. फोकस के क्षेत्र: भूमि कानून; नगर नियोजन; शहरी एवं म्यूनिसिपल वित्त; जोखिम में कमी और पुनर्वास; अनुसंधान और क्षमता विकास
  2. नोडल मंत्रालय: आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय; शहरी विकास मंत्रालय; नीति आयोग
  3. प्रमुख प्रकाशन: द ग्लोबल रिपोर्ट ऑन ह्यूमन सेटलमेंट्स, द स्टेट ऑफ वर्ल्ड सिटीज़; अर्बन वर्ल्ड

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम(UNDP):

  • यह संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास का एक नेटवर्क है। मुख्यालय न्यूयॉर्क में अवस्थित है।
  • यह गरीबी उन्मूलन, असमानता को कम करने हेतु लगभग 70 देशों में कार्य करता है।
  • इसके अलावा देश के विकास को बढ़ावा देने के लिये नीतियों,नेतृत्व कौशल, साझेदारी क्षमताओं तथा संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने और लचीलापन बनाने में मदद करता है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष(United Nations Population Fund)[सम्पादन]

  • संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है।[२]
  • इसे वर्ष 1967 में ट्रस्ट फंड के रूप में स्थापित किया गया था, इसका परिचालन वर्ष 1969 में शुरू हुआ।
  • वर्ष 1987 में इसे आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष नाम दिया गया।
  • हालाँकि, इसका संक्षिप्त नाम UNFPA (जनसंख्या गतिविधियों के लिये संयुक्त राष्ट्र कोष) को भी बरकरार रखा गया।
  • UNFPA का जनादेश संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council- ECOSOC) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक अंग है।
  • UNFPA पूरी तरह से अनुदान देने वाली सरकारों, अंतर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्रों, संस्थानों और व्यैक्तिक स्वैच्छिक योगदान द्वारा समर्थित है, न कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट द्वारा।
  • UNFPA प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य पर सतत् विकास लक्ष्य नंबर 3, शिक्षा पर लक्ष्य 4 और लिंग समानता पर लक्ष्य 5 के संबंध में कार्य करता है।

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. https://www.icj-cij.org/en/court
  2. https://www.unfpa.org/about-us