सिविल सेवा मुख्य परीक्षा विषयवार अध्ययन/मानव संसाधनों से संबंधित विषय

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शिक्षा[सम्पादन]

मिड डे मील कार्यक्रम एक बहुद्देशीय कार्यक्रम है तथा यह राष्ट्र की भावी पीढी के पोषण एवं विकास से जुड़ा हुआ है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं- प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण को बढ़ावा देना। विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में वृद्धि तथा छात्रों को स्कूल में आने के लिये प्रोत्साहित करना। स्कूल ड्राप-आउट को रोकना। बच्चों की पोषण संबंधी स्थिति में वृद्धि तथा सीखने के स्तर को बढ़ावा देना।

ई-पाठशाला (e-Pathshala), दीक्षा (DIKSHA), स्वयं (SWAYAM), स्वयं प्रभा (SWAYAM PRABHA) ये सभी मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) द्वारा स्कूलों और कॉलेजों/संस्थानों में शिक्षण के मानकों को बढ़ाने के लिये शुरू की गई पहलें हैं।

  • ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड-मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिये शुरुआत किया गया एक पहल।
  • इसका उल्लेख सबसे पहले 2018-19 के बजट में किया गया था। इसका लक्ष्य हर कक्षा में डिजिटल और इंटरेक्टिव बोर्ड स्थापित करना है। इसको 1987 के ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड की तर्ज़ पर ही लागू किया जा रहा है जिसका उद्देश्य देश के सभी प्राथमिक स्कूलों में महत्त्वपूर्ण सुविधाओं की आपूर्ति करना था।
  • शिक्षा में निवेश, कार्य स्थल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, प्रवसन और सूचना मानव पूंजी निर्माण के स्रोत हैं।
  • इसपर कार्ययोजना तैयार करने के लिये प्रोफेसर झुनझुनवाला के नेतृत्व में समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पहल को आगे बढ़ाया गया है।
  • सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में डिजिटल/स्मार्ट बोर्ड लगाए जाएंगे, जिसमें माध्यमिक और सीनियर सेकेंडरी कक्षाएँ शामिल होंगी।
  • राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से लगभग 1.5 लाख माध्यमिक/सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को इस योजना के तहत शामिल किया जाएगा।

स्वास्ध्य[सम्पादन]

विश्व स्वास्थ्य संगठन,यूनिसेफ (UNICEF) और कज़ाखस्तान सरकार ने कज़ाखस्तान के अस्ताना (Astana) शहर में 25-26 अक्तूबर 2018 के दिन, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर वैश्विक सम्मेलन की सह-मेज़बानी की। इस सम्मेलन में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मज़बूत करने और वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज़ हासिल करने का वादा किया गया। यह सम्मेलन ऐतिहासिक अल्मा-एटा घोषणा की 40वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष में आयोजित किया गया जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage-UHC) तथा एसडीजी 3: अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण को प्राप्त करने के लिये दुनिया भर में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल देता है। UHC का अर्थ है कि जो लोग हाशिये पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उन सभी की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच होनी चाहिये, ताकि उनके जीवन को बिना किसी वित्तीय कठिनाई के आसान बनाया जा सके।[१]

23 सितबंर, 2018 को रांची, झारखंड में विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत की गई थी। इसमें कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों सहित 1300 बीमारियों को शामिल किया गया है। निजी अस्पताल भी इस योजना का हिस्सा होंगे। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को हर वर्ष 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा जिसमें सभी प्रकार की जाँच, दवा, अस्पताल में भर्ती का खर्च आदि भी शामिल हों

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तंबाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन (FCTC) के अंतर्गत वर्ष 2008 में एमपॉवर (MPOWER)(छः लागत प्रभावी और उच्च प्रभाव उपायों का एक समुच्चय है।)उपायों की शुरुआत की।

WHO-FCTC, विश्व स्वास्थ्य संगठन के तत्त्वावधान में पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है।[२] इसे विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा 21 मई, 2003 को अपनाया गया और 27 फरवरी, 2005 से लागू हुआ।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 2014 में भारत को पोलियों मुक्त देश घोषित किया गया, जबकि भारत चेचक रोग से 1980 में मुक्त हो गया था।
  • कैंसर अर्थात् शरीर के भीतर कुछ कोशिकाओं का अनियंत्रित होकर बढ़ना।

अनुपचारित कैंसर आसपास के सामान्य ऊतकों या शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है तथा इसके कारण बहुत से गंभीर रोग, विकलांगता यहाँ तक की मृत्यु भी हो सकती है। कारण

  1. शारीरिक कैंसरकारी तत्त्व जैसे कि पराबैंगनी और आयनीकरण करने वाली विकिरण।
  2. रासायनिक कैंसरकारी तत्त्व जैसे - ऐस्बेस्टस, तंबाकू, एफ्लोटॉक्सिन (दूषित आहार) और आर्सेनिक (दूषित पेयजल)।
  3. जैविक कैंसरकारी तत्त्व जैसे - कुछ वायरस, बैक्टीरिया या हेपेटाइटिस बी और सी वायरस तथा मानव पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) जैसे- परजीवियों से होने वाला संक्रमण।
  4. कैंसर के विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कारक वृद्धावस्था है।
  5. तंबाकू और अल्कोहल का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार एवं शारीरिक निष्क्रियता ।

विश्व कैंसर दिवस की स्थापना 4 फरवरी, 2000 को पेरिस में न्यू मिलेनियम हेतु कैंसर के खिलाफ विश्व सम्मेलन में पेरिस चार्टर द्वारा की गई थी। वर्ष 2019 में तीन वर्षों, 2019-21 के लिये #IAmAndIWill अभियान की शुरुआत की गई है।

  1. IAMANDIWILL व्यक्तिगत प्रतिबद्धता हेतु एक सशक्त कॉल-टू-एक्शन आग्रह है जो भविष्य को प्रभावित करने के लिये यथाशीघ्र की जाने वाले कार्रवाई को इंगित करता है।

विश्व स्वास्थ्य सगठन के अनुसार, कैंसर की वज़ह से एक मिनट में 17 लोगों की मौत हो जाती है।

मानव विकास सूचकांक 2019[सम्पादन]

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम(UNDP) द्वार जारी।
  • भारत 189 देशों की सूची में भारत 129वें स्थान पर है।स्थिति में एक स्थान का सुधार हुआ है,(2018 में भारत 130वें स्थान पर)
  • इस सूचकांक की वरीयता सूची में नार्वे, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जर्मनी शीर्ष स्थानों पर हैं।
  • सबसे निचले पायदान पर क्रमशः नाइजर, दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान, चाड और बुरुंडी हैं।
  • भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका 71वें स्थान पर और चीन 85वें स्थान पर हैं।
  • BRICS-B-79,49,129,85,113
  • वहीं भूटान 134वें, बांग्लादेश 135वें, म्याँमार 145वें, नेपाल 147वें, पाकिस्तान 152वें और अफगानिस्तान 170वें स्थान पर हैं।
  • दक्षिण एशिया वर्ष 1990 से 2018 के बीच विश्व में सबसे तेज़ गति से विकास करने वाला क्षेत्र है।
  • इस अवधि में मानव विकास सूचकांक के संदर्भ में दक्षिण एशिया में 46% की वृद्धि दर्ज की गई।वहीँ पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 43% की वृद्धि हुई।
  • भारत के HDI वैल्यू में 50% तक की वृद्धि हुई है. वर्ष 1990 में जहाँ यह मूल्य .431 था वहीँ वर्ष 2018 में .647 है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक असमानता सूचकांक में 162 देशों की सूची में भारत 122वें स्थान पर है, वहीं पड़ोसी देश चीन (39) श्रीलंका (86) भूटान (99) और म्यांमार (106) भारत से बेहतर स्थिति में हैं।

इस सूची में नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और आयरलैंड शीर्ष पर हैं।

  • यह सूचकांक महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, सशक्तीकरण, आर्थिक सक्रियता पर आधारित है।
  • भारत में जन्म के समय पुरुषों की जीवन प्रत्याशा जहाँ 68.2 वर्ष थी वहीं महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 70.7 वर्ष दर्ज की गई है।
  • भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों की संख्या 12.3 वर्ष आँकी गई है।
  • भारत में स्कूली शिक्षा के औसत वर्षों की संख्या 6.5 वर्ष बताई गई है।

मानव विकास के प्रश्न घटना चक्र[सम्पादन]

  • भारतीय सामाजिक संरचना के मुख्य लक्षण हैं-ग्रमों में अधिक जनसंख्या,विभिन्न धर्म,विभिन्न जातियां, जबकि निर्धनता देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना को प्रदर्शित करता है।
  • मानव विकास सूचकांक का विकास वर्ष 1990 में UNDP से संबद्ध पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डॉ महबूब-उल- हक के द्वारा किया गया था।वर्ष 2010 से HDI की गणना हेतु नई प्रविधि का प्रयोग किया जा रहा है।जिसके अंतर्गत तीन प्रतिमानों को शामिल किया जाता है:-
  1. जीवन प्रत्याश सूचकांक(अधिकतम 85वर्ष और न्यूनतम 20 वर्ष)
  2. शिक्षा सूचकांक-यह दो नए आंकड़ों पर आधारित है:(2010 में शामिल किया गया)।
  3. १.स्कूल अवधि के औसत वर्ष २.स्कूल आवधि के अनुमानित वर्ष
  4. जीवन का स्तर(आय सूचकांक)-
  • उल्लेखनीय है कि पहले जीवन स्तर का आकलन प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद(PPP डॉलर पर आधारित)द्वारा किया जाता था,परंतु बाद में इसे डॉलर पर आधारित प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय(GNI) से प्रतिस्थापित कर दिया गया।
  • UNDP ने सर्वप्रथम वर्ष 1997 में मानव विकास रिपोर्ट में मानव निर्धनता सूचकांक प्रस्तुत किया था।

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. https://www.who.int/world-health-day/hi/world-health-day-2019/fact-sheets/details/universal-health-coverage-(uhc)
  2. https://www.who.int/tobacco/mpower/en/