सिविल सेवा मुख्य परीक्षा विषयवार अध्ययन/भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव

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विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum-WEF) द्वारा पहला सामाजिक गतिशीलता सूचकांक जारी किया गया है। इसमें शामिल 82 देशों में भारत 76वें स्थान (42.7 के स्कोर के साथ) पर है। 85.2 के सामाजिक गतिशीलता स्कोर के साथ डेनमार्क जारी सूचकांक में शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद क्रमशः फिनलैंड (83.6), नॉर्वे (83.6), स्वीडन (83.5) और आइसलैंड (82.7) है। जी 7 अर्थव्यवस्थाओं में, जर्मनी सबसे बेहतर स्थिति के साथ 11 वें स्थान पर, फ्रांस 12 वें स्थान पर, जापान 15वें, यूनाइटेड किंगडम 21वें, संयुक्त राज्य अमेरिका 27वें और इटली 34वें और कनाडा 14 वें स्थान पर है ।

ब्रिक्स देशों में रूस 39वें स्थान पर, चीन 45वें स्थान पर ब्राजील 60वें, भारत 76वें और दक्षिण अफ्रीका 77वें स्थान पर है।

भारत के संदर्भ में:-सूचकांक के अनुसार, भारत में एक गरीब परिवार के सदस्य को औसत आय प्राप्त करने में अभी भी सात पीढ़ियों का समय लगेगा। पूर्ण गरीबी में रहने वाले लोगों के प्रतिशत में उल्लेखनीय कमी होने के बावजूद, भारत के लिये अपनी आबादी को अधिक समान रूप से समान अवसर प्रदान करने के लिये सुधार के कई क्षेत्र हैं जिन्हें विभिन्न स्तंभों में दर्शाया गया हैं- सामाजिक गतिशीलता सूचकांक के उपर्युक्त 10 स्तंभों पर भारत की स्थिति:

  1. पैरामीटर रैंक (82 देशों में से)
  2. स्वास्थ्य 73
  3. शिक्षा तक पहुँच 66
  4. शिक्षा में गुणवत्ता और समानता 77
  5. उम्र भर सीखना 41
  6. प्रौद्योगिकी तक पहुँच 73
  7. कार्य का अवसर 75
  8. उचित वेतन वितरण 79
  9. काम करने की स्थिति 53
  10. सामाजिक सुरक्षा 76
  11. समावेशी संस्थान 67

सामाजिक गतिशीलता को किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थितियों में परिवर्तन (की अपने माता-पिता की तुलना में) के रूप में समझा जा सकता है अर्थात् व्यक्ति की परिस्थितियाँ उसके माता-पिता की परिस्थितियों की तुलना में ‘उच्च स्तर’ (Upward) की हैं या उससे ‘निम्न स्तर’ (Downward) की हैं। कुल मिलाकर यह एक बच्चे के लिये अपने माता-पिता की तुलना में बेहतर जीवन का अनुभव करने की क्षमता है। जबकि सापेक्ष सामाजिक गतिशीलता किसी व्यक्ति के जीवन में मिलने वाले परिणामों पर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रभाव का आकलन है। सामाजिक संरक्षण और समावेशी संस्थान (Social Protection and Inclusive Institutions) अतः सामाजिक असमानता की अवधारणा आय असमानता की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है जो अपने आप में कई अवधारणाओं एवं चिंताओं को समाहित करती है, जैसे- अंतरा: क्रियात्मक गतिशीलता (Intragenerational Mobility)- किसी व्यक्ति के अपने जीवनकाल के दौरान स्वयं को सामाजिक-आर्थिक वर्गों के बीच स्थानांतरित करने की क्षमता। अंतःक्रियात्मक गतिशीलता (Intergenerational Mobility)- एक या अधिक पीढ़ियों की अवधि के दौरान सामाजिक-आर्थिक उतार-चढ़ाव को ऊपर या नीचे करने के लिये एक पारिवारिक समूह की क्षमता। पूर्ण आय गतिशीलता (Absolute Income Mobility)- किसी व्यक्ति की अपने जीवन के दौरान अपने माता-पिता की तुलना में अधिक या वास्तविक आय अर्जित करने की क्षमता। पूर्ण शैक्षिक गतिशीलता (Absolute Educational Mobility)- किसी व्यक्ति के लिये अपने माता-पिता की तुलना में उच्च शिक्षा स्तर प्राप्त करने की क्षमता। सापेक्ष आय गतिशीलता (Relative Income Mobility)- किसी व्यक्ति की आय का कितना हिस्सा उनके माता-पिता की आय से निर्धारित होता है। सापेक्ष शैक्षिक गतिशीलता (Relative Educational Mobility)- किसी व्यक्ति की शिक्षा प्राप्ति का कितना हिस्सा उनके माता-पिता की शैक्षिक प्राप्ति से निर्धारित होता है। सूचकांक की आवश्यकता : तेज़ी से वैश्विक विकास के बावजूद दुनिया भर में असमानताएँ बढ़ रही हैं। असमानता के बढ़ने से न केवल बड़े पैमाने पर सामाजिक अशांति पैदा हुई है, बल्कि इस तरह की आर्थिक नीतियों पर वैश्विक सहमति भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई है जिसके चलते पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में व्यापार संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है। अतः अधिक-से-अधिक व्यापार संरक्षणवाद, घरेलू श्रमिकों का डर और आशंकाओं को दूर करने में यह सूचकांक मददगार साबित होगा। महत्त्व: सामाजिक गतिशीलता का महत्त्व हमारे लिये तब ओर बढ़ जाता है जब यह पता लगाना हो कि शीर्ष पर स्थित लोगों तक पहुँचने के लिये निचले भाग पर स्थित लोगों को कितना समय लगेगा अर्थात् यह कितने समय बाद जो किसी व्यक्ति के लिये एक निश्चित अवधि में ऊपर ले जाने तथा सामाजिक गतिशीलता के लिये आवश्यक होंगे। जैसे भारत में निम्न-आय वाले परिवार में जन्म लेने वाले लोगों के लिये यह सात पीढ़ियों तक का समय लेगा जबकि डेनमार्क में केवल दो पीढ़ियों का समय लगेगा। देश एक गरीब परिवार के सदस्य के लिये आवश्यक आय स्तर को प्राप्त करने हेतु आवश्यक पीढ़ियों की संख्या डेनमार्क 2 यूनाइटेड स्टेट्स / यूनाइटेड किंगडम 5 जर्मनी/फ़्रांस 6 भारत/चीन 7 ब्राज़ील/दक्षिण अफ्रीका 9 सूचकांक में सापेक्ष सामाजिक गतिशीलता के उच्च स्तर वाले देश, जैसे- फिनलैंड, नॉर्वे या डेनमार्क आय असमानता के निचले स्तर को प्रदर्शित करते हैं। कम सापेक्ष सामाजिक गतिशीलता वाले देश, जैसे- भारत, दक्षिण अफ्रीका या ब्राजील भी आर्थिक असमानता के उच्च स्तर का प्रदर्शन करते हैं। इसलिये यह भारत जैसे देश की सामाजिक गतिशीलता बढ़ाने के लिये महत्त्वपूर्ण है। आगे की राह : सूचकांक बताता है कि सरकारों को सभी नागरिकों के लिये सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना सभी के लिये समान भूमिका निभानी चाहिये जिसमें निम्नलिखित सुझावों को शामिल किया जा सकता है-

सामाजिक गतिशीलता के लिये एक नया वित्तपोषण मॉडल विकसित करना जो व्यक्तिगत आय पर कर प्रगति में सुधार, धन के संचयन को संबोधित करने वाली नीतियाँ और कराधान के स्रोतों को व्यापक रूप से संतुलित करे। एक व्यक्ति के कार्यशील जीवन में कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास करना। एक नया सामाजिक सुरक्षा अनुबंध विकसित करना जो सभी श्रमिकों को उनके रोज़गार की स्थिति की परवाह किये बिना समग्र सुरक्षा प्रदान करे।