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सिविल सेवा मुख्य परीक्षा विषयवार अध्ययन/अर्थव्यवस्था के संसाधन

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नदी-जोड़ो: चुनौतियाँ और संभावनाएँ[सम्पादन]

राजस्थान सरकार ने ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांधनदियों को जोडऩे की योजना तथा बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में एक मीटर तक तीनों प्रमुख नदियों से मिट्टी निकालने के कार्य सहित योजनाओं को धरातल पर लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। इससे आने वाले समय में बांध में पानी का जलस्तर लगातार बने रहने की उम्मीद है। इस परियोजना पर 6 हज़ार करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। लेकिन किसी भी नदी-जोड़ो परियोजना की राह में जटिलताओं तथा चुनौतियों की कमी नहीं है।

  • 27 फरवरी 2012 को एक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री की अध्यक्षता में नदी-जोड़ो कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिये नदियों को जोड़ने की विशेष समिति 23 सितंबर, 2014 को बनाई गई। यह विशेष समिति नदी-जोड़ो परियोजनाओं की रूपरेखा बनाते समय और उन्हें तैयार करते समय सभी हितधारकों के सुझावों तथा टिप्पणियों पर विचार करती है।
  • जल-अधिशेष वाले बेसिन से जल की कमी वाले बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिये अगस्त 1980 में राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) तैयार की गई थी।
  • राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना में लगभग 3000 भंडारण बाँधों के नेटवर्क के माध्यम से देश भर में 37 नदियों को जोड़ने के लिये 30 लिंक शामिल होंगे। इसका लक्ष्य भविष्य में देश की पानी की ज़रूरतों को पूरा करना है। यह बेहद महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके तहत 15 हज़ार किमी. लंबी नई नहरें बनानी होंगी, जिनमें 174 घन किमी. पानी का भंडारण किया जा सकेगा। NPP के अंतर्गत 30 नदी-जोड़ो परियोजनाओं (जिनमें 14 नदियाँ हिमालयी और शेष 16 प्रायद्वीपीय हैं) की रूपरेखा तैयार करने की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) को सौंपी गई है।
  • इसके दो प्रमुख घटक हैं:

1. हिमालयी नदियों का विकास:-

  1. इसका उद्देश्य गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के साथ नेपाल में उनकी सहायक नदियों पर भंडारण जलाशयों का निर्माण करना है।
  2. इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिये मानसून प्रवाह का संरक्षण करना है।
  3. यह लिंकेज कोसी, गंडक और घाघरा के अधिशेष प्रवाह को पश्चिम में स्थानांतरित करेगा।
  4. गंगा और यमुना के बीच एक लिंक का भी प्रस्ताव किया गया है ताकि हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अधिशेष जल को स्थानांतरित किया जा सके।

2. दक्षिणी जल ग्रिड (Southern Water Grid):-इसमें 16 लिंक शामिल हैं जिनके माध्यम से दक्षिण भारत की नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव है। यह कृष्णा,पेन्नार, कावेरी और वैगई नदियों को अतिरिक्त जल की आपूर्ति के लिये महानदी और गोदावरी को जोड़ने की परिकल्पना करता है। इस लिंकेज के लिये कई बड़े बाँधों और प्रमुख नहरों का निर्माण करना होगा। इसके अलावा केन नदी को भी बेतवा, पारबती, कालीसिंध और चंबल नदियों से जोड़ा जाएगा। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी के तौर पर NWDA की स्थापना की गई, जिसका काम 1980 के NPP में नदी-जोड़ो के प्रस्तावों की समीक्षा करना है। दीर्घकालीन योजनाNPP के तहत सतही जल से 25 मिलियन हेक्टेयर और भूमिगत जल के उपयोग से 10 मिलियन हेक्टेयर सिंचाई का लाभ देने की परिकल्पना की गई है। इससे कुल सिंचाई क्षमता 140 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 175मिलियन हेक्टेयर हो जाने का अनुमान है। इस प्रकार बाढ़ नियंत्रण,सूखा शमन आदि के साथ-साथ 34 मिलियन किलोवाट विद्युत् उत्पादन भी किया जा सकेगा। मिहिर शाह समिति की रिपोर्ट

  • देश में जल प्रबंधन के मुद्दे पर मिहिर शाह समितिद्वारा ..A 21st Century Institutional Architecture for India’s Water Reformsशीर्षक से तैयार रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत के अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ मानसून के बाद जल प्रवाह के गंभीर संकट का सामना करती हैं। भूजल का अत्यधिक दोहन करना भारत की प्रायद्वीपीय नदियों के सूखने का सबसे बड़ा कारण है। भूजल का आधार-प्रवाह सूखने की वज़ह से हमारी बहुत सारी नदियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।

संभावित लाभ

  1. जलविद्युत उत्पादन
  2. सिंचाई संबंधी लाभ
  3. वर्षभर नौवहन सुविधा
  4. रोज़गार सृजन
  5. सूखे और बाढ़ की समस्या का समाधान
  6. पारिस्थितिकीय लाभ

चिंताएँ:-

  1. तलछट प्रबंधन
  2. भारत के पूर्वी-तट की नदियों पर बाँध का निर्माण कर उनके जल को पश्चिम की ओर मोड़ाना।इससे अनुप्रवाह क्षेत्र की बाढ़ पर रोक लग जाएगी, जिससे लाभकारी तलछट की आपूर्ति भी बाधित होगी। इससे संवेदनशील तटीय पारिस्थितिक तंत्र नष्ट होगा और तटीय व डेल्टा क्षेत्र के अपक्षरण की स्थिति बनेगी।
  3. नदी-जोड़ो परियोजना में संघवाद की भावना की अनदेखी की गई है। राज्य सरकारों (जैसे केरल) की ओर से इस पर असंतोष प्रकट किया गया है।
  4. वर्षा के आँकड़ों के एक नए विश्लेषण से पता चलता है कि अधिशेष जल वाली नदी घाटियों में मानसून की कमी बढ़ रही है, जबकि जल की कमी वाली नदी घाटियों में मानसून अपनी कमी से उबर रहा है।

मानव संसाधन[सम्पादन]

  1. जनसांख्यिकी लाभ:-संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने कहा है कि जनसांख्यिकी लाभांश के कारण जापान और चीन जैसे दुनिया के कई देशों ने अपनी विकास क्षमता को बढ़ाया है जापान का जनांकिकी लाभांश 2004 में इटली का 2002 में खत्म हो चुका है। वहीं कोरिया का 2027 में स्पेन का 2024 में चीन का 2031 और ब्राजील का 2038 इसमें खत्म होगा।जबकि भारत का जनसांख्यिकी लाभ 2055 में खत्म होगा।
  2. बडी ताकत:-भारत के पास दुनिया की सर्वाधिक युवा आबादी है यूनाइटेड नेशंस पापुलेशन फंड की स्टेट ऑफ वर्ल्ड पापुलेशन रिपोर्ट के अनुसार 10 से 24 साल के आयु वर्ग में भारत पहले स्थान पर है।
  3. भारत की संपदा:- रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 से 24 आयु वर्ग की भारतीय आबादी में हिस्सेदारी 28 फीसद है यह देश की असली संपदा है इसके बूते ही देश आर्थिक कुलांचे भर सकेगा जरूरत सिर्फ इन युवाओं की बेहतर शिक्षा,स्वास्थ्य में निवेश करने की और उनके अधिकारों को संरक्षित किए जाने की है।
  4. ग्रामीण युवाओं की संख्या अधिक:- 51.73% ग्रामीण भारत की आबादी में 24 साल से कम आयु वालों की हिस्सेदारी जबकि 45.9% शहरी भारत में 24 साल से कम की हिस्सेदारी। शहरों में तमाम सुविधाएं सहूलियत और ज्यादा जागरूकता के चलते प्रजनन दर कम हो रही है जबकि गांव में अभी ऐसा नहीं हो सका है।
  5. आश्रितों में कमी:-पहले कमाता एक था खाने वाले कई होते थे यह अनुपात धीरे-धीरे सुधार रहा है अब कार्यशील आबादी के ऊपर निर्भर बच्चों (0- 14)और बुजुर्गों (65- 100) का अनुपात घटकर 0.55 रह गया है।
  6. आर्थिक विकास में मददगार:-अर्न्स्ट एंड यंग और फिक्की के एक अध्ययन के अनुसार वर्तमान में भारत एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां पर वह अगले कई दशकों तक प्रचुर आर्थिक लाभ लेने की स्थिति में है। बड़ी आबादी और तेज वृद्धि दर ने एक ऐसा जनसांख्यिकी पिरामिड तैयार कर दिया है जिसका लाभ देश दुनिया को कई दशकों तक मिलता रहेगा
  7. विकसित देश होंगे हम:-चीन को 2015 से यह शाम की की खूबियों से मिलने वाला लाभ कम होता गया है वहीं भारत को 2040 तक इसका लाभ मिलने का अनुमान है कार्यशील आबादी का अनुपात उत्पादकता को बढ़ाने का मौका साबित हो सकता है घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो सकती है सेवाओं से मिलने वाला राजस्व कई गुना बढ़ सकता है और कार्यशील आबादी पर आश्रित बुजुर्गों और बच्चों का बोझ घटने से उनकी आय का ज्यादा हिस्सा अर्थव्यवस्था के सकारात्मक पक्षों में लगेगा।
  8. संसाधनों का बेहतर उपयोग:-भारत में संसाधनों के दोहन के लिए एक असीम जनसंख्या मौजूद है।
  9. बड़ा बाजार
  10. दूसरे देशों को भी उम्मीद
  11. विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी
  12. नए विचार नया आगाज

खामी[सम्पादन]

  1. कुशल बनाम अकुशल श्रम:- 93% भारतीय श्रम शक्ति असंगठित क्षेत्र में काम करती है।जिनका औपचारिक कौशल विकास तंत्र से दूर-दूर का नाता नहीं है मात्र 2.5% असंगठित श्रम शक्ति औपचारिक कौशल विकास कार्यक्रम से जुड़ पाती है इसी तरह संगठित क्षेत्र की 11% शक्ति औपचारिक औपचारिक स्तर पर कौशल विकास हो पाता है असंगठित क्षेत्र के में