हिंदी उपन्यास/जैनेन्द्र

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परिचय- जैनेन्द्र हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार उपन्यासकार तथा निबंधकार थे । ये हिंदी उपन्यास के इतिहास में मनोविश्लेषणात्मक परम्परा के प्रवर्तक के रूप में मान्य है । जैनेन्द्र अपने पात्रों की सामान्यगति में सूक्ष्म संकेतों की निहिति की खोज करके बड़े कौशल में प्रस्तुत करते हैं । उनके पात्रों की चारित्रिक विशेषताएं इसी कारण से संयुक्त होकर उभरती हैं । जैनेन्द्र कुमार का जन्म 2 फरवरी 1905 ई. को कौडियागंज , जिला अलीगढ़ उत्तरप्रदेश में हुआ।

साहित्यिक परिचय[सम्पादन]

लेखक के रूप में हिंदी जगत को जैनेन्द्र ने उल्लेखनीय योगदान दिया है । ‘ फांसी ' इनका पहला कहानी संग्रह था , जिसने इनको प्रसिद्ध कहानीकार बना दिया । सन् 1929 में ' परख ' उपन्यास से इनकी पहचान बनी । ' सुनीता ' का प्रकाशन 1935 में हुआ । ' त्यागपत्र ' 1937 और ' कल्याणी ' 1939 में प्रकाशित हुए । 1929 में पहला कहानी संग्रह छपा । इसके बाद सन् 1930 में ' वातायन ' 1933 में ' नीलम देश की राजकन्या ' , 1934 में ' एक रात ' , 1935 में ' दो चिड़ियाँ ' , 1942 में ' पाजेब ' का प्रकाशन हुआ । वर्तमान समय में उनकी कहानियाँ सात भागों में उपलब्ध हैं ।

साहित्य जगत में योगदान और पुरस्कार[सम्पादन]

हिंदी साहित्य जगत को दिए अपने अमूल्य योगदान के लिए जैनेन्द्र को अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया ।

1. भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय ( प्रेम में भगवान , 1952 )
2. साहित्य अकादमी पुरस्कार ( मुक्तिबोच , 1965 )
3. हस्तीमल डालमिया पुरस्कार ( समय और हम , 1970 ) उत्तर प्रदेश राज्य सरकार
4. पद्मभूषण ( भारत सरकार , 1971 )
5. मानद की डी.लिट्.उपाधि ( दिल्ली विश्वविद्यालय , 1973 )
6. हिंदुस्तानी अकादमी पुरस्कार , इलाहाबाद ( परख , 1929 )
7. साहित्य अकादमी फैलोशिप ( 1974 )
8. भारत - भारती एवं तुलसी नैतिक पुरस्कार , उत्तरप्रदेश
9. हिंदी साहित्य सम्मेलन , प्रयाग ( साहित्य याचस्पति , 1973 )
10. भारतीय लेखक परिषद् की अध्यक्षता
11. हिंदी प्रादेशिक हिंदी साहित्य सम्मेलन का सभापति

जैनेन्द्र कुमार व्यक्तिवादी और मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार हैं । इन्होंने हिंदी उपन्यास को नया मोड़ दिया । अपने उपन्यासों के द्वारा नैतिकता के परम्परागत तथा प्रचलित चौखटे को तोड़ा । नये कथ्य और शिल्प को अपनाया । एक ओर व्यक्तिवादी दर्शन तथा दूसरी ओर आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित होकर अनेक उपन्यास लिखे यथा परख , सुनीता , त्यागपत्र , कल्याणी , सुखदा , विवर्त , व्यतीत आदि ।